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टीबी मुक्त भारत अभियान को लेकर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों एवं मुख्य सचिवों से की चर्चा…

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केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये नई दिल्ली से देश के सभी राज्यों के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रियों से टीबी मुक्त भारत अभियान को लेकर व्यापक चर्चा की। छत्तीसगढ़ से वीडियो कॉन्फ्रेंस से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने भाग लिया और उन्होंने टीबी मुक्त भारत के तहत छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बताया कि छत्तीसगढ़ में तेजी से कई गांव एवं ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त हुए है। वीडियो कॉन्फ्रेंस में मुख्य सचिव श्री विकासशील भी छत्तीसगढ़ से शामिल हुए। वीडियो कॉन्फ्रेंस में सभी राज्यों के मुख्य सचिव भी शामिल हुए।

श्री नड्डा ने कहा कि टीबी मुक्त भारत के लिए हम सभी केन्द्र एवं राज्यों की सरकारें आपसी समन्वय से कार्य कर रहे है। टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को सभी के सहयोग से पूरा कर लिया जाएगा। केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने टीबी के मरीजों की तेजी से पहचान करने, इलाज में नियमिता, हाई रिस्क वाले क्षेत्रों में मरीजों की जांच एवं ईलाज तथा त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना जरूरी है। इसी तरह से जनप्रतिनिधियों के सहयोग एवं जनसहभागिता से कार्य करने पर बल दिया है। वीडियो कॉन्फ्रेंस में केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के अधिकारी भी शामिल हुए।

“छत्तीसगढ़ में हो रहा है तय मानकों के अनुसार लगाए जा रहे है विद्युत स्मार्ट मीटर”

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“विद्युत वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी आधुनिक और उपभोक्ता हितैषी बनने की पहल”

“अब गलत मीटर रीडिंग पर लगेगा विराम”

स्मार्ट मीटर किसी राज्य सरकार की अलग योजना नहीं, बल्कि भारत सरकार की पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना के तहत पूरे देश में लागू की गई राष्ट्रीय पहल है। इसी योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और निर्धारित मानकों के अनुसार छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों में स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। राज्य सरकार इस केंद्रीय योजना का क्रियान्वयन करते हुए विद्युत वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और उपभोक्ता हितैषी बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।

केंद्र सरकार ने जुलाई 2021 में देशभर में स्मार्ट मीटरिंग योजना लागू करने का निर्णय लिया था। इसका उद्देश्य बिजली वितरण कंपनियों की कार्यक्षमता बढ़ाना, तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियों में कमी लाना, बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता सुधारना तथा उपभोक्ताओं को सटीक बिलिंग की सुविधा उपलब्ध कराना है।

छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर परियोजना लागू करने का निर्णय  पूर्ववर्ती सरकार वर्ष 2022 में लिया गया था। परियोजना के लिए टेंडर जारी होने और कार्यादेश दिए जाने के बाद फरवरी 2024 से स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य प्रारंभ हुआ। वर्तमान में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पूर्व में जारी निविदाओं, अनुबंधों और कार्यादेशों के आधार पर ही परियोजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है।

प्रदेश में लगभग 55 लाख उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर लगाए जाने का लक्ष्य है, जिनमें से करीब 40 लाख मीटर स्थापित किए जा चुके हैं।

स्मार्ट मीटर से उपभोक्ताओं को कई सुविधाएं मिल रही हैं। बिजली की खपत का आंकड़ा हर 30 मिनट में उपलब्ध होता है, जिससे उपभोक्ता अपने उपयोग पर बेहतर निगरानी रख सकते हैं। मीटर रीडर द्वारा गलत रीडिंग दर्ज होने की संभावना समाप्त हो जाती है और बिलिंग अधिक सटीक होती है।

इसके अलावा स्मार्ट मीटर के माध्यम से बिजली भार, वोल्टेज और ऊर्जा खपत सहित अन्य तकनीकी आंकड़े वास्तविक समय में प्राप्त होते हैं। इससे विद्युत वितरण कंपनी को नेटवर्क की स्थिति का लगातार विश्लेषण करने, ओवरलोडिंग, वोल्टेज में उतार-चढ़ाव अथवा आपूर्ति संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान कर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई करने में सुविधा मिलती है। इसका लाभ अंततः उपभोक्ताओं को अधिक विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति के रूप में मिलता है।

