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छत्तीसगढ़ : प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा कमेटी की बैठक ‘काउंटिंग को लेकर रणनीति’

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छत्तीसगढ़ में किसकी सरकार बन रही है इसका फैसला कल 3 दिसंबर को काउंटिंग के बाद हो जाएगा. लेकिन एग्जिट पोल में आए रुझान के हिसाब से कांग्रेस छत्तीसगढ़ में सरकार बनाने के लिए कॉन्फिडेंट नज़र आ रही है.

इसके बाद भी पार्टी कोई भी रिस्क न लेते हुए चुनाव के रिजल्ट के बाद सभी प्रत्याशियों को रायपुर आने का बुलावा भेजा गया है. वहीं प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा रायपुर पहुंच चुकी है. कोई कमेटी की बैठक लेकर काउंटिंग को लेकर रणनीति बनाई गई है.

मुख्यमंत्री के चेहरे पर पार्टी नेतृत्व का फैसला अंतिम

दरअसल शुक्रवार को कुमारी सैलजा रायपुर पहुंची है. इसके बाद उन्होंने एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए कई मुद्दों पर बयान दिया है. उन्होंने अगर सरकार बनती है तो मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा इसपर भी अपनी प्रतिक्रिया दी है. एग्जिट पोल से भी अधिक सीटें कांग्रेस को मिलेगी. बहुमत मिलने के बाद मुख्यमंत्री के चेहरे पर पार्टी नेतृत्व का फैसला अंतिम निर्णय होगा. बीजेपी ने कई राज्यों में ऑपरेशन लोटस की रणनीति अपनाई, लेकिन छत्तीसगढ़ में यह सफल नहीं होगा.

मतगणना के बाद कांग्रेस के प्रत्याशियों को रायपुर बुलावा

आपको बता दें कि कल सुबह मतगणना शुरू के साथ कांग्रेस पार्टी के सभी प्रत्याशी अपने अपने विधानसभा क्षेत्र के मतगणना स्थल में रहेंगे. इसके बाद जिस प्रत्याशी की जीत होगी. उसे प्रमाणपत्र लेना है और फिर सीधे रायपुर के लिए रवाना होना है. मिली जानकारी के अनुसार कल रात को अधिकांश प्रत्याशी रायपुर पहुंच जाएंगे. इसके बाद 4 दिसंबर को रायपुर के कांग्रेस भवन में बैठक हो सकती है. इसमें दो खास बातें खास होगी सबसे पहले तो अगर सरकार बनाने के लिए मार्जिन कम होगी तो जीते प्रत्याशियों को सुरक्षित रखने के लिए रणनीति बनाई जाएगी. अगर पूर्ण बहुमत होगी तो विधायक दल की बैठक में दल का नेता चुना जा सकता है.

4 से 8 दिसंबर को विधानसभा जाएंगे जीते हुए प्रत्याशी

इसके अलावा छत्तीसगढ़ विधानसभा में मतगणना के बाद की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है.विधानसभा सचिवालय से बताया गया है कि छठवें विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों को 4 दिसंबर से 8 दिसंबर तक विधानसभा में जरूरी कागजी प्रक्रिया को पूरा करेंगे. इसके लिए विधानसभा में स्वागत कक्ष की व्यवस्था की गई है. नए सदस्यों के औपचारिक स्वागत किया जाएगा और कहा गया है कि निर्वाचन आयोग द्वारा दिए निर्वाचन प्रमाण-पत्र अनिवार्य रूप से अपने साथ लेकर आए.

छत्तीसगढ़ : सुरेश जोशी हत्या काण्ड का मास्टर माइंड मुख्य फरार आरोपी प्रकाश गोलछा गिरफ्तार

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राजनांदगांव : सुरेश जोशी हत्या काण्ड का मास्टर माइंड मुख्य फरार आरोपी प्रकाश गोलछा को थाना कोतवाली पुलिस, सायबर सेल राजनांदगांव एवं रेलवे सुरक्षा बल की संयुक्त टीम द्वारा घेराबंदी कर गोंदिया महाराष्ट्र से किया गया गिरफ्तार। षडयंत्रपूर्वक योजना बनाकर व्यापारी को ब्लैकमेल करने के नियत से नौकर का किया गया था हत्या आरोपी प्रकश गोलछा को हत्या मे सहयोग करने वाले 04 आरोपी को पूर्व में गिरफ्त में है.

