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“ट्रंप की टैरिफ वाली टेंशन पर सामने आया बड़ा अपडेट, भारत सरकार बोली- ‘ट्रेड डील को जल्दी ही…'”

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डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा भारतीय आयात पर लगाए गए टैरिफ के बीच भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल 22 से 24 सितंबर तक अमेरिका के दौरे पर गया.

इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने और निवेश बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा हुई. इस पर सरकार ने बयान जारी करते हुए कहा- भारत, अमेरिका पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते पर जल्द ही निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए प्रयास करेंगे.

अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात गोयल ने अमेरिकी राजदूत जेमीसन ग्रीयर, यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव और भारत में नामित अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर से मुलाकात की. इन बैठकों में द्विपक्षीय व्यापार से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हुई. भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिका स्थित बड़ी कंपनियों और निवेशकों से भी मुलाकात की. इसका उद्देश्य भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और निवेश को और बढ़ावा देना था.

समझौते पर सकारात्मक संकेत सरकार के बयान के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों के साथ हुई बैठकें रचनात्मक रहीं. दोनों पक्षों ने संभावित व्यापार समझौते के ढांचे पर विचार-विमर्श किया और इस पर जल्द से जल्द पारस्परिक लाभकारी समझौते तक पहुंचने के लिए बातचीत जारी रखने का निर्णय लिया. बैठक में शामिल अमेरिकी व्यापार नेताओं ने भारत की विकास यात्रा पर विश्वास जताया. उन्होंने भारत में अपने व्यापारिक गतिविधियों को और तेज करने की इच्छा भी जताई.

ये बैठकें ऐसे समय में हुई हैं जब भारत-अमेरिका संबंधों में कई बड़े मुद्दे सामने आए हैं. इनमें भारतीय आयात पर टैरिफ, वीज़ा याचिकाओं पर $100,000 की नई फीस और ब्रांडेड व पेटेंटेड दवाओं पर 100% टैरिफ शामिल हैं.

निवेश को बढ़ावा देने पर भी हुई चर्चा अमेरिका में द्विपक्षीय व्यापार मामलों पर ट्रंप सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बैठकों के अलावा, प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख अमेरिकी व्यवसायों और निवेशकों के साथ भी व्यापक चर्चा की.

”आखिर क्यों ऐन मौके पर नेतन्याहू ने बदला हवाई रूट? जानें इसके पीछे की मुख्य वजह ”

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इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू जब इस सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में शामिल होने न्यूयॉर्क रवाना हुए तो उनकी यात्रा ने सबका ध्यान खींचा. सामान्य तौर पर तेल अवीव से जेएफके एयरपोर्ट तक की उड़ान 10.5 घंटे की होती है, लेकिन इस बार उनकी यात्रा करीब 13 घंटे लंबी रही.

विमान ने पूर्वी भूमध्य सागर से होते हुए ग्रीस और इटली के ऊपर से उड़ान भरी. फिर अचानक दक्षिण-पश्चिम की ओर मुड़कर जिब्राल्टर स्ट्रेट से होकर अटलांटिक महासागर पार किया. सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि विमान ने फ़्रांस और स्पेन के हवाई क्षेत्र को पूरी तरह नजरअंदाज किया. यह रूट चेंज करना सिर्फ़ तकनीकी कारण नहीं था, बल्कि इसके पीछे गहरी राजनीतिक और कानूनी वजहें थीं.

आईसीसी वारंट और अंतर्राष्ट्रीय कानूनी दबाव 2024 में अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने गाजा में इजरायली सैन्य अभियानों के दौरान कथित युद्ध अपराधों के लिए नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया. नेतन्याहू ने इसे झूठा और बेतुका कहकर खारिज कर दिया,लेकिन अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत आईसीसी के सदस्य देशों को यदि मौका मिले तो उन्हें गिरफ्तार करना होगा.यही कारण है कि नेतन्याहू ने उन देशों के ऊपर से उड़ान भरने से परहेज किया, जहां उतरने की स्थिति में कानूनी जोखिम पैदा हो सकता था. ध्यान देने वाली बात यह है कि न तो अमेरिका और न ही इजरायल आईसीसी के सदस्य हैं, इसलिए वहां नेतन्याहू को किसी कानूनी खतरे का सामना नहीं करना पड़ता.

