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29 जून को होगा सतनामी समाज का त्रैवार्षिक आम चुनाव, संस्था के आजीवन सदस्य बन सकेंगे अभ्यर्थी…

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 प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज पंजीयन क्रमांक 3933/2012 का त्रैवार्षिक आम चुनाव 29 जून 2025 को निर्धारित किया गया है। 25 फरवरी को प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज के वार्षिक आमसभा में लिए गए निर्णय अनुसार आम चुनाव की घोषणा कर दिया गया है।

 मतदाता सूची का प्रारंभिक प्रकाशन:

निर्वाचन अधिकारी के एल रवि ने जारी चुनाव कार्यक्रम के अनुसार, प्रगतिशील छत्तीसगढ़  सतनामी समाज के 1 अध्यक्ष, 4 उपाध्यक्ष जिसमें एक महिला आरक्षित, 1 महासचिव, एक कोषाध्यक्ष, एक सहसचिव, एक प्रवक्ता, एक मिडिया प्रभारी सहित 15 प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य जिसमें तीन महिला के लिए आरक्षित हैं कुल 25 पदों पर चुनाव या मनोनयन किया जाएगा। मतदाता सूची का प्रारंभिक प्रकाशन 31 मई को किया गया है जिसके लिए दावा आपत्ति 3 जून को शाम 4बजे तक लिया जाएगा। दावा आपत्ति का निराकरण उपरांत मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 5 जून को किया जाएगा।

 29 जून को होगा मतदान: 

वहीं 6 जून को निर्वाचन की अधिसूचना जारी किया जाएगा। 6 से 10 जून तक नामांकन दाखिल किया जा सकेगा। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 10 जून शाम 4 बजे तक निर्धारित किया गया है। 11 जून को प्राप्त नामांकन पत्रों का संविक्षा जांच किया जाएगा । नाम वापस करने के लिए 13 जून निर्धारित किया गया है। उसी दिन नाम वापसी उपरांत अभ्यर्थियों की सूची और चुनाव चिन्ह आवंटित किया जाएगा।  29 जून की सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा। मतदान के बाद उसी दिन मतगणना किया जाएगा।निर्वाचन में अभ्यर्थी वहीं बन सकते हैं जो संस्था के आजीवन सदस्य हों निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि, निर्वाचन में वहीं अभ्यर्थी बन सकते हैं तो प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज के आजीवन सदस्य हों, संरक्षक सदस्य या ऐसे सदस्य जिनकी सदस्यता पिछले 2 वर्ष से लगातार जीवित हो और नामांकन तिथि से आगामी 3 वर्ष तक के लिए जीवीत हों।

ये लोग होंगे शमिल: 

प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज के निर्वाचन अधिकारी के एल रवि सहायक निर्वाचन अधिकारी एस आर बांधे, सहायक निर्वाचन अधिकारी के डी सोनवानी और कार्यालय सहायक कृष्णा कुमार कोशले होंगे।प्रदेश में कोई भी जानकारी संस्था के प्रदेश कार्यालय न्यू राजेन्द्र नगर रायपुर में संपर्क कर प्राप्त कर सकते हैं। मतदाता सूची के संबंध में प्रदेश कार्यालय से प्राप्त कर सकते हैं या सोशल मीडिया के माध्यम से अवलोकन कर दावा-आपत्ति कर सकते है।

ट्रेन में ऐसे मिलेगा साफ-स्वादिष्ट खाना, IRCTC ने शुरू की नई सर्विस, टिकट के साथ मिलेगा सुविधा

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अब मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में भी साफ-सुथरा और समय पर खाना मिलेगा. IRCTC की ओर से नई ई-पैंट्री सेवा शुरू की गई है. इसके जरिए आप आसानी से खाना ऑनलाइन बुक कर सकते हैं.

IRCTC ने मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक शानदार और सुविधाजनक सेवा शुरू की है. ये ई-पैंट्री सेवा, जो अब यात्रियों को ट्रेन की सीट पर ही साफ-सुथरा, तय कीमत वाला और समय पर खाना उपलब्ध कराएगी. जहां पहले प्रीमियम ट्रेनों में ही भोजन की ऑनलाइन बुकिंग सुविधा थी. अब यही सुविधा मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में भी शुरू की गई है. यह खासतौर पर उन यात्रियों के लिए फायदेमंद है जो अक्सर सफर के दौरान ओवरचार्जिंग, अनाधिकृत वेंडर्स और खराब क्वालिटी के खाने की शिकायत करते थे.

