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रिश्वत लेने के मामले में तीन डॉक्टर समेत 6 आरोपी गिरफ्तार, इस एवज में मांगे थे 55 लाख की घूस

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रावतपुरा सरकार आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान (एसआरआईएमएसआर) को मान्यता दिलाने और सीटे बढ़ाने के नाम पर 55 लाख की रिश्वत लेने वाले 6 आरोपियों के रैकेट को सीबीआई ने गिरफ्तार किया।

इसमें कर्नाटक स्थित मंड्या इस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस के प्रोफेसर डॉ. मंजुप्पा सीएन, डॉ चैत्रा एमएस (निरीक्षण टीम की सदस्य) डॉ अशोक शैलके, रावतपुरा सरकार के निदेशक अतुल कुमार, सतीश ए और के रविचंद्र शामिल हैं। गिरफ्तार किए गए छह आरोपियों में से 3 मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया से संबद्ध डॉक्टर हैं। उक्त सभी को गिरफ्तार करने के बाद सभी को सीबीआई के स्पेशल कोर्ट में पूछताछ के लिए 5 दिन की रिमांड पर लिया है। उक्त सभी से वीआईपी रोड स्थित सीबीआई दफ्तर में पूछताछ की जाएगी।

यहां हुई थी छापेमार कार्रवाई

बताया जाता है कि मेडिकल कॉलेजों को मान्यता दिलाए जाने को लेकर देशभर के विभिन्न निजी कॉलेजों में लेनदेन करने की शिकायत मिली थी। मिले इनपुट के आधार पर सीबीआई ने एक दिन पहले ही छत्तीसगढ़ समेत मध्यप्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान, उत्तरप्रदेश के विभिन्न शहरों में छापेमारी की। साथ ही रायपुर और बेंगलूरु में छापेमारी कर उक्त सभी को गिरफ्तार किया गया है।

बताया जाता है कि मान्यता दिलाने और सीटे बढ़ाने के नाम पर 1 करोड़ 62 लाख रुपए पहले ही दिए जाने की जानकारी मिली है। ओके रिपोर्ट देने के नाम पर 55 लाख रुपए की दूसरी किस्त दी जा रही थी। यह रकम बेंगलूरु के डॉ. रविंद्र और सतीश को दिए गए थे। सीबीआई ने छापेमारी कर 16.62 लाख रुपए डॉ. चैत्रा के पति रविंद्रन के पास से और 38.38 लाख रुपए सतीश ए. के पास से बरामद करने का दावा किया गया है।
इसमें कर्नाटक स्थित मंड्या इस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस के प्रोफेसर डॉ. मंजुप्पा सीएन, डॉ चैत्रा एमएस (निरीक्षण टीम की सदस्य) डॉ अशोक शैलके, रावतपुरा सरकार के निदेशक अतुल कुमार, सतीश ए और के रविचंद्र शामिल हैं। गिरफ्तार किए गए छह आरोपियों में से 3 मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया से संबद्ध डॉक्टर हैं। उक्त सभी को गिरफ्तार करने के बाद सभी को सीबीआई के स्पेशल कोर्ट में पूछताछ के लिए 5 दिन की रिमांड पर लिया है। उक्त सभी से वीआईपी रोड स्थित सीबीआई दफ्तर में पूछताछ की जाएगी।

रिश्वतखोरी की जानकारी लीक

मेडिकल कॉलेज मान्यता देने के लिए गठित टीम के डॉक्टरों और अफसरों ने कॉलेज प्रबंधन से मिलीभगत कर निरीक्षण टीम की जानकारी पहले लीक कर दी थी। इसके बाद मेडिकल कॉलेजों ने घोस्ट फैकल्टी, नकली मरीज और फर्जी उपस्थिति जैसे फॉर्मूले अपनाकर निरीक्षण को अनुकूल दिखाया। इस फर्जीवाडे़ के एवज में निरीक्षण टीम को रिश्वत दी गई।

केंद्रीय मंत्रालय के अफसरों की भूमिका संदिग्ध

सीबीआई के अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि रिश्वतखोरी के मामले में रावतपुरा कॉलेज संचालक और अधिकारियों के साथ ही केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के कुछ अफसरों की भूमिका संदेह के दायरे में है। अब तक की जांच में सभी की संलिप्ता मिली है। इसे देखते हुए उक्त सभी से पूछताछ कर बयान लिया जाएगा।

ऑनलाइन दी गई रिश्वत

सीबीआई का कहना है कि एनएमसी द्वारा नामित 4 मूल्यांकनकर्ताओं वाली निरीक्षण टीम 30 जून 2025 को एसआरआईएमएसआर रायपुर में निरीक्षण के लिए पहुंची। इस दौरान निरीक्षण दल के सभी 4 सदस्यों ने एसआरआईएमएसआर के निदेशक अतुल कुमार तिवारी के साथ गोपनीय बैठक हुई थी।