यूरोप की कूटनीतिक सख्ती हालांकि फ्रांस ने नेतन्याहू को अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने की अनुमति दे दी थी, लेकिन उन्होंने खुद ही इसे टालना उचित समझा. इसका कारण था बढ़ते यूरोपीय राजनीतिक दबाव. स्लोवेनिया ने हाल ही में नेतन्याहू पर प्रतिबंध लगाए हैं, आईसीसी की कार्यवाही का हवाला देते हुए. जुलाई 2025 में, स्लोवेनिया ने इज़रायली मंत्रियों बेज़ेलेल स्मोट्रिच और इटमार बेन ग्विर पर भी फिलिस्तीनियों के खिलाफ हिंसा भड़काने के आरोप में प्रतिबंध लगाए थे. कई यूरोपीय देश हाल ही में संयुक्त राष्ट्र में फ़िलिस्तीनी राज्य की मान्यता की घोषणा कर चुके हैं, जिसका नेतन्याहू कड़ा विरोध कर रहे हैं. अमेरिकी विदेश विभाग के पूर्व अधिकारी स्टीव गनयार्ड के अनुसार, ‘कुछ सरकारों के लिए नेतन्याहू को अपने देश के ऊपर से उड़ान भरने की अनुमति देना ही राजनीतिक दायित्व बन सकता है.’

नेतन्याहू के लिए बढ़ते कूटनीतिक खतरे इस उड़ान मार्ग से साफ संकेत मिलता है कि नेतन्याहू की अंतर्राष्ट्रीय यात्राएं अब केवल कूटनीतिक नहीं रहीं, बल्कि वे कानूनी जोखिमों से भी घिरी हुई हैं. यूरोपीय देशों का दबाव और आईसीसी वारंट उन्हें सीमित कर रहा है. अमेरिका जैसे सहयोगी देशों में वे सुरक्षित हैं, लेकिन यूरोप में उनका दायरा लगातार सिमट रहा है. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यह इजरायल की छवि और नेतन्याहू की व्यक्तिगत राजनीतिक स्थिति दोनों पर असर डाल रहा है.

“प्रधानमंत्री मोदी ने बांसवाड़ा दौरे पर दी राजस्थान को 1.08 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की सौगात”

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज, 25 सितंबर को राजस्थान के बांसवाड़ा दौरे के दौरान राज्य और पूरे देश के लिए विकास की नई सौगातें दीं। इस अवसर पर उन्होंने पूरे देश में 1 लाख 22 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया, जिसमें राजस्थान को 1 लाख 8 हजार 468 करोड़ रुपये की योजनाओं का विशेष तोहफा मिला।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य राजस्थान के ऊर्जा, जल संसाधन, रेल और रोजगार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को नई दिशा देना है। उनका मानना है कि इन पहलों से राज्य के बुनियादी ढांचे में सुधार होगा और राज्यवासियों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आएगा।

बांसवाड़ा दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया और उनके शिलान्यास में हिस्सा लिया। इन परियोजनाओं में सौर ऊर्जा, जल प्रबंधन, रेलवे नेटवर्क का विकास और रोजगार सृजन से जुड़े कई महत्वाकांक्षी कार्यक्रम शामिल हैं। अधिकारी बताते हैं कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद राजस्थान की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।

विशेष रूप से ऊर्जा क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों से राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी। सौर ऊर्जा परियोजनाओं के माध्यम से राज्य की स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा उपलब्धता बढ़ेगी, जो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के विकास में मददगार साबित होगी। इसके अलावा, जल संसाधन परियोजनाओं से किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई और पीने के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

