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Ajay Devgn Upcoming Horror Movie: अजय देवगन लंबे वक्त से अपनी पॉपुलर फ्रेंचाइजी ‘दृश्यम’ के तीसरे पार्ट को लेकर चर्चा…

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Ajay Devgn Upcoming Horror Movie: बॉलीवुड एक्टर अजय देवगन को आखिरी बार ‘दे दे प्यार दे 2’ में देखा गया था, जो बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हुई. अजय देवगन लंबे वक्त से अपनी पॉपुलर फ्रेंचाइजी ‘दृश्यम’ के तीसरे पार्ट को लेकर चर्चा में चल रहे हैं.

‘दृश्यम 3’ फिल्म का काम पूरा हो चुका है और 2 अक्टूबर 2026 को थिएटरों दस्तक देगी. इसी बीच अजय देवगन अपनी अगली फिल्म की तैयारियों में लग गए हैं. अजय देवगन एक बार फिर हॉरर जॉनर में हाथ आजमाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. इन दिनों अक्षय कुमार की हॉरर कॉमेडी ‘भूत बंगला’ और ‘हैवान’ काफी सुर्खियां बटोर रही हैं. ऐसे में अजय देवगन भी हॉरर जॉनर में वापस लौट रहे हैं और इसके लिए उन्होंने जाने-माने फिल्ममेकर रोहित गुजराज के साथ हाथ मिलाया है.

‘दृश्यम 3’ सस्पेंस थ्रिलर से भरपूर फिल्म है, जो रिलीज के लिए पूरी तरह से तैयार है. इसके बाद अजय देवगन ‘सरदारजी’ के डायरेक्टर रोहित जुगराज के साथ मिलकर एक हाई-कॉन्सेप्ट जॉनर फिल्म पर काम करने जा रहे हैं. इस अपकमिंग हॉरर फिल्म को कुमार मंगत प्रोड्यूस करने जा रहे हैं, जिसका टाइटल अभी तक रिवील नहीं किया गया है. इसे एक हाई-कॉन्सेप्ट हॉरर कहानी के तौर पर देखा जा रहा है, जिसका सिनेमैटिक स्केल काफी बड़ा होगा.

हॉरर जॉनर में अजय देवगन की वापसी

पिंकविला ने अपनी एक रिपोर्ट में सोर्स के हवाले से बताया कि अजय देवगन, रोहित गुजराज के साथ एक हॉरर फिल्म ला रहे हैं. इसकी कहानी काफी माहौल बनाने वाली है, जो इसे आम हॉरर फिल्मों से अलग बनाएगी. इस फिल्म की ज्यादातर शूटिंग लंदन में होगी. मेकर्स अभी प्री-प्रोडक्शन के काम में पूरी तरह से जुटे हुए हैं, जिसमें वो फिल्म के मेन टेक्निकल डिपार्टमेंट और स्क्रीनप्ले को फाइनल कर रहे हैं. साथ ही, फिल्म के लिए कास्टिंग का काम भी चल रहा है.

16 साल पहले गोलमाल फ्रेंचाइजी से भिड़े थे अक्षय कुमार, जिसमें अब विलेन बनकर ली एंट्री शैतान थी आखिरी हॉरर फिल्म ये प्रोजेक्ट इसलिए भी खास है क्योंकि इसके साथ अजय देवगन 2024 की फिल्म ‘शैतान’ के बाद एक बार फिर हॉरर जॉनर में वापसी कर रहे हैं. अजय का एक बार फिर से पूरी तरह हॉरर फिल्मों में लौटना, फैंस के लिए काफी मजेदार एक्सपीरियंस होने वाला है. इस फिल्म का टाइटल भी काफी दिलचस्प बताया जा रहा है, जिसे फिल्म के मेकर्स जल्द ही सबके सामने लाने की प्लानिंग कर रहे हैं.

इसी साल जुलाई में फिल्म की शूटिंग शुरू होने वाली है. वर्कफ्रंट की बात करें तो अजय इस समय मुंबई में अक्षय कुमार के साथ ‘गोलमाल 5’ की शूटिंग कर रहे हैं. रोहित शेट्टी की ये फ्रेंचाइजी 2027 में दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है.

