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‘देश के मजदूरों एक हो जाओ, वरना अधिकार छिन जाएंगे’, राहुल गांधी

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Rahul Gandhi MGNREGA: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को केंद्र की मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि सरकार जिस तरह से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, वह बिल्कुल वैसा ही है जैसा पहले तीन काले कृषि कानूनों के साथ किया गया था.

राहुल गांधी ने यह बयान रचनात्मक कांग्रेस द्वारा आयोजित राष्ट्रीय मनरेगा मजदूर सम्मेलन को संबोधित करते हुए दिया. उन्होंने गरीबों और मजदूरों से अपील की कि वे एकजुट होकर सरकार की इस कथित साजिश का विरोध करें और अपने अधिकारों की रक्षा करें.

मनरेगा गरीबों का अधिकार है, योजना नहीं

राहुल गांधी ने कहा कि मनरेगा को किसी योजना की तरह नहीं, बल्कि गरीबों के अधिकार के रूप में तैयार किया गया था. उन्होंने कहा, “मनरेगा का मकसद था कि जिसे काम चाहिए, उसे काम मिले. यह योजना पंचायत स्तर से चलाई जाए और हर गरीब को काम का अधिकार मिले. लेकिन मोदी सरकार इस अधिकार को खत्म करना चाहती है.” राहुल ने आरोप लगाया कि बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी “अधिकार” शब्द से ही परेशान हैं और गरीबों को आत्मनिर्भर बनाने की बजाय उन्हें आश्रित बनाना चाहते हैं.

तीन कृषि कानूनों की याद दिलाई

राहुल गांधी ने किसानों के आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ साल पहले सरकार ने तीन काले कृषि कानून लागू किए थे, लेकिन किसानों की एकता के आगे सरकार को झुकना पड़ा.<br> उन्होंने कहा, “जब किसान एकजुट हुए और दबाव बनाया, तब सरकार को कानून वापस लेने पड़े. आज वही खेल मजदूरों के साथ खेला जा रहा है.”

नए कानून से ठेकेदार-ब्यूरोक्रेसी को फायदा?

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित Viksit Bharat – Guarantee for Rozgar Ajeevika Mission (Gramin) यानी VB-G RAM G Act के तहत काम और फंड का फैसला अब केंद्र सरकार करेगी. उन्होंने दावा किया कि इससे बीजेपी शासित राज्यों को प्राथमिकता मिलेगी और मजदूरों तक पहुंचने वाला पैसा ठेकेदारों और अफसरशाही की जेब में चला जाएगा.

‘अडानी-अंबानी मॉडल ऑफ इंडिया’ का आरोप

राहुल गांधी ने कहा कि बीजेपी ऐसा भारत चाहती है जहां संपत्ति कुछ चुनिंदा लोगों के हाथ में हो. “वे चाहते हैं कि गरीब अडानी-अंबानी पर निर्भर रहें. यह उनका भारत का मॉडल है, जहां राजा तय करता है कि क्या होगा.”

मजदूरों की मिट्टी, संघर्ष का प्रतीक

देशभर से आए मनरेगा मजदूर अपने-अपने कार्यस्थलों की मुट्ठी भर मिट्टी साथ लाए. इस मिट्टी को पौधों में डाला गया, जो मनरेगा से जुड़े श्रम, संघर्ष और अधिकारों का प्रतीक बना. इस मौके पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी मौजूद थे.

45 दिन का ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’

कांग्रेस ने 10 जनवरी से 45 दिन का देशव्यापी ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ शुरू किया है. पार्टी की मांग है कि VB-G RAM G एक्ट वापस लिया जाए. मनरेगा को उसके मूल अधिकार-आधारित स्वरूप में बहाल किया जाए. पंचायतों की भूमिका फिर से मजबूत की जाए.

NCP-शिवसेना के बीच फंसी BJP, क्या अजित पवार की पार्टी का हो गया गेम ओव ..

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महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों के बीच महायुति भी अपने पॉलिटिकल बैकग्राउंड को मजबूत बनाने की सोच रही है. ये चुनाव इस महीने के आखिर में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों के साथ समाप्त होंगे.

ऐसे में भाजपा में यह सवाल उठ रहा है कि निगम चुनावों में अजीत पवार की NCP के खराब प्रदर्शन को देखते हुए क्या सत्तारूढ़ गठबंधन को उसकी बिल्कुल भी जरूरत है. बता दें कि भाजपा को BMC में सत्ता संभालने के लिए एकनाथ शिंदे की शिवसेना की जरूरत है, पार्टी के कुछ लोगों का मानना है कि उसके प्रयासों का ध्यान ग्राउंड लेवल पर विस्तार करने और लगभग 26 प्रतिशत वोट शेयर के अलावा 10-15 प्रतिशत अधिक वोट हासिल करने पर होना चाहिए.

NCP के साथ गठबंधन बनाएगी भाजपा?

