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बंगाल और असम में BJP की जीत पर स्वाति मालीवाल का बड़ा बयान…

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स्वाति मालीवाल ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी ऐतिहासिक जीत की ओर बढ़ रही है. साथ ही असम और पुडुचेरी में भी एनडीए सरकार बनने की बात कही.

स्वाति मालीवाल ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए दावा किया कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी ऐतिहासिक और बड़ी जीत की ओर बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि लंबे समय से चली आ रही हिंसा, गुंडागर्दी और वोट बैंक की राजनीति अब समाप्त होने वाली है और जनता बदलाव चाहती है.

मालीवाल के अनुसार, चुनावी माहौल और रुझान यह संकेत दे रहे हैं कि लोगों का भरोसा बीजेपी की ओर बढ़ा है. उन्होंने यह भी कहा कि यह बदलाव राज्य की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत कर सकता है. जिससे विकास और स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा.

पश्चिम बंगाल में भाजपा ऐतिहासिक और प्रचंड विजय की ओर बढ़ रही है। दशकों से चली आ रही गुंडागर्दी, हिंसा और वोट बैंक की तुष्टिकरण की राजनीति अब समाप्त होने जा रही है।

असम और पुदुच्चेरी में भी भाजपा एवं एनडीए शानदार प्रदर्शन के साथ पुनः सरकार बनाने जा रहा है।

आदरणीय प्रधानमंत्री…

— Swati Maliwal (@SwatiJaiHind) May 4, 2026

असम और पुडुचेरी में BJP और NDA का रहा शानदार प्रदर्शन

स्वाति मालीवाल ने अपने बयान में असम और पुडुचेरी का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इन राज्यों में भी बीजेपी और एनडीए शानदार प्रदर्शन के साथ दोबारा सरकार बनाने जा रहे हैं. उनके अनुसार, चुनावी रुझान यह संकेत दे रहे हैं कि जनता ने बीजेपी के नेतृत्व पर भरोसा जताया है. अपने संदेश में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन सहित पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं को इस सफलता के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं.

कार्यकर्ताओं की मेहनत और समर्पण का परिणाम है जीत

स्वाति मालीवाल ने कहा कि यह जीत बीजेपी कार्यकर्ताओं की मेहनत और समर्पण का परिणाम है. मालीवाल के इस बयान को चुनावी माहौल के बीच बीजेपी के आत्मविश्वास और जीत के दावे के रूप में देखा जा रहा है, जिससे राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं.

बंगाल विधानसभा चुनाव: UP 2027 की राह अब आसान नहीं अखिलेश यादव की सपा को इन 8 मोर्चों पर करना होगा काम…

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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल चुनाव में टीएमसी और ममता बनर्जी की जीत को लेकर आश्वस्त थे. अब बंगाल के रुझानों के बाद चर्चा है कि अखिलेश यादव इससे क्या सीख लेते हैं?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के रुझानों ने सियासी समीकरणों को पूरी तरह बदलकर रख दिया है. जहां भारतीय जनता पार्टी बहुमत के आंकड़े से आगे निकलती दिख रही है. समाचार लिखे जाने तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार बीजेपी 190 सीटों पर आगे थी. वहीं सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस 94 सीटों के आसपास सिमटती नजर आ रही है. इस पूरे चुनाव में अखिलेश यादव की सक्रियता और ममता बनर्जी के पक्ष में उनके दावे अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गए हैं.

ममता बनर्जी की संभावित हार के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इस पूरे घटनाक्रम से अखिलेश यादव को क्या सीख लेनी चाहिए, खासकर तब जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनकी भूमिका निर्णायक मानी जाती है.

अति आत्मविश्वास से बचना होगा

राजनीति में आत्मविश्वास जरूरी है, लेकिन अति आत्मविश्वास अक्सर नुकसानदायक साबित होता है. ममता बनर्जी की जीत को लेकर लगातार दावे करना और ग्राउंड रियलिटी को नजरअंदाज करना एक बड़ी रणनीतिक भूल मानी जा रही है. अखिलेश यादव के लिए यह संकेत है कि उन्हें चुनावी आकलन में अधिक संतुलन और सतर्कता बरतनी होगी. साल 2024 में 37 लोकसभा सीटें जीतने के बाद अखिलेश यादव, उत्साह और आत्मविश्वास से लबरेज हैं लेकिन कई बार उनका आत्मविश्वास, अतिआत्मविश्वास में बदलता दिखता है.

कम अंतर वाली सीटों पर फोकस

चुनाव जीतने का गणित सिर्फ बड़ी लहर पर निर्भर नहीं करता, बल्कि करीबी मुकाबले वाली सीटें ही सत्ता का रास्ता तय करती हैं.  यूपी जैसे बड़े राज्य में अखिलेश यादव को माइक्रो-मैनेजमेंट और बूथ स्तर की रणनीति मजबूत करनी होगी. साल 2022 के चुनाव परिणामों में करीब 49 सीटें ऐसी थीं जिन पर हार जीत का फैसला 5000 से भी कम मतों पर हुआ था. उदाहरण के लिए बहराइच सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा, जहां अनुपमा जायसवाल ने सिर्फ 407 वोट से जीत हासिल की. छिबरामऊ में सपा के अरविंद सिंह यादव ने बीजेपी की अर्चना पांडेय को 1118 वोट से हराया, जबकि इटावा में बीजेपी की सरिता भदौरिया 3981 वोट से जीतीं.

