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“खड़ी गाड़ी में गाने चलाने पर` चालान कट सकता है या नहीं? जान ले नए ट्रैफिक नियम”

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Traffic rules : ट्रैफिक पुलिस दिन प्रतिदिन अपने नियमों को सख्त करती जा रही है। अगर आप भी एक वाहन चालक है तो आपको हर नए ट्रैफिक नियमों का पता होना चाहिए। कई लोगों का मानना है की खड़ी गाड़ी में गाने चलाने पर ट्रैफिक पुलिस चालान काट सकती है।

चलिए खबर में जानते हैं इससे जुड़े ट्रैफिक नियम के बारे में विस्तार से।

(new traffic rules 2025) बदलते जमाने के साथ-साथ ट्रैफिक नियमों में भी हर रोज बदलाव होते रहते है। नई तकनीकी के इस दौर में अक्सर खुद की कार खरीदना हर किसी का सपना बन गया है। आप लोग जानते ही हैं कि गाड़ी चलाने को लेकर ट्रैफिक पुलिस द्वारा कई सारे रूल्स बनाए गए हैं। ड्राइविंग करने से पहले हमें हर नए ट्रैफिक नियम के बारे में जान लेना चाहिए। आइए आज आपको बताते हैं कि क्या खड़ी गाड़ी में म्यूजिक चलने पर भी कर सकता है चालान…

ड्राइविंग करते समय तेज आवाज में गाने सुनना भी है ट्रैफिक नियमों के खिलाफ….

ट्रैफिक पुलिस हर रोज अपने नियम सख्त करती जा रही है। मैं आपको बता दे की गाड़ी चलाते वक्त तेज आवाज में गाने बजाने पर भी एक गंभीर मामला हो सकता है और ट्रैफिक पुलिस ऐसे में आपका चालान भी काट सकती है।

आपको जानकर शायद हैरानी हो लेकिन गाड़ी चलाते समय तेज आवाज में गाने सुनना ट्रैफिक नियमों (traffic rules) के खिलाफ माना जा सकता है। हालांकि, सीधे तौर पर तेज आवाज में म्यूजिक बजाने को लिए कोई स्पष्ट नियम नहीं है, लेकिन ट्रैफिक पुलिस इसे यातायात नियमों के उल्लंघन (violation of traffic rules) के तहत आने वाला अपराध मान सकती हैं। इसलिए गाड़ी चलाते समय धीमी आवाज में गाना सुनें।

इन कारणों से कट सकता है चालान तेज आवाज में गाना बजाने से आपका ध्यान सड़क से हट सकता है, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।<br>तेज आवाज में गाना बजाना आसपास के लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।

मोटर व्हीकल एक्ट के तहत नियम बता दें कि हर रोज सड़कों पर गाड़ियों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। इसलिए सरकार ने लोगों की सुरक्षा के मद्देनजर गाड़ियों को चलाने को लेकर कई सारे नियम (new traffic rules 2025) बनाए हैं। जो मोटर व्हीकल एक्ट (motor vehicle act) के अंतर्गत आते हैं।

इतना ही नहीं गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना या हैंड्स फ्री डिवाइस का इस्तेमाल करना भी नियमों के खिलाफ है। लेकिन आप ड्राइव करते समय नेविगेशन के लिए अपना मोबाइल फोन यूज कर सकते हैं।

कट जाएं चालान तो इतने दिनों के अंदर भरना होता है चालान अगर ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन (traffic rules violation) करने पर आपका चालान कट गया है तो तय समय सीमा के अंदर आपको चालान की रकम भरनी होती है। आपको बता दें कि चालान की रकम 90 दिनों के अंदर जमा करानी होती है। वरना आपकी समस्या बढ़ सकती है।

अगर आप अपने चालान की रकम 90 दिनों के अंदर नहीं भरते तो आपकी परेशानी बढ़ सकती है। आपकी गाड़ी को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।

इतना ही नहीं चालान न भरने पर यह मामला कोर्ट में जा सकता है। और आपको यह बताने की जरूरत नहीं है कि कोर्ट में मामला जाने पर (traffic rules 2025) आपकी मुश्किलें और कितनी बढ़ सकती है। इसलिए सिर्फ जुर्माने से बचने के लिए ही नहीं अपनी और दूसरों की सेफ्टी के लिए गाड़ी चलाते वक्त सभी नियमों का पालन (follow traffic rules) करें।

“पतंजलि रिसर्च का बड़ा दावा -` आयुर्वेद के इन उपायों से हो सकता है गंजेपन का इलाज

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Ayurvedic Hair Loss Treatment” पतंजलि रिसर्च का बड़ा दावा -` आयुर्वेद के इन उपायों से हो सकता है गंजेपन का इलाज Ayurvedic Hair Loss Treatment

अगर बाल झड़ना बंद नहीं हो रहा या सिर पर गंजापन दिखने लगा है, तो अब राहत की खबर है! पतंजलि की रिसर्च में खुल पतंजलि रिसर्च का बड़ा दावा – आयुर्वेद के इन उपायों से हो सकता है गंजेपन का इलाज Ayurvedic Hair Loss Treatment

बदली जीवनशैली और असंतुलित खानपान के कारण आजकल गंजेपन (Baldness) की समस्या आम होती जा रही है।

युवा हो या अधेड़, हर कोई बालों के झड़ने की परेशानी से जूझ रहा है। इसी चुनौती को देखते हुए पतंजलि (Patanjali) ने आयुर्वेद के सिद्धांतों के आधार पर एक विशेष शोध किया है, जिसके परिणाम चौंकाने वाले बताए जा रहे हैं। इस रिसर्च में न केवल बाल झड़ने की समस्या पर काबू पाया गया, बल्कि यह भी देखा गया कि नए बाल उगने लगे।

पतंजलि की टीम ने आयुर्वेदिक चिकित्सा के तहत 6 सप्ताह तक कई मरीजों का उपचार किया। खास बात यह है कि इन मरीजों ने पहले कई तरह की आधुनिक चिकित्सा विधियों से उपचार कराया था लेकिन उन्हें स्थायी राहत नहीं मिली थी। पतंजलि की इस रिसर्च के अनुसार, अगर सही तरीके से शोधन और चिकित्सा की जाए, तो गंजेपन का स्थायी इलाज संभव है.