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक सूत्रों का कहना है कि आगामी चुनावों में भाजपा NCP के साथ कोई प्री पोल पैक्ट नहीं करने वाली है. शिवसेना के साथ गठबंधन जारी रखना है या नहीं, यह फैसला अगले 3.5 सालों में दोनों पक्षों के संबंधों पर निर्भर करेगा. पार्टी के एक सीनियर लीडर ने कहा कि उनका आखिरी टारगेट 51 प्रतिशत वोट शेयर के जितना करीब हो सके उतना हासिल करना है, हालांकि पार्टी का एक सेक्शन NCP से हटकर अपनी अपने संगठन को फैलाने पर ध्यान देने के लिए तैयार है. वहीं सेंट्रल बीजेपी NCP और शरद पवार की NCP के एकीकरण के बाद भी राजनीतिक संबंध खुले रखना चाहती है. स्टेट बीजेपी का एक बड़ा सेक्शन महाराष्ट्र के फ्रैक्चर्ड पॉलिटिकल लैंडस्केप की जटिलता का हवाला देते हुए इस बात से सहमत है.

शिवसेना-NCP के बीच फंसी भाजपा

‘भाजपा के एक नेता ने कहा,’ गठबंधन की राजनीति से इनकार नहीं किया जा सकता. और अगर शरद पवार की NCP अजीत पवार की NCP के साथ सुलह के बाद भाजपा के साथ संबंध सुधार लेती है तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए. शरद पवार की पार्टी के 8 लोकसभा सांसद हैं. अगर हम उनका समर्थन हासिल कर सकते हैं तो शिंदे पर भाजपा की निर्भरता कम हो जाएगी.’ वहीं एक अन्य नेता ने कहा कि पार्टी विचारधारा के तौर पर NCP के मुकाबले शिवसेना के साथ ज्यादा एकजुट है, हालांकि सरकार के सत्ता में आने और शिंदे को पद से इस्तीफा देकर उपमुख्यमंत्री बनने के लिए मजबूर किए जाने के बाद से दोनों पार्टियों के बीच अक्सर टकराव होते रहे हैं. स्थानीय चुनावों के नजदीक आने के साथ ही तनाव और बढ़ गया और भाजपा ने इसे ही पार्टी के अधिक स्वतंत्र होने के प्रयास का कारण बताया. एक अन्य नेता ने कहा,’ चूंकि शिवसेना वैचारिक रूप से भाजपा के हिंदुत्व के साथ जुड़ी हुई है, इसलिए हमें उनसे कोई समस्या नहीं दिखती, लेकिन बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि अगले चुनाव मल्टीडाइमेंशनल होंगे या महायुति बनाम महा विकास अघाड़ी के आधार पर होंगे.’

NCP-भाजपा के बीच बयानबाजी

NCP भी फिलहाल किसी बड़े बदलाव को लेकर चिंता में नहीं है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे का कहना है कि उनकी पार्टी NCP (SP) के साथ गठबंधन की बातचीत कर सकती है, लेकिन वह राज्य और केंद्र में NDA का हिस्सा रहेगी. नगर निगम चुनावों से पहले NCP-भाजपा के बीच हुई तीखी बयानबाजी को लेकर तटकरे ने कहा,’ यह मुद्दा अब खत्म हो चुका है. चुनाव के दौरान कभी-कभी ऐसी बातें हो जाती हैं. हम भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति का हिस्सा हैं और रहेंगे.’

Republic Day Parade: समंदर का सीना फाड़कर निकलेगी भारत की हाइपरसॉनिक मिसाइल…

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Republic Day Parade: 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस के मौके पर भारत दुनिया को अपनी स्वदेशी रक्षा क्षमता की ताकत दिखाने जा रहा है. इसको लेकर डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइज़ेशन (DRDO) ने तैयारी पूरी कर ली है.

गणतंत्र दिवस के मौके पर DRDO की ओर से लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल (LRAShM) को पहली बार कर्तव्य पक्ष पर होने वाली परेड में प्रदर्शित किया जाएगा. इस बात की जानकारी रक्षा मंत्रालय की ओर से दी गई है.

दरअसल, रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि DRDO 77वें गणतंत्र दिवस परेड के दौरान कर्तव्य पथ और भारत पर्व 2026 में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अपने कुछ अग्रणी नवाचारों का प्रदर्शन करेगा. Naval Technologies for Combat Submarines थीम वाली डीआरडीओ की झांकी में इन हथियारों को देखने को मौका मिलेगा.

नौसेना के लिए विशेष तौर पर बनाई जा रही ये मिसाइल

लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसॉनिक ग्लाइड मिसाइल विशेष रूप से भारतीय नौसेना के लिए बनाई जा रही है. यह मिसाइल हिंद महासागर में भारत की ओर से समुद्री हमले की क्षमता को मजबूत करेगी. हाल में ही DRDO के मिसाइल डायरेक्टर जनरल राजा बाबू और प्रोजेक्ट डायरेक्टर ए प्रसाद गौड़ की ओर से इस मिसाइल के बारे में जानकारी दी गई थी. उन्होंने बताया कि यह एक हाइपरसॉनिक मिसाइल है. इसको दुश्मन के रडार नहीं पकड़ पाते हैं.

जानिए क्या है इसकी खासियत?

डीआरडीओ की ओर से विकसित की जा रही इस मिसाइल की रेंज लगभग 1500 किलोमीटर है. बताया जाता है कि इसकी गति हाइपरसॉनिक (मैक 8-10 तक) हो सकती है. यह मिसाइल दुश्मन के जहाजों को 15 मिनट से भी कम समय में नष्ट करने की क्षमता रखती है. हाइपरसॉनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) रॉकेट से ऊपर जाती है, इसके बाद यह ग्लाइड करके अनियमित रास्ते के सहारे अपने लक्ष्य तक पहुंचती है. बताया जाता है कि इसको रोकना काफी मुश्किल होता है. ये मिसाइल DRDO के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम मिसाइल कॉम्प्लेक्स हैदराबाद में बनाई जा रही है.

