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” उत्तर भारत में ठंड ने पकड़ी रफ्तार, तापमान 2 डिग्री तक गिरा, दिसंबर से बढ़ेगी शीतलहर की मार”

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दिल्ली और उत्तर भारत में ठंड ने समय से पहले दस्तक दे दी है. मौसम विशेषज्ञ डॉ. अखिल श्रीवास्तव के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम भारत में न्यूनतम तापमान 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया है, जो इस सीजन के औसत से काफी नीचे है. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में यही ठंडक बनी रहेगी और दिसंबर से फरवरी के बीच शीतलहर की स्थिति और तेज हो सकती है. फिलहाल बारिश की कोई संभावना नहीं है, जिससे ठंडी हवाएं और खुले आसमान के चलते तापमान में और गिरावट दर्ज की जा रही है. दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के कई हिस्सों में सुबह और देर शाम कड़ाके की ठंड महसूस की जा रही है. मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले हफ्तों में उत्तर भारत को लंबे ठंडे मौसम के लिए तैयार रहना होगा.

“सरकार का दावा! 6.8 फीसदी से ज्‍यादा होगी देश की विकास दर, किसानों ने एक बार फिर दिखाया दम, दूसरे सेक्‍टर भी मजबूत”

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देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन ने शुक्रवार को चालू वित्तवर्ष में देश की आर्थिक वृद्धि दर 6.8 फीसदी से अधिक रहने का भरोसा जताया. उन्‍होंने कहा कि जीएसटी दरों में कटौती और इनकम टैक्‍स में राहत से उपभोक्‍ताओं के खपत में आई तेजी इसका मुख्य कारण है.

इसी साल की शुरुआत में संसद में पेश आर्थिक समीक्षा में वित्तवर्ष 2025-26 के लिए वास्तविक आर्थिक वृद्धि दर 6.3 से 6.8 फीसदी के बीच रहने का अनुमान लगाया गया था.

‘ग्लोबल लीडरशिप समिट 2025’ में कहा कि 6.8 फीसदी से ऊपर की दर सहजता से नजर आ रही है. अमेरिका के टैरिफ लगाने के बाद अगस्त में हमें चिंता थी कि हम 6 से 7 फीसदी की सीमा के निचले स्तर तक ही रह जाएंगे लेकिन अब यह स्पष्ट है कि वृद्धि दर 6.5 फीसदी से अधिक होगी और संभवतः 6.8 फीसदी से भी ऊपर जा सकती है. हालांकि, 7 फीसदी का आंकड़ा कहने से पहले दूसरी तिमाही के आंकड़ों का इंतजार रहेगा.

एग्रीकल्‍चर सेक्‍टर ने फिर दिखाई मजबूती

देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर चालू वित्तवर्ष की पहली तिमाही में 7.8 फीसदी रही थी. यह वृद्धि मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन और व्यापार, होटल, वित्तीय सेवाओं एवं रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों की मजबूती से हासिल हुई. पिछली सर्वाधिक 8.4 फीसदी की जीडीपी वृद्धि दर जनवरी-मार्च 2024 में दर्ज की गई थी. अनुमान है कि आगे भी एग्रीकल्‍चर सेक्‍टर का मजबूत प्रदर्शन जारी रहेगा, जो जीडीपी में अच्‍छा-खास योगदान देता है.

कितनी है चीन की विकास दर

चीन की वृद्धि दर पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में 5.2 फीसदी रही थी. इस तरह भारत अब भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है. नागेश्वरन ने कहा कि यदि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता (बीटीए) संपन्न हो जाता है तो आर्थिक वृद्धि को अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा. उन्‍होंने कहा कि अगर व्यापार मोर्चे पर कोई समाधान निकल आता है, तो वृद्धि का अनुमान और ऊंचा हो सकता है. साथ ही समझौता जल्द पूरा होने की उम्मीद जताई लेकिन इसकी कोई समयसीमा नहीं बताई.

क्‍यों भारत के सामने आई चुनौती

फिलहाल अमेरिका ने 27 अगस्त से भारत से आयातित वस्तुओं पर 50 फीसदी का ऊंचा शुल्क लगा रखा है जिसमें रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण 25 फीसदी का अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क भी शामिल है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 7 अगस्त को यह सीमा शुल्क लगाते हुए कहा था कि भारत ने रूस से तेल आयात जारी रखकर और व्यापार बाधाओं को बनाए रखकर अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाया है. हालांकि, अमेरिका के नए प्रतिबंधों के बाद भारत ने रूस से तेल खरीद कम कर दी है और अमेरिका से बढ़ा दी है. ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा कि दोनों देशों के बीच ट्रेड डील जल्‍द ही पूरी हो सकती है.