ऊर्जा विभाग का कहना है कि स्मार्ट मीटरिंग का उद्देश्य उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालना नहीं, बल्कि बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाना है। यह पूरी प्रक्रिया केंद्र सरकार की योजना और उसके दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित की जा रही है।

cg” किसान हितैषी नीतियों ने दिलाई छत्तीसगढ़ को नई पहचान…

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  • छत्तीसगढ़ के कृषि विकास मॉडल का अध्ययन करने पहुंचा महाराष्ट्र का विधायक दल
  • मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से महाराष्ट्र के विधायक प्रतिनिधिमंडल ने की सौजन्य मुलाकात
  • छत्तीसगढ़ की धान खरीदी व्यवस्था, किसान हितैषी योजनाओं और कृषि विकास मॉडल का किया अध्ययन
  • छत्तीसगढ़ की धान खरीदी व्यवस्था की प्रतिनिधिमंडल ने की सराहना
  • मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से महाराष्ट्र के विधायक प्रतिनिधिमंडल ने की सौजन्य मुलाकात

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में महाराष्ट्र के विधायक प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की।प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था, किसानों के हित में संचालित योजनाओं, कृषि क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों के संबंध में विस्तार से जानकारी ली। मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रतिनिधिमंडल का आत्मीय स्वागत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान राज्य है और यहां की बड़ी आबादी खेती-किसानी पर निर्भर है। राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को लाभकारी बनाने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को बस्तर की समृद्ध आदिवासी कला एवं संस्कृति के प्रतीक बस्तर आर्ट का स्मृति-चिन्ह भेंट कर उनका स्वागत किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार और राज्य सरकार किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए समन्वित रूप से कार्य कर रही हैं। छत्तीसगढ़ में किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के साथ-साथ कृषि निवेश में सहायता, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, आधुनिक तकनीकों का उपयोग और फसल विविधीकरण को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है। राज्य सरकार द्वारा खरीफ विपणन वर्ष में लगभग 141 लाख मीट्रिक टन धान का उपार्जन किया गया है, जो देश में धान खरीदी के सबसे बड़े अभियानों में से एक है। उन्होंने कहा कि किसानों की सुविधा के लिए प्रदेशभर में लगभग 2700 धान उपार्जन केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित तरीके से धान की खरीदी की जाती है। धान के सुरक्षित भंडारण के लिए संग्रहण केंद्रों और गोदामों का व्यापक नेटवर्क विकसित किया गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके लिए पंजीयन से लेकर धान तौल, परिवहन और भुगतान तक की प्रक्रिया को तकनीक आधारित और सरल बनाया गया है। किसानों को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने के साथ ही विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा रहा है। प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री ने कृषक उन्नति योजना सहित राज्य सरकार द्वारा किसानों के हित में संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार खेती को अधिक लाभकारी बनाने तथा किसानों की आय में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। कृषि के साथ-साथ पशुपालन, मत्स्य पालन और अन्य आयवर्धक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीण परिवारों की आमदनी में वृद्धि हो रही है।

चर्चा के दौरान महाराष्ट्र के विधायक प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने बताया कि छत्तीसगढ़ से लगे महाराष्ट्र के चार जिलों में बड़ी संख्या में किसान धान की खेती करते हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धान खरीदी व्यवस्था, किसानों को मिलने वाला समर्थन और प्रशासनिक प्रबंधन अत्यंत प्रभावी एवं अनुकरणीय है। राज्य में किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य उपलब्ध कराने तथा खरीदी प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए किए गए प्रयास सराहनीय हैं। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि छत्तीसगढ़ का धान खरीदी मॉडल किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण का सफल उदाहरण है। उन्होंने इस मॉडल के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर महाराष्ट्र के धान उत्पादक क्षेत्रों में भी ऐसे प्रयासों को आगे बढ़ाने की बात कही।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्यों के बीच अनुभवों और सफल मॉडलों का आदान-प्रदान देश के कृषि क्षेत्र को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के अध्ययन भ्रमण से राज्यों को एक-दूसरे के सफल अनुभवों से सीखने और उन्हें स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अपनाने का अवसर मिलता है। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, महाराष्ट्र के विधायक डॉ. परिणय फुके, श्री विनोद अग्रवाल, श्री राजू कारेमोरे एवं श्री संजय पुराम, छत्तीसगढ़ मार्कफेड के अध्यक्ष श्री शशिकांत द्विवेदी, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत सहित वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