कितनी जरूरी है ये मिसाइल?

गौरतलब है कि यह हाइपरसॉनिक मिसाइल दुश्मन के रडार से बचते हुए हमला करती है. वहीं, इसकी स्पीड काफी होने के कारण दुश्मन को प्रतिक्रिया देने के लिए काफी कम समय मिलता है. माना जा रहा है कि ये मिसाइल भारत को हिंद महासागर में रक्षा के क्षेत्र में और मजबूत करेगी. डीआरडीओ ने लक्ष्य बनाया हा कि आने वाले समय में इसकी रेंज को 3000-3500 KM तक बढ़ाई जाए. गौरतलब है कि भारत पर्व और गणतंत्र दिवस के मौके पर DRDO अपनी झांकी दिखाएगा. इसका थीम कॉम्बैट सबमरीन के लिए नेवल टेक्नोलॉजी होगा. इस प्रदर्शनी में इंटीग्रेटेड कॉम्बैट सूट (ICS), वायर गाइडेड हेवी वेट टॉरपीडो (WGHWT), और एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) शामिल हैं.

पहाड़ों से मैदान तक मचेगा कोहराम, 9 राज्यों में गिरेगा…

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जनवरी का महीना अप समाप्त होने की ओर बढ़ रहा है. इसके साथ ही उत्तर भारत में अब सर्दी का सितम भी कम होने लगा है. हालांकि, इस बीच मौसम विभाग ने एक नया अलर्ट जारी कर लोगों की टेंशन बढ़ा दी है.

भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिन पहाड़ी राज्यों के लिए भारी रहने वाले हैं. वहीं, मैदानी इलाकों में भी बारिश और तूफान का दौर देखने को मिल सकता है. आइए आपको आईएमडी का नया अपडेट बताते हैं…

पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी की चेतावनी

भारत मौसम विज्ञान विभाग ने बताया कि 23 जनवरी से एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी का दौर देखने को मिल सकता है. पिछले कुछ दिनों में बर्फबारी कम हुई है, जिससे ठंड में भी कमी महसूस हुई है. विभाग के अनुसार, 23 जनवरी से हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश, आंधी और हिमपात की चेतावन जारी की गई है. मौसम विभाग ने बताया कि 23 और 24 जनवरी को बारिश तथा बर्फबारी होने की संभावना है. विभाग का कहना है कि चंबा, किन्नौर, कुल्लू सहित कई ऊंचे स्थानों पर बर्फबारी की संभावना है. वहीं, मंडी और अन्य मध्य पहाड़ी इलाकों में बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है.

इन राज्यों में बारिश की चेतावनी

उत्तर भारत से भले सर्दी की रवानगी शुरू हो गई हो, लेकिन आने वाले कुछ दिन काफी भारी रहने वाले हैं. आईएमडी ने बताया है कि देश के 9 राज्यों में अगले 24 घंटों में तूफान और बारिश की संभावना है. विभाग ने बताया कि यूपी, राजस्थान, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख और कश्मीर में बारिश और तूफान की प्रबल संभावना है. वहीं, इस दौरान 40 से 65 किलोमीटर की रफ्तार से हवाएं चलने की भी संभावना है.

जानिए दिल्ली में कैसा रहेगा मौसम

भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अगले 24 घंटें में बारिश की संभावना है. विभाग का कहना है इस दौरान तेज हवा चलने की भी संभावना है. वहीं, दिल्ली के कुछ हिस्सों में 23 जनवरी को कोहरा भी देखने को मिल सकता है. दिल्ली में शुक्रवार को अधिकतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है.

यूपी में बरसेंगे बादल

आईएमडी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के कई जिलों में शु्क्रवार को आंधी और तूफान के साथ बारिश का दौर देखने को मिल सकता है. विभाग ने यूपी के अधिकांश हिस्सों में बारिश की चेतावनी जारी की है. संभावना जताई जा रही है कि बारिश के कारण तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस तापमान में कमी हो सकती है. विभाग ने नोएडा, बुलंदशहर, झांसी, आगरा, मथुरा और गाजियाबाद में बारिश की चेतावनी जारी की है. इस दौरान लोगों से सावधानी बरतने की बात कही गई है.

बिहार के मौसम का हाल

शुक्रवार को बिहार के लोगों कोहरे से राहत मिलने की संभवना है. आईएमडी ने बताया है कि अगले 24 घंटों के दौरान बिहार के अधिकांश जिलों में कोहरा देखने को नहीं मिलेगा. इसके अलावा किसी भी क्षेत्र में बारिश या मौसम खाराब होने की उम्मीद नहीं है. विभाग ने बताया कि राजधानी पटना में 23 जनवरी को अधिकतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस रह सकता है.

क्या मुख्यमंत्री इतने बेबस हैं…,’ अपराध कर फरार हुआ मंत्री का बेटा…

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बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार 22 जनवरी 2026 को शिवसेना के नेता भरत गोगावाले के बेटे विकास गोगावाले की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई की. इस दौरान कोर्ट ने नियम कानूनों को लेकर तीखी फटकार लगाते हुए पूछा कि क्या महाराष्ट्र में कानून का शासन मौजूद है और क्या मुख्यमंत्री इतने असहाय हैं कि वे उस मंत्री के खिलाफ कुछ नहीं कह सकते जिसका बेटा एक आपराधिक मामले में नाम आने के बाद फरार हो गया है.

