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आरटीई के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए 19 अगस्त को निकलेगी तीसरी लॉटरी

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छत्तीसगढ़ राज्य में निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत निजी विद्यालयों में छात्रों के प्रवेश के लिए तीसरी लाटरी 19 अगस्त को निकाली जाएगी। इस अधिनियम के अंतर्गत निजी विद्यालयों की 25 प्रतिशत सीटों में प्रवेश दिया जाता है।

लोक शिक्षण संचालनालय, से मिली जानकारी के अनुसार, जिन बच्चों का चयन पहले ही हो चुका है, उनके नामों को छोड़कर शेष आवेदकों के बीच लॉटरी प्रक्रिया संपन्न की जाएगी। इस चरण में अभिभावकों या बच्चों द्वारा नए आवेदन की आवश्यकता नहीं होगी। अधिकारियों ने बताया कि आरटीई अधिनियम के तहत् निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटों में प्रवेश के लिए लगभग 6,100 सीटें अब भी रिक्त हैं।

उल्लेखनीय है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को आरक्षित सीटों पर प्रवेश दिया जाता है, जिससे उन्हें गुणवत्तापूर्ण निःशुल्क शिक्षा का समान अवसर मिल सके।

“Ganesh Chaturthi 2025: कब है गणेश चतुर्थी? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत के नियम”

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गणेश चतुर्थी भगवान गणेश का एक बहुत ही खास त्योहार है. भगवान गणेश को सभी बाधाओं को दूर करने और बुद्धि देने प्रदान करने वाला माना जाता है. इस दिन भक्त बड़ी श्रद्धा से मिट्टी से बने गणपति की मूर्ति अपने घर लाते हैं और उनका स्वागत करते हैं.

गणपति जी के आने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है. यह पर्व पूरे देश में मनाया जाता है, लेकिन महाराष्ट्र में इसका जश्न देखने लायक होता है.

इसके अलावा मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, गोवा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी लोग अपने-अपने तरीके से इसे बड़े उत्साह से मनाते हैं.

गणेश चतुर्थी 2025 की तारीख और शुभ मुहूर्त

इस बार गणेश चतुर्थी 26 अगस्त 2025 मंगलवार को शुरू होगी और 6 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति जी का विसर्जन होगा. यह त्योहार 10 दिनों तक चलता है.

चतुर्थी तिथि की शुरुआत: 26 अगस्त 2025, दोपहर 1:54 बजे चतुर्थी तिथि का समापन: 27 अगस्त 2025, शाम 3:44 बजे

मध्यान्ह पूजा का समय: 27 अगस्त 2025, सुबह 11:12 बजे से दोपहर 1:44 बजे तक विसर्जन (अनंत चतुर्दशी): 6 सितंबर 2025 गणेश चतुर्थी का उत्सव कैसे मनाएं?

गणेश चतुर्थी के दिन घर और गलियों को फूलों, रंगोली से सजाया जाता है. भजन और आरती की धुन से माहौल भक्तिमय भी हो जाता है. भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान कर, साफ कपड़े पहनते हैं और गणपति जी की पूजा करते हैं.

पूजा में मोदक, फूल, दीपक और अगरबत्ती का उपयोग किया जाता है.

पूरे 10 दिन परिवार वाले साथ बैठकर गणेश जी की स्तुति करके, मंत्र पढ़ते हैं और भजन गाते हैं. जिसके बाद दसवें दिन गणपति जी की मूर्ति लेकर नदी, तालाब या समुद्र में विसर्जन किया जाता है.

यह प्रकृति के सृजन और विनाश का प्रतीक माना जाता है. विसर्जन के दौरान लोग जोर से ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले साल जल्दी आना!’ के नारे लगाते हैं.

गणेश चतुर्थी पर व्रत कैसे रखें?

इस पावन पर्व पर कई भक्त व्रत भी रखते हैं, अगर आप व्रत रखना चाहते हैं तो ध्यान रखें कि-अपनी सेहत के अनुसार व्रत करें, पूरा दिन या आधा दिन.

