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36 हथियार, 82 राउंड गोला-बारूद… मणिपुर में सेना को बड़ी कामयाबी, 9 कट्टर उग्रवादी गिरफ्तार

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मणिपुर के विभिन्न जिलों में संयुक्त अभियानों की एक सीरीज में सेना और अन्य सुरक्षा बलों ने नौ कट्टर उग्रवादियों को गिरफ्तार किया है और 36 हथियार, कुछ इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी), ड्रग्स और अन्य युद्ध संबंधी सामान बरामद किया है. अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी.
रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल अमित शुक्ला ने बताया कि सेना और असम राइफल्स की टुकड़ियों ने मणिपुर पुलिस के साथ मिलकर सात जिलों, टेंग्नौपाल, थौबल, इंफाल पूर्व, तामेंगलोंग, चुराचांदपुर, कांगपोकपी और चंदेल, जो इंफाल घाटी और पहाड़ी क्षेत्रों में आते हैं, में कई सटीक, खुफिया जानकारी पर आधारित संयुक्त अभियान चलाए. पिछले कुछ दिनों में चलाए गए इन अभियानों में विभिन्न पहाड़ी और घाटी-आधारित उग्रवादी समूहों के नौ कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया और 36 हथियार, नशीले पदार्थ और अन्य युद्ध-संबंधी सामग्री बरामद की गई.
गिरफ्तार किए गए उग्रवादी सोशलिस्ट रिवोल्यूशनरी पार्टी ऑफ कांगलीपाक (सोरेपा), रिवोल्यूशनरी पीपुल्स फ्रंट (आरपीएफ)/पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए), कांगलीपाक कम्युनिस्ट पार्टी (पीपुल्स वार ग्रुप) और यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट के सदस्य थे.

बरामद हथियारों में चार सेल्फ-लोडिंग राइफलें (एसएलआर), चार इंसास राइफलें, दो .303 राइफलें, एक एआर-15/एम-16 राइफल, कई बोल्ट-एक्शन राइफलें, कई 9 मिमी पिस्तौल, एक स्कोप, 82 राउंड गोला-बारूद, 25 मैगजीन और तीन मोबाइल फोन शामिल हैं. रक्षा प्रवक्ता ने कहा कि सुरक्षा बलों के ये समन्वित प्रयास मणिपुर में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए उनकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं.

मणिपुर के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि म्यांमार की सीमा से लगे तेंग्नौपाल जिले के अंतर्गत सीता-तेंग्नौपाल मार्ग पर सोमवार रात सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए एक अभियान के दौरान, एक चीनी केनबो बाइक से 600 पैकेट बरामद किए गए, जिनमें 1,20,000 अत्यधिक नशीली मेथैम्फेटामाइन की गोलियां थीं, जिनका वजन 13 किलोग्राम था और जिनकी कीमत 39 करोड़ रुपए से अधिक है. इस बाइक को एक अज्ञात सवार ने सुरक्षा बलों को देखकर छोड़ दिया था.
तस्करी का सामान और दोपहिया बाइक जब्त कर ली गई है, और सवार की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जांच जारी है. पुलिस अधिकारियों को संदेह है कि ये ड्रग्स म्यांमार से तस्करी करके लाए गए थे, जिसकी मणिपुर के साथ 398 किलोमीटर लंबी बिना बाड़ वाली सीमा है. अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा बल पहाड़ी और इंफाल घाटी के जिलों के सीमांत और संवेदनशील इलाकों में तलाशी अभियान और क्षेत्र में दबदबा बनाए हुए हैं.

दिल्ली में होगी 30 देशों के सेना प्रमुखों की जमघट, चीन-पाकिस्तान को न्योता नहीं, UN से है खास जुड़ाव

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भारतीय सेना अक्टूबर के मिड में संयुक्त राष्ट्र (UN) में टुकड़ी भेजने वाले देशों के सेना प्रमुखों की विशेष बैठक (UNTCC Army Chiefs’ Conclave) की मेजबानी करने जा रही है. इस बैठक में 30 से ज्यादा देशों को आमंत्रित किया गया है.
विशेष रूप से इस कार्यक्रम का फोकस ग्लोबल साउथ देशों पर होगा. इसमें केवल आधिकारिक बैठकें ही नहीं, बल्कि द्विपक्षीय (Bilateral) बैठकें भी आयोजित की जाएंगी. सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में चीन और पाकिस्तान को आमंत्रित नहीं किया गया है.
भारतीय सेना के अनुसार, इस प्रकार की बैठक का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देना और UN मिशनों में अनुभव साझा करना है.