असम की राजनीति में ‘जालुकबारी’ महज एक निर्वाचन क्षेत्र नहीं, बल्कि सत्ता के रसूख और बदलाव की एक जीवित कहानी…

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असम की राजनीति में ‘जालुकबारी’ महज एक निर्वाचन क्षेत्र नहीं, बल्कि सत्ता के रसूख और बदलाव की एक जीवित कहानी है। गुवाहाटी के प्रवेश द्वार पर स्थित यह इलाका इन दिनों फिर से चर्चा के केंद्र में है।

यहां की फिजाओं में न केवल ब्रह्मपुत्र की लहरें उठती हैं, बल्कि चार दशकों की वह सियासी विरासत भी शामिल है जिसने असम का भविष्य तय किया है।

आगामी 2026 विधानसभा चुनाव के करीब आते ही सबकी नजरें इस हॉट सीट पर टिकी हैं। यहां सूबे के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा अपनी साख और विकास के दावों के साथ एक बार फिर चुनावी समर में उतरने जा रहे हैं।

एक ही सीट पर गुरु-चेले की दिलचस्प सियासी जंग

जालुकबारी का राजनीतिक इतिहास किसी फिल्म की पटकथा से कम नहीं है। पिछले 40 से अधिक वर्षों से इस सीट पर ‘गुरु-चेले’ की जोड़ी- भृगु कुमार फुकन और हिमंत बिस्वा सरमा का दबदबा रहा है। भृगु फुकन, जो असम समझौते के हस्ताक्षरकर्ता और राज्य के पूर्व गृह मंत्री थे, ने ही हिमंत को राजनीति की बारीकियां सिखाई थीं।

समय का चक्र ऐसा घूमा कि दोनों के रास्ते अलग हो गए और उन्होंने दो बार आमने-सामने चुनाव लड़ा। 1996 में गुरु फुकन ने अपने शिष्य को मात दी, लेकिन 2001 में हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस के टिकट पर अपने ही गुरु को हराकर राजनीतिक गुरु-दक्षिणा दी। तब से लेकर आज तक हिमंत ने पीछे मुड़कर नहीं देखा है।

कांग्रेस से भाजपा तक का सफर

हिमंत बिस्वा सरमा ने इस सदी की शुरुआत के साथ ही जालुकबारी में अपनी जीत का सिलसिला शुरू किया था। उन्होंने लगातार तीन बार- 2001, 2006 और 2011 में कांग्रेस की तरफ से जीत दर्ज की। हालांकि, 2015 में पार्टी नेतृत्व से मतभेदों के चलते उन्होंने पाला बदला और भारतीय जनता पार्टी  (भाजपा) में शामिल हो गए।

दिलचस्प बात यह है कि दल बदलने के बावजूद जनता का उन पर भरोसा कम होने के बजाय और बढ़ गया। 2016 में उनकी जीत का अंतर करीब 85,000 वोटों का था, जो 2021 तक आते-आते एक लाख के पार पहुंच गया। यह आंकड़े बताते हैं कि जालुकबारी की जनता के लिए उम्मीदवार की अपनी एक अलग पहचान है।

बदलती जालुकबारी की तस्वीर कैसी है?

जालुकबारी केवल चुनाव और नारों के लिए ही नहीं जानी जाती। यह असम की शिक्षा और ज्ञान का एक बड़ा केंद्र भी है। यहां गोहाटी विश्वविद्यालय, असम इंजीनियरिंग कॉलेज और कई बड़े शोध संस्थान मौजूद हैं। ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर स्थित इस निर्वाचन क्षेत्र का शहरीकरण बहुत तेज़ गति से हुआ है। आधुनिक अपार्टमेंट, मॉल और सरायघाट पुल के साथ बेहतर कनेक्टिविटी ने इसकी शक्ल बदल दी है।

वोटरों की संख्या में भी यहां निरंतर वृद्धि देखी जा रही है। 2011 में यहां लगभग 1.67 लाख मतदाता थे, जो 2026 तक बढ़कर 2.06 लाख से अधिक हो चुके हैं। यहाँ के मतदाता जागरूक हैं और मतदान के प्रति उनका उत्साह हमेशा से ही जबरदस्त रहा है।

हिमंत के सामने इस बार कौन?

जैसे-जैसे 2026 के चुनाव नजदीक आ रहे हैं, जालुकबारी में एक बार फिर पुराने प्रतिद्वंद्वी आमने-सामने होंगे। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा अपनी छठी जीत की तलाश में हैं, जबकि उनके सामने कांग्रेस समर्थित विपक्षी गठबंधन ने रोमन चंद्र बोरठाकुर को उतारा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री के रूप में सरमा का मजबूत नेतृत्व और गुवाहाटी में हुए विकास कार्य इस सीट को भाजपा के लिए एक ‘सेफ बेट’ यानी सुरक्षित दांव बनाते हैं। हालांकि, विपक्ष ने इसे एक बड़ी चुनौती के रूप में लिया है। क्या 2026 में भी यह मुकाबला एकतरफा रहेगा या लोकतंत्र कोई नया मोड़ लेगा, यह देखना वाकई दिलचस्प होगा।

सस्ते Macbook के बाद अब सस्ता iPad ला रहा Apple! A18 चिप से होगा लैस…

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टेक दिग्गज एपल ने हाल ही में बजट लैपटॉप MacBook Neo भारत में लॉन्च किया है. अब ब्लूमबर्ग के मार्क गुरमन ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि कंपनी सस्ते आईपैड को लाने की तैयारी भी कर रही है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक नया iPad अब ज्यादा फास्ट और स्मार्ट बनने वाला है. इसमें नया A18 चिप मिलने की उम्मीद है, जो इसे एपल इंटेलिजेंस सपोर्ट देगा. इसका मतलब है कि अब बेस मॉडल iPad भी AI फीचर्स के साथ आएगा. यह बदलाव एपल के बजट टैबलेट को पहले से ज्यादा पावरफुल बना सकता है.

