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: ‘भारत पर टैरिफ लगाना बिल्कुल सही.’, अमेरिका की भाषा बोलने लगा यूक्रेन, सुनें जेलेंस्की का यह बयान”

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: ‘भारत पर टैरिफ लगाना बिल्कुल सही.’, अमेरिका की भाषा बोलने लगा यूक्रेन, सुनें जेलेंस्की का यह बयान”

रूस से तेल खरीदी और चीन जैसे पड़ोसियों के करीब जाना अमेरिका को पसंद नहीं आया। इसके बाद अमेरिका ने भारत के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए 50 फ़ीसदी टैरिफ का ऐलान कर दिया।

हालांकि भारत अकेल देश नहीं जिस पर अमेरिका ने भारी-भरकम टैरिफ लगाया हो। कई विकसशील देश है जिस पर अमेरिकी राष्ट्रपति की मनमानी देखने को मिली है। विश्व जगत ने अमेरिका के इस कदम की मुखालफत भी की है और भारत के पक्ष में खड़े नजर आये, लेकिन इस मामले में रूस के प्रतिद्वंदी और अमेरिका के करीबी देश यूक्रेन की राय अलग है।

क्या कहा जेलेंस्की ने? एक इंटरव्यू में व्लादिमीर जेलेंस्की ने अमेरिकी टैरिफ का समर्थन करते हुए कहा कि, “जो कोई भी देश रूस के साथ कारोबार करता है उसके खिलाफ लगाए गए टैरिफ के आइडिया को वह सही मानते है”..

अमेरिकी अदालतों में आव्रजन नीतियों को चुनौती

टैरिफ से जुड़े इन विवादों के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के इतिहास में सबसे बड़े निर्वासन कार्यक्रम के तहत लाखों लोगों को देश से बाहर निकालने का वादा किया है लेकिन उनकी कई आव्रजन नीतियों को अमेरिकी अदालतों में कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उदाहरण के लिए, एक संघीय अपील अदालत ने पिछले सप्ताह फैसला सुनाया कि ट्रंप प्रशासन कथित वेनेजुएला गिरोह के सदस्यों को शीघ्रता से निर्वासित करने के लिए 18वीं सदी के युद्धकालीन कानून का उपयोग नहीं कर सकता। संभवत: यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचेगा।

ट्रंप प्रशासन ने 1798 के एलियन एनिमीज़ एक्ट का उपयोग ”ट्रेन डी अरगुआ” नामक गिरोह के सदस्यों को विदेशी आक्रांता मानते हुए निष्कासित करने के लिए किया। इन लोगों को एल सल्वाडोर की एक कुख्यात जेल में भेजा गया। बहरहाल, पांचवें सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने अपने निर्णय में कहा कि यह कानून आपराधिक गिरोहों पर लागू नहीं होता। एसीएलयू के वकील ली गेलरंट ने इसे अदालत की निगरानी के बिना आपात स्थिति घोषित करने के प्रशासन के प्रयासों पर लगाम लगाने वाला फैसला बताया। वहीं, व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एबिगेल जैकसन ने कहा कि राष्ट्रपति को आतंकवादियों को हटाने और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने का अधिकार है।

एक अन्य नीति के तहत ट्रंप ने 14वें संशोधन की व्याख्या को बदलने के लिए एक कार्यकारी आदेश जारी किया, जिसके तहत अवैध या अस्थायी वीजा पर अमेरिका में मौजूद माता-पिता से जन्मे बच्चों को नागरिकता देने से इनकार किया गया। वॉशिंगटन, एरिज़ोना, इलिनॉय और ओरेगन जैसे राज्यों ने इस आदेश को चुनौती दी, और संघीय अपीलीय अदालत ने जुलाई में इस आदेश को असंवैधानिक ठहराया।

सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी कि सैन फ्रांसिस्को में चीनी माता-पिता से जन्मा बच्चा अमेरिकी धरती पर जन्म लेने के कारण अमेरिकी नागरिक है। सैन फ्रांसिस्को की एक संघीय अपील अदालत ने जुलाई के अंत में फैसला सुनाया कि ट्रंप का आदेश असंवैधानिक है, और न्यू हैम्पशायर की निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा जिसने इस आदेश को देश भर में लागू होने से रोक दिया था। ट्रंप प्रशासन ने उन आप्रवासियों को एल साल्वाडोर और दक्षिण सूडान जैसे देशों में भेजना शुरू किया जिनका उन देशों से कोई संबंध नहीं है।

ट्रंप के अधिकारियों ने कहा है कि ये अप्रवासी अक्सर ऐसे देशों से आते हैं जो उन्हें वापस नहीं लेते या हिंसक अपराधों के दोषी पाए गए हैं। इस साल वकालत करने वाले समूहों ने यह तर्क देते हुए मुकदमा दायर किया कि लोगों के उचित प्रक्रिया अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है और अप्रवासियों को उन देशों में भेजा जा रहा है जहाँ मानवाधिकारों के उल्लंघन का लंबा इतिहास रहा है। मार्च में एक संघीय न्यायाधीश ने इस नीति को अस्थायी रूप से रोका था, लेकिन जून में सुप्रीम कोर्ट ने उसे पलटते हुए प्रशासन को निर्वासन जारी रखने की अनुमति दे दी। एसवातिनी भेजे गए पांच व्यक्तियों के वकीलों ने कहा कि उन्हें बिना आरोप या वकील तक पहुंच के जेल में रखा गया है।