पतंजलि रिसर्च में सामने आया समाधान पतंजलि के आयुर्वेदिक डॉक्टरों  की टीम ने इस शोध में उन मरीजों को शामिल किया जिनके सिर और शरीर के अन्य हिस्सों से बाल झड़ रहे थे। इनमें से कुछ एलोपेसिया एरीटा (Alopecia Areata) जैसी गंभीर स्थिति से पीड़ित थे। मरीजों को 6 सप्ताह तक अस्पताल में भर्ती कर पंचकर्म और अन्य आयुर्वेदिक पद्धतियों से उपचार किया गया।

शोध के दौरान पाया गया कि बाल झड़ने का मूल कारण शरीर में वात और पित्त दोषों का असंतुलन है। इन्हें नियंत्रित करने के लिए शोधन (डिटॉक्सिफिकेशन), शमन (लक्षण नियंत्रण) और विशेष आयुर्वेदिक औषधियों से चिकित्सा की गई।

पंचकर्म और अन्य आयुर्वेदिक विधियों से उपचार मरीजों को रोजाना  पंचकर्म थेरेपी  दी गई जिसमें विशेष रूप से शिरोधारा, अभ्यंग (तेल मालिश), और बस्ती (एनिमा) जैसी प्रक्रियाएं शामिल थीं। इसके अलावा मुंह और नाक के माध्यम से भी आयुर्वेदिक दवाएं दी गईं। नियमित सिर की मालिश के माध्यम से स्कैल्प में रक्त संचार को बढ़ाया गया, जिससे रोमछिद्र पुनः सक्रिय होने लगे।

रिसर्च में शामिल मरीजों ने बताया कि पहले जहां बालों का झड़ना नहीं रुक रहा था, वहीं इस उपचार के तीसरे सप्ताह के बाद ही गिरते बालों की संख्या में भारी कमी आई। छठे सप्ताह तक कुछ मरीजों के सिर पर नए बाल उगने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी थी।

एलोपैथिक इलाज से निराश मरीजों को मिली राहत रिसर्च में यह भी बताया गया कि जिन मरीजों ने पहले विग, हेयर ट्रांसप्लांट और एलोपैथिक ट्रीटमेंट लिए थे, उन्हें स्थायी राहत नहीं मिली। कुछ समय के लिए बालों की ग्रोथ हुई, लेकिन बाद में फिर वही समस्या लौट आई। पतंजलि के आयुर्वेदिक उपचार से पहली बार उन्हें स्थायी समाधान मिला।

पतंजलि की रिसर्च में यह स्पष्ट किया गया कि केवल बाहरी उपचार नहीं, बल्कि शरीर के अंदर से दोषों को संतुलित करने की आवश्यकता होती है। जब शरीर का वात और पित्त संतुलन में आता है, तो बालों की जड़ें मजबूत होती हैं और  Hair Regrowth की प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से शुरू हो जाती है।

शोध को प्रकाशित किया गया नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पतंजलि की इस रिसर्च को नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (National Library of Medicine) में भी प्रकाशित किया गया है। यह दावा किया गया है कि यह आयुर्वेदिक पद्धति सिर्फ बालों के झड़ने को रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि गंजेपन को जड़ से समाप्त करने में भी सक्षम है। रिसर्च में यह भी कहा गया है कि इस पद्धति को और अधिक वैज्ञानिक अध्ययन और ट्रायल्स के माध्यम से वैश्विक मान्यता दिलाई जा सकती है।

युवाओं में बढ़ती समस्या और इलाज की बढ़ती मांग आज के समय में जहां युवा पीढ़ी कॉस्मेटिक हेयर सॉल्यूशंस पर लाखों रुपये खर्च कर रही है, वहीं पतंजलि की यह रिसर्च उन्हें एक सुरक्षित और स्थायी समाधान देने का वादा करती है। एलोपैथिक तकनीकें जैसे हेयर ट्रांसप्लांट और लेजर ट्रीटमेंट अक्सर अस्थायी राहत देती हैं, वहीं आयुर्वेद दीर्घकालिक समाधान प्रदान करता है, वह भी बिना किसी साइड इफेक्ट के।

पतंजलि की ओर से यह भी कहा गया है कि वे इस शोध पर आगे और विस्तार से काम करेंगे और जल्द ही इसके आधार पर एक व्यापक उपचार पद्धति आम जनता के लिए उपलब्ध कराएंगे।

“राहुल गांधी की बातों में कितना विरोधाभास- नरेंद्र मोदी ‘तानाशाह’ या ‘कमजोर पीएम’?”

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H-1B वीजा शुल्क बढ़ोतरी (1,700-4,500 डॉलर) पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी को कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ‘कमजोर’ प्रधानमंत्री की संज्ञा दी है.

राहुल ने सोशल मीडिया साइट X पर अपने 5 जुलाई 2017 की एक पोस्ट जिसमें लिखा है कि मोदी जी ट्रंप से डर गए, को रिट्वीट किया है.

राहुल गांधी ने 20 सितंबर को इसे रिट्वीट करते हुए लिखा है कि मैं दोहराता हूं कि भारत का एक कमजोर पीएम है. H-1B वीजा शुल्क 1 लाख डॉलर (88 लाख रुपये) होने को राहुल ने फिर ‘कमजोर नेतृत्व’ से जोड़ा. मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे ‘ट्रंप का जन्मदिन गिफ्ट’ बताया. दरअसल राहुल का तर्क है कि मोदी वैश्विक मंच पर भारत के हितों (आईटी सेक्टर, 71% H-1B भारतीयों के पास) की रक्षा नहीं कर पाए. चाबहार पोर्ट पर सैंक्शन हटाने और 50% टैरिफ जैसे ट्रंप के फैसलों पर चुप्पी को ‘कमजोरी’ बताया.

