Air India fuel surcharge Hike: एयर इंडिया ने घरेलू (Domestic) और अंतरराष्ट्रीय (international) उड़ानों पर फ्यूल चार्ज बढ़ाने का ऐलान किया है। जिसके चलते हवाई किराया अब महंगा होगा।
वैश्विक जेट फ्यूल की कीमतों में तीव्र बढ़ोतरी और अमेरिका-ईरान युद्ध को इसकी वजह बताया गया है।
एयर इंडिया का ये फैसला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) कैंपबेल विल्सन के इस्तीफे के बाद आया है। कैंपबेल विल्सन को पांच साल के कान्ट्रेक्ट पर नियुक्त किया गया था। एयर इंडिया के सीईओ के रूप में उनका कार्यकाल जुलाई 2027 में समाप्त होने वाला था लेकिन इससे पहले ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया है।
कब से बढ़ेगा एयर टिकट का किराया?
टाटा समूह की इस एयरलाइन ने बताया कि नई अधिभार संरचना घरेलू मार्गों पर 8 अप्रैल से और अंतरराष्ट्रीय क्षेत्रों के लिए 10 अप्रैल से लागू होगी।
Air India का कितना बढ़ जाएगा किराया?
डोमेस्टिक फ्लाइट के लिए, एयर इंडिया ने दूरी के आधार पर फ्यूलच चार्ज मॉडल लागू किया है। इसके तहत, 0-500 किमी पर ₹299, 501-1000 किमी पर ₹399, 1001-1500 किमी पर ₹549, 1501-2000 किमी पर ₹749 और 2000 किमी से अधिक पर ₹899 का शुल्क होगा। घरेलू ATF पर 25% की सरकारी सीमा के बावजूद, यह वृद्धि अधिकांश टिकट की कीमतें बढ़ाएगी।
इंटरनेशनल फ्लाइट के किराए में कितनी होगी बढ़ोत्तरी?
इंटरनेशनल रूट पर इसका प्रभाव अधिक होगा, क्योंकि वहां कोई रेट लिमिट नहीं है। एयर इंडिया ने क्षेत्र के आधार पर काफी अधिक अधिभार निर्धारित किए हैं, सार्क गंतव्यों के लिए $24 से लेकर उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे लंबी दूरी के मार्गों के लिए $280 तक। एयरलाइन बढ़ी हुई ईंधन लागत का एक हिस्सा स्वयं वहन कर रही है, ताकि किराया और अधिक न बढ़े।
कितना महंगा हो गया है जेट फ्यूल?
इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के अनुसार, वैश्विक जेट ईंधन की कीमतें मार्च के अंत तक $195.19 प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जो कुछ हफ़्ते पहले के $99 से लगभग दोगुनी हैं। रिफाइनिंग मार्जिन, या “क्रैक स्प्रेड,” भी कम समय में तीन गुना हुए हैं, जिससे विमानन कंपनियों पर लागत का बोझ बढ़ गया है।
Indigo पहले ही बढ़ा चुका है टिकट के दाम
बता दें पिछले सप्ताह इंडिगो ने फ्यूल चार्ज में बढ़ाेत्तरी करने का ऐलान किया था, जिसके चलते फ्लाइट टिकट महंगा हो गया है। इससे साफ है कि फ्यूल की बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा यात्रियों पर डालने को एयरलाइंस मजबूर हैं, क्योंकि ईंधन परिचालन खर्चों का लगभग 40% होता है। याद रहे ईरान युद्ध के बाद कच्चे तेल और ATF की कीमतें बढ़ाई हैं।