विवादित चेहरों से दूरी

राजनीति में चेहरे बहुत मायने रखते हैं. विवादित नेताओं या बयानों से जुड़ाव पूरे नैरेटिव को प्रभावित कर सकता है. यह सीख साफ है कि पार्टी की छवि को लेकर सजग रहना जरूरी है, खासकर तब जब विपक्ष लगातार मुद्दा बनाने की कोशिश में हो. भारतीय जनता पार्टी, सपा पर यह आरोप लगातार लगाती रही है कि पार्टी के रिश्ते माफियाओं से रहे हैं. अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी जैसे माफियाओं से सपा का रिश्ता रह भी चुका है. बीजेपी लगातार आरोप लगाती रही है कि साल 2017 तक सपा के सरकार में कानून और व्यवस्था नाम की चीज नहीं थी. हालांकि सपा इन दावों को खारिज करती रही है.

कार्यकर्ताओं पर नियंत्रण और ऊर्जा

किसी भी चुनाव की रीढ़ कार्यकर्ता होते हैं. यदि संगठन में अनुशासन की कमी हो या जमीनी कार्यकर्ता असंतुष्ट हों, तो उसका असर सीधे वोटिंग पर पड़ता है. अखिलेश यादव के लिए यह जरूरी है कि वे संगठन को मजबूत करें और कार्यकर्ताओं के बीच स्पष्ट संदेश और दिशा बनाए रखें. इसके लिए भी साल 2022 का उदाहरण ज्यादा सटीक है जब मतदान के बाद कई विधानसभा सीटों और जिलों से यह खबरें आईं कि सपा के कार्यकर्ताओं ने डीएम, एसडीएम और चुनाव अधिकारियों की गाड़ियां चेक की. यह सब तब हो रहा था जब राज्य में 1-2 चरण के मतदान बचे थे. कौशांबी, आजमगढ़, वाराणसी तक में ऐसे मामले सामने आए थे.

अयोध्या और धार्मिक भावनाएं

उत्तर प्रदेश की राजनीति में अयोध्या का सेंटिमेंट बेहद संवेदनशील और प्रभावी है. इस मुद्दे पर किसी भी तरह की चूक राजनीतिक नुकसान का कारण बन सकती है. इसलिए धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए संतुलित राजनीति करना एक महत्वपूर्ण सीख है. साल 2024 में सपा अयोध्या में फैजाबाद लोकसभा निर्वाचन लोकसभा क्षेत्र में जीत गई. पार्टी के प्रत्याशी अवधेश प्रसाद ने बड़ी जीत हासिल की. 2024 के बाद 18वीं लोकसभा के पहले दिन से लेकर बीते विशेष सत्र तक, कई मौकों पर अखिलेश ने बीजेपी को अयोध्या की हार का जिक्र करना नहीं भूले. जून 2024 में ही उस वक्त बड़ा विवाद हुआ जब अखिलेश ने अवधेश प्रसाद को ‘अयोध्या का राजा’ तक कह दिया था.

विकास मॉडल को अपडेट करना होगा

मौके बे मौके, अखिलेश यादव अपनी सरकार के काम को गिनाते रहे हैं. यह जरूरी भी है ताकि सपा को लेकर विपक्ष के नैरेटिव को ध्वस्त किया जा सके. हालांकि एक समय के बाद एक्सप्रेसवे और इंफ्रास्ट्रक्चर का बार-बार जिक्र करना मतदाताओं को अखिलेश के आत्ममुग्ध होने का एहसास करा सकते हैं. अब वोटर्स इससे आगे की अपेक्षा रखते हैं. सिर्फ ‘एक्सप्रेसवे’ की राजनीति अब पर्याप्त नहीं है. हालांकि अखिलेश इस दिशा में कदम भी आगे बढ़ा रहे हैं. हाल के दिनों में उन्होंने यूपी बोर्ड के टॉपर्स को लैपटॉप दिया. वहीं महिलाओं के लिए भी सरकार आने पर एक निश्चित धनराशि देने का ऐलान भी किया है.

सामाजिक समीकरणों का विस्तार

यूपी की राजनीति जातीय समीकरणों पर टिकी रही है, लेकिन बदलते दौर में व्यापक सामाजिक गठजोड़ बनाना जरूरी है. केवल पारंपरिक वोट बैंक पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है. अन्य जातियों और वर्गों को जोड़ने की रणनीति पर गंभीरता से काम करना होगा. सपा चीफ भले ही पीडीए की बात कर रहे हैं और दावा करते रहे हैं कि साल 2024 में यह फॉर्मूला चला लेकिन स्पष्ट तौर पर यह कहीं दिखता नजर नहीं आता कि मुस्लिम और यादव वोट के अलावा अखिलेश और किसी वर्ग को अपने साथ जोड़ पाए हों.