इस साल के शुरू में दक्षिण कैलिफोर्निया में किए गए व्यापक छापों के दौरान ट्रंप प्रशासन पर नस्लीय प्रोफाइलिंग का आरोप लगा। संघीय अदालत ने प्रशासन को लॉस एंजेलिस सहित सात काउंटी में इस तरह की कार्रवाई पर रोक लगाने का आदेश दिया। यह आदेश संविधान के उल्लंघन के आधार पर दिया गया था। ट्रंप प्रशासन ने इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

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ऐसे कार्यक्रमों को ट्रंप प्रशासन ने सख्ती से समाप्त करने का प्रयास किया जो संकटग्रस्त देशों के नागरिकों को अमेरिका में अस्थायी रूप से रहने और काम करने की अनुमति देते हैं। अस्थायी संरक्षित दर्जा (टीपीएस) और मानवीय पैरोल के तहत 15 लाख से अधिक लोग अमेरिका में रह रहे हैं। मई में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को मुकदमे के लंबित रहते हुए इन कार्यक्रमों को समाप्त करने की अनुमति दी, जिससे लाखों लोगों पर निर्वासन का खतरा मंडरा गया। हालांकि यूएस डिस्ट्रिक्ट जज एडवर्ड चेन ने वेनेजुएला और हैती के 11 लाख नागरिकों के लिए टीपीएस बहाल कर दिया और कहा कि घरेलू सुरक्षा मंत्री के पास इसे रद्द करने का कानूनी अधिकार नहीं था।

जनवरी में, ट्रंप प्रशासन ने तेजी से देश से निकालने की प्रक्रिया का विस्तार किया, जिससे उन प्रवासियों को न्यायिक सुनवाई के बिना देश से निकाला जा सकता है जो अवैध रूप से आए और दो वर्षों से कम समय से अमेरिका में हैं। यूएस डिस्ट्रिक्ट जज जिया कॉब ने अगस्त में इस विस्तार को यह कहते हुए अस्थायी रूप से रोक दिया कि यह व्यक्तियों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है। उन्होंने एक अन्य मामले में मानवीय पैरोल के तहत आए लोगों के भी त्वरित निर्वासन को अस्थायी रूप से रोक दिया।

CG: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के हितग्राहियों के लिए बड़ी खबर!

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केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के हितग्राहियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस योजना के हितग्राहियों को सब्सिडी के तौर पर राशि उनके बैंक खतों में अंतरित कर दी है। सीएम ने हितग्राहियों के खातों में एक करोड़ 83 लाख रुपये ट्रांसफर किया है।

सीएम दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित हो रहे सौर ऊर्जा जागरूकता कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा, छत्तीसगढ़ में हम सौर ऊर्जा को बढ़ावा दे रहे है। हम इस तरह हाफ की जगह मुफ्त बिजली की ओर जा रहे है। हमने सौर ऊर्जा जागरूकता के लिए सूर्य रथ रवाना किए है। सैकड़ों लोग पीएम सूर्य घर योजना का लाभ ले रहे है। इसके लिए केंद्र और राज्य की सरकार सब्सिडी भी दे रही है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित सरयूपारीण ब्राह्मण सभा भवन में आयोजित विराट संस्कृत विद्वत्-सम्मेलन को संबोधित किया…

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छत्तीसगढ़ के भारतीय संस्कृति की आत्मा संस्कृत में निहित है, जो हमें विश्व पटल पर एक विशिष्ट पहचान प्रदान करती है। संस्कृत भाषा व्याकरण, दर्शन और विज्ञान की नींव है, जो तार्किक चिंतन को बढ़ावा देती है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के संजय नगर स्थित सरयूपारीण ब्राह्मण सभा भवन में आयोजित विराट संस्कृत विद्वत्-सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही।

संस्कृत हमारी विरासत का आधार
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि संस्कृत शिक्षा आधुनिक युग में भी प्रासंगिक और उपयोगी है। संस्कृत भाषा और साहित्य हमारी विरासत का आधार हैं, जिन्हें हमें संरक्षित और संवर्धित करना चाहिए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि देववाणी संस्कृत पर चर्चा के साथ यह सम्मेलन भारतीय संस्कृति, संस्कार और राष्ट्र को सुदृढ़ बनाने का एक महान प्रयास है। मुख्यमंत्री साय ने संस्कृत भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए संस्कृत भारती छत्तीसगढ़ और सरयूपारीण ब्राह्मण सभा छत्तीसगढ़ द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की तथा उन्हें बधाई और शुभकामनाएँ दीं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आधुनिक शिक्षा में संस्कृत भाषा को शामिल करने से विद्यार्थियों का बौद्धिक विकास सुनिश्चित होगा। संस्कृत में वेद, उपनिषद और पुराण जैसे ग्रंथों का विशाल भंडार है, जो दर्शन, विज्ञान और जीवन-मूल्यों का संदेश देते हैं। वेदों में वर्णित आयुर्वेद, गणित और ज्योतिष आज भी प्रासंगिक हैं और शोध का विषय हो सकते हैं। इन ग्रंथों में कर्म, ज्ञान और भक्ति के सिद्धांत स्पष्ट रूप से प्रतिपादित हैं, जो आधुनिक जीवन में शांति और संतुलन ला सकते हैं।ऐसे में संस्कृत शिक्षा आधुनिक युग में भी उतनी ही प्रासंगिक और उपयोगी है।