” जनकल्याणकारी योजनाओं के संतृप्तिकरण का प्रदेशव्यापी अभियान: सुघ्घर छत्तीसगढ़”

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  • मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी पहल : सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान से सुशासन का लाभ पहुंचेगा हर परिवार तक
  • नियद नेल्लानार मॉडल का राज्यव्यापी विस्तार: 23 जिलों में 31 जनकल्याणकारी योजनाओं का होगा संतृप्तिकरण’
  • तकनीक आधारित निगरानी, विभागीय अभिसरण और जन-केंद्रित सेवा प्रदाय से मजबूत होगा विकसित छत्तीसगढ़ का आधार
  • जन-जन तक सुशासन, घर-घर तक विकास: सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान होगा प्रारंभ

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार सुशासन को जन-जन तक पहुंचाने और प्रत्येक पात्र परिवार को शासन की योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। इसी उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान प्रारंभ किया जा रहा है। यह अभियान प्रदेश के 23 जिलों में 31 प्रमुख हितग्राहीमूलक योजनाओं के संतृप्तिकरण का व्यापक कार्यक्रम होगा, जिसके माध्यम से योजनाओं की पहुंच, प्रभावशीलता और पारदर्शिता को नई मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का आधार केवल अधोसंरचना का विकास नहीं, बल्कि प्रत्येक परिवार तक शासन की योजनाओं की प्रभावी और समयबद्ध पहुंच सुनिश्चित करना है। सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं संचालित करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनके सकारात्मक परिणाम प्रत्येक परिवार के जीवन में दिखाई दें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता ऐसी शासन व्यवस्था स्थापित करना है, जिसमें नागरिकों को योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए अनावश्यक भटकना न पड़े, बल्कि शासन स्वयं पात्र हितग्राहियों तक पहुंचे और उन्हें योजनाओं से जोड़े।  ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़’ इसी सोच का विस्तार है।

’नियद नेल्लानार की सफलता से प्रेरित नई पहल’

वर्ष 2024 से बस्तर संभाग  में संचालित ’नियद नेल्लानार’ योजना ने शासन और जनता के बीच विश्वास का नया सेतु निर्मित किया है।अभिसरण आधारित सेवा प्रदाय के माध्यम से इस योजना ने दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में शासन की उपस्थिति को मजबूत किया तथा पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित की। योजना की सफलता को देखते हुए इसे नियद नेल्लानार 2.0 के रूप में 10 जिलों तक विस्तारित किया गया। अब इसी सफल मॉडल को प्रदेश के शेष 23 जिलों में लागू करते हुए सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान प्रारंभ किया जा रहा है।

यह अभियान रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और सरगुजा संभाग के 23 जिलों में संचालित होगा और ग्रामीण परिवारों को शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने का कार्य करेगा। सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान अंतर्गत  रायपुर संभाग के रायपुर, बलौदाबाजार- भाटापारा, धमतरी एवं महासमुंद जिले; बिलासपुर संभाग के बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर- चांपा, मुंगेली, रायगढ़, सक्ती, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही तथा सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले; दुर्ग संभाग के दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, कबीरधाम (कवर्धा) एवं राजनांदगांव जिले तथा सरगुजा संभाग के सरगुजा, कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, जशपुर एवं मनेंद्रगढ़- चिरमिरी-भरतपुर जिले शामिल हैं।

’सुशासन से संतृप्ति की ओर’

सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान का मूल उद्देश्य विभिन्न विभागों की योजनाओं को एक साझा मंच पर लाकर पात्र हितग्राहियों तक उनका शत-प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करना है।  सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान विभिन्न विभागों के बीच अभिसरण स्थापित करते हुए एक ऐसी व्यवस्था विकसित करेगा, जिसमें योजनाओं की जानकारी, पात्रता, प्रगति और संतृप्तिकरण की स्थिति एकीकृत रूप से उपलब्ध होगी।

’31 जनकल्याणकारी योजनाओं का होगा संतृप्तिकरण’

अभियान के अंतर्गत सामाजिक सुरक्षा, आवास, रोजगार, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, कृषि, कौशल विकास तथा बुनियादी नागरिक सेवाओं से जुड़ी 31 प्रमुख योजनाओं को शामिल किया गया है। इनमें मनरेगा जॉब कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, जल जीवन मिशन, राशन कार्ड एवं प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, आयुष्मान भारत योजना, वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, जननी सुरक्षा योजना, मिशन इंद्रधनुष, महतारी वंदन योजना, जन-धन योजना, कौशल विकास योजनाएं, श्रम कार्ड, वनाधिकार पट्टा, आधार कार्ड तथा विभिन्न प्रमाण-पत्र सेवाएं शामिल हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य  परिवारों को सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक सशक्तिकरण और जीवन स्तर में सुधार के अवसर उपलब्ध कराना है।

’CHiPS विकसित करेगा अत्याधुनिक डिजिटल डैशबोर्ड’

अभियान की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था होगी। छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (CHiPS) द्वारा एक एकीकृत ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़ डैशबोर्ड’ विकसित किया जाएगा। यह डैशबोर्ड राज्य, संभाग, जिला, विकासखंड, ग्राम पंचायत और ग्राम स्तर तक योजनाओं की प्रगति को रियल-टाइम में प्रस्तुत करेगा। डैशबोर्ड पर प्रत्येक योजना की संतृप्तिकरण स्थिति, शेष हितग्राहियों की संख्या तथा प्रगति का प्रतिशत उपलब्ध रहेगा। इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनेगी।

’तीन चरणों में होगा अभियान का संचालन’

अभियान का क्रियान्वयन सुव्यवस्थित रूप से तीन चरणों में किया जाएगा।पहले चरण में ग्रामवार आधारभूत सर्वेक्षण एवं डेटा मानचित्रण किया जाएगा। PDS डेटाबेस और विभागीय आंकड़ों के आधार पर संभावित परिवारों की पहचान कर योजनावार बेसलाइन तैयार की जाएगी। दूसरे चरण में ग्राम, क्लस्टर एवं विकासखंड स्तर पर विशेष संतृप्तिकरण शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को योजनाओं से जोड़ा जाएगा तथा आवश्यक दस्तावेजों एवं सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। तीसरे चरण में सतत निगरानी, समीक्षा और मूल्यांकन की प्रक्रिया के माध्यम से योजनाओं की प्रगति का आकलन किया जाएगा तथा आवश्यकतानुसार सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

’जिला प्रशासन निभाएगा महत्वपूर्ण भूमिका’

अभियान के सफल संचालन में जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

जिला कलेक्टर जिला स्तरीय क्रियान्वयन के प्रमुख अधिकारी होंगे और आधारभूत सर्वेक्षण, शिविरों के आयोजन तथा संतृप्तिकरण की संपूर्ण प्रक्रिया की निगरानी करेंगे। संभागायुक्त संभाग स्तर पर त्रैमासिक समीक्षा करेंगे, जबकि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति अभियान की प्रगति का नियमित मूल्यांकन करेगी। सुघ्घर छत्तीसगढ़ एक अभिसरण आधारित कार्यक्रम है। इसके लिए पृथक बजट शीर्ष निर्मित करने की आवश्यकता नहीं होगी। संबंधित विभाग अपनी स्वीकृत योजनागत निधियों का उपयोग करेंगे। इसके अतिरिक्त CSR, जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) तथा अन्य संस्थागत स्रोतों के माध्यम से भी आवश्यक संसाधनों का अभिसरण किया जाएगा।

’विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में नया अध्याय’