1-राहुल गांधी के बयानों में भ्रम की स्थिति राहुल गांधी अपने बयानों में नरेंद्र मोदी को कभी तानाशाह बोलते रहे हैं तो कभी ‘कमजोर पीएम’ कह कर मजाक बनाते हैं. दरअसल वास्तव में कोई भी शख्स एक साथ किसी देश का तानाशाह और कमजोर पीएम दोनों ही नहीं सकता है. जाहिर है राहुल के यह दोनों बयान मिलकर उनके बारे में यह सोचने को मजबूर करते हैं कि नरेंद्र मोदी को लेकर उनके विचार या तो विरोधाभासी हैं या वो खुद प्रधानमंत्री की शख्सियत को समझ नहीं पा रहे हैं.

राहुल एक तरफ बार-बार दावा करते रहे हैं कि मोदी ने अपनी तानाशाही वाले रवैये के चलते संवैधानिक संस्थाओं (जैसे CBI, ED, चुनाव आयोग) को कमजोर किया. दूसरी तरफ 2017 और फिर 20 सितंबर 2025 को H-1B वीजा शुल्क बढ़ोतरी पर मोदी को ‘कमजोर पीएम’ कहा. यह विरोधाभास सतही लगता है, लेकिन गहराई से देखें तो यह कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है. क्यों कि एक तानाशाह कभी कमजोर नहीं हो सकता है. और उससे भी बड़ी बात क्या एक कमजोर प्रधानमंत्री 2017-2025 के बीच देश में बड़े संवैधानिक बदलाव ला सकता है? क्या एक कमजोर प्रधानमंत्री लगातार तीन बार चुनावी जीत कर आ सकता है, क्या एक कमजोर पीएम नोटबंदी और जीएसटी में कमी आदि के फैसले ले सकता है?

2-विरोधाभास या रणनीति? राहुल गांधी की मोदी को लेकर यह बयानबाजी उनकी रणनीति है न कि यह विरोधाभास है. संभव है कि राहुल ‘मजबूत नेता’ की मोदी की छवि को दोहरे प्रहार से तोड़ना चाहते हैं. विपक्ष, विशेषकर युवा और शहरी वोटरों को यह संदेश कि मोदी लोकतंत्र को खत्म कर रहे. इसी तरह शिक्षित, NRI और पेशेवर वर्ग को यह दिखाना चाहते हैं कि मोदी वैश्विक मंच पर भारत को मजबूत नहीं बना पाए.

सतही तौर पर ‘तानाशाह’ और ‘कमजोर’ विरोधाभासी लगते हैं, लेकिन राहुल के बयान दो अलग-अलग आयामों को लक्षित करते हैं. राहुल गांधी मोदी की छवि को ‘तानाशाह’ साबित करने के लिए संस्थाओं का कथित दुरुपयोग, विपक्ष का दमन आदि का उदाहरण देते हैं. राहुल का दावा है कि मोदी ने सत्ता को RSS और अपने ‘मित्र पूंजीपतियों’ (अडानी-अंबानी) के फायदे के लिए साधन बना दिया. दूसरी तरफ मोदी को कमजोर साबित करने के लिए राहुल गांधी कहते हैं कि विदेश नीति पर अमेरिका, चीन जैसे देशों के सामने ‘नरम रुख’ अख्तियार कर लिया. 2023 में राहुल ने LAC पर चीन की घुसपैठ को ‘मोदी की कमजोरी’ कहा. 2025 में H-1B पर चुप्पी को उनकी कमजोरी बताया.

3- क्या कमजोर पीएम ये सब कर सकता है? मोदी की उपलब्धियां चुनावी जीत, बड़े कानून, आर्थिक सुधार और वैश्विक कद राहुल गांधी की बातों को खारिज करती हैं. मोदी ने 2014 (282 सीटें), 2019 (303 सीटें) और 2024 (240 सीटें, NDA 293) में BJP को ऐतिहासिक जीत दिलाई. महाराष्ट्र में तीसरी बार, हरियाणा में तीसरी बार, दिल्ली विधानसभा की जीत बताती है कि 2024 में कुछ कमजोर होने के बाद भी नरेंद्र मोदी का जलवा बरकरार है.

एक्स पर एक यूजर लिखता है कि मोदी ने गठबंधन एकजुट रखा है,कोई भी कमजोर नेता ऐसा नहीं कर सकता. राहुल गांधी के ‘संविधान खतरे में’ नरेटिव को मोदी ने ‘विकास vs भ्रष्टाचार’ से करीब करीब खत्म कर दिया है. मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 (2019) खत्म करके, GST (2017) को लागू करके, CAA-NRC (2019-20) को लागू करके दिखा दिया है कि वो कभी कमजोर नेता नहीं थे.

4- कमजोर पीएम का नरेटिव राहुल गांधी को महंगा पड़ सकता है राहुल गांधी का ‘तानाशाह’ और ‘कमजोर’ का दोहरा नैरेटिव जनता के बीच भ्रम पैदा करता है. एक्स पर एक यूजर लिखता है कि राहुल तय करें, तानाशाह या कमजोर? BJP इसे ‘नकारात्मक राजनीति’ कहकर पलटवार करती है. एक साल पहले The Hindu ने लिखा था कि राहुल का इस तरह का नैरेटिव विश्वसनीयता खो सकता है.

राहुल का ‘कमजोर पीएम’ बयान अल्पकालिक फायदेमंद तो हो सकता है . जैसे इस तरह के बयान से राहुल बीजेपी से नाराज युवकों और विपक्षी समर्थकों को लामबंद कर सकते हैं. पर दीर्घकाल में यह जोखिम भरा साबित हो सकता है. क्योंकि मोदी की उपलब्धियां और BJP की संगठन शक्ति इसे बेअसर करती.

बिहार विधानसभा चुनावों में यह विवाद कुछ वोट शेयर बढ़ा सकता, लेकिन NDA को हराने के लिए ये अपर्याप्त है. क्योंकि जब मोदी विरोधी एक जुट होंगे तो जाहिर है कि क्रिया पर प्रतिक्रिया होगी जो हाल ही में मोदी सरकार से नाराज लोग एक बार फिर वापस हो सकते हैं. जिनका वोट शेयर कांग्रेस के बढ़े वोट शेयर से बहुत ज्यादा होगा.