ई-पैंट्री IRCTC की ओर से शुरू की गई एक डिजिटल मील बुकिंग सुविधा है, जो मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों में यात्रियों को उनकी सीट पर ही भोजन उपलब्ध कराती है. Confirmed, RAC या Partially Confirmed टिकट वाले यात्री इस सेवा का लाभ ले सकते हैं. यह सेवा उन ट्रेनों में लागू होगी जिनमें पैंट्री कार उपलब्ध है.

सेवा का उपयोग कैसे करें?

टिकट बुक करते समय या बाद में बुक्ड टिकट हिस्ट्री सेक्शन में जाकर ई-पैंट्री विकल्प चुनें. बुकिंग के बाद SMS या ईमेल के जरिए Meal Verification Code (MVC) मिलेगा. यात्रा के दिन MVC कोड दिखाकर सीट पर ही खाना प्राप्त करें.

ई-पैंट्री सेवा की प्रमुख खूबियां

ऑनलाइन खाना बुक होगा. वेबसाइट के जरिए Standard Meal या Rail Neer की प्री-बुकिंग कर सकते हैं. भुगतान डिजिटल माध्यम से होगा, कोई कैश की जरूरत नहीं है. खाना तयशुदा कीमत पर मिलेगा कोई ओवरचार्जिंग नहीं. सिर्फ IRCTC लाइसेंस प्राप्त वेंडर ही खाना देंगे. MVC कोड से पक्की पहचान और सही यात्री तक खाना. हर ऑर्डर की डिजिटल निगरानी और टैक्स कंप्लायंस. यदि खाना डिलीवर नहीं होता तो रिफंड मिलेगा और उसकी जानकारी SMS/Email/WhatsApp पर दी जाएगी.

पायलट लॉन्च और भविष्य की योजना

इस सेवा की शुरुआत भारत की सबसे लंबी दूरी तय करने वाली ट्रेन विवेक एक्सप्रेस (22503/04) से की गई है. आने वाले 60 दिनों में इसे 25 और ट्रेनों (100 रैक) में लागू किया जाएगा. सफलता के बाद इसे देशभर की अन्य मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों में भी शूरू किया जाएगा.

तीरथगढ़ वाटरफॉल में डूबा आंध्र प्रदेश का नाबालिग, मौत:विशाखापट्टनम से परिवार के साथ घूमने आया था, गोताखोरों ने निकाला शव

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छत्तीसगढ़ के बस्तर में तीरथगढ़ वाटरफॉल में गिरने से 17 साल के नाबालिग की मौत हो गई है। कड़ी मशक्कत के बाद गोताखोरों की टीम ने नाबालिग का शव ढूंढ निकाला है। वो परिजनों के साथ आंध्र प्रदेश से घूमने आया था। रविवार की सुबह हादसा हो गया।

 छत्तीसगढ़ के बस्तर में मानसून के आगमन के साथ अब मौसम भी सुहाना हो गया हैं। इस बीच सैलानियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। वहीं दूसरी ओर लापरवाही के चलते हादसे भी हो रहे हैं
 झमाझम बारिश से बस्तर की वादियां एक बार फिर खुशनुमा हो गई है। ऐसे में इसका लुफ्त उठाने के लिए सैलानियों का बस्तर पहुंचना शुरू हो गया है। इस बीच हादसे की भी खबरें आ रही है। रविवार की सुबह बस्तर के विश्व प्रसिद्ध तीरथगढ़ जलप्रपात में एक नाबालिग की डूबकर मौत हो गई। बताया जा रहा है कि युवक अपने परिजनों के साथ विशाखापट्टनम से बस्तर घुमने आया था।

