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सीएम विष्णु देव साय की अध्यक्षता में दिशा समिति की बैठक, योजनाओं को लेकर दिए बड़े निर्देश…

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रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में राज्य स्तरीय दिशा समिति की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक में विभिन्न विभागों की केंद्र एवं राज्य पोषित योजनाओं की प्रगति की व्यापक और विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री  साय ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कोई भी पात्र हितग्राही योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे तथा सभी योजनाओं का क्रियान्वयन समयबद्ध और प्रभावी ढंग से सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि दिशा समिति की बैठकें अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं। इन्हीं बैठकों के माध्यम से केंद्र पोषित योजनाओं की नियमित समीक्षा की जाती है। उन्होंने निर्देशित किया कि प्रत्येक 6 माह में दिशा समिति की बैठक अनिवार्य रूप से आयोजित की जाए। उन्होंने बताया कि 26 विभागों के अंतर्गत कुल 81 योजनाएँ संचालित हो रही हैं। मुख्यमंत्री ने सांसदों से आग्रह किया कि वे जिले स्तर पर आयोजित प्रत्येक तिमाही दिशा समिति की बैठकों में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बैठक की नियमितता, बेहतर समन्वय और समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह समिति विकास कार्यों की दिशा तय करने वाली प्रमुख संस्था है।

मुख्यमंत्री साय ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत संचालित प्रमुख योजनाओं—महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, सांसद आदर्श ग्राम योजना, और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की। बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग से संबंधित पीएम जनमन, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तथा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की स्थिति पर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री  साय ने निर्देशित किया कि शत-प्रतिशत पात्र किसानों को योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जाए और किसी भी पात्र किसान को लाभ से वंचित न रखा जाए। उन्होंने इस दौरान वनभूमि पट्टाधारियों के एग्रीस्टेक पंजीयन की स्थिति की भी जानकारी ली।

मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के सहयोग से प्रारम्भ हुई डेयरी समग्र विकास योजना की समीक्षा के दौरान धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को शीघ्र लक्ष्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने अनुसूचित जनजाति के हितग्राहियों के साथ-साथ पारंपरिक रूप से दुग्ध उत्पादन करने वाले किसानों को भी योजना से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि योजना को बढ़ावा मिले और अधिक से अधिक किसान लाभान्वित हों। नगरीय प्रशासन विभाग की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), मिशन अमृत, तथा प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के अंतर्गत प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने शहरी आवास निर्माण में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने पर विशेष ज़ोर दिया।

मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के अंतर्गत जारी आयुष्मान कार्ड एवं वय वंदन कार्ड की संख्या पर विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने नियद नेल्ला नार क्षेत्र के गांवों में विशेष अभियान चलाकर आयुष्मान कार्ड उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए। साथ ही आयुष्मान कार्ड से जुड़ी शिकायतों पर कठोर कार्रवाई करने और हितग्राहियों की सुविधा के लिए राज्य-स्तरीय हेल्पलाइन नंबर जारी करने की आवश्यकता पर बल दिया। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना एवं पोषण योजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने मध्याह्न भोजन की उत्कृष्ट गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वस्थ महिला और स्वस्थ बच्चे ही स्वस्थ प्रदेश के विकास का आधार हैं। उन्होंने ‘न्योता भोज’ पहल की निरंतरता की जानकारी ली और जनप्रतिनिधियों तथा अधिकारियों को सक्रिय सहभागिता के लिए प्रोत्साहित किया। मुख्यमंत्री ने टेलिकॉम सेक्टर में भारत नेट परियोजना की प्रगति धीमी होने पर गहरी नाराज़गी व्यक्त की। उन्होंने फाइबर नेटवर्क का कार्य शीघ्र पूर्ण करने और बस्तर एवं सुदूर क्षेत्रों में नेटवर्क विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। बैठक में रेलवे द्वारा किए जा रहे कार्यों की स्थिति की जानकारी भी ली गई। बैठक में राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह, विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम, विधायक ईश्वर साहू, मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, पंचायत विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, मुकेश बंसल, बसव राजू एस. सहित विभागों के भारसाधक सचिव एवं सदस्यगण उपस्थित थे।

