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Road Accident: डिप्टी रेंजर की मालवाहक की ठोकर से घायल होने के बाद इलाज के दौरान मौत

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ड्यूटी पर जाने घर से निकले डिप्टी रेंजर की मालवाहक की ठोकर से घायल होने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना मंगलवार सुबह गातापार थाना क्षेत्र के साल्हेवारा बांध के पास की है। वनविभाग में डिप्टी रेंजर सुनील सिंह चंदेल रोजाना की तरह मोटर साइकिल से ड्यूटी करने खैरागढ़ से गातापार जंगल की ओर निकले थे।

पाड़ादाह के आगे साल्हेवारा बांध के पास मालवाहक ने उन्हे ठोकर मार दी। ठोकर लगने से मोटर साइकिल सवार डिप्टी रेंजर सिंह मौके पर गिर पडे़ और गंभीर रूप से जख्मी हो गए। आने जाने वालों ने आनन-फानन में उन्हे खैरागढ़ सिविल अस्पताल पहुंचाया। गंभीर चोंट के चलते उन्हे प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर दिया गया।

अस्पताल पहुंचने से पहले दम तोड़ा

इलाज के लिए ले जाने समय रास्ते में उनकी मौत हो गई। खैरागढ़ राजपरिवार के सदस्य व सरल सौम्य स्वभाव के सुनील सिंह की मौत की खबर शहर आते ही वन अमले और परिजनों में शोक की लहर दौड़ गई। दोपहर बाद उनका शव शहर लाया गया और अंतिम संस्कार किया गया।

”CG : प्रदेश में 28 जुलाई से हड़ताल पर बैठे तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों की हड़ताल खत्म.. 5 मांगों पर सहमति बनी”

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छग में तहसीलदार/नायब तहसीलदार की हड़ताल खत्म, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा से भेंट के बाद हड़ताल खत्म, तहसीलदार/नायब तहसीलदार की 5 मांगों पर सहमति बनी,

तहसीलदार संघ द्वारा 17 सूत्रीय मांगों को लेकर यह आंदोलन शुरू किया गया था। हड़ताल के चलते राजस्व विभाग के कई कामकाज ठप हो गए थे जिससे आम जनता को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा से प्रतिनिधिमंडल की बैठक के बाद तहसीलदारों ने हड़ताल खत्म करने की घोषणा की।

मंत्री वर्मा ने कहा की हम उनकी मांगों पर सहमत हैं, लेकिन यह एक प्रक्रिया है। फिलहाल कोई मांग पूरी नहीं हुई है लेकिन सरकार गंभीरता से विचार कर रही है और जल्द निर्णय लिए जाएंगे। हड़ताल खत्म होने के बाद अब राजस्व विभाग के कामकाज में फिर से गति आने की उम्मीद है।

छत्तीसगढ़ : जिलों में झमाझम बारिश की चेतावनी जारी, किन जिलों में होगी बारिश जानने के लिए पढ़ें यह रिपोर्ट…

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छत्तीसगढ़ के कई जिलों में झमाझम बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान कुछ जगहों पर वज्रपात की घटनाएं भी देखी जा सकती है। किन जिलों में होगी झमाझम बारिश जानने के लिए पढ़ें यह रिपोर्ट…

मानसूनी ट्रफ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण छत्तीसगढ़ में हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी है। रायपुर में दोपहर को मध्यम बारिश हुई। वहीं उत्तरी छत्तीसगढ़ के कई जिलों में अति भारी बारिश हुई है। मध्य छत्तीसगढ़ में उमस भरी गर्मी का अहसास भी हो रहा है। इधर मौसम विभाग ने 23 जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी किया है। बारिश का मुख्य केंद्र मध्य, उत्तर और दक्षिण छत्तीसगढ़ के जिले हो सकते हैं।

इस बार मानसून सरगुजा संभाग के जिलों में पर ज्यादा मेहरबान है। यहां लगातार भारी से अति भारी बारिश हो रही है। आने वाले पांच दिनों पूरे प्रदेश में मानसूनी गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है।

रायपुर मौसम विज्ञान केंद्र ने प्रदेश के सुकमा, बीजापुर, दक्षिण बस्तर दंतेवाडा, बस्तर, नारायणपुर, धमतरी, बालोद, राजनांदगांव, गरियाबंद, महासमुंद, रायपुर, बलौदाबाजार, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, जशपुर, दुर्ग, बेमेतरा, कबीरधाम, मुंगेली, सुरगुजा, सूरजपुर, कोरिया, बलरामपुर जिले में जोरदार बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है।