मामले को लेकर माधव जामदार ने कहा कि मंत्रियों के बच्चे अपराध करते हैं और खुलेआम घूमते हैं, लेकिन पुलिस उन्हें ढूंढ नहीं पाती है. बता दें कि विकास गोगावाले महाड नगर परिषद चुनावों के दौरान प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच हुई हिंसक झड़प से जुड़े एक मामले में मुख्य आरोपी हैं. कोर्ट की फटकार के बाद सरकार ने आश्वासन दिया है कि मंत्री यह सुनश्चित करेंगे कि भरत गोगावाले का बेटा एक दिन के अंदर आत्मसमर्पण कर दे.

फरार हुआ आरोपी

बता दें कि विकास गोगावाले ने सेशन कोर्ट की ओर से उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद हाई कोर्ट का रुख किया, लेकिन वह अभी भी फरार है. मामले को लेकर जस्टिस माधव जामदार ने कहा,’ क्या राज्य के मुख्यमंत्री इतने बेबस हैं कि वे किसी भी मंत्री के खिलाफ कुछ नहीं बोलते? मंत्रियों के बच्चे अपराध करते हैं, खुलेआम घूमते हैं, अपने माता-पिता के संपर्क में रहते हैं, लेकिन पुलिस उन्हें ढूंढ नहीं पाती?’ उन्होंने यह भी पूछा कि क्या राज्य में कानून व्यवस्था और कानून का शासन कायम है?

कोर्ट ने आत्मसमर्पण के लिए कहा

मामले को लेकर एडवोकेट जनरल मिलिंद साठे ने कहा कि मंत्री गोगावाले अपने बेटे से बात करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि वह शुक्रवार 23 जनवरी 2025 को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दे. हाई कोर्ट ने भी आरोपी को सुनवाई से पहले आत्मसमर्पण करने के लिए कहा है. इससे पहले अदालत ने चेतावनी दी थी कि अगर पुलिस विकास गोगावाले को गिरफ्तार करने में विफल रहती है तो उसे आदेश पारित करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. जस्टिस जमादार ने कहा कि पुलिस पर दबाव हो सकता है कोर्ट पर नहीं.

क्या है पूरा मामला

बता दें कि 2 दिसंबर 2025 को रायगढ़ जिले के महाड में हुए नगर निगम चुनाव के दौरान एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और अजीत पवार के नेतृत्व वाली NCP के समर्थकों के बीच झड़पें हुईं. शिंदे और पवार दोनों ही भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार में उपमुख्यमंत्री हैं. दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई और क्रॉस-FIR दर्ज की गई. FIR में विकास गोगावाले, उनके चचेरे भाई महेश गोगावाले और उनके समर्थकों का नाम है. एक अन्य FIR में पूर्व विधायक माणिक जगताप के बेटे और NCP नेता श्रीयांश जगताप का नाम दर्ज है.

Census 2027: खाना कैसे बनाते हो? कितने कमरे हैं… जनगणना के पहले चरण

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भारत सरकार इस साल बहुप्रतीक्षित राष्ट्रीय जनगणना कराने जा रही है. 5 साल विलंब से हो रही इस जनगणना के 2 चरण होंगे. पहले चरण में लोगों के घर-घर जाकर 33 सवाल पूछे जाएंगे.

इसके जरिए घरों और परिवारों से जुड़ी अहम जानकारियां जुटाई जाएंगी.

बताते चलें कि राष्ट्रीय जनगणना हर 10 साल के अंतराल पर होती है. आखिरी बार यह गणना 2011 में हुई थी. इसके बाद 2021 में इसे करवाया जाना था. लेकिन दुनिया भर में कोरोना के प्रकोप की वजह से यह टल गई. बाद में अन्य कारणों की वजह से इसमें देरी होती चली गई. अब जाकर 2027 में यह जनगणना होने जा रही है.

इस साल अप्रैल में शुरू होगा पहला चरण

केंद्र सरकार के मुताबिक, यह जनगणना 2 चरणों में होगी. पहले चरण में हाउस लिस्टिंग और हाउसिंह सेंसस होगा. इसमें घर-घर जाकर लोगों से बेसिक जानकारी जुटाई जाएगी. यह चरण इस साल 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक कराया जाएगा. देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश इस प्रक्रिया में शामिल होंगे.

केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के पहले चरण के लिए आधिकारिक प्रश्नावली जारी कर दी है. इस चरण में कुल 33 सवाल शामिल किए गए हैं. इन सवालों के जरिए लोगों का सामाजिक और आर्थिक ब्योरा इकट्ठा किया जाएगा. जिससे आर्थिक नीतियां बनाने में सरकार को अहम मदद मिलेगी.

भारत की जनगणना 2027 के प्रथम चरण – मकानसूचीकरण और मकानों की गणना हेतु…

जुटाई जाएगी इन बातों की जानकारी

सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक, इस जनगणना के जरिए लोगों के घरों की स्थिति, स्वामित्व, सुविधाएं और रहन-सहन से जुड़ी कई अहम जानकारियां जुटाएगी. यह पता किया जाएगा कि घरों में खाना बनाने के लिए क्या इस्तेमाल किया जाता है. लोगों के पास पीने के लिए साफ पानी है या नहीं. उसके घरों में शौचालय की क्या स्थिति है. देश के कितने घरों में इंटरनेट की सुविधा है.

