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CJI पद से हटे हुए 8 महीने, पर चंद्रचूड़ ने नहीं किया यह काम, अब सुप्रीम कोर्ट ने थमाया नोटिस, कहा- जल्‍दी करें.

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भारत के पूर्व प्रधान न्‍यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. रिटायरमेंट के 8 महीने बाद भी उन्‍होंने अभी तक लुटियंस दिल्‍ली में स्थित आधिकारिक बंगले को खाली नहीं किया है. इस वजह से पूर्व सीजेआई संजीव खन्‍ना सीजेआई के लिए खासतौर पर आवंटित आवास में रहे बिना ही रिटायर हो गए. मौजूदा सीजेआई जस्टिस बीआर गवई को भी अभी तक देश के प्रधान न्‍यायाधीश के आवंटित आध‍िकारिक बंगला नसीब नहीं हुआ है. इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट एडमिनिस्‍ट्रेशन ने बड़ा और अप्रत्‍याशित कदम उठाया है. सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने केंद्र को इस बाबत नोटिस जारी कर मौजूदा सीजेआई के लिए आवंटित बंगले को बिना किसी देरी के खाली करवाने और उसे सुप्रीम कोर्ट हाउसिंग पूल को सौंपने को कहा है. अब केंद्र के शहरी विकास विभाग को इसपर फैसला लेना है.
सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए केंद्र सरकार को पत्र लिखकर पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस धनंजय वाई चंद्रचूड़ से तत्काल आधिकारिक आवास खाली कराने की मांग की है. सुप्रीम कोर्ट ने 1 जुलाई 2025 को केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) को भेजे पत्र में कहा कि जस्टिस चंद्रचूड़ (जिनका कार्यकाल नवंबर 2024 में समाप्त हो गया था) लुटियंस दिल्ली स्थित कृष्ण मेनन मार्ग का सरकारी बंगला तय समयसीमा से अधिक समय तक रखे हुए हैं. बंगला नंबर-5, कृष्ण मेनन मार्ग पर देश के प्रधान न्यायाधीश के लिए आरक्षित है. सुप्रीम कोर्ट की ओर से केंद्र को भेजे गए पत्र में कहा गया है, ‘जस्टिस (रिटायर्ड) डीवाई चंद्रचूड़ को यह बंगला रखने की जो अनुमति दी गई थी, वह 31 मई 2025 को समाप्त हो चुकी है. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट जजेज (संशोधन) नियम, 2022 के तहत नियम 3B में दिए गए छह माह की अवधि भी 10 मई 2025 को खत्म हो गई है. ऐसे में बिना किसी देरी के यह आवास वापस लिया जाए.’
नियमों का उल्लंघन
सुप्रीम कोर्ट की ओर भेजे गए पत्र में इस बात पर जोर दिया गया कि चंद्रचूड़ अब नियमों के तहत आवंटित की जा सकने वाली टाइप VII श्रेणी की बजाय टाइप VIII बंगले में रह रहे हैं, जिसकी अनुमति सिर्फ कार्यरत CJI को होती है. नियम 3B के अनुसार, कोई भी सेवानिवृत्त प्रधान न्यायाधीश छह माह तक केवल टाइप VII आवास रख सकता है, वह भी प्रतीकात्मक लाइसेंस फीस पर. चंद्रचूड़ ने दिसंबर 2024 में निवर्तमान CJI जस्टिस संजीव खन्ना को पत्र लिखकर 30 अप्रैल 2025 तक बंगला रखने की अनुमति मांगी थी, जो दी गई थी. बाद में मौखिक अनुरोध पर उन्हें 31 मई तक रहन की अनुमति दी गई, वो भी इस शर्त के साथ कि इसके बाद कोई और विस्तार नहीं दिया जाएगा. इसके बावजूद अब वह जुलाई में भी उसी बंगले में रह रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने मंत्रालय से कहा है कि अब और कोई विस्तार नहीं हो सकता, इसलिए बिना किसी विलंब के बंगला वापस लिया जाए.

जस्टिस चंद्रचूड़ की सफाई
पूर्व CJI चंद्रचूड़ ने देरी की वजह निजी परिस्थितियों को बताया है. उनका कहना है कि उन्हें वैकल्पिक आवास पहले ही मिल चुका है, लेकिन वह पिछले दो वर्षों से बंद था और अभी भी रहने योग्य नहीं है. उन्होंने कहा कि जैसे ही मरम्मत कार्य पूरा होगा, वह तत्काल उसमें शिफ्ट हो जाएंगे. उन्होंने यह भी बताया कि उनकी दो बेटियां विशेष देखभाल की स्थिति में हैं और उन्हें AIIMS में इलाज मिल रहा है. पूर्व सीजेआई ने कहा, ‘मेरी दोनों बेटियों को गंभीर जेनेटिक डिसऑर्डर (नेमालीन मायोपैथी) है, जिसके कारण मुझे उनके अनुकूल घर खोजने में समय लग गया. मैंने यह जानकारी सुप्रीम कोर्ट प्रशासन को पहले ही दे दी थी.’ पूर्व CJI चंद्रचूड़ ने यह भी कहा कि अतीत में भी कई सेवानिवृत्त प्रधान न्यायाधीशों को कुछ समय तक सरकारी आवास रखने की अनुमति दी गई है. उन्होंने कहा कि मैं अपनी जिम्मेदारियों से पूरी तरह अवगत हूं और जल्द ही शिफ्ट हो जाऊंगा.