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सुघ्घर छत्तीसगढ़  नागरिक-केंद्रित सुशासन की एक व्यापक पहल है। इसका उद्देश्य प्रत्येक परिवार तक विकास, सम्मान, सुरक्षा और समृद्धि के अवसरों की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि जब शासन की प्रत्येक योजना अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगी, जब प्रत्येक पात्र परिवार योजनाओं के लाभ से जुड़कर अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन अनुभव करेगा, तभी सच्चे अर्थों में सुघ्घर छत्तीसगढ़ और विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प साकार होगा। यह अभियान प्रदेश में सुशासन के नए मानक स्थापित करते हुए विकास की यात्रा को और अधिक समावेशी, प्रभावी और जन-केंद्रित बनाएगा।

cg” योग के प्रचार-प्रसार एवं जनजागरूकता के कार्यों के लिए शुभकामनाएं…

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छत्तीसगढ़ योग आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष श्री संजय अग्रवाल’

“मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में छत्तीसगढ़ योग आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष श्री संजय अग्रवाल ने सौजन्य मुलाकात की।”

“मुख्यमंत्री श्री साय ने श्री संजय अग्रवाल को छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि योग भारत की प्राचीन एवं गौरवशाली परंपरा का अभिन्न अंग है, जो शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन स्थापित करने का प्रभावी माध्यम है।”

“उन्होंने प्रदेश में योग को जन-जन तक पहुंचाने तथा युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को योग से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।”

“मुलाकात के दौरान योग के संवर्धन तथा प्रदेश में योग संबंधी गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने से संबंधित विभिन्न विषयों पर भी चर्चा हुई। ”

“उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ योग आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष श्री अग्रवाल के नेतृत्व में प्रदेश में योग के प्रचार-प्रसार, जनजागरूकता तथा स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के प्रयासों को नई गति मिलेगी।”

cg” मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का जशपुर दौरा मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय “महत्वपूर्ण दौरे के बारे में। आज जशपुर का प्रवास है”

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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय 20 जून को जशपुर जिले के कुनकुरी स्थित कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र में आयोजित जैविक खेती कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस अवसर पर वे क्षेत्र के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन भी करेंगे।

जिला प्रशासन जशपुर द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम शनिवार, 20 जून को प्रातः 11 बजे से प्रारंभ होगा। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को जैविक खेती के प्रति जागरूक करना तथा कृषि क्षेत्र में नवाचार और सतत विकास को बढ़ावा देना है।

कार्यक्रम में वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, सांसद श्री राधेश्याम राठिया, विधायक श्रीमती गोमती साय एवं श्रीमती रायमुनी भगत सहित अनेक जनप्रतिनिधि और गणमान्य अतिथि उपस्थित रहेंगे। इसके अलावा जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष श्री रामप्रताप सिंह, माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष श्री शम्भूनाथ चक्रवर्ती, अत्यावसायी राज्य सहकारी वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र कुमार बेसरा, राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती प्रियंवदा सिंह जूदेव सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि कार्यक्रम में सहभागिता करेंगे।

जिला प्रशासन ने जिले के सभी जनप्रतिनिधियों, पंचायत एवं नगरीय निकायों के पदाधिकारियों, पत्रकारों तथा नागरिकों को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। कार्यक्रम के दौरान जैविक खेती से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन भी दिया जाएगा तथा किसानों को आधुनिक एवं प्राकृतिक कृषि पद्धतियों की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

CG” 150वीं जयंती वर्ष पर भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा का अनावरण…

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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज जशपुर जिले के विकासखंड बगीचा के ग्राम डोंडराही में धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर उनकी प्रतिमा का अनावरण किया।

