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“कौन हैं सतीश गोलचा? जो बने दिल्ली के नए पुलिस कमिश्नर, CM पर हमले के एक दिन बाद बड़ा बदलाव”

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“कौन हैं सतीश गोलचा? जो बने दिल्ली के नए पुलिस कमिश्नर, CM पर हमले के एक दिन बाद बड़ा बदलाव”

Delhi Police Commissioner Satish Golcha: 1992 बैच के IPS अधिकारी सतीश गोलचा को दिल्ली पुलिस कमिश्नर बनाया गया है. सतीश गोलचा 1992 बैच के अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश (एजीएमयूटी) कैडर के आइपीएस अधिकारी है.

वो इससे पहले तिहाड़ जेल के महानिदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल चुके हैं. साथ ही वो दिल्ली पुलिस में विशेष आयुक्त इंटेलीजेंस भी रह चुके हैं.

सीएम पर हमले के एक दिन बाद पुलिस कमिश्नर बदले अभी एसबीके सिंह के पास दिल्ली पुलिस कमिश्नर का एडिशनल चार्ज था. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हुए हमले के एक दिन बाद SBK सिंह से दिल्ली पुलिस कमिश्नर का अतिरिक्त चार्ज ले लिया गया है. अब सतीश गोलचा को दिल्ली पुलिस का कमिश्नर बनाया गया है. अभी गोलचा तिहाड़ जेल के डीजी थे.

मात्र 21 दिन दिल्ली पुलिस कमिश्नर रहे एसबीके सिंह बताते चले कि SBK सिंह को 31 जुलाई को पुलिस कमिश्नर का एडिशनल चार्ज दिया गया था. अब उनसे महज 21 दिन के अंदर ये चार्ज वापस ले लिया गया है. और अब फुल टाइम कमिश्नर सतीश गोलचा को बना दिया गया है. इससे पहले बालाजी श्रीवास्तव को 2021 में दिल्ली पुलिस कमिश्नर का एडिशनल चार्ज दिया गया था. लेकिन उनसे महज 29 दिन में ये चार्ज वापस लेकर राकेश अस्थाना को फूल टाइम कमिश्नर बना दिया गया था.

दिल्ली दंगे के दौरान थे स्पेशल सीपी लॉ एंड आर्डर गोलचा दिल्ली पुलिस में जिले में डीसीपी, रेंज में संयुक्त आयुक्त और विशेष आयुक्त कानून व्यवस्था भी रह चुके हैं. उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है. दिल्ली दंगे के दौरान 2020 के वह स्पेशल सीपी लॉ एंड आर्डर थे. उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में भी पुलिस महानिदेशक के रूप में भी काम किया है.

आईपीएस सतीश गोलचा कौन हैं? बैच और कैडर: वे 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और AGMUT (अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम एवं केंद्र शासित प्रदेश) कैडर से संबंध रखते हैं. दिल्ली पुलिस में उन्होंने DCP, जॉइंट CP, और स्पेशल CP (Law and Order & Intelligence) जैसे उच्च पदों पर काम किया है.<

साल 2020 में हुए उत्तर पूर्व दिल्ली दंगों के दौरान वे Law and Order के स्पेशल CP रहे. उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में DGP की भूमिका भी निभाई है. 30 अप्रैल 2024 को पूर्व DG (Prisons), संजय बेनिवाल के रिटायरमेंट के बाद, उन्हें डीजी (Prisons), दिल्ली नियुक्त किया गया. अब दिल्ली पुलिस कमिश्नर बनाए गए.

“New GST Slab: खत्म होंगे 12 और 18% के GST स्लैब, लेकिन आपको कैसे मिलेगा इसका सीधा लाभ? जानें अपने फायदे की सारी डिटेल”

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“New GST Slab: खत्म होंगे 12 और 18% के GST स्लैब, लेकिन आपको कैसे मिलेगा इसका सीधा लाभ? जानें अपने फायदे की सारी डिटेल”

सरकार जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) प्रणाली को और सरल बनाने की तैयारी में है। हाल ही में एक मंत्रिसमूह की बैठक हुई, जिसमें केंद्र द्वारा प्रस्तावित जीएसटी स्लैब को उचित बनाने पर सहमति बनी।

इस बैठक में राज्यों के वित्त मंत्रियों ने मौजूदा चार स्लैब को घटाकर केवल दो स्लैब करने का समर्थन किया है। इसका मतलब है कि अब 12% और 28% के स्लैब समाप्त हो जाएँगे और केवल 5% और 18% के स्लैब ही रहेंगे।

