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फोन निर्यात पर मंडरा रहा संकट, ईरान युद्ध से भारत को हो सकता है अरबों का नुकसान…

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भारत के लगातार बढ़ते मोबाइल फोन निर्यात की वजह से मौजूदा वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में $11 अरब (लगभग 1,01,651 करोड़) का राजस्व (रेवेन्यू) मिला था लेकिन अब कंजप्शन, आयात और माल ढुलाई पर ईरान युद्ध का असर पड़ने के कारण कई अरब डॉलर का झटका लगने की आशंका है.

कार्यकारी, विश्लेषक और ब्रोकरेज फर्म का अनुमान है कि भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में 2 (18,494 करोड़) से 3 अरब डॉलर (27,723 करोड़) का नुकसान हो सकता है. इसकी मुख्य वजह यह है कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज कंपनियां बड़ी मात्रा में मोबाइल फोन खाड़ी क्षेत्र को निर्यात करती हैं जो कि व्यापार और उपभोग का एक प्रमुख केंद्र है.

मोबाइल फोन पर पड़ा सबसे ज्यादा असर

ब्रोकरेज फर्म कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज़ के विश्लेषक सुवोदीप रक्षित और स्वरूपजीत पालित ने 6 मार्च को निवेशकों को भेजे एक नोट में लिखा कि इजरायल और अमेरिका के ईरान के साथ युद्ध में खाड़ी देशों और पश्चिम एशिया क्षेत्र के सीधे तौर पर प्रभावित होने के कारण मोबाइल फोन उन टॉप पांच वस्तुओं में से है जिन पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है.

विश्लेषकों ने भारत के वाणिज्य मंत्रालय के डेटा का हवाला देते हुए कहा कि FY25 में खाड़ी और पश्चिम एशिया को मोबाइल फोन का निर्यात बढ़कर $3.1 बिलियन (लगभग 28,647.1 करोड़) हो गया, जो देश के कुल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात का 12 फीसदी है. EMS कंपनियां मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग पर काफी हद तक निर्भर हैं, उन्हें कम से कम मौजूदा और अगले क्वार्टर में भारी नुकसान हो सकता है.

कंपनियां नुकसान से बचने के लिए उठा सकती हैं ये कदम

कोटक के विश्लेषकों ने कहा कि अगर यह टकराव जारी रहता है, तो अगले वित्त वर्ष में निर्यात से होने वाली पूरी 3 अरब डॉलर की कमाई खत्म हो सकती है. इस असर से बचने के लिए, EMS कंपनियां दूसरे क्षेत्रों में अपना निर्यात बढ़ा सकती हैं, जिनमें अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, जापान, नीदरलैंड, जर्मनी और मेक्सिको शामिल है.

भारत में मोबाइल फोन के निर्यात में लगातार बढ़ोतरी हुई है. इलेक्ट्रॉनिक्स और IT मंत्रालय ने 27 अक्टूबर को बताया कि केंद्र सरकार के मैन्युफैक्चरिंग इंसेंटिव और निर्यात को बढ़ावा देने की कोशिशों की वजह से इलेक्ट्रॉनिक्स भारत की तीसरी सबसे ज्याजा निर्यात की जाने वाली चीज (कमोडिटी) बन गई है.

World Largest LPG Producer: दुनिया के किस देश में होता है सबसे ज्यादा LPG प्रोडक्शन, भारत किस नंबर पर?

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संयुक्त राज्य अमेरिका अभी एलपीजी उत्पादन में दुनिया में सबसे आगे है. इसके मजबूत तेल और शेल गैस उद्योग ने उत्पादन को काफी ज्यादा बढ़ाया है. इससे यह देश किसी भी दूसरे देश के मुकाबले ज्यादा एलपीजी बना पाता है.

LPG Price: दुनिया में सबसे महंगी एलपीजी अब भारत में, समझें क्या है ये पूरी  गणित - Indians are paying world highest lpg price on purchasing power  parity meter tutk - AajTak

संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद चीन, सऊदी अरब और रूस जैसे देश एलपीजी के मुख्य उत्पादकों में शामिल हैं. इन देशों को अपने मजबूत पेट्रोलियम उद्योग और बड़े हाइड्रोकार्बन भंडारों का फायदा मिलता है. इससे वे घरेलू इस्तेमाल और निर्यात दोनों के लिए बड़ी मात्रा में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस बना पाते हैं.