साथ ही कॉलेज को मान्यता देने और सीटे 150 से 250 करने के एवज में अनुकूल निरीक्षण रिपोर्ट जारी करने के लिए सौदा हुआ था। इसमें से करोड़ो रुपए की रिश्वत का ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करने की जानकारी भी मिली है। यह सारा कुछ फोन पर डील किया गया था।

6 राज्यों में कार्रवाई

छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान, उत्तरप्रदेश और दिल्ली में भी कार्रवाई की गई है। इस दौरान सीबीआइ टीम को कई संदिग्ध दस्तावेज भी मिले हैं।

दस्तावेज जब्त

सीबीआई को छापेमारी के आरोपियों के ठिकानों और रावतपुरा कॉलेज में तलाशी के दौरान दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य मिले है। इसमें आरोपियों के मोबाइल फोन से डिजिटल डेटा, फाइलें, संदेश और स्क्रीनशॉट सहित अन्य शामिल गए हैं।

छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्यपाल शेखर दत्त का निधन, CM साय ने जताया शोक

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छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्यपाल शेखर दत्त का निधन हो गया। उनके निधन पर राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शोक व्यक्त किया है।

राज्यपाल डेका ने कहा, स्व. दत्त एक कुशल प्रशासक ही नहीं, बल्कि एक सच्चे सैनिक और राष्ट्रभक्त थे। वहीं सीएम ने कहा ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति और शोक संतप्त परिवार को संबल प्रदान करे। स्व. शेखर दत्त जी एक कुशल प्रशासक, दूरदृष्टा एवं देश सेवा के प्रति पूर्णत: समर्पित व्यक्तित्व थे।

बता दें कि उन्होंने दिल्ली स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। शेखर दत्त वर्ष 2010 से 2014 तक छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रहे। शेखर दत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 1969 बैच के अधिकारी थे और देश के प्रमुख पदों पर कार्यरत रहे। उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) के डिप्टी के रूप में भी नियुक्त किया गया था। साथ ही उन्होंने रक्षा मंत्रालय में रक्षा सचिव के तौर पर भी सेवाएं दीं।

शरीर पर फट चुके थे 2 ग्रेनेड, धंसी थी कई गोलियां, तभी आई रहस्‍यमयी आवाज

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अब तक दुश्‍मन के दो ग्रेनेड शरीर पर आकर फट चुके थे. एक ग्रेनेड से घुटने से नीचे का एक पैर बुरी तरह से जख्‍मी हो गया था, दूसरे ग्रेनेड ने नाक से कार तक चीरा लगा दिया था. यातना यहीं पर खत्‍म नहीं हुई. वह मरा कि नहीं, यह जानने के लिए पाकिस्‍तानी सैनिकों ने पहली गोली बाजू पर, दूसरे गोली जांघ पर और तीसरी गोली सीने पर चला दी. दो ग्रेनेड और इतनी गोलियां झेलने के बाद किसी का भी बचना असंभव सा था. लेकिन उस दिन ऊपर वाले को कुछ और ही मंजूर था. असंभव न केवल संभव हुआ, ऐसी हालत में भारतीय सेना के इस जांबाज ने पाकिस्‍तान के आधा दर्जन सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया.

इसके बाद, वह इस आस में रेंगते हुए किसी तरह आगे बढ़ा कि शायद कोई जिंदा हो, लेकिन सबके सब देश के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्‍च बलिदान दे चुके थे. वह काफी देर तक अपने साथियों के शवों को अपनी गोद में रखकर रोता रहा. इसी बीच, उसके दिन में एक नई चेतना आई और वह किसी तरह रेंगते हुए फिर आगे बढ़ा. अब उसके आंखों के साथ जो था, उसे देखकर वह चौंक गया. सामने दुश्‍मन के कई टेंट लगे हुए थे. कहीं दुश्‍मन का लंगर चल रहा था, तो कहीं हथियारों और गोला-बारूद का जखीरा भरा हुआ था. अभी भी दुश्‍मन की तादाद सोच से कई गुना ज्‍यादा थी. उस वक्‍त दिल में एक ही ख्‍याल आया.

नीचे मौजूद भारतीय सेना फिर हमला करने की तैयारी कर रही होगी. क्‍या उनके साथ भी हमारे जैसा…. दिल से फिर एक आवाज आई- नहीं नहीं… मुझे ही कुछ करना होगा. मैं अपने साथियों की जान ऐसे जया होने नहीं दे सकता. इसके बाद वह एक बार फिर रेंगते हुए आगे बढ़ा और ऐसी जगह पर पहुंच गया, जहां से यह समझ नहीं आ रहा था कि किधर जाऊं. किधर भारत है और किधर पाकिस्‍तान. दुविधा के कुछ पल बीते ही होंगे, तभी एक पहाड़ों से एक रहस्‍यमयी आवाज आई- बेटा! इस नाले में कूद जा. इस रहस्‍यमीय आवाज सुनने के बाद कुछ समय में नहीं आया और वह नाले में कूद गया.