इसे संरक्षित करना सबकी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि वेदों और उपनिषदों के ज्ञान को अपनाकर हम अपनी विरासत को संजोने के साथ-साथ अपने जीवन को भी समृद्ध बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमें युवाओं को संस्कृत साहित्य से जोड़ने के लिए प्रेरित करना होगा, ताकि वे इस ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुँचा सकें।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि तकनीक के माध्यम से संस्कृत शिक्षा को आकर्षक और प्रासंगिक बनाया जा सकता है। राज्य में संस्कृत विद्वानों और शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी से इस दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि इस सम्मेलन के माध्यम से हमें संस्कृत विद्या के प्रचार-प्रसार और अगली पीढ़ी को जोड़ने का संकल्प लेना चाहिए।
मुख्यमंत्री साय विराट संस्कृत विद्वत्-सम्मेलन में हुए शामिल
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने सरयूपारीण ब्राह्मण सभा, छत्तीसगढ़ के प्रचार पत्रक का विमोचन भी किया। विराट संस्कृत विद्वत्-सम्मेलन का आयोजन संस्कृत भारती छत्तीसगढ़ एवं सरयूपारीण ब्राह्मण सभा छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए संस्कृत भारती के प्रांताध्यक्ष डॉ. दादू भाई त्रिपाठी ने कहा कि इतिहास में ऐसे अनेक प्रमाण मिलते हैं, जिनसे सिद्ध होता है कि एक समय संस्कृत जनभाषा के रूप में प्रचलित थी। छत्तीसगढ़ी भाषा का संस्कृत से सीधा संबंध है। छत्तीसगढ़ी में पाणिनि व्याकरण की कई धातुओं का सीधा प्रयोग होता है। उन्होंने यह भी बताया कि सरगुजा क्षेत्र में सर्वाधिक आदिवासी विद्यार्थी संस्कृत की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
संस्कृत संरक्षण पर मुख्यमंत्री साय ने जताया जोर
मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में सरयूपारीण ब्राह्मण समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया। इनमें गठिया रोग विशेषज्ञ डॉ. अश्लेषा शुक्ला, उत्कृष्ट तैराक अनन्त द्विवेदी तथा पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ला शामिल थे।
सम्मेलन को दंडी स्वामी डॉ. इंदुभवानंद महाराज, सरयूपारीण ब्राह्मण सभा छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष डॉ. सुरेश शुक्ला और अखिल भारतीय संस्कृत भारती शिक्षण प्रमुख डॉ. श्रीराम महादेव ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर डॉ. सतेंद्र सिंह सेंगर, अजय तिवारी, बद्रीप्रसाद गुप्ता सहित बड़ी संख्या में संस्कृत शिक्षकगण, सामाजिक प्रतिनिधि और गणमान्यजन उपस्थित थे।

CG: एक नवंबर से पुलिस कमिश्नर प्रणाली की शुरूआत होगी, गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय ने सिस्टम का अध्ययन कर बेहतर कार्य योजना बनाने का प्रयास…

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CG: एक नवंबर से पुलिस कमिश्नर प्रणाली की शुरूआत होगी, गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय ने सिस्टम का अध्ययन कर बेहतर कार्य योजना बनाने का प्रयास…

एक नवंबर से रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली की शुरूआत होगी। गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। कई राज्यों के सिस्टम का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में बेहतर कार्ययोजना बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इस समय रायपुर में आईजी और एसएसपी को मिलाकर दो आईपीएस लॉ एंड आर्डर संभाल रहे हैं। मगर पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू होने के बाद अब आईपीएस अधिकारियों की संख्या बढ़कर सात हो जाएगी। इसी तरह राज्य पुलिस सेवा के भी करीब बारह से अधिक अधिकारियां को अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए पदस्थ किया जाएगा। गौरतलब है कि राज्य कैबिनेट की बैठक में इसके लिए प्रस्ताव पारित हो चुका है। इस प्रणाली के तहत सीनियर पुलिस अधिकारी दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत कई मामलों में सीधे कार्रवाई कर सकेंगे।

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में गुटबाजी तेज, नेताओं पर खुलकर विरोध…

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रायपुर में विधानसभा, लोकसभा और नगरीय निकाय चुनाव में मिली हार के बाद कांग्रेस की गुटबाजी खुलकर सामने आ रही है।

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में गुटबाजी तेज, नेताओं पर खुलकर विरोध…

वहीं, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के बयान के बाद कांग्रेस में अंदरुनी खींचतान बढ़ गई है। ऐसे में कांग्रेस प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट भी 9 सितबर को छत्तीसगढ़ आ रहे हैं। माना जा रहा है कि उनका यह प्रवास काफी परेशानियों भरा हो सकता है। कांग्रेस में अलग-अलग गुटों में बंटे नेता शिकायतों की झड़ी लगाने वाले हैं। इसके लिए अंदरखाने में तैयारी भी तेज हो गई है।

प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में पूर्व मंत्री चौबे के खिलाफ अनुशासनहीनता का प्रस्ताव पारित करने से गुटबाजी चरम पर आ गई थी। इस दौरान चौबे के समर्थन में एक-दो जिलाध्यक्षों ने समझने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी। इसी बीच नेता प्रतिपक्ष डॉ. महंत ने चमचों को समझने की नसीहत भी दे दी थी।

इससे दूसरे गुट के नेता नाराज हो गए। अभी तक किसी ने खुलकर बड़ा बयान नहीं दिया है, लेकिन माना जा रहा है कि प्रदेश प्रभारी पायलट के प्रवास के दौरान खुलकर अपनी बात रखेंगे। दूसरे गुट के कार्यकर्ता महंत के खिलाफ शिकायतों का पुलिंदा तैयार कर लिया है।