व्रत के दौरान मन को शांत और सकारात्मक रखें, बुरी बातें न करें.

मांसाहारी भोजन, प्याज और लहसुन से दूर रहें. सेंधा नमक का इस्तेमाल करें, साधारण नमक का उपयोग मना है.

हल्का और सादा भोजन करें जिसमें ज्यादा तेल और मसाले न हों.

निर्जल व्रत हो तो व्रत से पहले और बाद में खूब पानी पिएं.

गणेश चतुर्थी हमें भगवान गणेश की पूजा के साथ-साथ प्यार, भक्ति और एकता का संदेश देती है. यह त्योहार जीवन में नई शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आता है.

DEO ने शिक्षक मनमोहन सिंह को किया निलंबित, शराब के नशे में चड्डा पहनकर स्कूल पहुंचा था प्रधान पाठक

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बलरामपुर (Balrampur) के प्राथमिक शाला रूपपुर में शराब के नशे में स्कूल पहुंचने वाले शिक्षक को निलंबित कर दिया गया है. शिक्षक शराब के नशे में चड्डा पहन कर स्कूल पहुंच गया था. जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने शिक्षक मनमोहन सिंह (Manmohan Singh Suspended) को निलंबित कर दिया है. यह मामला वाड्रफनगर विकासखण्ड के प्राथमिक शाला रूपपुर का है. वीडियो वायरल होने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने एक्शन लिया है.

स्कूल में शिक्षक ने किया था हाई वोल्टेज ड्रामा
बता दें कि शराबी शिक्षक मनमोहन सिंह शराब के नशे में धुत होकर और चड्डा पहन कर बलरामपुर के प्राथमिक शाला रूपपुर पहुंच गया था. इस दौरान प्रधान पाठक ने नशे में धुत होकर हाई वोल्टेज ड्रामा भी किया था. इस दौरान लोगों ने शराबी शिक्षक का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया. वहीं वीडियो में शिक्षक डॉक्टर के सलाह पर एक पाव शराब पीकर स्कूल आने की बात कर रहा था.

वीडियो के अनुसार, शिक्षक बोल बम लिखे भगवा रंग का चड्डा व टी-शर्ट पहनकर स्कूल पहुंच गया था. उसने कुर्सी पर बैठकर टेबल पर पड़े किताबों पर पैर रखे हुए था. जब उससे पूछा गया तो उसने कहा कि डॉक्टर ने हर दिन 250 ग्राम शराब पीने कहा है.

नशे में धुत शिक्षक चड्डा पहनकर पहुंच गया था स्कूल
शिक्षक मनमोहन सिंह वाड्रफनगर के प्राथमिक शाला रूपपुर में पदस्थ हैं और वो अक्सर शराब के नशे में स्कूल पहुंचता था. वहीं छात्र के परिजनों ने अक्सर शराब के नशे में स्कूल आने की शिकायत BEO से की थी, लेकिन इसके बावजूद मनमोहन सिंह के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई थी.

DEO ने शिक्षक को किया निलंबित
इधर, वीडियो सामने आने के बाद एनडीटीवी ने इस खबर को प्रमुखता से दिखाया, जिसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने शिक्षक मनमोहन सिंह को निलंबित कर दिया.

पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को राहत, HC ने ED से मांगा जवाब

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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग केस में पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को बड़ी राहत मिली है. अब हाईकोर्ट ने ED को नोटिस जारी कर 26 अगस्त तक जवाब मांगा है. चैतन्य ने गिरफ्तारी को ग़ैरक़ानूनी बताया है. सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद चैतन्य हाईकोर्ट पहुंचे थे. उनके वकील ने कोर्ट में कहा कि जेल में पीने का साफ पानी तक नहीं मिल रहा, इस पर कोर्ट ने जेल अधीक्षक को निर्देश दिए है. इस मामले में अगली सुनवाई 26 अगस्त को निर्धारित की गई है.