लेकिन, दिन में अभी भी इस बात का डर बना हुआ था कि कहीं मैं पाकिस्‍तानी दुश्‍मन के चंगुल में फंस जाए. ऐसा हुआ तो अपने साथियों की मदद कैसे कर पाऊंगा. तभी कुछ लोग सामने दिखे. उनमें से कुछ जाने पहचाने से चेहरे थे. दिल को एक तसल्‍ली हुई कि अरे यह तो मेरे अपने साथी है. सभी ने मुझे सहारा दिया और फस्‍टेड देना शुरू किया. सभी को लगा मैं अब बच नहीं पाऊंगा. अब तक गोलियों का असर अपने चरम पर पहुंचने लगा था. आंखों के सामने सबकुछ धुंधला हो चुका था. शरीर ठंढ से कांपने लगा था. ऐसा लगा शायद अब वक्‍त आ गया है. तभी भागे भागे डॉक्‍टर आए और ग्‍लूकोज की पूरी बोतल पिला दी.
साहब! 72 घंटे में आधा बिस्‍कुट खाया था, आधा…
इलाज भी शुरू हो चुका था. थोड़ी थोड़ी चेतना फिर वापस आने लगी थी. तभी कान में एक आवाज गूंजी. बेटा कुछ पहचानता है. जवाब में वह बोला- साहब! कुछ नजर नहीं आ रहा, सिर्फ आवाज सुनाई दे रही है. सामने से फिर आवाज आई- बेटा! मैं तेरा कमांडिंग ऑफिसर कर्नल खुशाल चंद्र ठाकुर. बेटा! कुछ बता सकता है क्‍या? जवाब मिला- हां साहब बता सकता हूं. फिर एक-एक कर उसने ऊपर के पूरे हालात बयां किए. कर्नल साहब ने फिर पूछा- ऊपर जरूरत क्‍या क्‍या है? जवाब मिला- साहब! सिर्फ एम्युनिशन और फील्‍ड पट्टी. क्‍यों खाने के लिए कुछ नहीं चाहिए, कर्नल साहब ने पूछा.

जवाब आया- साहब! भूख ही नहीं लगती. बीते 72 घंटे में सिर्फ आधा बिस्‍कुट खाया था, आधा तो बैलेंस ही रह गया था…. जी हां, रोंगटे खड़े करने वाली यह कहानी है ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव की. जिनकी बहादुरी की वजह से कारगिल के युद्ध को एक नया मोड़ मिला और असंभव सी दिखने वाली जीत को संभव कर दिया गया. 4 जुलाई 1999 को ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव का अदम्‍य साहस, बहादुरी और युद्ध कौशल देखने के बाद उन्‍हें भारत के सर्वोच्‍च सैन्‍य सम्‍मान परमवीर चक्र से सम्‍मानित किया गया. महज 19 साल की उम्र में परमवीर चक्र पाने वाले वह पहले भारतीय सैनिक हैं.

चीन की नई चाल…..इस बार सीधे पीएम मोदी के अरमानों पर किया हमला, अर्थव्‍यवस्‍था की जड़ में लगा रहा सेंध

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चीन की चालबाजी से तो सभी वाकिफ हैं, लेकिन इस बार उसका पैंतरा सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अरमानों पर हमला किया है. उसकी मंशा भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की जड़ों में सेंध लगाने की है. चीन को आभास हो गया है कि भारत दुनिया की दूसरी फैक्‍ट्री बनने की तरफ तेजी से बढ़ रहा है और उसकी चुनौतियां भी बढ़ रही हैं. अपनी इसी चिंता से निपटने के लिए चीन ने भारत मैन्‍युफैक्‍चिरिंग को सुस्‍त करने की रणनीति बनाई है. साथ ही भारतीय में काम कर रहे अपने नागरिकों को वापस बुलाने का फरमान भी जारी कर दिया है.