कब लॉन्च होगा नया iPad?

अपने ‘Power On’ न्यूजलेटर के लेटेस्ट एडिशन में मार्क गुरमन ने बताया कि नया iPad iOS 26.4 सॉफ्टवेयर रिलीज साइकल के साथ ही रिलीज होने की राह पर है. इसका मतलब है कि यह अप्रैल तक आ सकता है, हालांकि प्रोडक्शन की समय-सीमा के आधार पर इसकी रिलीज मई तक भी खिंच सकती है.

नए iPad में सबसे बड़ा बदलाव इसका प्रोसेसर होगा. Apple इसमें पुराने A16 चिप की जगह नया A18 चिप दे सकता है, जिससे डिवाइस की स्पीड और परफॉर्मेंस बेहतर हो जाएगी. यह अपग्रेड सिर्फ स्पीड तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि AI फीचर्स को भी सपोर्ट करेगा. अभी का बेस आईपैड एपल इंटेलिजेंस को सपोर्ट नहीं करता, लेकिन नया मॉडल इस कमी को दूर करेगा. इससे यूजर्स को स्मार्ट फीचर्स और बेहतर अनुभव मिलेगा.

मिलेगा Apple Intelligence सपोर्ट

एपल अपने सभी डिवाइस में धीरे-धीरे AI फीचर्स जोड़ रहा है. नया iPad भी इसी दिशा में एक कदम होगा. एपल इंटेलिजेंस सपोर्ट मिलने के बाद यूजर्स को बेहतर सुझाव, स्मार्ट टूल्स और ज्यादा पर्सनलाइज्ड एक्सपीरियंस मिलेगा. इससे पढ़ाई, काम और एंटरटेनमेंट सभी चीजें ज्यादा आसान और तेज हो सकती हैं. खास बात यह है कि अब बजट iPad भी प्रीमियम फीचर्स के करीब पहुंच जाएगा.

लॉन्च टाइमलाइन और संभावित देरी

रिपोर्ट के मुताबिक यह नया iPad iOS 26.4 अपडेट के साथ लॉन्च हो सकता है. इसका मतलब है कि इसे अप्रैल या मई 2026 के आसपास पेश किया जा सकता है. हालांकि, प्रोडक्शन या सप्लाई से जुड़ी दिक्कतों के कारण लॉन्च डेट आगे भी बढ़ सकती है. एपल आमतौर पर अपने प्रोडक्ट्स को सही समय पर लॉन्च करने के लिए टेस्टिंग और प्लानिंग पर खास ध्यान देता है.

डिजाइन वही, अंदर से होगा बड़ा बदलाव

इस बार iPad के डिजाइन में ज्यादा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा. एपल अपनी पुरानी डिजाइन लैंग्वेज को ही जारी रख सकता है. हालांकि अंदर से यह डिवाइस पूरी तरह अपग्रेड होगा. कुछ रिपोर्ट्स में एपल के अपने मॉडेम और नेटवर्किंग हार्डवेयर की भी चर्चा है, जिससे कनेक्टिविटी बेहतर हो सकती है. यानी बाहर से भले ही iPad पहले जैसा दिखे, लेकिन अंदर से यह काफी एडवांस हो जाएगा.

मौजूदा iPad से कितना अलग होगा नया मॉडल

अभी भारत में मिलने वाला iPad A16 चिप के साथ आता है और इसकी कीमत करीब 59,900 रुपये से शुरू होती है. इसमें 11-इंच डिस्प्ले, 12MP कैमरा, Wi-Fi 6E और 5G सपोर्ट जैसे फीचर्स मिलते हैं. लेकिन इसमें एपल इंटेलिजेंस का सपोर्ट नहीं है. नया iPad इस कमी को दूर करेगा और बेहतर परफॉर्मेंस के साथ आएगा. ऐसे में यह अपग्रेड यूजर्स के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकता है.

UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त! केंद्र और यूजीसी को थमाया नोटिस, क्या समाज बांटने की हो रही कोशिश?

