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1947 में RSS मजबूत होता तो नहीं बंटता भारत सुनील आंबेकर का दावा…

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RSS On 1947 Partition: RSS प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि अगर 1947 में RSS अधिक मजबूत होता तो भारत का बंटवारा नहीं होता. उन्होंने RSS की भूमिका, संवाद और पाकिस्तान संबंधों पर भी अपनी बात रखी.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा है कि अगर साल 1947 में RSS आज की तरह मजबूत होता, तो भारत का बंटवारा नहीं होता. उन्होंने देश के विभाजन को भारत के इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक बताया. मीडिया से बातचीत के दौरान सुनील आंबेकर ने कहा कि जब भारत को आजादी मिली थी, उस समय RSS उतना मजबूत नहीं था जितना वह बनना चाहता था या जितना आज है. उनका कहना था कि अगर उस समय संघ की ताकत ज्यादा होती, तो देश का बंटवारा रोका जा सकता था.

सुनील आंबेकरने कहा कि विभाजन के दौरान RSS ने अपनी क्षमता के अनुसार लोगों की मदद की. संघ ने खास तौर पर हिंसा और अशांति से प्रभावित हिंदुओं को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और उन्हें दोबारा बसाने का काम किया. आंबेकर ने कहा कि बंटवारे के कारण उस समय की व्यवस्था के प्रति लोगों में काफी नाराजगी और गुस्सा था. सुनील आंबेकर ने यह भी कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए RSS के बारे में कई तरह की गलत बातें फैलाई जाती हैं. उनके अनुसार, संघ किसी व्यक्ति या समुदाय से नफरत नहीं करता और न ही किसी को अपना दुश्मन मानता है. उन्होंने कहा कि RSS समाज के हर वर्ग को अपना मानता है और सभी के साथ संवाद में विश्वास रखता है.

संघ हमेशा बातचीत और चर्चा के लिए तैयार रहता हैसुनील आंबेकर

सुनील आंबेकर ने कहा कि संघ हमेशा बातचीत और चर्चा के लिए तैयार रहता है. उनका मानना है कि समाज में समस्याओं का समाधान संवाद के जरिए निकाला जा सकता है और यही संघ की सोच भी है. पाकिस्तान के साथ बातचीत को लेकर RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले के बयान पर भी सुनील आंबेकर ने अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि होसबोले के बयान को पूरी गंभीरता और गहराई से समझने की जरूरत है. उनके अनुसार, RSS हमेशा यह मानता रहा है कि लोगों के बीच संवाद और संपर्क बने रहने से लंबे समय में समस्याओं को सुलझाने में मदद मिलती है.

किसी मामले में RSS सरकार को सलाह नहीं देता है?

आंबेकर ने स्पष्ट किया कि सरकारों के बीच होने वाली बातचीत एक राजनीतिक और कूटनीतिक विषय है. ऐसे मामलों में RSS न तो सरकार को सलाह देता है और न ही फैसले करता है. उन्होंने कहा कि सरकारें अपने समय की परिस्थितियों और कूटनीतिक जरूरतों के आधार पर निर्णय लेती हैं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जब आधिकारिक स्तर पर बातचीत आगे नहीं बढ़ रही हो, तब लोगों के बीच संपर्क और संवाद जारी रहना चाहिए. उनके मुताबिक, दोनों देशों के लोगों के बीच बातचीत, सामाजिक रिश्ते और व्यापार जैसे संबंध बने रहने से भविष्य में कुछ मुद्दों के समाधान की संभावना बढ़ सकती है.

दुनिया के किन देशों में चलते हैं प्लास्टिक के नोट, सबसे पहले किसने शुरू किया था?

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भारतीय रिजर्व बैंक अब देश में पॉलीमर नोट लाने पर विचार कर रहा है. आइए जानते हैं कौन से देश पहले से ही पॉलीमर नोटों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

भारतीय रिजर्व बैंक देश में प्लास्टिक या फिर पॉलीमर के नोट लाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक कागजी मुद्रा की छपाई की बढ़ती लागत और पारंपरिक नोटों की कम उम्र को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच पटना और मुंबई में हुई आरबीआई बोर्ड की हालिया बैठकों में इस प्रस्ताव पर चर्चा की गई. जैसे-जैसे भारत में पॉलीमर मुद्रा को लेकर चर्चा जोर पकड़ रही है कई लोग अब यह पूछ रहे हैं कि कौन से देश पहले से ही प्लास्टिक के नोट इस्तेमाल करते आ रहे हैं? आइए जानते हैं कि सबसे पहले इन्हें किसने शुरू किया था.