रायपुर मौसम विज्ञान केंद्र से मिली जानकारी के मुताबिक मानसून द्रोणिका माध्य समुद्र तल पर अमृतसर, चंडीगढ़, शामली, शाहजहांपुर, लखनऊ, छपरा, बांकुरा, केनिंग और उसके बाद दक्षिण पूर्व की ओर उत्तर पूर्व बंगाल की खाड़ी तक स्थित है।

एक ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती परिसंचरण उत्तर पश्चिम बिहार और उससे लगे उत्तर पूर्व उत्तर प्रदेश के ऊपर 4.5 किलोमीटर ऊंचाई तक स्थित है। इसके प्रभाव से मध्यम बारिश होने अथवा गरज चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। वहीं एक दो स्थानों पर गरज चमक के साथ वज्रपात और भारी बारिश भी हो सकती है। भारी बारिश का क्षेत्र उत्तर और दक्षिण छत्तीसगढ हो सकता है।

मौसम विभाग के मुताबिक 24 घंटे में प्रदेश के सभी संभागों के कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हुई। बिलासपुर संभाग के कोरबा जिले में सबसे ज्यादा 37.5 मिमी बारिश रिकार्ड किया गया है। एक दिन पहले मुंगेली में 35.7 डिग्री अधिकतम तापमान रिकार्ड किया है। वहीं सबसे कम न्यूनतम तापमान 23 डिग्री राजनांदगांव में दर्ज किया गया। मौसम विभाग के मुताबिक एक द्रोणिका एवं चक्रीय चक्रवात उत्तर प्रदेश के ऊपर स्थित होने के कारण उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे बलरामपुर, प्रतापपुर तथा अन्य क्षेत्रों में भारी बारिश हो रही है। तीन से चार दिनों के बाद मध्य छत्तीसगढ़ में बारिश की गतिविधियों में तेजी आएगी।

”उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले की हर्षिल घाटी में मंगलवार को बादल फटने से भयंकर तबाही, अब तक पांच लोगों की मौत ..”

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उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले की हर्षिल घाटी में मंगलवार को एक दिल दहलाने वाली घटना ने सबको स्तब्ध कर दिया. गंगोत्री यात्रा मार्ग पर बसे धराली गांव में बादल फटने से भयंकर तबाही मच गई. खीर घाट में अचानक आए तेज सैलाब ने पूरे गांव को अपनी चपेट में ले लिया.

इस प्रलयकारी बाढ़ ने कई होटल बहा दिए, दर्जनों घर मलबे के ढेर में बदल गए, और कई लोग लापता हो गए. अब तक पांच लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. राहत और बचाव कार्य तेजी से जारी हैं, लेकिन गांव में चारों ओर मातम और डर का माहौल है.

धराली गांव, जो समुद्र तल से करीब 9,000 फीट की ऊंचाई पर बसा है, गंगोत्री धाम की यात्रा करने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है. यह गांव अपनी मनोरम प्राकृतिक सुंदरता और हरियाली के लिए पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय है. अपनी सुंदरता के अलावा ये पूरी घाटी सेब की खेती के लिए भी विश्व भर में मशहूर है. यहां के गोल्डन और रेड डिलीशियस सेब देश-विदेश के बाजारों में अपनी खास पहचान रखते हैं.

सेब का यह कारोबार गांव के कई परिवारों की आजीविका का मुख्य स्रोत है. इस खेती ने न केवल स्थानीय लोगों को आर्थिक रूप से मजबूत किया, बल्कि इलाके को समृद्धि की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. मगर, इस बाढ़ ने सेब के कई बागानों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है. कई किसानों की मेहनत पानी और मलबे में बह गई.

गरीबी से समृद्धि तक का सफर धराली और उसके आसपास के गांवों ने वह दौर भी देखा है जब लोग दो वक्त की रोटी के लिए जूझते थे. 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद इस सीमावर्ती इलाके में व्यापारिक रास्ते बंद हो गए और लोगों की आजीविका पर सीधा असर पड़ा. लेकिन वक्त ने करवट ली और इन पहाड़ियों की किस्मत सेब के बागों ने बदली. स्थानीय लोगों ने ऊबड़-खाबड़ जमीन पर मेहनत से सेब उगाना शुरू किया. देखते ही देखते, हर्षिल घाटी के आठ गांवों में सेब की खेती लोगों की मुख्य आजीविका बन गई.

