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GSLV-F16 की पीठ पर होकर सवार, अंतरिक्ष में पहुंच गया ‘निसार’

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ISRO और NASA ने मिलकर एक ऐतिहासिक मिशन लॉन्च किया है. इस मिशन का नाम है- GSLV-F16/NISAR. मिशन को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से शाम 5:40 बजे GSLV-F16 रॉकेट के जरिए लॉन्च किया गया. NISAR को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित कर दिया गया. NISAR धरती की निगरानी का सबसे ताकतवर सिस्टम बनने जा रहा है. ISRO और NASA ने NISAR पर करीब 1.5 बिलियन डॉलर खर्च किए हैं. यह भारतीय एजेंसी का अभी तक का सबसे महंगा मिशन है. NISAR के नाम दुनिया का सबसे महंगा ‘अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट’ होने का रिकॉर्ड भी है.
NISAR (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) धरती को स्कैन करने वाला अब तक का सबसे एडवांस सैटेलाइट है. इसमें NASA का L-band रडार और ISRO का S-band रडार लगाया गया है. ये दोनों रडार मिलकर दिन-रात, बारिश-धूप में हर मौसम में बहुत हाई-क्वालिटी तस्वीरें भेज पाएंगे. इसका मकसद है – जमीन धंसने, ग्लेशियर के पिघलने, जंगलों के बदलते हालात और समुद्री किनारों पर हो रहे बदलावों पर नजर रखना.
ये ISRO का 102वां मिशन है और पहली बार कोई GSLV रॉकेट किसी रडार-आधारित Earth Observation Satellite को लॉन्च करेगा.