पॉलीमर मुद्रा के मामले में कौन सबसे आगे 

ऑस्ट्रेलिया में 1988 में देश के द्विशताब्दी समारोहों के दौरान प्लास्टिक के नोटों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था. यह तकनीक रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया और कॉमनवेल्थ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन ने मिलकर विकसित की थी.

पॉलीमर नोट लाने का मुख्य मकसद नकली मुद्रा से निपटना और खराब मौसम की स्थिति में चलने वाले नोटों की उम्र बढ़ाना था. यह प्रयोग काफी ज्यादा सफल रहा और आखिरकार इसने दर्जनों देशों को ऐसी ही प्रणालियां अपनाने के लिए प्रेरित किया. आज ऑस्ट्रेलिया पूरी तरह से पॉलीमर नोटों पर चलता है.

वे देश जिन्होंने पूरी तरह से प्लास्टिक के नोट अपना लिए 

कई देशों ने पारंपरिक कागजी नोटों को पूरी तरह से हटा दिया और अपनी मुद्रा प्रणालियों को पॉलीमर नोटों में बदल लिया है. न्यूजीलैंड ने 1999 तक अपनी कागजी मुद्रा को पूरी तरह से बदल दिया था और अब सभी मूल्य वर्गों में पॉलीमर नोटों का इस्तेमाल करता है. रोमानिया 1999 में प्लास्टिक के नोट अपनाने वाला पहला यूरोपीय देश बना. इसी के साथ कनाडा ने 2013 तक पॉलीमर मुद्रा में अपना पूरा बदलाव कर लिया था.

ब्रुनेई 2006 से खास तौर से पॉलीमर नोटों का इस्तेमाल कर रहा है. वियतनाम भी अपने ज्यादातर मुद्रा मूल्य वर्ग प्लास्टिक के रूप में जारी करता है.

वे देश जो आंशिक रूप से पॉलीमर नोटों का इस्तेमाल करते हैं 

कई देश वर्तमान में मिश्रित प्रणालियां चलाते हैं. इनमें कागज और पॉलीमर दोनों तरह के नोट चलन में रहते हैं. ब्रिटेन ने 2016 में पॉलीमर पाउंड स्टर्लिंग नोट जारी करना शुरू किया. इसकी शुरुआत £5 के नोट से हुई और बाद में इसे £10, £20 और £50 जैसी बड़ी कीमतों वाले नोटों तक बढ़ाया है.

सिंगापुर और मलेशिया जैसे देश भी कुछ खास कीमतों वाले नोट के लिए पॉलीमर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं. वहीं थाईलैंड और फिलिपींस ने हाल ही में प्लास्टिक करेंसी की तरफ अपना बदलाव तेज कर दिया है.

डिप्टी सीएम पद को लेकर बवाल; विधानसभा की बैठक से पहले कांग्रेस नेताओं की बैठक…

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डीके शिवकुमार के कर्नाटक का सीएम बनने से पहले ही राज्य में प्रेशर पॉलिटिक्स शुरू हो गई. दलित समुदायों के अलावा लिंगायत समुदाय ने भी अपने लिए डिप्टी सीएम की मांग कर कांग्रेस को पशोपेश में डाल दिया है.

कर्नाटक में डीके शिवकुमार को नेता चुनने के लिए विधायक दल की बैठक बुलाई गई है. इसके लिए कांग्रेस प्रभारी रणदीप सुरजेवाला बेंगलुरु पहुंच गए हैं, जैसे ही वह एयरपोर्ट के बाहर निकले, वहां मौजूद दलित समुदाय के नेताओं ने उन्हें ज्ञापन सौंपा कि दलित समाज के नेता पूर्व मंत्री केएच मुनियप्पा को डिप्टी सीएम बनाया जाए.

डिप्टी सीएम पद को लेकर बवाल

हवाई अड्डे के टर्मिनल 1 पर कई घंटों तक चले इस प्रदर्शन ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा. प्रदर्शनकारियों ने इस बात पर नाराजगी जताई कि मडिगा समुदाय को कभी भी मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री या केपीसीसी अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद नहीं दिए गए हैं और उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बार समुदाय को प्रतिनिधित्व मिलना ही चाहिए.