आज इस क्षेत्र में 10,000 हेक्टेयर में सेब के बाग हैं, जहां हर साल लगभग 20,500 मीट्रिक टन सेब पैदा होता है. गोल्डन और रेड डिलीशियस जैसी उम्दा किस्में देश-विदेश के बाजारों में खूब बिकती हैं. हर साल लगभग 1.5 लाख पेटियां बाजार में जाती हैं और करीब 10 करोड़ रुपये का कारोबार होता है. यहां एक आम किसान भी साल में 5 लाख रुपये तक कमा लेता है, जबकि कुछ परिवार ऐसे भी हैं जिनकी कमाई 20 से 25 लाख रुपये सालाना तक पहुंच जाती है.

धराली के पुराने बाशिंदे बताते हैं कि उनके पुरखे भेड़ पालन और ऊनी कपड़ों के व्यापार से अपना गुजारा करते थे. 1962 से पहले तिब्बत के ताकलाकोट में सालाना बाजार लगता था. तिब्बती व्यापारी यहां सोना, चांदी, मूंगा, पश्मीना ऊन और चैंर गाय लेकर आते थे, जबकि यहां के ग्रामीण मंडुआ, सत्तू, लाल चावल, गुड़ और ऊनी वस्त्र ले जाते थे. लेकिन भारत-चीन युद्ध के बाद यह पूरा व्यापार बंद हो गया. इससे इलाके की आर्थिक रीढ़ टूट गई और लोगों को भीषण गरीबी का सामना करना पड़ा.

भारतीय सेना ने बदल दी पूरी तस्वीर इस घाटी में 1978 में भी एक भयानक बाढ़ आई थी, जिसने लोगों को आर्थिक रूप से और ज्यादा तोड़ दिया. उस समय बहुत कम लोग सेब उगाते थे और वह भी सिर्फ खुद के खाने के लिए. दैनिक भास्कर की एक खबर के मुताबिक, इसी दौरान झाला गांव के एक किसान के सेब भारतीय सेना ने 10 हजार रुपये में खरीद लिए. यह सौदा इलाके के लिए एक बड़ी खबर बन गई क्योंकि उस समय 10 हजार रुपये की कीमत बहुत ज्यादा मानी जाती थी.

लोगों ने देखा कि सेब की खेती में कितना दम है और उन्होंने इस दिशा में मेहनत शुरू कर दी. आज यही इलाका उत्तराखंड के सबसे समृद्ध क्षेत्रों में गिना जाता है. यहां के कई परिवार अब अपने घरों में सेब चिप्स बनाने की मशीनें लगा चुके हैं. बच्चे उत्तरकाशी के अच्छे स्कूलों में पढ़ रहे हैं और पर्यटक भी यहां आकर सीधा बाग से सेब खरीदते हैं.

यह चिट्ठी वाला बाबा चिट्ठी क्यो नहीं निकाल रहे है देश की जनता का ग़द्दार है क्या या जनता को मरने से क्यो नहीं बचा रहे है.

Rs 500 Notes Supply From ATM: एटीएम से 500 रुपए के नोटों की सप्लाई बंद! जानिए सरकार ने क्या कहा?

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Rs 500 Notes Supply From ATM: एटीएम से 500 रुपए के नोटों की सप्लाई बंद! जानिए सरकार ने क्या कहा?

कई जगह दावा किया गया है कि 90 प्रतिशत एटीएम 31 मार्च, 2026 तक 500 रुपए के नोट जारी करना बंद कर देंगे और 75 प्रतिशत एटीएम 30 सितंबर तक ऐसा कर देंगे. इसके अतिरिक्त, इसमें लोगों को अपने 500 रुपए के नोट समाप्त करने की सलाह दी गई थी और यह भी कहा गया था कि भविष्य में एटीएम के माध्यम से केवल 100 और 200 रुपए के नोट ही उपलब्ध होंगे.

Rs 500 Notes From ATM: केंद्र सरकार ने मंगलवार को दोहराया कि 500 रुपए के नोटों की सप्लाई बंद करने का कोई प्रस्ताव नहीं है और एटीएम से 100 रुपए और 200 रुपए के नोटों के साथ-साथ 500 रुपए के नोट भी निकलते रहेंगे. वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि किसी विशेष मूल्यवर्ग के नोटों की छपाई का निर्णय सरकार भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के परामर्श से लेती है ताकि जनता की लेन-देन संबंधी मांगों को पूरा करने के लिए मूल्यवर्ग मिश्रण बनाए रखा जा सके.