क्या-क्या स्टडी करेगा NISAR?
ISRO के मुताबिक, NISAR सैटेलाइट से जो डेटा मिलेगा, उससे कई बड़े बदलावों की जानकारी मिलेगी, जैसे:
-भूकंप, भूस्खलन और ग्लेशियर पिघलने से जुड़ी जमीन की मूवमेंट
-जंगलों की कटाई-बढ़ोतरी और जैव विविधता पर असर
-समुद्री स्तर बढ़ना और तटों पर होने वाले बदलाव
-हिमालय, अंटार्कटिका और ध्रुवीय इलाकों में बर्फ की हालत
-पहाड़ों का खिसकना, जंगलों में मौसम के साथ बदलाव
-खेती और फसलों की सेहत पर निगरानी
ये सारी जानकारियां वैज्ञानिकों को क्लाइमेट चेंज को समझने, प्राकृतिक आपदाओं की भविष्यवाणी करने और नेचुरल रिसोर्स को मैनेज करने में मदद करेंगी.
कितने साल में बना NISAR
NISAR मिशन को तैयार करने में ISRO और NASA को 8 से 10 साल का वक्त लगा. दोनों एजेंसियों ने मिलकर रडार तकनीक को डिजाइन किया और इसकी टेस्टिंग की. लॉन्च के बाद इसके सभी सिस्टम की जांच की जाएगी, फिर ये पूरी तरह से काम करना शुरू करेगा.
क्यों खास है NISAR
NISAR में दो रडार लगे हैं:
L-band SAR (NASA का) – जो घने जंगलों और जमीन के अंदर तक झांक सकता है. इससे मिट्टी की नमी, जंगलों और ग्लेशियर की स्टडी होती है.
S-band SAR (ISRO का) – जो खेतों, शहरों और समुद्री इलाकों की बारीकी से निगरानी कर सकता है.
इस डुअल रडार सिस्टम की मदद से NISAR हर मौसम में, दिन-रात लगातार डेटा भेज सकेगा. इससे वैज्ञानिक जल्दी-जल्दी आने वाले बदलावों को पकड़ सकेंगे – जैसे भूकंप आने से पहले जमीन का मूवमेंट, बाढ़ के खतरे या जंगलों में हो रहे नुकसान.
GSLV-F16 रॉकेट – तीन स्टेज वाला ताकतवर लॉन्च व्हीकल
इस मिशन को GSLV-F16 रॉकेट से भेजा जाएगा. ये तीन स्टेज वाला रॉकेट है:
पहला स्टेज – सॉलिड फ्यूल से चलता है और शुरुआत में जोरदार थ्रस्ट देता है.
दूसरा स्टेज – लिक्विड फ्यूल से चलता है जो रॉकेट को ऊपर तक पहुंचाता है.
तीसरा स्टेज (Cryogenic) – लिक्विड हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से चलता है. ये इंडिया में बना एडवांस इंजन है जो बहुत ठंडे तापमान पर काम करता है.
ये रॉकेट NISAR को 740 किलोमीटर ऊपर पोलर ऑर्बिट में 19 मिनट के अंदर पहुंचा देगा.
पूरी दुनिया को मिलेगा फायदा
NISAR हर 6 दिन में पूरी धरती को हाई-रेजोल्यूशन में स्कैन करेगा. पहले ISRO के सैटेलाइट भारत पर ज्यादा फोकस करते थे, लेकिन NISAR का डेटा पूरी दुनिया के वैज्ञानिक, सरकारें और इंडस्ट्री इस्तेमाल कर सकेंगी.
कैसे होगा इसके डेटा का इस्तेमाल
क्लाइमेट चेंज – बर्फ के पिघलने, जंगलों के कटने और कार्बन स्टोरेज की स्टडी
प्राकृतिक आपदा – भूस्खलन, भूकंप और ज्वालामुखी के खतरे की पहचान
शहरी प्लानिंग – जमीन धंसने और इन्फ्रास्ट्रक्चर की निगरानी
खेती और फूड सिक्योरिटी – फसलों की हालत और मिट्टी की नमी की जानकारीदूसरा स्टेज – लिक्विड फ्यूल से चलता है जो रॉकेट को ऊपर तक पहुंचाता है.
तीसरा स्टेज (Cryogenic) – लिक्विड हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से चलता है. ये इंडिया में बना एडवांस इंजन है जो बहुत ठंडे तापमान पर काम करता है.
ये रॉकेट NISAR को 740 किलोमीटर ऊपर पोलर ऑर्बिट में 19 मिनट के अंदर पहुंचा देगा.
पूरी दुनिया को मिलेगा फायदा
NISAR हर 6 दिन में पूरी धरती को हाई-रेजोल्यूशन में स्कैन करेगा. पहले ISRO के सैटेलाइट भारत पर ज्यादा फोकस करते थे, लेकिन NISAR का डेटा पूरी दुनिया के वैज्ञानिक, सरकारें और इंडस्ट्री इस्तेमाल कर सकेंगी.
कैसे होगा इसके डेटा का इस्तेमाल
क्लाइमेट चेंज – बर्फ के पिघलने, जंगलों के कटने और कार्बन स्टोरेज की स्टडी
प्राकृतिक आपदा – भूस्खलन, भूकंप और ज्वालामुखी के खतरे की पहचान
शहरी प्लानिंग – जमीन धंसने और इन्फ्रास्ट्रक्चर की निगरानी
खेती और फूड सिक्योरिटी – फसलों की हालत और मिट्टी की नमी की जानकारीदूसरा स्टेज – लिक्विड फ्यूल से चलता है जो रॉकेट को ऊपर तक पहुंचाता है.
तीसरा स्टेज (Cryogenic) – लिक्विड हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से चलता है. ये इंडिया में बना एडवांस इंजन है जो बहुत ठंडे तापमान पर काम करता है.
ये रॉकेट NISAR को 740 किलोमीटर ऊपर पोलर ऑर्बिट में 19 मिनट के अंदर पहुंचा देगा.
पूरी दुनिया को मिलेगा फायदा
NISAR हर 6 दिन में पूरी धरती को हाई-रेजोल्यूशन में स्कैन करेगा. पहले ISRO के सैटेलाइट भारत पर ज्यादा फोकस करते थे, लेकिन NISAR का डेटा पूरी दुनिया के वैज्ञानिक, सरकारें और इंडस्ट्री इस्तेमाल कर सकेंगी.
कैसे होगा इसके डेटा का इस्तेमाल
क्लाइमेट चेंज – बर्फ के पिघलने, जंगलों के कटने और कार्बन स्टोरेज की स्टडी
प्राकृतिक आपदा – भूस्खलन, भूकंप और ज्वालामुखी के खतरे की पहचान
शहरी प्लानिंग – जमीन धंसने और इन्फ्रास्ट्रक्चर की निगरानी
खेती और फूड सिक्योरिटी – फसलों की हालत और मिट्टी की नमी की जानकारीदूसरा स्टेज – लिक्विड फ्यूल से चलता है जो रॉकेट को ऊपर तक पहुंचाता है.
तीसरा स्टेज (Cryogenic) – लिक्विड हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से चलता है. ये इंडिया में बना एडवांस इंजन है जो बहुत ठंडे तापमान पर काम करता है.
ये रॉकेट NISAR को 740 किलोमीटर ऊपर पोलर ऑर्बिट में 19 मिनट के अंदर पहुंचा देगा.
पूरी दुनिया को मिलेगा फायदा
NISAR हर 6 दिन में पूरी धरती को हाई-रेजोल्यूशन में स्कैन करेगा. पहले ISRO के सैटेलाइट भारत पर ज्यादा फोकस करते थे, लेकिन NISAR का डेटा पूरी दुनिया के वैज्ञानिक, सरकारें और इंडस्ट्री इस्तेमाल कर सकेंगी.
कैसे होगा इसके डेटा का इस्तेमाल
क्लाइमेट चेंज – बर्फ के पिघलने, जंगलों के कटने और कार्बन स्टोरेज की स्टडी
प्राकृतिक आपदा – भूस्खलन, भूकंप और ज्वालामुखी के खतरे की पहचान
शहरी प्लानिंग – जमीन धंसने और इन्फ्रास्ट्रक्चर की निगरानी
खेती और फूड सिक्योरिटी – फसलों की हालत और मिट्टी की नमी की जानकारीदूसरा स्टेज – लिक्विड फ्यूल से चलता है जो रॉकेट को ऊपर तक पहुंचाता है.
तीसरा स्टेज (Cryogenic) – लिक्विड हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से चलता है. ये इंडिया में बना एडवांस इंजन है जो बहुत ठंडे तापमान पर काम करता है.
ये रॉकेट NISAR को 740 किलोमीटर ऊपर पोलर ऑर्बिट में 19 मिनट के अंदर पहुंचा देगा.
पूरी दुनिया को मिलेगा फायदा
NISAR हर 6 दिन में पूरी धरती को हाई-रेजोल्यूशन में स्कैन करेगा. पहले ISRO के सैटेलाइट भारत पर ज्यादा फोकस करते थे, लेकिन NISAR का डेटा पूरी दुनिया के वैज्ञानिक, सरकारें और इंडस्ट्री इस्तेमाल कर सकेंगी.
कैसे होगा इसके डेटा का इस्तेमाल
क्लाइमेट चेंज – बर्फ के पिघलने, जंगलों के कटने और कार्बन स्टोरेज की स्टडी
प्राकृतिक आपदा – भूस्खलन, भूकंप और ज्वालामुखी के खतरे की पहचान
शहरी प्लानिंग – जमीन धंसने और इन्फ्रास्ट्रक्चर की निगरानी
खेती और फूड सिक्योरिटी – फसलों की हालत और मिट्टी की नमी की जानकारीदूसरा स्टेज – लिक्विड फ्यूल से चलता है जो रॉकेट को ऊपर तक पहुंचाता है.