“Indian Railway: रेल यात्रियों के लिए गुडन्यूज! आज से चलेंगी ये पूजा स्पेशल ट्रेनें, देखें लिस्ट”

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त्योहारों का मौसम शुरू हो गया है. आज यानी 22 सितंबर को नवरात्र का पहला दिन है. जैसे ही त्योहारों का सीजन आता है तो घर से बाहर रहने वाले लोग अपने-अपने घर जाने की तैयारी में जुट जाते हैं.

इसी बीच रेलवे ने यात्रियों को बड़ी राहत दी है. यात्रियों की सुविधा के लिए भारतीय रेलवे ने 22 सितंबर से 1 दिसंबर के बीच कई पूजा स्पेशल ट्रेनें चलाने की व्यवस्था की है. आइए जानते हैं ये स्पेशल ट्रेंने कौन-सी हैं?

22 सितंबर से शुरू ये स्पेशल ट्रेनें त्योहारों के मौके पर यात्रियों की सुविधा के लिए भारतीय रेलवे ने 22 सितंबर 2025 से कई पूजा स्पेशल ट्रेनें शुरू की हैं. इसमें गोरखपुर से धनबाद के बीच चलने वाली ट्रेन संख्या 03678 सोमवार को दोपहर 3:30 बजे चलेगी और ये सेवा 1 दिसंबर तक जारी रहेगी.

वहीं, पटना से एरणाकुलम के लिए ट्रेन संख्या 06086 रात 11:45 बजे रवाना होगी, ये भी 1 दिसंबर तक चलेगी. धनबाद से कोयम्बटूर के लिए ट्रेन संख्या 06064 सुबह 6:00 बजे चलेगी और इसकी सेवा भी 1 दिसंबर तक उपलब्ध रहेगी.

इसके अलावा नाहरलगुन से चर्लपल्ली के लिए ट्रेन संख्या 07047 मंगलवार को दोपहर 1:00 बजे चलेगी और 2 दिसंबर तक जारी रहेगी, सांतरागाछि से अजमेर के लिए ट्रेन संख्या 08611 मंगलवार रात 7:55 बजे रवाना होगी और ये सेवा 24 नवंबर तक जारी रहेगी. अगरतला से चर्लपल्ली के लिए ट्रेन संख्या 07029 शुक्रवार सुबह 6:20 बजे चलेगी और 28 नवंबर तक जारी रहेगी.

काचीगुड़ा से मदुरै के लिए ट्रेन संख्या 07191 सोमवार रात 8:30 बजे रवाना होगी और ये सेवा 20 अक्टूबर तक जारी रहेगी. वहीं, कोल्लम से हैदराबाद के लिए ट्रेन संख्या 07194 सोमवार सुबह 10:45 बजे चलेगी और 1 दिसंबर तक यात्रियों को सेवा देने का काम करेगी.

21 सितंबर से शुरू हुई हैं ये स्पेशलट ट्रेनें भारतीय रेलवे ने 21 सितंबर से भी त्योहारों के लिए पूजा स्पेशल ट्रेनें शुरू कर चुकी है, इसमें धनबाद से गोरखपुर के बीच चलने वाली ट्रेन संख्या 03677 रविवार रात 8:45 बजे रवाना होगी और ये सेवा 30 नवंबर तक जारी रहेगी. झाझा से दानापुर के लिए ट्रेन संख्या 03209 सुबह 4:00 बजे चलेगी और दानापुर से झाझा के लिए ट्रेन संख्या 03210 हर दिन शाम 5:25 पर रवाना होगी. दोनों ट्रेनें 21 सितंबर से 30 नवंबर तक चलेंगी.

कानपुर सेंट्रल से सर एम. विश्वेश्वरय्या टर्मिनल, बेंगलुरु के लिए ट्रेन संख्या 04131 शनिवार शाम 4:30 पर चलेगी, यह सेवा 21 सितंबर से 9 नवंबर तक उपलब्ध रहेगी. बता दें कि पूजा स्पेशल ट्रेनों का संचालन निश्चित तारीखों और तय मार्गों पर किया जाएगा. इनकी जानकारी रेलवे की वेबसाइट और हेल्पलाइन नंबरों पर उपलब्ध होगी. वहीं, टिकटों की बुकिंग सभी पीआरएस काउंटरों और आईआरसीटीसी (IRCTC) की आधिकारिक वेबसाइट से की जा सकती है.

“Shardiya Navratri 2025: शारदीय नवरात्र का पहला दिन, माता रानी के दर्शन के लिए मंदिरों में भक्तों का तांता, वैष्णो देवी की तस्वीरें मन मोह लेंगी”

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शारदीय नवरात्र 2025 की शुरुआत 22 सितंबर से हो चुकी है, जो 1 अक्टूबर तक चलेगी। नवरात्र का महत्व हिंदू धर्म में बहुत ज्यादा है, जिसमें मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना का सबसे ज्यादा महत्व होता है, जिसमें शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित कर मां दुर्गा की पूजा की जाती है। वैष्णो देवी से भी तस्वीरें सामने आई हैं जो मन मोह लेंगी।

घटस्थापना के लिए 2 शुभ मुहूर्त हैं:

पहला मुहूर्त: सुबह 6 बजकर 9 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 6 मिनट तक

दूसरा मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त, सुबह 11 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 38 मिनट तक

कलश स्थापना के लिए इन महत्वपूर्ण सामग्री की आवश्यकता होती है:

लकड़ी की चौकी 7 प्रकार के अनाज कलश मिट्टी का बर्तन गंगाजल कलावा सुपारी लौंग आम के पत्ते अक्षत (साबुत चावल) नारियल लाल कपड़ा मां दुर्गा के पुष्प.