सुप्रीम कोर्ट ने नहीं मिली थी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया था, जिसमें उन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (पीएमएलए) के कुछ प्रावधानों को चुनौती दी थी. न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने बघेल को हाईकोर्ट जाने की सलाह दी थी.

इससे पहले, 2 अगस्त को बघेल और उनके बेटे चैतन्य बघेल ने करोड़ों रुपए के छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच में केंद्रीय एजेंसियों के कानूनी अधिकार पर सवाल उठाते हुए सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया था. याचिका में इस बात पर स्पष्टता मांगी गई थी कि क्या एजेंसियों ने पीएमएलए और अन्य कानूनों के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण किया है.
बता दें कि ईडी 2 हजार करोड़ रुपए के शराब सिंडिकेट के आरोपों की जांच कर रहा है, जो कथित तौर पर बघेल के कार्यकाल के दौरान संचालित हुआ था. बघेल ने आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया है और ईडी की कार्रवाई को प्रतिशोध की राजनीति का उदाहरण बताया है.

यह भी पढ़ें : ED का बर्थ-डे गिफ्ट! Ex CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को किया अरेस्ट, कांग्रेस का विधानसभा से बहिष्कार

इनकम टैक्स बिल: सेलेक्ट कमेटी क्या होती है? इसने क्या-क्या सुझाव दिए, जिसे सीतारमण ने झट से मान लिया

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को लोकसभा में नया इनकम टैक्स बिल- 2025 पेश किया. संसद में विपक्ष के हंगामे के बीच यह कदम उठाया गया, लेकिन इसकी अहमियत बहुत ज्यादा है. इस नए बिल में संसदीय चयन समिति (Select Committee) की 285 सिफारिशों को शामिल किया गया है. यह बिल पुराने आयकर अधिनियम-1961 की जगह लेगा और दशकों पुराने टैक्स ढांचे को सरल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
निर्मला सीतारमण ने इनकम टैक्स बिल पेश करते गहुए बताया कि भ्रम से बचने के लिए पहले वाले बिल को वापस ले लिया गया था. वहीं नए बिल में बीजेपी नेता बैजयंत पांडा की अध्यक्षता वाली संसदीय सेलेक्ट समिति की तरफ से सुझाई गई अधिकांश सिफारिशों को शामिल किया गया है. सीतारमणने कहा कि कई सुझाव प्राप्त हुए हैं, जिन्हें सही विधायी अर्थ प्रदान करने के लिए शामिल किया जाना आवश्यक है. उन्होंने कहा, ‘ड्राफ्टिंग के नेचर, वाक्यांशों के अलाइनमेंट, परिणामी परिवर्तनों और क्रॉस रेफरेंसिंग में सुधार किए गए हैं.’

सेलेक्ट कमेटी क्या होती है?
संसद में जब कोई विधेयक (Bill) पेश किया जाता है, तो अक्सर उसे सीधे बहस और मतदान के लिए लाने के बजाय विस्तृत अध्ययन और सुधार के लिए किसी समिति को भेजा जाता है. सेलेक्ट कमेटी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है. यह समिति विशेष रूप से किसी एक विधेयक पर फोकस करती है. इसमें संसद के चुनिंदा सदस्य शामिल होते हैं, जो विभिन्न दलों और पृष्ठभूमियों से आते हैं, ताकि विधेयक पर संतुलित विचार हो.