तीसरा स्टेज (Cryogenic) – लिक्विड हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से चलता है. ये इंडिया में बना एडवांस इंजन है जो बहुत ठंडे तापमान पर काम करता है.
ये रॉकेट NISAR को 740 किलोमीटर ऊपर पोलर ऑर्बिट में 19 मिनट के अंदर पहुंचा देगा.
पूरी दुनिया को मिलेगा फायदा
NISAR हर 6 दिन में पूरी धरती को हाई-रेजोल्यूशन में स्कैन करेगा. पहले ISRO के सैटेलाइट भारत पर ज्यादा फोकस करते थे, लेकिन NISAR का डेटा पूरी दुनिया के वैज्ञानिक, सरकारें और इंडस्ट्री इस्तेमाल कर सकेंगी.
कैसे होगा इसके डेटा का इस्तेमाल
क्लाइमेट चेंज – बर्फ के पिघलने, जंगलों के कटने और कार्बन स्टोरेज की स्टडी
प्राकृतिक आपदा – भूस्खलन, भूकंप और ज्वालामुखी के खतरे की पहचान
शहरी प्लानिंग – जमीन धंसने और इन्फ्रास्ट्रक्चर की निगरानी
खेती और फूड सिक्योरिटी – फसलों की हालत और मिट्टी की नमी की जानकारीदूसरा स्टेज – लिक्विड फ्यूल से चलता है जो रॉकेट को ऊपर तक पहुंचाता है.
तीसरा स्टेज (Cryogenic) – लिक्विड हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से चलता है. ये इंडिया में बना एडवांस इंजन है जो बहुत ठंडे तापमान पर काम करता है.
ये रॉकेट NISAR को 740 किलोमीटर ऊपर पोलर ऑर्बिट में 19 मिनट के अंदर पहुंचा देगा.
पूरी दुनिया को मिलेगा फायदा
NISAR हर 6 दिन में पूरी धरती को हाई-रेजोल्यूशन में स्कैन करेगा. पहले ISRO के सैटेलाइट भारत पर ज्यादा फोकस करते थे, लेकिन NISAR का डेटा पूरी दुनिया के वैज्ञानिक, सरकारें और इंडस्ट्री इस्तेमाल कर सकेंगी.
कैसे होगा इसके डेटा का इस्तेमाल
क्लाइमेट चेंज – बर्फ के पिघलने, जंगलों के कटने और कार्बन स्टोरेज की स्टडी
प्राकृतिक आपदा – भूस्खलन, भूकंप और ज्वालामुखी के खतरे की पहचान
शहरी प्लानिंग – जमीन धंसने और इन्फ्रास्ट्रक्चर की निगरानी
खेती और फूड सिक्योरिटी – फसलों की हालत और मिट्टी की नमी की जानकारीदूसरा स्टेज – लिक्विड फ्यूल से चलता है जो रॉकेट को ऊपर तक पहुंचाता है.
तीसरा स्टेज (Cryogenic) – लिक्विड हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से चलता है. ये इंडिया में बना एडवांस इंजन है जो बहुत ठंडे तापमान पर काम करता है.
ये रॉकेट NISAR को 740 किलोमीटर ऊपर पोलर ऑर्बिट में 19 मिनट के अंदर पहुंचा देगा.
पूरी दुनिया को मिलेगा फायदा
NISAR हर 6 दिन में पूरी धरती को हाई-रेजोल्यूशन में स्कैन करेगा. पहले ISRO के सैटेलाइट भारत पर ज्यादा फोकस करते थे, लेकिन NISAR का डेटा पूरी दुनिया के वैज्ञानिक, सरकारें और इंडस्ट्री इस्तेमाल कर सकेंगी.
कैसे होगा इसके डेटा का इस्तेमाल
क्लाइमेट चेंज – बर्फ के पिघलने, जंगलों के कटने और कार्बन स्टोरेज की स्टडी
प्राकृतिक आपदा – भूस्खलन, भूकंप और ज्वालामुखी के खतरे की पहचान
शहरी प्लानिंग – जमीन धंसने और इन्फ्रास्ट्रक्चर की निगरानी
खेती और फूड सिक्योरिटी – फसलों की हालत और मिट्टी की नमी की जानकारीदूसरा स्टेज – लिक्विड फ्यूल से चलता है जो रॉकेट को ऊपर तक पहुंचाता है.
तीसरा स्टेज (Cryogenic) – लिक्विड हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से चलता है. ये इंडिया में बना एडवांस इंजन है जो बहुत ठंडे तापमान पर काम करता है.
ये रॉकेट NISAR को 740 किलोमीटर ऊपर पोलर ऑर्बिट में 19 मिनट के अंदर पहुंचा देगा.
पूरी दुनिया को मिलेगा फायदा
NISAR हर 6 दिन में पूरी धरती को हाई-रेजोल्यूशन में स्कैन करेगा. पहले ISRO के सैटेलाइट भारत पर ज्यादा फोकस करते थे, लेकिन NISAR का डेटा पूरी दुनिया के वैज्ञानिक, सरकारें और इंडस्ट्री इस्तेमाल कर सकेंगी.
कैसे होगा इसके डेटा का इस्तेमाल
क्लाइमेट चेंज – बर्फ के पिघलने, जंगलों के कटने और कार्बन स्टोरेज की स्टडी
प्राकृतिक आपदा – भूस्खलन, भूकंप और ज्वालामुखी के खतरे की पहचान
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खेती और फूड सिक्योरिटी – फसलों की हालत और मिट्टी की नमी की जानकारीदूसरा स्टेज – लिक्विड फ्यूल से चलता है जो रॉकेट को ऊपर तक पहुंचाता है.
तीसरा स्टेज (Cryogenic) – लिक्विड हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से चलता है. ये इंडिया में बना एडवांस इंजन है जो बहुत ठंडे तापमान पर काम करता है.
ये रॉकेट NISAR को 740 किलोमीटर ऊपर पोलर ऑर्बिट में 19 मिनट के अंदर पहुंचा देगा.
पूरी दुनिया को मिलेगा फायदा
NISAR हर 6 दिन में पूरी धरती को हाई-रेजोल्यूशन में स्कैन करेगा. पहले ISRO के सैटेलाइट भारत पर ज्यादा फोकस करते थे, लेकिन NISAR का डेटा पूरी दुनिया के वैज्ञानिक, सरकारें और इंडस्ट्री इस्तेमाल कर सकेंगी.
कैसे होगा इसके डेटा का इस्तेमाल
क्लाइमेट चेंज – बर्फ के पिघलने, जंगलों के कटने और कार्बन स्टोरेज की स्टडी
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खेती और फूड सिक्योरिटी – फसलों की हालत और मिट्टी की नमी की जानकारीदूसरा स्टेज – लिक्विड फ्यूल से चलता है जो रॉकेट को ऊपर तक पहुंचाता है.
तीसरा स्टेज (Cryogenic) – लिक्विड हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से चलता है. ये इंडिया में बना एडवांस इंजन है जो बहुत ठंडे तापमान पर काम करता है.
ये रॉकेट NISAR को 740 किलोमीटर ऊपर पोलर ऑर्बिट में 19 मिनट के अंदर पहुंचा देगा.
पूरी दुनिया को मिलेगा फायदा
NISAR हर 6 दिन में पूरी धरती को हाई-रेजोल्यूशन में स्कैन करेगा. पहले ISRO के सैटेलाइट भारत पर ज्यादा फोकस करते थे, लेकिन NISAR का डेटा पूरी दुनिया के वैज्ञानिक, सरकारें और इंडस्ट्री इस्तेमाल कर सकेंगी.
कैसे होगा इसके डेटा का इस्तेमाल
क्लाइमेट चेंज – बर्फ के पिघलने, जंगलों के कटने और कार्बन स्टोरेज की स्टडी
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खेती और फूड सिक्योरिटी – फसलों की हालत और मिट्टी की नमी की जानकारीदूसरा स्टेज – लिक्विड फ्यूल से चलता है जो रॉकेट को ऊपर तक पहुंचाता है.
तीसरा स्टेज (Cryogenic) – लिक्विड हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से चलता है. ये इंडिया में बना एडवांस इंजन है जो बहुत ठंडे तापमान पर काम करता है.
ये रॉकेट NISAR को 740 किलोमीटर ऊपर पोलर ऑर्बिट में 19 मिनट के अंदर पहुंचा देगा.
पूरी दुनिया को मिलेगा फायदा
NISAR हर 6 दिन में पूरी धरती को हाई-रेजोल्यूशन में स्कैन करेगा. पहले ISRO के सैटेलाइट भारत पर ज्यादा फोकस करते थे, लेकिन NISAR का डेटा पूरी दुनिया के वैज्ञानिक, सरकारें और इंडस्ट्री इस्तेमाल कर सकेंगी.
कैसे होगा इसके डेटा का इस्तेमाल
क्लाइमेट चेंज – बर्फ के पिघलने, जंगलों के कटने और कार्बन स्टोरेज की स्टडी
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खेती और फूड सिक्योरिटी – फसलों की हालत और मिट्टी की नमी की जानकारीदूसरा स्टेज – लिक्विड फ्यूल से चलता है जो रॉकेट को ऊपर तक पहुंचाता है.
तीसरा स्टेज (Cryogenic) – लिक्विड हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से चलता है. ये इंडिया में बना एडवांस इंजन है जो बहुत ठंडे तापमान पर काम करता है.
