प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी (ED) के पणजी जोनल ऑफिस ने ड्रग्स तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पांच और आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की है. यह शिकायत 18 सितंबर को नॉर्थ गोवा की विशेष PMLA अदालत में दाखिल की गई. आरोपियों में निहाल वदक्कनचेरी नाजर, प्रसोभ पीके, अल्फिन थॉमस, धीरज मैथ्यूज और निशांत प्रताप शामिल हैं.
ईडी के मुताबिक, यह कार्रवाई 16 मार्च 2026 को दाखिल मुख्य शिकायत के आगे की जांच के बाद की गई है. मुख्य मामले में पहले सात आरोपियों को आरोपी बनाया गया था.
ई़डी की जांच में करीब 3.96 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित आय का पता चला था. यह रकम अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ड्रग्स और साइकोट्रॉपिक पदार्थों की तस्करी से जुटाई गई थी. जांच में सामने आया कि ड्रग्स से कमाए गए पैसों का कुछ हिस्सा बैंक खातों के जरिए इधर-उधर किया गया और फिर दुबई भेजा गया. वहां इस रकम को क्रिप्टोकरेंसी USDT में बदला गया. इसके बाद डार्क वेब के जरिए ड्रग्स खरीदने में इस पैसे का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है.
एंटी-नारकोटिक्स सेल में दर्ज है FIR
ईडी ने जिस मामले में जांच शुरू की, वह नॉर्थ गोवा के एंटी-नारकोटिक्स सेल में दर्ज FIR पर आधारित है. FIR में मधुपन सुरेश शशिकला के खिलाफ NDPS एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया गया था. ED की जांच के मुताबिक, साल 2016 से ड्रग्स की तस्करी के जरिए करीब 3.96 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित आय जुटाई गई.
ED की जांच में 5 नए आरोपियों की भूमिका आई सामने
ईडी की आगे की जांच में पांच नए आरोपियों की भूमिका भी सामने आई. ED का कहना है कि इन लोगों की भूमिका अपराध से अर्जित रकम जुटाने, ड्रग्स खरीदने, रकम को अलग-अलग स्तर पर घुमाने, छिपाने और उसे दूसरी संपत्तियों या क्रिप्टोकरेंसी में बदलने से जुड़ी थी. इसी मामले की जांच के दौरान ED ने दो अन्य आरोपियों के पास मौजूद अपराध से अर्जित आय का भी पता लगाया. अनाम चरण प्रधान के पास 9.39 लाख रुपये और उत्तम चंद के पास 17.48 लाख रुपये की अपराध से अर्जित आय चिन्हित की गई. इसके बराबर कीमत की उनकी अचल संपत्तियां ED ने 16 सितंबर को अस्थायी रूप से अटैच कर दी हैं.