इस अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि यह स्थल अब “बिरसा मुंडा चौक” के नाम से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री ने भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका जीवन अन्याय, शोषण और अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष के साथ-साथ जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए समर्पित रहा। उन्होंने जनजातीय अस्मिता और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा का जीवन आज भी जनजातीय समाज सहित पूरे देश को अपने अधिकारों, संस्कृति और परंपराओं की रक्षा के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने का ऐतिहासिक निर्णय लेकर जनजातीय नायकों के योगदान को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का कार्य किया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने क्षेत्र के विकास एवं सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न निर्माण कार्यों हेतु कुल 37 लाख रुपये की घोषणा की। उन्होंने बैगाटोली कर्मा में सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 15 लाख रुपये, कुदमुरा नांदो टोली में रंगमंच निर्माण हेतु 8 लाख रुपये, कुदमुरा पतराटोली (डिबा टोली) में सांस्कृतिक मंच निर्माण के लिए 7 लाख रुपये तथा केशव घर के समीप स्थित हनुमान मंदिर परिसर में मंच निर्माण के लिए 7 लाख रुपये स्वीकृत करने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। पीएम जनमन योजना और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के 6,661 गांव इस योजना में शामिल हैं, जहां सड़क, पेयजल, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचना जनजातीय समाज के सम्मान और गौरव का प्रतीक है। उन्होंने जशपुर को जनजातीय संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र बताते हुए कहा कि यहां स्थित अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम देशभर में जनजातीय समाज के उत्थान के लिए उल्लेखनीय कार्य कर रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने मोदी की गारंटी के अधिकांश वादों को ढाई वर्षों के भीतर पूरा किया है। सरकार गठन के 24 घंटे के भीतर 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति प्रदान की गई थी, जिनमें से 10 लाख 60 हजार से अधिक आवास पूर्ण हो चुके हैं। किसानों को 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान का मूल्य दिया जा रहा है तथा 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान की खरीदी की जा रही है। किसानों को दो वर्षों का बकाया बोनस भी प्रदान किया गया है।

उन्होंने कहा कि तेंदूपत्ता संग्रहण दर को 4,000 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा किया गया है। चरण पादुका योजना को पुनः प्रारंभ किया गया है तथा रामलला दर्शन और मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा दर्शन योजनाओं से हजारों लोग लाभान्वित हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की 6,000 से अधिक ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सेवा केंद्र प्रारंभ हो चुके हैं, जहां आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र सहित विभिन्न नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। भविष्य में प्रत्येक पंचायत में यह सुविधा उपलब्ध होगी।

उन्होंने कहा कि आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 प्रारंभ की गई है, जिसमें शिकायतों के समयबद्ध निराकरण की सतत निगरानी की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए संचालित मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना की जानकारी देते हुए कहा कि बकाया बिजली बिलों पर अधिभार पूरी तरह माफ किया जा रहा है।

कार्यक्रम में अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय महामंत्री श्री योगेश बापट ने भी भगवान बिरसा मुंडा के जीवन, संघर्ष और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर पद्मश्री जागेश्वर यादव, विधायक श्रीमती गोमती साय एवं श्रीमती रायमुनी भगत, छत्तीसगढ़ माटीकला बोर्ड के अध्यक्ष श्री शंभूनाथ चक्रवर्ती, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, नगर पालिका जशपुर के उपाध्यक्ष श्री यशप्रताप सिंह जूदेव, अन्य जनप्रतिनिधिगण, प्रशासनिक अधिकारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

जिनपिंग और पीएम मोदी को लेकर क्या बोले ट्रंप? जल्द ट्रेड डील फाइनल होने की उम्मीद!

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डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग और भारत के पीएम मोदी को उन ग्लोबल लीडर्स के रूप में बताया, जिनकी वह सबसे अधिक तारीफ करते हैं.

फ्रांस के एवियन में हाल ही में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा को भारत और अमेरिका संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अमेरिका राष्ट्रपति ने कहा था कि पीएम मोदी दिखने में शांत बहुत सुंदर लगते हैं, लेकिन जब देश के हितों या ट्रेड-डील की बात आती है तो वह बहुत टफ नेगोशिएटर साबित होते हैं. वापस अमेरिका लौटने के बाद ट्रंप ने एक बार फिर पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को लेकर बड़ा बयान दिया है.

जिनपिंग और पीएम मोदी को लेकर क्या बोले ट्रंप?

एक्सियोस को दिए इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर पीएम मोदी को बेहद मजबूत नेता बताया और कहा कि वे दुनिया के उन नेताओं में से एक हैं, जिन्हें वह सबसे ज्यादा पसंद करते हैं. उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को लेकर कहा कि वह काम से काम रखने वाले नेता हैं. उन्होंने चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग और भारत के पीएम मोदी को उन ग्लोबल लीडर्स के रूप में बताया, जिनकी वह सबसे अधिक तारीफ करते हैं.