बेंगलुरु में ट्रैफिक का हाल खराब, सीएम सिद्धारमैया ने अजीम प्रेमजी से उधार मांगी विप्रो की सड़क

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भारत के आईटी हब के रूप में मशहूर बेंगलुरु टैफिक जाम के लिए भी कुख्यात है. कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया इस जाम से मुक्ति दिलाने की कोशिशों में जुटे हुए हैं. उन्होंने इसके लिए अब दिग्गज आईटी कंपनी विप्रो के संस्थापक अजीम प्रेमजी से एक खास अनुरोध किया है. उन्होंने ट्रैफिक जाम को कम करने के लिए विप्रो के कैंपस से कुछ गाड़ियों को गुजरने की इजाजत देने की गुजारिश की है.
सीएम सिद्धारमैया ने अजीम प्रेमजी को यह पत्र 19 सितंबर को लिखा था, जिसमें उन्होंने कहा कि ट्रैफिक एक्सपर्ट्स के शुरुआती आकलन के मुताबिक इस कदम से आउटर रिंग रोड (ORR) पर ट्रैफिक का दबाव लगभग 30% तक घट सकता है, खासकर ऑफिस के व्यस्त समय के दौरान.
विप्रो कैंपस से गाड़ियों के गुजरने की गुजारिश
सिद्दारमैया ने लिखा कि पीक ऑवर के दौरान भारी ट्रैफिक जाम से लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है. उन्होंने कहा कि विप्रो का सहयोग इस दिशा में अहम साबित होगा और इससे बेंगलुरु को ज्यादा सुगम और रहने योग्य बनाने में मदद मिलेगी. उन्होंने कंपनी से सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर जल्द एक साझा समाधान निकालने का आग्रह किया.

यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है, जब कई लोग आउटर रिंग रोड पर जाम की समस्या को लेकर लगातार ही चिंता जता रहे हैं. यह सड़क आईटी कंपनियों के हब को जोड़ने वाला अहम कॉरिडोर है. हाल ही में लॉजिस्टिक्स टेक कंपनी ब्लैकबक के सह-संस्थापक ने सड़कों की खराब स्थिति का हवाला देते हुए बेलंदूर स्थित दफ्तर खाली करने की घोषणा की थी.

ब्लैकबक के सीईओ राजेश याबाजी ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि आउटर रिंग रोड गड्ढों और धूल से भरी सड़कों के लिए बदनाम है और इसे सुधारने की कोई गंभीर कोशिश नजर नहीं आती. उन्होंने कहा था कि आने वाले पांच साल तक हालात बेहतर होने की उम्मीद नहीं है.
याबाजी के इस पोस्ट के बाद बेंगलुरु की बिगड़ती स्थिति पर जमकर बहस छिड़ गई. केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने राज्य सरकार पर अयोग्यता और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए शहर को ‘गड्ढों की राजधानी’ बताया. उन्होंने कहा कि उद्योगों का विश्वास टूट रहा है और वे पड़ोसी राज्यों की ओर रुख कर रहे हैं.
कर्नाटक सरकार पर बढ़ते दबाव के बीच डिप्टी सीएम और बेंगलुरु विकास मंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि ठेकेदारों को नवंबर तक गड्ढे भरने की अंतिम समय सीमा दी गई है. उन्होंने पूरे शहर में सड़क मरम्मत और निर्माण के लिए 1,100 करोड़ रुपये के फंड की घोषणा भी की. शिवकुमार ने कहा, ‘हमारा लक्ष्य स्वच्छ बेंगलुरु और सुगम यातायात है, इसके लिए गड्ढों को जल्द से जल्द ठीक किया जाएगा.’

