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जीएसटी 2.0 – आइए जानते हैं इस नई व्यवस्था, बचत की गणना’ और नए टैक्स स्लैब से क्या सस्ता होगा?

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जीएसटी 2.0 – आइए जानते हैं इस नई व्यवस्था, बचत की गणना’ और नए टैक्स स्लैब से क्या सस्ता होगा?

जीएसटी परिषद ने 3-4 सितंबर को हुई अपनी बैठक में टैक्स स्लैब को आसान बना दिया है। अब 5% और 18% के केवल दो स्लैब होंगे, जो 22 सितंबर से लागू होंगे। इस बदलाव का सीधा फायदा देश की आम जनता को होगा, क्योंकि रोज़मर्रा की कई चीज़ें सस्ती हो जाएँगी।

अगर आप इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि GST 2.0 से आपको कितनी बचत होगी, तो सरकार ने इसका भी समाधान दे दिया है। अब आप एक खास वेबसाइट के ज़रिए अपनी बचत का हिसाब लगा सकते हैं।

आइए जानते हैं इस नई व्यवस्था और वेबसाइट के बारे में।

ऐसे करें बचत की गणना सरकार के MyGov प्लेटफॉर्म ने ‘savingwithgst.in’ नाम से एक वेबसाइट लॉन्च की है।

इस वेबसाइट पर आप 22 सितंबर से पहले और बाद की कीमतों की तुलना करके अपनी बचत का पता लगा सकते हैं। इसमें खाने-पीने की चीज़ों, इलेक्ट्रॉनिक सामान, रसोई के सामान और जीवनशैली से जुड़ी चीज़ों की अलग-अलग कैटेगरी हैं।

किस वस्तु पर कितनी बचत होगी, यह जानने के लिए आपको बस अपनी पसंद की वस्तु को कार्ट में जोड़ना होगा। इसके बाद, आपको कार्ट में उस वस्तु की मूल कीमत, वैट के समय की कीमत और GST 2.0 के बाद की नई कीमत दिखाई देगी। उदाहरण के लिए, अगर आप कार्ट में दूध जोड़ते हैं, तो ₹60 प्रति लीटर वाले दूध की कीमत VAT के साथ ₹63.6 दिखाई देगी, जबकि GST 2.0 के तहत यह ₹60 ही रहेगी।

नए टैक्स स्लैब से क्या सस्ता होगा? जीएसटी परिषद की बैठक में 12% और 28% के टैक्स स्लैब को खत्म कर दिया गया है। अब केवल 5% और 18% के स्लैब ही रहेंगे। इसके अलावा, विलासिता की वस्तुओं पर 40% टैक्स लगाया गया है। इस बदलाव से रोज़मर्रा की कई ज़रूरी चीज़ें और पैकेज्ड फ़ूड आइटम सीधे तौर पर सस्ते हो जाएँगे।

अब, अल्ट्रा-हाई टेम्परेचर (UHT) दूध, पैकेज्ड और लेबल वाले पनीर या छेना, और सभी भारतीय ब्रेड पर शून्य (0%) जीएसटी लगेगा। वहीं, साबुन, शैम्पू, टूथब्रश, टूथपेस्ट, टेबलवेयर और साइकिल जैसी घरेलू वस्तुओं पर 5% जीएसटी लगेगा। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों’ को लागू करने के वादे के अनुरूप है, जिससे देश में आर्थिक सुधार आएंगे और आम लोगों को राहत मिलेगी।

इसके अलावा 40 प्रतिशत का एक नया स्लैब बनाया गया है। इस फैसले के बाद टेलीविजन और एयर कंडीशनर जैसी उपभोक्ता वस्तुओं के अलावा कई खाने-पीने और दैनिक उपयोग की वस्तुएं सस्ती हो जाएंगी। 22 सितंबर से आपको वस्तुओं पर कितनी राहत मिलेगी, यह आप केंद्र सरकार की वेबसाइट पर जाकर जान सकते हैं।

जीएसटी पर वित्त मंत्री ने क्या कहा? इस बीच, निर्मला सीतारमण ने कहा, ‘जीएसटी में व्यापक बदलाव जनता के लिए एक सुधार है और इस कदम का देश के 140 करोड़ लोगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इसका सबसे गरीब तबके पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।’ उन्होंने यह भी कहा कि यह सिर्फ़ दरों में कमी का मामला नहीं है, बल्कि कंपनियों के लिए भी चीज़ें आसान हो जाएँगी। चाहे वह रिफंड का मामला हो, अनुपालन का या पंजीकरण का, उनके लिए चीज़ें और आसान हो जाएँगी।