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Supreme Court on UGC Regulations: सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ दायर की गई याचिका पर केंद्र सरकार, यूजीसी और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ने मूल याचिका के साथ टैग कर दिया है।

याचिका भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सांसद कुंवर हरिवंश सिंह द्वारा दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने यूजीसी पर आरोप लगाया है कि इसके माध्यम से समाज को बांटने की कोशिश की जा रही है। याचिका में यह भी कहा गया है कि जातिगत भेदभाव केवल आरक्षित वर्ग तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह किसी भी वर्ग के साथ हो सकता है, और इसलिए इसे कुछ समुदायों तक ही सीमित नहीं किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी रोक

इससे पहले, सुप्रीम कोर्टने 29 जनवरी को यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने) विनियमों पर रोक लगाई थी, जिन्हें 13 जनवरी को अधिसूचित किया गया था। अदालत ने इसे “प्रारंभिक रूप से अस्पष्ट” बताते हुए कहा था कि इसके “बहुत व्यापक परिणाम” हो सकते हैं और यह समाज को बांटने का कारण बन सकता है। इस फैसले के बाद, इन नियमों के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे।

जयपुर में करणी सेना का विरोध

हाल ही में, जयपुर में राजपूत करणी सेना ने यूजीसी के इन नए विनियमों के खिलाफ प्रदर्शन किया था और इन नियमों को वापस लेने की मांग की थी। संगठन के अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने कहा था कि वे युवाओं के साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं होने देंगे।

क्यों हो रहा विरोध?

याचिकाओं में यह आपत्ति उठाई गई है कि इन नियमों में जाति-आधारित भेदभाव केवल अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के सदस्यों तक ही सीमित किया गया है। विरोध करने वालों का कहना है कि इन नियमों में भेदभाव की परिभाषा से ऐसा लगता है कि जातिगत भेदभाव सिर्फ इन वर्गों के खिलाफ होता है। सामान्य वर्ग के छात्रों को ना तो कोई संस्थागत संरक्षण दिया गया है, और न ही उनके लिए कोई शिकायत निवारण प्रणाली (grievance redressal system) की व्यवस्था की गई है।

Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि छठा दिन, मां कात्यायनी की पूजा से चमकेगा भाग्य. जानें शुभ मुहूर्त और सही पूजन विधि..

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Navratri 6th day Worship: चैत्र नवरात्रि का छठा दिन मां कात्यायनी को समर्पित है, जो साहस और विजय की देवी मानी जाती हैं. इस साल मां कात्यायनी की पूजा 24 मार्च 2026 को की जाएगी. शास्त्रों के अनुसार, महर्षि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर मां दुर्गा ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया था, इसलिए इनका नाम कात्यायनी पड़ा.

मान्यता है कि जो भक्त सच्ची श्रद्धा से

नवरात्रि में मां की उपासना करते हैं, उनके जीवन से डर और बाधाएं दूर हो जाती हैं. विशेषकर विवाह में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए मां कात्यायनी की पूजा अचूक मानी जाती है.

पूजा का शुभ मुहूर्त और आरती का समय

24 मार्च को मां कात्यायनी की पूजा के लिए सुबह का समय सबसे उत्तम है. सूर्योदय के साथ ही भक्त अपनी साधना शुरू कर सकते हैं.

सुबह का शुभ समय:

सुबह 06:21 से प्रातः 08:30 तक.

अभिजीत मुहूर्त:

दोपहर 12:03 PM से 12:52 PM तक (यह समय विशेष संकल्पों के लिए श्रेष्ठ है).

आरती का समय:

शाम को सूर्यास्त के समय, यानी लगभग शाम 06:30 के आसपास मां की आरती करना बहुत ही फलदायी होता है.

कैसे करें मां कात्यायनी की पूजा?

मां कात्यायनी को पीला और लाल रंग बहुत प्रिय हैं. पूजा शुरू करने से पहले स्नान कर साफ और संभव हो तो पीले वस्त्र धारण करें. सबसे पहले कलश देवता और गणेश जी का ध्यान करें, फिर मां की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं. मां को पीले फूल, पीली चूड़ियां और हल्दी की गांठें अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है. इस दिन मां को शहद का भोग जरूर लगाएं, क्योंकि यह उनका सबसे प्रिय भोग है. पूजा के दौरान पूरी श्रद्धा से आरती करें और भगवान का आभार व्यक्त करें. यह संयम और नियम आपके जीवन के सही संचालन में मदद करते हैं.

मंत्र और मानसिक शांति

मां कात्यायनी की पूजा के समय “ॐ देवी कात्यायन्यै नमः” मंत्र का जाप करना मन को एकाग्र करता है. जो कन्याएं अपने विवाह के लिए प्रार्थना कर रही हैं, उनके लिए यह दिन बहुत महत्वपूर्ण है. भक्ति के इन क्षणों में खुद को मां के चरणों में समर्पित कर दें, इससे घर के क्लेश दूर होते हैं और समृद्धि का वास होता है. जब आप सात्विक भाव से पूजा करते हैं, तो मानसिक शांति अपने आप मिलने लगती है. भगवान को धन्यवाद दें कि उन्होंने आपको इस आध्यात्मिक यात्रा का हिस्सा बनाया. मां कात्यायनी का आशीर्वाद आपके साहस को बढ़ाए और आपके जीवन को खुशियों से भर दें.