सरकार ने क्या कुछ कहा?

राज्य मंत्री ने कहा, “आरबीआई ने सूचित किया है कि बार-बार इस्तेमाल होने वाले बैंक नोटों तक जनता की पहुंच बढ़ाने के अपने प्रयास के तहत, 28 अप्रैल, 2025 को ‘एटीएम के माध्यम से 100 रुपए और 200 रुपए के बैंक नोटों का वितरण’ शीर्षक से एक परिपत्र जारी किया गया है, जिसमें सभी बैंकों और व्हाइट लेबल एटीएम ऑपरेटरों (डब्ल्यूएलएओ) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि उनके एटीएम नियमित रूप से 100 रुपए और 200 रुपए के बैंक नोट वितरित करें.”

लगभग 75 प्रतिशत एटीएम 30 सितंबर तक कम से कम एक कैसेट से 100 रुपए या 200 रुपए के बैंक नोट वितरित करेंगे. इसके अलावा, लगभग 90 प्रतिशत एटीएम 31 मार्च, 2026 तक कम से कम एक कैसेट से 100 रुपए या 200 रुपए के बैंक नोट वितरित करेंगे.

रविवार को सरकार ने एक वॉट्सऐप मैसेज को ‘असत्य’ करार दिया, जिसमें दावा किया गया था कि आरबीआई ने बैंकों को 30 सितंबर तक एटीएम के माध्यम से 500 रुपए के नोट जारी करना बंद करने का आदेश दिया है. सरकार ने कहा कि ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है.

भ्रामक मैसेज

इस भ्रामक संदेश में यह भी दावा किया गया था कि 90 प्रतिशत एटीएम 31 मार्च, 2026 तक 500 रुपए के नोट जारी करना बंद कर देंगे और 75 प्रतिशत एटीएम 30 सितंबर तक ऐसा कर देंगे. इसके अतिरिक्त, इसमें लोगों को अपने 500 रुपए के नोट समाप्त करने की सलाह दी गई थी और यह भी कहा गया था कि भविष्य में एटीएम के माध्यम से केवल 100 और 200 रुपए के नोट ही उपलब्ध होंगे.

CG: पूर्व CM भूपेश बघेल को SC ने दिया झटका, कहा- HC जाइए” “संपन्न लोग सीधे यहां क्यों पहुंच जाते हैं?

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SC ने कहा कि यह एक नया चलन बन गया है- जैसे ही कोई संपन्न व्यक्ति यहां आता है तो हम अपने निर्देशों को बदलने लगते हैं। अगर ऐसा ही चलता रहा, तो आम लोगों और उनके साधारण वकीलों के लिए उच्चतम न्यायालयों में कोई जगह नहीं बचेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने धनाढ्य और संपन्न लोगों द्वारा सीधे उसका रुख कर आपराधिक मामलों में राहत मांगने के चलन पर नाराजगी जताई और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके बेटे को हाई कोर्ट जाने को कहा क्योंकि उनके मामलों की जांच केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा की जा रही है। ये मामले छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले और अन्य मामलों से संबंधित हैं। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सोमवार को पिता-पुत्र से पूछा कि शीर्ष अदालत को प्राथमिकी, गिरफ्तारी व रिमांड तथा धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के खिलाफ उनकी याचिकाओं पर विचार क्यों करना चाहिए?

शीर्ष अदालत ने ये भी पूछा कि याचिकाकर्ता हाईकोर्ट क्यों नहीं गए, जो खुद भी एक संवैधानिक न्यायालय है और ऐसे मामलों पर फैसला कर सकता है। पीठ ने कहा, ‘‘हम इसी समस्या को झेल रहे हैं। उच्च न्यायालय इस मामले का फैसला क्यों नहीं कर सकता? अगर ऐसा नहीं होगा तो फिर उन अदालतों का क्या मतलब है? यह एक नया चलन बन गया है- जैसे ही कोई संपन्न व्यक्ति उच्चतम न्यायालय आता है, हम अपने निर्देशों को बदलने लगते हैं। अगर ऐसा ही चलता रहा, तो आम लोगों और उनके साधारण वकीलों के लिए उच्चतम न्यायालयों में कोई जगह नहीं बचेगी।’’

