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भारत में AI कंटेंट के लिए नए नियम: जानें क्या हैं बदलाव…

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केंद्र सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से निर्मित कंटेंट के लिए नए नियम लागू किए हैं। ये नियम आज से प्रभावी हो गए हैं। यदि आप सोशल मीडिया या अन्य प्लेटफार्मों पर AI द्वारा बनाए गए कंटेंट को साझा करते हैं, तो आपको गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।

यह जानकारी आईटी मंत्रालय द्वारा 10 जनवरी को साझा की गई थी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि लोग इन दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करते हैं, तो इसके क्या परिणाम हो सकते हैं। आइए, इन नए नियमों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

डीपफेक के लिए नए दिशा-निर्देश

AI इम्पैक्ट समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डीपफेक और फर्जी कंटेंट के खतरों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि यह समाज के लिए कितना बड़ा खतरा बन सकता है। पीएम मोदी ने कंटेंट पर वॉटरमार्किंग और अधिक पारदर्शी स्रोत मानकों पर जोर दिया, साथ ही बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

उन्होंने उन कंटेंट पर भी चर्चा की जो सिंथेटिक तरीके से बनाए जाते हैं। नए नियमों के अनुसार, AI या कंप्यूटर द्वारा बनाए गए कंटेंट को SGI (सिंथेटिकली जेनरेटेड AI कंटेंट) कहा जाएगा। इस प्रकार के कंटेंट को सोशल मीडिया पर साझा करने से पहले लेबल या वॉटरमार्क करना अनिवार्य होगा, ताकि उपयोगकर्ताओं को यह पता चल सके कि यह AI द्वारा निर्मित है।

IT नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव

AI कंटेंट पर लेबलिंग अनिवार्य है। यदि आप AI द्वारा निर्मित कंटेंट साझा करते हैं, तो उस पर लेबल लगाना आवश्यक होगा। एक बार लेबल लगाने के बाद, इसे हटाया नहीं जा सकेगा।

सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसे टूल्स विकसित करने होंगे, जो यह सुनिश्चित करें कि कंटेंट AI द्वारा निर्मित है या नहीं। बिना सत्यापन के ऐसा कंटेंट अपलोड नहीं किया जा सकेगा।

हर तीन महीने में, प्लेटफार्मों को उपयोगकर्ताओं को चेतावनी देनी होगी कि AI का गलत उपयोग करने पर उन पर जुर्माना या सजा हो सकती है।

नए IT नियमों के तहत प्रतिबंधित कंटेंट

चाइल्ड पोर्नोग्राफी

फर्जी दस्तावेज

इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड

हथियारों या गोला-बारूद से संबंधित सामग्री

डीपफेक इमेज या वीडियो

सोशल मीडिया प्लेटफार्मों की जिम्मेदारी बढ़ी है

नियमों का उल्लंघन करने पर परिणाम

यदि ये नियम नहीं माने जाते हैं, तो कानूनी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। SGI या AI कंटेंट के नियमों का उल्लंघन करने पर भारतीय दंड संहिता, भारतीय नागरिकता संरक्षण अधिनियम, या POCSO अधिनियम के तहत मामला चलाया जा सकता है। इसके अलावा, सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई प्लेटफॉर्म SGI तक पहुंच को ब्लॉक करने के लिए स्वचालित टूल्स का उपयोग करता है, तो इसे IT अधिनियम के सेक्शन 79 का उल्लंघन नहीं माना जाएगा।