चीन ने भारत की तेजी से बढ़ती मैन्‍युफैक्‍चरिंग ताकत कम करने के लिए कच्‍चे माल और उपकरणों की आपूर्ति कम कर दी है. चीन जानबूझकर इसकी डिलीवरी में देरी कर रहा है. ड्रैगन ने कई जरूरी मशीनरी और उपकरणों की डिलीवरी को लटका दिया है. साथ ही उसने अपने कुछ नागरिकों को वापस बुलाने का फरमान भी जारी कर दिया है. ये नागरिक भारत की ऑटोमोबाइल और इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स कंपनियों में काम कर रहे हैं. इसमें ऐपल के प्रोडक्‍ट बनाने वाली कंपनी फॉक्‍सकॉन भी शामिल है.
रेयर अर्थ पर पहले ही लगा चुका है प्रतिबंध
चीन ने न सिर्फ अपने कुछ नागरिकों को भारतीय फैक्ट्रियों से वापस बुलाने का आदेश दिया है, बल्कि भारत को ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के निर्माण में उपयोग होने वाले रेयर अर्थ यानी मैग्‍नेट के निर्यात पर भी प्रतिबंध लगा दिया है. सूत्रों का कहना है कि चीन से अपनी विनिर्माण इकाई भारत में ट्रांसफर करने के बाद फॉक्‍सकॉन भारी दबाव में है. ताइवान की इस कंपनी ने तमिलनाडु और कर्नाटक के अपने कारखानों में सैकड़ों चीनी इंजीनियरों को भर्ती किया है. अब चीन उसके विनिर्माण पर संकट पैदा करने के लिए अपने नागरिकों को वापस बुला रहा है.
iPhone के विनिर्माण पर संकट
चीन ने अपने तकनीकी विशेषज्ञों को वापस बुलाया तो भारत में iPhone के निर्माण पर बड़ा संकट पैदा हो सकता है. हालांकि, भारतीय इकाइयों में काम कर रहे चीनी नागरिकों की संख्‍या 1 फीसदी से भी कम है, लेकिन उत्‍पादन और गुणवत्‍ता के मामले में इनकी बड़ी भूमिका रहती है. सरकारी सूत्रों ने कहा कि यह समस्या पिछले कुछ महीनों से बनी हुई है और कंपनियों ने अपनी दूसरी यूनिट से काबिल कर्मचारियों को बुलाना शुरू कर दिया है.
ओप्‍पो, वीवो और शाओमी पर भी संकट
चीन की इस चाल का असर आईफोन के निर्माण पर ही नहीं, बल्कि भारत में अपने प्रोडक्‍ट बनाने वाली चीनी मोबाइल कंपनियों पर भी दिखेगा. चीन की मोबाइल कंपनियां ओप्‍पो और वीवो बड़े पैमाने पर अपने उत्‍पादन भारत में करती हैं. वैसे तो इन कंपनियों के पास चीनी कर्मचारियों की संख्‍या काफी कम है, लेकिन उन्‍हें चिंता है कि अगर चीन ने ऐसा कदम उठाया तो इसका उन पर क्‍या असर होगा.

भारत से बदला ले रहा चीन
सूत्रों का कहना है कि चीन यह चालबाजी भारत से बदला लेने के मकसद से कर रहा है, क्‍योंकि उसके कॉरपोरेट कर्मचारियों भारत में आसानी से वीजा नहीं मिल रहा है. सरकार इस मामले पर एक विस्तृत रिपोर्ट मांग रही है, ताकि इस मुद्दे को संकट बनने से पहले ही हल किया जा सके. सरकार नहीं चाहती कि भारत के निर्यात में प्रमुख भूमिका निभाने वाले ऐपल के उत्‍पादन पर कोई ज्‍यादा संकट आए.
पहले भी ऐसा करता रहा है चीन
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि अतीत में चीन ने अक्सर प्रमुख भारतीय फैक्ट्रियों में उपयोग की जाने वाली मशीनरी की डिलीवरी में जानबूझकर देरी की है. चीन को जब-जब यह पता चला है कि उनके यहां से कोई मैन्‍युजब उन्हें पता चला कि यह सुविधा भारत में स्थानांतरित हो रही है या आ रही है. ये कदम ऐसे समय में उठाए जा रहे हैं जब कंपनियां अपने उत्पादन ठिकानों को विविधता देने की कोशिश कर रही हैं और भारत में क्षमता बढ़ा रही हैं, अक्सर चीन में विस्तार की कीमत पर या धीमी गति से ऐसा कर रही हैं.

घाना पहुंचे पीएम मोदी ….

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को जब पश्चिम अफ्रीकी देश घाना की धरती पर उतरे तो भारत की ताकत, कूटनीति और संस्कृति का अनोखा संगम देखने को मिला. पीएम मोदी जैसे ही अक्रा पहुंचे, उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर और 21 तोपों की सलामी दी गई. यह सम्मान न सिर्फ भारत के प्रधानमंत्री को बल्कि भारत की बढ़ती ताकत को था. इस ऐतिहासिक यात्रा के साथ ही प्रधानमंत्री मोदी पिछले 30 वर्षों में घाना जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए हैं. उनका यह दौरा भारत-अफ्रीका रिश्तों के एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है.

