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सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई तेज: जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों का आक्रामक अभियान…

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सुरक्षा बलों का अभियान

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों का अभियान तेजी से बढ़ रहा है। अनंतनाग में पुलिसकर्मी की हत्या के मुख्य संदिग्ध लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी मोहम्मद लतीफ भट पर 15 लाख रुपये का इनाम रखा गया है।

इसके साथ ही, आतंकियों के सहयोगियों पर कार्रवाई करते हुए बारामूला और पुलवामा में दो ओवरग्राउंड वर्कर्स को गिरफ्तार किया गया है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन आतंकवादी नेटवर्क को समाप्त करने और उनके सभी सहयोगियों को कानून के दायरे में लाने के लिए प्रतिबद्ध है।

पुलिसकर्मी की हत्या का मामला

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अनंतनाग जिले में 22 जुलाई को हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन की हत्या के आरोपी मोहम्मद लतीफ भट की गिरफ्तारी में मदद करने वाले के लिए 15 लाख रुपये का इनाम घोषित किया है। भट पर आरोप है कि उसने अनंतनाग के लाल चौक में पुलिसकर्मी को नजदीक से गोली मारी थी। इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने सीसीटीवी फुटेज से उसकी तस्वीरें जारी की हैं और लोगों से विश्वसनीय सूचना देने की अपील की है।

आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब घाटी में आतंकवादियों द्वारा नागरिकों और सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की घटनाओं में वृद्धि हो रही है। हाल ही में कुलगाम में आतंकवादियों ने छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों की हत्या कर दी थी, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने आतंकियों और उनके नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई को और तेज कर दिया।

गिरफ्तारी और बरामदगी

सुरक्षा बलों ने बारामूला और पुलवामा में आतंकियों के दो सहयोगियों को गिरफ्तार किया है। बारामूला के शीरी इलाके में पुलिस और सेना की संयुक्त टीम ने वाहन जांच के दौरान ऐजाज अहमद गनाई को पकड़ा, जिसके पास से एक पिस्तौल, 10 कारतूस और एक मोबाइल फोन बरामद हुआ। वहीं, पुलवामा के राजपोरा क्षेत्र में तौसीफ अहमद डार को गिरफ्तार किया गया, जिसके पास से एक हैंड ग्रेनेड और आपत्तिजनक पोस्टर मिले। दोनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

उपराज्यपाल का संदेश

श्रीनगर में आतंकवाद से प्रभावित परिवारों के 37 सदस्यों को नियुक्ति पत्र सौंपते हुए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आतंकवाद के खिलाफ सरकार की दृढ़ता को दोहराया। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल आतंकियों का सफाया करना नहीं है, बल्कि पूरे आतंकी नेटवर्क को समाप्त करना है ताकि जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को शांति और सम्मान मिल सके।

नई दिशा में जम्मू-कश्मीर

मनोज सिन्हा ने कहा कि 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 और 35ए हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में एक नया युग शुरू हुआ है। पहले आतंक समर्थक तंत्र बेखौफ होकर काम करता था, लेकिन अब सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद से प्रभावित परिवारों को दी जा रही नौकरियां उनके खोए हुए प्रियजनों की भरपाई नहीं कर सकतीं, लेकिन यह दर्शाती हैं कि देश उनके साथ खड़ा है।

भविष्य की दिशा

उपराज्यपाल ने यह भी कहा कि नई पीढ़ी को डर और हिंसा से मुक्त भविष्य देना सरकार की प्राथमिकता है। शिक्षा और रोजगार के माध्यम से युवाओं को सशक्त बनाकर आतंकवाद की विचारधारा को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि आतंकवाद के पीड़ित परिवारों को अब न्याय के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

सुरक्षा एजेंसियों की व्यापक रणनीति

पुलिसकर्मी के हत्यारे पर 15 लाख रुपये का इनाम, आतंकियों के सहयोगियों की गिरफ्तारी और प्रशासन का सख्त संदेश यह दर्शाता है कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियां अब केवल आतंकियों का पीछा नहीं कर रही हैं, बल्कि उनके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की व्यापक रणनीति पर काम कर रही हैं। यह बहुस्तरीय अभियान घाटी में शांति और स्थिरता स्थापित करने के लिए सरकार के सबसे बड़े प्रयासों में से एक माना जा रहा है।