विधानसभा की बैठक से पहले कांग्रेस नेताओं की बैठक

उन्होंने चेतावनी दी कि उपमुख्यमंत्री पद देने से इनकार करना कांग्रेस को राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचा सकता है और कहा कि अगर उनकी बात अनसुनी की गई तो समुदाय पार्टी को सबक सिखाएगा. बता दें कि ये विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं जब कांग्रेस के शीर्ष नेता, जिनमें महासचिव केसी वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला शामिल हैं, वो शहर के शांगरी ला होटल पहुंचे हैं. आज शाम विधानसभा की बैठक से पहले कांग्रेस नेताओं की एक बैठक करने की उम्मीद है.

लिंगायत समुदाय का भी दबाव

कर्नाटक कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की बैठक को लेकर एएनआई से बात करते हुए मुनियप्पा ने कहा, “कुछ लोग प्रस्ताव रख रहे हैं, कुछ उसका समर्थन कर रहे हैं. यही प्रक्रिया है और हम इससे आगे कुछ नहीं कह सकते लेकिन यह प्रक्रिया आज शाम तक पूरी हो जाएगी.”

कांग्रेस नेतृत्व पर शीर्ष पदों के लिए लिंगायत समुदाय का भी दबाव है. गुरु बसवा पट्टादेवरु और उनके समर्थकों ने वरिष्ठ नेता ईश्वर खंड्रे के लिए उपमुख्यमंत्री पद की मांग की. गुरु बसवा ने एएनआई से कहा, “अगर ईश्वर खंड्रे को उपमुख्यमंत्री का पद नहीं दिया गया, तो लिंगायत समुदाय अगले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी को सबक सिखाएगा.”

Delhi NCR Rain: दिल्ली-NCR में धूल भरी आंधी के बाद बारिश शुरू, मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह…

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दिल्ली-NCR में शनिवार शाम मौसम विभाग की चेतावनी सही साबित हुई है. अगले तीन घंटे तक खराब मौसम की भविष्यवाणी के कुछ घंटे बाद ही राजधानी में बारिश शुरू हो गई है. धूल भरी आंधी और गरज-चमक के साथ कई इलाकों में हो रही है. दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर तेज हवाओं के कारण पेड़ गिर गया है, वहीं ITO से BJP से दफ्तर जाने वाले रास्ते पर भी पेड़ गिरा है, इसमें एक गाड़ी चपेट में आई है, रास्ता भी बंद हो गया है.

तेज हवाओं के साथ शुरू हुई बारिश

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने शाम 6:47 बजे तक दिल्ली के कई क्षेत्रों में 50-70 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने और 80 किलोमीटर प्रति घंटा तक की तेज झोंकों का अलर्ट जारी किया था. अब 100 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं. दो घंटे तक मौसम ऐसे ही बना रहेगा. दक्षिण दिल्ली, पूर्वी दिल्ली, मध्य दिल्ली और कुछ उत्तर दिल्ली के इलाकों में भारी बारिश हो रही है. नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में भी मौसम खराब है.

यातायात प्रभावित, लोगों को सतर्क रहने की सलाह

बारिश शुरू होने से दिल्ली-NCR में यातायात पर असर पड़ा है. सड़कों पर वाहनों की रफ्तार कम हो गई है. मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अगले कुछ घंटों तक अनावश्यक बाहर न निकलें, खासकर दोपहिया वाहन सवारों को सतर्क रहने को कहा गया है. IMD के अनुसार इस बारिश के साथ कुछ इलाकों में ओले भी गिर सकते हैं. विभाग ने पहले ही येलो अलर्ट जारी रखा है.

ज हवाओं और बारिश के कारण बिजली कटौती और पानी की आपूर्ति में व्यवधान की भी आशंका है. प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। लोगों से छत पर रखे सामान को सुरक्षित करने और कमजोर दीवारों से दूर रहने की सलाह दी गई है. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह गर्मी के बाद मानसून पूर्व की गतिविधियां हैं, जिससे दिल्ली-NCR में तापमान में भी गिरावट दर्ज की जा रही है.