पहले चरण में पूछे जाने वाले 33 सवाल

  • मकान नंबर (नगरपालिका/स्थानीय निकाय या जनगणना संख्या)
  • घर के फर्श का मुख्य निर्माण पदार्थ
  • घर की दीवारों में इस्तेमाल सामग्री
  • छत किस सामग्री से बनी है
  • घर का उपयोग किस लिए होता है
  • मकान की स्थिति (अच्छी/खराब आदि)
  • परिवार संख्या
  • घर में रहने वाले कुल लोगों की संख्या
  • परिवार के मुखिया का नाम
  • परिवार के मुखिया का लिंग
  • क्या मुखिया अनुसूचित जाति/जनजाति/अन्य वर्ग से है
  • मकान का स्वामित्व (खुद का/किराए का)
  • घर में रहने के लिए उपलब्ध कमरों की संख्या
  • घर में रहने वाले विवाहित जोड़ों की संख्या
  • पीने के पानी का मुख्य स्रोत
  • क्या पीने का पानी घर में उपलब्ध है
  • रोशनी का मुख्य स्रोत
  • शौचालय की सुविधा है या नहीं
  • शौचालय का प्रकार
  • गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था
  • स्नानघर की सुविधा
  • रसोई और LPG/PNG कनेक्शन की उपलब्धता
  • खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाला ईंधन
  • रेडियो/ट्रांजिस्टर है या नहीं
  • टेलीविजन है या नहीं
  • इंटरनेट की सुविधा
  • लैपटॉप या कंप्यूटर
  • मोबाइल/टेलीफोन/स्मार्टफोन
  • साइकिल/स्कूटर/मोटरसाइकिल
  • कार/जीप/वैन
  • घर में खाया जाने वाला मुख्य अनाज
  • मोबाइल नंबर (केवल जनगणना से जुड़ी जानकारी के लिए)
  • अगले साल शुरू होगा दूसरा चरण

जनगणना का दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू होगा. इसमें मकानों के बजाय लोगों की गणना की जाएगी. इसीलिए इस चरण को जनसंख्या गणना कहा गया है. दूसरे चरण के लिए दूसरे चरण की प्रश्नावली बाद में जारी की जाएगी.

ना उगल पा रही कांग्रेस, ना निगल पा रही, सियासी दलों के लिए ओवैसी कैसे

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बिहार विधानसभा चुनाव और उसके बाद महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों में AIMIM के प्रदर्शन से कांग्रेस की चिंता बढ़ गई है. वर्षों से अल्पसंख्यक वोट बैंक के सहारे राजनीति करने वाली कांग्रेस को अब खतरा महसूस हो रहा है.

उसे लग रहा है कि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी धीरे-धीरे मुसलमानों में उसकी पारंपरिक पकड़ कमजोर कर रही है. जिसका सीधा फायदा बीजेपी उठा रही है.

सेक्युलर दलों के लिए दुविधा बने ओवैसी

राजनीतिक एक्सपर्टों के मुताबिक, ओवैसी की पार्टी के आगे बढ़ने से अब तक ज्यादा आरजेडी, सपा, जेडीयू और एनसीपी जैसी क्षेत्रीय पार्टियों को हुआ है. लेकिन मुस्लिम इलाकों में AIMIM की स्वीकार्यता अगर ऐसे ही आगे बढ़ती गई तो आने वाले समय में कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है. इसका सबसे बड़ा नुकसान उसे यूपी में भुगतना पड़ सकता है. जहां पर पार्टी दोबारा से अपने पैरों पर खड़े होने की कोशिश कर रही है.

राजनीतिक पंडितों के मुताबिक, कथित सेक्युलर दलों के लिए ओवैसी एक डिलेमा बन चुके हैं. जिसे न उगलते बन रहा है और न ही निगलते. अगर वे ओवैसी को साथ लेते हैं तो इससे हिंदू वोटों के धुव्रीकरण का खतरा बढ़ जाता है और अगर उनसे किनारा करते हैं तो मुस्लिम वोट छिटक जाते हैं. बिहार चुनावों में भी यह नजारा साफ दिखाई दिया था.

मुसलमानों के बन गए एकछत्र नेता

उन चुनाव में ओवैसी ने कांग्रेस-आरजेडी के महागठबंधन से 5 सीटें मांगी थी. लेकिन दोनों दलों ने AIMIM को बीजेपी की बी टीम कहते हुए प्रस्ताव खारिज कर दिया. इसके बाद सामने आए चुनाव नतीजों में ओवैसी की पार्टी 5 सीटों पर जीत गई. जबकि उससे कई गुणा सीटों पर लड़ने वाली कांग्रेस भी महज 6 सीटें ही जीत पाईं.

कांग्रेस नेताओं का मानना है कि मजहबी राजनीति और पिछड़ेपन के मुद्दे उठाकर ओवैसी ने बिहार के सीमांचल जैसे मुस्लिम बहुल इलाको में अपनी पैठ बढ़ाई है. वहीं कांग्रेस और दूसरे कथित सेक्युलर दल उन्हें महज वोट कटुआ कहकर लोगों से सावधान रहने को कहते रहे. इसके चलते लोगों ने कांग्रेस छोड़ ओवैसी को चुन लिया.