ये रॉकेट NISAR को 740 किलोमीटर ऊपर पोलर ऑर्बिट में 19 मिनट के अंदर पहुंचा देगा.
पूरी दुनिया को मिलेगा फायदा
NISAR हर 6 दिन में पूरी धरती को हाई-रेजोल्यूशन में स्कैन करेगा. पहले ISRO के सैटेलाइट भारत पर ज्यादा फोकस करते थे, लेकिन NISAR का डेटा पूरी दुनिया के वैज्ञानिक, सरकारें और इंडस्ट्री इस्तेमाल कर सकेंगी.
कैसे होगा इसके डेटा का इस्तेमाल
क्लाइमेट चेंज – बर्फ के पिघलने, जंगलों के कटने और कार्बन स्टोरेज की स्टडी
प्राकृतिक आपदा – भूस्खलन, भूकंप और ज्वालामुखी के खतरे की पहचान
शहरी प्लानिंग – जमीन धंसने और इन्फ्रास्ट्रक्चर की निगरानी
खेती और फूड सिक्योरिटी – फसलों की हालत और मिट्टी की नमी की जानकारीदूसरा स्टेज – लिक्विड फ्यूल से चलता है जो रॉकेट को ऊपर तक पहुंचाता है.
तीसरा स्टेज (Cryogenic) – लिक्विड हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से चलता है. ये इंडिया में बना एडवांस इंजन है जो बहुत ठंडे तापमान पर काम करता है.
ये रॉकेट NISAR को 740 किलोमीटर ऊपर पोलर ऑर्बिट में 19 मिनट के अंदर पहुंचा देगा.
पूरी दुनिया को मिलेगा फायदा
NISAR हर 6 दिन में पूरी धरती को हाई-रेजोल्यूशन में स्कैन करेगा. पहले ISRO के सैटेलाइट भारत पर ज्यादा फोकस करते थे, लेकिन NISAR का डेटा पूरी दुनिया के वैज्ञानिक, सरकारें और इंडस्ट्री इस्तेमाल कर सकेंगी.
कैसे होगा इसके डेटा का इस्तेमाल
क्लाइमेट चेंज – बर्फ के पिघलने, जंगलों के कटने और कार्बन स्टोरेज की स्टडी
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तीसरा स्टेज (Cryogenic) – लिक्विड हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से चलता है. ये इंडिया में बना एडवांस इंजन है जो बहुत ठंडे तापमान पर काम करता है.
ये रॉकेट NISAR को 740 किलोमीटर ऊपर पोलर ऑर्बिट में 19 मिनट के अंदर पहुंचा देगा.
पूरी दुनिया को मिलेगा फायदा
NISAR हर 6 दिन में पूरी धरती को हाई-रेजोल्यूशन में स्कैन करेगा. पहले ISRO के सैटेलाइट भारत पर ज्यादा फोकस करते थे, लेकिन NISAR का डेटा पूरी दुनिया के वैज्ञानिक, सरकारें और इंडस्ट्री इस्तेमाल कर सकेंगी.
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ये रॉकेट NISAR को 740 किलोमीटर ऊपर पोलर ऑर्बिट में 19 मिनट के अंदर पहुंचा देगा.
पूरी दुनिया को मिलेगा फायदा
NISAR हर 6 दिन में पूरी धरती को हाई-रेजोल्यूशन में स्कैन करेगा. पहले ISRO के सैटेलाइट भारत पर ज्यादा फोकस करते थे, लेकिन NISAR का डेटा पूरी दुनिया के वैज्ञानिक, सरकारें और इंडस्ट्री इस्तेमाल कर सकेंगी.
कैसे होगा इसके डेटा का इस्तेमाल
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खेती और फूड सिक्योरिटी – फसलों की हालत और मिट्टी की नमी की जानकारीदूसरा स्टेज – लिक्विड फ्यूल से चलता है जो रॉकेट को ऊपर तक पहुंचाता है.
तीसरा स्टेज (Cryogenic) – लिक्विड हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से चलता है. ये इंडिया में बना एडवांस इंजन है जो बहुत ठंडे तापमान पर काम करता है.
ये रॉकेट NISAR को 740 किलोमीटर ऊपर पोलर ऑर्बिट में 19 मिनट के अंदर पहुंचा देगा.
पूरी दुनिया को मिलेगा फायदा
NISAR हर 6 दिन में पूरी धरती को हाई-रेजोल्यूशन में स्कैन करेगा. पहले ISRO के सैटेलाइट भारत पर ज्यादा फोकस करते थे, लेकिन NISAR का डेटा पूरी दुनिया के वैज्ञानिक, सरकारें और इंडस्ट्री इस्तेमाल कर सकेंगी.
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ये रॉकेट NISAR को 740 किलोमीटर ऊपर पोलर ऑर्बिट में 19 मिनट के अंदर पहुंचा देगा.
पूरी दुनिया को मिलेगा फायदा
NISAR हर 6 दिन में पूरी धरती को हाई-रेजोल्यूशन में स्कैन करेगा. पहले ISRO के सैटेलाइट भारत पर ज्यादा फोकस करते थे, लेकिन NISAR का डेटा पूरी दुनिया के वैज्ञानिक, सरकारें और इंडस्ट्री इस्तेमाल कर सकेंगी.
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तीसरा स्टेज (Cryogenic) – लिक्विड हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से चलता है. ये इंडिया में बना एडवांस इंजन है जो बहुत ठंडे तापमान पर काम करता है.
ये रॉकेट NISAR को 740 किलोमीटर ऊपर पोलर ऑर्बिट में 19 मिनट के अंदर पहुंचा देगा.
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तीसरा स्टेज (Cryogenic) – लिक्विड हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से चलता है. ये इंडिया में बना एडवांस इंजन है जो बहुत ठंडे तापमान पर काम करता है.
ये रॉकेट NISAR को 740 किलोमीटर ऊपर पोलर ऑर्बिट में 19 मिनट के अंदर पहुंचा देगा.
पूरी दुनिया को मिलेगा फायदा
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प्राकृतिक आपदा – भूस्खलन, भूकंप और ज्वालामुखी के खतरे की पहचान
शहरी प्लानिंग – जमीन धंसने और इन्फ्रास्ट्रक्चर की निगरानी
खेती और फूड सिक्योरिटी – फसलों की हालत और मिट्टी की नमी की जानकारीदूसरा स्टेज – लिक्विड फ्यूल से चलता है जो रॉकेट को ऊपर तक पहुंचाता है.
तीसरा स्टेज (Cryogenic) – लिक्विड हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से चलता है. ये इंडिया में बना एडवांस इंजन है जो बहुत ठंडे तापमान पर काम करता है.
ये रॉकेट NISAR को 740 किलोमीटर ऊपर पोलर ऑर्बिट में 19 मिनट के अंदर पहुंचा देगा.
पूरी दुनिया को मिलेगा फायदा
NISAR हर 6 दिन में पूरी धरती को हाई-रेजोल्यूशन में स्कैन करेगा. पहले ISRO के सैटेलाइट भारत पर ज्यादा फोकस करते थे, लेकिन NISAR का डेटा पूरी दुनिया के वैज्ञानिक, सरकारें और इंडस्ट्री इस्तेमाल कर सकेंगी.
कैसे होगा इसके डेटा का इस्तेमाल
क्लाइमेट चेंज – बर्फ के पिघलने, जंगलों के कटने और कार्बन स्टोरेज की स्टडी
प्राकृतिक आपदा – भूस्खलन, भूकंप और ज्वालामुखी के खतरे की पहचान
शहरी प्लानिंग – जमीन धंसने और इन्फ्रास्ट्रक्चर की निगरानी
खेती और फूड सिक्योरिटी – फसलों की हालत और मिट्टी की नमी की जानकारीदूसरा स्टेज – लिक्विड फ्यूल से चलता है जो रॉकेट को ऊपर तक पहुंचाता है.
तीसरा स्टेज (Cryogenic) – लिक्विड हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से चलता है. ये इंडिया में बना एडवांस इंजन है जो बहुत ठंडे तापमान पर काम करता है.
ये रॉकेट NISAR को 740 किलोमीटर ऊपर पोलर ऑर्बिट में 19 मिनट के अंदर पहुंचा देगा.
पूरी दुनिया को मिलेगा फायदा
NISAR हर 6 दिन में पूरी धरती को हाई-रेजोल्यूशन में स्कैन करेगा. पहले ISRO के सैटेलाइट भारत पर ज्यादा फोकस करते थे, लेकिन NISAR का डेटा पूरी दुनिया के वैज्ञानिक, सरकारें और इंडस्ट्री इस्तेमाल कर सकेंगी.
कैसे होगा इसके डेटा का इस्तेमाल
क्लाइमेट चेंज – बर्फ के पिघलने, जंगलों के कटने और कार्बन स्टोरेज की स्टडी
प्राकृतिक आपदा – भूस्खलन, भूकंप और ज्वालामुखी के खतरे की पहचान
शहरी प्लानिंग – जमीन धंसने और इन्फ्रास्ट्रक्चर की निगरानी
खेती और फूड सिक्योरिटी – फसलों की हालत और मिट्टी की नमी की जानकारी

