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चाबहार भारत और ईरान की दोस्ती का गोल्डन ब्रिज: ईरानी दूतावास

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भारत और ईरान के बीच मजबूत संबंध युद्ध के बीच भी खराब नहीं हुए हैं. भारत में ईरानी दूतावास ने गुरुवार को चाबहार पोर्ट की तस्वीरें साझा कीं और इसे ईरान-भारत दोस्ती का गोल्डन ब्रिज कहा.

यह संदेश ऐसे समय में आया है जब ईरान के साथ अमेरिका-इजराइल युद्ध में युद्ध विराम के बाद तेहरान और वाशिंगटन के बीच बातचीत चल रही है.

एक्स पर एक पोस्ट में ईरान एंबेसी ने चाबहार पोर्ट की तस्वीरें शेयर कर इस पोर्ट को ‘ईरान-भारत मित्रता का स्वर्णिम पुल’ कहा. पोस्ट में बंदरगाह की भूमिका को सहयोग के प्रतीक के रूप में दिखाया गया है, भले ही भू-राजनीतिक तनाव क्षेत्रीय कूटनीति को आकार देना जारी रखे हुए है. यह आउटरीच अमेरिका और ईरान की ओर से हफ्तों के संघर्ष के बाद दो सप्ताह के अस्थायी युद्ध विराम पर सहमत होने के के बाद आई है, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता के तहत वार्ता जारी रहने की उम्मीद है.

भारत और ईरान के रिश्ते में क्यों गोल्डन ब्रिज है चाबहार?

भारत की चाबहार पोर्ट में भूमिका मुख्य रूप से रणनीतिक, आर्थिक और कनेक्टिविटी आधारित है. यह भारत की एक्ट ईस्ट, कनेक्ट सेंट्रल एशिया और INSTC (International North-South Transport Corridor) नीतियों का खास हिस्सा है. पाकिस्तान को बाईपास करके अफगानिस्तान, मध्य एशिया (तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान आदि), रूस और यूरोप तक पहुंच बनाने के लिए चाबहार भारत के लिए एक गोल्डन गेट की तरह काम करता है.

मई 2024 में भारत और ईरान के बीच 10 साल के लिए एक समझौता हुआ था. इसके तहत इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) को शहीद बहेश्ती टर्मिनल (Shahid Beheshti Terminal) का संचालन, उपकरण लगाने और विकास का अधिकार मिला. भारत इस पोर्ट पर अब 120 मिलियन डॉलर (लगभग 1000 करोड़ रुपये) का निवेश कर चुका है.

कल होगी संघर्ष विराम की वार्ता

पाकिस्तान की भागीदारी से मध्यस्थता किए गए इस संघर्ष विराम का उद्देश्य तनाव कम करना, महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों को फिर से खोलना और व्यापक बातचीत के लिए जगह बनाना है. लेबनान में चल रहे इज़राइली हमलों ने इस नाजुक बना दिया है. शनिवार को इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिकी डेलीगेशन के बीच सीजफायर को लेकर वार्ता होगी.

संघर्ष विराम की बातचीत से पहले चाबहार पर ज़ोर देकर ईरान यह संदेश दे रहा है कि आर्थिक पार्टनरशिप खासकर भारत के साथ, US के साथ बातचीत के दौरान भी जारी रहेगी. यह स्ट्रेटेजिक जगह पर मौजूद पोर्ट भारत की अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया से कनेक्टिविटी के लिए बहुत ज़रूरी है, जबकि यह पाकिस्तान को बायपास करता है, और दोनों देशों ने इसे बार-बार आपसी रिश्तों की नींव बताया है.