तीन घंटे की मशक्कत के बाद मिली लाश

युवक का शव एसडीआरएफ की टीम द्वारा तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया। दरभा थाना से मिली जानकारी के मुताबिक रविवार की सुबह लगभग 9 बजे विशाखापत्तनम से आये 8 सदस्यीय परिवार के लोग जलप्रपात के सुंदर दृष्यों को फोटो और वीडियो के माध्यम से शूट कर रहे थे इसी बीच साई सात्विक 17 वर्ष पिता रवि शंकर तीरथगढ़ जलप्रपात में सेल्फी लेने के दौरान नीचे कुंड में जा गिरा।

पैर फिसला और कुंड में गिरा

इस घटना के बाद उनके परिजनों में हड़कंप मच गया और युवक को पानी में तलाश करने की कोशिश करने लगे कोई पता नहीं चलने पर आसपास के सुरक्षा कर्मियों और पुलिस की मदद मांगी गई। मामले की जानकारी नगर सेना को दी गई जिसके बाद एसडीआरएफ की टीम ने काफी मशक्कत के बाद युवक का शव बरामद कर सका। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक युवक का पैर फिसलने से वह सीधे कुंड में जा गिरा और डूब गया। शव बरामद होते ही पुलिस ने पोस्टमार्टम के पश्चात युवक के शव परिजनों को सौप दिया है।

पहले शख्स को नहलाया, नए कपड़े पहनाए फिर… छत्तीसगढ़ में नरबलि से सहमा गांव

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छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से अंधविश्वास के चलते एक व्यक्ति की हत्या का दर्दनाक मामला सामने आया है. आरोपियों ने पहले मृतक को नहलाया, नए कपड़ पहनाए, खिलाया और फिर उसकी गला रेतकर हत्या कर दी. मृतक के परिजन और गांव वाले इसे हत्या नहीं, बलि की घटना बता रहे हैं.

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से अंधविश्वास का एक खौफनाक मामला सामने आया है, जहां बैगा पुनीत राम ठाकुर नाम के व्यक्ति की कथित रूप से बलि दे दी गई. गांव वालों और परिजनों का आरोप है कि ये कोई साधारण हत्या नहीं, बल्कि नरबलि है. घटना के बाद से ही इलाके में दहशत का माहौल है. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मामले की जांच पड़ताल शुरू कर दी है. घटना से पुलिस भी सकते में है.

गुंडरदेही विधायक ने की न्यायिक जांच की मांग

इस पूरी घटना ने इलाके में सनसनी फैला दी है. गुंडरदेही विधायक ने इसे अंधविश्वास से प्रेरित साजिश बताया है और न्यायिक जांच की मांग की है. वहीं कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर इस नरबलि के पीछे के सच को उजागर करने की मांग की है. यह घटना न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि समाज में फैले अंधविश्वास के जहर को भी उजागर करती है. लोगों को जरूरत है कि वह अंधविश्वास से ऊपर उठकर सोचें और इस तरह की कुरीतियों को जड़ से खत्म करें.

गांव के उप सरपंच खेमराज सिंहा ने भी घटना को नरबलि से जोड़कर देख रहे हैं. उनका कहना है कि आरोपी तिहारु राम ने पुनीत राम को घर बुलाकर नहलाया, काला वस्त्र पहनाया और फिर पूजा-पाठ के बाद उसकी बलि दे दी. हालांकि, पुलिस ने इस मामले को बैगाओं की आपसी वर्चस्व की लड़ाई बताते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. पुलिस के अनुसार, घटना के समय पुनीत राम और अजीत मंडावी के बीच झगड़ा हुआ था, जिसके बाद अजीत ने चाकू से हत्या कर दी.

कभी मंत्रालय में चलता था सिक्का, पूर्व सीएम की थीं खास, जेल से रिहा होने वाले 3 अधिकारी कौन, 570 करोड़ से है कनेक्शन

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रानू साहू

छत्तीसगढ़ में कोयला और लेवी घोटाले में कार्रवाई करते हुए ईडी की टीम ने रानू साहू को गिरफ्तार किया था। रानू साहू 2010 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। रानू साहू कांकेर, कोरबा और रायगढ़ समेत कई जिलों की कलेक्टर रह चुकी हैं। जिस समय रानू साहू को गिरफ्तार किया गया था वह कृषि विभाग में पदस्थ थीं। ईडी ने रानू साहू के आवास पर ईडी ने रेड मारी थी। उनके ठिकाने से ईडी को कई अहम दस्तावेज मिले थे।