अक्रा में पीएम मोदी के होटल पहुंचने पर एक भावनात्मक क्षण देखने को मिला, जब स्थानीय बच्चों के एक समूह ने हरे रामा हरे कृष्‍णा की धुन गाकर उनका स्वागत किया. भारतीय प्रवासी समुदाय के लोग पीएम मोदी के स्वागत में परंपरागत ड्रेस में पहुंचे थे. वे काफी उत्‍साह‍ित नजर आ रहे थे.
पीएम मोदी ने तस्‍वीरें शेयर करते हुए लिखा, अक्रा, घाना में भारतीय समुदाय द्वारा दिखाए गए अद्भुत स्नेह से अभिभूत हूं. साथ मिलकर चलने की भावना और हमारी गहरी सांस्कृतिक जुड़ाव वास्तव में प्रेरणादायक है.
चीन की छाया में भारत का आत्मविश्वास
यह दौरा उस समय हो रहा है जब चीन अफ्रीका में अपना कूटनीतिक और आर्थिक प्रभाव बढ़ाने की कोशिशों में लगा है. बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के जरिए चीन कई अफ्रीकी देशों को बुनियादी ढांचे के बड़े निवेश और कर्ज़ के जाल में फंसा चुका है. इसके मुकाबले, भारत साझेदारी, क्षमता निर्माण और सांस्कृतिक जुड़ाव के रास्ते पर चलते हुए आगे बढ़ रहा है. घाना में मोदी का भव्य स्वागत बताता है कि भारत की रणनीति को अफ्रीकी देश अधिक विश्वसनीय और सम्मानजनक विकल्प मानते हैं.
दी बोले-घाना अफ्रीका में भारत का विश्वसनीय मित्र
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में घाना को भारत का मूल्यवान मित्र बताया और कहा कि यह दौरा दोनों देशों के संबंधों को नए क्षेत्रों में मजबूत करने का अवसर है. उन्‍होंने कहा, मुझे यह सम्मान मिला है कि कल मैं घाना की संसद को संबोधित करूंगा. दोनों देश शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और डिजिटल क्षेत्र में मिलकर काम कर सकते हैं
भारत-अफ्रीका सहयोग की नई दिशा
घाना, अफ्रीकन यूनियन और इकोवास (ECOWAS) जैसे संगठनों का सदस्य है और भारत के साथ इसके संबंध ऐतिहासिक हैं. मोदी सरकार की ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ नीति और ग्लोबल साउथ की आवाज बनने की रणनीति में अफ्रीका की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है.

रिजर्व बैंक ने सिबिल स्‍कोर पर जारी किया बड़ा आदेश…..लोन लेने वालों को इससे फायदा होगा या नुकसान

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होम लोन, पर्सनल लोन या ऑटो लोन लेने वालों के लिए रिजर्व बैंक ने बड़ी सहूलियत वाला फैसला किया है. आरबीआई ने अपने हालिया आदेश में कहा है कि सिबिल स्‍कोर की जानकारी अब रियल टाइम में देनी होगी, जो अभी तक कंपनियां 15 दिनों में एक बार अपडेट करती हैं. आरबीआई के इस फैसले से लोन लेने वालों को बड़ा फायदा मिलने का अनुमान है.

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर एम राजेश्वर राव ने ट्रांसयूनियन सिबिल जैसी क्रेडिट सूचना कंपनियों (सीआईसी) से पाक्षिक (15 दिन) के बजाय वास्तविक समय पर यानी रियल टाइम में आंकड़े देने के लिए कहा है. राव ने मंगलवार को सिबिल के एक कार्यक्रम में कहा कि सीआईसी द्वारा डेटा को तेजी से भेजने से सभी के लिए प्रणाली में विश्वास, दक्षता और पारदर्शिता को बढ़ाने में मदद मिलेगी. आरबीआई ने बुधवार को राव का यह संबोधन अपनी वेबसाइट पर जारी किया. इससे लोन लेने वालों को मदद मिलने की उम्‍मीद है.

क्रेडिट की लगातार जानकारी जरूरी
राव ने कहा कि हमें क्रेडिट सूचना के बारे में अधिक और लगातार जानकारी की उम्मीद करनी चाहिए. वास्तविक समय या लगभग वास्तविक समय पर क्रेडिट सूचना मिलने से जोखिम आकलन की परिशुद्धता बढ़ेगी, ऋण खाते को बंद करने या पुनर्भुगतान जैसी उधारकर्ता गतिविधियों को दर्शाने में मदद मिलेगी और उपभोक्ता का अनुभव भी बेहतर होगा. इस अवसर पर राव ने यह माना कि प्रौद्योगिकी, प्रक्रिया पुनर्रचना और परिवर्तन प्रबंधन में निवेश होने से इसमें लागत आएगी लेकिन यह राशि उससे होने वाले फायदों से कहीं कम होगी.