सीतारमण ने कहा, ‘एक बार यह प्रक्रिया पूरी हो जाने पर 90 प्रतिशत रिफंड एक निश्चित समय के भीतर स्वतः ही क्लियर हो जाएँगे। साथ ही, कंपनियाँ तीन दिनों के भीतर सफलतापूर्वक अपना पंजीकरण करा सकेंगी।’ सीतारमण ने कहा कि जीएसटी दरों में कमी से वस्तुओं की कीमतें कम होंगी और खपत बढ़ेगी और इससे राजस्व बढ़ने के साथ-साथ समग्र रूप से अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा।

पितृ पक्ष 2025 – वर्ष 2025 में पितृ पक्ष 7 सितंबर से प्रारंभ होकर 21 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगा। 

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पितृ पक्ष 2025 – वर्ष 2025 में पितृ पक्ष 7 सितंबर से प्रारंभ होकर 21 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगा। 

पितृ पक्ष 2025: भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से शुरू होने वाला पितृ पक्ष 7 सितंबर 2025 से शुरू हो रहा है। इस दिन चंद्र ग्रहण भी है, लेकिन इसका पितृ पक्ष पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

सनातन धर्म में पितृ पक्ष का बहुत ही विशेष महत्व है। ‘श्राद्ध’ शब्द संस्कृत के ‘श्रद्धा’ शब्द से बना है, जिसका अर्थ है अपने पूर्वजों के प्रति हमारी श्रद्धा और भक्ति। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को पूर्वजों के सम्मान और उन्हें श्रद्धांजलि देने का एक महत्वपूर्ण काल ​​माना जाता है। इस दौरान लोग श्राद्ध और तर्पण करके अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।

वर्ष 2025 में पितृ पक्ष 7 सितंबर से प्रारंभ होकर 21 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगा।

पितृ पक्ष के दौरान, ऋण चुकाने और पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है। मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान किए गए ये कर्म न केवल पूर्वजों की आत्मा को शांति प्रदान करते हैं, बल्कि कर्ता को उनके ऋण से भी मुक्ति दिलाते हैं। इस दौरान गंगा स्नान, ब्राह्मण भोज और दान को विशेष पुण्यकारी माना जाता है।

श्राद्ध का महत्व क्या है और क्यों? ‘श्राद्ध’ शब्द का अर्थ ही है विश्वास। शास्त्रों में कहा गया है कि हमारे पूर्वजों का अंश हमारी रगों में प्रवाहित होता है। इसलिए हम उनके ऋणी हैं। पितृ पक्ष में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करके इस ऋण को चुकाने का विधान है। मान्यता है कि ये कर्म न केवल पूर्वजों की आत्मा को शांति प्रदान करते हैं, बल्कि कर्ता को पितृ ऋण से भी मुक्त करते हैं।

पितृ पक्ष 2025 की तिथियां 7 सितंबर- पूर्णिमा श्राद्ध 8 सितंबर- प्रतिपदा श्राद्ध 9 सितंबर- द्वितीया श्राद्ध 10 सितंबर- तृतीया श्राद्ध, चतुर्थी श्राद्ध 11 सितंबर- पंचमी श्राद्ध, महा भरणी 12 सितंबर- षष्ठी श्राद्ध 13 सितंबर- सप्तमी श्राद्ध 14 सितंबर- अष्टमी श्राद्ध 15 सितंबर- नवमी श्राद्ध 16 सितंबर- दशमी श्राद्ध 17 सितंबर-एकादशी श्राद्ध 18 सितंबर- द्वादशी श्राद्ध 19 सितंबर- त्रयोदशी श्राद्ध, माघ श्राद्ध 20 सितंबर- चतुर्दशी श्राद्ध 21 सितंबर- सर्वपितृ अमावस्या श्राद्ध

पितृ पक्ष की मान्यता क्या है?