अब केवल दो जीएसटी स्लैब बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता वाले इस छह सदस्यीय मंत्रिसमूह ने फैसला किया है कि जीएसटी दरों को केवल दो स्लैब में विभाजित किया जाएगा। 5% की दर से वस्तुएँ और आवश्यक वस्तुएँ लागू होंगी, जबकि अधिकांश मानक वस्तुओं और सेवाओं पर 18% कर लगेगा। इसके अलावा, विलासिता की वस्तुएँ 40% के स्लैब में होंगी।

इस फैसले के बाद, लगभग 99% वस्तुएँ जो पहले 12% की दर पर थीं, अब 5% के स्लैब में आ जाएँगी। वहीं, लगभग 90% वस्तुएँ जो पहले 28% के स्लैब में थीं, उन्हें 18% की दर पर रखा जाएगा। इससे कर प्रणाली और सरल और स्पष्ट हो जाएगी, जिसका लाभ आम जनता के साथ-साथ व्यापारियों को भी होगा।

आम जनता को मिलेगा लाभ इन सुधारों से आम लोगों को कई तरह से लाभ होगा। कर की गलत संरचना को ठीक करने से व्यापारियों के लिए टैक्स क्रेडिट जमा करने की समस्या कम होगी और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। कर नियमों के सरल होने से विवाद कम होंगे और अनुपालन आसान होगा। इससे उद्योगों को लंबे समय तक कर दरों की स्पष्टता मिलेगी, जिससे वे बेहतर योजना बना सकेंगे। कम कर दरों से चीजें सस्ती होंगी, जिससे लोग ज़्यादा खरीदारी करेंगे और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। खासकर आम आदमी, महिलाओं, छात्रों, मध्यम वर्ग और किसानों को फायदा होगा।

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग के लागू होने पर कितने लाख कर्मचारियों को मिलेगा इसका लाभ? छोटे व्यवसायों और स्टार्टअप्स के लिए पंजीकरण आसान होगा और पहले से भरे गए रिटर्न में गलतियाँ कम होंगी। निर्यातकों और ज़्यादा टैक्स क्रेडिट वालों को जल्दी रिफंड मिलेगा। इन सुधारों को जल्द ही लागू किया जाएगा, ताकि जीएसटी एक आसान, स्थिर और पारदर्शी कर प्रणाली बन सके। इससे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और व्यापार आसान होगा।

 ‘अब तक सभी छापे विपक्षी नेताओं पर.’, PM, CM को पद से हटाने वाले विधेयक पर जमकर फायर हुए चंद्रशेखर आजाद, किसे सुना डाला!”

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 ‘अब तक सभी छापे विपक्षी नेताओं पर.’, PM, CM को पद से हटाने वाले विधेयक पर जमकर फायर हुए चंद्रशेखर आजाद, किसे सुना डाला!”

आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के सांसद चंद्रशेखर ने गुरुवार को कहा कि गंभीर अपराधों के आरोप में 30 दिनों तक गिरफ़्तारी रहने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों या मंत्रियों को उनके पदों से हटाने का प्रावधान करने वाले तीन नए विधेयक पूरी तरह से ‘लोकतंत्र विरोधी’ हैं।

गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में गंभीर आरोपों में 30 दिनों तक लगातार गिरफ़्तारी रहने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को उनके पदों से हटाने से संबंधित तीन विधेयक पेश किए, जिसका विपक्षी सांसदों ने कड़ा विरोध किया और उन्होंने मसौदा कानून की प्रतियां भी फाड़ दीं। वे नारे लगाते हुए शाह के आसन के पास पहुँच गए।

CM Yogi के इलाके में अब मुसलमान नहीं कर सकते ये काम, लगाई गई ऐसी पाबंदी…शहनाई बजाना होगी मुश्किल ये चुनने वाली जनता का अपमान हैं नगीना से एमपी चंद्रशेखर रावण ने कहा, ‘ये विधेयक पूरी तरह से लोकतंत्र विरोधी, संविधान पर हमला और अपने प्रतिनिधियों को चुनने वाली जनता का अपमान करने वाला है।’

उन्होंने कहा, ‘जिस तरह से एजेंसियां ​​काम कर रही हैं, जिस तरह से वे विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं, ये विधेयक विपक्ष को निशाना बनाने के लिए लाए गए हैं।’ यह संविधान पर हमला है और हम संविधान पर किसी भी तरह का हमला बर्दाश्त नहीं करेंगे। इसलिए हम इसका विरोध कर रहे हैं।’

जब उनसे कहा गया कि भाजपा कह रही है कि उसके मंत्री भी इन विधेयकों के दायरे में आएंगे, तो चंद्रशेखर ने कहा, ‘क्या अब तक ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने भाजपा के किसी मंत्री पर छापा मारा है? ईडी के सभी छापे विपक्षी नेताओं पर पड़े हैं।’