भारत और अमेरिका की साझेदारी से बना ये मिशन ना सिर्फ साइंस को नई दिशा देगा, बल्कि दुनिया को प्राकृतिक आपदाओं और क्लाइमेट चेंज से लड़ने में भी तैयार करेगा.I]K,

रीलबाजी की सनक, सामने नदी, चट्टान पर चढ़कर लड़कों ने किया खतरनाक स्टंट

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छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में मूसलधार बारिश हो रही है. इसकी वजह से कई नदियां उफान पर हैं. बांधों से भारी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है. इस बीच खैरागढ़ जिले से एक खतरनाक और चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है. वायरल हो रहे इस वीडियो में 5 युवक तेज बहाव वाले प्रधानपाठ बैराज की एक चट्टान पर खतरनाक तरीके से खड़े होकर स्टंट करते नजर आ रहे है. ये सभी युवक मोबाइल कैमरों के सामने फोटो और वीडियो बनाते नजर आए. अब उनका ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि डैम से पानी का बहाव बेहद तेज है. चट्टानें फिसलन भरी है. पानी ठीक उनके नीचे उफनता हुआ बह रहा है. एक भी गलत कदम उन्हें सीधे मौत की ओर ले जा सकता था, लेकिन युवकों पर इसका कोई असर नहीं दिखाई देता.

खैरागढ़ का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
स्थानीय लोगों के मुताबिक यह वीडियो खैरागढ़ जिले के प्रधानपाठ बैराज का है. हैरानी की बात यह है कि वहां न तो कोई सुरक्षा गार्ड तैनात है और न ही युवकों को रोकने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद दिखा. प्रधानपाठ बैराज की स्थिति खुद ही सवालों के घेरे में है. सालों से इसका एक गेट टूटा हुआ पड़ा है, जिससे वाटर फ्लो पर कंट्रोल नहीं हो पाता. वहीं, निर्माण के दौरान बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लग चुके हैं. विभागीय अधिकारियों की लापरवाही का आलम यह है कि नियमित निगरानी तक नहीं की जाती.
यह पूरी घटना प्रशासनिक लापरवाही और सोशल मीडिया की सनक का खतरनाक मिलाजुला उदाहरण है. न सिर्फ युवाओं ने अपनी जान जोखिम में डाली, बल्कि यह भी दिखा दिया कि सुरक्षा इंतजाम सिर्फ नाम मात्र के हैं. वायरल वीडियो को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन को फौरन कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि इस तरह की घटनाएं भविष्य में न दोहराई जाएं. बारिश की तबाही तो कुदरती है, लेकिन लापरवाही से होने वाली मौतें पूरी तरह टाली जा सकती हैं, अगर समय रहते चेत लिया जाए तो.€

रीलबाजी की सनक, सामने नदी, चट्टान पर चढ़कर लड़कों ने किया खतरनाक स्टंट

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छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में मूसलधार बारिश हो रही है. इसकी वजह से कई नदियां उफान पर हैं. बांधों से भारी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है. इस बीच खैरागढ़ जिले से एक खतरनाक और चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है. वायरल हो रहे इस वीडियो में 5 युवक तेज बहाव वाले प्रधानपाठ बैराज की एक चट्टान पर खतरनाक तरीके से खड़े होकर स्टंट करते नजर आ रहे है. ये सभी युवक मोबाइल कैमरों के सामने फोटो और वीडियो बनाते नजर आए. अब उनका ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि डैम से पानी का बहाव बेहद तेज है. चट्टानें फिसलन भरी है. पानी ठीक उनके नीचे उफनता हुआ बह रहा है. एक भी गलत कदम उन्हें सीधे मौत की ओर ले जा सकता था, लेकिन युवकों पर इसका कोई असर नहीं दिखाई देता.