प्राचीन हिंदू मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान पितरों का स्मरण और पूजा-पाठ करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। ऐसा करने से पितर प्रसन्न होते हैं और जातकों के जीवन की कई प्रकार की समस्याओं का निवारण भी करते हैं।

श्राद्ध पक्ष में आमतौर पर तीन मुख्य कर्म किए जाते हैं: पिंडदान – पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया जाता है। तर्पण – जल अर्पित करना और पूर्वजों का तर्पण करना। ब्राह्मण भोज – ब्राह्मणों को भोजन कराना और दान देना।

बाढ़ से बेहाल पंजाब, पीएम मोदी खुद जाकर जानेंगे हाल, बड़ी राहत पैकेज का कर सकते हैं ऐलान

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार 9 सितंबर को पंजाब का दौरा करने वाले हैं. पंजाब इस समय भीषण बाढ़ की चपेट में है, जिसने जनजीवन और किसानों की मेहनत को तबाह कर दिया है. प्रधानमंत्री यहां स्थिति का जायज़ा लेंगे और राहत व बचाव कार्यों की समीक्षा करेंगे.
बीजेपी की पंजाब इकाई ने एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री गुरदासपुर पहुंचेंगे, जहां वे बाढ़ पीड़ितों से मिलेंगे, किसानों का दुख साझा करेंगे और हरसंभव मदद का आश्वासन देंगे. पार्टी ने कहा, ‘प्रधानमंत्री का यह दौरा साबित करता है कि केंद्र की बीजेपी सरकार पंजाब की जनता के साथ खड़ी है और इस कठिन समय में हर संभव सहयोग करेगी.’
केंद्र सरकार पंजाब के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा भी कर सकती है. बीते कुछ हफ्तों में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड में लगातार बारिश और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है.

पंजाब में आई इस बाढ़ को अधिकारियों ने पिछले कई दशकों में आई सबसे भयावह आपदा बताया है. 14 ज़िलों में अब तक 46 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3.87 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं. इस बाढ़ में लगभग 2,000 गांव पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं.

सतलुज, ब्यास, रावी समेत कई नदियों में आई बाढ़ और लगातार हो रही बारिश ने 1988 की बाढ़ को भी पीछे छोड़ दिया है. 18 ज़िलों में 1.75 लाख हेक्टेयर से अधिक फसलें डूब गई हैं. गुरदासपुर, फाज़िल्का और फिरोज़पुर सबसे ज़्यादा प्रभावित जिलों में शामिल हैं. किसानों की हरी-भरी धान और अन्य फसलें, जो कटाई के करीब थीं, पूरी तरह तबाह हो गई हैं.
राज्य सरकार ने पंजाब को आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित कर दिया है. राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं. एनडीआरएफ, सेना और बीएसएफ की संयुक्त टीमों ने अब तक 22,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला है. बेघर हुए लोगों के लिए 200 से अधिक राहत शिविर लगाए गए हैं, जिनमें हज़ारों लोग शरण लिए हुए हैं.

दिल्ली के 799 सरकारी स्कूलों में पानी-बिजली का संकट, शिक्षा विभाग ने 15 दिन में रिपोर्ट मांगी

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दिल्ली के 799 सरकारी स्कूलों में पानी और बिजली की गंभीर समस्याओं का खुलासा हुआ है. शिक्षा निदेशालय द्वारा कराए गए सर्वे में पाया गया कि कई स्कूल अब भी अनियमित जल आपूर्ति और बिजली कटौती से जूझ रहे हैं. इसके चलते शिक्षा विभाग ने सभी डिप्टी डायरेक्टर्स ऑफ एजुकेशन (DDEs) को आपात आदेश जारी कर 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.
इधर, आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल गुजरात पर पहुंच गए हैं. वह आज चोटिला में कपास किसानों की एक रैली को संबोधित करने वाले है. दरअसल, वह कपास पर आयात शुल्क समाप्त करने का विरोध कर रहे किसानों से मुलाकात करेंगे. उन्होंने कहा, ‘भारत अमेरिका से आयातित कपास पर 11 प्रतिशत शुल्क लगाता था. इसका मतलब था कि अमेरिकी कपास घरेलू कपास से महंगा था. लेकिन मोदी सरकार ने 19 अगस्त से 30 सितंबर तक शुल्क माफ करने का फैसला किया है.

3 नई खबरें

सोमवार को बंद रहेंगे पंजाब के सारे स्कूल कॉलेज
पंजाब में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने सोमवार को प्रदेश के सभी सरकारी स्कूल छात्रों के लिए बंद करने के आदेश दिए हैं. लेकिन, शिक्षकों और स्टाफ को स्कूलों में उपस्थित रहना होगा. 9 सितंबर, मंगलवार से पंजाब के सभी सरकारी, प्राइवेट और एडेड स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटियां सामान्य रूप से खुल जाएंगी. यदि किसी जिले में बाढ़ या बारिश से कोई संस्थान प्रभावित है तो उसे बंद करने का निर्णय संबंधित जिले के डिप्टी कमिश्नर द्वारा लिया जाएगा.