ब्राह्मणों को साधने के लिए अखिलेश ‘हाता नहीं भाता’ जैसे जुमलों का इस्तेमाल तो करते हैं लेकिन उनकी पार्टी के मंच पर इस वर्ग की कमी कहीं न कहीं महसूस की जाती है. उधर, सपा चीफ दलितों की बात भले कर रहे हों लेकिन दलितों के बीच सपा के प्रति विश्वास जगाना अभी भी बाकी है. सपा, कांशीराम, बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की जयंतियां मनाती है लेकिन सिर्फ इतने से दलितों का भरोसा जीतना आसान नहीं है.

Kerala Election Result 2026: केरल में कांग्रेस बहुमत का आंकड़ा पार आइए जानते हैं कि यहां की सियासत में कांग्रेस ने कैसे की वापसी…

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केरल में एक साफ राजनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है. जैसे-जैसे विधानसभा चुनावों की मतगणना के रुझान सामने आ रहे हैं कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. यूडीएफ 94 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है और लेफ्ट का एलडीएफ 42 सीटों पर आगे चल रहा है. कांग्रेस की वापसी के पीछे की मुख्य वजह राजनीतिक समय, रणनीति और मतदाताओं की भावना के पक्ष में आने का मिला-जुला नतीजा है.

सत्ता विरोधी लहर ने एक बड़ी भूमिका निभाई 

केरल के राजनीतिक इतिहास में एक पैटर्न रहा है. दरअसल यहां शायद ही कभी कोई सरकार लगातार तीसरी बार सत्ता में रही हो. पिनाराई विजयन के नेतृत्व में लगातार दो कार्यकाल पूरे होने के बाद मतदाताओं ने बदलाव की मांग की.

बदलाव की यह चाहत एक बड़ी भावना के रूप में उभरी और मतदाताओं का एक बड़ा तबका सक्रिय रूप से एक विकल्प की तलाश में था. इस सत्ता विरोधी लहर ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन के लिए अपनी खोई हुई रफ्तार को फिर से हासिल करने के लिए एक जमीन तैयार की.

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की जमीनी मुहिम 

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की सक्रिय भागीदारी ने चुनाव प्रचार में एक नई ऊर्जा भर दी. वायनाड से सांसद होने के नाते राज्य के साथ राहुल गांधी के जुड़ाव ने पार्टी की स्थानीय अपील को और भी मजबूत किया. दूसरी तरफ प्रियंका गांधी ने भ्रष्टाचार और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सरकार पर अपने हमले तेज कर दिए. उनका संदेश खास तौर से युवाओं और महिला मतदाताओं के बीच गूंजा. इससे कांग्रेस को अपनी पहुंच को बढ़ाने में मदद मिली.

संगठनात्मक रणनीति 

पिछले चुनावों के उलट कांग्रेस ने इस मुकाबले में एक ज्यादा व्यवस्थित योजना के साथ कदम रखा. चुनाव प्रचार समिति, बेहतर तालमेल और एक केंद्रीय घोषणापत्र ने प्रयासों को व्यवस्थित करने में मदद की. जरूरी बात यह है कि उम्मीदवारों के चयन में AICC की सीधी भागीदारी ने आंतरिक गुटबाजी को कम किया. यह एक ऐसी समस्या थी जिसने ऐतिहासिक रूप से केरल में पार्टी को कमजोर किया था.

अल्पसंख्यकों का एकजुट होना 

यूडीएफ के प्रदर्शन के पीछे की मुख्य वजह अल्पसंख्यक समुदाय से मिला मजबूत समर्थन है. इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन ने इस वोट बैंक को एकजुट करने में बड़ी भूमिका निभाई. इसका नतीजा यह रहा कि यूडीएफ के पक्ष में वोटो में अनुमानित रूप से 6% का उछाल देखने को मिला. इससे उसका कुल वोट शेयर बढ़कर लगभग 44% हो गया.

भ्रष्टाचार के आरोप 

सत्ताधारी एलडीएफ को कथित भ्रष्टाचार और शासन से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार आलोचना का सामना करना पड़ा है. इन विवादों और स्थानीय शिकायतों के मेल ने जनता का भरोसा कमजोर कर दिया. कांग्रेस ने इन मुद्दों का सफलतापूर्वक फायदा उठाया.  कांग्रेस ने इन्हें अपने चुनावी अभियानों का मुख्य विषय बनाया और खुद को एक साफ सुथरे विकल्प के तौर पर पेश किया.

‘कांग्रेस की जीत के साथ…’ 5 राज्यों के चुनाव परिणाम पर प्रियंका चतुर्वेदी की पहली प्रतिक्रिया’

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शिवसेना यूबीटी की नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने पांच राज्यों असम, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल और पुद्दुचेरी के चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया दी है.

राज्यसभा की पूर्व सांसद और शिवसेना (उद्धव बाला साहेब ठाकरे) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने पश्चिम बंगाल, केरल, तमिनलाडु, असम और पुद्दुचेरी के परिणामों पर प्रतिक्रिया दी है.

चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा न्यूज़ चैनलों पर आए चुनावी नतीजों के मुताबिक: न सिर्फ़ वामपंथी उग्रवाद, बल्कि एक राज्य यानी केरल पर वामपंथी पार्टी की पकड़ भी कांग्रेस की बड़ी जीत के साथ खत्म हो गई है.

तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल पर क्या बोलीं प्रियंका?

उन्होंने लिखा कि तमिलनाडु में एक नई पार्टी-TVK-के साथ एक नया अध्याय शुरू हुआ है, जो विजेता बनकर उभरी है. विजय के लिए यह कितनी शानदार जीत है!

शिवसेना यूबीटी की नेता ने लिखा कि पश्चिम बंगाल में BJP को एक बिल्कुल नई सरकार मिली है. यह राज्य की राजनीति में एक ज़बरदस्त बदलाव है. BJP ने असम और पुडुचेरी (अपने सहयोगियों के साथ) पर अपनी पकड़ बनाए रखी है, और सत्ता-विरोधी लहर को मात दी है.

रुझानों में क्या है बंगाल, तमिलनाडु, पुद्दुचेरी, केरल और असम की स्थिति?

बता दें समाचार लिखे जाने तक उपलब्ध रुझानों के अनुसार बंगाल में बीजेपी 193, टीएमसी 94 सीटों पर आगे थी. वहीं असम में बीजेपी गठबंधन 97, कांग्रेस अलायंस 25 सीटों पर आगे है. दूसरी ओर केरल में लेफ्ट अलायंस 38, कांग्रेस गठबंधन 100 पर आगे चल रही है. इसके साथ ही तमिलनाडु में डीएमके 52,एआईएडीएमके 62 और टीवीके 110 सीटों पर आगे है. पुद्दुचेरी में बीजेपी अलायंस 22, कांग्रेस 6 और अन्य पर 1 आगे है.

किसान निधि योजना की 23वीं किस्त से पहले ये काम जरूर कर लें किसान, नहीं तो खाते में नहीं आएंगे पैसे”

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प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ पाने के लिए ई केवाईसी करना जरूरी कर दिया गया है. बिना ई केवाईसी के किसी भी किसान को योजना का पैसा नहीं मिलेगा.

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 23वीं किस्त को लेकर देशभर के किसानों में इंतजार बढ़ता जा रहा है. देश के हजारों किसान अगली किस्त का इंतजार कर रहे हैं. हालांकि, पिछली किस्त जारी होने के बाद अब अगली किस्त का लाभ लेने के लिए जरूरी है कि किसान समय रहते अपनी सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कर लें.

दरअसल, छोटी-छोटी गलतियों और अधूरी जानकारी के कारण बड़ी संख्या में किसानों की पिछली किस्त भी अटक चुकी है. किसानों को इस बार छोटी-छोटी गलतियां न करने की सलाह दी गई है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि किसान निधि की 23वीं किस्त से पहले किसानों को कौन सा काम कर लेना चाहिए नहीं तो खाते में पैसे नहीं आएंगे.

छोटी गलतियां बन रही बड़ी वजह

इस योजना में रजिस्ट्रेशन के दौरान कई बार आधार नंबर, बैंक खाता या दूसरी जरूरी जानकारी गलत भर दी जाती है या अधूरी रह जाती है. इसी के कारण किस्त का पैसा किसानों के खाते में ट्रांसफर नहीं हो पाता है. इसके अलावा आधार और बैंक खाते का लिंक न होना, ई केवाईसी अधूरी रहना और जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड न करना भी पेमेंट रुकने की बड़ी वजह बन रहे हैं. ऐसे मामलों में अब किसानों को किसी एजेंट या भारी मदद की जरूरत नहीं है. किसान योजना की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर जानकारी अपडेट कर सकते हैं. वेबसाइट पर अपडेट डीटेल्स या संबंधित विकल्प के जरिए आधार बैंक डिटेल और अन्य जानकारी में सुधार किया जा सकता है. साथ ही जरूरी डॉक्यूमेंट भी अपलोड किया जा सकते हैं.

केवाईसी और आधार लिंकिंग भी अनिवार्य

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ पाने के लिए ई केवाईसी करना जरूरी कर दिया गया है. बिना ई केवाईसी के किसी भी किसान को योजना का पैसा नहीं मिलेगा. इसके साथ ही आधार नंबर का बैंक खाते से लिंक होना भी अनिवार्य है, क्योंकि पेमेंट डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए किया जाता है.

जमीन का सत्यापन भी जरूरी

किसानों के लिए भूमि रिकॉर्ड का सही और अपडेट होना भी जरूरी है. इस योजना के अनुसार जिन किसानों का जमीन सत्यापन पूरे नहीं है, उनका नाम लाभार्थी सूची से हट सकता है. इसलिए जमीन से जुड़े डॉक्यूमेंट और जांच समय पर अपडेट करना जरूरी है.

कब सकती है 23वीं किस्त?

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 22वीं किस्त मार्च 2026 में जारी की गई थी. ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि 23वीं किस्त जून के आखिरी या जुलाई 2026 की शुरुआत में जारी हो सकती है. हालांकि सरकार की ओर से अभी इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. वहीं आपको बता दें कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत पात्र किसानों को सालाना 6000 की आर्थिक सहायता दी जाती है. यह राशि तीन बार किस्तों में 2000-2000 रुपये करके सीधे किसानों के बैंक खाते में भेजी जाती है.

Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल चुनाव की मतगणना के बीच टीएमसी नेता सागरिका घोष ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप…

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के बीच चुनाव आयोग की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं. तृणमूल कांग्रेस की नेता सागरिका घोष ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि चुनाव आयोग सभी 293 सीटों के रुझान जारी नहीं कर रहा है, जिससे स्थिति को लेकर भ्रम पैदा हो रहा है.

सागरिका घोष ने कहा, “बंगाल पर एक महत्वपूर्ण सवाल है. चुनाव आयोग (@ECISVEEP) सभी 293 सीटों के ट्रेंड क्यों नहीं जारी कर रहा है? 70 से ज्यादा सीटों के रुझान जानबूझकर नहीं दिखाए जा रहे हैं. कृपया तुरंत सभी सीटों का डेटा जारी किया जाए.” उनके इस बयान के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है. इधर, ताजा रुझानों के अनुसार पश्चिम बंगाल की 293 सीटों में बीजेपी 198 सीटों पर बढ़त बनाती दिख रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस 88 सीटों पर आगे है.

TMC उम्मीदवार का बयान

शुरुआती रुझानों पर मणिकतला सीट से तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार श्रेया पांडे ने कहा, “मुझे पूरा भरोसा है कि मैं जीत रही हूं. इसमें कोई शक नहीं है कि तृणमूल कांग्रेस सरकार बनाएगी. पहले राउंड में अगर मैं 475 वोटों से पीछे भी हूं, तो अभी कुल 20 राउंड बाकी हैं और स्थिति बदल सकती है.”

मतगणना जारी

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे आज घोषित किए जाएंगे. सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू हो गई है. सबसे पहले पोस्टल बैलेट की गिनती की जा रही है, उसके बाद ईवीएम के वोटों की गिनती हो रही है.

बीजेपी ने किया बड़ा दावा

खड़गपुर सीट से बीजेपी उम्मीदवार दिलीप घोष ने कहा कि नतीजे बीजेपी के पक्ष में बेहतर आने वाले हैं . उन्होंने कहा, “पश्चिम बंगाल में पिछले 50 वर्षों में जब भी कोई पार्टी सत्ता में आई है, उसे 200 से ज्यादा सीटें मिली हैं . इस बार भी बीजेपी इस आंकड़े को पार करेगी .”

असम और बंगाल में बीजेपी का जलवा, इन राज्यों में 5-10 सीटें जीतने में निकल गया दम’

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Assembly Elections Result 2026: असम और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन दिखाया. लेकिन दक्षिणी राज्यों में पार्टी को मुश्किलों का सामना करना पड़ा. आइए जानते हैं पूरी जानकारी.

Assembly Elections Result 2026: भारतीय जनता पार्टी 2026 के विधानसभा चुनावों में काफी असमान प्रदर्शन कर रही है. जहां पार्टी असम और पश्चिम बंगाल में हावी दिख रही है वहीं केरल और तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों में उसे कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ रहा है. दक्षिणी राज्यों में पार्टी का 5 से 10 सीटों का आंकड़ा पार करना भी मुश्किल लग रहा है.

बीजेपी का गढ़ और मजबूत हुआ 

पश्चिम बंगाल में भाजपा ने जबरदस्त बढ़त बनाकर सबको चौंका दिया है. 293 सीटों में से पार्टी 148 सीटों के बहुमत के आंकड़े को पार कर गई है और लगभग 199 सीटों पर आगे चल रही है.  ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सत्ताधारी पार्टी टीएमसी 87 सीटों पर है.

इसी बीच असम में 126 सीटों वाली विधानसभा में गठबंधन लगभग 97 सीटों पर आगे चल रहा है. कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन काफी पीछे चल रहा है और उसे सिर्फ लगभग 24 सीटों पर बढ़त मिली है. यह प्रदर्शन पूर्वोत्तर में भाजपा के गढ़ को और मजबूत करता है.

क्या है तमिलनाडु की कहानी? 

तमिलनाडु में कहानी बिल्कुल अलग है. यहां भाजपा अपना प्रभाव जमाने के लिए संघर्ष कर रही है. 234 सीटों वाली विधानसभा में पार्टी को सिर्फ लगभग तीन सीटों पर ही बढ़त मिली है. यहां मुख्य मुकाबला DMK, AIADMK  और TVK के बीच है.

केरल में सीमित लाभ 

केरल में भाजपा ने काफी मामूली प्रगति की है. 140 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा सिर्फ दो सीटों पर आगे चल रही है. राज्य में यूडीएफ और एलडीएफ के बीच जबरदस्त मुकाबला देखने को मिल रहा है. मौजूदा रुझानों में यूडीएफ लगभग 96 और आईटीएफ लगभग 41 सीटों के साथ मैदान में जमे हुए हैं.

उम्मीद की एक किरण 

पुडुचेरी में भाजपा के लिए कुछ राहत की बात है. 30 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा 22 सीटों पर आगे चल रही है और कांग्रेस 6 सीटों पर कायम है.