लोकतंत्र की जगह निरंकुशता ले रही है-आज़ाद उन्होंने कहा, ‘ऐसे नेता हैं जिन्हें भ्रष्ट कहा जाता था, लेकिन भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें ‘उप-मुख्यमंत्री’ बना दिया गया। महाराष्ट्र, असम इसके उदाहरण हैं… बीएस येदियुरप्पा इसका उदाहरण हैं…’ चंद्रशेखर ने कहा, ‘लोग देख रहे हैं कि लोकतंत्र की जगह निरंकुशता ले रही है।’

गृह मंत्री द्वारा बुधवार को पेश किए गए और संसद की संयुक्त समिति को भेजे गए तीन विधेयक हैं: ‘संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025’, ‘केंद्र शासित प्रदेशों का शासन (संशोधन) विधेयक, 2025’ और ‘जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025’।

इन विधेयकों में प्रस्ताव है कि यदि प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री या सीएम को न्यूनतम पाँच वर्ष की कारावास की सजा वाले अपराधों के लिए लगातार 30 दिनों तक अरेस्ट और हिरासत में रखा जाता है, तो वे 31वें दिन अपना पद गँवा बैठेंगे।

“इस दिन से शुरू हो रहा पितृपक्ष, जानें क्या होता है काम्य श्राद्ध और इसे जुड़े महत्व और नियम?”

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“इस दिन से शुरू हो रहा पितृपक्ष, जानें क्या होता है काम्य श्राद्ध और इसे जुड़े महत्व और नियम?”

Pitrupaksha 2025: इस वर्ष पितृ पक्ष 7 सितंबर से शुरू हो रहा है, पहला श्राद्ध पूर्णिमा श्राद्ध है, इस दिन उन पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु पूर्णिमा तिथि को हुई थी।

इसके अलावा, श्राद्ध पक्ष का समापन सर्व पितृ अमावस्या को होता है। दरअसल, पूर्वज अपने परिजनों का तर्पण करने की इच्छा लेकर धरती पर आते हैं। जो लोग अपने पूर्वजों का श्राद्ध करते हैं, पूर्वज उनसे संतुष्ट होते हैं और उन्हें आशीर्वाद देते हैं। कहा जाता है कि श्राद्ध पक्ष में किए गए श्राद्ध से पूर्वज एक वर्ष तक संतुष्ट रहते हैं। यहां हम आपको काम्य श्राद्ध के बारे में बताएंगे।

काम्य श्राद्ध होता क्या है? काम्य श्राद्ध एक प्रकार का श्राद्ध है जो आप किसी मनोकामना की पूर्ति के लिए करते हैं। कहा जाता है कि अगर किसी मनोकामना की पूर्ति के लिए श्राद्ध किया जाए, जैसे संतान प्राप्ति, धन-समृद्धि या पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए, तो उसे काम्य श्राद्ध कहते हैं। किस श्राद्ध से क्या फल मिलता है, कौन सी मनोकामना पूरी होती है, यह आग्नेय पुराण में लिखा है।

Pitru Paksh में 100 साल बाद होगा ये अनोखा संयोग, चंद्र और सूर्य ग्रहण एक साथ, भूलकर भी ना करें ये काम अष्टमी को श्राद्ध करने से होती है धन की प्राप्ति आग्नेय पुराण के अनुसार प्रतिपदा को श्राद्ध करने वाले को धन की प्राप्ति होती है। द्वितीया को श्राद्ध करने से उत्तम स्त्री की प्राप्ति होती है। चतुर्थी को श्राद्ध करने से धर्म और कर्म की प्राप्ति होती है। पुत्र की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को पंचमी को श्राद्ध करना चाहिए। षष्ठी को श्राद्ध करने से मनुष्य महान बनता है। सप्तमी को श्राद्ध करने से कृषि में लाभ होता है और अष्टमी को श्राद्ध करने से धन की प्राप्ति होती है। नवमी को श्राद्ध करने से घोड़े आदि एक खुर वाले पशु प्राप्त होते हैं। दशमी को श्राद्ध करने से गौ समुदाय में समृद्धि आती है। एकादशी को श्राद्ध करने से कुल की वृद्धि होती है और द्वादशी को श्राद्ध करने से धन-धान्य की वृद्धि होती है। त्रयोदशी को श्राद्ध करने से कुल में श्रेष्ठता प्राप्त होती है। चतुर्दशी को शस्त्र से मारे गए व्यक्ति का श्राद्ध किया जाता है। अमावस्या को सभी मृत व्यक्तियों का श्राद्ध करने का विधान है।

Pitru Paksha 2025 : भूलकर भी ना करें पितृ पक्ष में ये काम…बरतनी पड़ेगी सावधानी नहीं तो भुगतने होंगे बुरे परिणाम!