रवीन्द्र चौबे के खिलाफ प्रस्ताव के बाद कांग्रेस में हलचल
रायपुर कांग्रेस ने मंत्री केदार कश्यप पर चतुर्थ वर्ग कर्मचारी से मारपीट करने का आरोप लगाया है। इसके बाद कांग्रेस ने मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। रविवार को प्रदेश के सभी जिला मुयालयों में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने मंत्री के खिलाफ प्रदर्शन और सांकेतिक तौर पर पुतला दहन किया। कांग्रेस ने मंत्री को हटाने की मांग की है। इसे लेकर कांग्रेस के कार्यकर्ता सोमवार को राजधानी में मंत्री के बंगले का घेराव करेंगे। हालांकि इस मामले में मंत्री कश्यप ने इस प्रकार की घटना होने से इनकार किया।
कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने राजधानी में नगर निगम मुख्यालय के सामने पुतला दहन कर विरोध-प्रदर्शन किया। इस दौरान कांग्रेसजनों और पुलिस के बीच हल्की झूमाझटकी भी हुई। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने मंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की।
पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का असली चेहरा अब जनता के सामने आ गया है। कर्मचारी वर्ग के साथ इस तरह का व्यवहार घोर निंदनीय है। कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि मंत्री तुरंत इस्तीफा दें, अन्यथा प्रदेशभर में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस दौरान शहर कांग्रेस अध्यक्ष गिरीश दुबे, उधोराम वर्मा प्रमोद चौबे, शिव सिंह ठाकुर, बंशी कन्नौजे सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे।
पहले भी चले हैं जुबानी तीर
हाल ही में हुए विवाद से पहले भी भी कांग्रेस के भीतर जुबानी तीर चल चुके हैं। नेता प्रतिपक्ष ने टीएस सिंहदेव के नेतृत्व में चुनाव लड़ने की बात कहीं थी। हालांकि इस मामले में उन्होंने अपनी सफाई भी दी थी। उनके खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन पूर्व मंत्री चौबे के मामले में संगठन को सत होना पड़ा। संगठन का मानना है कि यदि अनुशासन का डंडा नहीं चलाया गया तो आगे परेशानी ओर बढ़ सकती है। बता दें कि इससे पहले रायपुर के पूर्व विधायक ने भी संगठन की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे।

डिवीजन कार्गो बुनियादी ढांचे और राजस्व को बढ़ावा देने के लिए 35 साल के लिए रेलवे की जमीन पट्टे पर देगा…

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डिवीजन कार्गो बुनियादी ढांचे और राजस्व को बढ़ावा देने के लिए 35 साल के लिए रेलवे की जमीन पट्टे पर देगा…

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (एसईसीआर) का रायपुर मंडल अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली रेलवे की ज़मीन, जिसमें माल शेड और साइडिंग के आसपास का क्षेत्र भी शामिल है, को 35 साल की अवधि के लिए व्यावसायिक उपयोग के लिए पट्टे पर देगा।

इस कदम से रेलवे के राजस्व में वृद्धि होने की उम्मीद है।प्रभाग ने कार्गो-संबंधित बुनियादी ढांचे के विकास में निवेश करने के लिए संभावित ग्राहकों और उद्योगों से रुचि की अभिव्यक्ति आमंत्रित की है।

भूमि का उपयोग गोदामों, पीसने वाले साइलो, टैंकों, कन्वेयर बेल्टों तथा लोडिंग-अनलोडिंग के लिए अन्य सुविधाएं स्थापित करने के लिए किया जा सकता है।व्यवसाय रेल-सड़क तौल पुल और ट्रक पार्किंग, छंटाई, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, लेबलिंग और संयोजन के लिए सुविधाएं भी स्थापित कर सकते हैं।

परियोजना की लीज़ अवधि 35 वर्ष है, और लीज़ शुल्क भूमि के बाज़ार मूल्य का 1.5% प्रति वर्ष निर्धारित किया गया है। इस शुल्क में प्रति वर्ष 6% की वृद्धि होगी।

कुम्हारी, भिलाई, कुसुमकसा, गुदुम, मंदिर हसौद, बेल्हा, दाधापारा, अंतागढ़, तिल्दा नेओरा, भाटापारा, सिलियारी, रायपुर, रायपुर (आरएसडी), बालोद, लाखोली, भानुप्रतापपुर, अभनपुर, राजिम, हथबंध और रावघाट में परिचालन रेलवे माल शेड के पास भूमि पार्सल उपयोग के लिए उपलब्ध हैं।

CG: हाई प्रोफाइल ड्रग्स तस्करी मामले में नव्या मालिक के कनेक्शन कई हाई प्रोफाइल लोगों से होने की बात सामने आई है… पुलिस कर रही जांच!

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राजधानी रायपुर की ड्रग्स क्वीन नव्या मलिक को जेल भेज दिया गया है. प्रारंभिक जांच में नव्या ने शराब कारोबारी और उनके बेटे से अपना कनेक्शन कबूल लिया है.

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में हाई प्रोफाइल ड्रग्स तस्करी मामले में इंटीरियर डिजाइनर और मॉडल नव्या मालिक और उसकी सहेली विधि अग्रवाल समेत उसके सहयोगी जेल तो दाखिल हो गए हैं, लेकिन उससे पहले पुलिस की पूछताछ में उन्होंने कई राज उगले हैं. हाई प्रोफाइल ड्रग्स सिंडिकेट के कनेक्शन कई रईसजादों से जुड़ने नजर आ रहे. पुलिस की पूछताछ में नव्या मलिक के कनेक्शन कई हाई प्रोफाइल लोगों से होने की बात सामने आई है.