खैरागढ़ का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
स्थानीय लोगों के मुताबिक यह वीडियो खैरागढ़ जिले के प्रधानपाठ बैराज का है. हैरानी की बात यह है कि वहां न तो कोई सुरक्षा गार्ड तैनात है और न ही युवकों को रोकने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद दिखा. प्रधानपाठ बैराज की स्थिति खुद ही सवालों के घेरे में है. सालों से इसका एक गेट टूटा हुआ पड़ा है, जिससे वाटर फ्लो पर कंट्रोल नहीं हो पाता. वहीं, निर्माण के दौरान बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लग चुके हैं. विभागीय अधिकारियों की लापरवाही का आलम यह है कि नियमित निगरानी तक नहीं की जाती.
यह पूरी घटना प्रशासनिक लापरवाही और सोशल मीडिया की सनक का खतरनाक मिलाजुला उदाहरण है. न सिर्फ युवाओं ने अपनी जान जोखिम में डाली, बल्कि यह भी दिखा दिया कि सुरक्षा इंतजाम सिर्फ नाम मात्र के हैं. वायरल वीडियो को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन को फौरन कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि इस तरह की घटनाएं भविष्य में न दोहराई जाएं. बारिश की तबाही तो कुदरती है, लेकिन लापरवाही से होने वाली मौतें पूरी तरह टाली जा सकती हैं, अगर समय रहते चेत लिया जाए तो.€

छत्तीसगढ़ का एक लाख छिद्रों वाला शिवलिंग? पाताल तक जाता है भक्तों का चढ़ाया जल

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छत्तीसगढ़ की काशी कहे जाने वाले लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर में सावन मास की श्रद्धा का सैलाब उमड़ रहा है. खरौद में स्थित यह प्राचीन शिवधाम अपनी रहस्यमयी शिवलिंग और रामायणकालीन कथा के कारण भक्तों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है. कहा जाता है कि भगवान राम और लक्ष्मण ने खर और दूषण के वध के बाद ब्रह्म हत्या दोष से मुक्ति पाने महादेव की स्थापना की थी

रायपुर से महज 136 किमी दूर जांजगीर-चांपा जिले के खरौद में स्थित यह मंदिर रामायणकालीन कथा से जुड़ा है. मान्यता है कि भगवान राम और लक्ष्मण ने खर-दूषण वध के बाद इसी स्थान पर शिवलिंग की स्थापना कर ब्रह्म हत्या दोष का निवारण किया था. महाशिवरात्रि और सावन में यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है.
इस शिवलिंग में एक लाख छोटे-छोटे छिद्र हैं, जिससे यह ‘लक्षलिंग’ या ‘लखेश्वर’ कहलाता है. कहा जाता है कि इसमें एक छेद ऐसा भी है, जो पाताल लोक तक जाता है. भक्तों का विश्वास है कि इसमें अर्पित जल पाताल में समा जाता है, जबकि एक छेद हमेशा जल से भरा रहता है, जिसे ‘अक्षय कुण्ड’ कहा जाता है.
मंदिर में मनोकामना पूर्ण करने की मान्यता पर श्रद्धालु सफेद कपड़े के थैले में भरकर एक लाख चावल अर्पित करते हैं. इसे ‘लक्ष्य’ या ‘लख चावल’ कहा जाता है. यह परंपरा आज भी जीवित है और सावन में भक्त विशेष रूप से यह भेंट चढ़ाते हैं.
वन गमन परिपथ में इस मंदिर का विशेष स्थान है. सावन के हर सोमवार और महाशिवरात्रि पर यहां विशाल मेला और जलाभिषेक के लिए भक्तों का जनसैलाब उमड़ता है. साथ ही श्रृंगार भी भव्य रूप से किया जाता है.

माना जाता है कि खर और दूषण का वध करने के कारण इस स्थान का नाम ‘खरौद’ पड़ा. यह स्थल रायपुर से 136 किमी और शिवरीनारायण से मात्र 3 किमी की दूरी पर स्थित है. लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत में भी अमूल्य स्थान रखता है.

छत्तीसगढ़ का एक लाख छिद्रों वाला शिवलिंग? पाताल तक जाता है भक्तों का चढ़ाया जल

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छत्तीसगढ़ की काशी कहे जाने वाले लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर में सावन मास की श्रद्धा का सैलाब उमड़ रहा है. खरौद में स्थित यह प्राचीन शिवधाम अपनी रहस्यमयी शिवलिंग और रामायणकालीन कथा के कारण भक्तों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है. कहा जाता है कि भगवान राम और लक्ष्मण ने खर और दूषण के वध के बाद ब्रह्म हत्या दोष से मुक्ति पाने महादेव की स्थापना की थी

रायपुर से महज 136 किमी दूर जांजगीर-चांपा जिले के खरौद में स्थित यह मंदिर रामायणकालीन कथा से जुड़ा है. मान्यता है कि भगवान राम और लक्ष्मण ने खर-दूषण वध के बाद इसी स्थान पर शिवलिंग की स्थापना कर ब्रह्म हत्या दोष का निवारण किया था. महाशिवरात्रि और सावन में यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है.
इस शिवलिंग में एक लाख छोटे-छोटे छिद्र हैं, जिससे यह ‘लक्षलिंग’ या ‘लखेश्वर’ कहलाता है. कहा जाता है कि इसमें एक छेद ऐसा भी है, जो पाताल लोक तक जाता है. भक्तों का विश्वास है कि इसमें अर्पित जल पाताल में समा जाता है, जबकि एक छेद हमेशा जल से भरा रहता है, जिसे ‘अक्षय कुण्ड’ कहा जाता है.
मंदिर में मनोकामना पूर्ण करने की मान्यता पर श्रद्धालु सफेद कपड़े के थैले में भरकर एक लाख चावल अर्पित करते हैं. इसे ‘लक्ष्य’ या ‘लख चावल’ कहा जाता है. यह परंपरा आज भी जीवित है और सावन में भक्त विशेष रूप से यह भेंट चढ़ाते हैं.
वन गमन परिपथ में इस मंदिर का विशेष स्थान है. सावन के हर सोमवार और महाशिवरात्रि पर यहां विशाल मेला और जलाभिषेक के लिए भक्तों का जनसैलाब उमड़ता है. साथ ही श्रृंगार भी भव्य रूप से किया जाता है.

माना जाता है कि खर और दूषण का वध करने के कारण इस स्थान का नाम ‘खरौद’ पड़ा. यह स्थल रायपुर से 136 किमी और शिवरीनारायण से मात्र 3 किमी की दूरी पर स्थित है. लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत में भी अमूल्य स्थान रखता है.

CGPSC-2021 भर्ती विवाद: CBI जांच में रहे बेदाग, 60 दिन में मिलेगी नियुक्ति, बिलासपुर हाईकोर्ट ने कहा- चार्जशीट में नाम नहीं तो…..