समिति का काम बिल का बारीकी से अध्ययन करना, तकनीकी और कानूनी कमियों को पहचानना और सुधार के सुझाव देना होता है. यह समिति विशेषज्ञों, हितधारकों और सरकारी अधिकारियों से बातचीत कर फीडबैक लेती है और फिर अपनी रिपोर्ट संसद को सौंपती है. सरकार चाहे तो इन सिफारिशों को पूरी तरह, आंशिक रूप से या बिल्कुल भी शामिल न करने का निर्णय ले सकती है, लेकिन आमतौर पर तकनीकी और व्यावहारिक सुझावों को शामिल करने की कोशिश की जाती है.
सेलेक्ट कमेटी का गठन कैसे होता है?
किसी विधेयक को सेलेक्ट कमेटी में भेजने का प्रस्ताव संसद में पेश किया जाता है. प्रस्ताव पारित होने पर समिति गठित की जाती है. इसमें शामिल सांसदों के नाम तय किए जाते हैं और एक अध्यक्ष नियुक्त किया जाता है. समिति के पास विधेयक की समीक्षा के लिए निश्चित समय होता है, जिसके भीतर वह अपनी रिपोर्ट संसद में प्रस्तुत करती है.
सेलेक्ट कमेटी की क्या थी सिफारिशें?
इनकम टैक्स बिल, 2025 को सबसे पहले 13 फरवरी 2025 को लोकसभा में पेश किया गया था. बाद में सरकार ने इसे औपचारिक रूप से वापस लेकर संशोधित बिल पेश करने का फैसला किया. इस बिल की समीक्षा भाजपा सांसद बैजयंत पांडा की अध्यक्षता वाली संसदीय चयन समिति ने की.
बैजयंत पांडा की अध्यक्षता वाली इस समिति ने इनकम टैक्स बिल के ड्राफ्ट में कई तकनीकी खामियां और भाषा संबंधी अस्पष्टताएं चिन्हित की थीं. समिति ने पाया कि मौजूदा इनकम टैक्स एक्ट, 1961 में 4,000 से ज्यादा संशोधन हो चुके हैं और इसमें पांच लाख से अधिक शब्द हैं, जिससे यह बिल बेहद ही ज्यादा जटिल हो गया है. नया बिल इस जटिलता को लगभग 50% तक कम करता है ताकि आम करदाता भी इसे आसानी से समझ सके. समिति ने यह भी कहा कि नया स्ट्रक्चर कानूनी उलझनों को कम करेगा और व्यक्तिगत करदाताओं एवं छोटे-मझोले उद्यमों (MSME) को अनावश्यक मुकदमेबाजी से बचाएगा.

इस नए संशोधित बिल में टैक्स स्लैब और दरों में भी बड़े बदलाव किए गए हैं. सरकार के अनुसार, यह बदलाव मध्यम वर्ग के टैक्स बोझ को घटाएंगे और लोगों के हाथों में अधिक पैसा छोड़ेंगे, जिससे घरेलू खपत, बचत और निवेश में वृद्धि होगी. यह कदम न केवल करदाताओं के लिए राहत लाएगा, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी गति देगा.
ध्यान दिला दें कि पिछले सप्ताह सरकार ने औपचारिक रूप से पुराना इनकम टैक्स बिल, 2025 वापस ले लिया था, जिसे 13 फरवरी को लोकसभा में पेश किया गया था. अब संशोधित रूप में यह बिल एक समग्र और सरल कर कानून का खाका पेश करता है, जो दशकों से लागू जटिल आयकर संरचना को बदलने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.

6115 रेलवे स्टेशनों पर मिल रहा है मुफ्त वाई-फाई, कितने देर कर सकते हैं इस्‍तेमाल, कैसे करें कनेक्‍ट