रेल क्षेत्र में नई परियोजनाओं के लोकार्पण से राज्य के प्रमुख शहरों और औद्योगिक केंद्रों के बीच संपर्क मजबूत होगा। इससे व्यापार और पर्यटन के क्षेत्र में भी वृद्धि की उम्मीद है। रोजगार सृजन योजनाओं से युवाओं को स्थाई और दीर्घकालीन अवसर मिलेंगे, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा और 1.08 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण राज्य के विकास एजेंडे को मजबूत करने के साथ-साथ दीर्घकालीन रणनीति का भी हिस्सा माना जा रहा है। इन परियोजनाओं के जरिए राज्यवासियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा और राजस्थान का विकास केंद्रित दृष्टिकोण और अधिक स्पष्ट होगा।

बांसवाड़ा दौरे के दौरान सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे। पुलिस और सुरक्षा बलों ने सभी संभावित मार्गों और कार्यक्रम स्थलों पर निगरानी सुनिश्चित की। प्रशासन ने आम जनता से अपील की कि वे कार्यक्रम में व्यवधान न डालें और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके पर कहा कि विकास केवल योजनाओं का लोकार्पण नहीं है, बल्कि इसका असर सीधे जनता के जीवन पर पड़ना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि राजस्थान के इन परियोजनाओं के लागू होने से राज्य और देश की समग्र प्रगति को मजबूती मिलेगी।

इस तरह, बांसवाड़ा में प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा और 1.08 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण राजस्थान के विकास और आर्थिक सशक्तिकरण में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। आने वाले समय में इन परियोजनाओं से ऊर्जा, जल, रेल और रोजगार जैसे क्षेत्रों में राज्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की उम्मीद है।

“भक्ति नहीं, ये है गहन साधना… जानें पीएम मोदी कैसे रखते हैं नवरात्रि का व्रत?”

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नवरात्रि में यूँ तो हर कोई देवी की आराधना करता है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का व्रत सिर्फ़ प्रार्थना नहीं, बल्कि गहन साधना है। जहाँ आम लोग फल और मिठाइयों पर निर्भर रहते हैं, वहीं प्रधानमंत्री मोदी अपने जीवन को अनुशासन की प्रयोगशाला बना लेते हैं।

उनके लिए यह व्रत तन से ज़्यादा मन और आत्मा को साधने का ज़रिया है।

मोदी उपवास को साधना क्यों मानते हैं? प्रधानमंत्री मोदी कहते हैं कि नवरात्रि के नौ दिन उनके जीवन के सबसे पवित्र दिन होते हैं। भोजन से परहेज़ करने से न सिर्फ़ उनकी भूख शांत होती है, बल्कि इंद्रियाँ भी तेज़ होती हैं। उनका मानना ​​है कि उपवास के दौरान पानी की सुगंध का अनुभव किया जा सकता है। यह कोई साधारण उपवास नहीं, बल्कि तपस्या है, जहाँ भूख की पीड़ा आत्मबल में बदल जाती है।

एक फल, एक बार… इच्छाओं पर नियंत्रण प्रधानमंत्री मोदी का व्रत दूसरे लोगों से अलग है। वे एक फल चुनते हैं और पूरे व्रत के दौरान सिर्फ़ उसी का सेवन करते हैं। कभी पपीता, कभी सेब, तो कभी सिर्फ़ नारियल पानी। इस विधि से वे तन को तो साधा रखते ही हैं, साथ ही मन को भी एकाग्र करते हैं। स्वाद और विकल्पों पर नियंत्रण होने पर आत्मा पर अधिकार स्वतः ही बढ़ जाता है। उन्होंने एक पॉडकास्ट में भी इसका ज़िक्र किया है।

दिन सिर्फ़ पानी के सहारे गुज़रते थे कभी-कभी तो वे पूरे नवरात्रि के दिन सिर्फ़ गुनगुने पानी पर ही गुजारा करते हैं। यह सुनकर कोई भी हैरान हो सकता है कि देश के सबसे व्यस्त और दबाव में रहने वाले प्रधानमंत्री मोदी इतना अभ्यास कैसे कर पाते हैं। लेकिन मोदी के लिए यह चरम संयम है। जहाँ शरीर की ऊर्जा आंतरिक शुद्धि में लीन हो जाती है और मन शून्यता की ओर अग्रसर होता है।