कर्नाटक: नए मुख्यमंत्री का कब होगा शपथ ग्रहण, पार्टी के सीनियर नेता डीके शिवकुमार राज्य के 25वें मुख्यमंत्री के तौर पर 3 जून को शपथ लेंगे….

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कर्नाटक कांग्रेस सरकार ने सत्ता की कुर्सी में फेरबदल करते हुए अब राज्य के मुखिया की जिम्मेदारी पार्टी के सीनियर नेता डीके शिवकुमार को सौंपी है. वह राज्य के 25वें मुख्यमंत्री के तौर पर 3 जून को शपथ लेंगे. इससे पहले पार्टी आलाकमान के निर्देश के बाद पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने पद से इस्तीफा दे दिया था.

कर्नाटक के पूर्व उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने कहा कि शपथ ग्रहण समारोह 3 जून को होगा.

तीन सालों से चल रही थी कुर्सी की खींचतान

पिछले तीन सालों से कर्नाटक में तीन सालों से सत्ता की कुर्सी को लेकर जबरदस्त खींचतान देखने को मिल रही थी. शनिवार शाम को शिवकुमार विधायक दल के नेता के तौर पर चुने जाएंगे. इससे पहले शनिवार शाम को कांग्रेस विधायक दल की बैठक होगी. इनमें शिवकुमार को विधायक दल का नेता चुनने की औपचारिकता पूरी कर ली जाएगी.

बैठक में AIC के महासचिव केसी वेणुगोपाल, कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला भी शामिल होंगे. बैठक में सीएलपी सबसे पहले सिद्धारमैया की सेवाओं की सराहना करेगा. इसके बाद औपचारिक रूप से शिवकुमार को नया नेता चुन लिया जाएगा. सरकारी सूत्रों की मानें तो शपथ ग्रहण समारोह लोकभवन के ग्लास हाउस में आयोजित किया जाएगा. उम्मीद है कि इस समारोह में कांग्रेस के सीनियर नेता, मंत्रिमंडल के सहयोगी, पार्टी कार्यकर्ता औऱ पूरे कर्नाटक से आए समर्थक शामिल होंगे.

प्रियंका गांधी ने बढ़ाया डीके शिवकुमार का नाम

शिवकुमार के चुनाव को लेकर पार्टी ने सोच समझकर ही कदम रखे. 64 साल के शिवकुमार की घोषणा सिद्धारमैया के दिल्ली कांग्रेस आलाकमान के साथ विचार विमर्श के बाद मुख्यमंत्री पद से हटने के दूसरे दिन हुई. ऐसे में कांग्रेस की तरफ से नेतृत्व को लेकर तैयार की गई व्यवस्था को लागू करने के तौर पर भी देखा जा रहा है.

कांग्रेस नेता और सांसद प्रियंका गांधी ने डीके का नाम आगे बढ़ाया था. उनके रिश्ते काफी सौहार्दपूर्ण रहे हैं. दो साल पहले लोकसभा चुनाव के दौरान वायनाड में प्रियंका गांधी के चुनाव प्रचार में सक्रिय रहे थे.

डीके शिवकुमार के साथ अन्य पांच विधायक भी मंत्री पद की शपथ लेंगे. इसके बाद पार्टी मंत्रिमंडल विस्तार पर फैसला करेगी. पार्टी मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर व्यापक चर्चा करेगी.

छत्तीसगढ़ में सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने, अब 500 करोड़ का निवेश करने जा रही ये कंपनी…

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छत्तीसगढ़ में सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने की पूरी तैयारी कर ली है. बताया जा रहा है कि टाटा समूह का हिस्सा एक कंपनी राज्य में 500 करोड़ रुपए का निवेश करने जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक इसी दिशा में टाटा समूह की होटल कंपनी इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड (IHCL) ने राज्य में 500 करोड़ रुपये से अधिक निवेश करने की इच्छा जताई है. इस संबंध में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मौजूदगी में एक अहम बैठक भी हुई.

क्या बोले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय?

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों, जल स्रोतों और धार्मिक स्थलों से समृद्ध राज्य है. सरकार का उद्देश्य छत्तीसगढ़ को देश और विदेश के पर्यटन में एक अहम स्थान दिलाना है. पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने के बाद होटल और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं.

वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि राज्य सरकार निवेशकों के लिए बेहतर माहौल तैयार कर रही है. नई औद्योगिक नीति के तहत पर्यटन क्षेत्र को विशेष प्रोत्साहन और कई अतिरिक्त सुविधाएं दी जा रही हैं. आईएचसीएल ने बस्तर, सरगुजा और राज्य के पांच शक्तिपीठों में पर्यटन सुविधाओं के विकास में रुचि दिखाई है. इसके लिए सरकार ने आवश्यक जमीन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी दिया है. इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.

सरकार ने जमीन उपलब्ध कराने की कही बात

सरकार ने होटल और पर्यटन परियोजनाओं के लिए कई जगहों का प्रस्ताव दिया है. इनमें नया रायपुर में विधानसभा के पास 7 एकड़ जमीन, एयरपोर्ट के पास 13 एकड़ जमीन, सिरपुर पर्यटन स्थल के पास 9 एकड़ जमीन, सरगुजा के रामगढ़ धार्मिक पर्यटन क्षेत्र, बस्तर के चित्रकोट जलप्रपात और कांगेर वैली जैसी प्रमुख पर्यटन स्थल शामिल हैं.

इसके अलावा राज्य सरकार ने टाटा समूह को अहम रिसॉर्ट परियोजनाएं देने की भी संभावना जताई है. इनमें बस्तर का क्रिकेट ड्यून्स रिसॉर्ट, बोधघाट इको रिसॉर्ट, मैनपाट का हिल व्यू रिसॉर्ट और कबीरधाम का हेरिटेज रिसॉर्ट शामिल है. इन परियोजनाओं के शुरू होने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ आज एकदिवसीय रायपुर दौरे पर….

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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ आज छत्तीसगढ़ में रायपुर एक दिन दौरे पर रहेंगे। उपराष्ट्रपति राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, एनआईटी रायपुर, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई, भारतीय प्रबंधन संस्थान रायपुर के छात्रों के साथ “बेहतर भारत के निर्माण के लिए विचार” विषय पर एक संवाद सत्र की अध्यक्षता करेंगे।

CM साय 31 मई को दुर्ग में 259 करोड़ के विकास कार्यों का करेंगे लोकार्पण-भूमिपूजन…

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 31 मई को दुर्ग दौरे पर रहेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री दुर्ग शहर में 259 करोड़ रुपये के 191 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन करेंगे। इस दौरान महापौर अलका बाघमार शहर विकास से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं के लिए करीब 100 करोड़ रुपए की स्वीकृति संबंधी ज्ञापन मुख्यमंत्री को सौंपेंगी। इसमें नगर निगम की नई बिल्डिंग,ऑडिटोरियम,स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, सियान सदन, जलभराव निराकरण और अधोसंरचना विकास जैसे प्रस्ताव शामिल किए गए हैं। नगर निगम के कई विभाग फिलहाल अलग-अलग भवनों से संचालित हो रहे हैं। सभी को एक ही परिसर में लाने लंबे समय से नए निगम भवन की मांग की जा रही हैं। पूर्व की शहर सरकारों ने भी प्रयास किए।लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ पाया। सिंचाई विभाग ने जमीन के लिए एनओसी जारी कर दी है। इसके बाद महापौर ने नए भवन के लिए 20 करोड़ रुपए की मांग करेंगी।

इसके अलावा विकास के 66 कार्यों का भूमिपूजन और 25 कामों का लोकार्पण होगा। मुख्यमंत्री 248 करोड़ रुपए लागत के 66 विकास कार्यों का भूमिपूजन करेंगे। इनमें 77 एमएलडी एसटीपी निर्माण, मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी अंतर्गत कम्पोस्ट प्लांट निर्माण, इंदिरा मार्केट मल्टीलेवल पार्किंग, नालंदा परिसर, विभिन्न वार्डों में सीसी रोड,आरसीसी नाली, पुलिया और डामरीकरण कार्य शामिल हैं। प्रमुख सड़कों के चौड़ीकरण,केनाल रोड,सिकोला नाला, जलागार निर्माण और पाइपलाइन विस्तार कार्य भी प्रस्तावित हैं।