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भारतीय रेलवे देश भर के 6,115 रेलवे स्टेशनों पर मुफ्त वाई-फाई सुविधाएं प्रदान कर रहा है. यह जानकारी सरकार ने मंगलवार को संसद में दी. रेलवे स्टेशनों पर मुफ्त वाई-फाई सेवा सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का हिस्सा है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्यसभा को बताया कि भारतीय रेलवे के लगभग सभी रेलवे स्टेशनों पर दूरसंचार सेवा प्रदाताओं द्वारा 4जी/5जी कवरेज प्रदान किया जा रहा है. इसके अलावा, रेलवे द्वारा 6,115 स्टेशनों पर मुफ्त वाई-फाई सेवाएं भी प्रदान की गई हैं. ध्यान देने वाली बात है कि इस फ्री वाई-फाई सर्विस को सिर्फ रेलवे स्टेशन पर ही इस्तेमाल किया जा सकता है. ट्रेन में सफर के दौरान रेलवायर इंटरनेट काम नहीं करता है.
वाई-फाई सेवा का लाभ उठाने के लिए यात्रियों को अपने स्मार्टफोन पर वाई-फाई मोड चालू करना होगा और ‘रेलवायर’ वाई-फाई से कनेक्ट करना होगा. उन्हें एसएमएस ओटीपी के लिए अपना मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा और इसके बाद यात्री की डिवाइस में वाई-फाई कनेक्टिविटी आ जाएगी. रेलवे की ओर से वाई-फाई की सुविधा नई दिल्ली, मुंबई सेंट्रल, चेन्नई सेंट्रल, पुणे, कोलकाता, अहमदाबाद, हैदराबाद जैसे सभी प्रमुख स्टेशनों के साथ कई टियर 2 और टियर 3 शहर में मौजूद स्टेशनों पर भी दी जा जिनमें सूरत, वडोदरा, राजकोट, मेरठ, भोपाल आदि जैसे टियर 2 शहरों के साथ-साथ रोहतक और कटक जैसे टियर 3 शहर भी शामिल हैं.

कितने देर फ्री है वाई-फाई
रेलवे स्‍टेशन पर आप एक दिन में 30 मिनट तक ही फ्री इंटनेट इस्‍तेमाल कर सकते हैं. यह वाई-फाई इंटरनेट 1Mbps की स्पीड ऑफर करता है. 30 मिनट के बाद इंटरनेट का यूज करने के लिए आपको प्‍लान खरीदना होगा. प्‍लान की जानकारी आप रेल railwire.co.in पर ले सकते हैं. वाई-फाई प्लान की पेमेंट के लिए आपको नेटबैंकिंग, वॉलेट, क्रेडिट कार्ड और UPI का विकल्प मिलता है. आप अपनी सुविधा के मुताबिक कोई भी पेमेंट मोड चुन सकते हैं.

कैसे करें इस्‍तेमाल
अपने स्मार्टफोन पर वाई-फाई सेटिंग ओपन करें.
वाई-फाई नेटवर्क सर्च करें.
इसके बाद railwire नेटवर्क चुनें.
अब railwire.co.in वेबपेज मोबाइल ब्राउज़र पर ओपन करें.
यहां अपना 10 अंकों का मोबाइल नंबर दर्ज करें.
अब आपके नंबर पर ओटीपी भेजा जाएगा.
रेलवायर को कनेक्ट करने के लिए पासवर्ड के रूप में इस ओटीपी का उपयोग करें.
ओटीपी दर्ज करने के बाद इंटनेट कनेक्‍ट हो जाएगा.

कर्ज के बोझ तले दबा शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप टाटा सन्‍स से बाहर होने की तैयारी में

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शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड (Tata Sons Pvt.) में अपनी 18.4% हिस्सेदारी बेच सकता है. इस संभावित बिक्री से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल समूह द्वारा बड़े पैमाने पर कर्ज चुकाने में किया जा सकता है. ब्‍लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि कंपनी का लक्ष्य अपने इंफ्रास्ट्रक्चर यूनिट गोस्वामी इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड (Goswami Infratech Pvt.) के जरिए जारी 8,810 करोड़ रुपये के बांड्स का भुगतान करना है, जो अप्रैल 2026 में मैच्‍योर होंगे.
सूत्रों का कहना है कि इस कर्ज का पूरा या आंशिक भुगतान करने से निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा और समूह की अन्य पूंजीगत परियोजनाओं को भी गति मिलेगी. हालांकि, यह बातचीत अभी शुरुआती दौर में है और आगे इसमें बदलाव संभव है. इस मामले पर शापूरजी ग्रुप और टाटा संस ने किसी भी तरह की आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है.