घटस्थापना की विधि घटस्थापना के लिए सबसे पहले मिट्टी को एक चौड़े मुंह वाले बर्तन में रखें और फिर उसमें धान बोएं। इसके बाद कलश में जल भरें और उसकी गर्दन में कलावा बांधें। कलश के जल में एक का सिक्का भी डालें। फिर, आम के पत्तों को कलश के ऊपर रखें और नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलश के ऊपर स्थापित करें।

नवरात्रि में देवी की पूजा होती है, जो शक्ति की मूरत हैं। नवरात्रि के नौ दिन नौ अलग-अलग रूपों में मां दुर्गा की पूजा होती है, जिन्हें नवदुर्गा कहा जाता है। हर एक रूप से हमें अलग-अलग आशीर्वाद और वरदान मिलता है।

“आज से लागू GST की नई दरें, त्योहारी सीजन में सस्ती होंगी पूजा सामग्री; जानें कौन सी चीजें करेंगी जेब ढीली”

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GST New Slabs: इस महीने की शुरुआत में दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक हुई थी। इस दौरान जीएसटी स्लैब से 12% और 28% को समाप्त कर दिया गया और अब इसमें केवल 5 फीसदी और 18 फीसदी की स्लैब रखी गईं।

हालांकि, 40 फीसदी वाली एक नई स्लैब भी बनाई गई है। अब आज यानी 22 सितंबर से GST की नई दरें लागू हो रही हैं। पीएम मोदी ने इसे ‘जीएसटी बचत उत्सव’ भी बताया है। आइए जानते हैं कि इस त्योहारी सीजन से कौन सी चीजें सस्ती हो सकती हैं और कौन सी चीजें कर सकती हैं आपकी जेब ढीली…

पूजा सामग्री मिल सकती हैं सस्ती आज 22 सितंबर से नवरात्रि का भी शुभारंभ हो चुका है। नई जीएसटी दरों की मानें तो मां दुर्गा की मूर्तियां, पूजा सामग्री सस्ती हो सकती हैं। इतना ही नहीं दिवाली में भी लोगों को नई दरों का फायदा होगा। वहीं, बिहार-यूपी में छठ पूजा सामग्री, सूप, दउरा भी सस्ते होने वाले हैं। अल्ट्रा-हाई टेम्परेचर दूध, छेना इनपर तो जीएसटी ही नहीं लगेगा। इनपर से जीएसटी को 5% से घटाकर शून्य कर दिया गया है। व्रत के दौरान दूध का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं, प्रसाद के लिए छेना का इस्तेमाल होता है।

इन सामानों पर अब जीएसटी शून्य हम यहां कुछ ऐसी वस्तुएं बता रहे हैं, जिन पर जीएसटी 5% से घटाकर शून्य कर दिया गया है। इनके नाम हैं – अल्ट्रा-हाई टेम्परेचर दूध, छेना और पनीर। सभी भारतीय रोटियों पर जीएसटी शून्य। यानी रोटी हो या पराठा या खाखरा जो भी हो, उन सभी पर जीएसटी शून्य होगा।

33 जीवन रक्षक दवाओं और औषधियों पर जीएसटी को 12% से घटाकर शून्य कर दिया गया है और कैंसर, दुर्लभ बीमारियों और अन्य गंभीर पुरानी बीमारियों के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली 3 जीवन रक्षक दवाओं और औषधियों पर 5% से घटाकर शून्य कर दिया गया है। आज 22 सितंबर से इन सामानों पर जीएसटी नहीं लगेगा।

इन वस्तुओं पर 5% का जीएसटी आम आदमी और मध्यम वर्ग की वस्तुओं पर पूरी तरह से कटौती की गई है। जिन वस्तुओं पर जीएसटी घटाकर 5% कर दिया गया है, वे हैं – हेयर ऑयल, टॉयलेट सोप, साबुन की टिकिया, शैंपू, टूथब्रश, टूथपेस्ट, साइकिल, टेबलवेयर, किचनवेयर और अन्य घरेलू सामान। इसके अलावा नमकीन, भुज्जिया, सॉस, पास्ता, इंस्टेंट नूडल्स, चॉकलेट, कॉफी, संरक्षित मांस, कॉर्नफ्लेक्स, मक्खन, घी, ये सभी 5 फीसदी के दायरे में हैं। इसके अलावा कई दवाओं और औषधियों की कीमतें 12% से घटकर 5% हो गई हैं। इसी तरह, चश्मे और गॉगल्स की कीमतें भी 28% से घटकर 5% हो गई हैं।

28 फीसदी नहीं बल्कि अब 18 फीसदी लगेगा जीएसटी एयर कंडीशनिंग मशीनें (AC), 32 इंच से बड़े टीवी, सभी टीवी डिश, वॉशिंग मशीनें, छोटी कारें, 350 सीसी के बराबर या उससे कम वाली मोटरसाइकिलें अब 18% पर आ रही हैं। इनमें से कई पर पहले 28 फीसदी का जीएसटी था। सीमेंट पर जीएसटी को 28% से घटाकर 18% किया गया। घर बनाने के लिए भी अब लोगों को सीमेंट सस्ता मिलेगा।

ये चीजें करेंगी आपकी जेब ढीली – लगेगा 40 फीसदी का जीएसटी कोल्ड ड्रिंक्स, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स, शुगर ऐडेडे कोल्ड ड्रिंक्स, कैफीन युक्त ड्रिंक्स पर 40 फीसदी का जीएसटी लगेगा। इसके अलावा पान मसाला, सिगरेट, गुटखा और अन्य तंबाकू उत्पाद पर भी 40 फीसदी का जीएसटी लगेगा।

हैवी इंजन वाली कार-बाइक पर 40 फीसदी का जीएसटी लगेगा। इसमें बाइक्स (350सीसी से ज्यादा), पेट्रोल कार (1200सीसी से ज्यादा) और डीजल कार (1500सीसी से ज्यादा) शामिल हैं।

सट्टेबाजी, कैसीनो, जुआ, घुड़दौड़, लॉटरी और ऑनलाइन मनी गेमिंग सहित सभी Specified कार्रवाई योग्य दावों के लिए 40% की जीएसटी दर लागू होगी।