आरोपी प्रकाश गोलछा से घटना में प्रयुक्त स्वीफ्ट कार मोबाईल एवं मृतक का मोबाईल जप्त ”आरोपियो द्वारा मृतक को थम्सअप (कोल्ड्रिंग) में जहर मिलाकर पिलाकर किया गया था ” प्रकाश गोल्छा के कार में शव को लाकर आई.पी.एस. स्कूल पार्रीनाला के पास फेका था… सायबर सेल राजनांदगांव, रेलवे सुरक्षा बल एवं कोतवाली राजनांदगांव की टीम द्वारा की गई संयुक्त कार्यवाही।

प्रकरण के मुख्य आरोपी प्रकाश गोलछा जो सुरेश जोशी हत्या काण्ड का मास्टर माइंड है, जो घटना बाद फरार हो गया था। जिसे पकडने सायबर सेल राजनांदगांव व कोतवाली पुलिस तथा रेलवे सुरक्षा बल राजनंदगांव के सयुक्त गठित टीम को गोदिया, नागपुर, महाराष्ट्र एवं दुर्ग, भिलाई, रायपुर की ओर रवाना किया गया था। गठित टीम द्वारा आरोपी प्रकाश गोलछा को मुखबीर की सूचना पर गोदिया (महाराष्ट्र) में घेराबंदी कर हिरासत में लेकर राजनांदगांव लाया गया।

छत्तीसगढ़ : राजनीतिक पार्टियों के लिए जीत का रास्ता ‘आइए जानते हैं नतीजे…

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छत्तीसगढ़ में राजनीतिक पार्टियों के लिए जीत का रास्ता आइए जानते हैं नतीजे…

एग्जिट पोल के मुताबिक बीजेपी को 28 से 32, कांग्रेस को 31 से 35 सीट मिल सकती हैं जबकि अन्य के खाते में शून्य से दो सीटें जा सकती हैं. वहीं, वोट शेयर के लिहाज से बीजेपी, कांग्रेस से पिछड़ती दिख रही है. बीजेपी के खाते में 40 फीसदी और कांग्रेस के खाते में 44 फीसदी वोट जाएंगे जबकि अन्य के खाते में 16 फीसदी वोट जा सकती है.

कांग्रेस को 42 फीसदी और बीजेपी को 44 फीसदी वोट मिल सकता है. सीटों की बात करें तो बीजेपी के खाते में पांच से नौ सीटें जाएंगी, जबकि कांग्रेस भी पांच से नौ सीट जीत सकती है. जबकि अन्य के खाते में शून्य से एक सीट जाएगी और उनका वोट शेयर 14 फीसदी रहने के आसार हैं.

बीजेपी और कांग्रेस दोनों को 43 फीसदी वोट मिलता दिख रहा है जबकि अन्य को 14 फीसदी वोट मिल सकता है. सीट के लिहाज से बात करें तो बीजेपी को तीन से सात, कांग्रेस को पांच से नौ सीटें मिलेंगे जबकि अन्य के खाते में शून्य से एक सीट जा सकती है.

मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में वोटिंग पहले ही हो गई थी. आज तेलंगाना में भी वोटिंग खत्म हो गई है.

छत्तीसगढ़ : छत्तीसगढ़ चुनाव को लेकर आए एग्जिट पोल के नतीजों में कांग्रेस की स्थिति मजबूत नजर आ रही है.

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छत्तीसगढ़ : विधानसभा चुनावों को लेकर जो एग्जिट पोल आए हैं, उन्होंने कांग्रेस को राहत भरी सांस लेने का मौका जरूर दिया है.

एग्जिट पोल्स में मध्य प्रदेश और राजस्थान में जहां कांग्रेस पार्टी को भले ही बहुमत मिलता दिख रहा है, लेकिन दोनों ही राज्यों में बीजेपी की ओर से उसे कड़ी टक्कर भी मिलती हुई दिखाई दे रही है.

छत्तीसगढ़ चुनाव को लेकर आए एग्जिट पोल के नतीजों में कांग्रेस की स्थिति मजबूत नजर आ रही है.