जल्द ट्रेड डील फाइनल होने की उम्मीद

पीएम मोदी और ट्रंप की मुलाकात बुधवार (17 जून 2026) को फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई, जो 16 महीने बाद उनकी पहली आमने-सामने की बातचीत थी. इस बैठक में पीएम मोदी ने ओमान तट पर भारतीय नाविकों की मौत, स्ट्रेट ऑफ होर्मजु के खुलने समेत कई मुद्दे ट्रंप के सामने उठाए. विदेश विक्रम मिसरी ने कहा कि दोनों नेताओं ने अपने वार्ताकारों को प्रस्तावित व्यापार समझौते को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काफी प्रगति हुई है और बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर अगले सप्ताह भारत का दौरा करेंगे.

ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारतीय भारतीय निर्यात पर लगाए गए टैरिफ, रूस से तेल निरंतर तेल खरीद और इमिग्रेशन संबंधी मुद्दों को लेकर दोनों देशों के संबंधों में चुनौतियां आई है. हालांकि दोनों देश ट्रेड डील पर बातचीत जारी रखे हुए हैं.

“CM विजय ने इस अंदाज में किया राहुल गांधी को बर्थडे विश” राहुल गांधी बर्थडे पर क्या बोले स्टालिन “

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सीएम विजय ने राहुल गांधी को विश करते हुए कहा कि हमारे महान देश भारत की प्रगति, लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आप लगातार आवाज उठाते रहे हैं.

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और सुपरस्टार थलापति विजय ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई दी और उनके दीर्घायु होने की कामना की. कांग्रेस सासंद राहुल गांधी के 56वें जन्मदिन पर सीएम विजय ने उन्हें प्यारे भाई से संबोधित करते हुए कहा कि आप लोकतंत्र की रक्षा और लोगों के कल्याण के लिए आवाज उठाते रहें.

CM विजय ने इस अंदाज में किया राहुल गांधी को बर्थडे विश

सीएम विजय ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ‘मेरे प्यारे भाई और लोकसभा में विपक्ष के सम्मानित नेता, थिरु राहुल गांधी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं. आप हमारे महान देश भारत की प्रगति, लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और समाज के सभी वर्गों के लोगों के कल्याण के लिए लगातार आवाज उठाते रहे हैं. आपके अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र, आपके सभी प्रयासों में सफलता और सार्वजनिक जीवन में बेहतरीन ढंग से सेवा करने की क्षमता की कामना करता हूं.’

राहुल गांधी बर्थडे पर क्या बोले स्टालिन

तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने शुक्रवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को उनके जन्मदिन पर बधाई दी. इस खास मौके पर उन्होंने राहुल गांधी के अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की. स्टालिन ने अपने सोशल मीडिया एक्स हैंडल पर पोस्ट कर कहा, ‘आदरणीय लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई. हम उनके अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की.

पीएम मोदी-खरगे ने किया विश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और कई अन्य नेताओं ने शुक्रवार (19 जून 2026) को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई दी. कांग्रेस नेताओं ने विपक्ष के नेता के तौर पर राहुल गांधी के प्रयासों की सराहना की और कहा कि वह सत्ता के सामने निर्भीक होकर सच कहते हुए, समाज के सबसे कमजोर और हाशिए पर खड़े लोगों के अधिकारों और हितों की लड़ाई लड़ रहे हैं.

राहुल गांधी-सीएम विजय की दोस्ती

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी उन शीर्ष नेताओं में से एक थे जिन्होंने तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री के रूप में विजय के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लिया था. दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से अच्छे संबंध हैं. हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद दोनों नेताओं की दोस्ती खुलकर सबके सामने आई. तमिलनाडु में नए गठबंधन के नेताओं की एक छोटी बैठक में विजय ने कहा था कि कठिन समय में जब किसी को उन पर भरोसा नहीं था, तब कांग्रेस का एक धड़ा ऐसा था, जिन्हें राज्य में उनकी जीत पर पूरी भरोसा था. उन्होंने बताया कि कांग्रेस के उन नेताओं में राहुल गांधी, प्रवीन चक्रवर्ती और कुछ अन्य लोग शामिल थे.