इस आलेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है। पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। इन खबर इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है।

“पृथ्वी का आखिरी दिन? अपोफिस के टकराने पर सुनामी निगल जाएगी शहर, 1312 फीट ऊंची लहरें बनेंगी मौत का दरिया”

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“पृथ्वी का आखिरी दिन? अपोफिस के टकराने पर सुनामी निगल जाएगी शहर, 1312 फीट ऊंची लहरें बनेंगी मौत का दरिया”

क्षुद्रग्रह 99942, जिसे अपोफिस कहा जाता है, को लेकर वैज्ञानिकों ने साल 2004 में पहली बार चेतावनी दी थी। रिसर्च में सामने आया था कि यह विशालकाय स्पेस रॉक 2029 में पृथ्वी से टकरा सकता है।

इस खबर ने पूरी दुनिया को हिला दिया था। उस समय कई रिसर्च सेंटर और एजेंसियां लगातार इसकी रफ्तार का आकलन कर रही थीं। नासा समेत दुनिया के प्रमुख अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने इस पर ध्यान केंद्रित किया। आखिरकार, कई सालों की रिसर्च के बाद यह साफ हो गया कि कम से कम अगले 100 साल तक अपोफिस पृथ्वी से नहीं टकराएगा। हालांकि, यह साल 2029 में पृथ्वी के बेहद करीब से गुजरेगा। यह स्थिति भले ही टकराव का खतरा न हो, लेकिन लोगों को यह जरूर सोचने पर मजबूर कर देती है कि अगर यह क्षुद्रग्रह धरती से टकरा गया तो आखिर होगा क्या?

अपोफिस टकराए तो कितना बड़ा धमाका होगा? अपोफिस का आकार लगभग 1214 फुट लंबा यानी एक छोटे पहाड़ जितना है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगर यह पृथ्वी से टकराता है, तो इससे निकलने वाली ऊर्जा करीब 1,00,000 मेगाटन TNT के बराबर होगी। तुलना करें तो यह ताकत अब तक किए गए सबसे बड़े परमाणु परीक्षणों से भी हजारों गुना ज्यादा होगी। ऐसे धमाके से न सिर्फ स्थानीय क्षेत्र, बल्कि सैकड़ों किलोमीटर का इलाका तबाह हो जाएगा। आसपास की इमारतें पलभर में गिर जाएंगी और शहर खाक में बदल जाएंगे। टकराव के केंद्र से लेकर चारों ओर धूल, आग और जहरीली गैसें फैलेंगी। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह धमाका “डायनासोर के खत्म होने” जैसी आपदा को दोहरा सकता है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि अगर अपोफिस जैसी चट्टान टकराई, तो क्या पूरी धरती रहने लायक बचेगी? हालांकि, राहत की बात यह है कि अभी कम से कम 100 साल तक इंसान को इससे डरने की जरूरत नहीं है।

1000 फीट ऊंची सुनामी अगर अपोफिस जमीन पर गिरा, तो वैज्ञानिक मानते हैं कि यह लगभग 5 किलोमीटर गहरा और कई किलोमीटर चौड़ा गड्ढा बना देगा। इससे आसपास का इलाका पूरी तरह उजड़ जाएगा। वहीं, अगर यह क्षुद्रग्रह समुद्र में गिरता है, तो और भी डरावनी स्थिति बन सकती है। समुद्र में गिरते ही यह 1,312 फीट ऊंची सुनामी की लहरें पैदा करेगा। इतनी ऊंची लहरें पूरी-की-पूरी तटीय आबादी को बहा ले जाएंगी। यानी सिर्फ एक टकराव से कई देशों की किस्मत बदल सकती है। धरती पर लाखों लोग पलभर में लापता हो जाएंगे और अर्थव्यवस्था से लेकर पर्यावरण तक सबकुछ तबाह हो जाएगा।

वायुमंडल में टूटे तो क्या होगा? अब सवाल यह भी है कि अगर अपोफिस धरती से न टकराए और वायुमंडल में ही टूट जाए तो क्या होगा? वैज्ञानिकों का मानना है कि इस स्थिति में भी खतरा कम नहीं होगा। वायुमंडल में टूटने से एक भारी वायुविस्फोट होगा। यह विस्फोट इतना ताकतवर होगा कि सैकड़ों किलोमीटर के क्षेत्र में दबाव की लहरें और आग का गोला नजर आएगा। इससे खिड़कियां चटक जाएंगी, इमारतें हिल जाएंगी और बहुत बड़ा इलाका राख में बदल जाएगा। ऐसा ही एक छोटा उदाहरण 1908 का तुंगुस्का विस्फोट है, जिसने रूस के एक बड़े इलाके को तबाह कर दिया था, जबकि वह क्षुद्रग्रह अपोफिस से कई गुना छोटा था।