राहुल गांधी ने लगाए आरोप तो एक्शन में आया चुनाव आयोग, अब कोई नहीं कर पाएगा वोटर लिस्ट के साथ खेल

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चुनाव आयोग (EC) ने अपनी वेबसाइट और ऐप पर नया ‘ई-साइन’ फीचर शुरू कर दिया है. इसके तहत अब वोटर रजिस्ट्रेशन, नाम हटाने या सुधार के लिए आवेदन करने वालों को अपनी पहचान आधार से लिंक मोबाइल नंबर के जरिये सत्यापित करनी होगी.
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब हाल ही में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कर्नाटक की आलंद विधानसभा सीट पर ऑनलाइन वोटर डिलीशन फॉर्म्स के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाया था. राहुल ने इसे ‘चुनावी धोखाधड़ी’ करार दिया था.
अब तक कैसे जुड़ता हटता था वोटर लिस्ट में नाम
पहले आवेदक चुनाव की वेबसाइट या ऐप पर अपने EPIC (वोटर आईडी) नंबर से मोबाइल जोड़कर फॉर्म सबमिट कर सकते थे. उस समय यह जांच नहीं होती थी कि ये डिटेल असल में उसी आवेदक की हैं या नहीं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अब नए वोटर का नाम जोड़ने के लिए Form 6, नाम हटाने के लिए Form 7 और सुधार के लिए Form 8 भरते समय आवेदक को ई-साइन प्रक्रिया पूरी करनी होगी. फॉर्म भरने के बाद आवेदक को CDAC के पोर्टल पर भेजा जाएगा. यहां आधार नंबर डालकर आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर OTP आएगा. OTP डालकर सहमति देने के बाद ही आवेदन आगे बढ़ेगा और ECINet पोर्टल पर सबमिट किया जा सकेगा.

चुनाव आयोग के सूत्रों का कहना है कि इस नई प्रक्रिया से आलंद जैसी घटनाओं के दोबारा होने की संभावना काफी कम हो जाएगी.
राहुल गांधी के आरोप पर EC का जवाब
याद दिला दें कि राहुल गांधी ने 18 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया था कि आलंद विधानसभा क्षेत्र में ऑनलाइन सबमिशन के जरिए करीब 6,000 मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की गई. इसमें वास्तविक मतदाताओं की पहचान का गलत इस्तेमाल किया गया था और OTP प्राप्त करने के लिए ऐसे मोबाइल नंबर लगाए गए जो उन वोटर्स के नहीं थे.
हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया था कि ‘कोई भी शख्स सीधे ऑनलाइन वोटर डिलीट नहीं कर सकता. हर डिलीशन से पहले प्रभावित व्यक्ति को सुनवाई का मौका देना जरूरी है.’ आयोग ने बताया था कि आलंद मामले में 6,018 नामों पर डिलीशन के लिए आवेदन आए थे, जिनमें से सिर्फ 24 सही पाए गए. बाकी 5,994 मतदाता अब भी वहीं रह रहे थे. इस मामले में फरवरी 2023 में FIR दर्ज की गई थी.
ECINet क्या है?
इस साल लॉन्च हुआ ECINet पोर्टल चुनाव आयोग के लगभग 40 पुराने ऐप्स और वेबसाइट्स को जोड़कर बनाया गया है. इसमें पहले शुरू किया गया ERONet (2018) भी शामिल है, जो चुनाव पंजीकरण अधिकारियों (EROs) के लिए बनाया गया था. ECINet के जरिए मतदाता ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं और संबंधित बूथ लेवल अधिकारी (BLO) व ERO उसकी जांच कर सकते हैं.
नए ई-साइन फीचर के साथ अब चुनाव आयोग मतदाता सूची में पारदर्शिता और सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठा चुका है.

‘पीएम मोदी को तिरंगा फहराने से रोको, 11 करोड़ का इनाम दूंगा…’ सिखों को भड़का रहा था आतंकी पन्नू, NIA ने लिया एक्शन

