लोकसभा में परिसीमन विधेयक, 2026 , संघ राज्यक्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 और संविधान (131वां संशोधन) 2026,विधेयक पर चर्चा के दौरान उत्तर प्रदेश स्थित नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के नेता चंद्रशेखर आजाद ने बड़ा दावा किया है.
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण देने की मांग को दोहराते हुए आजाद ने कहा कि अगर कोटे में कोटा नहीं हुआ तो 33 फीसदी आरक्षण का लाभ नहीं होगा.
सांसद ने कहा कि 33 फीसदी आरक्षण, आधी आबादी के साथ पूर्ण न्याय नहीं करता. अगर 33 फीसदी आरक्षण दे भी दिया तो एससी, एसटी , ओबीसी और मुस्लिम वर्ग की महिलाओं को प्रतिनिधित्व कैसे मिलेगा?
नगीना सांसद ने कहा कि ऐसे में यह हो सकता है कि इस आरक्षण का लाभ सिर्फ उन लोगों तक सीमित रह जाए जो पहले से सामाजिक और राजनीतिक रूप से आगे हैं. कोटे में उप कोटा न होने से दलित, पिछड़े, मुस्लिम वर्गों में महिलाएं हाशिये पर रह जाएंगी.
राज्यसभा में भी बढ़ें सीटें- आजाद
लोकसभा की तरह राज्यसभा की सीटों में वृद्धि होनी चाहिए. वर्तमान में राज्यसभा की सीटें लोकसभा की सीटों के लगभग 45% है. इसलिए लोकसभा सीटों को बढ़ाने के बाद राज्यसभा की सीटें बढ़ाकर 850 का 45% यानी कि लगभग 383 सीटें होनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि राज्यसभा विधानसभा विधान परिषद में भी एससी एसटी की तरह ओबीसी वर्ग के लोगों को जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण दिया जाना चाहिए जहां-जहां भी अब तक लागू नहीं है और पिछड़ी और इतनी पिछड़ी जातियों को भी लोकसभा और विधानसभा में आरक्षण की व्यवस्था हो जैसे एससी एसटी के लोगों को है.
आजाद ने कहा कि हमारा संविधान कहता है कि प्रतिरोध जनसंख्या के आधार पर होना चाहिए. साथ ही संघीय संतुलन को भी बना रहेगा. 1976 और 2001 के परिसीमन को रोकने का निर्णय इसलिए लिया गया था क्योंकि उस समय यह समय थी कि अगर केवल जनसंख्या के आधार पर किया गया तो राज्य जनसंख्या नियंत्रण में सफल जो राज्य जनसंख्या नियंत्रण में सफल रहे नुकसान में चले जाएंगे. सरकार कहती है कि ये प्रक्रिया निष्पक्ष हो गई. लेकिन सवाल उठता है क्या इसके लिए सभी राज्यों का व्यापक परामर्श हुआ?