 छत्तीसगढ़ कोल लेवी घोटाले में जेल में बंद 6 आरोपियों की शनिवार को रिहाई हो गई। जिन लोगों की रिहाई हुई है उनमें से दो आईएएस अधिकारी और एक राज्य प्रशानिक सेवा का अधिकारी है। रानू साहू और समीर विश्नोई छत्तीसगढ़ कैडर के आईएएस अधिकारी हैं जबकि सौम्या चौरसिया राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी थीं। कोल लेवी घोटाला करीब 570 करोड़ रुपये का है। आइए जानते हैं उन अधिकारियों के बारे में जिनकी जेल से रिहाई हुई है।

सौम्या चौरसिया

छत्तीसगढ़ में राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी सौम्या चौरसिया को कोयले घोटाले में गिरफ्तार किया गया था। सौम्या चौरसिया की रिहाई हो गई है। सौम्या चौरासिया की गिनती पावरफुल अधिकारियों में होती थी। जब सौम्या चौरासिया की गिरफ्तारी हुई उस समय वो मुख्यमंत्री कार्यालय में पदस्थ थीं। सौम्या चौरसिया पहले छत्तीसगढ़ में एसडीएम के पद पर थीं। उसके बाद राज्य प्रशासनिक सेवा के कई अहम पदों पर रहीं। उन्हें पूर्व सीएम का करीबी माना जाता था।

समीर विश्नोई छत्तीसगढ़ कोयला स्कैम के मामले में जेल जाने वाले पहले आईएएस अधिकारी थे। समीर विश्नोई 2009 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वह मूलरूप से उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले हैं। कानपुर आईआईटी से बीटेक करने के बाद वे आईएएस में सलेक्ट हुए। कोंडगांव जिले के कलेक्टर रह चुके थे। समीर विश्नोई माइनिंग डायरेक्टर, माइनिंग कार्पोरेशन के एमडी, आईजी रजिस्ट्रेशन, जीएसटी डायरेक्टर रह चुके हैं।

छत्तीसगढ़ में 1 से 7 जून तक मनाया जाएगा ‘चावल उत्सव’, तीन माह का राशन एकमुश्त मिलेगा

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छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य के 81 लाख से अधिक राशनकार्डधारी परिवारों को एकमुश्त तीन माह का चावल वितरित किया जाएगा। ‘चावल उत्सव’ नाम से यह विशेष अभियान आगामी 1 जून से 7 जून तक पूरे प्रदेश में आयोजित किया जाएगा। इस दौरान जून, जुलाई और अगस्त माह का चावल लाभार्थियों को एकसाथ दिया जाएगा।

राज्य की 13,928 उचित मूल्य दुकानों को चावल का आबंटन कर दिया गया है और सभी दुकानों में भण्डारण कार्य तेजी से जारी है ताकि वितरण सुचारु रूप से हो सके। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा सभी जिलों के कलेक्टरों को वितरण से जुड़ी सूचनाएं व्यापक प्रचार माध्यमों से प्रसारित करने के निर्देश दिए गए हैं।

तैयारी की समीक्षा और निर्देश 

खाद्य विभाग की सचिव रीना बाबासाहेब कंगाले ने ‘चावल उत्सव’ की तैयारियों को लेकर वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सभी कलेक्टरों और खाद्य अधिकारियों से समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि चावल का वितरण उचित मूल्य दुकान में निगरानी समिति की उपस्थिति में किया जाए तथा ई-पॉस मशीन से बायोमैट्रिक प्रमाणीकरण के बाद ही चावल वितरित हो। प्रत्येक लाभार्थी को पावती रसीद भी अनिवार्य रूप से दी जाए।

मानसून के दौरान जिन 249 दुकानों तक पहुंच संभव नहीं होती, वहां भी जून माह में अग्रिम भण्डारण सुनिश्चित करने को कहा गया है। बैठक में नागरिक आपूर्ति निगम की प्रबंध संचालक किरण कौशल, खाद्य विभाग के संचालक रमेश शर्मा और सभी जिलों के अधिकारी शामिल हुए। सरकार का उद्देश्य इस प्रक्रिया को पारदर्शी, उत्तरदायी और लाभार्थी केंद्रित बनाना है।