दिल्ली में एसी की गैस बनी काल, घर में मृत मिले चार मैकेनिक

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दक्षिण दिल्ली के दक्षिणपुरी इलाके में शनिवार को हुए एक दर्दनाक हादसे की जांच जारी है. यहां एक मकान के अंदर एसी की मरम्मत करने वाले चार युवक मृत पाए गए. शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि एसी में इस्तेमाल होने वाली गैस के रिसाव से दम घुटने के कारण इनकी मौत हुई है. पुलिस के मुताबिक, मृतकों की पहचान इमरान उर्फ सलमान (30), मोहसिन (20), हसीब और कपिल उर्फ अंकित रस्तोगी (18) के रूप में हुई है. सभी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बरेली के रहने वाले थे और दिल्ली में रहकर एसी रिपेयरिंग का काम करते थे. शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि यह मौत एसी के गैस के कारण हुई है.

एसी में कौन सी गैस होती है और यह कितनी खतरनाक है?
आपके दिमाग में भी सवाल होगा आखिर एसी में कौन सी गैस होती है, जो इतनी जानलेवा बन सकती है? एसी में आमतौर पर HFC (हाइड्रोफ्लोरोकार्बन) गैस जैसे R-32, R-410A या पुराने सिस्टम में R-22 भरी जाती है. ये गैसें कमरों को ठंडा करती हैं. हालांकि ये गैसें सीधे तौर पर इतनी जहरीली नहीं होतीं कि एक बार में मौत हो जाए. लेकिन अगर बंद कमरे में ज्यादा मात्रा में गैस लीक हो जाए, तो यह ऑक्सीजन की जगह ले लेती है, जिससे दम घुट सकता है. यही कारण है कि वेंटिलेशन न होने पर एसी रिपेयरिंग बेहद खतरनाक साबित हो सकती है.

कैसे चला हादसे का पता?
दरअसल, मृतकों में से दो के चचेरे भाई जिशान ने जब फोन किया तो जवाब नहीं मिला. शक होने पर उसने पुलिस को सूचना दी. पुलिस मौके पर पहुंची तो देखा कि मकान अंदर से बंद था. दरवाजा तोड़कर जब पुलिस अंदर दाखिल हुई, तो पहली मंजिल पर चारों युवक बेसुध पड़े थे. उन्हें तुरंत डॉ. आंबेडकर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां तीनों को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि चौथे युवक हसीब ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. बाद में शवों को सफदरजंग और एम्स ट्रॉमा सेंटर भेजा गया.

पुलिस ने बताया, “कमरे में न तो हवा आने-जाने की पर्याप्त व्यवस्था थी और न ही वेंटिलेशन. चारों के आसपास एसी मरम्मत का सामान और गैस सिलेंडर पड़ा था, जिससे लगता है कि गैस लीक हो गई और दम घुटने से उनकी जान चली गई.” हालांकि, सही कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही साफ होगा.

ICAI CA Result 2025: icai.nic.in पर आईसीएआई सीए रिजल्ट जारी, राजन काबरा ने किया टॉप

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इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया ने 06 जुलाई 2025 को सीए फाइनल और इंटरमीडिएट मई 2025 सत्र की परीक्षाओं के रिजल्ट जारी कर दिए हैं. आईसीएआई सीए फाउंडेशन, इंटरमीडिएट और फाइनल परीक्षा 2025 में शामिल हुए कैंडिडेट्स ऑफिशियल वेबसाइट icai.nic.in पर विजिट करके अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं. आईसीएआई सीए रिजल्ट 2025 चेक करने के लिए उम्मीदवारों को एप्लीकेशन नंबर और रोल नंबर जैसी डिटेल्स एंटर करनी होंगी.
इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया के अनुसार, आईसीएआई सीए परीक्षा में पास होने के लिए उम्मीदवारों को हर विषय में कम से कम 40 प्रतिशत अंक हासिल करने होंगे. इससे कम मार्क्स होने पर उन्हें फेल घोषित कर दिया जाएगा. आईसीएआई सीए फाउंडेशन, इंटरमीडिएट, फाइनल परीक्षा में उन्हीं उम्मीदवारों को सफल माना जाएगा, जो सभी विषयों को मिलाकर परीक्षा में कुल 50 प्रतिशत हासिल करेंगे. इससे कम मार्क्स वाले अगले साल फिर से सीए परीक्षा दे सकते हैं.
आईसीएआई सीए टॉपर 2025
आईसीएआई सीए फाइनल परीक्षा में 14,247 कैंडिडेट्स ने क्वॉलिफाई किया है. इनमें से मुंबई के राजन काबरा ने ऑल इंडिया रैंक 1 के साथ टॉप किया है. वहीं, कोलकाता की निष्ठा बोथरा ने दूसरी और मुंबई के मानव राकेश शाह ने तीसरी रैंक हासिल की है.

आईसीएआई फाइनल परीक्षा रिजल्ट मई 2025

आईसीएआई ने हाल ही में सीए फाइनल परीक्षा मई 2025 का रिजल्ट icai.nic.in पर घोषित किया है.
ग्रुप उम्मीदवारों की संख्या सफल उम्मीदवार पास परसेंटेज
1 ग्रुप-1 66943 14979 22.38%
2 ग्रुप-2 46173 12204 26.43%
3 दोनों ग्रुप्स 29286 5490 18.75%

कुल 14247 कैंडिडेट्स ने चार्टर्ड अकाउंटेंट के तौर पर क्वॉलिफाई किया है.