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी को एग्जिट पोल के अनुसार 36 से 53 सीटें मिलते दिख रही है. वहीं बीजेपी को 36 से 48 सीटें मिलने का अनुमान है. 90 सीटों वाले छत्तीसगढ़ में कांग्रेस बहुमत के आंकड़े के ज्यादा करीब नजर आ रही है. बीजेपी की 15 सालों की सत्ता को उखाड़ने वाले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर राज्य की जनता एक बार फिर भरोसा जताते हुए दिख रही है. मालूम हो कि राज्य में भूपेश बघेल को काका कहर संबोधित किया जाता है.

इस मुद्दे को जमकर भुनाएगी कांग्रेस

छत्तीसगढ़ को लेकर आए एग्जिट पोल के जो दावे हैं, उनसे कांग्रेस पार्टी को एक और राहत मिलती दिख रही है. पार्टी को ओबीसी समुदाय का समर्थन मिलते हुए दिखाई दे रहा है. दरअसल कांग्रेस पार्टी ने छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान जाति जनगणना और ओबीसी आरक्षण के मुद्दे को जमकर उठाया था.

पार्टी जातिगत समीकरण को साधते हुए दलित-ओबीसी वोटर्स को अपने पाले में ले विधानसभा और आगामी लोकसभा चुनाव में भुनाने की तैयारी में है. ऐसे में अब जब एग्जिट पोल में जनता का समर्थन मिलता दिख रहा है तो कांग्रेस पार्टी इन मुद्दों को छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों में उठाते हुए आगामी लोकसभा चुनाव में भी भुनाने की कोशिश कर सकती है.

OBC के पोस्टर बॉय बनेंगे बघेल!

कांग्रेस पार्टी की इस कोशिश के लिए ओबीसी के नए पोस्टर बॉय के रूप में भूपेश बघेल अहम भूमिका निभा सकते हैं. ऐसा इसलिए भी है, क्योंकि छत्तीसगढ़ की 42 फीसदी आबादी ओबीसी समुदाय से आती है. 2018 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में 22 विधायक ओबीसी समुदाय के थे. वहीं लोकसभा की 11 सीटों में से पांच ओबीसी सांसदों के पास हैं. यानी आदिवासी समुदाय के अलावा ओबीसी समुदाय का भी छत्तीसगढ़ समेत मध्य भारत में भारी उपस्थिति है. ऐसे में कांग्रेस पार्टी को अगर बीजेपी को टक्कर देनी है तो ओबीसी समुदाय को अपने पाले में खींचना होगा और इसमें पार्टी भूपेश बघेल का सहारा ले सकती है.

बघेल बोले 75 सीटें जीतेगी कांग्रेस

छत्तीसगढ़ को लेकर आए एग्जिट पोल पर जब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से बात की गई तो उन्होंने कॉन्फिडेंट होकर कहा कि कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ में फिर से सरकार बना रही है. बघेल ने कहा चुनावी नतीजे आने दीजिए 57 का आंकड़ा 75 में बदल जाएगा और उनकी सरकार बहुमत के साथ बनेगी. उन्होंने कहा कि उन्हें जनता पर पूरा भरोसा है.

RS 2000 Note: 2000 रुपये के नोट, 97 फीसदी से ज्यादा बैंकों के पास हो चुके रिटर्न…

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दो हजार रुपये के नोट को वापस लेने का ऐलान करने के बाद अब तक सर्कुलेशन का ज्यादातर हिस्सा बैंकों में जमा हो चुका है. रिजर्व बैंक ने लेटेस्ट अपडेट में बताया है कि अब तक सर्कुलेशन के 97 फीसदी से ज्यादा 2000 रुपये के बैंकनोट वापस आ चुके हैं.

सेंट्रल बैंक ने शुक्रवार 1 दिसंबर को बताया कि 19 मई 2023 को 2000 रुपये के जितने नोट सर्कुलेशन में थे, उनमें से 97.26 फीसदी नोट बैंकिंग सिस्टम में वापस आ चुके हैं. इसके साथ ही सेंट्रल बैंक ने बताया कि 2000 रुपये के नोट लीगल टेंडर बने हुए हैं और आगे भी लीगल टेंडर बने रहेंगे.