3.4 अरब डॉलर हासिल कर चुका है ग्रुप

हाल ही में इकोनॉमिक ने रिपोर्ट दी थी कि टाटा संस ने शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप से उसकी हिस्सेदारी से बाहर निकलने के विकल्प तलाशने के लिए बातचीत शुरू की है. यह विकास उस समय सामने आया है, जब तीन महीने पहले ही शापूरजी ने भारत की अब तक की सबसे बड़ी निजी क्रेडिट डील के तहत 3.4 अरब डॉलर की फंडिंग हासिल की थी. समूह अपनी निर्माण और इंजीनियरिंग कंपनी एफकॉन्स का भी 8,500 करोड़ रुपये का आईपीओ लाने की तैयारी में है.
निवेशकों का भरोसा हासिल करना है लक्ष्‍य

टाटा संस की हिस्सेदारी बिक्री से प्राप्त राशि का इस्तेमाल बांड्स के भुगतान में किया जाता है, तो इससे शापूरजी को अपनी उधारी की लागत कम करने में मदद मिलेगी. मई में हुई डील में कंपनी ने 19.75% यील्ड की पेशकश की थी. इसके अलावा, पिछले महीने बैंकिंग नियामक से मिले एक अहम छूट ने कंपनी को इस डील की लागत बढ़ने से बचा लिया.

नहीं सिरे चढ़ी डील क्‍या करेगा एसपी ग्रुप
सूत्रों ने यह भी बताया कि अगर टाटा संस की हिस्सेदारी बिक्री की योजना आगे नहीं बढ़ पाती, तो शापूरजी नवंबर में 2026 के गोस्वामी कर्ज के लिए पुनर्वित्त (रीफाइनेंसिंग) वार्ता शुरू करने की योजना बना रहा है. यह कदम कंपनी की वित्तीय स्थिति को स्थिर रखने और भविष्य की परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाने में अहम साबित हो सकता है.

किरंदुल NMDC प्लांट में भीषण आगजनी, प्रबंधन को हुआ करोड़ों का नुकसान, शार्ट सर्किट की आशंका

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छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके के किरंदुल में स्थित NMDC प्लांट में देर रात भीषण आगजनी से करोड़ों रुपए के नुकसान होने की खबर है. आगजनी से एनएमडीसी प्लांट के कन्वेयर बेल्ट को भारी नुकसान हुआ है. आग इतनी भंयकर थी कि दमकलकर्मियों को घंटों मशक्कत करनी पड़ी, जिससे 200 मीटर कन्वेयर ब्लेट जलकर राख हो गई.

किरंदुल स्थित एनएमडीसी प्लांट में भीषण आगजनी के पीछे शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई गई है. आगजनी में 200 मीटर कन्वेयर बेल्ट जलकर स्वाहा हो गया, जिससे प्लांट में प्रोडक्शन ठप पड़ गया है. प्रबंधन ने आगजनी में करोड़ों रुपए के नुकसान की आशंका जताई है.

शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है एनएमडीसी प्लांट में आगजनी की वजह
रिपोर्ट के मुताबिक किरंदुल स्थित एनएमडीसी प्लांट के वार्ड नंबर 12 फाइन और कैंप के नजदीक कन्वेयर बेल्ट में आग लगी, जिससे पूरे प्लांट में अफरातफरी का माहौल हो गया. सूचना के बाद मौके पर पहुंची दमकल की गाड़ियां आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक 200 मीटर कन्वेयर बेल्ट जल चुकी थी. आगजनी के कारणों का अभी खुलासा नहीं हुआ है.

कन्वेयर बेल्ट के जरिए लौह अयस्क को पहाड़ों से नीचे लाया जाता है
गौरतलब है प्लांट का सबसे अहम हिस्से कन्वेयर बेल्ट के माध्यम से लौह अयस्क को पहाड़ों से नीचे लाया जाता है. आगजनी 200 मीटर कन्वेयर ब्लेट के जल जाने से फिलहाल प्लांट का प्रोडक्शन रुक गया है, जिससे करोड़ों के नुकसान का अनुमान है. हालांकि

एनएमडीसी प्लांट के वार्ड नंबर 12 फाइन और कैंप के नजदीक कन्वेयर बेल्ट में आग लगी, जिससे पूरे प्लांट में अफरातफरी का माहौल हो गया. सूचना के बाद मौके पर पहुंची दमकल की गाड़ियां आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक 200 मीटर कन्वेयर बेल्ट जल गई.