आईसीएआई फाउंडेशन परीक्षा परिणाम मई 2025
इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया ने मई 2025 में हुई सीए फाउंडेशन परीक्षा का रिजल्ट भी घोषित कर दिया है.
जेंडर उम्मीदवारों की संख्या सफल उम्मीदवारों की संख्या पास परसेंटेज परीक्षा केंद्र
पुरुष 43389 7056 16.26%
महिला 39273 5418 13.80% टोटल 551
कुल 82662 12474 15.09%
आईसीएआई सीए इंटरमीडिएट रिजल्ट 2025
आईसीएआई ने सीए इंटरमीडिएट मई परीक्षा परिणाम भी घोषित कर दिया है. इसके आंकड़े नीचे टेबल में देख सकते हैं-
ग्रुप उम्मीदवारों की संख्या सफल उम्मीदवारों की संख्या पास परसेंटेज
1 ग्रुप-1 97034 14232 14.67
2 ग्रुप-2 72069 15502 21.51
3 ग्रुप 1 और 2 38029 5028 13.22
आईसीएआई सीए रिजल्ट 2025 कैसे चेक करें?
आईसीएआई सीए इंटरमीडिएट, फाउंडेशन और फाइनल रिजल्ट 2025 नीचे लिखे स्टेप्स के जरिए चेक कर सकते हैं-
1- आईसीएआई सीए रिजल्ट (मई 2025) चेक करने के लिए ऑफिशियल वेबसाइट icai.nic.in पर विजिट करें.
2- वेबसाइट के होम पेज पर मई सत्र 2025 लिंक पर क्लिक करें.
3- सीए रिजल्ट 2025 चेक करने के लिए रोल नंबर और एप्लीकेशन नंबर जैसी जरूरी डिटेल्स एंटर करें.
4- इतना करते ही आपकी स्क्रीन पर आईसीएआई सीए स्कोर कार्ड ओपन हो जाएगा.
5- सीए रिजल्ट 2025 चेक करने के बाद फ्यूचर रेफरेंस के लिए उसका प्रिंटआउट जरूर निकाल लें.

5th जेनरेशन जेट की छुट्टी करेगा यह महाबली, राफेल और F-35 से भी ताकतवर, 12000 KM रेंज, ₹4275 करोड़ में एक प्‍लेन

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इजरायल-हमास, इजरायल-ईरान और रूस-यूक्रेन युद्ध ने दुनिया की तस्‍वीर को बदल कर रख दिया है. सामरिक स्थिति में व्‍यापक पैमाने पर बदलाव देखे जा रहे हैं. दुनिया दो खेमों में बंट चुकी है, ऐसे में भारत जैसे देश के लिए डिफेंस सेक्‍टर में खुद को आत्‍मनिर्भर बनाना काफी जरूरी हो गया है. स्‍ट्रैटजिक पार्टनर्स के साथ टेक्‍नोलॉजिकल सहयोग के साथ ही अपग्रेडेड वेपन हासिल करना समय की मांग है. भारत और रूस का संबंध दशकों पुराना है. रूस ने हर बुरे वक्‍त में हमारा साथ दिया है. मौजूदा माहौल में भारत के लिए अपने डिफेंस सिस्‍टम को दुरुस्‍त करना जरूरी हो गया है. 4 जुलाई 2025 को आर्मी के डिप्‍टी चीफ ने ऑपरेशन सिंदूर का उल्‍लेख करते हुए कुछ महत्‍वपूर्ण कमियों के बारे में बड़ी साफगोई से बात की थी. उन्‍होंने सिस्‍टम को नई टेक्‍नोलॉजी के साथ पूरे सिस्‍टम को अपग्रेड करने की जरूरत पर जोर दिया. बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर के समय इंडियन एयरफोर्स ने अहम भूमिका निभाई, पर यही वायुसेना फाइटर जेट की कमी से जूझ रही है. भारत इस कमी को दो स्‍तरों पर दूर करने की कोशिश में जुटा है. पहला, पार्टनर देशों से फाइटर जेट इंपोर्ट कर और दूसरा घरेलू स्‍तर पर लड़ाकू विमान के उत्‍पादन को बढ़ाकर. भारत पांचवीं पीढ़ी का विमान हासिल करने में जुटा है. साथ ही 5th जेनरेशन का देसी फाइटर जेट बनाने के लिए AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) प्रोजेक्‍ट भी लॉन्‍च किया गया है. हाल में ही डिफेंस डिपार्टमेंट की ओर से पांचवीं पीढ़ी का प्रोटोटाइप डिजाइन तैयार करने का कॉन्‍ट्रैक्‍ट भी निकाला गया है. इसके लिए 15000 करोड़ रुपये का शुरुआती फंड रखा गया है. इस बीच, अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों को ध्‍वस्‍त करने के लिए जिस तरह से B-2 स्पिरिट बॉम्‍बर स्‍टील्‍थ जेट का इस्‍तेमाल किया, उससे अब एक बार फिर से बॉम्‍बर जेट पर फोकस बढ़ गया है.
कुछ दिनों पहले ही भारत द्वारा अपने तरह का बंकर बस्‍टर वेपन सिस्‍टम डेवलप करने की बात सामने आई है. यह प्रणाली म‍िसाइल पर आधारित होगी. दरअसल, भारत के पास अमेरिका या रूस की तरह मॉडर्न बॉम्‍बर जेट नहीं है, ऐसे में भारत मिसाइल टेक्‍नोलॉजी आधारित बंकर बस्‍टर सिस्‍टम डेवलप करने में जुटा है. इसके लिए अग्नि-5 इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल को बंकर बस्‍टर के तौर पर डेवलप कर रहा है. बता दें कि भारत मित्र देश रूस से दुनिया के मॉडर्न बॉम्‍बर जेट में से एक हासिल करने में जुटा है. इसका नाम टुपोलेव Tu-160M है. इसे व्‍हाइट स्‍वान के नाम से भी जाना जाता है. अमेरिका की अगुआई वाला NATO Tu-160M को ब्‍लैकजैक कहता है. यूक्रेन के साथ जारी जंग के कारण Tu-160M स्‍ट्रैटजिक बॉम्‍बर जेट के उत्‍पादन में देरी हो रही है. बता दें कि रूस इस अल्‍ट्रा मॉडर्न सुपरसोनिक बॉम्‍बर जेट को अपने कजान प्‍लांट में डेवलप करता है. कुछ सप्‍ताह पहले यूक्रेन ने रूस के एक एयरबेस पर हमला कर कई बॉम्‍बर जेट को तबाह कर दिया था. इससे रूस का डिफेंस प्रोडक्‍शन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. साथ ही भारत द्वारा स्‍ट्रैटजिक बॉम्‍बर जेट हासिल करने के प्रयासों को भी धक्‍का लगा है. डिफेंस एक्‍सपर्ट का मानना है कि यदि भारत Tu-160M बॉम्‍बर जेट हासिल करने में सक्षम रहता है तो रीजन में स्‍ट्रैटजिक बैलेंस को अपने पक्ष में करने में सक्षम हो जाएगा. बता दें कि मौजूदा समय में भारत राफेल और Su-30MKI जैसे मल्‍टीरोल फाइटर जेट पर निर्भर है. इसके साथ ही पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान हासिल करने का प्रयास भी किया जा रहा है.