महाराष्ट्र निकाय चुनाव के नतीजों से झटका

इन सेक्युलर दलों को ताजा झटका अब महाराष्ट्र नगर निकाय चुनावों के नतीजों ने दिया है. इसमें AIMIM ने अपने बलबूते 13 नगर निगमों में कुल 124 सीटें जीत लीं. कई इलाके तो ऐसे रहे, जहां सीटों की संख्या में कांग्रेस काफी पीछे छूट गई. अकेले छत्रपति संभाजीनगर में AIMIM ने 33 सीटें जीतकर कांग्रेस को काफी पीछे धकेल दिया.

इसी तरह विदर्भ में ओवैसी की पार्टी ने 21 सीटें, मालेगांव में 21, नांदेड़ में 14 और धुले में 10 सीटों पर जीत हासिल की. बीएमसी चुनाव में भी AIMIM 8 सीटें जीतने में कामयाब रही, जो कि राज ठाकरे की मनसे से 1 सीट ज्यादा थी. AIMIM ने मुंबई में सपा नेता अबू आसिम आज़मी के गढ़ यानी गोवंडी-मानखुर्द को जीतकर उन्हें भी बड़ा झटका दे दिया.

बंगाल और असम में बनेंगे बड़ा खतरा

ओवैसी केवल इतने से नहीं रुके हैं. अब वे असम और पश्चिम बंगाल में अपनी पार्टी को मजबूत करने में लगे हैं. चर्चाएं हैं कि वे बंगाल में अब्बास सिद्दीकी की पार्टी से हाथ मिला सकते हैं. वहीं असम में बदरुद्दीन अजमल की पार्टी के साथ गठबंधन कर सकते हैं. अगर ऐसा होता है तो इसका सबसे बड़ा नुकसान कांग्रेस और ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी को होगा.

यही नहीं, यूपी में ओवैसी चंद्रशेखर आजाद की पार्टी आसपा और स्वामी प्रसाद के साथ गठबंधन की राहें तलाश रहे हैं. अगर ऐसा होता है तो 2027 के यूपी असेंबली चुनाव और 2029 के संसदीय चुनाव में सपा, बसपा और कांग्रेस को बड़ा नुकसान हो सकता है.

कांग्रेस को सबसे ज्यादा चिंता उत्तर प्रदेश को लेकर है. पार्टी के भीतर चर्चा है कि अगर ओवैसी की पार्टी चंद्रशेखर आज़ाद और स्वामी प्रसाद मौर्य जैसे नेताओं के साथ गठबंधन करती है, तो इसका असर सिर्फ विधानसभा चुनावों पर ही नहीं, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनावों तक पड़ सकता है.

तेलंगाना में दोनों के मजेदार रिश्ते

मजेदार बात ये है कि देश के दूसरे हिस्सों में कांग्रेस और AIMIM आमने-सामने हैं. वहीं तेलंगाना में दोनों के रिश्ते शानदार हैं. सीएम रेवंत रेड्डी और ओवैसी के बीच शानदार ट्यूनिंग कई बार देखी गई है. इसका नजारा तब दिखाई दिया, AIMIM ने जुबिली हिल्स उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन किया. ओवैसी के इस समर्थन से वह सीट कांग्रेस को वापस मिल गई.

अब कांग्रेस के लिए बड़ी रणनीतिक उलझन की घड़ी आ गगई है. उसे समझ नहीं आ रहा है कि ओवैसी के साथ डील कैसे किया जाए. उसे ओवैसी को साथ लेने और दूर करने, दोनों में डर लग रहा है. उसे एक तरफ अल्पसंख्यक वोट खिसकने का डर दिख रहा है. वहीं दूसरी ओर ज्यादा नरमी दिखाने से हिंदू वोटर्स के नाराज होने की आशंका खा रही है. उसकी यही दुविधा आज कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती बन चुकी है.

झमाझम बारिश आ गई, ओले और बिजली भी कड़केगी! बसंत पंचमी पर मौसम विभाग..

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बसंत ऋतु का आगमन बारिश की बूंदों से हुआ है.

सुबह-सुबह 6 बजे उत्तर भारत के कई इलाकों में लोगों ने आंखें ही खोली थीं तभी बारिश की आवाज ने मन प्रसन्न कर दिया. 8 बजते-बजते कई राज्यों में झमाझम बारिश हुई. दो महीने से जो प्रदूषण धूल बनकर छत पर जमा था, वह बहने लगा.

सड़कों पर गाड़ी में दौड़ रहे लोगों को विंडशील्ड साफ करनी पड़ी. पेड़ों की पत्तियां धुलकर हरी हो गईं. प्रयागराज में उसी समय संगम किनारे श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा रहे थे और इधर राजधानी दिल्ली, नोएडा, यूपी, हरियाणा के कुछ हिस्सों में टप-टप बरसी बूंदों ने माहौल को खुशनुमा बना दिया. हालांकि ठंड फिर से लौट आई है. दो दिन से ऐसा लग रहा था जैसे ठंड की विदाई शुरू हो गई है. शुक्रवार तड़के से ही हवा चलने लगी. मौसम विभाग ने आंधी के साथ आगे बारिश का अलर्ट दिया है.

जी हां, एक दो नहीं, कुल 9 राज्यों में बारिश और तूफान का अलर्ट है. पश्चिमी विक्षोभ के चलते मौसम ने यह अचानक करवट ली है. IMD के साइंटिस्ट डॉ. सुप्रित कुमार ने बताया है कि तीव्र पश्चिमी विक्षोभ के कारण आज यानी 23 जनवरी को पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में कुछ जगहों पर भारी वर्षा, बर्फबारी के साथ ओलावृष्टि, बिजली कड़कने और तेज हवाएं चलने की संभावना है. इसी दौरान उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में भी कुछ जगहों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है.