तैयारी की समीक्षा और निर्देश

खाद्य विभाग की सचिव रीना बाबासाहेब कंगाले ने ‘चावल उत्सव’ की तैयारियों को लेकर वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सभी कलेक्टरों और खाद्य अधिकारियों से समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि चावल का वितरण उचित मूल्य दुकान में निगरानी समिति की उपस्थिति में किया जाए तथा ई-पॉस मशीन से बायोमैट्रिक प्रमाणीकरण के बाद ही चावल वितरित हो। प्रत्येक लाभार्थी को पावती रसीद भी अनिवार्य रूप से दी जाए।

मानसून के दौरान जिन 249 दुकानों तक पहुंच संभव नहीं होती, वहां भी जून माह में अग्रिम भण्डारण सुनिश्चित करने को कहा गया है। बैठक में नागरिक आपूर्ति निगम की प्रबंध संचालक किरण कौशल, खाद्य विभाग के संचालक रमेश शर्मा और सभी जिलों के अधिकारी शामिल हुए। सरकार का उद्देश्य इस प्रक्रिया को पारदर्शी, उत्तरदायी और लाभार्थी केंद्रित बनाना है।

ऊपर प्लास्टर उखड़ चुका नीचे फर्श गायब, खिड़कियां टूटी और दीवारें जर्जर

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उखड़ते प्लास्टर, छतों से झांकते सुराख, कहीं गिर न जाए बिल्डिंगजिला मुख्यालय के जेएलएन में नवनिर्मित बिल्डिंग में पड़ताल के दौरान छतों से झांकते बड़े-बड़े सूराखों के साथ दीवारों में हुई दरारें अनहोनी की आशंका से डराती मिली, भवन में छतों के रास्तों से गिरे पानी से खराब हुई बाहरी दीवारें हरेरंग की काई के साथ कई जगहों से टूटी हुई सीमेंटेड पर्त के साथ बिलकुल टूट चुका एयर कंडक्ट पूरे घालमेल को दर्शाता मिला

नागौर. निर्माण के बाद से कथित रूप से हुई धांधलेबाजी को लेकर चर्चाओं का केन्द्र बनी रही नौ करोड़ 75 लाख की लागत से राजकीय जवाहरलाल नेहरू परिसर में निर्मित मदर एण्ड चाइल्ड विंग की पड़ताल की गई। पड़ताल में न केवल पूरे भवन में कई जगहों पर दीवारों के उखड़े प्लास्टर, बल्कि टूट चुके एयर कंडक्टरों के साथ ही पूरे भवन की सीलनयुक्त दीवारें खस्ताहालत में मिली। छतों पर खुले तारों के जाल के साथ ही यहां पर बनी छत की जर्जर फर्श पर चलने पर भी कंपन का एहसास हो रहा था। जानकारों का कहना है कि इसकी स्थिति बेहद खराब देखते हुए अनहोनी की आशंका से अस्पताल प्रशासन ने इस पूरे भवन के कई हिस्सों को न केवल लॉक कर दिया है, बल्कि वहां पर किसी के भी जाने पर रोक भी लगा दी गई। आंखों से इस हालात को देखने के बाद अस्पताल के जिम्मेदारों से बातचीत हुई तो उनका कहना था कि स्थिति से एनएचएम को अवगत करा दिया गया है। इसमें कोई तकनीकी टिप्पणी अस्पताल प्रशासन नहीं कर सकता है।
गैलरी हॉल: छतों से उखड़ी पर्तें….