सादगी में छिपा स्वास्थ्य मंत्र उपवास के अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का खान-पान बेहद सादा है। सहजन का पराठा, नीम के पत्ते और मिश्री, खिचड़ी और हल्का भोजन। ये सब उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं। योग, ध्यान और सैर के साथ उनकी दिनचर्या यह साबित करती है कि वे स्वास्थ्य और अध्यात्म को जीवन का आधार मानते हैं।

धैर्य ही असली शक्ति है हाल ही में दिल्ली में दूषित कुट्टू के आटे के कारण सैकड़ों लोग बीमार पड़ गए, जिसने हमें याद दिलाया कि उपवास के दौरान सावधानी और सफ़ाई भी उतनी ही ज़रूरी है। मोदी का अनुशासित और संयमित उपवास हमें सिखाता है कि नवरात्रि का असली संदेश केवल देवी की भक्ति नहीं, बल्कि स्वयं पर विजय है।

नवरात्रि व्रत राजनीति से परे एक संदेश है प्रधानमंत्री मोदी का नवरात्रि व्रत राजनीति से परे एक संदेश देता है कि संयम ही सबसे बड़ा हथियार है। जहाँ लोग उपवास को केवल आस्था से जोड़ते हैं, वहीं प्रधानमंत्री मोदी इसे आत्म-अनुशासन की तपस्या बताते हैं। यही वजह है कि उनका उपवास आज भी चर्चा में है, क्योंकि यह केवल भूख का त्याग नहीं, बल्कि मन और आत्मा की गहन साधना है।

”मेक इन इंडिया’ की ताकत, लॉन्च होगा बीएसएनएल का ‘स्वदेशी’ 4जी नेटवर्क”

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को सरकारी कंपनी बीएसएनएल के ‘स्वदेशी’ 4जी नेटवर्क का उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा, जो स्वयं का टेलीकॉम नेटवर्क बना सकते हैं।

साथ ही, टेलीकॉम उपकरणों को भी मैन्युफैक्चर कर सकते हैं। उद्घाटन से पहले आयोजित हुए एक कार्यक्रम में केंद्रीय टेलीकॉम मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि कल वह दिन होगा, जब विश्व यह देखेगा कि भारत न केवल एक सेवा प्रदाता के रूप में, बल्कि एक पूर्ण 4जी स्टैक के निर्माता और उपकरण प्रदाता के रूप में भी उभर रहा है।

सिंधिया ने आगे कहा कि भारत का टेलीकॉम नेटवर्क क्लाउड आधारित और फ्यूचर रेडी होगा। साथ ही आसानी से इसे 5जी में अपग्रेड किया जा सकता है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बीएसएनएल का 4जी स्टैक 27 सितंबर को देश भर में लगभग 98,000 साइट्स पर शुरू किया जाएगा। साथ ही, कई राज्यों में भी इसकी शुरुआत एक साथ होगी।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ओडिशा के झारसुगुड़ा में इस नेटवर्क का उद्घाटन करेंगे।

सिंधिया ने कहा, “यह टेलीकॉम सेक्टर के लिए एक नया युग है, एक ऐसा युग जहां भारत टेलीकॉम उपकरण बनाने वाले शीर्ष देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिनमें डेनमार्क, स्वीडन, दक्षिण कोरिया, चीन शामिल हैं और भारत अब पांचवां देश है।”

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री डिजिटल भारत निधि के माध्यम से भारत के 100 प्रतिशत 4जी नेटवर्क का भी अनावरण करेंगे, जिसके तहत 29,000-30,000 गांवों को मिशन मोड परियोजना के तहत जोड़ा गया है।

टेलीकॉम सचिव नीरज मित्तल ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा टेलीकॉम बाजार है। 2028 तक 5जी यूजर्स की संख्या 77 करोड़ तक पहुंच जाएगी, जो कि फिलहाल 30 से 40 करोड़ है।

उन्होंने इस 4जी स्टैक विकसित करने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों को दिया।