37 नक्सली करेंगे आत्मसमर्पण, DGP की मौजूदगी में डालेंगे हथियार…

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नक्सल मोर्चे पर सुरक्षा एजेंसियों को एक और बड़ी सफलता मिलने जा रही है। जानकारी के अनुसार, हैदराबाद में आज कुल 37 नक्सली आत्मसमर्पण करने वाले हैं, जिससे नक्सल संगठन को बड़ा झटका लगने वाला है। इन सभी नक्सलियों का आत्मसमर्पण तेलंगाना के डीजीपी के सामने होगा। दोपहर 3 बजे तेलंगाना डीजीपी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी आधिकारिक जानकारी देंगे। आत्मसमर्पण करने वालों में नक्सल केंद्रीय कमेटी के सदस्य आज़ाद उर्फ अप्पासी नारायण भी शामिल है, जिसे नक्सली संगठन के शीर्ष नेतृत्व में अहम माना जाता है। इसके अलावा, नक्सली कमांडर हिडमा का नज़दीकी सहयोगी एर्रा भी सरेंडर करने वाला है, जिसे सुरक्षा बल लंबे समय से तलाश रहे थे।

एसआईआर (SIR) मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने जारी किया आदेश

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रायपुर: देशभर के 12 राज्यों में इन दिनों एसआईआर यानी मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण का काम द्रुत गति से जारी है। छत्तीसगढ़ में भी सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण में बीएलओ जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्देशन और मार्गदर्शन में घर-घर जा रहे हैं। वे मतदाताओं का भौतिक सत्यापन कर रहे हैं और आवश्यक दस्तावेजों की जाँच भी कर रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया में मतदाताओं को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए निर्वाचन आयोग समय-समय पर महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी कर रहा है।

इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने एक अहम आदेश जारी किया है। कुछ दिनों पहले मतदाताओं के बीच यह अफवाह फैल गई थी कि एसआईआर के लिए व्हाइट बैकग्राउंड वाली फोटो देना जरूरी है। हालांकि मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि फॉर्म में फोटो धुंधली या खराब हो तो नया फोटो दिया जा सकता है, लेकिन सभी मतदाताओं को फोटो देने की आवश्यकता नहीं है। बूथ लेवल अधिकारी अपने मोबाइल से भी फोटो लेकर अपलोड कर सकते हैं।

बता दें कि छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण के दूसरे चरण की प्रक्रिया 4 नवंबर से शुरू हो चुकी है। बीएलओ घर-घर जाकर सर्वे कार्य कर रहे हैं। यदि आपका नाम 2003 की एसआईआर सूची में है तो आपको कोई दस्तावेज देने की जरूरत नहीं है और आपका नाम नए मतदाता सूची में शामिल हो जाएगा। यदि आप तब 18 वर्ष के नहीं थे या किसी अन्य जिले या राज्य में निवास करते थे और 2003 की सूची में आपका नाम नहीं आया था, तब भी घबराने की जरूरत नहीं है। यदि 2003 की लिस्ट में देश के किसी भी राज्य में आपके माता-पिता का नाम है तो भी आपको दस्तावेज नहीं देने होंगे।

लेकिन अगर 2003 की लिस्ट में न आपका नाम है और न ही आपके माता-पिता का, तो आपको अपनी नागरिकता साबित करनी होगी। इसके लिए इलेक्शन कमीशन ने 13 प्रकार के दस्तावेजों की सूची जारी की है, जिन्हें दिखाने के बाद ही आपका नाम नए मतदाता सूची में शामिल हो सकेगा। एक महीने तक घर-घर सर्वे चलेगा, उसके बाद एक महीने तक दावा-आपत्ति पर सुनवाई होगी और फिर फाइनल लिस्ट जारी की जाएगी। यदि एसआईआर प्रक्रिया में आपका नाम कट जाता है, तो पहले कलेक्टर और फिर मुख्य निर्वाचन कार्यालय में अपील कर सकते हैं।