“बिहार को कट्टा सरकार नहीं चाहिए… पीएम मोदी ने औरंगाबाद की रैली में RJD पर किया वार”

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बिहार में पहले चरण का मतदान पूरा हो चुका है. दूसरे और आखिरी चरण की वोटिंग 11 नवंबर को होनी है. दूसरे चरण के लिए चुनाव प्रचार जोरों पर है. चुनाव प्रचार के लिए पीएम मोदी आज बिहार के औरंगाबाद पहुंचे.

एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा पीएम मोदी ने आरजेडी पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को भी आरजेडी के वादों पर भरोसा नहीं है, इसलिए वह आरजेडी के घोषणापत्र की बात भी नहीं करती. बिहार की जनता और युवाओं ने भी आरजेडी के झूठ के पिटारे को खारिज कर दिया है.

73 साल बाद बिहार में हुई बंपर वोटिंग से बीजेपी वाले इतने खुश क्यों हैं?

ये लोग बच्चों को रंगदार बनाने की बात कर रहे

पीएम मोदी ने आरजेडी पर निशाना साधते हुए कहा कि जंगलराज वाले पहले से ही बच्चों को रंगदार बनाने की बात कर रहे हैं, वो खुलेआम ऐसा कर रहे हैं. ये लोग खुलेआम ऐलान कर रहे हैं कि ‘अगर भैया की सरकार आई तो कट्टा, दुनाली, फिरौती, रंगदारी, यही सब चलेगा.’ बिहार को कट्टा सरकार नहीं चाहिए, बिहार को कुशासन वाली सरकार नहीं चाहिए.

RJD-कांग्रेस पर पीएम मोदी का हमला

पीएम मोदी ने आरजेडी पर निशाना साधते हुए कहा कि ये लोग नौकरी के बदले जमीन लिखवाते थे. हमने बिहार में 60 लाख गरीबों को पक्का आवास दिया. कांग्रेस पर हमलावर पीएम मोदी ने कहा कि आप याद रखिए जब आपने नीतीश कुमार को यहां मौका दिया, उनके कार्यकाल के शुरुआती 9 साल दिल्ली में RJD और कांग्रेस की सरकार थी. दिल्ली में बैठे इन लोगों ने दिन-रात एक ही काम किया. उन्होंने लगातार बिहार के विकास में बाधा डाली और नीतीश कुमार को काम करने से रोका. 2014 में जब बिहार में पहली बार डबल इंजन की सरकार बनी, तो हमने बिहार के विकास के लिए तीन गुना ज़्यादा पैसा दिया.

ये लोग बिहार के युवाओं को नौकरी नहीं दे सकते

जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पिछले कुछ सालों में बिहार में लाखों भर्तियां हुई हैं,ये भर्तियां पूरी ईमानदारी से की गई हैं. जबकि RJD-कांग्रेस का ट्रैक रिकॉर्ड आपके सामने है, ये वो लोग हैं जो नौकरी के बदले जमीन अपने नाम करवा लेते हैं, ये खेल खेला गया. कोर्ट ने भी माना और आज ये जमानत पर बाहर हैं. ये जंगलराज के लोग जमानत पर बाहर हैं, ये RJD-कांग्रेस के लोग बिहार के युवाओं को कभी नौकरी नहीं दे सकते.

पहले बूथ लूटे जाते थे, गोलियां चलती थीं

पीएम मोदी ने पहले चरण में हुई बंपर वोटिंग पर कहा कि कल हमने जंगलराज और सुशासन के बीच का अंतर देखा. बिहार के दलित, महादलित, पिछड़े और अति पिछड़े सभी ने बिना किसी रोक-टोक के वोट डाला, जबकि हमने जंगलराज का वो दौर भी देखा है जब बूथ लूटे जाते थे, वोटिंग के दिन गोलियां चलती थीं, खून की नदियां बहाई जाती थीं. जंगलराज के गुर्गे आज भी खूब साजिशें रच रहे हैं, लेकिन मैं चुनाव आयोग को पहले चरण का चुनाव इतने अच्छे ढंग से कराने के लिए बधाई देना चाहता हूं.