क्रेडिट संस्‍थानों पर ज्‍यादा निर्भरता
डिप्‍टी गवर्नर ने कहा कि इस मामले में एक अन्य प्रमुख चुनौती पहचान मानकीकरण की है. सीआईसी सटीक और मान्य पहचान देने के लिए क्रेडिट संस्थानों पर निर्भर है. इसके बिना दोहराव और गलत रिपोर्टिंग का जोखिम बना रहता है. आरबीआई के डिप्टी गवर्नर ने जटिल कृत्रिम मेधा (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) मॉडल के इस्तेमाल से मॉडल संबंधी जोखिम को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि इनका पूरी तरह परीक्षण, सत्यापन या पूर्वाग्रहों और प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव के लिए निगरानी नहीं होने से समस्या होती है.

डिफॉल्‍ट से निपटने के लिए जरूरी
डिप्‍टी गवर्नर ने कहा कि बैंकों को डिफॉल्‍ट से निपटने के लिए बाकायदा तैयारी करनी होगी. मौजूदा मॉडल को निष्पक्ष, पारदर्शी और नियामकीय एवं नैतिक मानकों के अनुरूप बनाए रखने के लिए कठोर सत्यापन प्रावधान, निरंतर निगरानी और मजबूत शासन ढांचा जरूरी है. इसके बिना बैंकों को अपने कर्ज पर जोखिम घटाना आसान नहीं होगा. वह भी ऐसे समय में जब लोन के विस्‍तार के लिए लगातार उपाय किए जा रहे हैं और इसकी डिमांड भी बढ़ती जा रही है.

काउंसलिंग राउंड 3 सीट अलॉटमेंट रिजल्ट जारी, डॉक्यूमेंट्स 4 जुलाई तक करें अपलोड

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जॉइंट सीट एलोकेशन अथोरिटी (JoSAA) ने आज, 2 जुलाई को जोसा (JoSAA 2025) काउंसलिग राउंड 3 सीट आवंटन परिणाम की घोषणा की है. उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट josaa.nic.in पर अपने राउंड 3 आवंटन की स्थिति की जांच कर सकते हैं. इसके लिए उम्मीदवारों को अपने आवेदन संख्या और पासवर्ड का उपयोग करके लॉग इन करना होगा.

जोसा काउंसलिंग राउंड 3 में सीट आवंटित किए गए उम्मीदवारों के लिए 4 जुलाई को शाम 5 बजे तक ऑनलाइन रिपोर्टिंग, दस्तावेज़ अपलोड और शुल्क भुगतान पूरा करना आवश्यक है. शुल्क भुगतान या दस्तावेज़ सत्यापन से संबंधित किसी भी मुद्दे को भी 5 जुलाई को शाम 5 बजे तक हल किया जाना चाहिए.

इसके अलावा, जो उम्मीदवार सीट आवंटन प्रक्रिया से हटना चाहते हैं या भविष्य के राउंड के लिए JoSAA काउंसलिंग से बाहर निकलना चाहते हैं, वे 2 जुलाई को शाम 5 बजे से 4 जुलाई को शाम 5 बजे के बीच ऐसा कर सकते हैं.

जोसा काउंसलिंग में सीट आवंटन उम्मीदवार की जेईई मेन या जेईई एडवांस्ड ऑल इंडिया रैंक (एआईआर) और जोसा 2025 चॉइस-फिलिंग प्रक्रिया के दौरान उनकी प्रस्तुत प्राथमिकताओं पर आधारित होता है. सीट आवंटित होने के बाद, उम्मीदवारों को ‘सीट आवंटन सूचना पर्ची’ डाउनलोड करनी होगी, जिसमें सीट की पुष्टि करने के बारे में विस्तृत निर्देश शामिल हैं, जिसमें ऑनलाइन रिपोर्टिंग, शुल्क भुगतान और दस्तावेज़ जमा करने की समय सीमा शामिल है.

आईआईटी में फिजिकल रिपोर्टिंग के समय इन डॉक्यूमेंट्स की जरूरत होगी
–JoSAA प्रोविजनल सीट अलॉटमेंट लेटर (प्रारंभिक सीट अलॉटमेंट सूचना पर्ची)

–JoSAA रिपोर्टिंग सेंटर पर ऑनलाइन जेनरेट किया गया दस्तावेज़ सत्यापन-सह-सीट स्वीकृति पत्र (प्रोविजनल ऑफ़र और सीट स्वीकृति पत्र)

–कक्षा 10वीं की मार्कशीट या प्रमाणपत्र

–जन्म प्रमाणपत्र (केवल तभी जब कक्षा 10 की मार्कशीट/प्रमाणपत्र में जन्म तिथि का उल्लेख न किया गया हो)

–कक्षा 12वीं की मार्कशीट या प्रमाणपत्र (योग्यता परीक्षा)

–श्रेणी प्रमाण पत्र (एससी/एसटी/ओबीसी-एनसीएल/ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों के लिए) – जोसा पोर्टल पर उपलब्ध निर्धारित प्रारूप में होना चाहिए.