आईएएनएस से बातचीत करते हुए बीएसएनएल के यूपी ईस्ट के सीजीएम अरुण कुमार गर्ग ने कहा कि बीएसएनएल 4जी का लॉन्च होना पूरे देश के लिए गर्व की बात है, क्योंकि इसमें इस्तेमाल होने वाली टेक्नोलॉजी पूर्णत: स्वदेशी है। इसे सीडॉट, तेजस और टीसीएस ने मिलकर विकसित किया है।

“भारत में यहां मौजूद है दुनिया का इकलौता शक्तिपीठ, जहां देवी ने खुद काटा था अपना ही सिर, पढ़ें ये पौराणिक कथा”

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भारत भूमि देवी-देवताओं के रहस्यमयी और प्राचीन मंदिरों से भरी पड़ी है। झारखंड के रजरप्पा स्थित माँ छिन्नमस्तिका मंदिर भी इन्हीं में से एक है। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन की दृष्टि से भी एक अनोखा एहसास देता है।

शारदीय नवरात्रि के पावन दिनों में यहाँ भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है और मंदिर परिसर भक्ति और उत्साह से गूंज उठता है। आइए जानते हैं माँ के इस शक्तिशाली शक्तिपीठ से जुड़े कुछ रोचक तथ्य।

दस महाविद्याओं में से एक रूप शास्त्रों में देवी की दस महाविद्याओं का वर्णन मिलता है। इनमें माँ तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, काली, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला के साथ माँ छिन्नमस्ता भी शामिल हैं। इन्हें महाविद्याओं में छठी देवी माना जाता है और रजरप्पा का मंदिर इन्हीं को समर्पित है।

माँ का स्वरूप क्या है? मंदिर के गर्भगृह में स्थापित माँ का स्वरूप भक्तों के मन में विस्मय और श्रद्धा दोनों जगाता है। देवी अपने दाहिने हाथ में तलवार और बाएँ हाथ में अपना कटा हुआ सिर धारण करती हैं। उनके शरीर से रक्त की तीन धाराएँ बहती दिखाई देती हैं – दो धाराएँ उनकी पत्नियाँ डाकिनी और शाकिनी (जया और विजया) को समर्पित हैं और तीसरी धारा स्वयं देवी धारण करती हैं। माँ कमल के पुष्प पर विराजमान हैं और उनके चरणों के नीचे कामदेव और रति की प्रतिमाएँ हैं। गले में माला, सर्पमाला और खुले बालों वाला यह रूप शक्ति, त्याग और अद्भुत बलिदान का प्रतीक माना जाता है।

देवी ने अपना सिर क्यों काटा? माँ छिन्नमस्ता के प्रकट होने से जुड़ी एक रोचक कथा है। कहा जाता है कि एक बार माँ भगवती अपनी सखियों जया और विजया के साथ नदी में स्नान कर रही थीं, तभी अचानक उनकी सखियों को बहुत भूख लगी और उन्होंने भोजन की याचना की। माँ ने उन्हें थोड़ी देर प्रतीक्षा करने को कहा, लेकिन उनकी असहनीय भूख देखकर भगवती ने तुरंत अपनी तलवार से उनका सिर काट दिया। उनकी गर्दन से रक्त की तीन धाराएँ बह निकलीं। दो धाराओं से सखियों को तृप्ति मिली और तीसरी धारा स्वयं माँ ने ग्रहण की। उसी क्षण माँ छिन्नमस्ता प्रकट हुईं। यह कथा देवी के असीम त्याग और करुणा को दर्शाती है। वे बताती हैं कि माता अपने भक्तों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं।

माँ छिन्नमस्ता मंदिर कैसे पहुँचें? निकटतम हवाई अड्डा बिरसा मुंडा हवाई अड्डा, रांची है, जो लगभग 80 किमी दूर है। यहाँ से टैक्सी या बस द्वारा रजरप्पा आसानी से पहुँचा जा सकता है। रामगढ़ कैंट रेलवे स्टेशन और बोकारो रेलवे स्टेशन इस मंदिर के सबसे नज़दीकी प्रमुख स्टेशन हैं। यहाँ से ऑटो, टैक्सी या स्थानीय बस द्वारा मंदिर जाया जा सकता है। रजरप्पा राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा हुआ है। रांची, बोकारो, हज़ारीबाग और धनबाद जैसे प्रमुख शहरों से भी सीधी बस सेवाएँ और टैक्सियाँ उपलब्ध हैं। सड़क मार्ग से यात्रा करना सबसे सुविधाजनक और लोकप्रिय विकल्प है।