सुबह-सुबह कश्मीर और हिमाचल में बर्फबारी

वेस्टर्न डिस्टरबेंस की दस्तक से मनाली में सीजन की पहली भारी बर्फबारी हुई है. कश्मीर में भी बर्फबारी हो रही है. सुबह-सुबह शुरू हुई बर्फबारी के चलते मनाली और आसपास के क्षेत्र सफेद चादर में लिपट गए हैं. लंबे इंतजार के बाद हुई इस बर्फबारी से किसानों, बागवानों और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों में राहत की उम्मीद जगी है.

26 जनवरी पर भी बारिश!

मौसम विभाग का कहना है कि एक और पश्चिमी विक्षोभ 26 से 28 जनवरी तक उत्तर पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है.

ठंड बढ़ेगी या नहीं?

IMD के साइंटिस्ट सुप्रित कुमार ने बताया है कि उत्तर पश्चिम भारत में न्यूनतम तापमान अगले दो दिनों में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस घट सकता है. उसके बाद अगले चार दिनों में 2-4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होने की संभावना है. मध्य भारत में अगले दो दिनों में धीरे-धीरे 3-4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट और उसके बाद अगले दो दिनों में 2-3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है. महाराष्ट्र और गुजरात में कुछ ऐसा ही रहने वाला है.

मौसम हुआ बसंती

बसंत पंचमी की महत्ता बताते हुए सेवानिवृत कार्यक्रम अधिकारी आकाशवाणी, लेखक एवं सनातन संस्कृति संपोषक पार्थसारथि थपलियाल कहते हैं कि बसंत पंचमी ऐसा पर्व है जब प्रकृति, विद्या, लोक और संस्कार चारों का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है. इसे यूं ही नहीं कहा गया कि “ऋतुनाम कूष्माकर”, ऋतुओं में बसंत सृजन, उल्लास और नवजीवन का कारण है. शिशिर की कठोरता टूटती है, धरती पीले रंग में सजती है और मनुष्य के भीतर भी नई ऊर्जा का संचार होता है. बसंत पंचमी केवल मंदिरों और विद्यालयों तक सीमित पर्व नहीं, यह लोक उत्सव है. गांवों में खेतों में लहलहाती सरसों, आम की मंजरियां और पीले फूल बसंत के आगमन की घोषणा करते हैं. किसान के लिए यह आशा का पर्व है. नई फसल की उम्मीद, प्रकृति की अनुकूलता और परिश्रम के फल का संकेत. पीले वस्त्र, पीले पकवान, पतंगबाजी और सामूहिक उल्लास ये सब लोक-जीवन में बसंत की पहचान हैं. यह पर्व प्रकृति और मनुष्य के बीच सहजीवन का उत्सव है, जहां मनुष्य प्रकृति का उपभोक्ता नहीं, सहभागी बनता है.

पाकिस्तान पैदा कर रहा दरार…बांग्लादेश की मांग पर खफा हुईं उद्धव गुट

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टी20 विश्वकप को लेकर घमासान मचा हुआ है. बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने (ICC) आईसीसी के बाहर करने के अल्टीमेटम के बाद भी टी20 वर्ल्ड कप 2026 का बहिष्कार करने का फैसला किया है.

इसे लेकर शिवसेना (UBT) की MP प्रियंका चतुर्वेदी ने बांग्लादेश की जमकर आलोचना की है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान दरार पैदा करने के लिए पड़ोसी देश का ‘इस्तेमाल’ कर रहा है.

पाकिस्तान कर रहा इस्तेमाल

सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने आगे कहा कि ICC ने पहले ही इस रिक्वेस्ट को मना कर दिया है, लेकिन सिर्फ पाकिस्तान ही इस मामले पर बांग्लादेश के रुख का समर्थन करने के लिए आगे आया है. बोर्ड में मौजूद सभी कमिटी मेंबर्स में से सिर्फ पाकिस्तान ने उनका समर्थन किया है, किसी और ने नहीं, यह साफ दिख रहा है कि पाकिस्तान बांग्लादेश का इस्तेमाल कर रहा है. बांग्लादेश में माइनॉरिटी हिंदुओं पर लगातार ज़ुल्म हो रहा है, उस पर जवाब देने के बजाय, वे क्रिकेट की बात कर रहे हैं.

नहीं चाहिए बांग्लादेश टीम

इसके अलावा कहा कि हमें ICC से कहना चाहिए था कि जब तक ये लोग अपनी हरकतें बंद नहीं करते, हमें न तो पाकिस्तान की टीम चाहिए और न ही बांग्लादेश की टीम, इस समय, ICC ने जो भी कहा है, बांग्लादेश को उसे मानना ​​होगा. इसके अलावा पूर्व भारतीय क्रिकेटर मनोज तिवारी ने बांग्लादेश के भारत में अपने T20 वर्ल्ड कप मैच न खेलने के फैसले की आलोचना की और देश के क्रिकेट बोर्ड में राजनीतिक दखल का आरोप लगाया.