-पीडब्ल्यूडी प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)

-आधार कार्ड

-पासपोर्ट (विदेशी नागरिकों के लिए) या ओसीआई/पीआईओ कार्ड, यदि लागू हो

-आय प्रमाण पत्र (फीस छूट के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के लिए) – 01 अप्रैल 2024 को या उसके बाद जारी किया जाना चाहिए और 5 लाख रुपये से कम वार्षिक आय वाले परिवारों के लिए लागू होना चाहिए.

Ola-Uber अब वसूल सकेंगी दोगुना किराया; क्या नियम बदले

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अगर आप ओला, उबर और रैपिडो जैसी ऐप बेस्ड कैब सर्विस का इस्तेमाल करते हैं तो पीक आवर्स में ट्रैवल के लिए अब आपको जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती है. केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय की नई गाइडलाइंस के मुताबिक, कैब एग्रीगेटर अब पीक आवर्स में बेस किराए का दोगुना तक वसूल सकेंगे. अभी अधिकतम डेढ़ गुना किराया लेने की छूट है. इसके अलावा बिना ठोस वजह के राइड कैंसल करने वाले ड्राइवरों पर नकेल कसने जैसे कई नियम भी बनाए गए हैं.

केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने मोटर व्हीकल एग्रिगेटर गाइडलाइंस (MVAG) 2025 का नया सेट पेश किया है. ये दिशानिर्देश सबके लिए हैं. राज्य सरकारें इसे लेकर अपने नियम बना सकती हैं. परिवहन मंत्रालय ने राज्यों को ऐप बेस्ड कैब सेवाओं के लिए अपने नियम बनाने के लिए तीन महीने का समय दिया है.

नए नियमों में क्या खास?
पीक आवर्स में कैब का किराया के लिए बेस किराए से दोगुना तक हो सकेगा. नॉन पीक आवर्स में कैब संचालक किराया कम कर सकते हैं.बेस फ़ेयर कम से कम 3 किलोमीटर का हो सकता है.नॉन-पीक आवर्स में किराया बेस किराए का कम से कम 50 प्रतिशत होना चाहिए.बिना ठोस कारण राइड कैंसल करने पर ड्राइवर पर जुर्माना लगेगा.ये जुर्माना किराए के 10 फ़ीसदी तक हो सकता है. यात्रियों पर भी बिना वजह राइड कैंसल करने पर जुर्माना लगेगा.ड्राइवर को कम से कम 5 लाख का हेल्थ इंश्योरेंस मिलेगा.

‘कैब कंपनियों का डर्टी गेम होगा बंद’
कैब कंपनियों को पीक आवर्स में ज्यादा किराया वसूलने की छूट पर कई लोग सवाल उठा रहे हैं. हालांकि दिल्ली सरकार के ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के डिप्टी कमिश्नर रह चुके अनिल चिकारा इसे अच्छा कदम बताते हैं. उनका कहना है कि कैब एग्रीवेटर पहले छिपे चार्ज लेते थे. बीते साल भर से डर्टी गेम चल रहा था. लेकिन परिवहन मंत्रालय ने ये अच्छा काम किया है कि राज्य सरकार के STA बोर्ड पीक आवर्स में दोगुना किराया और नॉन पीक आवर्स में किराया कम कर सकते हैं.

राइड कैंसिल करने पर लगेगा जुर्माना
पूर्व डिप्टी कमिश्नर अनिल चिकारा ने आगे कहा कि अभी कई बार ऐसा होता था कि अगर ड्राइवर राइड कैंसिल करता था, तब भी कंपनी राइड बुक कराने वाले ग्राहक से कई बार चार्ज कर लेती थीं. लेकिन अब अगर ग्राहक राइड कैंसिल करेगा तो वो हर्जाना देगा और ड्राइवर कैंसिल करेगा तो बोझ उसके ऊपर पड़ेगा. जब उनसे पूछा गया कि क्या इससे आम आदमी पर अधिक बोझ नहीं पड़ेगा, इस पर उन्होंने कहा कि अब सारा किराया पारदर्शी होगा. कई बार राज्य सरकारें रेट फिक्स करने में सालों-साल लगा देती हैं. इसके चलते कंपनियां छिपे चार्जेज़ वसूलना शुरू कर देती हैं.

पूर्व डिप्टी कमिश्नर अनिल चिकारा ने उस नियम का भी स्वागत किया है, जिसमें प्राइवेट बाइकों को एग्रीगेटर के साथ मिलकर टैक्सी सर्विस देने की छूट दी गई है. उनका कहना है कि प्राइवेट कारों को भी ऐप बेस्ड कंपनियों के साथ जोड़ने की छूट मिलनी चाहिए. इससे लोगों को रोजगार मिलेगा, सेवाएं सस्ती हो सकती हैं. इसके अलावा सड़कों पर गाड़ियां कम हो सकती हैं और पार्किंग की समस्या भी कम हो जाएगी.