“वंदे मातरम के 150 साल पूरे! पीएम मोदी ने जारी किया विशेष स्मारक डाक टिकट और सिक्का, राष्ट्रीय एकता का दिया संदेश”

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आज़ादी के आंदोलन से लेकर आज की राष्ट्रीय भावना तक, वंदे मातरम ने भारत की धरती पर देशभक्ति की एक अटूट भावना जगाई है। इस ऐतिहासिक चेतना के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (7 नवंबर, 2025) को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में साल भर चलने वाले भव्य समारोह का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने एक विशेष स्मारक डाक टिकट और स्मारक सिक्का भी जारी किया। इस पहल के माध्यम से, चालू वर्ष के 7 नवंबर से 7 नवंबर 2026 तक, पूरे देश में विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए वंदे मातरम के ऐतिहासिक महत्व और भावनाओं को नए सिरे से याद किया जाएगा।

पीएम मोदी का संदेश: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘एक्स’ हैंडल पर लिखा, “हम वंदे मातरम के उस आह्वान को श्रद्धांजलि दे रहे हैं, जिसने आज भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी देशभक्ति की प्रेरणा दी है।”

उत्सव के हिस्से के रूप में, देश भर के विभिन्न सार्वजनिक स्थानों, शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी भवनों में आज सुबह 9 बजकर 50 मिनट पर आम जनता वंदे मातरम के पूर्ण रूप का सामूहिक गायन करेगी। इसका मुख्य लक्ष्य देश भर में राष्ट्रीय एकता और गौरव की भावना को मजबूत करना है।

1875 का इतिहास: वंदे मातरम की रचना बंगाली साहित्य के प्रमुख लेखक बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में अक्षय नवमी के अवसर पर की थी। यह पहली बार उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ के एक भाग के रूप में उनकी पत्रिका ‘बंगदर्शन’ में प्रकाशित हुआ था। इस गीत में पहली बार भारत माता को शक्ति, समृद्धि और देवी रूपी मातृशक्ति के प्रतीक के रूप में देखा गया था।

समय के साथ, यह गीत स्वतंत्रता संग्राम के लिए विरोध, आत्म-सम्मान और राष्ट्रीय चेतना का घोषणापत्र बन गया। पीएम मोदी ने कहा कि वंदे मातरम सिर्फ एक गीत नहीं है, बल्कि एक भावना और एक शपथ है, जो नई पीढ़ी को अतीत याद दिलाते हुए भविष्य के प्रति प्रतिबद्धता का संदेश दे रही है।

“वंदे मातरम् का ‘खंडन’ ही देश के विभाजन का बीज! 1937 में नेहरू ने क्यों किया था जिन्ना को खुश करने वाला तुष्टिकरण?”

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“वंदे मातरम्” -यह केवल एक गीत नहीं, यह भारत की आत्मा है। यह वह पुकार थी जिसने गुलामी की बेड़ियाँ तोड़ीं, यह वह मंत्र था जिसने अनगिनत क्रांतिकारियों को शहादत की राह पर भेजा।

लेकिन दुर्भाग्य देखिए, उसी “वंदे मातरम्” को, जिसे गाते हुए लाखों लोगों ने फाँसी के फंदे को चूमा, उसे 1937 में “खंडित” कर दिया गया था।और यह किया गया था पंडित जवाहरलाल नेहरू के आदेश पर, सिर्फ़ और सिर्फ़ जिन्ना को खुश करने के लिए।

यह था भारत के इतिहास का सबसे बड़ा आत्मघाती तुष्टिकरण। बताया जाता है कि 1937 में जब जिन्ना ने कहा कि “वंदे मातरम् मुसलमानों को चुभता है,”

तब कांग्रेस के तत्कालीन नेता जवाहरलाल नेहरू झुक गए थे। उन्होंने राष्ट्रगीत के तीन पैराग्राफ को हटा दिया था। ये पैराग्राफ माँ भारती की महिमा, शक्ति और वैभव का वर्णन करते थे। तर्क दिया गया था कि ये पैराग्राफ “हिंदू प्रतीकों” से भरे हैं, इसलिए मुस्लिम लीग असहज है। लेकिन सवाल यह है कि क्या आज़ादी का आंदोलन केवल किसी एक मज़हब का आंदोलन था?