आवास सुविधा मंदिर के आसपास धर्मशालाएँ और कुछ गेस्टहाउस उपलब्ध हैं। रांची, रामगढ़ और बोकारो जैसे बड़े शहरों में बेहतर होटल और रिसॉर्ट उपलब्ध हैं।

“जीएसटी कटौती के ट्रांसफर को सरकार कर रही ट्रेक, सितंबर के अंत तक आएगी फील्ड रिपोर्ट”

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वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) कटौती के फायदे को कंपनियों द्वारा ग्राहकों को ट्रांसफर करने पर सरकार नजर रखी रही है और सितंबर के अंत में फील्ड रिपोर्ट्स के एनालिसिस के बाद ही इस पर कोई कदम उठाया जाएगा।

एक सरकारी सूत्र ने कहा, “हम इस महीने के अंत तक क्षेत्रीय एजेंसियों से मिलने वाले सुझावों का इंतजार कर रहे हैं। हम नए सुधारों पर तुरंत प्रतिक्रिया नहीं दे सकते, उन्हें लागू होने में समय लगेगा।”

विभिन्न श्रेणियों के 50 से अधिक उत्पादों की जांच की जा रही है और देश भर में खुदरा मूल्य निर्धारण के आंकड़े एकत्र किए जा रहे हैं। प्रारंभिक निगरानी के अनुसार, लगभग 90 प्रतिशत क्षेत्रों की कीमतों में जीएसटी कटौती का असर दिखाई देने लगा है।

छोटे खुदरा विक्रेताओं और अपंजीकृत डीलरों को मौजूदा स्टॉक के कारण ज्यादा समय लग सकता है, लेकिन बड़ी कंपनियां खासकर सीमेंट, ऑटोमोटिव और ई-कॉमर्स क्षेत्रों से जुड़ी हुई, इस बदलाव का नेतृत्व कर रही हैं।

पुराने स्टॉक पर फिलहाल कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन लग्जरी ब्रांड पहले से ही नए स्टॉक में कटौती का फायदा उठा रहे हैं।

एक आधिकारिक सूत्र के अनुसार, “पूरी मूल्य श्रृंखला में अंततः लाभ दिखाई देगा, हालांकि अपंजीकृत डीलर तुरंत इसका लाभ नहीं दे पाएंगे।”

उल्टे शुल्क ढांचे की समस्या, जिसमें इनपुट कर तैयार माल पर लगने वाले कर से ज्यादा होता है, जिसके परिणामस्वरूप क्रेडिट ब्लॉक हो जाता है जैसी समस्याएं भी अधिकारियों के सामने रखी गई हैं।

सूत्रों ने कहा, “हम उल्टे शुल्क के लिए एक ऑटोमेटिक रिफंड सिस्टम की योजना बना रहे हैं, जिसके लिए एक संशोधन किया जाएगा।”

उपभोक्ता मांग आमतौर पर आगामी त्योहारी सीजन में चरम पर होती है, इसलिए जीएसटी दरों में कटौती का प्रभाव उस दौरान अधिक स्पष्ट होना चाहिए।

अधिकारियों ने पुष्टि की कि यदि आवश्यक हुआ, तो पर्याप्त जमीनी सबूत मिलने के बाद ही प्रवर्तन पर विचार किया जाएगा।

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले NDA का बड़ा दांव: शुरू हुई ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना'”

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बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एनडीए गठबंधन ने महिला मतदाताओं को साधने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ का शुभारंभ करेंगे।

इस योजना के तहत राज्य की 75 लाख महिलाओं के बैंक खातों में सीधे ₹10,000 की पहली किस्त ट्रांसफर की जाएगी।