सुपर-लग्जरी यॉट्स, प्राइवेट जेट, निजी हेलिकॉप्टर आदि पर 40 फीसदी का जीएसटी लगेगा। आईपीएल जैसे खेल आयोजनों में प्रवेश (आईपीएल के टिकट) पर 40% जीएसटी लगेगा।

”नवरात्रि के पहले दिन दिल्ली-NCR में चढ़ेगा पारा, लेकिन इन राज्यों में बारिश का अलर्ट, मानसून की विदाई से पहले चौंकाने वाला मौसम”

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नवरात्रि के पहले दिन भी दिल्ली-एनसीआर में गर्म और उमस भरा मौसम रहने की संभावना है। तेज धूप निकलने के साथ दिल्ली का तापमान 31 डिग्री सेल्सियस है। बीते कई दिनों से राजधानी दिल्ली और उससे सटे एनसीआर क्षेत्रों में बारिश की एक बूंद भी नहीं बरसी है, जिससे तापमान और उमस दोनों बढ़ रहे हैं।

लेकिन देश के कई राज्यों में आज बारिश की संभावना जताई गई है।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आज का तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, आगामी दिनों में भी गर्मी से राहत मिलने की कोई संभावना नहीं है।

नवरात्रि के दौरान कैसा रहेगा मौसम दिल्ली से सटे एनसीआर क्षेत्रों में भी मौसम गर्म और उमस भरा हुआ है। गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर जिले में मौसम साफ बना हुआ है और बारिश को लेकर कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है। इन शहरों में भी तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है। गुरुग्राम और फरीदाबाद में भी आज बारिश का कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है और दोनों शहरों को मौसम विभाग ने ग्रीन जोन में रखा है। यहां पूरा दिन मौसम साफ रहेगा।

नवरात्रि के पहले दिन भी दिल्ली-एनसीआर में गर्म और उमस भरा मौसम रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, आगामी दिनों में तापमान बढ़ सकता है और कोई बारिश की संभावना नहीं है। इसलिए, लोगों को गर्मी और उमस से बचने के लिए आवश्यक उपाय करने चाहिए।

यूपी और बिहार में गर्मी का असर

उत्तर प्रदेश के सभी जिले ग्रीन जोन में हैं यानी बारिश की कोई चेतावनी नहीं है, लेकिन उमस और गर्मी परेशान कर सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, यूपी में अगले तीन दिन तक मौसम साफ रहेगा। वहीं बिहार में भी बारिश की उम्मीद नहीं, लेकिन पटना, सिवान, सारण, दरभंगा जैसे जिलों में बादल छाए रहेंगे और गर्मी बनी रहेगी।

उत्तराखंड और हिमाचल में आज मौसम का हाल

मौसम विभाग के अनुसार उत्तराखंड में भी 22 सितंबर को बारिश की संभावना कम है। यहां 23 सितंबर तक साफ मौसम बने रहने का पूर्वानुमान जारी किया गया है। वहीं हिमाचल में भी बारिश के कोई आसार नहीं हैं। दोनों ही राज्यों में सभी जिलों को ग्रीन जोन के कवर में रखा गया है।

मध्य प्रदेश और राजस्थान में अलर्ट

जहां एक ओर साफ आसमान है तो वहीं देश के कुछ राज्यों में बारिश का दौर अभी जारी है। इसमें मध्य प्रदेश और राजस्थान का नाम शामिल है। मध्य प्रदेश के खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। राजस्थान के अलवर, भरतपुर, करौली, दौसा, धौलपुर में तेज बारिश और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है। पूर्वी राजस्थान के कुछ जगहों पर गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

कई राज्यों में भारी बारिश

देशभर के कई राज्यों में भारी बारिश हो रही है, तो कई जिलों में बादल के नामों निशान नहीं हैं। मानसून की वापसी, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बन रहे मौसमी सिस्टम (Bay of Bengal Cyclonic Circulation) की वजह से अलग-अलग राज्यों में लगातार बारिश हो रही है। मौसम विभाग (IMD) ने आज यानी कि सोमवार को ओडिशा (Heavy Rain in Odisha) समेत कई पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार, ओडिशा के सभी तीस जिलों में मूसलाधार बारिश होगी. मौसम विभाग ने बताया कि बिहार में 25 से 27 सितंबर तक मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया।

“‘या अली’ गाने वाले Zubeen Garg की मौत का सच आ गया सामने, असम CM ने खुद किया खुलासा”

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Zubeen Garg Death Reason: बॉलीवुड और असम म्यूजिक इंडस्ट्री के फेमस सिंगर जुबिन गर्ग का निधन म्यूजिक लवर्स के लिए गहरा सदमा लगा है। ‘या अली’ और ‘दिल तू ही बता’ जैसे सुपरहिट गानों से पहचान बनाने वाले सिंगर अब हमारे बीच नहीं हैं।

19 सितंबर को सिंगापुर में स्कूबा डाइविंग के दौरान हादसे में उनकी मौत को लेकर कई तरह की अटकलें थीं, लेकिन अब असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने असली कारण का खुलासा कर दिया है। आइए जानते हैं कि उन्होंने क्या बताया है।

कैसे हुई थी जुबिन गर्ग की मौत? असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने अपना बयान देते हुए बताया कि जुबिन गर्ग की मौत डूबने से हुई है। उन्होंने बताया कि यह जानकारी सिंगापुर सरकार द्वारा जारी किए गए डेथ सर्टिफिकेट में दर्ज है। शुक्रवार को हादसे के बाद 20 सितंबर को उनका पार्थिव शरीर दिल्ली लाया गया और फिर 21 सितंबर को गुवाहाटी पहुंचा। बता दें, जैसे ही जुबिन का पार्थिव शरीर असम पहुंचा, फैंस का जनसैलाब उमड़ पड़ा। लोग उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए सड़कों पर उतर आए। उनकी पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। वहीं असम कैबिनेट ने भी बैठक कर जुबिन की याद में एक मिनट का मौन रखा।