Tu-160M बॉम्‍बर जेट की कीमत
Tu-160M बॉम्‍बर जेट की गिनती दुनिया के खतरनाक और शक्तिशाली विमानों में होती है. Tu-160M एक सुपरसोनिक जेट है, ऐसे में यह 1200 किलोमीटर प्रति घंटे से भी ज्‍यादा की रफ्तार से उड़ान भर सकता है. इसके साथ ही रूस का यह महाबली जेट कन्‍वेंशनल (परंपरागत या सामान्‍य विस्‍फोटक) के साथ ही न्‍यूक्लियर पेलोड ले जाने में सक्षम है, जो इसकी ताकत को बताने के लिए काफी है. Tu-160M बमवर्षक विमान सामान्‍य फाइटर जेट से कहीं अलग है. बता दें कि इस जेट को हासिल करने के बाद भारत इसमें ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल को इसमें इंटीग्रेट करने की योजना बना रहा है. जाहिर है कि ब्रह्मोस दुनिया की सबसे खतरनाक और घातक क्रूज मिसाइल है. ब्रह्मोस फिलहाल एक सुपरसोनिक मिसाइल सिस्‍टम है और इसे हाइपरसोनिक में बदलने के प्रोजेक्‍ट पर काम चल रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, एक टीयू-160एम बॉम्‍बर की कीमत 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी ₹4275 है. इसके अलावा इसका मेंटेनेंस आम फाइटर जेट से ज्‍यादा है.

12000 किलोमीटर रेंज
रूसी Tu-160M बॉम्‍बर जेट कई मायनों में खास है. इसका कॉम्‍बेट रेंज 1200 किलोमीटर है. इसका मतलब यह हुआ कि इतनी दूरी तक इसे री-फ्यूलिंग की जरूरत नहीं पड़ती है. यदि भारत इसे हासिल करने में सफल रहता है तो एशिया-पैसिफिक रीजन में चीन की दादागिरी पर लगाम लगाया जा सकेगा. बता दें कि चीन ने भी H-6 के नाम से अपना बॉम्‍बर जेट डेवलप किया है, ऐसे में इंडियन एयरफोर्स के पास Tu-160M बॉम्‍बर जेट होने की वजह से भारत को बीजिंग पर बढ़त हासिल हो जाएगी. चीन का एच-6 टेक्‍नोलॉजी और अन्‍य स्‍पेसीफिकेशन में Tu-160M से कहीं पीछे है.

40000 किलो पेलोड ले जाने की क्षमता

सबसे खास बात यह है कि Tu-160M बॉम्‍बर जेट अविश्‍वसनीय तरीके से विस्‍फोटक की मात्रा लेकर उड़ान भरने में सक्षम है. रिपोर्ट की मानें तो रूसी बॉम्‍बर जेट 40 टन पेलोड के साथ टारगेट पर धावा बोल सकता है. 40 टन का मतलब हुआ 40000 किलोग्राम विस्‍फोटक के साथ दुश्‍मन के ठिकानों पर हमला. इतनी बड़ी मात्रा में पेलोड कहीं भी व्‍यापक पैमाने पर तबाही मचाने में सक्षम होगा. दिलचस्‍प बात यह है कि Tu-160M बॉम्‍बर जेट जितना पेलोड ले जाने में सक्षम है, उतना राफेल और एफ-35 का वजन तक नहीं है. बिना पेलोडे के राफेल जेट का वेट 10 टन यानी 10000 किलो है. वहीं, F-35 का वजन 1300 किलोग्राम है. इस तरह रूसी Tu-160M बॉम्‍बर जेट राफेल और एफ-35 के संयुक्‍त वजन से कहीं ज्‍यादा पेलोड ले जाने में सक्षम है.