मदर एण्ड चाइल्ड विंग में पर्चा बनाने वाले कक्ष के सामने से ही एक गेट रेम्प से होते हुए ऊपरी मंजिल तक गया है। इस रास्ते से आगे बढऩे पर पूरी गैलरी में पांच जगहों पर आई हुई गहरी डरावनी दरारें मिली। रेम्प के खत्म होने पर पहली मंजिल की छत एवं दीवारों में बाहरी पर्त गायब नजर आई, और दीवारों में से झांकते सुराख मिले। यहां के पूरी दीवारों एवं खिड़कियों की हालत भी बेहद खराब रही।

रोगी ठहराव स्थल: गायब पंखे, गिरती धूल……..
भवन के ही आगे दूसरी मंजिल के पास बने हॉल में लगे करीब एक दर्जन पंखे पूरी तरह से गायब मिले। गायब पंखे तो अस्पताल प्रशासन की कथित रूप से हुई लापरवाही बता रहे थे, लेकिन यहां की दीवारों पर सात जगहों पर आई दरार इस पूरे हाल के निर्माण की विशेषताएं बताती मिली। यहां पर एक साथ कम से कम पंद्रह से 20 रोगी रह सकते हैं, मगर दीवारों की स्थिति देखकर लग रहा था कि जैसे 50 साल पहले का निर्माण हुआ हो।
स्विच बोर्ड गायब: यहां भी दरार………….
दूसरी मंजिल में कई जगहों पर इलेक्ट्रिम सिस्टम में प्लग बोर्ड आदि गायब मिले। देखकर लग रहा था कि इसे बनाने के दौरान यहां पर बिजली का बोर्ड लगाना भूल गए। एकसाथ चार बोर्ड की जगह नंगे तारों के जाल के साथ डराती नजर आई। देखकर नहीं लग रहा था वास्तव में बिल्डिंग में करोड़ों की राशि का व्यय किया गया होगा। पूरे हाल में स्थिति से साफ था कि यहां पर निर्माण के नाम पर केवल खानापूर्ति कर दी गई।
ऊपरी मंजिल: खुली छतों के साथ निकली बालू………
चाइल्ड विंग के ऊपरी मंजिल के पहले हिस्से पर पहुंचे तो यहां का हाल बेहद ही खराब था। छतों में कई जगहों से दीवारों में झांकते बड़े-बड़े सुराख निर्माण की कलई खोलते मिले। यहां पर एक भी कोना ऐसा नहीं मिला, जहां पर दीवारों में सुराख न हुआ हो। छत पर पूर्व में एसीबी जांच के दौरान हल्की सी चोट पर बिखरी बालू के अवशेष के साथ इसकी स्थिति देखकर लगा कि यहां से नहीं हटे तो, यह छत ही गिर पड़ेगी। स्थिति खराब देखते हुए ऊपरी मंजिल के इस हिस्से से हम आगे निकल गए।
पानी टंकी: छतों पर बिखरी पट्टियां, फटी छत की फश…….र्
छत के पहले हिस्से आगे निकलते ही पानी की टंकी के पास बिछी पाइपलाइन के सामने से ही छत में से कई बड़े सुराख झांकने के साथ ही छत की हालत बताते हुए हमें डराते नजर आए। यहां पर हल्की सी धमक के साथ पूरी छत एवं दीवारों के हिलने का एहसास हो रहा था। फर्श पर बिछी पट्टियां भी अपना वजूद खोती मिली। कुल मिलाकर पूरी छत पर सरसरी नजर डालने पर मात्र से ही इसके गिर जाने की आशंका से ही डर का एहसास होने पर यहां से भी निकल गए।

डायबिटीज के मरीजों को रोज कितनी देर वॉक करना चाहिए, जानें इस बीमारी में वॉकिंग का सही समय और तरीका?

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डायबिटीज यानी मधुमेह एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर का ब्लड शुगर लेवल अनियंत्रित हो जाता है। इसे नियंत्रित रखने के लिए दवाओं और डाइट के साथ-साथ नियमित शारीरिक गतिविधि भी अत्यंत जरूरी होती है। दिल्ली में स्थित पीएसआरआई अस्पताल में वरिष्ठ सलाहकार, एंडोक्राइनोलॉजी और डायबिटीज़ डॉ. हिमिका चावला कहती हैं कि वॉकिंग यानी टहलना डायबिटीज के मरीजों के लिए सबसे सरल और प्रभावी व्यायामों में से एक है। लेकिन इसे सही समय और तरीके से करना बेहद जरूरी है, ताकि इसका पूरा लाभ मिल सके।

अब पिनकोड नहीं अपना Digipin शेयर करो! भारतीय डाक विभाग लाया नया एड्रेसिंग सिस्टम, ऐसे पता करें अपना पिन