इन चुनावी रुझानों से एक बात तो साफ पता चलती है कि भाजपा पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में अपना वर्चस्व मजबूत कर रही है. हालांकि दक्षिणी राज्यों में पार्टी को अभी भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. आसान शब्दों में कहें तो जहां कुछ क्षेत्रों में भाजपा की दहाड़ सुनाई दे रही है, वहीं दूसरे क्षेत्रों में वह अभी भी अपनी आवाज खोजने की कोशिश कर रही है.

बंगाल में CM योगी ने जहां किया प्रचार, वहां बीजेपी का स्ट्राइक रेट धुआंधार; TMC का बुरा हाल;

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West Bengal Election Results 2026: पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने हुगली जिले में स्थित प्रसिद्ध बाबा तारकनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन भी किया था.

  • पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी राज्य की कई विधानसभा क्षेत्रों में जनसभाएं और रोड शो किया था. सीएम योगी ने जिन अलग-अलग इलाकों में पहुंचकर पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में प्रचार किया था उन सीटों पर क्या हाल रहा है वह इस खबर में जानें.
  • सीएम योगी आदित्यनाथ ने सोनामुखी, नंदकुमार, कांथी दक्षिण, बाराबनी, रामपुरहाट, बोलपुर, माथाभांगा, धुपगुड़ी, पिंगला, जॉयपुर, गारबेटा, जोरासांको, चकदहा, उदयनारायणपुर, नबद्वीप, कटवा, बागदा, धानेखाली और राजारहाट गोपालपुर विधानसभा क्षेत्रों में जनसभाएं कीं. इसके अलावा, उन्होंने बांकुडा, कल्याणी और दमदम में भव्य रोड शो कर शक्ति प्रदर्शन भी किया, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए.
  • सीएम योगी ने बाबा तारकनाथ मंदिर में भी किया था दर्शन
  • इस चुनाव प्रचार के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने हुगली जिले में स्थित प्रसिद्ध बाबा तारकनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन भी किया. सीएम योगी ने  जिन 22 सीटों पर प्रचार किया था वहां खबर लिखे जाने तक 18 सीटों पर बीजेपी आगे चल रही है, इसके साथ ही 3 सीटों पर टीएमसी और एक सीट पर कांग्रेस बढ़त बनाए हुए हैं.
  • बीजेपी की पूर्व सांसद रीता बहुगुणा जोशी के पति का निधन, SGPGI लखनऊ में ली अंतिम सांस
  • पश्चिम बंगाल की इन 22 सीटों पर सीएम योगी ने किया था चुनाव प्रचार
  • सोनामुखी- बीजेपी (दिबाकर घरामी) आगे
    नंदकुमार- बीजेपी (खानरा निर्मल) आगे
    कांथी दक्षिण- बीजेपी (अरूप कुमार दास) आगे
    बाराबनी- बीजेपी (अरजित रॉय) आगे
    रामपुरहाट- बीजेपी (धुर्वा साहा) आगे
    माथाभांगा- बीजेपी (निसिथ प्रामाणिक) आगे
    धुपगुड़ी- बीजेपी (नरेश रॉय)
    बांकुडा (रोड शो)- बीजेपी (नीलाद्री शेखर दाना) आगे
    पिंगला- बीजेपी (स्वागत मन्ना) आगे
    जॉयपुर- बीजेपी (बिस्वजीत महतो) आगेजोरासांको- बीजेपी (विजय ओझा) आगे
    चकदहा- बीजेपी (बंकिम चंद्र घोष) आगे
    नबद्वीप- बीजेपी (श्रुति शेखर गोस्वामी) आगे
    कटवा- बीजेपी (कृष्णा घोष) आगे
    बागदा- बीजेपी (सोमा ठाकुर) आगे
    कल्याणी (रोड शो)- बीजेपी (अनुपम बिश्वास) आगे
    दमदम (रोड शो)- बीजेपी (अरजित बख्शी) आगे
    राजारहाट गोपालपुर- बीजेपी (तरुण ज्योति तिवारी) आगे
  • इन तीन सीटों पर टीएमसी ने बनाई है बढ़त
  • धानेखाली- TMC (असीमा पात्रा) आगे
    बोलपुर- TMC चंद्रकांत सिन्हा
    गारबेटा- TMC उत्तरा सिंघा (हजरा) आगे
  • इस सीट पर कांग्रेस आगे
  • उदयनारायणपुर- कांग्रेस (असित बाकुली) आगे

Election Result 2026: 4 मई को 5 राज्यों का चुनाव परिणाम, पश्चिम बंगाल में TMC या BJP किसे मिलेगा जनादेश का साथ;

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Bengal Election Result 2026: 4 मई को तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल, असम व पं बंगाल में मतगणना शुरू हो चुकी है. बंगाल के नतीजों पर सबकी नजर है, जहां TMC-BJP में कड़ी टक्कर है. लेकिन जनादेश का साथ किसके साथ?

West Bengal Election Result 2026: पश्चिम बंगाल में हाल ही में विधानसभा चुनाव संपन्न हुए, जिसकी मतगणना आज 4 मई 2026 सोमवार को हो रही है. राज्यभर के 77 मतगणना केंद्रों में सुबह 8 बजे से ही वोटों की काउंटिंग जारी है.