एक पूर्व मंत्री और दो विधायकों के बेटों से नव्या मलिक का कनेक्शन

रायपुर पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मॉडल नव्या मलिक के एक पूर्व मंत्री और दो विधायकों के बेटों से भी कनेक्शन मिले हैं. नव्या का कनेक्शन एक पूर्व मंत्री एक विधायक के बेटे और एक विधायक के भतीजे से मिला है. सूत्र बताते हैं कि एक पूर्व मंत्री और एक विधायक के बेटे और एक विधायक के भतीजे नव्या मलिक के साथ कई बार फार्म हाउस में नाइट पार्टी में शामिल हुए. रायपुर के पेट्रोल पंप संचालक से भी नव्या के कनेक्शन थे.

पुलिस कर रही जांच

नव्या के मोबाइल से 300 से ज्यादा संदिग्ध कांटेक्ट नंबर पुलिस को मिले हैं, जो छत्तीसगढ़ के बड़े उद्योगपति, कपड़ा, सराफा कारोबारी, रियल एस्टेट कारोबारी के घर के युवाओं से संबंधित हैं. पुलिस का कहना है कि नव्या पेशे से इंटीरियर डिजाइनर भी थी. ऐसे में इनके संबंध इंटीरियर डिजाइनिंग से जुड़े काम को लेकर थे… या फिर ड्रग्स तस्करी में थे. इसकी जांच की जा रही है.

इंटीरियर डिजाइन की आड़ में ड्रग की सप्लाई?

रायपुर पुलिस ने बताया कि राज्य के एक बड़े शराब कारोबारी के एक संदिग्ध बेटे के घर का इंटीरियर डिजाइन नव्या मलिक ने किया था. इसके बाद से दोनों लगातार संपर्क में थे. पुलिस जांच कर रही कि क्या इंटीरियर डिजाइन की आड़ में क्या ड्रग सप्लाई भी किया जाता था?

रायपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉक्टर लाल उमेद सिंह ने बताया कि हरियाणा से ड्रग्स लेकर आए आरोपी के भी नव्या से कनेक्शन मिले हैं. पुलिस नव्या और विधि अग्रवाल से मिले कांटेक्ट नंबर और उनके संपर्क में रहे लोगों को लेकर जांच कर रही है. इस मामले में आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं.

ड्रग्स तस्करी मामले में नव्या मलिक गिरफ्तार

बता दें कि बीते 30 अगस्त को रायपुर पुलिस ने मुंबई से इंटीरियर डिजाइनर और मॉडल नव्या मलिक को ड्रग्स तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया था. इसके दूसरे दिन नव्या के करीबी दोस्त आएं परवेज को रायपुर से गिरफ्तार किया गया था. इसी बीच हरियाणा से ड्रग सप्लाई करने के लिए रायपुर आए एक पेडलर को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया उससे पूछताछ में उसके कनेक्शन भी नव्या से मिले.

मॉडल नव्या मलिक पुलिस रिमांड पर

3 सितंबर को इसी मामले में चार और लोगों की गिरफ्तारी की गई, जिसमें विधि अग्रवाल जुनैद और सोहेल खान शामिल थे. नव्या मालिक से 31 अगस्त से 6 सितंबर और विधि अग्रवाल और उसके सहयोगियों से 4 सितंबर से 6 सितंबर के बीच में पुलिस रिमांड लेकर पूछताछ की गई. पुलिस की पूछताछ में ड्रग्स तस्करी से जुड़े  कई अहम राज पता चले हैं. पूछताछ और पुलिस रिमांड खत्म होने के बाद 6 सितंबर को सभी आरोपियों को रायपुर में पंकज कुमार सिन्हा की कोर्ट में पेश किया गया. जहां से ज्यूडिशियल रिमांड पर 15 सितंबर तक के लिए सभी आरोपियों को जेल भेज दिया गया है.

”छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद में 14वें मंत्री को शामिल किए जाने को इस आधार पर चुनौती… याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई होने की संभावना”

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”छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद में 14वें मंत्री को शामिल किए जाने को इस आधार पर चुनौती… याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई होने की संभावना”

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 20 अगस्त को तीन और विधायकों को मंत्री बनाया, जिससे मंत्रिपरिषद में सदस्यों की संख्या 14 हो गई। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद में 14वें मंत्री को शामिल किए जाने को इस आधार पर चुनौती दी है कि संविधान के अनुच्छेद 164 (1) के तहत लागू 15% नियम के तहत राज्य में केवल 13 मंत्री ही हो सकते हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 20 अगस्त को तीन और विधायकों को मंत्री बनाया, जिससे मंत्रिपरिषद की संख्या 14 हो गई।

”राज्य कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा, “हमने एक रिट याचिका दायर की है और मामले की सुनवाई उच्च न्यायालय में होगी।”‘

याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई होने की संभावना है।

अपनी याचिका में कांग्रेस ने तर्क दिया कि 14वें मंत्री को शामिल करने का निर्णय संविधान के अनुच्छेद 164 (1ए) का उल्लंघन है, जिसमें कहा गया है कि किसी राज्य में मंत्रियों की संख्या विधान सभा की कुल संख्या के 15% से अधिक नहीं हो सकती।