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राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने खालिस्तानी आतंकवादी और प्रतिबंधित संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के संस्थापक गुरपतवंत सिंह पन्नू के खिलाफ नया मामला दर्ज किया है. पन्नू पर आरोप है कि उसने इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लाल किले पर तिरंगा फहराने से रोकने के लिए 11 करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया था.
यह एफआईआर 19 अगस्त को गृह मंत्रालय के निर्देश पर दर्ज की गई है. इसमें पन्नू पर भारत की संप्रभुता, अखंडता और सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने और सिख समुदाय में भारत के खिलाफ असंतोष फैलाने के आरोप लगाए गए हैं.
लाहौर प्रेस क्लब से ऐलान
एनआईए की एफआईआर के अनुसार, 10 अगस्त को पाकिस्तान के लाहौर प्रेस क्लब में आयोजित एक ‘मीट द प्रेस’ कार्यक्रम के दौरान पन्नू ने वाशिंगटन से वीडियो संदेश के जरिये यह ऐलान किया. उसने कहा कि जो ‘सिख सैनिक’ प्रधानमंत्री मोदी को तिरंगा फहराने से रोकेंगे, उन्हें 11 करोड़ रुपये का इनाम दिया जाएगा.

एनआईए ने यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धाराओं के तहत दर्ज किया है. एफआईआर में पन्नू और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के नाम शामिल किए गए हैं.

एफआईआर के मुताबिक, इस कार्यक्रम के दौरान पन्नू ने नए खालिस्तान का नक्शा भी जारी किया, जिसमें पंजाब, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश को शामिल किया गया है. साथ ही उसने दावा किया कि एसएफजे ने ‘शहीद जत्था’ नामक इकाई बनाई है, जो भारत के खिलाफ लड़ाई लड़ेगी.
पन्नू के खिलाफ 7वीं FIR
पन्नू के खिलाफ एनआईए की यह सातवीं एफआईआर है. केंद्र सरकार ने 10 जुलाई 2019 को सिख फॉर जस्टिस को UAPA के तहत प्रतिबंधित कर दिया था. इसके बाद 1 जुलाई 2020 को पन्नू को भी आतंकवादी घोषित कर दिया गया था.
गृह मंत्रालय ने अपने आदेश में कहा कि ‘अपराध की गंभीरता, इसके राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और बड़ी साजिश का पर्दाफाश करने की आवश्यकता को देखते हुए इस मामले की जांच NIA से कराई जानी चाहिए.’

भारत में हर साल 70 हजार बच्चों को कैंसर, कितने हो पाते हैं ठीक? एम्स ने दिए आंकड़े

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कैंसर इतनी खतरनाक बीमारी है कि इसका नाम सुनते ही मन में डर पैदा हो जाता है. वहीं जब यह बीमारी बच्चों में निकल आए तो उनके पूरे जीवन को लेकर चिंता पैदा हो जाती है. सिर्फ भारत की बात करें तो यहां हर साल करीब 70 हजार नए बच्चे कैंसर की चपेट में आते हैं. इनमें से कुछ बच्चे सही समय पर बीमारी की पहचान के बाद इलाज पा जाते हैं, जबकि कुछ बच्चों को इलाज मिलने में देरी से उनकी जिंदगी खतरे में पड़ जाती है. हालांकि एम्स नई दिल्ली के पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग ने बच्चों में कैंसर के इलाज को लेकर बड़ी जानकारी दी है.
एम्स के पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग की प्रोफेसर, डॉ.रचना सेठ ने बताया कि करीब दस साल पहले कैंसर से पीड़ित बच्चों में से 50 फीसदी से भी कम को बचा पाना संभव हो पाता था लेकिन आज हर चार में से तीन बच्चे ठीक हो रहे हैं. यानि 75 फीसदी बच्चों को कैंसर के बाद इलाज से बचाया जा सकता है. यह आंकड़ा बताता है कि आज भारत में कैंसर के इलाज ने कितनी तरक्की कर ली है.
जबकि कुछ अन्य प्रकार के कैंसर में यह प्रगति और भी ज्यादा है. इस बारे में डॉ. आदित्य कुमार गुप्ता ने बताया कि हर प्रकार के कैंसर की रिकवरी दर अलग-अलग होती है जैसे एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया, इसमें पहले सिर्फ़ 30 फीसदी बच्चों को ही बचाना संभव होता था लेकिन आज की तारीख में इस कैंसर से पीड़ित 88 फीसदी बच्चों को बचाना संभव है.यह कैंसर के इलाज में बड़ी कामयाबी है.

वहीं बच्चों के आंखों में कैंसर यानि रेटिनोब्लास्टोमा में करीब 90 फीसदी बच्चों को ठीक किया जा सकता है. बता दें कि एम्स में हर साल 450 से 500 नए कैंसर के बच्चे आते हैं. इनमें सबसे कॉमन कैंसर हैं, ल्यूकेमिया यानि ब्लड कैंसर, लिम्फोमा, रेटिनोब्लास्टोमा, ब्रेन ट्यूमर और हड्डियों का कैंसर.