Kolathur Assembly Profile: 15 साल से CM स्टालिन का अभेद किला, अबकी बदल जाएगी कोलाथुर की हवा? जानें पूरा समीकरण…

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चेन्नई की घनी आबादी वाली गलियों के बीच स्थित ‘कोलाथुर’ कोई साधारण इलाका नहीं है। यह वह सीट है जिसने तमिलनाडु को उसका वर्तमान मुख्यमंत्री दिया है। एम.के. स्टालिन यहां से लगातार तीन बार जीत चुके हैं, लेकिन एक मुख्यमंत्री का क्षेत्र होने के बावजूद यहां की चुनौतियां किसी आम बस्ती से कम नहीं हैं। ऊंची इमारतों और बढ़ते व्यापारिक केंद्रों के बीच यहां का आम नागरिक आज भी बारिश के पानी और ट्रैफिक जाम से जूझ रहा है। कोलाथुर की यह कहानी केवल सत्ता के गलियारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन हजारों परिवारों के संघर्ष की भी है जो हर मानसून में बाढ़ के साये में जीने को मजबूर हैं।

कोलाथुर की राजनीतिक अहमियत.कोलाथुर विधानसभा सीट आज पूरे

तमिलनाडु की सियासत का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बनी हुई है। डीएमके (DMK) प्रमुख एम.के. स्टालिन ने साल 2011, 2016 और फिर 2021 में यहां से जीत की हैट्रिक लगाई है। पिछले चुनाव के नतीजों पर नजर डालें तो स्टालिन ने 1,05,522 वोट हासिल कर 60.9% के बड़े वोट शेयर के साथ एकतरफा जीत दर्ज की थी। उनके सामने एडीएमके के आदिराजाराम जैसे प्रतिद्वंद्वी थे, जिन्हें मात्र 35,138 वोट मिले। यह आंकड़े साबित करते हैं कि यह सीट न केवल डीएमके का अभेद्य किला है, बल्कि मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत साख का प्रतीक भी है।

बढ़ती आबादी के बोझ तले दबता बुनियादी ढांचा

कभी अर्ध-औद्योगिक क्षेत्र रहा कोलाथुर आज एक विशाल शहरी आवासीय केंद्र में बदल चुका है। पेराम्बूर, विल्लीवक्कम और माधवराम के बीच स्थित यह इलाका अब बड़े अपार्टमेंट समूहों और व्यावसायिक कॉरिडोर से भरा हुआ है। यहां निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों के साथ-साथ छोटे व्यापारी और प्रवासी लोग बड़ी संख्या में रहते हैं। तेजी से होते इस शहरीकरण और बढ़ते अपार्टमेंट कल्चर ने यहां के बुनियादी ढांचे पर भारी दबाव डाल दिया है। यहाँ की सकरी अंदरूनी सड़कें और पुरानी पड़ चुकी सीवर लाइनें अब इस बढ़ती आबादी का बोझ उठाने में नाकाम साबित हो रही हैं।

क्या कोलाथुर को मिल जाएगा स्थायी समाधान?

कोलाथुर के मतदाताओं के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द मानसून के दौरान आने वाली भीषण बाढ़ है। यहां के निवासियों की प्राथमिकता आज भी बाढ़ नियंत्रण और पानी की सुचारू सप्लाई है। खराब जल निकासी व्यवस्था, पुराने पड़ चुके ड्रेनेज सिस्टम पर अतिक्रमण और कचरा प्रबंधन की खामियां यहां के जीवन को कठिन बना देती हैं। व्यापारियों के लिए पार्किंग की कमी एक बड़ी समस्या है, तो वहीं बुजुर्ग पैदल चलने के लिए सुरक्षित फुटपाथ और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग करते हैं। एक मुख्यमंत्री का क्षेत्र होने के नाते यहाँ के लोगों की उम्मीदें बहुत ज्यादा हैं, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी सुधार की मांग कर रही है।

कोलाथुर की बदली हुई चुनावी हवा

इस क्षेत्र की राजनीति अब केवल पारंपरिक नारों तक सीमित नहीं रह गई है। यहां की जागरूक जनता अब ‘सर्विस डिलीवरी’ और बेहतर जीवन स्तर को ही पैमाना मानती है। कोलाथुर में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) और अपार्टमेंट निकायों की भूमिका बढ़ती जा रही है, जो राजनीतिक राय बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। एक्सपर्ट्स की मानें तो यहां का वोटर उसी प्रतिनिधि को पसंद करता है जो न केवल जमीन पर सक्रिय हो, बल्कि नागरिक एजेंसियों के बीच समन्वय बनाकर समस्याओं का समाधान करने में सक्षम हो। आने वाले समय में यहाँ की चुनावी दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार इन बुनियादी नागरिक समस्याओं को कितनी गंभीरता से सुलझा पाती है।