छत्तीसगढ़ विधानसभा में सदस्यों की संख्या 90 है।

कांग्रेस ने 20 अगस्त के शपथ ग्रहण समारोह के कुछ दिनों बाद ही संवैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन का मुद्दा उठाया था। उस समय, विपक्ष के नेता चरणदास महंत ने छत्तीसगढ़ के राज्यपाल को पत्र लिखकर एक मंत्री को हटाने की मांग की थी, और तर्क दिया था कि “90 का 15% 13.50 होता है, यानी मंत्रियों की संख्या 13 से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए।”

राज्यपाल कार्यालय ने अभी तक इस मामले पर कोई बयान जारी नहीं किया है।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि मुख्यमंत्री और राज्यपाल रमेन डेका ने असंवैधानिक तरीके से काम किया है और याद दिलाया कि जुलाई 2004 में 91वें संविधान संशोधन के लागू होने के बाद राज्य सरकार ने संविधान की मूल भावना को कमजोर कर दिया था।

”बघेल ने यह भी बताया कि 2019 में उनकी सरकार ने भौगोलिक रूप से बड़े राज्यों के लिए इस सीमा को बढ़ाकर 20% करने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन केंद्र सरकार से इसे मंजूरी नहीं मिली।”

उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने जोर देकर कहा कि सरकार ने संवैधानिक ढांचे के भीतर काम किया है।

”उन्होंने कहा, “उचित प्रक्रिया का पालन किया गया है। हमारे सामने हरियाणा का उदाहरण है। जिनका संविधान को कुचलने का इतिहास रहा है, उन्हें ऐसे आरोप नहीं लगाने चाहिए।”

“तेजस्वी यादव ने नीतीश बाबू पर दागे सवालों के 12 ‘अग्निबाण’, बोले- मुंह न छिपाएं, ब्लकि जवाब दें”

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“तेजस्वी यादव ने नीतीश बाबू पर दागे सवालों के 12 ‘अग्निबाण’, बोले- मुंह न छिपाएं, ब्लकि जवाब दें”

बिहार में विधानसभा चुनाव को लेकर तारीखों का ऐलान जल्द ही किया जाने वाला है। चुनाव से पहले वहां का माहौल काफी गर्माया हुआ है। राजनीतिक पार्टियों द्वारा एक दूसरे पर तंज कसे जा रहे हैं।

अब हाल ही में तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश कुमार और सरकार पर हमला किया है। तेजस्वी ने सोशल मीडिया पर 12 तीखे सवाल दागकर एनडीए सरकार को घेरने की कोशिश की है।

तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि पिछले 20 साल से बिहार में और 11 साल से केंद्र में नीतीश-मोदी की सरकार होने के बावजूद बिहार बेरोजगारी, पलायन और गरीबी का केंद्र बन गया है। उन्होंने कहा कि यह बात सिर्फ वे नहीं, बल्कि भारत सरकार की नीति आयोग की रिपोर्ट भी कहती है

तेजस्वी यादव के सवाल तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार के 8 करोड़ युवा पिछले 20 साल से मुख्यमंत्री से ये सवाल पूछना चाहते हैं:

  1. बिहार में केला, मक्का, मखाना, चावल, गन्ना, आलू, लीची और आम जैसे कई विश्व-प्रसिद्ध कृषि उत्पाद होते हैं। फिर भी इनसे जुड़े food processing industryबिहार में क्यों नहीं लगाई गई?
  2. बिहार बेरोजगारी का मुख्य केंद्र क्यों बना? 20 वर्षों में आईटी कंपनियां बिहार में क्यों नहीं आईं और यहां आईटी पार्क या विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) क्यों नहीं बन सके?
  3. बिहार में मछली उत्पादन के सभी संसाधन होने के बावजूद यहां मछली उत्पादन को बढ़ावा क्यों नहीं दिया गया? बिहार दूसरे राज्यों से मछली क्यों खरीदता है?
  4. राज्य में डेयरी प्रोडक्ट्स से जुड़े बड़े उद्योग क्यों नहीं लगाए गए? बिहार का दूध, घी, मक्खन और पनीर दूसरे राज्यों और देशों में क्यों नहीं भेजा जा सकता?
  5. बिहार में Industry-specific clusters क्यों नहीं लगाए जा सकते?
  6. बुनकर उद्योग, लघु उद्योग और हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए क्या किया गया?
  7. बिहार में पर्यटन की अपार संभावनाएं होने के बावजूद इसे पर्यटन केंद्र के रूप में क्यों विकसित नहीं किया गया?
  8. सरकार ने नियुक्ति और भर्ती की प्रक्रियाओं को पारदर्शी और नियमित क्यों नहीं बनाया?
  9. पिछले 20 सालों में बिहार से कुल कितना पलायन हुआ और पलायन की दर इतनी क्यों बढ़ रही है?
  10. पिछले 20 सालों में कितने चीनी मिल, जूट मिल, पेपर मिल और अन्य कल-कारखाने बंद हुए? इससे राजस्व और रोजगार का कितना नुकसान हुआ?
  11. शिक्षा और चिकित्सा के लिए पिछले 20 सालों में बिहार के लोगों का कुल कितना पैसा दूसरे राज्यों में गया?
  12. बिहार के कुल मानव संसाधन का कितना प्रतिशत बिहार में और कितना प्रतिशत दूसरे राज्यों में काम कर रहा है?