सरकारी नौकरी, फिर IIT-IIM और अब सुप्रीम कोर्ट… ओबीसी को मिलेगा आरक्षण, बदल गया 6 दशक पुराना नियम

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सरकारी नौकरियों और IIT-IIM जैसे उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षण मिलने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इस दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है. कोर्ट ने ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) को आरक्षण देने का निर्णय लिया है. भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट ने अपने गैर-न्यायिक कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है. इसके तहत अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), दिव्यांग, पूर्व सैनिकों और स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों के साथ-साथ ओबीसी को भी आरक्षण का लाभ देने की अधिसूचना जारी कर दी है.

6 दशक पुराने रूल में संशोधन
इस बदलाव के तहत सुप्रीम कोर्ट ऑफिसर्स एंड सर्वेंट्स (कंडीशन्स ऑफ सर्विस एंड कंडक्ट) रूल्स, 1961 के नियम 4A में संशोधन किया गया है. यह संशोधन संविधान के अनुच्छेद 146(2) के तहत मुख्य न्यायाधीश की शक्तियों का प्रयोग करते हुए किया गया है. अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि इन सभी श्रेणियों को केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर जारी आदेशों और अधिसूचनाओं के अनुसार आरक्षण मिलेगा, जैसा कि उन पदों के लिए निर्धारित वेतनमान के अनुरूप होता है.

सुप्रीम कोर्ट ने 33 साल बाद उठाया कदम
यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक बदलावनहीं, बल्कि न्यायिक व्यवस्था में समावेशिता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने यह कदम उस ऐतिहासिक फैसले के 33 साल बाद उठाया है, जब 1992 में इंदिरा साहनी बनाम भारत सरकार मामले में नौ-न्यायाधीशों की पीठ ने ओबीसी को 27% आरक्षण देने को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया था. बावजूद इसके, सुप्रीम कोर्ट की आंतरिक भर्तियों में अब तक ओबीसी वर्ग को आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया था. वहीं पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री रहे अर्जुन सिंह ने उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी वर्ग को भी आरक्षण का रास्ता साफ किया था.

राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विल्सन लंबे समय से सुप्रीम कोर्ट में ओबीसी आरक्षण की मांग कर रहे थे. उन्होंने इसे ‘ऐतिहासिक सुधार’ करार दिया. उन्होंने कहा कि यह संशोधन अब सुप्रीम कोर्ट की भर्तियों को राष्ट्रीय स्तर पर लागू आरक्षण मानकों के अनुरूप लाएगा.

इतना ही नहीं, मुख्य न्यायाधीश गवई ने एससी और एसटी वर्ग के लिए एक स्पष्ट रोस्टर प्रणाली लागू करने की पहल भी की है, जो आर.के. सबरवाल बनाम हरियाणा राज्य (1995) मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुझाए गए 200-पॉइंट रोस्टर सिस्टम के अनुरूप है. यह प्रणाली सुनिश्चित करेगी कि सामान्य और आरक्षित वर्गों के बीच न्यायोचित संतुलन बना रहे.
देश के इतिहास में यह पहली बार है जब सुप्रीम कोर्ट के आंतरिक नियमों में इस प्रकार का व्यापक सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने वाला संशोधन किया गया है. जिस सुप्रीम कोर्ट ने दशकों पहले सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को मान्यता दी थी, आज वही अदालत अपने भीतर उसी न्याय को लागू करती नजर आ रही है.

भारत के खिलाफ चीन की नई साजिश! म्यांमार को मोहरा बनाकर पूर्वोत्तर में उबाल, मिजोरम-मणिपुर सीमा बनी बारूद का ढेर

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भारत-पाकिस्तान युद्ध में जब चीन ने पाकिस्तान की खुलकर मदद की थी. तब दुनिया ने पहली बार देखा था कि चीन भारत को कमजोर करने के लिए किस हद तक जा सकता है. लेकिन अब बीजिंग ने एक और मोर्चा खोल दिया है इस बार भारत के अपने ही पड़ोसी म्यांमार को मोहरा बनाकर. म्यांमार में चिन विद्रोहियों के संघर्ष को चीन जिस तरह हवा दे रहा है, उससे भारत के मिजोरम और मणिपुर जैसे शांत सीमांत राज्यों में भीषण अस्थिरता पैदा हो गई है.
म्यांमार के चिन इलाके में CNDF और CDF जैसे जातीय गुटों के बीच छिड़ा संघर्ष अब भारत की सीमा पर उबाल बन चुका है. 2 जुलाई को CNDF ने मिजोरम की सीमा से लगे खावथलिर गांव में अवैध चेकपॉइंट बना डाले, आम नागरिकों से वसूली की, फोन चेक किए. जवाब में CDF ने हथियार उठाए और जो हुआ उसने मिजोरम की सीमा पर दहशत फैला दी.
म्यांमार के बहाने चीन की नई चाल
चौंकाने वाली बात ये है कि CNDF के कब्ज़े में जो हथियार बरामद हुए, वो चीन निर्मित हैं. यही नहीं CNDF के सीनियर नेताओं को चीन के युन्नान प्रांत में ‘विशेष प्रशिक्षण’ मिला. भारत की एजेंसियों को यह सूचना म्यांमार के भीतर से मिली है. यानी चीन म्यांमार में विद्रोह को सिर्फ हवा नहीं दे रहा उसे रणनीतिक रूप से संचालित भी कर रहा है.