India LPG imports from which countries: भारत कहां-कहां से आयात करता है LPG?  जानिए किन देशों पर है सबसे ज्यादा निर्भरता - india lpg imports from which  countries UAE Qatar Saudi Arabia

भारत भी दुनिया के टॉप 5 एलपीजी उत्पादक देशों में शामिल है. हालांकि अपनी मजबूत रिफायनिंग क्षमता के बावजूद देश की भारी मांग को पूरा करने के लिए घरेलू उत्पादन काफी नहीं है. भारत अभी अपनी खपत का सिर्फ 40% एलपीजी ही बना पाता है.

Who is the Largest Exporter of LPG to India? Qatar Leads Cooking Gas Supply  - Check Top Suppliers List

क्योंकि घरेलू उत्पादन कुल मांग को पूरा नहीं कर पाते इस वजह से भारत एलपीजी का लगभग 60% अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से आयात करता है. सबसे बड़े सप्लायरों में से एक कतर है. यह भारत के कुल एलपीजी आयत का लगभग 34% हिस्सा देता है.

Historic first': India seals first LPG pact with US; 2.2 MTPA deal to meet  about 10% of New Delhi's total import needs - The Times of India

आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए भारत सरकार ने हाल ही में घरेलू रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है. इन उपायों से घरेलू एलपीजी उत्पादन में पहले ही लगभग 25% की वृद्धि देखने को मिली है.

Team India Schedule: विराट कोहली-रोहित शर्मा के लिए विदेशों में बेकरारी, BCCI को मिलीं खास रिक्वेस्ट…

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टी20 वर्ल्ड कप जीत चुकी भारतीय क्रिकेट टीम अब करीब 3 महीने के ब्रेक के बाद इंटरनेशनल क्रिकेट में वापसी करेगी. फिलहाल 28 मार्च से सबका ध्यान सिर्फ IPL 2026 पर रहेगा जो 31 मई तक चलेगा.

आईपीएल खत्म होने के बाद एक बार फिर इंटरनेशनल क्रिकेट की भागदौड़ शुरू हो जाएगी. जहां भारतीय क्रिकेट फैंस को फिलहाल IPL का इंतजार है, वहीं दूसरे देशों के क्रिकेट बोर्ड इंटरनेशनल क्रिकेट की वापसी के लिए अभी से बेकरार हैं और इसकी वजह हैं विराट कोहली और रोहित शर्मा. एक रिपोर्ट के मुताबिक, टीम इंडिया के आने वाले विदेश दौरों पर कई क्रिकेट बोर्ड ज्यादा से ज्यादा ODI मैच खेलने की रिक्वेस्ट कर रहे हैं, ताकि विराट और रोहित को देखने का मौका मिल सके.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि

टीम इंडिया

के पहले से ही व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद श्रीलंका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और आयरलैंड जैसे देशों के क्रिकेट बोर्ड ने BCCI से संपर्क किया है और इन दौरों पर ODI सीरीज खेलने का प्रस्ताव रखा है. जानकारी के मुताबिक, बोर्ड काफी हद तक इसके लिए तैयार भी है, जिससे पहले से तय शेड्यूल में बदलाव करने पड़ेंगे. इसका असर टीम इंडिया के न्यूजीलैंड दौरे पर दिखा भी है, जहां पहले सिर्फ 3 वनडे मैच खेले जाने थे लेकिन अब इसमें 5 वनडे मैच खेले जाएंगे.

ODI सीरीज पर क्यों दे रहे जोर?

विदेशी बोर्ड की ऐसी रिक्वेस्ट की खास वजह है. असल में विराट कोहली और रोहित शर्मा अब सिर्फ ODI फॉर्मेट में खेल रहे हैं और वर्ल्ड कप 2027 में या उसके बाद दोनों के रिटायर होने की संभावना है. ऐसे में वर्ल्ड कप से पहले टीम इंडिया जिन भी देशों का दौरा कर रही है, वहां वनडे फॉर्मेट में उन्हें देखने का आखिरी मौका हो सकता है. ऐसे में इन देशों में मौजूद क्रिकेट फैंस, खास तौर पर भारतीय मूल के दर्शक ज्यादा से ज्यादा संख्या में स्टेडियम आ सकते हैं, जिसका फायदा मेजबान क्रिकेट बोर्ड को मिलेगा.