SC क्यों पहुंचे थे पिता-पुत्र? भूपेश बघेल और चैतन्य बघेल ने अलग-अलग याचिकाएं दाखिल कर जांच एजेंसियों की कार्रवाई और पीएमएलए के प्रावधानों को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक एम. सिंघवी ने कहा, “गिरफ्तारी का यह सिलसिला पूरे देश में देखा जा रहा है और प्रवर्तन निदेशालय जैसी जांच एजेंसियां टुकड़ों में आरोपपत्र दाखिल कर रही हैं, किसी को भी फंसा रही हैं और सभी को गिरफ्तार कर रही हैं।

”ईडी पर क्या-क्या आरोप?

पूर्व मुख्यमंत्री की तरफ से पैरवी कर रहे कपिल सिब्बल ने कहा, ‘‘ऐसा नहीं चल सकता। लोगों का नाम प्राथमिकी या शुरुआती आरोपपत्रों में नहीं होता, लेकिन अचानक उनके नाम पूरक आरोपपत्र में आ जाते हैं और उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है।’’ बघेल के बेटे की ओर से पेश सिंघवी ने कहा कि उनके मुवक्किल का नाम दो-तीन आरोपपत्रों में नहीं था, लेकिन मार्च में उनके घर पर अचानक छापा मारा गया और बाद में एक पूरक आरोपपत्र में उनका नाम आने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

ED SC के फैसले का उल्लंघन कर रहा:

सिब्बल सिब्बल ने दलील दी कि ईडी शीर्ष अदालत द्वारा 2022 के फैसले में निर्धारित कानून का उल्लंघन कर रहा है, जिसमें गिरफ्तारी के उसके अधिकार को बरकरार रखा गया था। कपिल सिब्बल ने कहा कि इसलिए याचिका में पीएमएलए की धारा 50 और 63 की वैधता को चुनौती दी गई है। ये धाराएं अधिकारियों को किसी भी व्यक्ति को तलब करने, दस्तावेज मंगवाने, जांच के दौरान बयान दर्ज करने और झूठा बयान देने पर सजा देने का अधिकार देती हैं।

हाई कोर्ट छुट्टी पर है क्या?

सरकार की  SC से राहुल गांधी को फटकार के बाद बोली कांग्रेस; चीन मुद्दा छेड़ा हाई कोर्ट जाने का आदेश पीठ ने पूछा कि अगर ईडी कानून का पालन नहीं कर रहा था या प्रक्रिया से भटक रहा था, तो क्या कोई इसे अदालत के संज्ञान में लेकर आया या जांच एजेंसियों की कार्रवाई को चुनौती दी। पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत पहले भी कह चुकी है कि आरोपपत्र दाखिल होने के बाद आगे की जांच केवल अदालत की अनुमति से ही हो सकती है। पीठ ने कहा, ‘‘ऐसे कई मामले होते हैं जहां कानून वैध होता है, लेकिन उस पर की गई कार्रवाई अवैध हो सकती है।’’ अदालत ने दोनों याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे अपने मामले से जुड़े सभी तथ्य उच्च न्यायालय के समक्ष रखें।

पीएमएलए की धाराओं 50 और 63 को चुनौती देने के संबंध में पीठ ने कहा कि दोनों याचिकाकर्ता इस मुद्दे पर नई रिट याचिकाएं दाखिल कर सकते हैं, और न्यायालय उन पर सुनवाई लंबित मामलों के साथ करेगा। इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने उन्हें उच्च न्यायालय जाने की अनुमति दी और उच्च न्यायालय से कहा कि वह उनकी याचिकाओं पर जल्दी सुनवाई करे।

 

”CG : सीएम विष्णु देव साय लगातार बस्तर को डेवलप करने के लिए नई नई योजनाओं का क्रियान्वयन”

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”CG : सीएम विष्णु देव साय लगातार बस्तर को डेवलप करने के लिए नई नई योजनाओं का क्रियान्वयन”

रायपुर: सीएम विष्णु देव साय लगातार बस्तर को डेवलप करने के लिए नई नई योजनाओं का क्रियान्वयन कर रहे हैं. बस्तर में बीते एक साल में सबसे ज्यादा बदलाव स्वास्थ्य के क्षेत्र में आया है. राष्ट्रीय स्तर के गुणवत्ता मान्यता से लेकर विशेषज्ञों की भर्ती तक की प्रक्रिया शामिल है