जारी दस्तावेजों की सूची में केंद्र या राज्य सरकार/पीएसयू के नियमित कर्मचारी या पेंशनर्स को जारी पहचान पत्र, 1 जुलाई 1987 से पहले जारी कोई प्रमाणपत्र, जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट, मैट्रिकुलेशन प्रमाणपत्र, स्थायी निवास प्रमाणपत्र, वन अधिकार प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, NRC से संबंधित प्रमाणपत्र, फैमिली रजिस्टर, भूमि या मकान आवंटन प्रमाणपत्र और आयोग की दिशा-निर्देश पत्र संख्या 23/2025-ERS/Vol.II के तहत आधार कार्ड संबंधित निर्देश शामिल हैं।

SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन 1951 से 2004 के बीच आठ बार हुआ था और अंतिम बार 2004 में किया गया था। यह प्रक्रिया वोटर लिस्ट को माइक्रो लेवल पर शुद्ध करने के लिए होती है। इसमें मृत्यु, स्थायी रूप से शिफ्ट हुए, डुप्लीकेट वोटर, घुसपैठियों, लापता वोटरों और विदेशी वोटरों की पहचान कर उनके नाम हटाए जाते हैं।

इसलिए जरूरी हो गया क्योंकि लंबे समय से यह प्रक्रिया नहीं हुई थी और वोटर लिस्ट में काफी त्रुटियां बढ़ गई थीं। इसी वजह से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इसे शुरू करने का निर्णय लिया। पहले चरण में बिहार में एसआईआर पूरी हो चुकी है। दूसरे चरण में यूपी और पश्चिम बंगाल समेत 12 राज्यों में इसका काम चल रहा है और तीसरे चरण में बाकी राज्यों में इसे शुरू किया जाएगा।

कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय गिरफ्तार…

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रायपुर: साइंस कॉलेज मैदान स्थित चौपाटी को हटाए जाने के विरोध में समर्थकों और दुकानदारों के साथ पूरी रात धरना देने वाले कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस उन्हें अपने साथ सेंट्रल जेल लेकर पहुंची हुई है। इस दौरान उनके साथ बड़ी संख्या में समर्थक भी मौजूद हैं। दूसरी तरफ नगर निगम के दल ने पुलिस के सहयोग से चौपाटी हटाए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

पूरी रात धरने पर बैठे रहे विकास उपाध्याय

बता दें कि एनआईटी के सामने स्थित चौपाटी को हटाए जाने के आदेश के बाद विकास उपाध्याय अपने समर्थकों और दुकानदारों के साथ चौपाटी स्थल में ही पूरी रात धरने पर बैठे रहे। वहीं जब आज दस्ता और पुलिस क्रेन लेकर चौपाटी पहुंचे तो उनका सामना विकास उपाध्याय और उनके समर्थकों से हो गया। दोनों पक्षों के बीच जमकर झूमाझटकी हुई। विकास उपाध्याय अपने साथियों के साथ क्रेन के सामने ही लेट गए थे। मौजूद लोगों ने राजेश मूणत के खिलाफ भी नारेबाजी की। विकास ने दावा किया है कि एक नेता की जिद की वजह से चौपाटी हटाई जा रही है। वह इसका पुरजोर विरोध करते हैं।

वही चौपाटी विस्थापन और इसके विरोध में हो रहे आंदोलन पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा है कि, लोकतंत्र में विरोध करना स्वाभाविक है, लेकिन कांग्रेस अपनी राजनीति के बारे में विचार करें। वो किस दिशा में जाना चाहते है, किस विषय में क्या सोचते हैं यह समझ से बाहर है। सत्ता में रहते हैं तो अलग, विपक्ष में रहते हैं तो अलग बात करते है। यह कांग्रेस के दोहरे चरित्र को दर्शाता है।