वहीं BCCI भी इन मांगों को मानने के लिए तैयार होती हुई दिख रही है और उसका भी इसमें फायदा है. असल में विदेशी परिस्थितियों, खास तौर पर इंग्लैंड और न्यूजीलैंड, में ज्यादा से ज्यादा वनडे मैच खेलकर टीम इंडिया अगले साल होने वाले वर्ल्ड कप के लिए खुद को अच्छे से तैयार कर पाएगी, जिसका आयोजन साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में होना है.

Mahavir Jayanti 2026: महावीर जयंती 2026 में कब ? इस दिन इन खास चीजों के दान का महत्व…

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Mahavir Jayanti 2026: महावीर जयंती जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर महावीर स्वामी के जन्म दिवस के रूप में मनाई जाती है. इस साल महावीर जयंती 31 मार्च 2026 को है. महावीर स्वामी ने सिखाया कि मनुष्य इंद्रियों पर नियंत्रण, सत्य आचरण और तपस्या से आत्मा को शुद्ध कर सकता है और मोक्ष प्राप्त कर सकता है. इस दिन जैन समाज भगवान महावीर के उपदेशों अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह को याद करता है और उनके जीवन से प्रेरणा लेकर धर्म, दया और संयम का पालन करने का संकल्प लेता हैं.

जैन धर्म में तीर्थंकर कौन होते हैं

जैन ग्रंथों तत्तवार्थसूत्र और कल्पसूत्र के अनुसार तीर्थंकर वह दिव्य पुरुष हैं जो सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र के माध्यम से आत्मा को पूर्ण रूप से शुद्ध कर लेते हैं और केवलज्ञान प्राप्त करते हैं. इसके बाद वे संसार के लोगों को धर्म का तीर्थ (मार्ग) स्थापित करके मोक्ष का मार्ग बताते हैं.

कौन हैं महावीर स्वामी

जैन धर्म की मान्यता है कि 12 साल के कठोर मौन तप के बाद भगवान महावीर ने अपनी इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर ली ती, निडर, सहनशील और अहिंसक होने के कारण उनका नाम महावीर पड़ा. 72 साल की उम्र में उन्हें पावापुरी से मोक्ष प्राप्ति हुई. महावीर स्वामी ने ऐसे आदर्श दिए जो व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति, नैतिक जीवन और समाज में शांति स्थापित करने का मार्ग दिखाते हैं।

महावीर जयंती पर क्या करते हैं

मंदिरों में विशेष पूजा और अभिषेक – सुबह जैन मंदिरों में भगवान महावीर की प्रतिमा का जल, दूध, केसर और चंदन से अभिषेक किया जाता है. इसके बाद आरती, पूजा और मंगल पाठ किया जाता है.

शोभायात्रा (रथ यात्रा) निकालना – कई शहरों में भगवान महावीर की प्रतिमा को सजे हुए रथ में बैठाकर भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है. इसमें भजन, कीर्तन और धार्मिक झांकियाँ होती हैं.

उपवास और साधना – कई श्रद्धालु इस दिन उपवास या विशेष व्रत रखते हैं और भगवान महावीर के ध्यान और भक्ति में समय बिताते हैं.

जैन ग्रंथों का पाठ और प्रवचन – इस दिन जैन धर्म के ग्रंथों जैसे कल्पसूत्र का पाठ किया जाता है और आचार्य या साधु-संत महावीर स्वामी के उपदेशों पर प्रवचन देते हैं.

दान-पुण्य और सेवा- इस दिन लोग गरीबों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करते हैं तथा जीवों के प्रति दया दिखाने के लिए पक्षियों को दाना और पशुओं को चारा खिलाते हैं. कहते हैं कि इसके फलस्वरूप व्यक्ति तमाम कष्टों से मुक्ति पाता है और मोक्ष की राह उसके लिए सुलभ होती है.