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सीजीपीएससी 2021 भर्ती विवाद में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने साफ कहा है कि जिन चयनित अभ्यर्थियों के खिलाफ CBI जांच में कोई तथ्य सामने नहीं आए हैं और जिनका नाम चार्जशीट में शामिल नहीं हैं,
उन्हें 10 मई 2024 की वैधता अवधि के भीतर यानी 60 दिन के भीतर नियुक्ति पत्र दिए जाएं. कोर्ट ने ये भी कहा कि सिर्फ कुछ अभ्यर्थियों पर आरोप हैं, इसलिए पूरी चयन सूची को गलत मानकर सभी की नियुक्ति रोकना अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है.
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियुक्तियां CBI जांच और भविष्य में सामने आने वाले तथ्यों के अधीन रहेंगी. अगर बाद में कोई गड़बड़ी सामने आती है तो सरकार सेवा समाप्त कर सकती है.
जानें क्या है पूरा मामला
दरअसल, 26 नवंबर 2021 को सीजी पीएससी ने 171 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था. इनमें डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी, लेखाधिकारी, जेल अधीक्षक और नायब तहसीलदार समेत 20 सेवाओं में भर्ती होनी थी. 11 मई 2023 को परीक्षा परिणाम घोषित हुए, लेकिन तभी सामने आए धांधली के आरोप. आरोप लगे कि पीएससी के अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों के रिश्तेदारों का चयन हुआ. मामला हाईकोर्ट पहुंचा और राज्य सरकार ने जांच सीबीआई को सौंप दी. CBI जांच शुरू होते ही नियुक्ति आदेश रोक दिए गए. इससे कई ऐसे अभ्यर्थी भी नियुक्ति से वंचित हो गए, जिन पर कोई आरोप नहीं था. इन अभ्यर्थियों ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी.
दलील दी गई कि हम योग्यता से चयनित हुए हैं और हमारे खिलाफ कोई FIR भी नहीं है. राज्य सरकार ने कोर्ट में तर्क दिया कि चयन प्रक्रिया में अनियमितता की आशंका है, लेकिन कोर्ट ने दो टूक कहा कि बेदाग अभ्यर्थियों के भविष्य से नहीं खेला जा सकता. वहीं PSC ने भी कहा कि हमारा काम सिर्फ चयन सूची जारी करना था, नियुक्ति सरकार की जिम्मेदारी है. PSC भर्ती विवाद पर यह फैसला ना केवल निर्दोष युवाओं के लिए राहत लेकर आया है बल्कि यह भी स्पष्ट कर गया है कि न्याय की बुनियाद पर ही नियुक्तियों का आधार टिका होना चाहिए.

CGPSC-2021 भर्ती विवाद: CBI जांच में रहे बेदाग, 60 दिन में मिलेगी नियुक्ति, बिलासपुर हाईकोर्ट ने कहा- चार्जशीट में नाम नहीं तो…..

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सीजीपीएससी 2021 भर्ती विवाद में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने साफ कहा है कि जिन चयनित अभ्यर्थियों के खिलाफ CBI जांच में कोई तथ्य सामने नहीं आए हैं और जिनका नाम चार्जशीट में शामिल नहीं हैं,
उन्हें 10 मई 2024 की वैधता अवधि के भीतर यानी 60 दिन के भीतर नियुक्ति पत्र दिए जाएं. कोर्ट ने ये भी कहा कि सिर्फ कुछ अभ्यर्थियों पर आरोप हैं, इसलिए पूरी चयन सूची को गलत मानकर सभी की नियुक्ति रोकना अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है.
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियुक्तियां CBI जांच और भविष्य में सामने आने वाले तथ्यों के अधीन रहेंगी. अगर बाद में कोई गड़बड़ी सामने आती है तो सरकार सेवा समाप्त कर सकती है.
जानें क्या है पूरा मामला
दरअसल, 26 नवंबर 2021 को सीजी पीएससी ने 171 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था. इनमें डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी, लेखाधिकारी, जेल अधीक्षक और नायब तहसीलदार समेत 20 सेवाओं में भर्ती होनी थी. 11 मई 2023 को परीक्षा परिणाम घोषित हुए, लेकिन तभी सामने आए धांधली के आरोप. आरोप लगे कि पीएससी के अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों के रिश्तेदारों का चयन हुआ. मामला हाईकोर्ट पहुंचा और राज्य सरकार ने जांच सीबीआई को सौंप दी. CBI जांच शुरू होते ही नियुक्ति आदेश रोक दिए गए. इससे कई ऐसे अभ्यर्थी भी नियुक्ति से वंचित हो गए, जिन पर कोई आरोप नहीं था. इन अभ्यर्थियों ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी.
दलील दी गई कि हम योग्यता से चयनित हुए हैं और हमारे खिलाफ कोई FIR भी नहीं है. राज्य सरकार ने कोर्ट में तर्क दिया कि चयन प्रक्रिया में अनियमितता की आशंका है, लेकिन कोर्ट ने दो टूक कहा कि बेदाग अभ्यर्थियों के भविष्य से नहीं खेला जा सकता. वहीं PSC ने भी कहा कि हमारा काम सिर्फ चयन सूची जारी करना था, नियुक्ति सरकार की जिम्मेदारी है. PSC भर्ती विवाद पर यह फैसला ना केवल निर्दोष युवाओं के लिए राहत लेकर आया है बल्कि यह भी स्पष्ट कर गया है कि न्याय की बुनियाद पर ही नियुक्तियों का आधार टिका होना चाहिए.

मुकेश चंद्राकर मर्डर केस में बड़ा एक्शन, बीजापुर से PWD के 5 अधिकारी गिरफ्तार

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छत्तीसगढ़ के पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या का आरोप सड़क ठेकेदार और उसके गुर्गों पर लगा था. हत्याकांड की जांच कर रही टीम ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) के 5 अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया है. जिन लोगों पर कार्रवाई हुई है उसमें लोक निर्माण विभाग के 2 पूर्व ईई शामिल हैं. इसके अलावा 1 ईई, 1 एसडीओ और 1 सब इंजीनियर पर भी कार्रवाई की गई है.
पकड़े गए पांचों लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर 2 दिन की न्यायिक रिमांड पर लिया है. पुलिस की टीम न्यायिक रिमांड पर सभी से पूछताछ कर रही है. बीजापुर एएसपी चंद्रकांत गोवर्ना ने पत्रकार मुकेश चंद्राकर हत्याकांड में PWD के 5 लोगों को गिरफ्तार किए जाने की पुष्टि की है. एसपी ने बताया कि पकड़े गए लोगों में 2 रिटायर PWD के ईई भी शामिल हैं.