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम क्यों नहीं हुई हैं?

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इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट के बावजूद, भारत में आम आदमी को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई राहत नहीं मिल रही है। जहां दुनिया भर में कच्चा तेल काफी सस्ता हो गया है, वहीं देश में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं। जनता लगातार सोच रही है कि दुनिया भर में तेल की कीमतों में इतनी तेज़ी से गिरावट के बावजूद भारतीय पेट्रोल पंपों पर इसका असर क्यों नहीं दिख रहा है। आइए इसके पीछे के अर्थशास्त्र को समझते हैं।

हाल ही में, पश्चिम एशिया में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव और अमेरिका और ईरान के बीच जारी गतिरोध के कारण, इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें $120 प्रति बैरल के पार चली गईं। नतीजतन, भारत में भी ईंधन की कीमतें बढ़ गईं। हालांकि स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ है – कच्चे तेल की कीमतें तेजी से गिरकर $80 प्रति बैरल पर आ गई हैं – लेकिन भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि पश्चिम एशिया में जारी अशांति के बीच समुद्री रास्तों से गुजरने वाले तेल टैंकरों के लिए शिपिंग फ्रेट चार्ज और भारी इंश्योरेंस लागत बढ़ गई है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी के अनुसार, लोगों को वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद भी तुरंत राहत की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। इंटरनेशनल मार्केट से खरीदा गया कच्चा तेल समुद्री रास्तों से भारत पहुंचता है – अक्सर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे संवेदनशील इलाकों से गुजरते हुए – जो एक समय लेने वाली प्रक्रिया है। पहुंचने के बाद, कच्चे तेल को रिफाइनरियों में भेजा जाता है, जहां प्रोसेसिंग और रिफाइनिंग में काफी समय लगता है। तेल कंपनियों का कहना है कि हालिया संकट के कारण ईंधन की कीमत पर लगभग ₹3.94 प्रति लीटर का सीधा असर पड़ा है, एक ऐसा बोझ जिसे तुरंत कम नहीं किया जा सकता है।

भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरतों का लगभग 80 से 85 प्रतिशत दूसरे देशों से आयात करता है। कच्चे तेल का वैश्विक लेनदेन पूरी तरह से अमेरिकी डॉलर में होता है; इसलिए, डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का मूल्य महत्वपूर्ण है। भले ही इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें गिर जाएं, लेकिन अगर डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर रहता है, तो तेल कंपनियों को आयात पर अधिक खर्च करना पड़ता है। नतीजतन, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का पूरा फायदा हमेशा भारतीय उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पाता है।

आयातित कच्चे तेल का इस्तेमाल सीधे वाहनों में नहीं किया जा सकता है। इसे देश की बड़ी रिफाइनरियों में भेजा जाता है, जहाँ आधुनिक तकनीक से इसे पेट्रोल, डीज़ल और दूसरे ईंधन में बदला जाता है। इस प्रक्रिया में आने वाली रिफाइनिंग की लागत को ईंधन की बेस प्राइस में जोड़ा जाता है। इसके बाद, तेल मार्केटिंग कंपनियाँ देश भर के पेट्रोल पंपों तक ईंधन पहुँचाने के लिए ट्रांसपोर्टेशन की लागत और अपना मुनाफ़ा जोड़ती हैं, जिससे बेस प्राइस और बढ़ जाती है।

भारत में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें तय करने के लिए ‘डेली डायनामिक प्राइसिंग’ सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। इस सिस्टम के तहत, सरकारी तेल कंपनियाँ हर सुबह 6:00 बजे अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपये एक्सचेंज रेट की समीक्षा करती हैं। इस समीक्षा के आधार पर, देश में रिटेल ईंधन की कीमतों में बदलाव किया जाता है। यही वजह है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक स्थिर न रहें और भारत में ट्रांसपोर्टेशन की लागत कम न हो, तब तक कीमतों में रोज़ होने वाले इन बदलावों में अक्सर कोई बड़ा अंतर नहीं दिखता।