“भाजपा और मीडिया के जाल में न फंसें विधायक, कर्नाटक पर कांग्रेस हाईकमान की नसीहत”

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कर्नाटक में बतौर मुख्यमंत्री बने हुए सिद्धारमैया को ढाई साल पूरे हो गए हैं। इसके बाद डीके शिवकुमार के सीएम बनने की अटकलें तेज होने लगी हैं। शिवकुमार के करीबी विधायकों और मंत्री ने दिल्ली में डेरा जमा लिया है, जबकि सिद्धारमैया ने साफ किया कि वे ही पांच साल तक सीएम बने रहेंगे।

ऐसे में कांग्रेस हाईकमान ने दोनों नेताओं से बात करके नसीहत दी है और विधायकों को भाजपा व मीडिया के जाल में नहीं फंसने के लिए कहा है।

पार्टी के वरिष्ठ सांसद रणदीप सुरजेवाला ने कहा है कि कर्नाटक के सीएम और डिप्टी सीएम से बात हुई और वे इस बात पर सहमत हुए कि बुरी तरह हारी हुई और गुटों में बंटी कर्नाटक भाजपा, मीडिया के एक हिस्से के साथ मिलकर, जानबूझकर कर्नाटक और उसकी कांग्रेस सरकार के खिलाफ बदनाम करने वाला कैंपेन चला रही है।

उन्होंने एक्स पर आगे कहा, ”इसका एकमात्र मकसद शानदार कामयाबियों और पांच कांग्रेस सरकार की गारंटी को कमजोर करना है, जो सबको साथ लेकर चलने वाले विकास और सबको साथ लेकर चलने वाले न्याय का एक शानदार मॉडल बन गए हैं। कुछ कांग्रेस नेताओं और विधायकों के बेवजह के बयानों ने भी अटकलों को और बढ़ा दिया है। कांग्रेस ने उन्हें लीडरशिप के मुद्दे पर कोई भी पब्लिक बयान देने या अपने फायदों के लिए चलाए जा रहे एजेंडे में न आने की सख्त चेतावनी दी है। पार्टी के अलग-अलग नेताओं की राय पर लीडरशिप ने ध्यान दिया है।’

वहीं, डीके शिवकुमार का कहना है कि सभी 140 विधायक मेरे हैं। ग्रुप बनाना मेरे खून में नहीं है। सीएम ने कैबिनेट में फेरबदल करने का फैसला किया। हर कोई मंत्री बनना चाहता है, इसलिए उनके लिए दिल्ली में लीडरशिप से मिलना काफी स्वाभाविक है। यह उनका अधिकार है। हम उन्हें रोक नहीं सकते और ना नहीं कह सकते। मुख्यमंत्री ने कहा है कि वह 5 साल पूरे करेंगे। मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं। हम सब उनके साथ काम करेंगे। सीएम और मैंने ने बार-बार कहा है कि हम हाईकमान की बात मानते हैं।

“Tejas Crash Dubai Air Show: तेजस फाइटर जेट दुबई एयर शो में क्रैश, पायलट की मौत;

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तेजस फाइटर जेट दुबई एयर शो में क्रैश हो गया है। भारतीय लड़ाकू विमान के साथ यह हादसा दुबई के स्थानीय समयानुसार दोपहर 2 बजकर 10 मिनट पर हुआ। यह हादसा उस वक्त हुआ, जब दुबई एयर शो में तेजस फाइटर जेट अपने करतब दिखा रहा था।

इसका सोशल मीडिया पर वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें पायलट को कूदते हुए नहीं देखा गया। वहीं एयरफोर्स ने एक ट्वीट में बताया है कि पायलट की इस दुखद हादसे में मौत हो चुकी है। वीडियो में दिखता है कि तेजस फाइटर जेट अचानक ही नीचे की ओर आता है और फिर संभलता नहीं दिखता। क्रैश होने के बाद आसमान काले धुंए से भर जाता है और आग की भीषण लपटें उठती दिखती हैं। तेजस फाइटर जेट के क्रैश होने की यह दूसरी घटना है। इससे पहले 2024 में जैसलमेर में भी तेजस ऐक्सिडेंट का शिकार हो गया था।

