योग गुरु रामदेव ने मंगलवार को कहा कि पाकिस्तान और बांग्लादेश सहित कई देशों में भारत विरोधी ताकतें सिर उठा रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में भारत को दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य और आध्यात्मिक शक्ति के रूप में विकसित करने की जरूरत है, ताकि देश सुरक्षित, संगठित और समृद्ध बन सके।
उन्होंने इजरायल का उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया में कोई भी यहूदियों पर बुरी नजर डालने की हिम्मत नहीं करता।
रामदेव ने वैश्विक हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि दुनिया एक बेहद खतरनाक दौर से गुजर रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हाल ही में अमेरिका ने कनाडा को 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी। ऐसे हालात में भारत को आत्मनिर्भरता और स्वदेशी मार्ग पर मजबूती से आगे बढ़ना होगा।
समृद्ध राष्ट्र बनना है तो…
उन्होंने कहा कि अगर भारत को एकजुट और समृद्ध राष्ट्र बनाना है तो स्वदेशी शिक्षा, स्वदेशी चिकित्सा और स्वदेशी सनातन जीवन पद्धति को अपनाना होगा। साथ ही सनातन विरासत को सर्वोच्च सम्मान और गौरव देना समय की मांग है।
राष्ट्रीय एकता पर जोर
योग गुरु रामदेव ने कहा कि भारत को केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि सैन्य, राजनीतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से भी विश्व की सबसे बड़ी शक्ति बनना होगा, ताकि पूरी दुनिया भारत से प्रेरणा ले सके। उन्होंने देशवासियों से स्वदेशी अपनाने और मैकाले की शिक्षा प्रणाली के बहिष्कार का संकल्प लेने का आह्वान किया। राष्ट्रीय एकता पर जोर देते हुए रामदेव ने कहा कि आज पाकिस्तान से लेकर बांग्लादेश और दुनिया के कई हिस्सों में भारत विरोधी ताकतें सक्रिय हैं। ऐसे में पूरे देश को एक परिवार की तरह एकजुट होकर भारत विरोधी और सनातन विरोधी ताकतों को करारा जवाब देना होगा।
इजरायल का उदाहरण दिया
रामदेव ने मजबूत राष्ट्र की जरूरत पर जोर देते हुए इजरायल का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि आज इजरायल मजबूत है, इसलिए दुनिया में कोई भी यहूदियों पर बुरी नजर डालने की हिम्मत नहीं करता। इसके पीछे एक मजबूत राष्ट्र की ताकत खड़ी है। उन्होंने कहा कि अगर भारत मजबूत बनता है तो दुनिया में कोई भी हिंदुओं पर अत्याचार करने का साहस नहीं कर पाएगा। यदि देश को मजबूत नहीं किया गया तो कहीं न कहीं से संकट मंडराते रहेंगे। रामदेव ने देश की सुरक्षा और सम्मान के लिए भारत को हर स्तर पर सशक्त बनाने की जरूरत पर बल दिया।
संत समाज से भी अपील
उन्होंने संत-समाज से भी एकजुटता की अपील करते हुए कहा कि संतों, महंतों और शंकराचार्यों के बीच किसी तरह का मतभेद नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जाति, वर्ग, समुदाय, भाषा या प्रांत के नाम पर किसी भी तरह का टकराव देश को कमजोर करता है।