मानेसर में सड़क किनारे विदेशी महिला का शव मिलने से सनसनी
गुरुग्राम के मानेसर में रविवार को एक विदेशी महिला का शव सड़क किनारे मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया. मानेसर पुलिस के अनुसार, सुबह करीब 6:30 बजे राहगीरों ने NH-48 के पास एक सुनसान जगह पर शव देखा और तुरंत पुलिस को सूचना दी. शव को देखकर प्रथम दृष्टया हत्या की आशंका जताई जा रही है. महिला के शरीर पर चोट के निशान और खून के धब्बे हैं. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. उसकी पहचान करने के लिए जांच शुरू कर दी है. मृतका की उम्र लगभग 30-35 वर्ष आंकी गई है. मानेसर थाना प्रभारी ने बताया कि आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं. विदेशी दूतावासों से संपर्क कर महिला की पहचान और पासपोर्ट डिटेल्स जुटाने की कोशिश की जा रही है.

यमुना का जलस्तर 205.53 मीटर, निगमबोध घाट अंतिम संस्कार के लिए खुला
दिल्ली में यमुना नदी का जलस्तर 7 सितंबर 2025 को सुबह 9 बजे 205.53 मीटर दर्ज किया गया. अभी खतरे के निशान (205.33 मीटर) से थोड़ा ऊपर है. भारी बारिश और हथनी कुंड बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण नदी का जलस्तर बढ़ने से निगमबोध घाट बुधवार (3 सितंबर) से बंद था. बाढ़ के पानी के घाट में प्रवेश करने से अंतिम संस्कार रोक दिए गए थे. आज सुबह 9 बजे से जलस्तर में कमी के बाद निगमबोध घाट को फिर से अंतिम संस्कार के लिए खोल दिया गया है. प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और नदी किनारे की गतिविधियों में सावधानी बरतने की अपील की है.

दिल्ली के सरकारी स्कूलों में गड़बड़ी
दिल्ली के 799 सरकारी स्कूलों में पानी और बिजली की गंभीर समस्याओं का खुलासा हुआ है. शिक्षा निदेशालय द्वारा कराए गए सर्वे में पता चला है कि कई स्कूल अब भी अनियमित जल आपूर्ति और बिजली कटौती से जूझ रहे हैं. इसके चलते शिक्षा विभाग ने सभी डिप्टी डायरेक्टर्स ऑफ एजुकेशन (DDEs) को इमरजेंसी आदेश जारी कर 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.

पानी की समस्या

703 DJB/MES से जुड़े स्कूलों में से 59 स्कूलों ने अनियमित जलापूर्ति और 48 ने पानी की बिल्कुल सप्लाई न होने की शिकायत दर्ज कराई की.
22 स्कूल पूरी तरह टैंकर पर निर्भर हैं, जिनमें से 4 ने DJB कनेक्शन के लिए आवेदन किया है.
10 स्कूलों में पानी बिल्कुल नहीं है. इनमें 3 पुनर्निर्माणाधीन हैं और 7 पड़ोसी स्कूलों या टैंकरों पर निर्भर हैं.
64 स्कूल बोरवेल और सबमर्सिबल से पानी की व्यवस्था कर रहे हैं.
बिजली की स्थिति

6 स्कूलों में पुनर्निर्माण या साझा प्रांगण के कारण बिजली उपलब्ध नहीं है.
793 बिजली वाले स्कूलों में से 17 स्कूल बार-बार बिजली कटने की समस्या से जूझ रहे हैं.
विभाग के निर्देश

जिन स्कूलों में DJB कनेक्शन नहीं है, उन्हें तुरंत आवेदन करने का आदेश.
टैंकर-निर्भर स्कूलों के लिए DJB से विशेष आपूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग.
बोरवेल/सबमर्सिबल वाले स्कूलों को पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच करने का निर्देश.
प्रभावित स्कूलों के लिए DISCOMs से संपर्क कर बिजली की समस्या दूर करने का आदेश.
16 स्कूलों में सोलर पैनल लगाने की संभावना पर विचार करने की सिफारिश.
साझा प्रांगण वाले स्कूलों को अलग मीटरिंग व्यवस्था देने की बात कही गई.
शिक्षा विभाग ने इसे आपात स्थिति मानते हुए स्पष्ट कर दिया है कि स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई किसी भी हालत में प्रभावित नहीं होनी चाहिए. सभी DDEs को निर्देश दिया गया है कि वे स्कूलवार कार्रवाई की रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर मुख्यालय को सौंपें.