नेहरू ने उस समय “वंदे मातरम्” गीत के शब्दों को ही नहीं काटा था, बल्कि राष्ट्र की आत्मा को भी आघात पहुँचाया था।

देखा जाए तो उसी क्षण भारत की राजनीति में “तुष्टिकरण” का बीज बोया गया, जो आगे चलकर विभाजन के रक्तरंजित पेड़ के रूप में पनपा। प्रधानमंत्री मोदी ने आज ठीक यही बात दोहराई कि “वंदे मातरम् का विभाजन ही देश के विभाजन का बीज था।”

मोदी का यह वक्तव्य एक राजनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक घोषणापत्र था- कि भारत अब आत्मगौरव से समझौता नहीं करेगा। आज की कांग्रेस वही गलती दोहरा रही है, जब राहुल गांधी खुले मंचों पर “वंदे मातरम्” को एक लाइन में सीमित करने की बात करते हैं। यह वही मानसिकता है जिसने कभी जिन्ना को मनाने के लिए भारत की आत्मा को चोट पहुँचाई थी।

विरोध आस्था का नहीं, अलगाव की राजनीति का नशा!

यह दुखद है कि आज भी कुछ मुस्लिम नेता “वंदे मातरम्” को इस्लाम-विरोधी कहकर इसका विरोध करते हैं। AIMIM के नेता खुलेआम कहते हैं कि “बंदूक की नली पर भी वंदे मातरम् नहीं बोलेंगे।”

सवाल उठता है कि क्या यह आस्था का सवाल है, या अलगाव की राजनीति का नशा?

उसी मुस्लिम समाज के भीतर से आने वाले मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, रफ़ी अहमद किदवई, और आरिफ़ मोहम्मद ख़ान जैसे विद्वान इसे भारत की आध्यात्मिक एकता का प्रतीक मानते रहे हैं। एआर रहमान ने इसे विश्व मंच पर माँ भारती की वंदना के रूप में प्रस्तुत किया।

आज अगर कुछ लोग इसे “मज़हबी” चश्मे से देखते हैं, तो दोष गीत का नहीं, दृष्टिकोण का है। जिन्होंने इसका विरोध किया, वही अंततः पाकिस्तान के निर्माण की मांग लेकर आए। और जिन्होंने “वंदे मातरम्” गाया, वही भारत की अखंडता के रक्षक बने।

नेहरू की गलती केवल तीन पदों को हटाने की नहीं थी, बल्कि यह मान लेने की थी कि राष्ट्र की भावना को वोट बैंक के आगे झुकाया जा सकता है।

जो लोग आज भी “वंदे मातरम्” से ऐतराज़ रखते हैं, उन्हें समझना होगा कि “भारत माता” को प्रणाम करना किसी धर्म की वंदना नहीं, बल्कि उस भूमि के प्रति कृतज्ञता है जिसने हमें जन्म दिया। वंदे मातरम्-यही भारत की पहचान है, यही उसकी आत्मा है, और यही उसका भविष्य।

“बिहार चुनाव से ठीक पहले ‘वोट चोरी’ पर राहुल गांधी के दावे: बेबुनियाद आरोप या संवैधानिक संस्थाओं को उकसाने की कोशिश?”

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बिहार में पहले चरण के मतदान से ठीक एक दिन पहले, कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग (EC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गंभीर आरोप  लगाए। उन्होंने हरियाणा विधानसभा चुनाव में ’25 लाख फर्जी वोटों’ के जरिए कांग्रेस की जीत को हार में बदलने का दावा किया और डुप्लीकेट/बल्क वोटर्स के श्रेणीवार आंकड़े पेश किए।

हालांकि, इन आरोपों को लेकर तत्काल विवाद खड़ा हो गया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राहुल गांधी ने जिस वोटर लिस्ट के आधार पर दावा किया, वह मतदान से पहले की थी, जिससे यह सवाल उठा कि उन्हें कैसे पता चला कि इन वोटर कार्ड्स का इस्तेमाल वोटिंग में हुआ। मीडिया की पड़ताल में कुछ दावे झूठे साबित हुए, जैसे कि ‘ब्राज़ीलियन मॉडल’ की तस्वीर वाले वोटर कार्ड की धारक महिला ने सामने आकर दावा किया कि वोटिंग सिर्फ एक बार हुई और गलती तस्वीर मिसप्रिंट होने की थी।