सबसे ज्यादा होते हैं ल्यूकेमिया और लिम्फोमा
प्रो. सेठ ने बताया कि बच्चों में सबसे ज्यादा मामले ल्यूकेमिया और लिम्फोमा के आते हैं, ये दोनों मिलाकर करीब एक-तिहाई मामलों में होते हैं, जबकि रेटिनोब्लास्टोमा करीब एक-चौथाई में होता है.इसके बाद ब्रेन और बोन कैंसर के मामले आते हैं.
जेनेटिक होता है कैंसर
डॉ. सेठ ने कहा कि बहुत सारे मामलों में कैंसर का कारण आनुवंशिक (जीन से जुड़ा) होता है लेकिन कैंसर के ज्यादातर मामलों का स्पष्ट कारण अब भी पता नहीं चल पाया है. यहां तक कि इलाज होने के बाद करीब 15 फीसदी मामलों में बीमारी दोबारा लौट आती है और इसके लिए और भी ज्यादा क्रिटिकल इलाज की जरूरत होती है.
इन दो राज्यों से आते हैं बच्चे
डॉ. सेठ ने बताया कि एम्स नई दिल्ली में ज्यादातर कैंसर के बच्चे उत्तर प्रदेश और बिहार राज्य से इलाज कराने के लिए आते हैं. इससे यह पता चलता है कि देशभर में बच्चों में कैंसर के इलाज की सुविधा समान रूप से उपलब्ध नहीं है.
हालांकि बीमारी की जल्दी पहचान होने और इलाज मिलने से इसकी रिकवरी दर बढ़ जाती है.आजकल कैंसर की आधुनिक दवाएं और मजबूत सहायक सेवाएं भी मौजूद हैं जो कैंसर के इलाज में कारगर साबित हो रही हैं.I]K,

“केंद्र ने चीन सीमा के पास हाइड्रो प्रोजेक्ट को दी ग्रीन मंजूरी, समझें क्या हैं मायने”

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केंद्र ने चीन सीमा के पास हाइड्रो प्रोजेक्ट को दी ग्रीन मंजूरी, समझें क्या हैं मायने

चीन की तरफ से तिब्बत में यारलुंग सांग्पो नदी पर दुनिया का सबसे बड़ा बांध बनाया जा रहा है। इस बांध को भारत के लिए बड़ी चिंता की वजह बताया जा रहा है। इस बीच केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की एक विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ने चीन की सीमा से लगे अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में स्थित 2,220 मेगावाट की ओजू जलविद्युत परियोजना को मंजूरी दे दी है।

यह भारत की सबसे बड़ी नदी-प्रवाह जलविद्युत परियोजनाओं में से एक है। इस परियोजना पर लगभग 25,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके पूरा होने में कम से कम पांच साल लगने की संभावना है।

अरुणाचल की तीसरी सबसे बड़ी परियोजना  यह अरुणाचल प्रदेश में ही स्थित 3,087 मेगावाट की एटालिन और 2,880 मेगावाट की दिबांग परियोजनाओं के बाद पर्यावरणीय मंज़ूरी पाने वाली भारत की तीसरी सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना है। ओजू, सुबनसिरी नदी पर प्रस्तावित बांधों की श्रृंखला में सबसे बड़ा है और लगभग 20 वर्षों से निर्माणाधीन है। इसमें 100 मीटर ऊँचा कंक्रीट का गुरुत्व बांध, 14 किलोमीटर से अधिक लंबी हेडरेस सुरंग और एक भूमिगत बिजलीघर परिसर शामिल है।

रियल टाइम अर्ली वॉर्निंग सिस्टम विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ने इस महीने की शुरुआत में परियोजना को अपनी मंज़ूरी देते हुए, डेवलपर को बाढ़ के अनुमानों के डिज़ाइन में ‘हिमनद झील के फटने से होने वाली बाढ़’ के परिदृश्यों को शामिल करने, एक वास्तविक समय पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित करने और सामुदायिक तैयारी अभ्यास करने का निर्देश दिया है। समिति ने पाँच वर्षों के बाद कमीशनिंग के बाद पर्यावरणीय प्रभाव अध्ययन का भी आदेश दिया है।