मालूम हो कि 1 जनवरी 2025 को मुकेश चंद्राकर अपने घर से निकले थे. फिर लापता हो गए. परिवार ने उनके गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में दर्ज कराई थी. 3 जनवरी को उनकी लाश एक बंद पड़े सेप्टिक टैंक से मिली थी. पुलिस ने हत्याकांड के मास्टरमाइंड सड़क ठेकेदार सुरेश चंद्राकर को हैदराबाद से गिरफ्तार किया था. इस हत्याकांड में सुरेश के साथ रितेश चंद्राकर, दिनेश चंद्राकर और महेंद्र रामटेके का नाम भी शामिल है. इन चारों आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज किया था. मुकेश चंद्राकर की हत्या की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था. एसआईटी ने अपनी चार्जशीट में ठेकेदार सुरेश चंद्राकर सहित 4 लोगों को आरोपी बनाया था. इसके साथ ही 70 लोगों को इस मामले में गवाह बनाया गया.

एसआईटी की जांच में सामने आया था कि आरोपी सुरेश चंद्राकर उसके सड़क निर्माण के काम में भ्रष्टाचार उजागर करने वाली खबरों से काफी नाराज था. मुकेश से सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार की खबरें दिखाई थी. इसके बाद उसने हत्या की पूरी प्लानिंग की. उसके घटना से कुछ दिन पहले ही अपने बैंक खाते से बड़ी रकम भी निकाली थी. 5 जनवरी को आरोपी को हैदराबाद से गिरफ्तार किया गया था. इसके साथ उसका भाई और सुपरवाइजर भी गिरफ्तार हुआ था.

मुकेश चंद्राकर मर्डर केस में बड़ा एक्शन, बीजापुर से PWD के 5 अधिकारी गिरफ्तार

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छत्तीसगढ़ के पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या का आरोप सड़क ठेकेदार और उसके गुर्गों पर लगा था. हत्याकांड की जांच कर रही टीम ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) के 5 अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया है. जिन लोगों पर कार्रवाई हुई है उसमें लोक निर्माण विभाग के 2 पूर्व ईई शामिल हैं. इसके अलावा 1 ईई, 1 एसडीओ और 1 सब इंजीनियर पर भी कार्रवाई की गई है.
पकड़े गए पांचों लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर 2 दिन की न्यायिक रिमांड पर लिया है. पुलिस की टीम न्यायिक रिमांड पर सभी से पूछताछ कर रही है. बीजापुर एएसपी चंद्रकांत गोवर्ना ने पत्रकार मुकेश चंद्राकर हत्याकांड में PWD के 5 लोगों को गिरफ्तार किए जाने की पुष्टि की है. एसपी ने बताया कि पकड़े गए लोगों में 2 रिटायर PWD के ईई भी शामिल हैं.

मालूम हो कि 1 जनवरी 2025 को मुकेश चंद्राकर अपने घर से निकले थे. फिर लापता हो गए. परिवार ने उनके गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में दर्ज कराई थी. 3 जनवरी को उनकी लाश एक बंद पड़े सेप्टिक टैंक से मिली थी. पुलिस ने हत्याकांड के मास्टरमाइंड सड़क ठेकेदार सुरेश चंद्राकर को हैदराबाद से गिरफ्तार किया था. इस हत्याकांड में सुरेश के साथ रितेश चंद्राकर, दिनेश चंद्राकर और महेंद्र रामटेके का नाम भी शामिल है. इन चारों आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज किया था. मुकेश चंद्राकर की हत्या की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था. एसआईटी ने अपनी चार्जशीट में ठेकेदार सुरेश चंद्राकर सहित 4 लोगों को आरोपी बनाया था. इसके साथ ही 70 लोगों को इस मामले में गवाह बनाया गया.

एसआईटी की जांच में सामने आया था कि आरोपी सुरेश चंद्राकर उसके सड़क निर्माण के काम में भ्रष्टाचार उजागर करने वाली खबरों से काफी नाराज था. मुकेश से सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार की खबरें दिखाई थी. इसके बाद उसने हत्या की पूरी प्लानिंग की. उसके घटना से कुछ दिन पहले ही अपने बैंक खाते से बड़ी रकम भी निकाली थी. 5 जनवरी को आरोपी को हैदराबाद से गिरफ्तार किया गया था. इसके साथ उसका भाई और सुपरवाइजर भी गिरफ्तार हुआ था.

RTFGVBरायपुर और दुर्ग में ईडी का छापा, मोक्षित कॉर्पोरेशन के ठिकानों पर दबिश, दवा खरीदी घोटाले में कार्रवाई

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छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड में हुई गड़बड़ी मामले में ईडी की टीम फिर बड़ी कार्रवाई की है. अधिकारियों की टीम ने दुर्ग के गंजपारा में इलाके में दबिश दी. ईडी के अधिकारी गंजपारा इलाके में मोक्षित कॉर्पोरेशन में जांच के लिए पहुंचे. टीम की जांच जारी है. मोक्षित कॉरपोरेशन के दुर्ग स्थित 3 घर और ऑफिस में दबिश दी गई. बताया जा रहा है कि 2 दर्जन से ज्यादा अधिकारियों ने बुधवार सुबह रेड की.
ईडी की कार्रवाई के दौरान सीआरपीएफ के जवान भी बड़ी संख्या में मौजूद थे. पूरी कार्रवाई छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड में हुई गड़बड़ी से जुड़ी हुई बताई जा रही है. इसी मामले में 6 महीने पहले ईओडब्ल्यू और एसीबी ने एक साथ रेड किया था. अब मोक्षित कॉरपोरेशन केंद्रीय जांच एजेंसी के रडार पर है. 650 करोड़ से ज्यादा का ये घोटाला बताया जा रहा है.
EDC
छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में खून की जांच और दवाओं की आपूर्ति के नाम पर CGMSC के अधिकारियों ने गरीब मरीजों की सेहत से खिलवाड़ किया था. सरकार इसमें ACB और EOW से जांच करा रही है. CGMSC के रिएजेंट किट, दवा खरीदी में 750 करोड़ के घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) ने 5 अधिकारियों को गिरफ्तार किया था. इसमें CGMSC के जीएम टेक्निकल कमल कांत पाटनवार, बायोमेडिकल इंजीनियर खिरौद रावतिया, पूर्व जीएम CGMSC बसंत कोशिक, स्वास्थय विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉक्टर अनिल परसाई और दीपर कुमार बांधे गिरफ्तार हुए थे.

5 अधिकारी गिरफ्तार, 3 IAS जांच के दायरे में
सभी को कोर्ट में पेश किया गया है और 15 दिन की पुलिस रिमांड के लिए आवेदन किया गया था. वहीं 3 IAS अधिकारी CGMSC की प्रबंध संचालक पद्मिनी भोई साहू, पूर्व प्रबंध संचालक चंद्रकांत वर्मा, पूर्व संचालक स्वास्थ्य सेवाएं भीम सिंह से भी पूछताछ की गई थी.

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