बस्तर में स्वास्थ्य क्रांति: 1 जनवरी, 2024 से 16 जून, 2025 के बीच, बस्तर संभाग के 130 स्वास्थ्य संस्थानों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानकों (एनक्यूएएस) के तहत प्रमाणित किया गया है. 4 अगस्त 2025 को जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि इनमें 1 जिला अस्पताल, 16 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और 113 उप-स्वास्थ्य केंद्र (एसएचसी) शामिल किए गए हैं. इसमें मुख्य रुप से कांकेर, बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा जैसे अति संवेदनशील ज़िलों के 14 संस्थानों ने मान्यता प्राप्त कर लिया है, जो चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी सेवा प्रदान करने के प्रति जागरुक है. 65 अतिरिक्त संस्थान वर्तमान में प्रमाणन प्रक्रिया से गुजर रहे हैं.

नियद नेल्लनार योजना: स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने नियाद नेल्लनार योजना के तहत आयुष्मान कार्ड नामांकन में तेज़ी लाई है. केवल एक वर्ष में, संभाग में 36,231 आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं, जिससे 52.6% कवरेज प्राप्त हुआ है. इसका फायदा ये मिला कि 6,816 लाभार्थियों ने 8.22 करोड़ रुपये की स्वास्थ्य सहायता प्राप्त की है, जिससे हज़ारों परिवारों को वास्तविक और समय पर राहत मिली है.

स्वास्थ्य सेवा सबको मुहैया कराना: शासन की कोशिश है कि गांव गांव तक गरीब परिवारों को स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिले. स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर बनाने के लिए हेल्थ सेवा का विस्तार और कर्माचरियों की संख्या बढ़ाई गई है. पिछले 18 महीनों में ही, बस्तर संभाग में 33 चिकित्सा विशेषज्ञ, 117 चिकित्सा अधिकारी और एक दंत चिकित्सक की नियुक्ति की गई. इसके अतिरिक्त, 75 राज्य-स्तरीय और 307 ज़िला-स्तरीय कर्मचारी एवं प्रबंधकीय पदों पर नियुक्ति की जा चुकी है, जबकि 291 और पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है.

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा: पूरे छत्तीसगढ़ में एक समान गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने के राज्य के उद्देश्य से काम किया जा रहा है. बस्तर में चल रहे मलेरिया-मुक्त अभियान पर हमें जोर देना है. घर-घर जाकर जांच, तत्काल उपचार और जागरूकता लोगों के बीच बढ़ाई जा रही है. एनक्यूएएस के तहत, राज्य भर के स्वास्थ्य संस्थानों और विशेष रूप से बस्तर में आदर्श स्तर का प्रदर्शन स्वास्थ्य के क्षेत्र में किया जा रहा है.

मंत्री करेंगे बस्तर का दौरा: स्वास्थ्य सेवाओं में तेजी और सुधार के लिए स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल 5 से 7 अगस्त तक बस्तर के तीन दिवसीय दौरे पर जाएंगे, जहां उनके साथ वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ भी होंगे. इस यात्रा कार्यक्रम में प्रमुख जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों का निरीक्षण, स्वायत्त निकायों की समीक्षा बैठकें, मलेरिया-मुक्त बस्तर अभियान का मूल्यांकन और प्रत्यक्ष मूल्यांकन के लिए बीजापुर और सुकमा के दूरदराज के गांवों का दौरा शामिल है.

जम्मू-कश्मीर, गोवा, बिहार और मेघालय के राज्यपाल रहे सत्यपाल मलिक का निधन…

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जम्मू-कश्मीर, गोवा, बिहार और मेघालय के राज्यपाल रहे सत्यपाल मलिक का 5 अगस्त 2025, मंगलवार को देहांत हो गया. वह कई दिनों से अस्पताल में भर्ती थे और उनका इलाज चल रहा था. सत्यपाल मलिक ने 79 वर्ष की आयु में दिल्ली स्थित राम मनोहर लोहिया अस्पताल में अंतिम सांस ली.

सत्यपाल मलिक के निजी सचिव केएस राणा ने यह जानकारी दी. दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल के अनुसार पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का आज दोपहर 1.10 बजे निधन हो गया. सत्यपाल मलिक के सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर उनके निधन की जानकारी दी गई. सत्यपाल मलिक बिहार में भी राज्यपाल थे.