Modi ने Amit Shah और Rajnath Singh को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी, आने वाले दिनों में देश में दिखेंगे कई बड़े बदलाव”

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Modi ने Amit Shah और Rajnath Singh को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी, आने वाले दिनों में देश में दिखेंगे कई बड़े बदलाव”

भारत सरकार ने आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में व्यापक सुधारों की दिशा में दो नए अनौपचारिक मंत्रियों के समूह (iGoMs) का गठन किया है। इन समूहों का नेतृत्व केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे।

हम आपको बता दें कि इन समितियों का गठन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण के बाद हुआ है जिसमें उन्होंने “2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने” के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए 21वीं सदी के अनुरूप नए कानूनों, नीतियों और प्रक्रियाओं की आवश्यकता पर बल दिया था।

हम आपको बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता वाले 13 सदस्यीय समूह में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और रेलवे, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव (समूह के संयोजक) जैसे वरिष्ठ मंत्री सम्मिलित किये गये हैं। इस समूह का कार्यक्षेत्र वित्त, उद्योग, वाणिज्य, अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स, विज्ञान-प्रौद्योगिकी और सुशासन जैसे क्षेत्रों में विधायी और नीतिगत सुधारों की रूपरेखा तैयार करना होगा। इस मंत्री समूह का विशेष ध्यान अनुपालन भार कम करने, रोजगार सृजन, उत्पादकता वृद्धि और पुराने अवरोधक ढाँचों को हटाने पर होगा।

उपराष्ट्रपति चुनाव को राष्ट्रवाद बनाम धर्मनिरपेक्षता की सियासी लड़ाई बनाने के रणनीतिक मायने वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाला 18 सदस्यीय समूह शिक्षा, स्वास्थ्य, रक्षा, कौशल विकास, सामाजिक कल्याण, आवास, श्रम और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सुधारों की संभावना तलाशेगा। इस समिति में सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और श्रम एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया (समूह संयोजक) प्रमुख सदस्य हैं। यह समूह कानूनी सुधार, संस्थागत ढाँचे में सुधार और बहुस्तरीय (केंद्र, राज्य, नगरीय निकाय) सुधारों की सिफारिश करेगा।

बताया जा रहा है कि दोनों समूहों को हर महीने प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी और तीन महीने के भीतर एक समेकित सुधार रोडमैप सौंपना होगा। इन दोनों समूहों को वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों का विभाग सचिवालयीय सहयोग देगा। समूहों को विशेषज्ञों और अन्य मंत्रियों को आमंत्रित करने की स्वतंत्रता होगी। बताया जा रहा है कि इन मंत्री समूहों से केवल परामर्शात्मक भूमिका निभाने की अपेक्षा नहीं है, बल्कि कार्यान्वयन योग्य सुधार योजनाएँ तैयार करने और उनके मापन योग्य परिणाम तय करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।

देखा जाये तो पिछले कुछ वर्षों में गृहमंत्री अमित शाह की भूमिका केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रही है, बल्कि वह कई बार आर्थिक मामलों में भी निर्णायक भूमिका निभा चुके हैं। जीएसटी सुधार में राज्यों व केंद्र के बीच सहमति बनाने में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही है। मुद्रास्फीति और खाद्य पदार्थों की कीमतों पर बैठकों की अध्यक्षता भी उन्होंने की है। ऑनलाइन गेमिंग पर प्रतिबंध संबंधी विधेयक तैयार करने में भी गृह मंत्रालय को प्रमुख शक्ति के रूप में देखा गया, जबकि आईटी मंत्रालय ने इसका प्रारूप तैयार किया था।

हम आपको बता दें कि इन समितियों की संरचना इस बात को दर्शाती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी निर्णय लेने में तेजी और बाधाओं को दूर करने को प्राथमिकता देना चाहते हैं। विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिनिधियों को जोड़कर यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है कि सुधार प्रस्ताव नीति-निर्धारण से सीधे क्रियान्वयन तक शीघ्र पहुँचें।

बहरहाल, इसमें कोई दो राय नहीं कि भारत की वर्तमान प्रशासनिक एवं आर्थिक संरचना में कई पुरानी नीतियाँ और नियम आज की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं हैं। इन नए iGoMs का उद्देश्य न केवल सुधार सुझाना है बल्कि “कार्यान्वित करने योग्य बदलाव” प्रस्तुत करना भी है। यह कदम शासन तंत्र को अधिक उत्तरदायी, पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयोग है। यदि मंत्री समूह व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करते हैं, तो यह भारत के विकसित राष्ट्र 2047 के लक्ष्य की दिशा में एक ठोस कदम सिद्ध होगा।

“उपराष्ट्रपति पद के लिए बी. सुदर्शन रेड्डी ने दाखिल किया नामांकन, मौजूद रहे INDIA Bloc के बड़े नेता”