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भारतीय डाक विभाग ने ‘डिजिपिन’ नामक एक नई एड्रेसिंग प्रणाली शुरू की है। यह प्रणाली, आईआईटी हैदराबाद और इसरो के सहयोग से बनी है। इसका उद्देश्य देश में सटीक डिजिटल पते प्रदान करना है।

क्या आपने कभी सोचा है कि जब आप अपने पता बताते हुए आखिर में पिन कोड बताते हैं, तो वह किस काम आता है? देखा जाए, तो वह किसी काम नहीं आता। एक पिन कोड 6 अंकों वाला ऐसा नंबर होता है जो कि भारत में किसी क्षेत्र या स्थान की पहचान के लिए डाक विभाग द्वारा दिया जाता है। हालांकि प्रैक्टिकल तौर पर यह किसी भी कूरियर का शख्स को सटीक तौर पर आपके पते तक नहीं पहुंचा सकता। इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय डाक विभाग नें एक नया एड्रेसिंग सिस्टम जारी किया है। इसे डिजिपिन का नाम दिया गया है। इसका मकसद है कि देश के किसी भी कोने का बिलकुल सटीक पता या एड्रेस डिजिटल रूप में मिल सके। चलिए डिटेल में समझते हैं कि आखिर यह नया सिस्टम है क्या और आप अपने डिजिपिन का पता कैसे लगा सकते हैं।

क्या है Digipin

डिजिपिन एक नया डिजिटल एड्रेस सिस्टम है जो कि डाक विभाग ने IIT हैदराबाद और ISRO के साथ मिलकर बनाया है। इस सिस्टम का मकसद है कि भारत की किसी भी जगह या स्थान को एक सटीक डिजिटल पहचान या आईडी मिल सके। इस सिस्टम के तहत पूरे देश को छोटे-छोटे 4 मीटर × 4 मीटर के हिस्सों में बांटा गया है और हर हिस्से को एक यूनिक आईडी दी गई है। यह आईडी 10-अक्षरों का एक कोड है और इसे ही डिजिपिन कहा गया है। बता दें कि यह कोड किसी भी जगह के latitude और longitude पर आधारित होता है। इस सिस्टम की मदद से किसी भी गली-कूचे या गांव का बिलकुल स्टीक पता आसानी से मिल सकता है। ऐसे में अब न तो किसी कूरियर को और न ही किसी शख्स को आपके एड्रेस तक पहुंचने में कोई समस्या हो पाएगी।

वैसे तो डिजिपिन और पिनकोड दोनों ही एड्रेस पहचानने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं लेकिन इनका काम करने का तरीका पूरी तरह से अलग है। एक पिनकोड 6 अंकों नंबर होता है जो कि एक काफी बड़े इलाके की पहचान बताता है। वहीं डिजिपिन एक डिजिटल लोकेशन सिस्टम है जो पूरे भारत में से किसी भी जगह की बिलकुल सटीक लोकेशन पहचानने में मदद करता है। पिनकोड जिस तरह से 6 अंकों का होता है, उसी तरह से डिजिपिन 10 अक्षरों का एक यूनिक कोड होता है। इस सिस्टम में पूरे देश को 4×4 मीटर के ग्रिड में बांटा जाता है और इसके बाग हर हिस्से को 10 अक्षरों वाला यह यूनिक कोड दिया जाता है। कुल मिला कर डिजिपिन ज्यादा सटीक लोकेशन देता है जबकि पिनकोड सिर्फ इलाके की जानकारी देता है।

चन्द्रनाहू कुर्मी क्षत्रीय समाज के केन्द्रीय महाधिवेशन में शामिल हुए मुख्यमंत्री साय

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि चन्द्रनाहू कुर्मी क्षत्रीय समाज का अतीत गौरवशाली रहा है। समाज में छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे प्रतापी शासक हुए, वहीं सरदार वल्लभभाई पटेल जैसी महान विभूतियाँ हुईं, जिन्होंने देशी रियासतों के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का चन्द्रनाहू कुर्मी क्षत्रीय समाज न केवल परिश्रम और स्वाभिमान का प्रतीक है, बल्कि यह समाज छत्तीसगढ़ के विकास का आधार स्तंभ भी है। छत्तीसगढ़ को नई दिशा और विकसित राज्य बनाने में इस समाज का महत्वपूर्ण योगदान है। मुख्यमंत्री साय आज दुर्ग जिले के ग्राम कोलिहापुरी में आयोजित चन्द्रनाहू कुर्मी क्षत्रीय समाज के केन्द्रीय महाधिवेशन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा तथा विधायक अजय चन्द्राकर, गजेन्द्र यादव एवं ललित चन्द्राकर विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए।