पूर्व क्रिकेटर ने भी घेरा

उन्होंने सुरक्षा चिंताओं पर सवाल उठाया, यह देखते हुए कि बांग्लादेश की पूर्व PM शेख हसीना भारत में सुरक्षित रह रही हैं और पूछा कि खिलाड़ी सुरक्षित क्यों नहीं होंगे. मनोज तिवारी ने कहा, “यह बोर्ड की तरफ से नहीं था. आज, अगर आपने प्रेस कॉन्फ्रेंस देखी, तो खेल मंत्री ने मीडिया को एक बयान दिया, जिसमें कहा गया कि सुरक्षा का खतरा है, लेकिन बोर्ड प्रेसिडेंट उनके ठीक बगल में खड़े थे. आम तौर पर, दूसरे देशों में, क्रिकेट बोर्ड एक ऑटोनॉमस बॉडी है, और राजनीतिक और मंत्री का दखल सिर्फ इवेंट्स को ऑर्गनाइज़ करने तक ही सीमित है लेकिन उनके देश में, राजनीति आ गई है, और राजनीतिक हस्तियां बोर्ड में बहुत ज़्यादा शामिल हो गई हैं, और इस तरह के फैसले सामने आ रहे हैं.

वह यहां सेफ हैं ना?

आगे कहा कि अगर सेफ्टी की बात करें, तो शेख हसीना भी वहां हुए प्रोटेस्ट के बाद हमारे देश आई थीं और वह यहां सेफ हैं, है ना? हमारे देश की सेंट्रल गवर्नमेंट ने उन्हें अच्छी सिक्योरिटी दी है और यहां पनाह दी है तो, अगर किसी देश का प्राइम मिनिस्टर यहां आकर सेफ रह सकता है, तो प्लेयर्स को भी सेफ्टी जरूर मिलेगी. अभी के शेड्यूल के हिसाब से, बांग्लादेश 7 फरवरी को कोलकाता के ईडन गार्डन्स में दो बार की चैंपियन वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने T20 वर्ल्ड कप 2026 कैंपेन की शुरुआत करने वाला है. लिटन दास की लीडरशिप वाली टीम फिर 9 फरवरी को उसी जगह पर इटली से भिड़ेगी, जिसके बाद कोलकाता में फिर से इंग्लैंड से भिड़ेगी, इंग्लैंड से मुकाबला करने के बाद, बांग्लादेश मुंबई जाएगी और वानखेड़े स्टेडियम में नेपाल से खेलेगी.

‘प्लेन में बम है…’, अचानक हवा में फैली दहशत, इंडिगो फ्लाइट को 5 दिन

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अक्सर देखा जाता है कि लोग लंबी दूरी तय करने के लिए फ्लाइट का सहारा लेते हैं, इसी बीच दिल्ली से पुणे जा रही इंडिगो की फ्लाइट को धमकी भरा पत्र मिला है. जिसके बाद हड़कंप मच गया, हालांकि पुणे में विमान की लैंडिंग हुई और फिर यात्रियों को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला गया.

इंडिगो के प्रवक्ता ने इसकी जानकारी दी है.

इंडिगो की तरफ से बताया गया कि 22 जनवरी को दिल्ली से पुणे जा रही इंडिगो फ्लाइट 6ई 2608 में उतरते ही सुरक्षा खतरे की जानकारी मिली. तय प्रोटोकॉल के अनुसार, हमने तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित किया और स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर के अनुसार पूरी तरह सहयोग किया. फ्लाइट के सभी यात्री और क्रू सुरक्षित बाहर उतर गए. हम अपने ग्राहकों, क्रू, और विमान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

इंडिगो की फ्लाइट को धमकी भरा नोट मिला. हालांकि, विमान पुणे हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतर गया और सभी यात्री सुरक्षित रूप से विमान से उतर गए. इसके बाद विमान की जांच की गई.बता दें कि इससे पहले इंडिगो एयरलाइंस के एक विमान में रविवार को बम होने की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया था. यह मामला दिल्ली से बागडोगरा जा रही इंडिगो फ्लाइट संख्या 6ई-6650 से जुड़ा था, लखनऊ कमिश्नरेट पुलिस ने आधिकारिक बयान जारी कर इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी थी.

पुलिस के अनुसार, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) के माध्यम से सूचना मिली कि उड़ान के दौरान विमान में बम होने की धमकी मिली है. सूचना मिलते ही सभी सुरक्षा मानकों और निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करते हुए संबंधित विमान की लखनऊ एयरपोर्ट पर आपातकालीन लैंडिंग कराई गई. विमान ने सुबह 9:17 बजे सुरक्षित रूप से लखनऊ एयरपोर्ट पर लैंडिंग की. इसके बाद विमान को आइसोलेशन बे में पार्क कराया गया.

पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच के दौरान विमान के अंदर से टिशू पेपर पर हाथ से लिखा हुआ एक नोट बरामद हुआ, जिस पर लिखा था, ‘प्लेन में बम. इसी नोट के आधार पर सुरक्षा एजेंसियों ने जांच को और अधिक गंभीरता से आगे बढ़ाया. पुलिस ने बताया कि फ्लाइट में कुल 222 यात्री और 8 शिशु सवार थे. इसके अलावा विमान में 2 पायलट और 5 क्रू मेंबर मौजूद थे. सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सभी यात्रियों और क्रू मेंबर्स को विमान से बाहर निकाल लिया गया. हालांकि सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि विमान में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला, जल्द ही झूठी सूचना देने वाले को गिरफ्तार कर लिया जाएगा.