अब सर्कुलेशन में बचे इतने नोट

रिजर्व बैंक ने 19 मई 2023 को 2000 रुपये के नोटों को वापस लेने का ऐलान किया था. सेंट्रल बैंक के इस फैसले को नोटबंदी से जोड़कर देखा गया और मिनी नोटबंदी के नाम से भी बुलाया गया. 19 मई 2023 के हिसाब से 2000 रुपये के जो नोट सर्कुलेशन में थे, उनकी वैल्यू 3.56 लाख करोड़ रुपये थी. 30 नवंबर 2023 का दिन समाप्त होने के बाद सर्कुलेशन में 2000 रुपये के जितने नोट रह गए हैं, उनकी वैल्यू सिर्फ 9,760 करोड़ रुपये रह गई है.

नोटबंदी के बाद किए गए पेश

रिजर्व बैंक ने नवंबर 2016 में नोटबंदी के बाद 2000 रुपये के नोट को पेश किया था. 19 मई 2023 को वापस लेने के ऐलान से काफी पहले ही रिजर्व बैंक ने इसका मन बना लिया था. रिजर्व बैंक ने 2019 में ही 2000 रुपये के नोटों की छपाई बंद कर दी थी. रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2018 के समय 2000 रुपये के सर्कुलेटेड नोट की कुल वैल्यू 6.73 लाख करोड़ रुपये थी और यही 2000 के नोटों के सर्कुलेशन का उच्च स्तर है.

सितंबर तक का मिला था समय

रिजर्व बैंक की ओर से 2000 रुपये के नोटों के सर्कुलेशन को नियंत्रित करने के प्रयास तभी शुरू हो गए थे. इसी कारण रिजर्व बैंक ने 2000 रुपये के नए नोटों की छपाई 2019 के बाद बंद कर दी थी. अंत में इस साल मई में रिजर्व बैंक ने इन्हें वापस लेने का ऐलान किया. उस समय रिजर्व बैंक ने लोगों को 2000 रुपये के नोट बदलने या बैंक अकाउंट में जमा कराने के लिए 

मायावती : बहुकोणीय होगा लोकसभा चुनाव, सपा की तरह भाजपा सरकार भी कुछ जिलों पर ही खर्च कर रही सरकारी धन!

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बहुजन समाज पार्टी लोकसभा चुनाव 2024 के मद्देनजर यूपी और उत्तराखंड में बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयारियों में जुट गई है. पार्टी सुप्रीमो मायावती ने गुरुवार को राजधानी लखनऊ में दोनों राज्यों के वरिष्ठ पदाधिकारियों और सभी जिलाध्यक्षों के साथ चुनावी रणनीति पर मंथन किया.

इस दौरान उन्होंने आगामी लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने के फैसले को एक बार फिर दोहराया. उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार में भी उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में समग्र विकास के बजाय इनमें से मात्र कुछ गिने चुने जनपदों को ही उसी प्रकार से सरकारी धन के व्यय को लेकर प्राथमिकता दी जा रही है, जिस प्रकार से सपा के शासनकाल में कुछ चुनिंदा जिले ही सरकारी कृपा दृष्टि के पात्र हुआ करते थे.

संकीर्ण राजनीति से जनता पहले ही दु:खी और त्रस्त है. मायावती ने कहा कि इस तरह स्पष्ट है कि भाजपा भी सपा और कांग्रेस की तरह अपने काम के बल पर जनता से वोट मांगने की स्थिति में नहीं है. इसलिए उसे घोर चुनावी स्वार्थ की राजनीति के लिए संकीर्ण, भड़काऊ और विभाजनकारी मुद्दों का सहारा लेने की जरूरत है, जिससे खासकर बहुजन समाज के लोगों को बहुत सावधान रहना है. इनके किसी भी बहकावे में कतई नहीं आना है और ना ही उनके हवा हवाई विकास के छलावे में और ना ही उनके अन्य किसी उन्मादी मुद्दे में संयम खोना है.

रोजगार, शिक्षा स्वास्थ्य को तरस रहे 25 करोड़ लोग

इस मौके पर मायावती ने भाजपा के रोजी, रोजगार, सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास, सुख शांति, समृद्धि आदि के दावे के विपरीत उत्तर प्रदेश के 25 करोड़ लोगों के इसके लिए तरसने की बात कही है. उन्होंने कहा कि लोगों के जीवन में गरीबी छाई हुई है. बेरोजगारी और पिछड़ेपन में इजाफा हुआ है.