मुख्यमंत्री साय ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ में चन्द्रनाहू कुर्मी क्षत्रीय समाज के अधिकांश लोग मूल रूप से किसान हैं और व्यापक स्तर पर कृषि कार्य से जुड़े हैं। प्रदेश सरकार किसान भाइयों के चेहरों पर हमेशा खुशी देखना चाहती है। सरकार लगातार किसान भाइयों की बेहतरी के लिए कार्य कर रही है। इस समय ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में 29 मई से 12 जून 2025 तक चल रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिकों को किसानों से सीधे जोड़ना और नई कृषि तकनीकों, सरकारी योजनाओं तथा सफल कृषि मॉडलों की जानकारी देना है। कृषि वैज्ञानिकों के 100 समूह छत्तीसगढ़ के विभिन्न इलाकों में किसानों से संवाद कर रहे हैं। ये वैज्ञानिक किसानों को ऑर्गेनिक खेती, खाद और ‘सॉयल हेल्थ कार्ड’ के सही उपयोग के बारे में जागरूक कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ का हर किसान तकनीकी रूप से सक्षम हो और उनकी आय में वृद्धि हो।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में खेती-किसानी तभी मजबूत होगी जब किसान भाइयों को उनकी उपज की सही कीमत मिलेगी। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने विधानसभा चुनाव के समय गारंटी दी थी कि प्रदेश में सरकार बनने पर किसानों को दो साल का बकाया बोनस दिया जाएगा। इसे पूरा करते हुए हमने किसानों के खातों में सरकार बनते ही राशि अंतरित की। मोदी जी की गारंटी के अनुरूप छत्तीसगढ़ में किसानों से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान खरीदी की जा रही है। बीते खरीफ सीजन में राज्य में 149 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान खरीदी का नया रिकॉर्ड बना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को उनकी उपज की पूरी कीमत मिल रही है। धान खरीदी के नए रिकॉर्ड बन रहे हैं, जिससे प्रदेश में खेती के प्रति किसानों का रुझान बढ़ रहा है। प्रदेश में सिंचाई के संसाधनों को बढ़ावा देने के साथ-साथ पशुपालन और मत्स्य पालन को भी प्राथमिकता दी जा रही है। दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए गरीब परिवारों को दो-दो दुधारू पशु दिए जाएंगे, जिनकी देखभाल की जिम्मेदारी राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड को सौंपी गई है। किसानों को दूध बेचने में कोई परेशानी न हो, इसके लिए दुग्ध एकत्र करने के लिए भी व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि दंतेवाड़ा जिले में मिलेट्स (कोदो, कुटकी और रागी) की खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रोसेसिंग संयंत्र की स्थापना की जा रही है। यह अनाज पहले गरीबों का भोजन माना जाता था, लेकिन अब यह पोषणयुक्त होने के कारण उच्च वर्ग में भी लोकप्रिय हो रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमने नई औद्योगिक नीति बनाई है, जिसमें प्रदेश की जरूरत के हिसाब से उद्योग की स्थापना के लिए अनेक प्रावधान किए गए हैं। हमारी सरकार का संकल्प है – सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास। इसी भावना से हम समाज के हर वर्ग के लिए योजनाएँ बना रहे हैं और उन्हें कार्यरूप में परिणत कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ में किसानों, महिलाओं, बुजुर्गों और समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए अनेक योजनाएँ लागू की गई हैं। महतारी वंदना योजना के तहत 70 लाख से अधिक महिलाओं को प्रति माह 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। इससे महिलाएँ आत्मनिर्भर बन रही हैं और सिलाई, कढ़ाई, सब्ज़ी उत्पादन जैसे कार्यों से अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं। मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना को एक बार फिर शुरू किया गया है।