राइड कैंसिलेशन के नए नियम से ड्राइवर खफा
राइड कैंसिल करने के लिए जुर्माना लगाने के नियम को लेकर कई ड्राइवरों में नाराजगी है. एक ड्राइवर ने कहा कि कई बार बुकिंग कराने वाले लोग ओला और उबर जैसी दो कैब बुक करा लेते हैं. जब हम लोकेशन पर पहुंचते हैं तो पैसेंजर वहां नहीं मिलते, ऐसे में हमें राइड कैंसल करनी पड़ती है. इसके लिए जुर्माना नहीं लगाया जाना चाहिए.

विदेशों में काम करने वाले भारतीयों के लिए बड़ी पहल, 22 देशों के साथ सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट

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सरकार विदेशों में काम करने वालों की सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए ब्रिटेन, नीदरलैंड समेत कुल 22 देशों के साथ सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट (SSA) साइन किया है. ब्रिटेन ने हाल ही में इस एग्रीमेंट को मंज़ूरी दी है. यही नहीं सरकार अमेरिका के साथ होने वाले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) में भी सोशल सिक्योरिटी के प्रावधान को शामिल कर रही है. इसका सबसे बड़ा फायदा विदेशों में काम करने वाले भारतीयों को सामाजिक सुरक्षा लाभ मिल सकेंगे.

क्या है सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट?

सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट एक ऐसा समझौता है, जिसके तहत अगर कोई भारतीय नागरिक किसी दूसरे देश में काम करता है, तो उसकी प्रोविडेंट फंड (PF) की कटौती भारत में ही होगी, यानी उसे उस विदेशी देश में दोबारा PF नहीं कटवाना पड़ेगा, जिससे उसे दोहरी कटौती से राहत मिलेगी. अगर कोई व्यक्ति विदेश में किसी भारतीय कंपनी (या उसकी ब्रांच) में काम कर रहा है, तो उसकी PF कटौती की अधिकतम अवधि 3 साल होगी.

केंद्रीय मंत्री ने कही ये बात

केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि हम दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट को लेकर बातचीत कर रहे हैं. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) में भी हमने वाणिज्य मंत्रालय से कहा है कि सोशल सिक्योरिटी के प्रावधान को उसमें शामिल किया जाए, ताकि हमारे लोगों को भी इसका फायदा मिल सके.

नक्सलियों की कायराना करतूत, बीजापुर में आईडी ब्लास्ट, एक ग्रामीण घायल, माओवादियों ने की हत्या

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छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सलियों द्वारा आईडी ब्लास्ट किया गया है. इस ब्लास्ट में एक ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गया है. घायल ग्रामीण को बीजापुर स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है, जहां से रेफर कर दिया गया. यह घटना सिराकोंटा और दम्पाया के मध्य जंगल क्षेत्र की है.

बीजापुर में IED ब्लास्ट, एक ग्रामीण घायल
बीजापुर में नक्सलियों द्वारा आईईडी ब्लास्ट किया गया. इस ब्लास्ट में एक ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गया. वहीं घायल को मद्देड प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया. जानकारी के मुताबिक, नक्सलियों ने प्रेशर आईईडी लगा रखी थी. दरअसल, मंगलवार की देर शाम ग्राम पेगड़ापल्ली के रहने वाले एक ग्रामीण सिराकोंटा और दम्पाया के मध्य जंगल क्षेत्र में फुटु के लिए गया था, जहां नक्सलियों द्वारा पूर्व से लगाए गए प्रेशर IED की चपेट में आने से वो गंभीर रूप से घायल हो गया.

ग्रामीण के पैर और चेहरे पर गंभीर चोटें
घायल ग्रामीण का नाम विशाल गोटे (32 वर्ष) बताया जा रहा है, जो बीजापुर के मद्देड़ के ग्राम मोटलागुड़ा के रहने वाला है. जानकारी के मुताबिक, प्रेशर IED विस्फोट से विशाल गोटे के पैर और चेहरे पर गंभीर चोटें आई हैं. घायल को प्राथमिक उपचार के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मद्देड़ भर्ती कराया गया, जहां से बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल बीजापुर रेफर कर दिया गया.

मेडिकल कॉलेज जगदलपुर किया गया रेफर
हालांकि इसके बाद मेडिकल कॉलेज जगदलपुर रेफर किया गया. इस घटना के बाद प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि जंगल क्षेत्रों में भ्रमण करते समय विशेष सतर्कता बरतें और किसी भी संदिग्ध वस्तु या गतिविधि की जानकारी मिलने पर तुरंत पुलिस थाना या निकटतम सुरक्षा कैम्प को दें.