योजना का कुल बजट 7,500 करोड़ रुपये का है और यह राशि सीधे महिलाओं के खाते में भेजी जाएगी। इससे पहले की योजनाओं की तरह इसमें कोई मध्यस्थ शामिल नहीं होगा, जिससे राशि लाभार्थियों तक तेजी से और पारदर्शी तरीके से पहुंचेगी। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उन्हें स्वरोजगार तथा छोटे व्यवसाय के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस योजना के शुभारंभ के मौके पर बिहार की महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि यह योजना उनके जीवन को सुधारने और आत्मनिर्भर बनने में सहायक होगी। उन्होंने महिलाओं को यह भरोसा दिलाया कि सरकार उनके आर्थिक हितों के लिए लगातार काम कर रही है और उनकी भागीदारी राज्य की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी इस अवसर पर महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि योजना का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि यदि रोजगार की स्थिति और बेहतर होती है, तो प्रत्येक महिला को ₹2 लाख तक की सहायता भी प्रदान की जा सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि विधानसभा चुनाव से पहले इस योजना का शुभारंभ एनडीए के लिए महिला मतदाताओं के समर्थन को मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा सकता है। बिहार की महिलाएं राज्य की कुल जनसंख्या में महत्वपूर्ण मतदाता वर्ग हैं और उनके आर्थिक सशक्तिकरण से सीधे उनकी जीवनशैली और राजनीतिक धारणा प्रभावित होती है।

योजना का लाभ ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की महिलाओं को मिलेगा। खासतौर पर ग्रामीण महिलाएं, जो कृषि, घरेलू उद्योग या छोटे व्यवसाय में लगी हैं, उन्हें इसका सीधा लाभ मिलेगा। योजना के तहत राशि सीधे बैंक खातों में भेजने से भ्रष्टाचार और कागजी बाधाओं की समस्या समाप्त होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ न केवल आर्थिक मदद का साधन है, बल्कि यह महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने का भी महत्वपूर्ण कदम है। योजना का लाभ लेने वाली महिलाएं अब अपने व्यवसायिक निर्णयों और घरेलू खर्चों में अधिक स्वतंत्र हो सकेंगी।

इस योजना के शुभारंभ ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। एनडीए गठबंधन की यह पहल न केवल महिलाओं को लाभ पहुंचाएगी, बल्कि आगामी चुनाव में उनके समर्थन को भी मजबूत करेगी।

संक्षेप में कहा जाए तो ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ बिहार की महिलाओं के लिए आर्थिक अवसर और सशक्तिकरण का नया मार्ग लेकर आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संयुक्त प्रयास से यह योजना राज्य में महिलाओं की भागीदारी और समर्थन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

“‘2026 में बंगाल को समृद्धि और शांति लाने वाली सरकार मिले’, मां दुर्गा से अमित शाह की प्रार्थना”

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने अगले साल पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में नई सरकार के गठन के लिए देवी दुर्गा से प्रार्थना की।

गृह मंत्री शाह शुक्रवार सुबह कालीघाट मंदिर गए और मां काली की पूजा की।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कोलकाता के मध्य में संतोष मित्रा स्क्वायर के सामुदायिक दुर्गा पूजा पंडाल के उद्घाटन के अवसर पर कहा, “मैंने मां दुर्गा से प्रार्थना की कि अगले साल विधानसभा चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल की जनता को ऐसी सरकार मिले जो राज्य को समृद्धि की ओर ले जाए। पश्चिम बंगाल में शांति वापस आए। हम गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के सपनों के अनुसार बंगाल का निर्माण करें।”

इस साल संतोष मित्रा स्क्वायर में पूजा का थीम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ है, जो मई में भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में कई आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के शौर्य को दर्शाता है।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि अगले साल चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल एक बार फिर सुरक्षित, समृद्ध और शांतिपूर्ण राज्य के रूप में उभरेगा।

उन्होंने पश्चिम बंगाल में बिजली की चपेट में आने से मारे गए 10 लोगों के परिवारों के प्रति भी संवेदना व्यक्त की, जिनमें कोलकाता के 8 लोग शामिल हैं। शाह ने कहा कि दुर्गा पूजा से पहले पश्चिम बंगाल में भारी बारिश हुई थी। कुल दस लोगों की मौत हो गई। मैं मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं।