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“उपराष्ट्रपति पद के लिए बी. सुदर्शन रेड्डी ने दाखिल किया नामांकन, मौजूद रहे INDIA Bloc के बड़े नेता”

उपराष्ट्रपति पद के लिए इंडिया ब्लॉक के उम्मीदवार और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी सुदर्शन रेड्डी ने गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित वरिष्ठ विपक्षी नेताओं की उपस्थिति में अपना नामांकन दाखिल किया।

एनसीपी-एससीपी प्रमुख शरद पवार, सपा सांसद राम गोपाल यादव, डीएमके सांसद तिरुचि शिवा, शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत और अन्य इंडिया ब्लॉक नेता भी उपस्थित थे।

दीपावली और छठ पर यात्रियों को बड़ी सौगात, चलेंगी 12 हजार स्पेशल ट्रेनें, रेल मंत्री का ऐलान उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव 9 सितंबर को होना है और उसी दिन मतगणना भी होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 21 अगस्त है, जबकि उम्मीदवार 25 अगस्त तक अपना नाम वापस ले सकते हैं। यह पद जगदीप धनखड़ के स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए 21 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन पद छोड़ने के बाद रिक्त हुआ था। उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्यों वाले एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है।

विश्वास है कि वह एक उत्कृष्ट उपराष्ट्रपति होंगे… सीपी राधाकृष्णन के नामांकन पर बोले PM Modi वहीं, उपराष्ट्रपति पद के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उम्मीदवार सी. पी. राधाकृष्णन ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और अन्य वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया।

नामांकन पत्र दाखिल करने गए राधाकृष्णन के साथ राजग के वरिष्ठ नेता और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री ने राज्यसभा महासचिव पी. सी. मोदी को नामांकन पत्रों के चार सेट सौंपे, जो उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए निर्वाचन अधिकारी हैं। नामांकन पत्रों के चार सेट में मोदी, सिंह, शाह और जनता दल (यूनाइटेड) नेता राजीव रंजन सिंह मुख्य प्रस्तावक हैं।

“राज्यसभा में पेश हुआ गिरफ्तार PM-CM को हटाने वाला बिल, संयुक्त समिति को भेजने का प्रस्ताव पारित”

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“राज्यसभा में पेश हुआ गिरफ्तार PM-CM को हटाने वाला बिल, संयुक्त समिति को भेजने का प्रस्ताव पारित”

राज्यसभा ने गुरुवार को संविधान (एक सौ तीसवाँ संशोधन) विधेयक, 2025, केंद्र शासित प्रदेशों की सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025 और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 को एक संयुक्त समिति को भेजने पर सहमति व्यक्त की, जिसमें 21 लोकसभा सदस्य और 10 राज्यसभा सदस्य शामिल होंगे, जिन्हें क्रमशः अध्यक्ष और उपसभापति द्वारा नामित किया जाएगा।

समिति को संसद के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।

उपराष्ट्रपति पद के लिए बी. सुदर्शन रेड्डी ने दाखिल किया नामांकन, मौजूद रहे INDIA Bloc के बड़े नेता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष की लगातार नारेबाजी और हंगामे के बीच उच्च सदन में प्रस्ताव रखा कि तीनों विधेयकों को एक संयुक्त समिति को भेजा जाए। प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इससे पहले, गृह मंत्री अमित शाह ने भारत के संविधान में और संशोधन करने के लिए संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक, 2025 और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 में संशोधन करने वाले विधेयक के अलावा केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025 को लोकसभा में पेश किया था।

संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025, भ्रष्टाचार या गंभीर अपराधों के आरोपों का सामना कर रहे और कम से कम 30 दिनों तक हिरासत में रहे किसी केंद्रीय या राज्य मंत्री को पद से हटाने का प्रावधान करता है। केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में यह विधेयक पेश किया। जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025, जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 54 में संशोधन करने का प्रस्ताव करता है ताकि गंभीर आपराधिक आरोपों के कारण गिरफ्तारी या हिरासत में लिए जाने की स्थिति में मुख्यमंत्री या मंत्री को पद से हटाने के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान किया जा सके।

सरकारी संपत्ति तोड़ने का अधिकार नहीं, निर्णायक कार्रवाई करनी पड़ेगी, विपक्ष को ओम बिरला की चेतावनी विपक्षी नेताओं ने विधेयक में प्रस्तावित संशोधनों को “कठोर” और “असंवैधानिक” करार दिया है। विपक्षी सांसदों ने लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर तीनों विधेयकों की प्रतियां फाड़कर फेंकी। इन विधेयकों में भ्रष्टाचार या गंभीर अपराधों के आरोपों का सामना कर रहे और लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रहे प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्रियों को पद से हटाने का प्रावधान है।