हथियारों की तस्करी, शरणार्थियों का सैलाब मिजोरम पर बढ़ा बोझ
जोखावथरसीमा से 245 नए शरणार्थी मिजोरम में दाखिल हुए हैं. इससे कुल संख्या 35,000 के पार पहुंच चुकी है. इस मानवीय संकट के पीछे भी चीन की रणनीति झलकती है. भीतर से भारत को कमजोर करने की साजिश जिससे राज्य सरकारें अस्थिर हों, केंद्र पर दबाव बढ़े और सामुदायिक तनाव गहराए.
हथियारों की तस्करी भी चीन के समर्थन से म्यांमार के विद्रोही गुटों द्वारा लॉन्गतलाई और चंपाई इलाकों से की जा रही है. ये वही रास्ते हैं जिनके ज़रिए पाकिस्तानी एजेंसियां भी ड्रग्स और नकली नोट पहुंचाने की कोशिश करती रही हैं. यानी पूर्वोत्तर में एक ‘सीक्रेट वॉर’ चीन कर रहा है.

2023 में मिजोरम से 184 मैतई लोगों को पलायन करना पड़ा था. तब भी म्यांमार के ही जातीय तनाव की आंच भारत के भीतर महसूस की गई थी. अब फिर मिजोरम की कुकी-जो समुदाय के लिए खुला समर्थन मणिपुर के साथ रिश्तों में तल्खी ला रहा है.
विशेषज्ञ इसे चीन की ‘Divide India’ पॉलिसी का हिस्सा मानते हैं. वह जानता है कि जहां युद्ध नहीं जीत सकते, वहां समाज को तोड़ो, राज्यों को उलझाओ और लोकतंत्र के भीतर से अस्थिरता पैदा करो.

चिन एकता टूटी, चीन की चाल सफल?
आइजोल में चिन विद्रोही गुटों के बीच जो एकता बनी थी वो अब CNDF के ड्रोन हमलों और CDF के आपातकाल के एलान के साथ खत्म हो चुकी है. CNDF ने फालाम-रिखावदार कॉरिडोर पर नियंत्रण के लिए हमला तेज किया है. यही इलाका भारत से लगी लॉजिस्टिक सप्लाई का मुख्य मार्ग है. जाहिर है CNDF को यह रणनीति किसी स्थानीय दिमाग ने नहीं दी यह सीधे-सीधे एक रणनीतिक थिंक टैंक की स्क्रिप्ट लगती है और उंगलियां सीधे बीजिंग की ओर उठती हैं.

B-2 बॉम्बर और लड़ाकू विमान…. अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस पर व्हाइट हाउस में कुछ ऐसा दिखा नजारा

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी. साथ ही इस मौके पर अमेरिकी बी-2 बॉम्बर्स की झलक भी देखने को मिला. दरअसल व्हाइट हाउस के ऊपर से दो बी-2 बॉम्बर्स ने फ्लाईपास्ट किया. अमेरिका की प्रथम महिला और पत्नी मेलानिया ट्रंप के साथ, ट्रंप व्हाइट हाउस की बालकनी से इन्हें देखते हुए नजर आए. बी-2 बॉम्बर्स के अलावा एफ-35 और एफ-22 लड़ाकू विमान भी व्हाइट हाउस के ऊपर से गुजरे. बता दें कि बी-2 बॉम्बर्स विमान से ही हाल ही में ईरानी परमाणु स्थलों पर हमला किया था.

ट्रंप ने विधेयक पर किए हस्ताक्षर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘व्हाइट हाउस’ में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान ‘वन बिग ब्यूटीफुल बिल’ पर भी हस्ताक्षर किए. इसके साथ अब यह बिल एक कानून बन गया है. यह बिल प्रतिनिधि सभा के पारित किए जाने के एक दिन बाद आया, जिससे राष्ट्रपति ट्रंप के ऐतिहासिक कानून को अंतिम स्वीकृति मिल गई. स्वतंत्रता दिवस समारोह में ट्रंप ने कहा, ” मैंने कभी देश में लोगों को इतना खुश नहीं देखा क्योंकि कई अलग-अलग वर्गों के लोग अब सुरक्षित महसूस कर रहे हैं. इनमें सेना, आम नागरिक और विभिन्न प्रकार की नौकरियों से जुड़े लोग शामिल हैं.”

राष्ट्रपति ट्रंप ने साउथ डकोटा से रिपब्लिकन सीनेट मेजॉरिटी लीडर जॉन थ्यून और लुइसियाना से रिपब्लिकन हाउस स्पीकर माइक जॉनसन को सराहा, जिन्होंने इस विधेयक को कांग्रेस के दोनों सदनों से पारित कराने में अहम भूमिका निभाई है. ट्रंप ने कहा, वह दोनों एक ऐसी टीम हैं, जिसे हराया नहीं जा सकता. ट्रंप ने ‘वन बिग ब्यूटीफुल बिल’ की तारीफ की. उन्होंने इसे अमेरिका के ‘नए स्वर्ण युग की शुरुआत’ बताया

शाश्वत लिटिल स्टार सुहेला की मान्यता रद्द, इन स्कूलों से भी जवाब तलब

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बलौदा बाजार में स्व डी. आर. वर्मा स्मृति शिक्षण संस्थान झीपन की ओर से संचालित शाश्वत लिटिल स्टार सुहेला की मान्यता तत्काल समाप्त कर दी गई. यह कार्रवाई कलेक्टर दीपक सोनी ने जांच समिति के रिपोर्ट के आधार पर की है.