अमित शाह ने कहा कि पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा का त्योहार, जो अब दुनिया भर में प्रसिद्ध है, राज्य को समृद्धि की ओर ले जाए। हमारे नेता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘समृद्ध बंगाल’ के माध्यम से ‘विकसित भारत’ का सपना देखते हैं। उनका यह सपना पूरा हो।

गृह मंत्री शाह ने शिक्षाविद्, समाज सुधारक और परोपकारी ईश्वर चंद्र विद्यासागर की जयंती पर उन्हें याद किया। उन्होंने कहा कि उनका शिक्षा के क्षेत्र में योगदान कभी नहीं भुलाया जाएगा। उन्होंने अपना पूरा जीवन बंगाली भाषा, बंगाल की परंपराओं और महिलाओं की शिक्षा के लिए समर्पित किया।

“सीमांचल में ओवैसी की न्याय यात्रा जारी, तेजस्वी और महागठबंधन पर साधा निशाना”

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बिहार के सीमांचल में असदुद्दीन ओवैसी की न्याय यात्रा जोर-शोर से जारी है। यात्रा के तीसरे दिन ओवैसी किशनगंज से पूर्णिया पहुंचे और इसके बाद उनकी यात्रा डगरुआ और बायसी होते हुए अमौर तक जाएगी।

27 सितंबर को यह यात्रा कटिहार में समाप्त होने वाली है।

ओवैसी की यह यात्रा केवल सार्वजनिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है। उन्होंने अपने संबोधनों में खुलकर तेजस्वी यादव और महागठबंधन पर हमला बोला है। ओवैसी ने कहा कि विपक्षी गठबंधन में नेताओं के बीच आपसी मतभेद और रणनीतिक असमंजस जनता के बीच उनके विश्वसनीयता को कमजोर कर रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बिहार के सीमांचल क्षेत्र में गठबंधन की नीतियों और कामकाज में जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि ओवैसी की यह यात्रा महागठबंधन और खासकर आरजेडी के लिए चिंता का विषय बन सकती है। उनकी सक्रियता और जनता के बीच सीधे संपर्क ने इस क्षेत्र में गठबंधन की पकड़ को कमजोर किया है। सीमांचल में ओवैसी की यात्रा ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वे न केवल अपने मतदाताओं को सक्रिय कर रहे हैं, बल्कि महागठबंधन के समर्थकों के बीच भी प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

ओवैसी ने अपने संबोधन में कहा कि न्याय यात्रा का उद्देश्य आम जनता तक उनकी आवाज़ पहुंचाना है और उनके सामाजिक व आर्थिक अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके राजनीतिक कदम पूरी तरह से जनता की समस्याओं और हितों पर केंद्रित हैं, और वे किसी भी राजनीतिक गठबंधन की आड़ में अपने उद्देश्य से विचलित नहीं होंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि सीमांचल में ओवैसी की सक्रियता आगामी विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है। गठबंधन की छवि पर उनका यह हमला क्षेत्रीय मतदाताओं के चुनावी फैसलों को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, ओवैसी की यात्रा मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म पर भी ध्यान आकर्षित कर रही है, जिससे उनके संदेश और प्रभाव व्यापक स्तर पर फैल रहे हैं।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, सीमांचल न्याय यात्रा यह संकेत देती है कि ओवैसी ने बिहार में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने और महागठबंधन को चुनौती देने की रणनीति तैयार कर ली है। उनकी यात्रा के दौरान जनता से सीधे संवाद और उनके मुद्दों को उठाना यह दिखाता है कि वे चुनावी मैदान में निर्णायक भूमिका निभाने की तैयारी में हैं।

संक्षेप में, असदुद्दीन ओवैसी की सीमांचल न्याय यात्रा न केवल जनता को उनके अधिकारों और समस्याओं के प्रति जागरूक कर रही है, बल्कि यह महागठबंधन और आरजेडी के लिए गंभीर राजनीतिक चुनौती भी बन गई है। आगामी विधानसभा चुनाव में इस यात्रा के प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, और यह बिहार की सियासत में नए समीकरण पैदा कर सकती है।