बॉर्डर पर घूम रही थी गोरी महिला, हाथ में थे 2 कागज, देखते ही सेना के जवानों ने बुलाया पास, मचा हड़कंप

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भारत में अवैध प्रवासियों के खिलाफ ना केवल देश के अंदर बल्कि सीमा पर भी चलाया जा रहा है. सेना के जवान दिन रात सीमा पहर मुश्तैदी से भारत में अवैध रूप से घुसने वाले या फिर देश के खिलाफ साजिश रचने वालों को नाकाम करते हैं. फिर भी कई बार ऐसा होता है कि अवैध प्रवासी प्राकृतिक बॉर्डर के जरिए भारत में घुसने में कामयाब हो जाते हैं और भारत के फर्जी डॉक्यूमेंट के साथ भारत में रहने रहने लगते हैं. हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था सख्त होने के बाद सीमा पर चकमा देने वालों को देश के अंदर पकड़ लिया जाता है. कुछ ऐसा ही हुआ बीते गुरुवार को. भारत-नेपाल पर एसएसबी के जवान जांच कर रहे थे. इस दौरान भारत में अवैध रूप से घुस रही है एक इंडोनेशियाई महिला पकड़ी गई. महिला अवैध रूप से भारत में घुस रही थी, ये बात बड़ी नहीं है, बल्कि उसके पास से जो कागज मिले हैं, वे काफी चौकाने वाले है.
दरअसल, भारत-नेपाल सीमा गुरुवार को सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवानों ने एक इंडोनेशियाई नागरिक को गिरफ्तार किया है. ये महिला अवैध रूप से नेपाल में प्रवेश करने का प्रयास कर रही थी. मूल रूप से बाली निवासी नी कादेन सिसियानी नामक महिला को गुरुवार शाम सिलीगुड़ी के पास पानीटंकी में मेची नदी पर बने पुराने पुल पर पकड़ा गया. पहले तो जवानों ने भारत आने के प्रयोजन के बारे में पूछताछ की गई तो वह बातें घूमाने की कोशिश की. जवानों को शक हुआ तो उन्होंने उसके पहचान पत्र की जांच की. उसके पास से भारत के जाली आधार कार्ड और पैन कार्ड मिले हैं.

खुद को बताया भारतीय

सेना के पूछताछ में सिसियानी ने अपना नाम कुछ और ही बताया. साथ ही खुद को भारतीय नागरिक बताया. हालांकि, जब उसकी गहन तलाशी ली गई, तो उसके पास से इंडोनेशियाई पासपोर्ट के साथ-साथ फर्जी भारतीय पहचान पत्र, जिसमें एक फर्जी आधार कार्ड और एक पैन कार्ड भी शामिल था, बरामद हुआ.
एजेंट ने दिए फर्जी कागज

वोटर वेरिफिकेशन की तैयारी, दिल्ली में हाई लेवल मीटिंग, चुनाव आयोग करेगा बड़ा ऐलान…

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वोटर वेरिफिकेशन की तैयारी, दिल्ली में हाई लेवल मीटिंग, चुनाव आयोग करेगा बड़ा ऐलान…

बिहार में हाल ही में वोटर वेरिफिकेशन को लेकर मची हलचल के बीच अब यह प्रक्रिया पूरे देश में लागू किए जाने की तैयारी जोरों पर है। चुनाव आयोग ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 10 सितंबर को दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है।

इस बैठक में SIR को लेकर चर्चा की जाएगी। बताया जा रहा है कि साल के अंत तक देशभर में वोटर वेरिफिकेशन प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। बैठक में सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी शामिल होंगे। जानकारी के मुताबिक इस मीटिंग में देशभर में SIR प्रक्रिया को लागू करने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

इसमें यह तय किया जाएगा कि कैसे प्रत्येक राज्य में वोटर्स की जानकारी को अद्यतन और सत्यापित किया जाए। चुनाव आयोग का उद्देश्य है कि मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाया जा सके ताकि आने वाले चुनावों में निष्पक्ष और भरोसेमंद मतदान सुनिश्चित किया जा सके। आगामी महीनों में इसको लेकर राज्यों में जागरूकता अभियान भी चलाए जाने की संभावना है।