अब तक के आंकड़ों के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी (BJP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच कड़ा मुकाबला है. बता दें कि, पश्चिम बंगल की 294 सीटों में आज 293 सीटों पर ही मतगणना होगी, क्योंकि भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने दक्षिण परगना जिले की पूरी फाल्टा विधानसभा सीट के लिए 21 मई को पुनर्मतदान की घोषणा की है. इस सीट के परिणाम 24 मई को घोषित किए जाएंगे.

4 मई को 5 राज्यों का चुनाव परिणाम (Election Results 2026 LIVE)

सोमवार 4 मई को पश्चिम बंगाल के साथ ही तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और असम राज्यों के चुनाव की मतगणना भी शुरू हो गई है. यानी 4 मई के दिन एक नहीं बल्कि 5 राज्यों के चुनाव परिणामों पर जनता की नजरें टिकी हैं. इसलिए आज के दिन को सामान्य या केवल राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि ज्योतिषीय और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी बेहद खास माना जा रहा है. 5 राज्यों के चुनाव परिणाम आप यहां देख सकते हैं- https://results.eci.gov.in/ इस दिन ग्रहों की स्थिति, धार्मिक संयोग और अंक ज्योतिष के संकेत मिलकर एक ऐसी ऊर्जा का निर्माण कर रहे हैं, जो जनादेश को रोचक और संभावनाओं से भरा बना सकते हैं. हालांकि अंतिम फैसला मतगणना परिणाम आने के बाद ही होगा, लेकिन ज्योतिषीय संकेत इस दिन को सामान्य दिनों से अलग जरूर बना रहे हैं.

ग्रह-नक्षत्रों का संकेत

पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक और देश के जाने-माने प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्य डॉक्टर अनीष व्यास बताते हैं कि, पंचांग (Panchang) की स्थिति के मुताबिक 4 मई के दिन ग्रहों की चाल काफी प्रभावशाली स्थिति में नजर आ रही है. आज के दिन की शुरुआत अनुराधा नक्षत्र से हुई है और इसके बाद ज्येष्ठा नक्षत्र रहेगा. चंद्रमा वृश्चिक राशि में है. आज सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा, जो शुभ परिणाम और शुभ फल का संकेत दे रहा है. यानी जनादेश के साथ से आज उसी सत्ता की सरकार बन सकती है, जिसकी नींव मजबूत होगी.

संघर्ष के बाद परिणाम- शनि का प्रभाव जहां स्थिरता, अनुशासन और कठोर निर्णयों की ओर इशारा करता है, वहीं मंगल की स्थिति ऊर्जा, संघर्ष और आक्रामकता को बढ़ाने वाली मानी जाती है. जब ये दोनों ग्रह एक साथ प्रभाव डालते हैं, तो इसे अक्सर संघर्ष के बाद परिणाम की स्थिति के रूप में देखा जाता है.

चौंकने या उम्मीद से अलग हो सकते हैं परिणाम- सूर्य की स्थिति भी इस दिन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. सूर्य इस समय मंगल की राशि मेष में संचरण कर रहे हैं. सूर्य को सत्ता, नेतृत्व और प्रतिष्ठा का कारक माना जाता है. ऐसे में इस दिन आने वाला जनादेश नेतृत्व से जुड़े बड़े फैसलों और छवि को प्रभावित कर सकता है. ज्योतिषीय दृष्टि से यह भी माना जाता है कि इस तरह की ग्रह स्थिति में परिणाम अक्सर चौंकाने वाले या उम्मीद से अलग भी हो सकते हैं.

क्या कहती है न्यूमेरोलॉजी (Numerology)

अगर अंक ज्योतिष की दृष्टि से देखें तो 4 मई 2026 की तारीख का योग 1 बनता है (4+5+2+0+2+6 = 19 ) 19 (1+9= 10 (1)). अंक 1 का संबंध सूर्य से होता है, जिसे नई शुरुआत, नेतृत्व और आत्मविश्वास का प्रतीक माना जाता है. न्यूमेरोलॉजी के अनुसार, जब मूलांक 1 सक्रिय होता है, तो यह नेतृत्व में बदलाव, नई सोच और नई दिशा की ओर इशारा करता है. ऐसे में चुनाव परिणाम भी किसी नए समीकरण या नई रणनीति को जन्म दे सकता है.

आध्यात्मिक नजरिए से देखें तो चुनाव सिर्फ वोटिंग प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामूहिक ऊर्जा का प्रदर्शन होता है. जनता की सोच, प्राथमिकताएं और अनुभव मिलकर एक ऐसी ऊर्जा (सरकार) बनाते हैं, जो परिणाम के रूप में सामने आती है. बंगाल चुनाव के लिए इस बार ऐसा माना जा रहा है कि जनता का मूड काफी सोच-समझकर निर्णय लेने वाला है. लोगों ने सिर्फ भावनाओं से नहीं, बल्कि अपने अनुभव और भविष्य की उम्मीदों को ध्यान में रखकर वोट किया है. यही कारण है कि परिणाम को लेकर उत्सुकता भी ज्यादा है.