आधिकारिक जानकारी के अनुसार सत्यपाल मलिक को किडनी की समस्या थी. उन्होंने कृषि आंदोलन, भ्रष्टाचार और कई राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी बेबाक राय के लिए सुर्खियां बटोरी थीं. अनुच्छेद 370 हटा तब राज्यपाल थे सत्यपाल मलिक बता दें जम्मू और कश्मीर में जब अनुच्छेद 370 और आर्टिकल 35 ए को समाप्त किया गया तब उस वक्त राज्यपाल सत्यपाल मलिक ही थे. जब जम्मू और कश्मीर को पूर्ण राज्य की जगह केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया गया, तब सत्यपाल मलिक केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्याल हो गए थे.

कैसा था सत्यपाल मलिक का सियासी सफर? 24 जुलाई 1946 को सत्यपाल मलिक, यूपी स्थित बागपत के मूल निवासी थे. मेरठ यूनवर्सिटी से विज्ञान में स्नातक और एलएलबी की डिग्री हासिल करने वाले सत्यपाल ने छात्र जीवन से राजनीति की दुनिया में कदम रखा. 1968-69 के दौरान वह छात्र संघ के अध्यक्ष भी चुने गए थे. उनके वह सन् 1974 में पहली बार विधानसभा के सदस्य चुने गए. इसके बाद सन् 1980 से 86 और 86-89 के दौरान वह यूपी से ही राज्यसभा गए.

सत्यपाल मलिक न सिर्फ राज्यसभा बल्कि लोकसभा के भी सदस्य थे. जनता दल के टिकट पर वह अलीगढ़ से 9वीं लोकसभा के लिए 1989-1991 सांसद थे. इसके बाद सन् 1996 में वह समाजवादी पार्टी के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़े लेकिन चौथे नंबर पर आए और 40 हजार 789 मतों से चुनाव हार गए. इन सियासी दलों के साथ रहे सत्यपाल सत्यपाल मलिक वर्ष 2012 में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी नियुक्त किए गए थे. अब सियासी करियर में वह बीजेपी के अलावा, भारतीय क्रांति दल, जनता दल, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, लोकदल और सपा में रहे.

सत्यपाल मलिक सितंबर 2017 से अगस्त 2018 तक बिहार, फिर 21 मार्च 2018 से 28 अगस्त 2018 तक ओडिशा के प्रभारी राज्यपाल, 23 अगस्त 2018 से 30 अक्टूबर 2019 तक जम्मू और कश्मीर के राज्यपाल, 3 नवंबर 2019 से 18 अगस्त 2020 तक गोवा और फिर 18 अगस्त 2020 से 3 अक्टूबर 2022 तक मेघालय के राज्यपाल थे.

किसने क्या कहा?

सत्यपालक मलिक के निधन पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शोक व्यक्त किया. सोशल मीडिया साइट एक्स पर अखिलेश ने लिखा- गोवा, बिहार, मेघालय और जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहे श्री सत्यपाल मलिक जी का निधन, अत्यंत दुःखद ! ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें. शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं. भावभीनी श्रद्धांजलि !

भाकियू नेता राकेश टिकैत ने कहा कि ग्रामीण पृष्ठभूमि से जुड़े पूर्व राज्यपाल सतपाल मलिक के निधन की दुखद सूचना प्राप्त हुई ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें व परिवारजनों को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें.

सत्यपाल के निधन पर जेडीयू के नेता केसी त्यागी ने कहा कि यह मेरे लिए निजी क्षति है. जब संयुक्त मेरठ था तो हम लोगों की राजनीतिक जीवन की शुरुआत एक साथ हुई. दोनों चौधरी चरण सिंह की अगुवाई वाले लोकदल में लंबे समय तक साथ रहे. बाद में वीपी सिंह की सरकार में हम दोनों साथ सांसद बनें. उनके जाने से पश्चिमी यूपी की बहुत मजबूत आवाज बंद हो गई.

रालोद नेता रोहित अग्रवाल ने कहा कि पूर्व गवर्नर सतपाल मलिक जी का निधन दुखद है, प्रभु उनको अपने चरणों में स्थान दें. विनम्र श्रद्धांजलि. हरियाणा में कांग्रेस नेता बृजेंद्र सिंह ने कहा कि पूर्व गवर्नर श्री सत्यपाल मलिक के निधन का दुखद समाचार मिला. मैं दिवंगत आत्मा की शांति व उनके प्रियजनों के लिए सम्बल की कामना करता हूँ. गाँव देहात व किसान समाज की जो आवाज़ सत्यपाल मलिक जी ने बुलन्द की, उसके लिए समाज सदैव उनका कृतज्ञ रहेगा.