वहीं, 11.32 करोड़ रुपए लागत के 25 विकास कार्यों का लोकार्पण किया जाएगा। इनमें मॉडल स्ट्रीट फूड हब, विभिन्न वार्डों में पेवर ब्लॉक और डामरीकरण, मेनोनाइट चौक से चौपाटी तक मार्ग चौड़ीकरण तथा गंजपारा चौक से शिवनाथ नदी तक सड़क उन्नयन कार्य शामिल हैं। मुख्यमंत्री के दौरे को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने जेआरडी शासकीय स्कूल मैदान का निरीक्षण किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के अलावा कैबिनेट मंत्री और अन्य जनप्रतिनिधि भी शामिल होगे।

इसके अलावा एमआईसी सदस्यों के साथ हुई बैठक में निगम परिसर की खाली जमीन पर एक हजार क्षमता वाले ऑडिटोरियम के लिए 20 करोड़ रुपए की मांग तय की गई। वहीं आदित्य नगर चौक के पास पांच एकड़ जमीन पर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स,पांच सियान सदन,वार्ड-60 में अधूरे बैडमिंटन कोर्ट को पूरा करने, इंदिरा मार्केट उन्नयन, जलभराव समस्या के समाधान के लिए 5 करोड़ तथा 60 वार्डों में अधोसंरचना विकास के लिए 20 करोड़ रुपए की मांग भी रखी जाएगी। नालियों और पाइपलाइन को अलग-अलग करने की योजना के लिए भी वित्तीय स्वीकृति मांगी जाएगी।

छत्तीसगढ़ के किसानों की पहली पसंद बने ये 5 ट्रैक्टर ब्रांड, बेहतर माइलेज, मजबूत इंजन और शानदार कार्यक्षमता…

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ट्रैक्टर किसानों के बीच तेजी से हो रहे हैं लोकप्रिय’

छत्तीसगढ़ में खेती तेजी से आधुनिक हो रही है और किसान अब ऐसे ट्रैक्टरों को प्राथमिकता दे रहे हैं जो कम फ्यूल में ज्यादा काम करें, लंबे समय तक टिकाऊ हों और खेतों में बेहतर प्रदर्शन दें।

खासतौर पर खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच किसान ऐसे ट्रैक्टर ब्रांड चुन रहे हैं जो जुताई, बुआई, रोटावेटर, ट्रॉली और सिंचाई जैसे हर काम में शानदार प्रदर्शन दें।

राज्य में इस समय महिंद्रा, जॉन डियर और स्वराज के कई मॉडल किसानों की पहली पसंद बने हुए हैं। ये ट्रैक्टर अपनी दमदार इंजन क्षमता, बेहतर माइलेज, मजबूत बॉडी और आसान मेंटेनेंस के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। आइए जानते हैं छत्तीसगढ़ के किसानों के बीच सबसे ज्यादा पसंद किए जा रहे 5 ट्रैक्टर मॉडल के बारे में।

जॉन डियर 5050 डी 4 डब्ल्यूडी (John Deere 5050 D 4WD) 

जॉन डियर का यह मॉडल छत्तीसगढ़ के किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह 50 HP का दमदार ट्रैक्टर है, जो 4WD तकनीक के साथ आता है। कठिन और दलदली खेतों में इसकी पकड़ मजबूत रहती है। इसमें बेहतर ट्रैक्शन, शानदार लिफ्टिंग क्षमता और कम फ्यूल खपत जैसी खूबियां हैं। यह रोटावेटर, कल्टीवेटर और एमबी प्लाऊ जैसे भारी उपकरणों के साथ शानदार प्रदर्शन करता है।

महिंद्रा 475 डीआई (Mahindra 475 DI)

महिंद्रा 475 DI लंबे समय से किसानों का भरोसेमंद साथी रहा है। 42 HP क्षमता वाला यह ट्रैक्टर बेहतर माइलेज और कम रखरखाव लागत के लिए जाना जाता है। छत्तीसगढ़ के छोटे और मध्यम किसानों के लिए यह एक किफायती विकल्प है। खेतों की जुताई, बुआई और ट्रॉली खींचने जैसे रोजमर्रा के कार्यों में यह बेहतरीन प्रदर्शन देता है।

महिंद्रा 575 डीआई (Mahindra 575 DI) 