“Railway Ticket: दिवाली-छठ पर जाना है घर? लंबी-लंबी कतार में लगने से बचना चाहते हैं तो मोबाइल से बुक करें ट्रेन की जनरल टिकट”

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दिवाली और छठ के मौके पर ट्रेन से सफर करने वाले लोगों के लिए टिकट ले पाना किसी परीक्षा को पास करने से कम मुश्किल काम नहीं है। दरअसल, इस मौके पर ट्रेन में इतनी भीड़ होती है कि एडवांस बुकिंग में भी टिकट विंडो खुलते ही, सारी सीटें बुक हो जाती है।

वहीं अगर जनरल टिकट की बात करें, तो काउंटर से टिकट लेने के लिए काफी लंबी लाइन में खड़ा रहना पड़ता है। इन सबके बीच आइए जानते हैं कि कैसे आप ऑनलाइन भी जनरल टिकट बुक कर सकते हैं।

भारतीय रेलवे ने एक ऐप लॉन्च किया है। इस ऐप के जरिए आप जनरल टिकट ऑनलाइन बुक कर सकेंगे और आपको लंबी साइन में भी नहीं लगना पड़ेगा। अनरिजर्व्ड टिकटिंग सिस्टम (Unreserved Ticketing System) यानि कि UTS के जरिए आप बिना रिजर्वेशन जनरल डिब्बों में टिकट बुक कर सकते हैं। इसके साथ ही जनरल क्लास की टिकट भी यूटीएस के जरिए बुक कर सकते हैं।

ऐसे बुक करें जनरल टिकट सबसे पहले अपने फोन में UTS ऐप डाउनलोड करें अब इसमें मोबाइल नंबर डालकर अपना अकाउंट बनाएं अब आपके पास जर्नी टिकट, क्विक बुकिंग, प्लेटफॉर्म टिकट, सीजन टिकट और QR बुकिंग जैसे ऑप्शन मिलेंगे इनमें से अपने हिसाब से बुकिंग मोड चुनें ‘बुक एंड ट्रैवल (पेपरलेस)’ ऑप्शन चुनें इससे आपको टिकट का प्रिंट नहीं निकालना होगा और TTE को आप मोबाइल में ही टिकट दिखा सकेंगे सफर की शुरुआत और अपने आखिरी स्टेशन का नाम चुनें ‘Get Fare’ पर क्लिक करें और सभी जानकारी भरें अब आप अपने मोड के हिसाब से पेमेंट करें अब आप ‘बुक टिकट’ पर क्लिक करें और पेमेंट पूरा करते ही आपकी जनरल टिकट बुक हो जाएगी ऐसे मिलेगा कन्फर्म टिकट इमरजेंसी में टिकट बुकिंग के लिए सरकार तत्काल टिकट का ऑप्शन देती है। इसके जरिए आप यात्रा के एक दिन पहले अपना टिकट बुक कर सकते हैं। एसी क्लास के लिए बुकिंग का समय 10 बजे सुबह और नॉन-एसी के लिए 11 बजे सुबह होता है। आप खुद भी तत्काल टिकट बुक कर सकते हैं।

सबसे पहले IRCTC की ऑफिशियल वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर अपना अकाउंट बना लें और 10 बजने से पहले अपनी डिटेल अपने पास रखकर रेडी हो जाएं। एसी क्लास के लिए 10 बजने से पहले ऐप में लॉगिन करें और बुकिंग टैब में तत्काल का ऑप्शन क्लिक करने के बाद डेस्टिनेशन, बोर्डिंग स्टेशन और डेट सेलेक्ट कर लें।

10 बजते ही आपको अपनी पसंदीदा ट्रेन को सेलेक्ट करना है और बुक टिकट ऑप्शन पर क्लिक करना है। इसके बाद पैसेंजर की डिटेल भर लें और फिर नेक्स्ट करने के बाद कैप्चा दर्ज कर लें। फिर पेमेंट ऑप्शन पर क्लिक करके UPI, नेट बैंकिंग की मदद से पेमेंट कर लें। आपका टिकट बुक हो जाएगा।