कांग्रेस नेता तारिक अनवर ने लिखा कि पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक जी का राजनीतिक जीवन सिद्धांतों और स्पष्टवादिता से भरा रहा. उन्होंने किसानों, लोकतंत्र और सच के पक्ष में खुलकर बोलने का साहस दिखाया. सत्यपाल मलिक जी का निधन सार्वजनिक जीवन में एक निर्भीक हस्ती के अंत का प्रतीक है.

सपा नेता आईपी सिंह ने भी सत्यपाल मलिक के निधन पर शोक व्यक्त किया. उन्होंने लिखा कि अत्यंत दुःखद समाचार है किसान नेता पूर्व राज्यपाल चौधरी सत्यपाल सिंह मलिक जी नहीं रहे. देश की एक बेखौफ आवाज आज शांत हो गयी. भावभीनी श्रद्धांजलि. ओम शांति.

CG: राजधानी रायपुर समेत कई जिलों में बदलेगा मौसम का मिजाज, आज प्रदेश के कई जिलों में होगी भारी बारिश…

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CG: राजधानी रायपुर समेत कई जिलों में बदलेगा मौसम का मिजाज, आज प्रदेश के कई जिलों में होगी भारी बारिश। मौसम विभाग ने बारिश के साथ बिजली गिरने की जताई संभावना।

इन जिलों में हो सकती है बारिश : मौसम विभाग की तरफ से जारी अलर्ट के अनुसार, मंगलवार को दिन भर भीषण गर्मी पड़ने के बाद शाम को मौसम का मिजाज बदलेगा। देर शाम कई जिलों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं और जमकर बारिश भी हो सकती है। इतना ही नहीं प्रदेश के कई स्थानों पर आकाशीय बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है। मौसम विभाग की तरफ से जारी किए गए अलर्ट के अनुसार, रायपुर, दुर्ग, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, कोरबा, बालोद, राजनांदगांव, महासमुंद, बिलासपुर, धमतरी, बलौदाबजार, मुंगेली, दंतेवाड़ा समेत अन्य कई जिलों में जमकर बारिश होगी।

कई जिलों में रुक-रुककर होगी बारिश : वहीं, मौसम विभाग ने जानकारी देते हुए बताया कि, फ़िलहाल प्रदेश में मानसून की गतिविधियों में कमी आएगी। प्रदेश के कई जिलों में रुक-रूककर बारिश होगी। मौसम विभाग ने लोगों को सलाह देते हुए कहा कि, वे खराब मौसम के दौरान सतर्क रहें और बिना आवश्यक कारण के खुले स्थानों पर न जाएं।

छत्तीगसढ़ के रेलयात्रियों को बड़ा झटका त्यौहार के बीच रद्द रहेगी 26 एक्सप्रेस समेत 30 ट्रेनें..

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त्योहारी सीजन में 30 ट्रेनें पूरी तरह रद्द रहेंगी रायगढ़ स्टेशन पर नॉन इंटरलॉकिंग कार्य की वजह 26 एक्सप्रेस, 4 पैसेंजर ट्रेनें रद्द, 6 डायवर्ट

छत्तीसगढ़ में ट्रेनें रद्द : बताया जा रहा है कि, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के तहत 27 अगस्त से 15 सितंबर तक अलग अलग दिनों में 30 ट्रेनें पूरी तरह से प्रभावित रहेंगी। जानकारी के मुताबिक इस दौरान 26 एक्सप्रेस और 4 पैसेंजर ट्रेनें रद्द रहेंगी जबकि 6 ट्रेनें डायवर्ट की जाएंगी और 5 ट्रेनें गंतव्य से पहले खत्म हो जाएगी।

SECR ने जारी की सूचना : गौरतलब है कि, इस अवधि में गणेश पूजन के साथ तीज महोत्सव जैसे बड़े पर्व है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग यात्रा करते है। ऐसे में रेलवे के इस फैसले का असर छत्तीसगढ़ के आम यात्रियों पर देखें को मिलेगा। ट्रेन रद्द रहने की स्थिति में उन्हें सड़क मार्ग से यात्रा करना होगा।