कोबरा के ‘सुपर विलेन’; 6 ऐसे जानवर, जिनमें ‘नागराज’ को नजर आते हैं ‘यमराज’

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6 Animals That Hunt Cobras:

यूं तो कोबरा को देखकर अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाते हैं, लेकिन कुदरत के अखाड़े में कुछ ऐसे भी सूरमा हैं, जिनके सामने आते ही जहरीले नागराज की भी बोलती बंद हो जाती है. क्योंकि, ये शिकारी न केवल कोबरा के जहर को बेअसर करने का दम रखते हैं, बल्कि बड़े स्वैग के साथ उसे निपटा भी देते हैं. आइए जानते हैं उन 6 शिकारियों के बारे में, जिनमें कोबरा को साक्षात यमराज दिखाई देते हैं.

सांपों के लिए ‘यमराज’

Mongoose:

Mongoose Vs. Cobra | Smithsonian Channel

नेवले और सांप की दुश्मनी तो जगजाहिर है. लेकिन ये सिर्फ कहानी नहीं है. नेवला असल में सांपों के लिए ‘यमराज’ है. इसकी रगों में कोबरा के जहर का ‘एंटी-डोज’ पहले से ही दौड़ता है. यह बिजली की रफ्तार से कोबरा को ऐसा नचाता है कि सांप थककर चूर हो जाता है, और फिर एक ही वार में नेवला उसका गेम ओवर कर देता है.

अपनों को ही निपटा देता है ये

King Cobra: किंग कोबरा का वैज्ञानिक नाम

Ophiophagus Hannah

Species Spotlight: KING COBRA (Ophiophagus hannah) - YouTube

होता है, जिसका मतलब है ‘सांप खाने वाला’. इसे दूसरे सांपों से कोई हमदर्दी नहीं होती. यह अपने ही बिरादरी के छोटे कोबरा को देखते ही खाना समझकर उन पर टूट पड़ता है.

धरती के 6 ऐसे अनोखे जीव, जो भूख लगने पर खुद को ही खा जाते हैं!

दुनिया का सबसे निडर शिकारी!

Honey Badger:

Honey Badgers: The Crazy Truth - YouTube

हनी बैजर को दुनिया का सबसे निडर जानवर माना जाता है. कोबरा इसे डस भी ले तो यह मरता नहीं, बल्कि थोड़ी देर की नींद लेता है. जहर का असर कम होते ही यह दोबारा उठता है और उसी सांप को चबाना शुरू कर देता है, जिसने इसे काटा था. इसकी मोटी खाल किसी बुलेटप्रूफ जैकेट से कम नहीं है.

धरती की 6 सबसे घातक चींटियां, जहर ऐसा कि इंसानों को भी सुला दे मौत की नींद

‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की मास्टर

Eagle: कोबरा जमीन पर कितना भी फन फैला ले, लेकिन आसमान से आने वाली इस मौत का उसके पास कोई इलाज नहीं है. चील अपनी दूरबीन जैसी आंखों से कोबरा को टारगेट करती है, और बिजली की स्पीड से नीचे आकर अपने फौलादी पंजों से सांप का काम तमाम कर देती है. कोबरा को संभलने का मौका तक नहीं मिलता.

सिर्फ 1 दिन की जिंदगीमिलिए 5 ऐसे जीव से जिनके पास कल नहीं होता!

इसका किक है जानलेवा

Secretary Bird: यह पक्षी अपनी जोरदार किक के लिए मशहूर है. इसके पैर इतने लंबे और मजबूत होते हैं कि इसकी एक ‘किक’ कोबरा के फन को मिट्टी में मिला देती है. यह पक्षी मात्र 15 मिलीसेकंड में अटैक करता है. यानी जब तक कोबरा कुछ समझ पाए, तब तक उसका काम तमाम हो चुका होता है.

THE SECRETARY BIRD : Nature’s Most Powerful Hunter in Action! | Animal  Documentary

Viral स्टेज पर दुल्हन के गले लग फूट-फूटकर रोया दूल्हा, वायरल हुआ इमोशनल वीडियो

पानी का खूंखार ‘दैत्य’

Crocodile: अगर कोबरा गलती से नदी की तरफ निकल जाए, तो वहां उसकी मुलाकात ‘पानी के दैत्य’ यानी मगरमच्छ से होती है. मगरमच्छ की चमड़ी इतनी सख्त होती है कि कोबरा के दांत उसे छू भी नहीं पाते. मगरमच्छ अपने जबड़ों से कोबरा को ऐसे चबा जाता है, मानो नूडल्स खा रहा हो.