महावीर स्वामी के प्रमुख उपदेश

  • अहिंसा – किसी भी जीव को कष्ट न देना
  • सत्य – हमेशा सत्य बोलना
  • अस्तेय – चोरी न करना
  • ब्रह्मचर्य – इंद्रियों पर नियंत्रण
  • अपरिग्रह – अधिक संग्रह न करना

“CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव, नोटिस में क्या-क्या आरोप?”

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मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के प्रस्ताव के नोटिस दोनों सदनों में जमा कर दिए गए हैं. CEC को हटाने के लिए सांसदों के जरूरी हस्ताक्षरों का, TMC के नेतृत्व वाले विपक्ष का पत्र दोनों सदनों में जमा कर दिया गया है.

इसमें CEC के खिलाफ 7 बिंदुओं वाले आरोप-पत्र में शामिल हैं. उन्होंने बिहार में SIR को जिस तरह से संभाला. मतदाताओं को मताधिकार से वंचित किया गया. राजनीतिक दलों के प्रति पक्षपातपूर्ण रवैया, दुर्व्यवहार साबित हुआ है. इसमें सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया गया है.

TMC की अगुवाई में विपक्षी सांसदों ने ये नोटिस दिया है. दोनों सदनों को नोटिस सौंप दिया गया है. प्रस्ताव पर 190 विपक्षा सांसदों का हस्ताक्षर है. विपक्ष दोनों सदनों में इसे ला रहा है, जिससे इसकी जांच के लिए जो कमेटी बने उसमें दोनों सदनों के सांसद हों.

विपक्ष के ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुख्य रूप से 3 आरोप हैं-

मतदाता से वोट अधिकार छीनना

जब टीएमसी नेता उनसे मिलने गए तो दुर्व्यवहार किया

SIR में संविधान को नहीं मानना

नियमों के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए नोटिस पर लोकसभा के कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा के 50 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं. यह पहली बार है जब मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने के लिए इस तरह का नोटिस दिया गया है.

सीईसी को हटाने का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है और इसे पारित होने के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है. सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत है.

बीजेपी का पक्ष लेने का आरोप

अगर इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया जाता है, तो यह पहला ऐसा मामला होगा जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए नोटिस दिया गया हो. सूत्रों के मुताबिक, इस नोटिस में कुमार पर सात आरोप लगाए गए हैं. इनमें पद पर रहते हुए पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण रवैया, चुनावी धोखाधड़ी की जांच में जान-बूझकर रुकावट डालना और बड़े पैमाने पर लोगों के वोट देने के अधिकार से वंचित करना शामिल हैं. विपक्षी दलों ने CEC पर कई मौकों पर सत्ताधारी BJP का पक्ष लेने का आरोप लगाया है. खासकर मतदाता सूचियों के चल रहे ‘विशेष गहन संशोधन’ (SIR) के संबंध में. उनका दावा है कि इसका मकसद केंद्र में सत्ताधारी पार्टी को फायदा पहुंचाना है.

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने आरोप लगाया, सिलेंडर की कमी से बढ़ी इंडक्शन की मांग…

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शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने आरोप लगाया कि एलपीजी सिलेंडर कको लेकर सरकार झूठ बोल रही है. पीएम नरेंद्र मोदी का बयान है कि सब कुछ ठीक ठाक है. हमारे पेट्रोलियम मंत्री भी सदन में यही बात करते हैं.

लेकिन प्रधानमंत्री चुनाव प्रचार से थोड़ी छुट्टी लें और बाहर आकर देखें. पटना में, महाराष्ट्र में, पश्चिम बंगाल और लखनऊ किसी भी राज्य में जाकर देखिए, नोटबंदी के बार फिर एक बार आपने लोगों को कतार में खड़ा कर दिया है.