महिंद्रा 575 DI 45 HP कैटेगरी का लोकप्रिय ट्रैक्टर है। इसकी मजबूत बॉडी और शक्तिशाली इंजन इसे बहुउद्देश्यीय खेती के लिए उपयुक्त बनाते हैं। यह मॉडल खासतौर पर उन किसानों के लिए बेहतर है जिन्हें खेत और ढुलाई दोनों कार्य करने होते हैं। इसकी लिफ्टिंग क्षमता अच्छी है और कठिन परिस्थितियों में भी इसका प्रदर्शन स्थिर रहता है।

स्वराज 855 एफई (Swaraj 855 FE) 

स्वराज 855 FE छत्तीसगढ़ के किसानों की पसंदीदा सूची में तेजी से ऊपर आया है। 49.3 HP क्षमता वाला यह ट्रैक्टर भारी कृषि कार्यों के लिए उपयुक्त माना जाता है। इसका इंजन ज्यादा टॉर्क पैदा करता है, जिससे गहरी जुताई और भारी उपकरणों के संचालन में आसानी होती है। मजबूत निर्माण और टिकाऊ डिजाइन इसकी सबसे बड़ी खासियत है।

जॉन डियर 5310 4 डब्ल्यूडी (John Deere 5310 4WD)

अगर बड़े खेतों और आधुनिक खेती की बात करें तो John Deere 5310 4WD किसानों की पहली पसंद बनता जा रहा है। 55 HP क्षमता वाला यह ट्रैक्टर एडवांस फीचर्स और शानदार प्रदर्शन के लिए जाना जाता है। यह मॉडल बड़े कृषि कार्यों, हैवी ड्यूटी ऑपरेशन और कमर्शियल उपयोग के लिए बेहद उपयुक्त है। इसकी 4WD तकनीक मुश्किल खेतों में भी बेहतर नियंत्रण देती है।

क्यों पसंद कर रहे हैं किसान ये ट्रैक्टर

प्रमुख वजह किसानों को फायदा
बेहतर माइलेज डीजल की बचत और कम ऑपरेटिंग लागत
दमदार इंजन कठिन खेतों में भी बेहतर प्रदर्शन
मजबूत बॉडी लंबे समय तक टिकाऊ उपयोग
आसान सर्विसिंग कम रखरखाव खर्च
बेहतर लिफ्टिंग क्षमता भारी कृषि उपकरणों को आसानी से चला सकते हैं
भरोसेमंद ब्रांड वैल्यू लंबे समय से किसानों का विश्वास

ब्रांड तुलना एक नजर में

ब्रांड भरोसा माइलेज भारी कार्य क्षमता
Mahindra बहुत अच्छा उत्कृष्ट अच्छा
John Deere उत्कृष्ट अच्छा उत्कृष्ट
Swaraj अच्छा अच्छा बहुत अच्छा

इन लोकप्रिय ट्रैक्टरों की अनुमानित कीमत 

ट्रैक्टर मॉडल HP क्षमता अनुमानित कीमत (एक्स-शोरूम)
John Deere 5050 D 4WD 50 HP ₹9.56 लाख – ₹10.46 लाख
Mahindra 475 DI 42 HP ₹6.49 लाख – ₹6.79 लाख
Mahindra 575 DI 45 HP ₹6.84 लाख – ₹7.14 लाख
Swaraj 855 FE 49.3 HP ₹8.30 लाख – ₹8.90 लाख
John Deere 5310 4WD 55 HP ₹10.95 लाख – ₹12.45 लाख

नोट: ऊपर लिस्ट में दी गई इन ट्रैक्टरों की एक्स शोरूम कीमतें हैं। ट्रैक्टरों की ऑन रोड प्राइज राज्य, डीलरशिप, आरटीओ शुल्क और उपलब्ध ऑफर्स के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। खरीदने से पहले नजदीकी डीलरशिप से कीमत की पुष्टि जरूर करें। इन ट्रैक्टरों के बारे में और अधिक जानकारी के लिए ट्रैक्टर जंक्शन पर विजिट करें।

क्यों बढ़ रही है इन ट्रैक्टरों की मांग

छत्तीसगढ़ के किसान अब ऐसे ट्रैक्टर चाहते हैं जो कम लागत में ज्यादा उत्पादन सुनिश्चित करें। बेहतर माइलेज, टिकाऊ इंजन, आसान स्पेयर पार्ट्स उपलब्धता और आधुनिक फीचर्स इन ब्रांड्स को किसानों के बीच लोकप्रिय बना रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि खरीफ सीजन में सही ट्रैक्टर का चयन खेती की लागत घटाने और उत्पादकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। यही वजह है कि ये पांच ट्रैक्टर मॉडल राज्य के किसानों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के किसानों की पहली पसंद बने ये 5 ट्रैक्टर ब्रांड के संबंध में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब (FAQs):

प्रश्न 1. छत्तीसगढ़ के किसानों की पहली पसंद कौन-कौन से ट्रैक्टर हैं?