Wildlife | Episode 2: Crocodiles, Alligators, Caimans & Gharials | Free  Documentary Nature

Viral: मां को बैसाखी पर देख बेहाल हुआ बच्चा, लगा कंधों पर उठाने; वीडियो देख भावुक हुई जनता

ICC Players of the Month: भारत-पाकिस्तान के खिलाड़ियों ने एक साथ जीता ये अवॉर्ड, हो गया कमाल…

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आईसीसी ने फरवरी महीने में बेस्ट परफॉर्मेंस करने वाले खिलाड़ियों को आईसीसी प्लेयर्स ऑफ द मंथ के अवॉर्ड से नवाजा है. इस बार ये अवॉर्ड भारत और पाकिस्तान दोनों ही टीमों के खिलाड़ियों के मिला है.

मेंस क्रिकेट में ये अवॉर्ड पाकिस्तान के ओपनर साहिबजादा फरहान को मिला है, जिन्होंने टी20 वर्ल्ड कप 2026 में सबसे ज्यादा रन बनाए. वहीं महिला क्रिकेट में ये अवॉर्ड अरुंधति रेड्डी को मिला है. दाएं हाथ की इस तेज गेंदबाज ने फरवरी में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर खेली गई टी20 सीरीज में कमाल प्रदर्शन किया था.

साहिबजादा फरहान को इसलिए मिला अवॉर्ड

पाकिस्तान के ओपनर

साहिबजादा फरहान

ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 में बेहतरीन प्रदर्शन किया था. भले ही उनकी टीम पाकिस्तान सुपर 8 से आगे नहीं बढ़ पाई लेकिन इस बल्लेबाज ने 6 पारियों में 76.6 की औसत से 383 रन बनाए. फरहान ने टी20 वर्ल्ड कप में 2 शतक भी लगाए थे. उनके बल्ले से 18 छक्के और 37 चौके भी निकले. साहिबजादा का स्ट्राइक रेट भी 160 से ज्यादा का रहा.

अरुंधति को इसलिए मिला अवॉर्ड

अरुंधति रेड्डी को इसलिए प्लेयर ऑफ द मंथ के अवॉर्ड से नवाजा गया क्योंकि उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हुई टी20 सीरीज में बेहतरीन गेंदबाजी की थी. उस सीरीज के तीन मैचों में अरुंधति ने 8 विकेट चटकाए. सिडनी में उन्होंने 4 ओवर में महज 222 रन देकर 4 विकेट हासिल किए थे. कैनबरा टी20 में उन्होंने 2 और एडिलेड टी20 में भी 2 विकेट हासिल किए.

प्लेयर ऑफ द मंथ पर भारत का दबदबा

बता दें आईसीसी प्लेयर ऑफ द मंथ का अवॉर्ड सबसे ज्यादा शुभमन गिल ने जीता है. ये खिलाड़ी चार बार इस अवॉर्ड पर कब्जा कर चुका है. शुभमन गिल ने जनवरी 2023, सितंबर 2023, फरवरी 2025 और जुलाई 2025 में ये अवॉर्ड जीता था. जसप्रीत बुमराह, श्रेयस अय्यर 2-2 बार ये अवॉर्ड जीत चुके हैं. पाकिस्तान के लिए बाबर आजम ने 3 बार ये अवॉर्ड अपने नाम किया है. हैरी ब्रूक और कामिंदु मेंडिस ने 2-2 बार ये मुकाम हासिल किया है.

‘युद्ध ने भारत के सामने भी चुनौतियां खड़ी की.’, मिडिल ईस्ट जंग पर PM मोदी का बड़ा बयान; बताया सरकार का प्लान…

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PM Narendra Modi In Lok Sabha: पश्चिम एशिया में जारी जंग का असर अब भारत पर भी साफ दिखने लगा है। इसी मुद्दे पर संसद में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इस युद्ध ने भारत के सामने भी कई बड़ी और अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

उन्होंने साफ किया कि सरकार आर्थिक, सुरक्षा और मानवीय, तीनों स्तर पर इस संकट से निपटने के लिए पूरी तैयारी के साथ काम कर रही है।

प्रधानमंत्री ने लोकसभा में कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति बेहद चिंताजनक है और यह संकट तीन हफ्ते से ज्यादा समय से जारी है। इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए भी यह स्थिति आसान नहीं है और कई मोर्चों पर चुनौतियां सामने आई हैं।