बताया जा रहा है कि स्व. डी. आर.वर्मा स्मृति शिक्षण संस्थान झीपन के द्वारा संचालित शांति देवी उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सुहेला, शांति देवी लिटित स्टार स्कूल सुहेला, शांति देवी स्कूल रावन, शांति देवी स्कूल दतान और शाश्वत लिटिल स्टार की जांच के लिए 6 सादस्यीय जांच दल गठित की गई थी. जिसके द्वारा शांति देवी उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सुहेला में 9 जून 2025 को नाबालिग से छेड़छाड़ और विद्यालय संचालन के लिए संसाधनों और मापदंडों का जांच किया गया.

जांच समिति के प्रतिवेदन के आधार पर स्व. डी. आर. वर्मा स्मृति शिक्षण संस्थान झीपन के द्वारा संचालित शाश्वत लिटिल स्टार सुहेला की मान्यता तत्काल समाप्त कर दी गई.

परिसर के आवास में प्रवेश पर लगा प्रतिबंध
शांति देवी उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सुहेला में निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत कार्यवाही की गई. इसके तहत आरोपी शैलेष वर्मा पर परिसर के आवास में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. संचालक और प्राचार्य को एक सप्ताह के अंदर विद्यालय परिसर से अन्यत्र आवास स्थापित करने के लिए निर्देशित किया गया.


स्कूल को निर्देश, पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित शिक्षक की करें व्यवस्था
कार्रवाई करने के साथ ही स्कूल प्रबंधन को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए 15 दिवस के भीतर न्यूनतम अहर्ता प्रशिक्षित शिक्षक की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए.

इन स्कूलों से जवाब तलब
शांति देवी लिटिल स्टार स्कूल सुहेला, शांति देवी स्कूल रावन, शांति देवी स्कूल दतान में संचालन के लिए संसाधनों और मापदंडो में पाई गई कमियों के कारण निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत कार्यवाही करते हुए संसाधनों और मापदंडों को पूरा करने के लिए नोटिस जारी किया गया.शिक्षण समिति द्वारा कार्यवाही नहीं करने की स्थिति में इन विद्यालयों की मान्यता समाप्त करने की कार्यवाही की जाएगी.

छेड़खानी के मामले किया था विरोध
स्कूली छात्रा से छेड़खानी के मामले में साहू समाज ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मान्यता रद्द करने की मांग करते की थी. साथ ही एक सप्ताह का समय दिया था. समय बीत जाने पर सुहेला में समाज के लोगों ने प्रदर्शन किया था. माना जा रहा है कि इसके बाद ही जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से देर रात आदेश जारी किया गया.

स्कूल को निर्देश, पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित शिक्षक की करें व्यवस्था
कार्रवाई करने के साथ ही स्कूल प्रबंधन को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए 15 दिवस के भीतर न्यूनतम अहर्ता प्रशिक्षित शिक्षक की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए.

इन स्कूलों से जवाब तलब
शांति देवी लिटिल स्टार स्कूल सुहेला, शांति देवी स्कूल रावन, शांति देवी स्कूल दतान में संचालन के लिए संसाधनों और मापदंडो में पाई गई कमियों के कारण निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत कार्यवाही करते हुए संसाधनों और मापदंडों को पूरा करने के लिए नोटिस जारी किया गया.शिक्षण समिति द्वारा कार्यवाही नहीं करने की स्थिति में इन विद्यालयों की मान्यता समाप्त करने की कार्यवाही की जाएगी.

छेड़खानी के मामले किया था विरोध
स्कूली छात्रा से छेड़खानी के मामले में साहू समाज ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मान्यता रद्द करने की मांग करते की थी. साथ ही एक सप्ताह का समय दिया था. समय बीत जाने पर सुहेला में समाज के लोगों ने प्रदर्शन किया था. माना जा रहा है कि इसके बाद ही जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से देर रात आदेश जारी किया गया.