एनएमडीसी प्लांट प्रबंधन ने शुरू किया कन्वेयर बेल्ट सुधारने का काम
पहाड़ों से लौह अयस्क कन्वेयर बेल्ट की मदद से किरंदुल से विशाखापटनम रेलमार्ग के माध्यम से और ट्रकों के माध्यम से देश भर में निर्यात होता है. इस लिहाज से कन्वेयर बेल्ट में आग लगने के बाद से सप्लाई चेन प्रभावित हो गई है, जिससे करोड़ों रुपये के नुकसान का अनुमान है. इसलिए प्रबंधन सप्लाई लाइन को सुधारने के कार्य मे तेजी से जुट गया है.

आगजनी की सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शुरू की जांच
प्लांट में आगजनी की सूचना के बाद किरंदुल थाने में टीआई संजय यादव जवानों के साथ आगजनी वाले क्षेत्र पर पहुंचकर आगजनी के कारणों की जांच कर रहे हैं. इससे पूर्व में एनएमडीसी परिक्षेत्र के ऊपरी इलाकों में नक्सलियों ने भी कई बार आगजनी की है. टीआई ने बताया कि जिस क्षेत्र में बेल्ट पर आग लगी है उस क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है.

चिटफंड कंपनी के डायरेक्टर पुष्पेंद्र बघेल को पुलिस ने किया गिरफ्तार, 6 माह में रकम दुगनी करने का दिखाया था सपना

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बेमेतरा सिटी कोतवाली पुलिस ने रकम दुगना होने का प्रलोभन देकर निवेशकों के साथ धोखाधड़ी करने वाले चिटफंड कंपनी के डायरेक्टर पुष्पेंद्र बघेल को गिरफ्तार किया है. डायरेक्टर ने जिले के सैकड़ों लोगों को साइन प्रकाश कंपनी के द्वारा 6 माह में रकम दुगना करने व 12% ब्याज देने का प्रलोभन दिया था, जिसके चलते निवेशकों ने बड़ी संख्या में अपने मेहनत की कमाई की पूंजी को निवेश कर दिया था.

पैसा इकट्ठा करने के बाद आरोपी कंपनी बंद कर हो गया फरार
चिटफंड कंपनी के डायरेक्टर ने लोगों को बड़े-बड़े सपने दिखाए, जिसके चलते लोगों ने इस कंपनी में अपनी रकम डाली. लगभग एक से डेढ़ साल तक यह कंपनी चलती रही. जब पूरे पैसे इकट्ठे हो गए तो अचानक कंपनी बंद कर डायरेक्टर पुष्पेंद्र बघेल फरार हो गया. इसको लेकर लगातार निवेशकों ने संपर्क किया. कुछ दिनों तक मोबाइल फोन चालू रखा, लेकिन उसके बाद मोबाइल फोन को भी बंद कर दिया. जिसके बाद कोई जवाब नहीं आया. धोखाधड़ी का एहसास होने के बाद निवेशकों ने पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज करवाई.

सिटी कोतवाली में 2017 में मामला दर्ज
बेमेतरा शहर के रहने वाले धीरेंद्र सिंह साहू को जब धोखाधड़ी का एहसास हुआ तो उन्होंने 16 अप्रैल 2017 को सिटी कोतवाली पहुंचकर साई प्रकाश कंपनी के डायरेक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच में जुट गई.

तीन डायरेक्टर पहले हो चुके हैं गिरफ्तार
साईं प्रकाश चिटफंड कंपनी के तीन डायरेक्टर को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसमें मृगेंद्र सिंह बघेल धीरेंद्र प्रताप सिंह और रणविजय सिंह बघेल का नाम शामिल है. पुलिस ने इन तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जिला न्यायालय में पेश किया. फिलहाल ये सभी जेल में बंद हैं. वहीं प्रकरण के मुख्य आरोपी डायरेक्टर पुष्पेंद्र सिंह बघेल और अन्य आरोपी शरारती की तलाशी की जा रही थी. पड़ताल के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी रीवा के जेल में बंद है.