संजय राउत ने आगे कहा, “आप बोलते हो कि सबकुछ ठीक ठाक है. आपके घर में ठीक ठाक होगा. आपके लोगों को इजरायल और प्रेसिडेंट ट्रंप से एलपीजी आता होगा. लेकिन इस देश की जो आम जनता बेरोजगार हो रही है. चूल्हे नहीं चल रहे हैं. आपने जो गटर गैस के बारे में बोला था, लोगों के घर के पास जो गटर हैं उसके ऊपर सरकार प्लांट खड़ी करेगी. गटर से गैस निकालकर दे देगी.”

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सड़क से संसद तक संग्राम!

बता दें कि LPG संकट को लेकर सड़क से संसद तक संग्राम देखने को मिल रहा है. विपक्ष सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया. वहीं, दिल्ली में कांग्रेस ने सड़क पर उतरकर विरोध जताया.

पटना के छात्रों ने बयां किया दर्द

बिहार की राजधानी पटना में गैस की किल्लत की वजह से पढ़ाई करने वाले छात्र भी परेशान हैं. छात्रों के पास छोटा सिलेंडर होता है जो वो दुकानदारों से भरवाते हैं. अब छात्रों का कहना है कि या तो गैस मिल नहीं रही है या फिर 90-100 की जगह उनसे 300 और 400 रुपये मांगे जा रहे हैं.

सिलेंडर की कमी से बढ़ी इंडक्शन की मांग

वाराणसी में गैस सिलेंडर की कमी के बीच बाजारों में इंडक्शन की मांग तेजी से बढ़ रही है. दुकानदारों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में मांग में करीब 30-40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. खरीदारों का कहना है कि एलपीजी सिलेंडर नहीं मिलने के कारण हमें इंडक्शन खरीदना पड़ रहा है.

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चंडीगढ़ में कॉमर्शियल गैस की किल्लत से लोगों की परेशानी बढ़ गई है. यहां भी इंडक्शन की मांग बढ़ती दिख रही है. कई जगहों पर इंडक्शन की कमी की वजह से अब लोग दूसरी जगहों का रुख कर रहे हैं. जैसे शिमला में कमी होने की वजह से लोग अब इंडक्शन खरीदने चंडीगढ़ तक पहुंच रहे हैं.

शेयर मार्केट धड़ाम, फिर सोना-चांदी में क्यों नहीं आ रही तेजी? आज इतना गिर गया भाव…

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शेयर बाजार में जब अनिश्चितता या गिरावट का माहौल बनता है, तो निवेशक आम तौर पर सुरक्षित निवेश के तौर पर सोना और चांदी की ओर रुख करते हैं. जियो-पॉलिटिकल तनाव के समय भी इनकी मांग बढ़ जाती है और कीमतों में तेजी देखने को मिलती है.

लेकिन इस बार हालात कुछ अलग नजर आ रहे हैं. अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और पश्चिम एशिया में बिगड़ते हालात के बावजूद सोना-चांदी की कीमतों पर दबाव बना हुआ है. दूसरी तरफ दुनिया भर के शेयर बाजारों में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिल रही है.

शुक्रवार, 13 मार्च की सुबह जब भारतीय बाजार खुले तो दलाल स्ट्रीट पर भारी गिरावट देखने को मिली. बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी दोनों ही लाल निशान में फिसल गए. ऐसे समय में निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर सोना-चांदी में लगाते हैं, लेकिन इस बार कीमती धातुएं भी दबाव में दिख रही हैं. यानी इस बार बाजार का पारंपरिक गणित उल्टा पड़ता नजर आ रहा है, जहां शेयर बाजार की गिरावट के साथ-साथ सोना-चांदी भी निवेशकों को राहत नहीं दे पा रहे हैं. आइए समझते हैं कि ऐसा क्यों हो रहा है, इसके पीछे की वजह क्या है.

शेयर बाजार और बुलियन मार्केट में एक साथ गिरावट क्यों?

वैश्विक अनिश्चितताओं के इस दौर में आज दोपहर 2.06 बजे तक सोने के भाव में 1202 रुपये प्रति 10 ग्राम की कमी देखी गई. वहीं चांदी की चमक तो और भी ज्यादा फीकी रही, जहां प्रति किलो 5851 रुपये की गिरावट दर्ज की गई. अब सवाल यह उठता है कि जब मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ रहा है और विदेशी निवेशक (FIIs) शेयर बाजार से अपना बोरिया-बिस्तर समेट रहे हैं, तो सोने के दाम गिरने के बजाय बढ़ने चाहिए थे.