”लोकसभा और राज्यसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, हंगामे की भेंट चढ़ा गया मानसून सत्र”

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”लोकसभा और राज्यसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, हंगामे की भेंट चढ़ा गया मानसून सत्र”

संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही गुरुवार को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई, जिसके साथ ही संसद का 21 दिवसीय मानसून सत्र समाप्त हो गया। अंतिम दिन भी कई बार कार्यवाही स्थगित हुई और विपक्षी दलों ने बिहार एसआईआर और कथित वोट चोरी के खिलाफ अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा।

शुरूआच से ही यह संत्र हंगामेदार रहा। पहले दिन से ही इस एसआईआर को लेकर विपक्ष ने जबरदस्त हंगामा शुरू किया जो आखिरी दिन तक भी जारी रहा। दोनों सदनों की कार्यवाही लगातार बाधित होती रही। हालांकि, ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान दोनों सदनों में हंगामा कम देखने को मिला।

लोकसभा की कार्यवाही लोकसभा की बैठक बृहस्पतिवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई जिसमें 12 विधेयकों को बिना चर्चा के या संक्षिप्त चर्चा के साथ पारित किया गया। लोकसभा अध्यक्ष ने मानसून सत्र में कार्यवाही में गतिरोध बनाए रखने पर विपक्षी दलों के प्रति निराशा प्रकट करते हुए कहा कि नियोजित तरीके से सदन के कामकाज में व्यवधान पैदा किया गया जो लोकतंत्र और सदन की मर्यादा के अनुरूप नहीं है। अठारहवीं लोकसभा के पांचवें सत्र की शुरुआत 21 जुलाई को हुई थी जिसमें 14 सरकारी विधेयक पेश किए गए और 12 विधेयक पारित किए गए।

इनमें अनुसूचित जनजातियों के विधानसभा क्षेत्रों के पुनर्समायोजन से संबंधित गोवा विधेयक2025, मर्चेंट शिपिंग विधेयक 2025, मणिपुर वस्तु एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2025, मणिपुर विनियोग (संख्या 2) विधेयक 2025, राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक 2025 और राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग (संशोधन) विधेयक 2025शामिल हैं। इनके अलावा आयकर विधेयक 2025, कराधान कानून (संशोधन) विधेयक 2025, भारतीय बंदरगाह विधेयक 2025, खनिज और खनिज विकास (विनियमन और संशोधन) विधेयक 2025, भारतीय प्रबंधन संस्थान (संशोधन) विधेयक 2025 और ऑनलाइन खेल संवर्धन और विनियमन विधेयक, 2025 भी हंगामे के बीच लोकसभा में पारित किए गए।

लोकसभा ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार किए जाने और लगातार 30 दिन तक हिरासत में रहने पर पद से हटाए जाने के प्रावधान वाले ‘संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025’, ‘संघ राज्य क्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक, 2025’ और ‘जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025’ को संसद की संयुक्त समिति को भेजने का निर्णय लिया। सदन में 28 और 29 जुलाई को ऑपरेशन सिंदूर पर विशेष चर्चा बिना किसी व्यवधान के पूरी हुई जिसका जवाब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिया।

राज्यसभा की कार्यवाही राज्यसभा का 268वां सत्र बृहस्पतिवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया और सत्र के दौरान जहां बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन परीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर चर्चा को लेकर विपक्ष के भारी हंगामे के कारण लगातार गतिरोध बना रहा, वहीं हंगामे के बीच कई महत्वपूर्ण विधेयकों को संक्षिप्त चर्चा के बाद पारित करवाया गया।

सत्र के दौरान मात्र 38 प्रतिशत ही कामकाज हो पाया। उपसभापति हरिवंश ने सत्र के अंत में अपनी टिप्पणी में कहा कि हंगामे के कारण सदन में केवल 41 घंटे 15 मिनट कामकाज हो पाया और सदन का कामकाज केवल 38.88 प्रतिशत रहा जो बहुत निराशाजनक है। सत्र के पहले ही दिन निवर्तमान उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने देर शाम स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति को सौंप दिया था, जिसे बाद में स्वीकार कर लिया गया।

पूरे सत्र के दौरान एसआईआर के मुद्दे पर विपक्ष के लगातार हंगामे और आसन के समक्ष आकर नारेबाजी करने के कारण एक भी दिन शून्यकाल एवं प्रश्नकाल सामान्य ढंग से नहीं चल पाये। साथ ही इस दौरान कोई गैर सरकारी कामकाज नहीं हुआ।