युवा देंगे करारा जवाब तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इन सवालों का सामना करने और जवाब देने की मांग की। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री इन ज्वलंत सवालों पर मुंह न छिपाएं, बल्कि सामने आकर जवाब दें। अगर वे जवाब नहीं देते हैं, तो इस चुनाव में युवा उन्हें करारा जवाब देंगे।”

क्या डोनाल्ड ट्रंप और PM मोदी फिर से दोस्त बनेंगे? क्या फोन कॉल होगी? टैरिफ का क्या होगा

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आखिरकार बर्फ पिघल गई है. करीब दो महीने के टेंशन के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और पीएम नरेंद्र मोदी के साथ संबंधों की प्रशंसा करते हुए एक सकारात्मक कदम उठाया है. भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर बीते कुछ समय से तल्खी है. अमेरिका ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाए हैं. अमेरिका ने भारत पर यूक्रेन युद्ध में रूस को फंडिंग करने का आरोप लगाया है. अब ट्रंप के बदले तेवर पर पीएम मोदी भी ने तुरंत ट्रंप के शब्दों का जवाब दिया. तो क्या ट्रंप और मोदी फिर से दोस्त बनेंगे? क्या आखिरकार फोन कॉल होगी? वे अगली बार कहां मिलेंगे? और क्या सेकेंडरी टैरिफ बने रहेंगे या व्यापार समझौता होगा?
लंबे समय तक कूटनीतिक तनाव के बाद ट्रंप ने अब कहा, ‘मैं हमेशा मोदी का दोस्त रहूंगा. वह महान हैं. भारत और अमेरिका का विशेष संबंध है. चिंता की कोई बात नहीं है. मुझे नहीं लगता कि हमने भारत को खो दिया है.’ लेकिन ट्रंप ने आलोचना भी की जब उन्होंने कहा, ‘मोदी इस समय जो कर रहे हैं, मुझे बस यह पसंद नहीं है.’ डोनाल्ड ट्रंप का यह संदर्भ भारत के लगातार रूसी तेल खरीदने से है.
हालांकि, मोदी ने इस अवसर का लाभ उठाते हुए सोशल मीडिया पर ट्रंप को जवाब दिया. उन्होंने कहा, ‘मैं राष्ट्रपति ट्रंप की भावनाओं और हमारे संबंधों की सकारात्मक मूल्यांकन की पूरी तरह से सराहना करता हूं.’ ये मोदी के हाल के महीनों में ट्रंप पर पहली टिप्पणी थी. 17 जून की तनावपूर्ण फोन कॉल के बाद यह दोनों नेताओं के बीच किसी प्रकार की संचार का पहला आदान-प्रदान भी है. मोदी ने अब कहा कि भारत और अमेरिका का बहुत सकारात्मक और भविष्य-दृष्टि वाला व्यापक और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है.

क्या फोन कॉल और मुलाकात से बनेगी बात?

तो अब सवाल है कि आगे क्या? क्या दोनों नेता इस नई-नई फिर से बनी दोस्ती को फोन कॉल और द्विपक्षीय मुलाकात के जरिए आगे बढ़ाएंगे? क्या भारत सचमुच ट्रंप पर भरोसा कर सकता है, क्योंकि वो अपनी तारीफ और निंदा में लगातार दो-दो हाथ करने के लिए बदनाम हैं?
पीएम मोदी और ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत काफी समय से लंबित है. 17 जून को हुई दोनों के बीच आखिरी बातचीत हुई थी. यह आखिरी बातचीत अच्छी नहीं रही क्योंकि मोदी ने जोर देकर कहा था कि भारत-पाकिस्तान सीजफायर में ट्रंप की कोई भूमिका नहीं है, जबकि ट्रंप अपने दावों पर अड़े रहे. कनाडा से लौटते समय पीएम मोदी को ट्रंप ने अमेरिका में रुकने का प्रस्ताव भी दिया था, मगर मोदी ने स्वीकार नहीं किया, क्योंकि उसी समय वाइट हाउस में पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर के साथ भारत को एक कूटनीतिक जाल की भनक लग गई थी. लेकिन ट्रंप ने इस साल के अंत में क्वाड शिखर सम्मेलन के लिए भारत आने का मोदी का निमंत्रण स्वीकार कर लिया. हालांकि, इस यात्रा पर वाइट हाउस की ओर से कोई खास टिप्पणी नहीं की गई है.
संभावना है कि मोदी और ट्रंप के बीच जल्द ही क्वाड शिखर सम्मेलन की योजना पर फोन पर बातचीत हो. इस फोन कॉल से दोनों नेताओं को अन्य जरूरी मुद्दों पर भी बात करने का मौका मिल सकता है, जैसे भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की प्रगति, जो टैरिफ की परेशानी को कम कर सकता है और रूस-यूक्रेन युद्ध पर भी. अगर फोन कॉल के जरिए कुछ बात बनती है, तो मुलाकात की संभावना बन सकती है. लेकिन प्रधानमंत्री मोदी इस महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के लिए अमेरिका नहीं जा रहे हैं. विदेश मंत्री एस जयशंकर संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे.
अक्टूबर में मलेशिया वह स्थान हो सकता है, जहां ट्रंप और मोदी मिलें. राष्ट्रपति ट्रंप 26 अक्टूबर को कुआलालंपुर में ASEAN नेताओं की बैठक में भाग लेने की योजना बना रहे हैं. प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने 26 अक्टूबर के लिए उनके निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है, हालांकि वाइट हाउस ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने ASEAN शिखर सम्मेलनों में भाग लिया है, मगर हमेशा नियमित रूप से नहीं. जो बाइडेन ने 2022 में कंबोडिया में भाग लिया था और ट्रंप आखिरी बार 2017 में फिलीपींस में ASEAN में थे. मोदी पहले हर साल की तरह इस साल भी ASEAN शिखर सम्मेलन में जाएंगे. तो क्या वहां ट्रंप के साथ बैठक संभव है? यह अब सबसे प्रतीक्षित घटनाक्रम है. नवंबर में जोहान्सबर्ग में G20 शिखर सम्मेलन में ऐसीकोई मुलाकात की कोई संभावना नहीं है क्योंकि ट्रंप ने कहा है कि वह G20 के लिए यात्रा नहीं करेंगे, और उपराष्ट्रपति जे डी वेंस अमेरिका का प्रतिनिधित्व करेंगे.
क्वाड का क्या?
और भारत में क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन के बारे में क्या? 17 जून को मोदी-ट्रंप की फोन कॉल में ट्रंप ने क्वाड के लिए भारत आने के मोदी के निमंत्रण को स्वीकार कर लिया था. लेकिन न्यूयॉर्क टाइम्स की एक हालिया रिपोर्ट कहती है कि ट्रंप की अब ऐसी कोई योजना नहीं है. भारत ने भी अभी तक कोई स्पष्टता नहीं जताई है. विदेश मंत्रालय ने पिछले सप्ताह कहा था कि वह इस मुद्दे पर अटकलों पर आधारित मीडिया रिपोर्टों पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहेगा. भारत ने कहा है, ‘भारत क्वाड को चार सदस्य देशों के बीच कई मुद्दों पर साझा हितों पर चर्चा के लिए एक मूल्यवान मंच के रूप में देखता है. नेताओं का शिखर सम्मेलन सदस्य देशों, यानी चार देशों के बीच राजनयिक परामर्श के माध्यम से निर्धारित किया गया है.’