कब होगा सिंगर का अंतिम संस्कार सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि जुबिन गर्ग का अंतिम संस्कार 23 सितंबर को गुवाहाटी के पास कमरकुची में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। राज्य सरकार ने इसके लिए 10 बीघा जमीन उपलब्ध कराने की भी घोषणा की है।

क्यों इतने खास थे जुबिन गर्ग? जुबिन गर्ग केवल एक सिंगर ही नहीं, बल्कि असम की सांस्कृतिक पहचान थे। उन्होंने रीजनल म्यूजिक से अपने करियर की शुरुआत की और बाद में बंगाली व हिंदी गानों में भी अपनी आवाज दी। साल 2006 में फिल्म गैंगस्टर के गाने ‘या अली’ ने उन्हें पूरे देश में पॉपुलर कर दिया। इसके बावजूद उन्होंने हमेशा असम की संस्कृति और संगीत को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। यही कारण है कि उनकी मौत पर असम की जनता शोक में डूबी है और 20 से 22 सितंबर तक पूरे राज्य में राजकीय शोक घोषित किया गया।

“PM मोदी का अरुणाचल प्रदेश को तोहफा, 100 करोड़ की परियोजनाओं का शिलान्यास, बोले- ‘यहां का हर व्यक्ति शौर्य और शांति का प्रतीक'”

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PM Modi in Arunachal Pradesh: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर में अलग अलग विकास कार्यों का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि, अरुणाचल की ये भूमि उगते सूर्य की धरती के साथ ही देशभक्ति की ऊफान की धरती है।

प्रधानमंत्री ने जिन प्रमुख परियोजनाओं का तोहफा अरुणाचल प्रदेश को दिया, उनमें से तीन प्रयोजनाएं सबसे खास है।

जलविद्युत परियोजनाएं: प्रधानमंत्री ने 240 मेगावाट की हीओ जलविद्युत परियोजना और 186 मेगावाट की टाटो-आई जलविद्युत परियोजना का शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं की लागत 3700 करोड़ रुपये से ज्यादा है।

कनेक्टिविटी और स्वास्थ्य सेवा: प्रधानमंत्री ने 1290 करोड़ रुपये की अलग अलग परियोजनाओं का उद्घाटन किया, जिनमें कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य सेवा और अग्नि सुरक्षा से संबंधित परियोजनाएं शामिल हैं।

तवांग में कन्वेंशन सेंटर: प्रधानमंत्री ने तवांग में एक राज्य-के-स्तर के कन्वेंशन सेंटर का शिलान्यास किया, जो 1500 से ज्यादा लोगों की क्षमता वाला होगा।

ऊर्जा, कनेक्टिविटी और स्वास्थ्य सेवा में होगा सुधार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अरुणाचल प्रदेश दौरे से राज्य में विकास की गति तेज होने की उम्मीद है। इन परियोजनाओं से राज्य में ऊर्जा, कनेक्टिविटी और स्वास्थ्य सेवा में सुधार होगा, जिससे लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा।

मोदी की स्पीच की 5 खास बातें: प्रधानमंत्री ने मंच से कहा- मैं यहां तीन वजहों से आया: पहली- आज मुझे यहां सुंदर पर्वतों के दर्शन का सौभाग्य मिला। नवरात्र के पहले दिन आज सब मां शैलपुत्री की पूजा करते हैं जो पर्वतराज हिमालय की बेटी हैं। दूसरी वजह- आज से नेक्स्ट जनरेशन GST बचत उत्सव शुरू हो रहा है। जनता जर्नादन को डबल बोनांजा मिला है। तीसरी वजह- आज के दिन अरुणाचल में विकास के ढेर सारे प्रोजेक्ट, आज राज्य को पावर कनेक्टिविटी, टूरिज्म अनेक सेक्टर से जुड़े प्रोजेक्ट मिले हैं। ये बीजेपी की डबल इंजन सरकार के डबल बेनिफिट का उदाहरण है।

अरुणाचल का हर व्यक्ति शौर्य और साहस का प्रतीक- PM मोदी प्रधानमंत्री ने कहा- यहां का हर व्यक्ति शौर्य और साहस का प्रतीक है। अरुणाचल मैं कई बार आया हूं। इसलिए यहां की ढेर सारी यादें मेरे साथ जुड़ी हुई हैं। उनका स्मरण भी मुझे भी अच्छा लगता है। तवांग मठ से लेकर स्वर्ण पगोड़ा तक अरुणाचल शांति का संगम हैं, मां भारती का गौरव है। मैं इस पुण्य भूमि को प्रणाम करता हूं।

कांग्रेस ने अरुणाचल को नजरअंदाज किया- Pm Modi पीएम बोले- अरुणाचल को कांग्रेस ने नजरअंदाज किया। इसी वजह से हमारा पूरा नॉर्थईस्ट छूट गया। जब मुझे सेवा का अवसर दिया तो मैंने कांग्रेसी सोच से देश को मुक्ति दिलाने की ठान ली। हमारी प्रेरणा इसी राज्य में वोटों और सीटों की संख्या नहीं , नेशन फर्स्ट की भावना है। देश पहले, हमारा एक ही मंत्र है, नागरिक देवो भव:। जिनको कभी किसी ने नहीं पूछा उनको मोदी पूजता है। इसलिए जिस नॉर्थ ईस्ट को कांग्रेस ने भुला दिया था वो 2014 के बाद विकास की प्राथमिकता बन गया है।

सरकार दिल्ली बैठकर नहीं चलेगी, मंत्रियों को यहां भेजा- PM मोदी प्रधानमंत्री बोले- हमने लास्ट माइल कनेक्टिविटी को अपनी सरकार की पहचान बनाया। हमने इतना पक्का किया कि सरकार दिल्ली में बैठकर नहीं चलेगी। अधिकारियों को ज्यादा से ज्यादा यहां आना होगा, रात रुकना होगा। कांग्रेस सरकार के समय दो चार महीने में एकाध बार कोई मंत्री नॉर्थ ईस्ट आता था। बीजेपी सरकार में 800 से ज्यादा बार केंद्रीय मंत्री यहां आ चुके हैं।हमारा प्रयास रहता है कि मंत्री यहां आएं तो दूर दराज जाएं, रुक कर जाएं। मैं खुद 70 से ज्यादा बार नॉर्थ ईस्ट आया हूं। नॉर्थ ईस्ट मुझे दिल से पसंद है। इसलिए हमने दिल की दूरी भी मिटाई है ,दिल्ली को आपके पास लेकर आएं।