अमित शाह ने लोकसभा में पेश किया गिरफ्तार PM-CM को हटाने वाला बिल, विपक्ष ने जमकर किया विरोध संसद ने बृहस्पतिवार को ऑनलाइन गेमिंग को विनियमित करने एवं शैक्षणिक और सामाजिक ऑनलाइन खेलों को बढ़ावा देने वाले एक महत्वपूर्ण विधेयक को मंजूरी दे दी तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि समाज में एक बहुत बड़ी बुराई आ रही है जिससे बचने के लिए इस विधेयक को लाया गया है।

”विदेशी निवेशकों के लिए भारत बना सबसे पसंदीदा मार्केट”

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”विदेशी निवेशकों के लिए भारत बना सबसे पसंदीदा मार्केट”

नई दिल्ली: विदेशी निवेशक इस साल अब तक भारतीय शेयर बाजार से लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। इसकी वजह भू-राजनीतिक तनाव, भारतीय कंपनियों के कमजोर कमाई और टैरिफ वॉर है। अब भारत उभरते बाजारों में निवेशकों के लिए सबसे कम पसंदीदा बाजार रह गया है।

नोमुरा के एक विश्लेषण के अनुसार जुलाई में उभरते बाजारों के निवेशकों ने भारत में अपना निवेश कम कर दिया। वहीं, हांगकांग/चीन और कोरिया में निवेश बढ़ा दिया।नोमुरा ने एक नोट में कहा, ‘जुलाई 2025 के अंत तक उभरते बाजारों के फंड्स ने भारत में अपना निवेश 1.0% तक घटा दिया। हमारे नमूने में शामिल 45 में से 41 फंडों ने भारत में कम निवेश किया। इसके विपरीत, हांगकांग/चीन और कोरिया में निवेश क्रमशः 0.8%, 0.7% और 0.4% बढ़ गया। हांगकांग और चीन के मामले में हमारे नमूने में शामिल 45 में से 37 फंड्स ने जुलाई में अपना निवेश बढ़ाया। वहीं, कोरिया में 29 फंड्स ने निवेश बढ़ाया।’

चीन वर्सेज इंडिया नोमुरा ने पाया कि लगभग 71% उभरते बाजार फंड्स ने जुलाई के अंत तक भारत में कम निवेश किया है। पहले यह आंकड़ा 60% था। अब भारत, उभरते बाजारों में निवेशकों के लिए सबसे कम पसंदीदा बाजार बन गया है। नोमुरा ने कहा, ‘एमर्जिंग मार्केट फंड्स के प्रदर्शन के मामले में जुलाई ज्यादातर फंड मैनेजर्स के लिए एक चुनौतीपूर्ण महीना रहा। जुलाई में केवल 7 फंड्स (45 में से) बेंचमार्क (MSCI EM Index) से बेहतर प्रदर्शन कर पाए। हालांकि, महीने की शुरुआत से अब तक, ज्यादातर फंड (35) बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। सितंबर 2024 में जब चीन के शेयर अप्रत्याशित रूप से बढ़े थे तब केवल 10 फंड्स ही बेहतर प्रदर्शन कर पाए थे।’

इस महीने की शुरुआत में वैश्विक ब्रोकरेज BofA सिक्योरिटीज ने कहा था कि भारत उभरते बाजारों की सूची में सबसे नीचे आ गया है। जापान और चीन सबसे आगे हैं। BofA ने कहा, ‘कॉर्पोरेट सुधार, करेंसी और कमाई जापान के शेयरों के लिए महत्वपूर्ण हैं। निवेशकों को उम्मीद है कि अगले साल मार्च से पहले ब्याज दरें बढ़ेंगी। ताइवान और कोरिया दोनों को AI चक्र से फायदा हो रहा है। कोरिया को नई सरकार की नीतियों से भी उम्मीदें हैं। दूसरी ओर, भारत पर राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा 50% टैरिफ लगाने की घोषणा का असर पड़ा है।’

सतर्क रुख पिछले 1 साल में सेंसेक्स और निफ्टी 2% से भी कम बढ़े हैं। FIIs अगस्त में भी भारतीय शेयरों के शुद्ध विक्रेता बने हुए हैं। उन्होंने महीने में अब तक 21,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिक्री की है। जुलाई में 17,741 करोड़ रुपये की बिक्री हुई थी। हाल ही में समाप्त हुए जून तिमाही के नतीजों से भी शेयर बाजार में कोई खास बदलाव नहीं हुआ। भारत कंपनियों ने लगातार पांचवीं तिमाही में लो सिंगल डिजिट में कमाई दर्ज की। अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात पर 50% टैरिफ लगने के खतरे से भी विदेशी निवेशक सतर्क हैं। जीएसटी रेट में कटौती और वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही से कमाई में सुधार की उम्मीदों के बावजूद विदेशी निवेशक फूंक-फूंककर कदम बढ़ा रहे हैं।