बड़ी सफलता तब मिल सकती है जब डोनाल्ड ट्रंप नवंबर में क्वाड के लिए किए गए वादे के अनुसार भारत आएं और इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच एक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर हो जाएं. लेकिन क्या हम भारत और अमेरिका के बीच दोस्ती को लेकर जरूरत से ज्यादा आशावादी हो रहे हैं? यह ट्रंप को भारत पर अमेरिका की दादागिरी की हदें समझने का मामला है. खासकर एससीओ शिखर सम्मेलन के बाद, जहां मोदी ने व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग के साथ अपनी लंबी और सार्थक बैठकों के जरिए ट्रंप को अपना संदेश दिया था.
टैरिफ पर क्या?
याद रखें कि अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ वापस नहीं लिया है और भारत के कृषि और डेयरी क्षेत्रों में प्रवेश जैसे अपने शर्तों पर भारत के साथ व्यापार समझौता चाहता है. मोदी ने कहा है कि यह किसी भी कीमत पर भारत इसकी अनुमति नहीं देगा. ट्रंप भी सीजफायर के दावे पर अड़े हैं. वह पाकिस्तान के साथ-साथ असीम मुनीर के साथ भी घनिष्ठ संबंध बनाए हुए हैं, जो भारत के लिए एक बड़ी परेशानी है.

इसलिए अमेरिका-भारत संबंधों को सुधारने में अभी भी कई रुकावटें और चुनौतियां हैं. क्या ट्रंप और मोदी फिर से दोस्त बन सकते हैं? यही सवाल वैश्विक कूटनीति में हलचल मचा रहा है.
तकरार के लिए ट्रंप खुद जिम्मेदार
निश्चित रूप से भारत के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करके अपने सहयोगियों के साथ संबंध खराब करने के लिए ट्रंप खुद जिम्मेदार हैं. भारत इस मामले को बहुत ही परिपक्व और व्यावहारिक तरीके से संभाल रहा है. 50% टैरिफ लागू होने के बाद से पिछले एक महीने में मोदी डोनाल्ड ट्रंप के साथ वाकयुद्ध में कभी शामिल नहीं हुए. पीएम मोदी ने इस मामले को ‘आर्थिक स्वार्थ’ कहकर संबोधित करने के लिए सिर्फ एक ही शब्द का इस्तेमाल किया. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पीयूष गोयल ने भी ट्रंप पर कोई निशाना नहीं साधा और कहा कि अमेरिका के साथ जल्द ही हालात सुधर जाएंगे.
भारत के इसी दृष्टिकोण ने ट्रंप को एक सकारात्मक कदम उठाने का अवसर दिया है. भू-राजनीति के रंगमंच पर दोस्ती की परीक्षा होती है, लेकिन समीकरण बने रहते हैं. ट्रंप कहते हैं कि मोदी के साथ उनकी बहुत बनती है. मोदी कहते हैं कि यह साझेदारी ‘सकारात्मक और दूरदर्शी’ है. दोस्ती में तनाव जरूर है, लेकिन वह टूटी नहीं है.

नवंबर है निर्णायक
इस दिसंबर में व्लादिमीर पुतिन का भारत दौरा है. इसके साथ ट्रंप के लिए अगले दो महीने भारत के साथ संबंधों को सुधारने या भारत को रूसी खेमे में और भी अधिक धकेलने के जोखिम के लिहाज से बेहद अहम हैं. नवंबर यह तय कर सकता है कि ट्रंप और मोदी की व्यक्तिगत केमिस्ट्री फिर से भारत-अमेरिका संबंधों की दिशा तय करेगी.