साथ ही पलायन बढ़ा है, जो दु:ख भरे जीवन की बात है. उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में लोगों का दुख दर्द घटना की बजाय सरकारी वादों दागों घोषणाओं के विपरीत हालात और बिगड़े हैं तथा लोगों का जीवन त्रस्त हुआ है. बसपा सुप्रीमो ने कहा कि कड़ी मेहनत करके लोकसभा चुनाव में लोगों की अपेक्षा के अनुरूप बेहतर रिजल्ट प्राप्त किया जा सकता है. इसकी बदौलत बसपा सवर्जन हिताय सर्वजन सुखाय के अपने लक्ष्य को हासिल करते हुए सत्ता तक पहुंचने के बाद हर वर्ग का उत्थान सुनिश्चित कर सकेगी.

लोकसभा चुनाव में बहुकोणीय संघर्ष होने का दावा

बसपा की ओर से दावा किया गया है कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और तेलंगाना राज्य में पार्टी ने स्थानीय सरकारों को कड़ी टक्कर दी है. अब पार्टी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड पर फोकस करने में जुट गई है. राजधानी लखनऊ में गुरुवार को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के पदाधिकारियों के साथ बैठक में मायावती ने कहा कि देश और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्य सरकारों की संकीर्ण जातिवादी और जन विरोधी नीतियों कार्य प्रणाली के कारण राजनीतिक हालात तेजी से बदल रहे हैं.

ऐसे में किसी एक पार्टी का वर्चस्व नहीं होकर बहुकोणीय संघर्ष का रास्ता चुनने को लोग आतुर नजर आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे में लोकसभा का अगला आम चुनाव दिलचस्प होगा. इसके संघर्षपूर्ण और व्यापक जनहित एवं देश हित में साबित होने की प्रबल संभावना है, जिसमें बसपा की भी अहम भूमिका होगी.

बसपा की मजबूती से हर वर्ग को मिलेगी राहत

मायावती ने पार्टी पदाधिकारियों से कहा कि ऐसे में समय-समय पर दिए जा रहे हैं जरूरी दिशा निर्देशों पर ईमानदारी और निष्ठापूर्वक मेहनत करके अच्छा रिजल्ट हासिल किया जा सकता है. ऐसा होने पर डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के आत्मसम्मान और स्वाभिमानी मूवमेंट तथा उनके कारवां को केवल यूपी जैसे राज्यों में ही नहीं बल्कि पूरे देश में मजबूती मिलेगी.

इसके साथ ही सभी गरीबों, वंचितों, शोषितों, पीड़ितों में खासकर सदियों से जातिवाद के शिकार दलित, आदिवासी और अन्य पिछड़ा वर्ग के साथ-साथ धार्मिक अल्पसंख्यकों में से विशेषकर मुस्लिम समाज के करोड़ों लोगों को जुल्म ज्यादाती, द्वेषपूर्ण भेदभाव और दूसरे दर्जे के नागरिक की तरह सरकारी व्यवहार से मुक्ति मिल जाएगी.

सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करना मुश्किल नहीं

बसपा सुप्रीमो ने कहा कि इसके लिए विरोधी पार्टियों और उनकी सरकारों के साम, दाम, दंड भेद आदि सभी किस्म के हथकंडों को अपनी बहुजन एकता और एकजुटता तथा सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करने की अपनी चाह को ठोस लोकतांत्रिक मजबूती प्रदान करना जरूरी होगा, जो बहुजन समाज के लिए मुश्किल काम नहीं है, क्योंकि ऐसा उन्होंने खासकर यूपी में कई बार करके देश को दिखाया है.

मायावती ने पार्टी की पिछली बैठक में दिए गए जरूरी दिशा निर्देशों का धरातल पर होने वाले अमल की जिला और मंडलवार समीक्षा रिपोर्ट लेने के बाद उन्हें अमली जामा पहनाने में आने वाली कमियों को दूर करके आगे बढ़ाने के लिए नए दिशा निर्देश दिए.

युवाओं को जोड़ने पर फोकस

पार्टी संगठन और सदस्यता आदि की जिम्मेदारी को लेकर सख्त हिदायत देते हुए बसपा सुप्रीमो ने लोकसभा चुनाव के लिए बेहतर कैडर व्यवस्था के आधार पर युवा मिशनरी लोग भी तैयार करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के बाद अब लोकसभा के लिए फिर से यहां माहौल काफी गरमाने लगा है और नई सरगर्मी भी शुरू हो गई है.