दुबई एयर शो में भारत की ओर से भी कई लड़ाकू विमानों को यहां उतारा गया था, जिनमें से एक तेजस फाइटर जेट भी था। इस हादसे ने तेजस फाइटर जेट को लेकर भारत की उम्मीदों को झटका दिया है। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत की ओर से इस फाइटर जेट के निर्यात की भी कोशिशें की जा रही हैं। अमेरिका समेत कई देश इसे खरीदने में अपनी दिलचस्पी दिखाते रहे हैं। इसे भारतीय रक्षा कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिकल्स लिमिटेड की ओर से तैयार किया गया है। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि क्रैश होने से पहले तेजस फाइटर जेट एक मील की दूरी तक नीचे की दिशा में उतरता दिखा।

एयरफोर्स ने ट्वीट करके क्या जानकारी दी

इस घटना की जानकारी देते हुए एयरफोर्स ने भी एक ट्वीट किया है। एयरफोर्स ने बताया है कि इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में पायलट की मौत हो गई है। वायुसेना ने कहा कि हादसे में पायलट की जान चली गई है और हमारी संवेदनाएं पीड़ित परिवार के साथ हैं। इस हादसे की जांच के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी का गठन किया गया है ताकि पता चल सके कि घटना के क्या कारण रहे।

हादसे की क्या वजह रही? जांच का इंतजार

इस हादसे की जांच का इंतजार है और उसके बाद ही यह कहा जा सकता है कि दुर्घटना की क्या वजह रही है। यह हादसा दुबई के अल मख्तूम इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुआ। इस दौरान हजारों लोग एयर शो को देखने के लिए मौजूद थे। हादसे के बाद एयरपोर्ट के आसपास सायरन की आवाजें सुनी जा सकती हैं। अब तक यह जानकारी नहीं मिली है कि क्या इस फाइटर जेट की चपेट में आने से कोई और हताहत हुआ है या नहीं।

“बिहार जीतकर भी BJP के सामने पूरब में एक बड़ी चुनौती, PM कर चुके इशारा; 10 सूत्री घेराबंदी की तैयारी”

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हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। 243 सदस्यों वाली विधानसभा में पार्टी ने 89 सीटें जीती हैं, जबकि सहयोगी जेडीयू ने 85 सीटें जीती हैं।

अन्य तीन सहयोगियों ने कुल 28 सीटें जीती हैं। राज्य में फिर से NDA सरकार बनने से भाजपा गदगद है लेकिन उसे पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल की चिंता सता रही है, जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। बिहार में प्रचंड जीत के बाद अब पश्चिम बंगाल पर भाजपा की पैनी नजर है। भाजपा की चाहत है कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी के इस राज्य में अपने दम पर सरकार बनाए और वहां भगवा झंडा लहराए, ताकि पूरब से पश्चिम तक उसका डंका और तेज बज सके।

2021 में हुए बंगाल विधानसभा चुनावों में हिन्दुत्व की धार पर भाजपा सत्ता में आने के सपने देख रही थी लेकिन वह मुख्य विपक्षी पार्टी ही बन पाई। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने पांच साल पहले हुए उस चुनाव को बंगाली अस्मिता का चुनाव बना दिया था और भाजपा को बाहरी करार देकर चुनावों में न सिर्फ जीत हासिल की थी बल्कि सत्ता में वापसी की हैट्रिक भी लगाई थी।

PM मोदी ने क्या कहा?