रिक्त पीएलव्ही के 10 पदो के भर्ती के लिए आवेदन 21 जुलाई तक

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नालसा एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर एवं गुमशुदा बच्चों और बच्चों के खिलाफ होने वाले अन्य अपराधों के लिए रिक्त आरक्षी केन्द्रों तथा लीगल एड क्लिीनिकों में एक-एक पैरालिगल वालंटियर की नियुक्ति की जाएगी। जिसके लिए इच्छुक अभ्यर्थियों से 21 जुलाई 2025 तक आवेदन मंगाए गए है। पैरालिगल वालंटियर का कार्यदिवस एवं मानदेय के संबंध में नालसा एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर द्वारा निर्धारण के अनुसार मानदेय का भुगतान किया जाएगा। पैरालिगल वालंटियर की नियुक्ति हेतु आवश्यक योग्यता कक्षा 12वीं उत्तीर्ण, कम्प्यूटर, मोबाईल एवं इंटरनेट का पर्याप्त ज्ञान होना एवं विधिक सेवा का कार्य करने की इच्छुक होना आवश्यक है। आरक्षी केन्द्रो से संबंधित एवं उनके नजदीक के युवक युवतियों, समाज सेवी, सेवा निवृत्त शासकीय कर्मचारी एवं विधि छात्रों को प्राथमिकता दी जाएगी। पैरालिगल वालंटियर के रिक्त 10 पदों के भर्ती के संबंध में विस्तृत जानकारी एवं आवेदन का प्रारूप जिला न्यायालय महासमुंद के शासकीय वेबसाईट
https://mahasamund.dcourts.gov.in
से प्राप्त किया जा सकता है। अतः इच्छुक व्यक्ति जो उपरोक्त योग्यता रखता है वह दिनांक 21 जुलाई 2025 के साय 5 बजे तक अपना आवेदन रजिस्टार्ड डाक, कोरियर तथा व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जिला न्यायालय परिसर, एडीआर भवन विधिक सेवा प्राधिकरण महासमुंद के कार्यालय में प्रस्तुत कर सकता है।

विधानसभा की कार्यवाही से आमजनों को अवगत कराने में संसदीय पत्रकार निभाते हैं बड़ी भूमिका मुख्यमंत्री साय

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मुख्यमंत्री साय ने आज विधानसभा परिसर के प्रेक्षागृह में संसदीय रिपोर्टिंग विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ राज्य और विधानसभा के रजत जयंती वर्ष की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रदेश विधानसभा ने भी 25 वर्षों की गौरवमयी यात्रा पूरी की है और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ किया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि हाल ही में विधायकों के लिए भी कार्यशालाओं का आयोजन किया गया था, जिसका लाभ हमारे सदस्यों को मिला है। उन्होंने कहा कि विधानसभा में अनेक नवनिर्वाचित विधायक भी हैं, जिनकी यह जिम्मेदारी है कि वे अपने क्षेत्र की समस्याओं को सदन में उठाएं। इसी तरह पत्रकारों की भी अहम भूमिका है, जो विधानसभा की गतिविधियों को जनता तक पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि आप सभी पत्रकार बंधु बड़ी मेहनत से विधानसभा की कार्यवाही को कवर करते हैं, जिससे आमजन यह जान पाते हैं कि विधायकों द्वारा उनके मुद्दों को गंभीरता से उठाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा उत्कृष्ट पत्रकारों को सम्मानित करने की परंपरा को भी सराहा और कहा कि इससे पत्रकारों का मनोबल बढ़ता है तथा संसदीय रिपोर्टिंग को प्रोत्साहन मिलता है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह कार्यशाला पत्रकारों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी और इसके माध्यम से विधानसभा की गतिविधियां और अधिक प्रभावी रूप से जनता तक पहुंचेंगी।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने अपने संबोधन में संसदीय पत्रकारिता की महत्ता बताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की 25 वर्षों की स्वर्णिम यात्रा में पत्रकारों का योगदान अतुलनीय रहा है। उन्होंने कहा कि संसदीय पत्रकारिता अत्यंत संवेदनशील दायित्व है, जो सदन की गोपनीयता, अनुशासन और गरिमा को बनाए रखते हुए जनता तक सटीक एवं निष्पक्ष जानकारी पहुंचाने का कार्य करती है। डॉ. सिंह ने कहा कि पत्रकार जब पक्ष–विपक्ष से परे रहकर निष्पक्ष रूप से विधानसभा की कार्यवाही का अवलोकन करते हैं और उसे प्रस्तुत करते हैं, तब लोकतंत्र मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि संसदीय प्रणाली की गहरी समझ से ही पत्रकार बेहतर ढंग से जनता को विधानसभा की गतिविधियों से अवगत करा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संसदीय पत्रकारिता में विशेष रूप से विधानसभा की प्रक्रिया से जुड़े समाचारों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना आवश्यक है, ताकि आमजन तक वे प्रभावी ढंग से पहुंच सकें। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सिंह ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ एवं दिवंगत पत्रकारों का पुण्य स्मरण करते हुए कहा कि प्रदेश की पत्रकारिता परंपरा ने सदैव विधानसभा की गरिमा बनाए रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

कार्यशाला में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने पत्रकारों की भूमिका को नारद मुनि की परंपरा से जोड़ते हुए कहा कि पत्रकार समयबद्धता और सजगता के साथ लोकतंत्र के संवाहक होते हैं। डॉ. महंत ने कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से सभी को कुछ नया सीखने का अवसर मिलेगा और संसदीय पत्रकारिता को समझने का दायरा और व्यापक होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह आयोजन उपयोगी सिद्ध होगा और पत्रकारों के कार्य को नई दिशा देगा। उन्होंने अपनी लंबी संसदीय यात्रा का स्मरण करते हुए कहा कि इस दौरान पत्रकारों के साथ बिताए गए समय और अनुभव अत्यंत मूल्यवान रहे हैं। उन्होंने पत्रकारों की सजगता, सटीकता और संवेदनशीलता की सराहना की, जो वर्षों से संसदीय गतिविधियों को जनता तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

इस अवसर पर संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप, विधानसभा के सचिव श्री दिनेश शर्मा, आईआईएमसी के पूर्व महानिदेशक श्री संजय द्विवेदी सहित बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित थे।