डॉ. अंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर इस बार नोएडा-लखनऊ में कार्यक्रम

उन्होंने आगामी 6 दिसंबर को संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस को पार्टी की परंपरा के अनुसार पूरे देश और और खासकर उत्तर प्रदेश में पूरी मिशनरी भावना के अनुरूप आयोजित करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि इस बार कार्यक्रम में थोड़ा बदलाव किया गया है, जिसके तहत अब पश्चिम यूपी के 6 मंडलों और आगरा, अलीगढ़, बरेली, मुरादाबाद, मेरठ और सहारनपुर मंडल के लोग नोएडा में बसपा सरकार की समय बनाए दिल्ली यूपी सीमा पर निर्मित राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल और ग्रीन गार्डन में पूरी सामूहिकता के साथ डॉक्टर अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे.

वहीं उत्तर प्रदेश के शेष 12 मंडलों में पार्टी के लोग राजधानी लखनऊ में गोमती नदी के तट पर स्थापित डॉ. भीमराव अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल पर अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करेंगे.

Parliament Session: सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र से पहले बुलाई सर्वदलीय बैठक

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सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र से पहले शनिवार को लोकसभा और राज्यसभा में विभिन्न दलों के नेताओं की बैठक बुलाई है. संसद का शीतकालीन सत्र चार दिसंबर से शुरू होगा और इसका 22 दिसंबर तक चलना प्रस्तावित है.

इस दौरान 15 बैठकें होंगी जिनमें कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा की जा सकती है.

इन विषयों पर चर्चा संभव

इनमें ब्रिटिश कालीन तीन अपराध कानूनों – भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और साक्ष्य अधिनियम को बदलने के लिए लाए गए विधेयक भी शामिल हैं. संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी शनिवार को बैठक बुलाएंगे जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल समेत वरिष्ठ नेता भाग ले सकते हैं.

संसद में 37 विधेयक लंबित

इस समय संसद में 37 विधेयक लंबित हैं जिनमें से 12 चर्चा और पारित करने के लिए सूचीबद्ध हैं और सात विधेयक पेश किये जाने, चर्चा और पारित करने के लिए सूचीबद्ध हैं. सरकार ने वर्ष 2023-24 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगों के पहले बैच को भी पेश करने की योजना बनाई है. इसी सत्र में तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ ‘पैसे लेकर सवाल पूछने’ के आरोपों पर आचार समिति की रिपोर्ट लोकसभा में पेश की जाएगी.

मुख्य निर्वाचन आयुक्त से संबंधित एक विधेयक भी लंबित

समिति की उन्हें निष्कासित करने की सिफारिश तभी प्रभाव में आ सकती है, जब सदन रिपोर्ट को स्वीकार करेगा. मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित एक अन्य महत्वपूर्ण विधेयक भी संसद में लंबित है. इसे मॉनसून सत्र में पेश किया गया था, लेकिन सरकार ने विपक्षी सदस्यों और पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्तों के विरोध के बीच संसद के विशेष सत्र में इसे पारित करने पर जोर नहीं दिया था.

कैबिनेट सचिव के समान करने का प्रावधान प्रस्तावित

विधेयक में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों का दर्जा कैबिनेट सचिव के समान करने का प्रावधान प्रस्तावित है. इस समय वे उच्चतम न्यायालय के एक न्यायाधीश का दर्जा रखते हैं. बता दें कि, वर्तमान केंद्र सरकार का यह आखिरी शीतकालीन सत्र है. ऐसे में उम्मीद है कि इस बार कई जरूरी और महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा की जा सकती है.

मोदी सरकार ने 5 साल के लिए बढ़ाई योजना : 2028 तक 81.35 करोड़ लोगों को मिलता रहेगा फ्री राशन…

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केंद्र की मोदी सरकार ने ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ 5 साल के लिए बढ़ा दिया है। 1 जनवरी 2024 से 5 साल तक 81.35 करोड़ लोगों को फ्री राशन मिलेगा।

केंद्र की मोदी सरकार ने ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ यानी पीएमजीकेएवाई को 5 और साल के लिए आगे बढ़ाने का फैसला किया है।

इसके तहत 1 जनवरी 2024 से 5 साल तक 81.35 करोड़ लोगों को फ्री राशन मिलेगा। इस पर केंद्र सरकार 11.80 लाख करोड़ रुपए खर्च करेगी।