चुनाव आयोग और BJP का पलटवार

बीजेपी ने राहुल गांधी के आरोपों को निराधार बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। वहीं, चुनाव आयोग ने भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस ने हरियाणा की मतदाता सूची के खिलाफ संशोधन के दौरान या बाद में शपथ पत्र देकर कोई शिकायत या अपील दर्ज नहीं करवाई, जबकि बूथ-स्तरीय एजेंट (BLA) ऐसा करने के लिए अधिकृत थे।

आलोचकों का मानना है कि पटना से लगभग 1100 किलोमीटर दूर हरियाणा का मुद्दा उठाकर, राहुल गांधी असल में बिहार में महागठबंधन की संभावित हार की ‘पेशबंदी’ कर रहे थे।

‘जेन-ज़ी’ को उकसाने का आरोप

प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने भारत के ‘जेन-ज़ी’ (Gen-Z) युवाओं से ‘वोट चोरी को रोकने के लिए आगे आने’ की अपील की। बीजेपी ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि राहुल गांधी जानबूझकर युवाओं को सरकार के खिलाफ आंदोलन करने के लिए उकसा रहे हैं, खासकर नेपाल, मोरक्को और बांग्लादेश जैसे देशों में Gen-Z युवाओं के हिंसक प्रदर्शनों और तख्तापलट की हालिया घटनाओं के संदर्भ में। राजनीतिक विश्लेषक डॉ. आशीष वशिष्ठ के अनुसार, राहुल गांधी एक अगंभीर राजनेता के रूप में दिखाई देते हैं, जो बिना ठोस प्रमाण के आरोप लगाकर सिर्फ संवैधानिक संस्थाओं (EC, ED, CBI) के प्रति जनता में नाराजगी का माहौल बनाना चाहते हैं। ‘चौकीदार चोर है’ से लेकर ‘वोट चोरी’ तक, उनके पिछले आरोप बार-बार हवा-हवाई साबित हुए हैं।

सवाल यह है कि अगर कांग्रेस के पास वाकई पुख्ता सबूत हैं, तो वे अदालत का दरवाज़ा खटखटाने या चुनाव आयोग में शपथ पत्र दाखिल करने के बजाय सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों कर रहे हैं? यह रवैया देश में अस्थिरता और अराजकता का माहौल बनाने की विपक्षी रणनीति की ओर इशारा करता है, जो जनता को उकसाकर सत्ता हासिल करने पर यकीन रखती है।

अभिनेता-राजनेता मिथुन चक्रवर्ती ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के खिलाफ तीखा हमला…

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बीजेपी के चुनावी अभियान के तहत पुरुलिया के मंच से अभिनेता-राजनेता मिथुन चक्रवर्ती ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के खिलाफ तीखा हमला बोला। उनकी चेतावनी और विस्फोटक टिप्पणियों ने राज्य की राजनीति में नई गर्मी पैदा कर दी है।

मिथुन की विस्फोटक चेतावनी: मंच पर खड़े होकर, मिथुन चक्रवर्ती ने तृणमूल पर अपने कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए और सीधे चेतावनी दी। उनकी मुख्य टिप्पणियां इस प्रकार थीं:

अस्तित्व का प्रश्न: 2026 के विधानसभा चुनावों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा,

“अगर 2026 में बीजेपी नहीं जीती तो हमारा वजूद खत्म हो जाएगा।”

इस बयान के माध्यम से उन्होंने परोक्ष रूप से तृणमूल पर राजनीतिक रूप से बने रहने के लिए खतरा पैदा करने का आरोप लगाया।

जवाब देने का संदेश: कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उनका कड़ा संदेश था,

“अगर एक गाल पर थप्पड़ पड़े तो उसका जवाब देना होगा।”

इस टिप्पणी से उन्होंने तृणमूल कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए किसी भी कथित हमले का कड़ा प्रतिरोध करने की बात कही है।

राजनीतिक महत्व: मिथुन चक्रवर्ती का यह आक्रामक भाषण मुख्य रूप से तृणमूल के खिलाफ उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं के प्रति कथित राजनीतिक हिंसा और दमनकारी व्यवहार के विरोध में था। पुरुलिया जैसे जंगलमहल जिलों में, जहां चुनावी हिंसा की शिकायतें अक्सर आती हैं, उनके इस बयान को बीजेपी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूर्ण: मंत्रालय महानदी भवन में मनाया गया स्मरणोत्सव…