खाड़ी देशों में 1 करोड़ भारतीय

पीएम मोदी ने लोकसभा में बोलते हुए कहा कि जिस क्षेत्र में युद्ध चल रहा है, वह वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम है। इसके साथ ही करीब 1 करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में रहते और काम करते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 3 लाख 75 हजार से ज्यादा भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है। सिर्फ ईरान से ही करीब 1 हजार भारतीयों को निकाला गया, जिनमें 700 से ज्यादा मेडिकल छात्र शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ लोगों की मौत और कई के घायल होने की दुखद खबरें भी सामने आई हैं।

ईंधन को लेकर सरकार का प्लान

पीएम मोदी ने कहा कि भारत में कच्चा तेल, गैस और फर्टिलाइजर का बड़ा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आता है, जो इस समय संकट में है। ऐसे में सरकार ने पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई को सुचारू बनाए रखने के लिए खास रणनीति तैयार की है। उन्होंने बताया कि देश अपनी जरूरत का लगभग 60% एलपीजी आयात करता है, इसलिए घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दी जा रही है और उत्पादन भी बढ़ाया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब पहले से ज्यादा देशों से ऊर्जा आयात कर रहा है। पहले जहां 27 देशों से आयात होता था, अब यह बढ़कर 41 देशों तक पहुंच गया है। साथ ही देश के पास 53 लाख मैट्रिक टन से ज्यादा तेल का भंडार मौजूद है।

खेती पर भी युद्ध का असर

पीएम मोदी ने बताया कि पिछले कुछ सालों में इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने से भी मदद मिली है और अब पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाया जा रहा है। इसके अलावा रेलवे के बिजलीकरण से भी ऊर्जा पर दबाव कम हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि युद्ध का असर खेती पर भी पड़ सकता है, लेकिन देश में फिलहाल पर्याप्त खाद्यान्न मौजूद है। किसानों के लिए खाद की पर्याप्त व्यवस्था की गई है और 6 नए यूरिया प्लांट शुरू किए गए हैं, ताकि खेती पर असर कम से कम पड़े।

पीएम मोदी

ने कहा कि सरकार लगातार वैश्विक सहयोगियों के साथ संपर्क में है ताकि समुद्री रास्ते सुरक्षित रहें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत इस संकट का मजबूती से सामना करेगा और देश की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जा रहा है।

बचा हुआ इंटरनेट का डेटा अगले दिन रोलओवर हो, संसद में राघव चड्ढा ने उठाया मुद्दा…

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AAP के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि आज संसद में ‘जीरो आवर’ के दौरान मैंने इस्तेमाल न हुए मोबाइल डेटा को आगे ले जाने से जुड़ा एक मुद्दा उठाया. यूजर्स के लिए मोबाइल डेटा रोलओवर की अनुमति होनी चाहिए.

साथ ही यूजर्स के बीच मोबाइल डेटा ट्रांसफर की अनुमति भी होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि ये मुद्दा देश के लोगों और आपसे जुड़ा हुआ है.

राघव ने बताया कि अपने प्लान के मुताबिक, हर दिन की डेली डेटा लिमिट मिलती है, जो डेढ़, 2 जीबी के रूप में होती है. लेकिन जैसे ही रात 12 बजते हैं जितना बचा हुआ डेटा है वो भी एक्सपायर हो जाता है. उसे अगले दिन के लिए कैरी फॉरवर्ड नहीं किया जाता है. राघव चड्ढा ने कहा कि आपसे पैसा तो पूरे डेटा का लिया जाता है लेकिन जितना बचा हुआ डेटा है वो कंपनियां खुद सेव कर लेती हैं.

पेट्रोल का दिया उदाहरण

राघव ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह से महीने का पेट्रोल भराने पर अगर 15 में से 5 लीटर पेट्रोल बचा रह जाता है तो पेट्रोल पंप का मालिक तो ये नहीं कहता कि बचा हुआ 5 लीटर का पेट्रोल वापस कर दो. जिस तरह से आप पूरा पेट्रोल इस्तेमाल करेंगे ठीक उसी तरह से डेटा को भी पूरी तरह से इस्तेमाल करने का भी अधिकार है. उन्होंने कहा कि इसलिए डेटा रोल ओवर की भी अनुमति दी जानी चाहिए.

दुनिया के इन देशों में है

उन्होंने कहा कि जो एक दिन के डेटा को इस्तेमाल नहीं कर पाए हैं वो अगले दिन के डेटा लिमिट में जुड़ जाना चाहिए. एक्सपायर नहीं होना चाहिए. दुनिया के कई देशों अमेरिका, यूरोप, नीदरलैंड, ऑस्ट्रेलिया में रोलवोर किया जाता है और इसकी अनुमति है. उन्होंने कहा कि एक मांग और ये है कि जैसे हम एक दूसरे के फोन में पैसा ट्रांसफर करते हैं वैसे डेटा ट्रांसफर करना भी अलाऊ होना चाहिए.