इस अजीबोगरीब स्थिति के पीछे सबसे बड़ी वजह ‘डॉलर इंडेक्स’ में आई मजबूती है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की कीमत बढ़ने का सीधा मतलब है कि अब सोना खरीदने के लिए आपको ज्यादा बड़ी कीमत चुकानी होगी, जिससे मांग में अस्थाई कमी आती है. युद्ध और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद डॉलर का मजबूत होना सोने की तेजी पर ब्रेक लगा रहा है. यही कारण है कि आज बाजार में ‘सेफ हेवन’ (सुरक्षित निवेश) की धारणा भी संघर्ष करती दिख रही है.

एमसीएक्स पर सोने-चांदी का क्या हाल

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर आज सोने की ट्रेडिंग काफी उतार-चढ़ाव भरी रही. 10 ग्राम सोने की कीमत 1,59,059 रुपये के स्तर पर टिकी हुई है, जो पिछले बंद भाव से करीब 1200 रुपये नीचे है. सुबह के शुरुआती घंटों में सोने ने 1,58,746 रुपये का निचला स्तर छुआ, जबकि इसका ऊपरी स्तर 1,60,401 रुपये तक गया.

चांदी की बात करें तो इसकी स्थिति और भी नाजुक है. औद्योगिक मांग में कमी और वैश्विक दबाव के चलते 1 किलो चांदी 2,62,111 रुपये के भाव पर ट्रेड कर रही है. गौर करने वाली बात यह है कि चांदी ने आज 2,60,752 रुपये का लो (Low) बनाया है, जो दिखाता है कि बाजार में इस वक्त बिकवाली का दबाव कितना गहरा है.

राहुल गांधी को लेकर निशिकांत दुबे पर तंज, संसद से निलंबन पर जताई नाराजगी, एलपीजी की कमी पर उठाए सवाल, नोटिस को लेकर भी उठाया मुद्दा…

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कांग्रेस सांसद और पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने संसद में विपक्षी सांसदों के निलंबन और एलपीजी की संभावित कमी को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है. साथ ही भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को राहुल गांधी पर दिए बयानों को लेकर जमकर घेरा.

उन्होंने कहा कि विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है और संसद में चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ गलत व्यवहार हो रहा है.

राहुल गांधी को लेकर निशिकांत दुबे पर तंज

राजा वारिंग ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे पर निशाना साधते हुए कहा, “जब निशिकांत दुबे, राहुल गांधी को देखते हैं तो उनके पेट में दर्द होने लगता है, जैसे उन्हें फूड प्वाइजनिंग हो गई हो. उन्हें रात-दिन, सुबह-शाम, सोते-जागते राहुल गांधी ही दिखाई देते हैं.”

उन्होंने निशिकांत से सवाल पूछा, “राहुल गांधी से इतना डर क्यों है? क्या चाय पीना कोई गुनाह है? चाय अंदर पी ली या सीढ़ियों पर पी ली. जब आपने हमें बाहर निकाल रखा है और आज सत्र चलते हुए बीस दिन हो गए हैं, तो हम बीस दिनों से बाहर ही हैं. क्या आपको जरा भी शर्म नहीं आती कि आप हमसे कहते हैं कि चाय पीनी है तो कैंटीन में जाओ या फलां जगह जाओ? अगर चाय पीना गुनाह है तो साफ-साफ बता दीजिए.”

संसद से निलंबन पर जताई नाराजगी

उन्होंने आगे कहा, “पूरा दिन एक चुना हुआ जनप्रतिनिधि, जिसे अंदर जाकर अपने लोगों की बात रखनी है, उसे आप सीढ़ियों पर बैठाकर रखेंगे, सिर्फ इसलिए कि आपकी अहंकार है कि हम आकर हाथ जोड़ें, आपके पांव छुएं, तब आप हमें बहाल करेंगे. हमारा गुनाह क्या है? हमारा गुनाह सिर्फ इतना है कि नेता प्रतिपक्ष को बोलने नहीं दिया जा रहा था, जबकि वे देश के मुद्दों पर चर्चा करना चाहते थे. जब हमने कहा कि उन्हें बोलने दीजिए, तो हम वेल में आए, नारे लगाए और आपने हमें निलंबित कर दिया.”