नॉर्थ ईस्ट के आठों राज्यों की अष्टलक्ष्मी- PM मोदी PM मोदी ने आगे कहा कि, हम नॉर्थ ईस्ट के आठों राज्यों की अष्टलक्ष्मी मानते हैं। यहां के विकास के लिए केंद्र सरकार ज्यादा से ज्यादा पैसे खर्च कर रही है।बीजेपी ने अरुणाचल को 16 गुना ज्यादा पैसा दिया है। ये सिर्फ टैक्स का पैसा है। इसके अलावा जो भारत सरकार अलग अलग स्कीम के तहत खर्च कर रही है वो तो अलग ही है, इसलिए यहां आप इतना तेज विकास देख रहे हैं। जब नेक नीयत से काम होता है, जब प्रयासों में ईमानदारी होती है तो नतीजे दिखते हैं।

“H-1B वीजा नियमों में बदलाव से अमेरिका में रह रहे भारतीयों पर क्या और कैसे पड़ेगा असर ?”

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अमेरिकी सरकार ने H-1B वीज़ा नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए नए आवेदनों पर 1 लाख अमेरिकी डॉलर का अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा की है। हालांकि यह शुल्क सीधे तौर पर पहले से अमेरिका में काम कर रहे H-1B वीज़ा धारकों पर लागू नहीं होता, लेकिन इसके प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष असर अमेरिका में रह रहे भारतीयों पर महसूस होंगे।

मौजूदा वीज़ा धारकों के लिए वित्तीय राहत

जिन भारतीयों का H-1B वीज़ा पहले से वैध है, उन्हें नया शुल्क नहीं देना होगा, इसका मतलब है कि मौजूदा कर्मचारियों की अमेरिका में नौकरी और यात्रा पर फिलहाल कोई अतिरिक्त वित्तीय दबाव नहीं पड़ेगा। इससे परिवार और व्यक्तिगत खर्च पर तत्काल कोई असर नहीं आएगा।

यात्रा और वीज़ा नवीनीकरण में सावधानी

अमेरिका में रहने वाले भारतीयों को यात्रा करते समय और वीज़ा नवीनीकरण के समय अधिक सतर्क रहना होगा। एयरपोर्ट पर और कांसुलेट में वीज़ा की वैधता और दस्तावेजों की जाँच गहन हो सकती है। यदि वीज़ा की अवधि समाप्त होने वाली है, तो समय पर नवीनीकरण और स्टैम्पिंग करना जरूरी होगा।

नौकरी और करियर पर अप्रत्यक्ष असर

नए नियमों के कारण अमेरिकी कंपनियाँ अब केवल अत्यंत आवश्यक और उच्च कौशल वाले कर्मचारियों को ही स्पॉन्सर करेंगी। इसका मतलब है कि मौजूदा कर्मचारियों के लिए कंपनी की हायरिंग नीति बदल सकती है, जैसे नई नियुक्तियाँ सीमित करना या अधिक ऑनसाइट कर्मचारियों को प्राथमिकता देना। कुछ कंपनियाँ अपने कर्मचारियों को लंबे समय तक अमेरिका में रहने की सलाह दे सकती हैं ताकि बार-बार आने-जाने से जुड़े जोखिम कम हों।

परिवार और व्यक्तिगत जीवन पर असर

यदि परिवार के अन्य सदस्य वीज़ा के माध्यम से अमेरिका में हैं या यात्रा करने वाले हैं, तो उनकी योजना प्रभावित हो सकती है। बच्चों की पढ़ाई, मेडिकल इमरजेंसी और अन्य पारिवारिक कारणों से यात्रा आवश्यक होने पर अधिक योजना और समय की जरूरत होगी। अनिश्चितताओं के कारण व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन में मानसिक तनाव बढ़ सकता है।

कंपनियों का व्यवहार और कार्यशैली

भारतीय आईटी और अन्य कंपनियाँ अब अमेरिका भेजने के बजाय काम को भारत या अन्य देशों से रिमोटली प्रबंधित करने पर जोर देंगी। ऑनसाइट प्रोजेक्ट की जगह वीडियो कॉल, क्लाउड टूल और रिमोट सपोर्ट का इस्तेमाल बढ़ सकता है। कंपनियाँ कर्मचारियों की यात्रा को सीमित कर सकती हैं ताकि नियोक्ता और कर्मचारी दोनों पर अनावश्यक वित्तीय और लॉजिस्टिक दबाव न पड़े।

मानसिक और भविष्य की अनिश्चितता

हालाँकि मौजूदा धारकों पर शुल्क लागू नहीं होता, लेकिन भविष्य में नियम बदलने या नई नीतियों के आने का डर हमेशा बना रहेगा। इससे मानसिक तनाव बढ़ सकता है और करियर की लंबी योजना बनाने में कठिनाई हो सकती है। कर्मचारी अपने करियर और वीज़ा नवीनीकरण के लिए ज्यादा सतर्क और योजनाबद्ध होंगे।

दीर्घकालिक प्रभाव

अमेरिका में रहने वाले भारतीयों के लिए भविष्य की नौकरी की संभावनाएँ और प्रोजेक्ट अवसर अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होंगे। कंपनियाँ अमेरिका में नई नियुक्तियाँ कम कर सकती हैं और मौजूदा कर्मचारियों की भूमिकाओं को बदल सकती हैं। रिमोट वर्क और ऑटोमेशन के बढ़ते इस्तेमाल से कुछ पारंपरिक ऑनसाइट नौकरियाँ सीमित हो सकती हैं।