पार्टी उस हार को भुला नहीं पाई है। अगले साल होने वाले चुनाव को एक बदलाव की बयार के रूप में देख रही है और हर हाल में जीत के मंसूबे पाल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बिहार जीत के बाद भाजपा के ऐसे इरादों को साफ कर दिया है। 14 नवंबर को बिहार में हुई प्रचंड जीत के बाद अपने संबोधन में उन्होंने बंगाल का जिक्र किया था। PM ने कहा था, “बिहार में जीत ने बंगाल में BJP की जीत का रास्ता बना दिया है। मैं पश्चिम बंगाल के लोगों को भरोसा दिलाना चाहता हूँ कि आपके समर्थन से BJP वहां भी जंगल राज खत्म कर देगी।”

जी-जान से जुटी बंगाल भाजपा

लिहाजा, भाजपा बंगाल फतह करने की तैयारियों में जी जान से जुटी हुई है। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भाजपा बंगाल में जीत के लिए 10 मुद्दों पर फोकस कर रही है और उन्हें अपनी कैम्पेन थीम में शामिल किया है। इन 10 मुद्दों में राज्य की खराब कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार, अवैध घुसपैठिए, राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था का उल्लंघन भी शामिल है। इसके अलावा बंगाली अस्मिता और बाहरी व स्थानीय का मुद्दा भी शामिल है। भाजपा ने स्थानीय नेताओं को इन मुद्दों के बारे में बता दिया है।

हर हफ्ते मीटिंग कर रहे भूपेंद्र यादव

सूत्रों के मुताबिक, भाजपा के पश्चिम बंगाल चुनाव प्रभारी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव हर हफ्ते चुनावी तैयारियों पर नजर रखने के लिए कोलकाता में नेताओं के एक कोर ग्रुप के साथ मीटिंग करते हैं। उन्होंने राज्य भर के 80,000 बूथों पर पार्टी वर्कर्स को संगठन मजबूत करने की ज़िम्मेदारी दी है। पार्टी के एक सूत्र ने बताया है कि इस वक्त भाजपा की सबसे बड़ी चुनौती “बाहरी” टैग से छुटकारा पाना है, जिसे ममता बनर्जी ने 2021 के चुनाव में भाजपा के खिलाफ इस्तेमाल किया था और कामयाबी हासिल की थी।

बाहरी और बंगाली अस्मिता के मुद्दे पर आर-पार

ममता बनर्जी ने 2021 के चुनाव को बाहरी बनाम बंगाल की बेटी (TMC का चुनावी नारा था बांग्ला निजेर मेये के चाहिए, यानी बंगाल अपनी बेटी चाहता है) के बीच मुकाबला बना दिया था। जख्मी ममता पैर में प्लास्टर चढ़ाए हुए चुनावी मंचों से बंगाली अस्मिता और बंगाल की बेटियों को ललकारती नजर आती थीं। पार्टी के एक नेता ने एक्सप्रेस को बताया, “पिछली बार, हमने कई गलतियां कीं। BJP के बाहरी लोगों की पार्टी होने के TMC के कैंपेन का मुकाबला करने के लिए कोई ज़ोरदार कोशिश न करना एक बड़ी गलती थी।” लेकिन अब समिक भट्टाचार्य की लीडरशिप में पार्टी की प्रदेश इकाई श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विरासत को लेकर आगे बढ़ने जा रही है और लोगों से कनेक्ट करने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी जनसंघ से होते हुआ भाजपा तक की विचारधारा को बंगाली संस्कृति से जोड़ने की कोशिशों में जुट गई है। यानी बाहरी और बंगाली अस्मिता, दोनों मुद्दों पर पार्टी आर-पार को तैयार है।

“Delhi Blast: सीरियाई हैंडलर, तुर्की मीटिंग, 40 ट्यूटोरियल और ‘कर्नल’… NIA ने दिल्ली ब्लास्ट के पीछे ढूंढे विदेशी सुराग”

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नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने दिल्ली ब्लास्ट के पीछे एक बड़े विदेशी टेरर नेटवर्क का पता लगाया है, जिसमें विदेशी हैंडलर्स की एक चेन, रेडिकलाइजेशन रूट्स और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन का पता चला है।

सूत्रों ने बताया कि दिल्ली ब्लास्ट में सुसाइड बॉम्बर डॉ. उमर नबी, जिसमें 15 लोगों की जान गई थी, पाकिस्तानी हैंडलर उकाशा (Pakistani handler Ukasha) के कहने पर 2022 में दूसरे आरोपियों के साथ तुर्की में एक सीरियाई टेरर ऑपरेटिव से मिला था।