बीजेपी या टीएमसी?

आज के दिन का सबसे बड़ा सवाल यही है कि, बीजेपी या टीएमसी. पश्चिम बंगाल में जनादेश आखिर किसके साथ है. क्या ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) एक बार फिर सत्ता में वापसी कर सकती हैं? ज्योतिषीय संकेतों को देखें तो उनकी वापसी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन यह भी साफ दिख रहा है कि इस बार राह पहले जितनी आसान नहीं होगी. अगर जीत मिलती है, मुकाबला भी कड़ा होगा.

हालांकि, अबतक की काउंटिंग यह साफ इशारा कर रही है कि, सीटों में कुछ गिरावट आ सकती है और सरकार पर दबाव बढ़ सकता है. क्योंकि विपक्ष से लगातार चुनौती मिल रही है. ऐसे में पूरी तरह से सत्ता परिवर्तन आसान नहीं दिखता, लेकिन मुकाबला बेहद करीबी रहने की पूरी संभावना है.

लेकिन कई बार ऐसा होता है कि, शुरुआत के रुझान से अंतिम नतीजों का फैसला नहीं किया जा सकता. काउंटिंग की शुरुआत में जो ट्रेंड सामने आते हैं वो बाद में बदल भी जाते है. इसलिए ऐसे मौको पर ग्रह-नक्षत्रों की चाल भी मायने रखती है, क्योंकि कई बार राजनीति में जीत केवल आंकड़ों से तय नहीं होती, बल्कि समय और परिस्थितियों की दिशा भी अहम भूमिका निभाती है.

4 मई को भी यही देखने वाली बात होगी कि ग्रह-नक्षत्रों का झुकाव किस ओर है, क्योंकि वही अंततः परिणाम तय करेगा. आज पूरे दिन ग्रह-नक्षत्रों की चाल की तरह रुझान भी बदलते रहेंगे और संस्पेंस बना रहेगा, लेकिन जीत उसी की होगी, जिसकी जमीनी पकड़ मजबूत होगी.

सरकार के इस फैसले से चीन की हो गई मौज! हिस्सेदारी के लिए FDI नियमों में दी ढील, समझें कैसे…

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FDI Easing Under FEMA: भारत ने विदेशी निवेश के नियमों में ढील दी है, जिसके तहत जिन विदेशी कंपनियों में चीन की हिस्सेदारी 10 परसेंट या उससे कम है, वे अब सरकारी मंजूरी बिना भारत में निवेश कर सकती हैं.

FDI Norms India: भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने FEMA नियमों में संशोधन को अधिसूचित कर दिया है, जिसके तहत 10 परसेंट तक चीनी हिस्सेदारी वाली विदेशी कंपनियों को अब ‘ऑटोमैटिक रूट’ से निवेश करने की मंजूरी मिल गई है.

यह नया नियम 1 मई, 2026 से प्रभावी हो गया है. यानी कि भारत में जिन वैश्विक कंपनियों में चीन या भारत के साथ थल सीमा साझा करने वाले देश (चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान आदि) की हिस्सेदारी 10 परसेंट या उससे कम है, वे अब बिना किसी सरकारी मंजूरी के भारत में सीधा निवेश कर सकती है.

देश में कोरोना महामारी के दौरान साल 2020 में यह नियम बनाया गया था कि भारत के साथ सीमा साझा करने वाले देशों की कंपनियों या उनके निवेशकों को भारत में निवेश के लिए सरकारी अनुमति अनिवार्य थी. अब नए नियमों के तहत, किसी विदेशी कंपनी में अगर चीनी निवेशकों की हिस्सेदारी 10 परसेंट या उससे ज्यादा है, तो वह कंपनी भारत में ‘ऑटोमैटिक रूट’ ( बिना सरकारी मंजूरी) से सीधे निवेश कर सकेंगे.

पहले क्या था नियम?

पहले भारत के साथ थल सीमा साझा करने वाले देशों की कोई एक कंपनी भी अगर भारत में 1 रुपये का निवेश करना चाहती थी, तो पहले उसे सरकार से लिखित मंजूरी लेनी पड़ती थी. अगर किसी बड़ी अमेरिकी या यूरोपीय कंपनी में चीनी कंपनी की हिस्सेदारी सिर्फ 1 परसेंट भी होती थी, तो भी उस कंपनी को भारत में निवेश के लिए महीनों सरकारी मंजूरी का इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा.

यह छूट सिर्फ चीन या हांगकांग में रजिस्टर्ड कंपनियों के लिए नहीं है, बल्कि उन अमेरिकी या यूरोपीय मल्टीनेशनल कंपनियों के लिए है, जिनमें चीन के निवेशकों का एक छोटा सा हिस्सा है. यानी कि चीन और हांगकांग में रजिस्टर्ड कंपनियों को अभी से सरकारी मंजूरी लेनी होगी.

बदलाव का मकसद

FDI के नियमों में ढील देने का मकसद भारत में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, कैपिटल गुड्स और सोलर सेल जैसे प्रमुख क्षेत्रों में विनिर्माण और निवेश को तेज करना है.