प्रोडक्शन वारंट पर आरोपी को बेमेतरा लाया गया
बेमेतरा सिटी कोतवाली पुलिस को जैसे ही जानकारी मिली कि आरोपी केंद्रीय जेल रीवा (मध्य प्रदेश) के जेल में बंद है, वैसे ही पुलिस न्यायालय पहुंच गई और कोर्ट की अनुमति के बाद उसे प्रोटेक्शन वारंट पर रीवा जेल से बेमेतरा लाया गया. बता दें कि आरोपी पुष्पेंद्र सिंह बघेल मध्य प्रदेश के शहडोल के थाना-ब्यौहारी के ग्राम सेमरपाखा का रहने वाला है.

“खरीफ फसलों की बुवाई ने पकड़ी रफ्तार, कुल क्षेत्रफल में 4% की बढ़ोतरी”

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देश में खरीफ फसलों की बुवाई तेजी से पूरी हो रही है। अब तक धान, दलहन, तिलहन, गन्ना और कपास जैसी प्रमुख खरीफ फसलों की बुवाई 99.5 मिलियन हेक्टेयर (mha) से अधिक क्षेत्र में हो चुकी है, जो सामान्य रूप से बोए जाने वाले 109.6 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्रफल का करीब 91% है।

पिछले साल के मुकाबले 4% बढ़ा कुल रकबा संदीप दास की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक कुल खरीफ क्षेत्रफल में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 4% की वृद्धि दर्ज की गई है। इस बढ़ोतरी में खासतौर पर धान और दलहन की हिस्सेदारी अधिक रही है, जो देश की खाद्य सुरक्षा के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

कपास और तिलहन की बुवाई में गिरावट हालांकि कपास और तिलहन जैसे कुछ फसलों के अंतर्गत क्षेत्रफल में गिरावट देखने को मिली है। सोयाबीन के क्षेत्र में 3.8% और सूरजमुखी के क्षेत्र में 10.2% की कमी दर्ज की गई है। इसके बावजूद, धान, मोटे अनाज, दालों और गन्ने की बुवाई पिछले साल की तुलना में अधिक हुई है। मानसून की स्थिति अब तक अनुकूल रही है। बारिश दीर्घावधि औसत से थोड़ी अधिक दर्ज की गई है, जिससे बुवाई की प्रक्रिया को बल मिला है। किसान सितंबर के पहले सप्ताह तक खरीफ फसलों की बुवाई जारी रखेंगे।

खरीफ फसलें: ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ भारत में खरीफ फसलें जून-जुलाई में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन के साथ बोई जाती हैं और सितंबर-अक्टूबर में कटाई के लिए तैयार होती हैं। ये फसलें गर्म और नम जलवायु में अच्छी उपज देती हैं और समय पर तथा पर्याप्त वर्षा पर काफी निर्भर होती हैं। धान, मक्का, बाजरा, कपास, गन्ना, दलहन और तिलहन जैसी फसलें न केवल भारत की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं, बल्कि लाखों किसानों की आजीविका का भी आधार हैं। हालांकि, इनकी उत्पादकता मानसून की तीव्रता, वितरण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से प्रभावित होती रहती है।

क्षेत्रवार फसल पैटर्न भारत में खरीफ फसलों की खेती क्षेत्र विशेष की जलवायु, मिट्टी और जल संसाधनों पर निर्भर करती है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में चावल की खेती प्रमुख है, जबकि महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात जैसे राज्यों में कपास और दालों की बुवाई बड़े पैमाने पर होती है। अप्रत्याशित मानसून, कीटों का हमला, और अपर्याप्त भंडारण ढांचे जैसी चुनौतियाँ अभी भी किसानों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई हैं, जिससे फसलों की स्थिरता और किसानों की आय प्रभावित होती है।