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रायपुर : राष्ट्रगीत “वंदे मातरम” के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आज मंत्रालय महानदी भवन में “वंदे मातरम् स्मरणोत्सव” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मंत्रालय के अधिकारी एवं कर्मचारियों ने राष्ट्रगीत के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया।

कार्यक्रम के दौरान नई दिल्ली से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के उद्बोधन का सीधा प्रसारण भी देखा गया। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में वंदे मातरम् को देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बताया तथा देशवासियों से राष्ट्रभक्ति की भावना को सदैव जीवित रखने का आह्वान किया। यह उत्सव एक वर्ष तक 7 नवंबर 2025 से 7 नवंबर 2026 तक मनाया जाएगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस अवसर पर स्मारक डाक टिकट और स्मारक सिक्का जारी किया। उन्होंने कहा कि वंदेमातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि मां भारती के प्रति आराधना है।

कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत के सुरों से हुई, जिसके पश्चात् वक्ताओं ने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह गीत स्वतंत्रता संग्राम के समय जन-जन में देशभक्ति की ज्वाला प्रज्वलित करने वाला प्रेरणास्रोत रहा है।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में मंत्रालय के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में “वंदे मातरम” का सामूहिक गायन कर राष्ट्र के प्रति अपनी आस्था और समर्पण की भावना व्यक्त की।

जशपुर जम्बुरी में लोक संस्कृति और प्रकृति का संगम : देशदेखा में पर्यटक झूमे लोक कलाकारों के साथ, चांदनी रात में किया स्टार ग्रेजिंग का आनंद…

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रायपुर : छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में आयोजित जशपुर जम्बुरी 2025 का पहला दिन लोक संस्कृति, आतिथ्य और प्राकृतिक सौंदर्य के रंगों से सराबोर रहा। देशदेखा पहुंचे देशभर के पर्यटक न केवल जशपुर की मनमोहक वादियों में खो गए, बल्कि लोक कलाकारों के साथ पारंपरिक नृत्य और संगीत की थाप पर झूम उठे।

पहले दिन जम्बुरी में 120 पर्यटकों का पंजीयन किया गया। उनका स्वागत जशपुर की परंपरागत शैली में किया गया और स्थानीय शुद्ध दोना-पत्तल में पारंपरिक व्यंजन परोसे गए। अतिथियों ने स्थानीय भोजन के स्वाद और जशपुरवासियों के आत्मीय सत्कार की प्रशंसा की।

सांझ ढलते ही चांदनी रात में देशदेखा का आसमान सितारों से जगमगा उठा। पर्यटकों ने खुले आसमान के नीचे स्टार ग्रेजिंग सेशन का आनंद लिया, जो जिला प्रशासन द्वारा विशेष रूप से आयोजित किया गया था। तारों के बीच बैठकर लोक कलाकारों की प्रस्तुति ने वातावरण को और भी मनमोहक बना दिया।

लोक संस्कृति की जीवंत झलकियों के बीच पर्यटकों ने नृत्य, संगीत और पारंपरिक वेशभूषा के माध्यम से जशपुर की समृद्ध विरासत को करीब से महसूस किया। इस अनुभव ने न केवल उन्हें रोमांचित किया बल्कि राज्य के इको-टूरिज्म और सांस्कृतिक पर्यटन को भी नई ऊँचाई दी।

राजभवन में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पर सामूहिक गायन प्रधानमंत्री के उद्बोधन का सीधा प्रसारण किया गया…

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रायपुर : भारत के राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम्‘‘ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आज राजभवन, रायपुर में भावपूर्ण सामूहिक गायन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल श्री रमेन डेका की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण नई दिल्ली से किया गया, जहां प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस ऐतिहासिक आयोजन का शुभारंभ किया। राजभवन में अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक कार्यक्रम का लाइव प्रसारण देखा और एक स्वर में “वंदे मातरम्” का सामूहिक गायन किया। राजभवन के छत्तीसगढ़ मंडपम में आयोजित इस कार्यक्रम में  उपस्थित सभी ने राष्ट्रीय भावना और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना के साथ राष्ट्रीय गीत का सामूहिक रूप से गायन किया। इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना सहित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।