उन्होंने बताया कि तुर्की मीटिंग के बाद, उमर ने फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी में एडमिशन ले लिया। पिछले हफ्ते शाम को लाल किला इलाके के पास डॉ. उमर की चलाई जा रही एक धीमी रफ्तार वाली हुंडई i20 में धमाका हुआ। यह धमाका हरियाणा के फरीदाबाद में सिक्योरिटी एजेंसियों द्वारा एक ‘व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल’ का भंडाफोड़ करने के कुछ घंटों बाद हुआ, जिसमें 2,900 kg एक्सप्लोसिव बरामद हुए और तीन डॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया।

दिल्ली बॉम्बर उमर, डॉ. मुज़म्मिल, डॉ. अदील और डॉ. मुजफ्फर राथर के साथ, 2022 में एक सीरियाई के साथ सीक्रेट मीटिंग के लिए तुर्की गया था, जिसके बारे में माना जाता है कि वह एक बड़े टेरर ग्रिड का हिस्सा है।

‘उसे एक ‘बड़े ऑपरेशन’ में हिस्सा लेना होगा’

सूत्रों ने बताया कि सीरियाई हैंडलर, जिसे ‘बहुत ट्रेंड ऑपरेटिव’ बताया गया है, ने उमर को यकीन दिलाया कि उसे एक ‘बड़े ऑपरेशन’ में हिस्सा लेना होगा। सूत्रों के मुताबिक, जांचकर्ताओं का मानना है कि यह मीटिंग उकाशा नाम के एक खास हैंडलर के कहने पर तय की गई थी। उन्होंने बताया कि उकाशा के अलावा, दूसरे हैंडलर की पहचान हंजुल्लाह के तौर पर हुई है।

टेरर मॉड्यूल पर काम करने लगा

वहां से लौटने के बाद उमर अल फलाह यूनिवर्सिटी में शामिल हो गया और टेरर मॉड्यूल पर काम करने लगा। सूत्रों ने बताया कि विदेशी हैंडलर्स ने एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया एप्लीकेशन के ज़रिए मुजम्मिल को 40 से ज़्यादा बम बनाने के वीडियो भेजे थे।

विदेशी हैंडलर की पहचान ‘कर्नल’ (Colonel) के तौर पर

उन्होंने बताया कि एजेंसियों की जांच के दायरे में आए एक और विदेशी हैंडलर की पहचान ‘कर्नल’ (Colonel) के तौर पर हुई है। कई लोगों को शक है कि यह ‘कर्नल’ मोहम्मद फैसल है, जिस पर कर्नाटक में इंजीनियरिंग के छात्रों को कट्टरपंथी बनाने का आरोप है। एक छद्म नाम जो दक्षिण भारत में कई हमलों से जुड़ा है, जिसमें 2024 में रामेश्वरम ब्लास्ट, मैंगलोर में एक ऑटोरिक्शा में प्रेशर कुकर ब्लास्ट और 2022 में कोयंबटूर ब्लास्ट शामिल हैं।

“‘दुर्भाग्य देखिए, घुसपैठियों को बचाने के लिए यात्रा लेकर…’ SIR पर ममता बनर्जी के पत्र पर भड़के अमित शाह”

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SIR Row: पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर घमासान मचा हुआ है। ममता बनर्जी इस प्रक्रिया के खिलाफ गुरुवार को चुनाव आयोग को पत्र लिख चुकी हैं। वहीं, दूसरी ओर बीजेपी ने दो टूक कहा है कि चाहे कुछ भी हो बंगाल में एसआईआर होकर रहेगा।

इसी बीच गृह मंत्री अमित शाह ने एसआईआर प्रक्रिया पर जोर देते हुए कहा कि यह प्रक्रिया देश के लिए जरूरी है।

