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पत्रकार ने वीआईपी गाड़ी रोक डीएम को जड़ा थप्पड़, सुरक्षा और प्रशासन पर उठे सवाल

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महाकुंभ 2025 के दौरान एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक पत्रकार ने जिला अधिकारी (डीएम) को थप्पड़ मार दिया। यह घटना तब हुई जब डीएम वीआईपी गाड़ियों के प्रवेश को लेकर व्यवस्था का निरीक्षण कर रहे थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महाकुंभ मेले में भारी भीड़ के बीच एक वीआईपी गाड़ी ने प्रवेश करने की कोशिश की, जिससे तीर्थयात्रियों में असंतोष फैल गया। एक पत्रकार, जो भगवा वस्त्र धारण किए हुए थे, ने माइक हाथ में लेकर गाड़ी के चालक से सवाल किया, “आदमी के आने-जाने की जगह नहीं है, आप गाड़ी कैसे घुसा दी?” जब चालक ने बताया कि गाड़ी में डीएम बैठे हैं, तो पत्रकार ने कहा, “भगवान के यहां कोई वीआईपी नहीं होता है।”

इसके बाद, डीएम ने हस्तक्षेप करते हुए कहा, “मैं जिला अधिकारी हूं,” जिस पर पत्रकार ने माइक हाथ में रखते हुए डीएम को थप्पड़ मार दिया और कहा, “भगवान के सामने कोई वीआईपी नहीं होता है।” इस घटना के तुरंत बाद, सुरक्षा कर्मियों ने पत्रकार को पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह भीड़ का फायदा उठाकर भागने में सफल रहा।

इस घटना ने महाकुंभ मेले की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। डीएम पर हमला होना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है, विशेषकर जब यह घटना एक पत्रकार द्वारा की गई हो। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी की तलाश शुरू की, लेकिन भीड़ के कारण उसे पकड़ने में असफल रहे।

प्रशासन ने इस घटना की जांच के लिए एक विशेष टीम गठित की है। डीएम ने मीडिया से बातचीत में कहा, “यह घटना निंदनीय है। हम सुनिश्चित करेंगे कि दोषी को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए और कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए।”

वीआईपी संस्कृति पर बहस

यह घटना महाकुंभ जैसे धार्मिक आयोजनों में वीआईपी संस्कृति पर एक नई बहस छेड़ती है। भगवान के दर्शन के लिए आए सामान्य श्रद्धालुओं के बीच वीआईपी गाड़ियों का प्रवेश अक्सर असंतोष का कारण बनता है। कई लोग मानते हैं कि ऐसे आयोजनों में सभी को समान अधिकार मिलना चाहिए और वीआईपी विशेषाधिकारों को समाप्त किया जाना चाहिए।

धार्मिक विद्वान डॉ. रमेश शर्मा कहते हैं, “महाकुंभ जैसे आयोजनों का मूल उद्देश्य सभी को समान रूप से भगवान के दर्शन का अवसर प्रदान करना है। वीआईपी संस्कृति इस उद्देश्य के विपरीत है और इसे समाप्त किया जाना चाहिए।”