उत्तर: छत्तीसगढ़ के किसानों के बीच John Deere 5050 D 4WD, Mahindra 475 DI, Mahindra 575 DI, Swaraj 855 FE और John Deere 5310 4WD सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं।

प्रश्न 2. किसानों के बीच ये ट्रैक्टर क्यों लोकप्रिय हैं?

उत्तर: बेहतर माइलेज, दमदार इंजन, मजबूत बॉडी, आसान सर्विसिंग और भारी कृषि कार्यों में शानदार प्रदर्शन के कारण ये ट्रैक्टर किसानों की पहली पसंद बने हुए हैं।

प्रश्न 3. इन ट्रैक्टरों की कीमत कितनी है?

उत्तर: इन ट्रैक्टरों की कीमत मॉडल और फीचर्स के अनुसार लगभग ₹6.49 लाख से ₹12.45 लाख तक है।

प्रश्न 4. छोटे किसानों के लिए कौन सा ट्रैक्टर बेहतर विकल्प है?

उत्तर: Mahindra 475 DI छोटे और मध्यम किसानों के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है क्योंकि यह किफायती होने के साथ बेहतर माइलेज देता है।

प्रश्न 5. भारी कृषि कार्यों के लिए कौन सा ट्रैक्टर सबसे उपयुक्त है?

उत्तर: John Deere 5310 4WD और Swaraj 855 FE भारी जुताई और बड़े कृषि कार्यों के लिए बेहतर माने जाते हैं।

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छत्तीसगढ़ में नौतपा के दौरान पड़ रही भीषण गर्मी के बीच मौसम ने ली अचानक करवट….

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छत्तीसगढ़ में नौतपा के दौरान पड़ रही भीषण गर्मी के बीच मौसम ने अचानक करवट ले ली है। प्रदेश के उत्तर और दक्षिणी हिस्सों में हुई बारिश ने लोगों को राहत पहुंचाई है, जबकि कई इलाकों में तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है।

छत्तीसगढ़ में नौतपा के दौरान पड़ रही भीषण गर्मी के बीच मौसम ने अचानक करवट ले ली है। प्रदेश के उत्तर और दक्षिणी हिस्सों में हुई बारिश ने लोगों को राहत पहुंचाई है, जबकि कई इलाकों में तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि मध्य छत्तीसगढ़ अभी भी तेज गर्मी की चपेट में है और राजनांदगांव प्रदेश का सबसे गर्म जिला बना हुआ है, जहां अधिकतम तापमान 46 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी आने और विभिन्न मौसम प्रणालियों के सक्रिय होने से प्रदेश में मौसम का मिजाज बदला है। शुक्रवार को सुकमा में सबसे अधिक 4 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई। वहीं जगदलपुर, दरभा और तोंगपाल में 3 सेंटीमीटर, तोकापाल में 2 सेंटीमीटर तथा अंबिकापुर, कोंडागांव, कोंटा, भानपुरी, लोहांडीगुड़ा और सरगुजा में हल्की बारिश रिकॉर्ड की गई।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मध्य पाकिस्तान से ओडिशा तक फैली द्रोणिका, बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती परिसंचरण और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से प्रदेश में अगले 24 घंटों के दौरान मौसम सक्रिय बना रहेगा। कई क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश, तेज हवाएं और वज्रपात की संभावना जताई गई है।

मौसम विभाग ने रायगढ़, बिलासपुर, कोरबा, जशपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया और बलरामपुर जिलों के लिए विशेष अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने, मेघगर्जन और बारिश होने की संभावना है।

राजधानी रायपुर में भी शनिवार को मौसम बदला-बदला रह सकता है। शहर में आंशिक बादल छाए रहने, गरज-चमक के साथ बारिश और अंधड़ चलने के संकेत हैं। मौसम विभाग के अनुसार अधिकतम तापमान 43 डिग्री और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है।