उन्होंने कहा कि विपक्षी सांसद कोई स्कूल के छात्र नहीं हैं जिन्हें लंबे समय तक सजा देकर रखा जाए. उन्होंने कहा, “एक दिन हुआ, दो दिन हुए, लेकिन हम कोई स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थी नहीं हैं. वहां भी शिक्षक एक-दो दिन की सजा देकर छोड़ देते हैं.”

उन्होंने आगे कहा कि, “निशिकांत दुबे साहब, यह सदन किसी के बाप का नहीं है. यह सदन हम सबका है. बाबा साहब अंबेडकर ने हमें यह अधिकार दिया है कि हम जहां चाहें बैठें, जहां चाहें खाएं, लेकिन गरिमा के साथ. हम आपकी तरह अंदर बैठकर अपने मुंह से आग नहीं उगलते. हम अपनी बात रखते हैं और आगे भी रखते रहेंगे.’

एलपीजी की कमी पर उठाए सवाल

एलपीजी की संभावित कमी को लेकर भी राजा वारिंग ने सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि कई जगहों पर नोटिस जारी किए गए हैं, जिससे लोगों में चिंता का माहौल बन रहा है.

उन्होंने कहा, “तमाम जगहों पर, यहाँ तक कि विश्वविद्यालयों और होटलों में भी नोटिस जारी कर दिए गए हैं. हर तरफ हड़बड़ी का माहौल है. आप ही बता दीजिए कि हम कौन-सी अफवाह फैला रहे हैं. देखिए, हमारी कही हुई बात तब तक असर नहीं करेगी, जब तक एलपीजी की कमी नहीं होगी. अगर हम इस तरह की अफवाह फैलाने की कोशिश भी करें, तो लोग क्यों मानेंगे, जब वास्तव में कोई कमी हुई ही नहीं है?”

नोटिस को लेकर भी उठाया मुद्दा

राजा वारिंग ने कहा कि मंत्रालय की ओर से भेजे गए पत्रों की वजह से ही यह चर्चा शुरू हुई है. उन्होंने कहा, “असल में आपके मंत्रालय की तरफ से जो पत्र भेजे गए हैं, उनके बारे में बात हो रही है. कल राज्यसभा के सदस्य और लवली यूनिवर्सिटी के मालिक, जिनका नाम अशोक जी है, उनसे पूछ लीजिए. उन्हें भारत पेट्रोलियम की ओर से नोटिस गया है. हालांकि उन्होंने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो बच्चे फिर सड़कों पर आ जाएंगे. वे कह रहे थे कि जालंधर में बीस-तीस हजार बच्चे पढ़ते हैं, ऐसे में वे विश्वविद्यालय कैसे चलाएंगे?”

उन्होंने कहा कि अगर एलपीजी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है तो सरकार को स्पष्ट रूप से यह बताना चाहिए. उन्होंने कहा, “हम तो सिर्फ इतना कह रहे हैं कि जो स्थिति बनने वाली है, उसके संकेत दिख रहे हैं. अगर इस तरह के नोटिस आ रहे हैं तो डरने की क्या बात है? अगर आपके पास सिलेंडर है और एलपीजी उपलब्ध है, तो फिर कोई समस्या नहीं है.”

सऊदी से लेकर यूएई तक.ईरान जंग में खाड़ी के किस देश को हुआ कितना नुकसान?

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सीधे तौर पर ईरान जंग में शामिल नहीं होने के बावजूद मिडिल ईस्ट में सबसे ज्यादा यूएई और सऊदी अरब को नुकसान हुआ है. ताजा आंकड़ों से इसका खुलासा हुआ है. सऊदी के कम से कम 5 बिलियन डॉलर का नुकसान इस जंग की वजह से हुआ है.

वो भी सिर्फ ऊर्जा और पर्यटन राजस्व का. इसी तरह यूएई का भी करीब 5 बिलियन डॉलर का नुकसान अब तक हुआ है. इन दोनों देशों के बाद कतर और इराक का नुकसान हुआ है. हालांकि, इराक खाड़ी का मुल्क नहीं है.

फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक ईरान जंग के कारण खाड़ी देशों को ऊर्जा राजस्व के तौर पर 15.1 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है. इनमें सबसे ज्यादा सऊदी को 4.5 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है. सऊदी की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरमाको जंग के कारण ठप पड़ी है.

ईरान जंग से किसे कितना नुकसान?

फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक सऊदी अरब को5 बिलियन डॉलर ऊर्जा राजस्व का नुकसान हुआ है. इसी तरह कतर को 0.5 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है. कुवैत, बहरीन और यूएई को करीब 10 बिलियन डॉलर ऊर्जा राजस्व का नुकसान हुआ है. यह नुकसान होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने की वजह से हुआ है. खाड़ी के देश पूरी दुनिया को ऊर्जा निर्यात करती है.

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के अनुमान के मुताबिक जंग के शुरुआती 10 दिन में अमेरिका 11 बिलियन डॉलर का गोला-बारूद खर्च कर चुका है. अमेरिका इजराइल के साथ मिलकर ईरान पर हमला कर रहा है. इजराइल ने कितने का गोला-बारूद खर्च किया है. इसकी जानकारी अभी नहीं दी गई है.

अमेरिका और इजराइल के हमले की वजह से ईरान के 2000 से ज्यादा आम नागरिकों की मौत हो गई है. इस जंग में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई समेत 40 टॉप कमांडर मारे जा चुके हैं.

GST संग्रह की रफ्तार धीमी, बिलासपुर संभाग ने की लक्ष्य से 1261 करोड़ रुपये की कम वसूली…

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छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर संभाग में जीएसटी वसूली का प्रदर्शन इस बार उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है. अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक शासन ने 2909 करोड़ 31 लाख रुपये का लक्ष्य तय किया था, लेकिन विभाग अब तक सिर्फ 1647 करोड़ 69 लाख रुपये ही वसूल कर पाया है.

यानी लक्ष्य से करीब 1261 करोड़ 62 लाख रुपये कम वसूली हुई है. फरवरी महीने में भी संग्रह निर्धारित लक्ष्य से कम रहा है. आंकड़ों के मुताबिक बिलासपुर के तीनों जोन के अलावा जांजगीर-चांपा, गौरेला-पेंड्रा और मुंगेली जिलों में भी जीएसटी वसूली अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई है. कई स्थानों पर लक्ष्य के मुकाबले बहुत कम राशि प्राप्त हुई है, जिससे राजस्व संग्रह की स्थिति चिंताजनक मानी जा रही है.

जीएसटी वसूली ने विभाग की कार्यप्रणाली पर किए सवाल खड़े

लगातार कम हो रही जीएसटी वसूली अब विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रही है. सूत्रों का कहना है कि कई जगहों पर जांच और कारोबार के वास्तविक आकलन में ढिलाई बरती जा रही है, जिससे राजस्व को नुकसान पहुंच रहा है. यहीं वजह है कि लक्ष्य और वास्तविक वसूली के बीच का अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है. इधर, चालू वित्तीय साल के खत्म होने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है, लेकिन लक्ष्य के मुकाबले वसूली का अंतर अभी भी काफी बड़ा है. ऐसे में विभाग के सामने राजस्व बढ़ाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है.

टैक्स अनुपालन बढ़ाने और जांच को मजबूत करने चलाए जा रहे अभियान

इस संबंध में बिलासपुर जीएसटी के संयुक्त आयुक्त महेंद्र कुमार धनेलिया का कहना है कि विभाग लगातार राजस्व संग्रह बढ़ाने के प्रयास कर रहा है. उनके मुताबिक टैक्स अनुपालन बढ़ाने, जांच और निगरानी को मजबूत करने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं और आने वाले समय में वसूली में सुधार की उम्मीद है. हालांकि विभाग सुधार के दावे कर रहा है, लेकिन मौजूदा आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि बिलासपुर संभाग में जीएसटी वसूली की रफ्तार अभी भी तय लक्ष्य से काफी पीछे चल रही है.