कोविड महामारी के दौरान केंद्र सरकार ने गरीबों को राहत देने के लिए इस यो​जना की शुरुआत की थी। इस योजना में लाभार्थियों को चावल, गेहूँ और मोटा अनाज/पोषक अनाज दिया जाता है। यह दुनिया की सबसे बड़ी सामाजिक कल्याण योजनाओं में से एक है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स/ट्विटर पर किए एक पोस्ट में कहा है, “देश के मेरे परिवारजनों में से कोई भी भूखा नहीं सोए, हमारी सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध है। अपनी इसी भावना को ध्यान में रखते हुए हमने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को अगले 5 वर्षों तक बढ़ा दिया है। यानी मेरे गरीब भाई-बहनों के लिए वर्ष 2028 तक मुफ्त राशन की व्यवस्था निरंतर जारी रहेगी। इसका फायदा करीब 81 करोड़ देशवासियों को मिलेगा। मुझे विश्वास है कि हमारा यह प्रयास उनके जीवन को अधिक से अधिक आसान और बेहतर बनाएगा।”

ये फैसला देश की जनसंख्या की बुनियादी भोजन और पोषण जरूरतों को पूरा करने और उनके कल्याण के लिए पीएम मोदी की मजबूत प्रतिबद्धता का सुबूत है। केंद्रीय सूचना-प्रसारण और युवा मामले एवं खेल मंत्री

ने बताया कि बीते 5 साल में लगभग साढ़े 13 करोड़ भारतीय गरीबी रेखा से बाहर आए हैं। जो अपने आप में मोदी सरकार के कार्यक्रम और नीतियों की बहुत बड़ी उपलब्धि है।

उन्होंने कहा, “फैसला किया गया है कि जनवरी 2024 से पीएमजीकेएवाई को अगले पाँच साल के लिए बढ़ा दिया जाएगा। देश में जितने चिन्हित परिवार हैं उनको हर महीने 5 किलो खाद्यान मिलेगा। इस तरह से अंत्योदय के परिवारों को 35 किलो प्रतिमाह खाद्यान मुफ्त में मिलता रहेगा।”

1 जनवरी, 2024 से 5 साल के लिए पीएमजीकेएवाई के तहत मुफ्त दिए जाने वाले चावल, गेहूँ और मोटा अनाज भारत की गरीब आबादी की आर्थिक मुश्किलों में कमी लाएँगे। इस योजना के तहत वन नेशन वन राशन कार्ड (ओएनओआरसी) के जरिए योजना के लाभार्थी देश में किसी भी उचित मूल्य की दुकान से मुफ्त खाद्यान्न ले सकते हैं।

छत्तीसगढ़ : चाचा भूपेश बघेल के खिलाफ भतीजे विजय बघेल पर दांव…

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बीजेपी ने छत्तीसगढ़ में भी चाचा भूपेश बघेल के खिलाफ भतीजे विजय बघेल पर दांव खेला है,

ऐसे में पाटन विधानसभा क्षेत्र की दीवार पर लिखा है, ‘इस बार काका पर भतीजा भारी’. यह नारा पाटन विधानसभा सीट के त्रिकोणीय मुकाबले को बंया कर रहा है, क्योंकि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बीजेपी प्रत्याशी विजय बघेल के रिश्ते में चाचा लगते हैं. ऐसे में देखना है कि पाटन सीट पर बीजेपी द्वारा बिछाई गई सियासी बिसात के बीच चाचा क्या भतीजे के मात दे पाएंगे?

दुर्ग जिले की पाटन विधानसभा सीट छत्तीसगढ़ की सबसे हाई प्रोफाइल सीटों में से एक है, जिस पर सभी की निगाहें लगी हुई है. सीएम भूपेश बघेल के खिलाफ बीजेपी से सांसद विजय बघेल मैदान में है, तो अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी ने भी ताल ठोंक रखी है. इस सीट पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही है, यानि चाचा भूपेश बघेल और भतीजे विजय बघेल के बीच सियासी लड़ाई सिमट गई है, लेकिन अमित जोगी के उतरने से रोचक मुकाबला माना जा रहा है.

पाटन सीट से जीत की हैट्रिक लगाएंगे भूपेश!