“Kolkata Rain: ‘यूपी-बिहार की वजह से…’, बाढ़ ने मचाई तबाही तो टेंशन में अजीबोगरीब बयान देने लगीं ममता, बोलीं- मैंने ऐसी बारिश कभी नहीं देखी”

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कोलकाता में सोमवार देर रात से मंगलवार सुबह हुई मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। 24 घंटे से भी कम समय में 251.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो 1986 के बाद सबसे अधिक है।

इस प्रलयकारी बारिश के कारण कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई, जिनमें से नौ की मौत बिजली का करंट लगने से हुई। भारी बारिश ने बाद पूरे शहर में जलभराव की समस्या हो गई। सड़कें दरिया बन गई। रेल ट्रैक भी बारिश के पानी में डूब गया। इससे यातायात व्यवस्था चरमरा गई। रिहायशी इलाकों में भी कमर तक पानी जमा हो गया। अब इस जलभराव के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यूपी-बिहार को जिम्मेदार ठहरा दिया। आईए जानतें हैं ममता बनर्जी ने क्या कहा?

दुर्गा पूजा से ठीक पहले शहर में जलजमाव की स्थिति ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं। भारी बारिश की वजह से हवाई, रेल और सड़क परिवहन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस आपदा के लिए केंद्र सरकार और पड़ोसी राज्यों उत्तर प्रदेश व बिहार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि फरक्का बैराज की ठीक से सफाई न होने के कारण हर बार यूपी और बिहार से आने वाला पानी कोलकाता में जलजमाव की स्थिति पैदा करता है।

यूपी-बिहार की वजह से कोलकाता में जलभराव-ममता राजधानी कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों में मूसलाधार बारिश के कारण चारों तरफ हुए जलजमाव के मद्देनजर बंगाल सरकार ने बुधवार व गुरुवार को सरकारी स्कूलों में छुट्टी की घोषणा की है। भारी बारिश से महानगर व आसपास के जिलों में जनजीवन लगभग ठप हो गया है। इस बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कहा कि मैं मेयर, राज्य के मुख्य सचिव और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हूं। ममता ने कहा कि फरक्का बैराज की सफाई ठीक से नहीं हुई है, इसलिए हर बार जब बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मुंबई, दिल्ली, हर जगह बारिश होती है, तो जलभराव हो जाता है। इस बार बारिश थोड़ी असामान्य है।

मैंने जीवन में ऐसी बारिश पहले कभी नहीं देखी-ममता ममता बनर्जी ने आगे कहा यह भी कहा कि “मैंने अपने जीवन में ऐसी बारिश पहले कभी नहीं देखी। कोलकाता में आठ और उत्तर 24 परगना व दक्षिण 24 परगना में दो लोगों की करंट लगने से मौत हुई। यह बेहद दुखद है।” उन्होंने निजी बिजली कंपनी सीईएससी पर भी लापरवाही का आरोप लगाया और मांग की कि मृतकों के परिवारों को कम से कम पांच लाख रुपये का मुआवजा और नौकरी दी जाए। ममता ने कहा, सीईएससी को बिजली आपूर्ति की जिम्मेदारी लेनी होगी और तारों को सुरक्षित करना होगा।

दुर्गा पूजा से ठीक पहले हुई भारी बारिश के बाद हुए जलभराव पर मुख्यमंत्री ने कहा, “यह बारिश असामान्य है। हमारे घर भी जलमग्न हैं। मुझे दुर्गा पूजा पंडालों के लिए भी बहुत बुरा लग रहा है।” उन्होंने बताया कि वह महापौर, मुख्य सचिव और पुलिस के साथ लगातार संपर्क में हैं और स्थिति पर नजर रख रही हैं। ममता ने चेतावनी दी कि गंगा में पानी का स्तर बढ़ने से स्थिति और गंभीर हो सकती है।

जलभराव के लिए बंगाल प्रशासन जिम्मेदरार- सुवेंदु अधिकारी वहीं, पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष व भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने कोलकाता के कई इलाकों में भारी बारिश के बाद हुई तबाही पर कहा, इसके लिए सीधे तौर पर ममता बनर्जी का प्रशासन जिम्मेदार है। IMD की ओर से पहले ही सावधानी बरतने के लिए कहा गया था लेकिन उन्हें जो एहतियाती उपाय करने चाहिए थे वे नहीं किए गए। कोलकाता पुलिस, कोलकाता प्रशासन और CESC की लापरवाही के कारण कई लोगों की जान चली गई हमारे कई लोग मारे गए हैं और यह आंकड़ा बढ़ सकता है।