उन्होंने एक्स पर लिखा, भारत में घुसपैठ को रोकना न केवल देश की सुरक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रदूषित होने से बचाने के लिए भी घुसपैठ को रोकना जरूरी है। मगर दुर्भाग्य की बात है, कुछ राजनीतिक दल इन घुसपैठियों को बचाने के लिए यात्रा लेकर निकले हैं, और चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची में जो शुद्धिकरण का काम हो रहा है, उसके खिलाफ हैं।

अवैध वोट बैंक को बचाने की कोशिश कर रही टीएमसी: बीजेपी

इससे पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निर्वाचन आयोग को ”कमजोर” करने और ”एक अवैध वोट बैंक को बचाने” की कोशिश करने का आरोप लगाया, जिसे उनकी पार्टी ने ”वर्षों तक पोषित” किया।

पत्र भ्रामक, राजनीति से प्रेरित: शुभेंदु अधिकारी

विधानसभा में विपक्ष की नेता ने बृहस्पतिवार देर रात चार पृष्ठों के अपने जवाबी पत्र के साथ पलटवार करते हुए बनर्जी के पत्र को ”भ्रामक, राजनीति से प्रेरित और तथ्यात्मक रूप से विकृत” बताया। अधिकारी ने कहा, ”मुख्यमंत्री का पत्र चुनाव अधिकारियों के बीच मतभेद पैदा करने, भारत निर्वाचन आयोग के संवैधानिक जनादेश को बदनाम करने और अयोग्य एवं अवैध तत्वों के वोट बैंक की रक्षा करने का एक सोचा-समझा प्रयास है, जिसे उनकी सरकार ने वर्षों से पोषित किया है।”

ममता बनर्जी ने पत्र में क्या लिखा?

ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग को एक पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को ”अराजक और बलपूर्वक” बताया था। अपने आक्रामक लहजे में उन्होंने बनर्जी पर बूथ स्तर के अधिकारियों को ”धमकाने” और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ ”अस्वीकार्य आक्षेप” लगाने का आरोप लगाया।

“‘ये नंबर पहलगाम अटैक में जुड़ा है, IB ऑफिस आओ’, रायपुर के पूर्व MLA को अज्ञात नंबर से कॉल, फिर जो हुआ…”

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दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के विधायक और पूर्व सांसद सुनील सोनी को अज्ञात कॉलर द्वारा धमकी दिए जाने का मामला सामने आया है। मिली जानकारी के अनुसार यह कॉल बुधवार शाम आया था, जिसमें कॉलर ने खुद को इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) का अधिकारी बताते हुए गंभीर आरोप लगाए।

सूत्रों के मुताबिक कॉलर ने सोनी से कहा कि उनका मोबाइल नंबर पहलगाम, कश्मीर में हुए आतंकी हमले की जांच के दौरान ट्रेस हुआ है और इसी नंबर से संदिग्ध कॉल किए गए हैं। कॉलर लगातार दबाव बनाते हुए सोनी को पूछताछ के लिए आईबी कार्यालय तलब करने की बात कहता रहा। जब विधायक सोनी ने अपनी पहचान बताई और जानकारी को खारिज किया, तब भी कॉलर अपनी बात पर अड़ा रहा और लंबी बातचीत के जरिए उन्हें भ्रमित करने की कोशिश करता रहा।

कॉल कटने के तुरंत बाद विधायक सुनील सोनी ने पूरे मामले की जानकारी रायपुर एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह को दी। पुलिस इसे डिजिटल अरेस्ट और ठगी का प्रयास मानकर जांच में जुट गई है। अधिकारियों के अनुसार इस तरह के कॉल ठगों द्वारा फर्जी पहचान बनाकर लोगों से जानकारी लेने और आर्थिक ठगी का प्रयास करने का हिस्सा होते हैं।

फिलहाल पुलिस कॉलर के नंबर और लोकेशन की जांच कर रही है। मामले को साइबर सेल को भी सौंपा गया है। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि ऐसे किसी भी संदिग्ध कॉल पर विश्वास न करें और तुरंत पुलिस को सूचना दें।