पाटन विधानसभा सीट पर पहली बार चाचा बनाम भतीजे के बीच चुनावी मुकाबला नहीं हो रहा है, बल्कि इससे पहले भी किस्मत आजमा चुके हैं. भूपेश बघेल यहां से पांच बार जीत दर्ज कर चुके हैं. पिछले दो बार से विधायक हैं और अब जीत की हैट्रिक लगाने के लिए उतरे हैं. वहीं, दुर्ग के सांसद और बीजेपी उम्मीदवार विजय बघेल 2008 जैसी 2023 में जीत दर्ज करने के लिए उतरे हैं. विजय बघेल 15 साल पहले की तरह ही भूपेश बघेल को सियासी मात देकर विधायक बनने की जुगत में है.

2008 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें पाटन विधानसभा सीट से मैदान में उतारा था और उनका सामना कांग्रेस के प्रत्याशी भूपेश बघेल से हुआ था. इस चुनाव में विजय बघेल ने भूपेश बघेल करारी मात दी थी. इस तरह विजय बघेल पहली बार अपने चाचा भूपेश बघेल को चुनाव हराकर विधानसभा पहुंचे थे. 2013 के चुनाव में बीजेपी ने विजय पर एक बार फिर भरोसा जताया, लेकिन इस बार पाटन सीट पर भूपेश बघेल ने उन्हें हराकर हिसाब बराबर कर लिया.

साल 2018 के चुनाव में बीजेपी ने विजय बघेल की जगह मोतीलाल साहू को उतारा, लेकिन वो जीत नहीं सके. 2018 में कांग्रेस की सत्ता में वापसी हुई तो भूपेश बघेल मुख्यमंत्री बने. वहीं, विजय बघेल 2019 में बीजेपी के टिकट पर दुर्ग लोकसभा सीट से तीन लाख से ज्यादा मतों से जीतकर सांसद बने और अब फिर से चाचा-भतीजे आमने-सामने हैं. लेकिन, अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी के चुनावी मैदान में उतरने से पाटन सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है.

किसको हो सकता है नफा-नुकसान

अमित जोगी ने मरवाही और कोटा जैसी अपनी परंपरागत सीट छोड़कर पाटन से चुनाव मैदान में उतरे हैं, जिसके पीछे सियासी मायने और रणनीति मानी जा रही है. पाटन से अमित जोगी के उतरकर कांग्रेस को घेरने और सीएम बघेल की चुनौती को बढ़ा दिया है. माना जा रहा है कि आदिवासी वोटों के कटने और कांग्रेसी वोट बंटने का सियासी लाभ बीजेपी को तो नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ सकता है. यही वजह है कि कांग्रेस शुरू से ही आरोप लगा रही है कि अमित जोगी और उनकी पार्टी बीजेपी की बी-टीम के रूप में काम कर रही है.

भूपेश बघेल पाटन सीट पर छह बार चुनाव लड़ चुके हैं, जिनमें से पांच बार जीत दर्ज कर चुके हैं. महज एक बार साल 2008 में बीजेपी के विजय बघेल के हाथों भूपेश बघेल हार गए थे. इसी मद्देनजर बीजेपी एक बार फिर से विजय बघेल को भूपेश बघेल के खिलाफ उतारा है ताकि मुख्यमंत्री को उनके घर में ही घेरा जा सके. चाचा-भतीजा दोनों कुर्मी समाज से हैं और कुर्मी ओबीसी वर्ग से आते हैं, जिसकी इस क्षेत्र में बड़ी आबादी है.

पाटन सीट का समीकरण

पाटन विधानसभा सीट पर ओबीसी वोटर्स का दबदबा है, यहां साहू और कुर्मी वोटरों की संख्या सबसे अधिक है. यह दोनों जाति के लोग पाटन सीट पर अहम रोल अदा करते हैं. इस सीट पर सतनामी समाज और सामान्य वर्ग के मतदाता की संख्या कम है. पाटन विधानसभा के कुल मतदाता 2 लाख 10 हजार 840 हैं. यहां के लोग बड़ी संख्या में खेती और किसानी से जुड़े है, जिसके चलते कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही किसानों के मुद्दे पर दांव खेल रहे हैं. ऐसे में देखना है कि काका भूपेश बघेल क्या फिर से भतीजे विजय बघेल को मात देते हैं या फिर भतीजा 2008 की तरह उन्हें शिकस्त देकर जीत कर विधायक बनता है.

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