IMD ने भारी बारिश की दी थी चेतावनी IMD ने पहले ही सावधानी बरतने को कहा तब कुछ नहीं किया गया लेकिन ममता बनर्जी अब कह रही हैं कि यह स्थिति अचानक पैदा हुई है। हमारी मांग है कि जितने भी लोगों की मौत हुई है उन्हें CESC, राज्य सरकार और कोलकाता निगम की ओर से 1-1 करोड़ रुपये दिए जाने चाहिए, हर घर में नौकरी दी जानी चाहिए और तुरंत CESC के चेयरमैन, कोलकाता के मेयर और कोलकाता पुलिस के CP के खिलाफ गैर-जमानती FIR दर्ज की जानी चाहिए।

“‘दुनिया के युद्ध खत्म करने में भारत की होगी अहम भूमिका’, UNGA के मंच से जॉर्जिया मेलोनी ने की भारत की खूब तारीफ; क्या-क्या कहा?”

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न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक जारी थी। इसी बीच, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने भारत का नाम लेकर कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव में भारत एक बड़ी भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत के पास वह संतुलन है, जो इस समय दुनिया को चाहिए। उधर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का लहजा कुछ और ही था। उन्होंने सीधे कहा कि चीन और भारत रूस से तेल खरीदकर इस युद्ध को सहारा दे रहे हैं। ट्रंप यहीं नहीं रुके। यूरोप के देशों को भी उन्होंने घेरा और सवाल किया कि जब वे खुद रूस से खरीदारी कर रहे हैं, तो अमेरिका से क्यों उम्मीद करते हैं कि वह दूसरों को रोके।

इन तीखी टिप्पणियों के बीच एक तथ्य साफ है कि लगभग हर बड़ा यूरोपीय देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लगातार संपर्क बना रहा है। फ्रांस से लेकर जर्मनी और ब्रिटेन तक, सभी नेताओं का एक ही तर्क है कि नई दिल्ली चाहे तो युद्ध रोकने की दिशा में रास्ता निकल सकता है। ट्रंप ने भी हाल ही में मोदी से हुई बातचीत के बाद सोशल मीडिया पर लिखा था कि भारत की कोशिशें काम आ रही हैं।

वार्ता ही समाधान है भारत की नीति पहले दिन से साफ रही है कि वार्ता ही समाधान है। यही कारण है कि मोदी एक तरफ पुतिन से सीधे संवाद रखते हैं, तो दूसरी ओर जेलेंस्की से भी चर्चा करते रहते हैं। किसी पक्ष की तरफदारी नहीं, बल्कि शांति की पैरवी। शायद यही वजह है कि आज जब बड़े-बड़े देश विभाजित दिखाई दे रहे हैं, तो उम्मीद की निगाहें भारत की ओर मुड़ रही हैं।

रूस के खिलाफ डोनाल्ड ट्रंप ने दिया फ्री हैंड अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस, नाटो और यूरोप की नीतियों पर तीखा हमला बोला है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान दिए गए भाषण और उसके बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मुलाकात में उन्होंने कई विवादित बयान दिए।

जेलेंस्की के साथ बैठक के दौरान ट्रंप से पूछा गया कि अगर रूसी युद्धक विमान नाटो देशों की हवाई सीमा का उल्लंघन करता है तो अमेरिका क्या भूमिका निभाएगा। इस पर उन्होंने कहा कि ऐसे विमानों को तुरंत मार गिराना चाहिए। हालांकि, जब सवाल किया गया कि क्या वॉशिंगटन हर हाल में नाटो का समर्थन करेगा, तो ट्रंप का जवाब था- “यह परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।”

ट्रंप ने दावा किया कि उन्हें उम्मीद थी कि रूस-यूक्रेन युद्ध जल्द खत्म हो जाएगा। उनके शब्दों में, यह संघर्ष “बस एक छोटी-सी झड़प” होना चाहिए था, लेकिन यह लंबा खिंच गया, जिससे रूस की छवि भी प्रभावित हुई।