पंजाब बाढ़: प्रकृति ने दी ऐसी गहरी चोट कि दशकों में भी नहीं होगी भरपाई, दरख्त देखने को तरसेंगे लोग

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पंजाब में आई विनाशकारी बाढ़ ने राज्य की हरी चादर को बर्बाद कर दिया है. वन एवं वन्यजीव संरक्षण विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 776 हेक्टेयर क्षेत्रफल में करीब 4,94,956 पेड़ बाढ़ की भेंट चढ़ गए हैं. यह नुकसान पिछले 37 सालों में सबसे भीषण माना जा रहा है.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत राज्य वन रिपोर्ट (ISFR) 2023 की रिपोर्ट में बताया गया है कि पंजाब में महज 1,846 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र है, जो राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का केवल 3.7% है. लगभग 83% ज़मीन खेती के अंतर्गत होने के कारण पहले से ही जंगल बढ़ाने की गुंजाइश बेहद कम है. ऐसे में लाखों पेड़ों का एक साथ बह जाना पंजाब की पर्यावरणीय स्थिति को दशकों पीछे धकेल सकता है.
बाढ़ से पंजाब को कितना नुकसान?
वन विभाग ने अब तक का नुकसान करीब 341.3 लाख रुपये आंका है, जबकि विभागीय इमारतों को हुआ 19.2 लाख रुपये का अतिरिक्त नुकसान मिलाकर कुल नुकसान 360.5 लाख रुपये से अधिक बैठता है. रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधान मुख्य वन संरक्षक धर्मेंद्र शर्मा ने कहा कि ये शुरुआती आंकड़े हैं, बाढ़ का पानी उतरने के बाद स्थिति और भयावह हो सकती है. उन्होंने आश्वासन दिया कि हालात सुधरने पर हरे-भरे आवरण को फिर से पटरी पर लाने की विस्तृत योजना तैयार की जाएगी.

विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब पहले ही देश के उन राज्यों में शामिल है जहां वन क्षेत्र सबसे कम है, और अब बाढ़ ने राज्य सरकार की पौधारोपण योजनाओं को गहरी चोट पहुंचाई है. इसका असर पर्यावरणीय संतुलन बहाल करने की कोशिशों पर लंबे समय तक पड़ेगा.
बाढ़ का बढ़ा प्रकोप, मृतकों की संख्या भी बढ़ी

इस बीच, बाढ़ का मानव जीवन पर भी कहर जारी है. पंजाब में शुक्रवार और शनिवार के बीच तीन और लोगों की मौत हुई, जिससे यहां मृतकों का आंकड़ा 46 तक पहुंच गया. 48 नए गांव बाढ़ के खतरे में बताए जा रहे हैं. हरियाणा के अंबाला जिले में तंगड़ी नदी में डूबकर 13 वर्षीय बच्चे की मौत ने स्थिति की भयावहता और स्पष्ट कर दी.
वहीं हिमाचल प्रदेश में हालात और भी गंभीर हैं. यहां अब तक 366 लोगों की मौत हो चुकी है और 41 लोग अब भी लापता हैं. कुल्लू में भूस्खलन के मलबे में दो लापता व्यक्तियों की तलाश तीसरे दिन भी जारी रही. हालांकि मौसम में कुछ सुधार हुआ है, जिससे राहत और बचाव कार्यों में तेजी आई है.
पंजाब और हिमाचल में प्रकृति का यह कहर साफ संकेत देता है कि पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ने की कितनी बड़ी कीमत इंसानों और प्रकृति दोनों को चुकानी पड़ रही है. पंजाब में लाखों पेड़ों का नुकसान आने वाली पीढ़ियों को हरे-भरे जंगल देखने के लिए तरसा सकता है.

भारत को बेहतर विपक्ष की जरूरत… GST को लेकर सरकार की आलोचना पर निर्मला सीतारमण का पलटवार

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीएसटी सुधारों को लेकर मोदी सरकार की आलोचना को ‘गलत जानकारी’ पर आधारित करार देते हुए शनिवार को कहा कि भारत को बेहतर विपक्षी दल और बेहतर विपक्षी नेताओं की जरूरत है. सीतारमण ने ‘पीटीआई’ को दिए इंटरव्यू में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षी दल ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू किये जाने के समय चार कर दर रखने के लिए भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार को जिम्मेदार ठहराया था.
वित्त मंत्री ने कहा कि चार कर दर रखने का फैसला भाजपा का नहीं था और न ही ऐसा था कि तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली अलग-अलग कर दर या किसी खास वस्तु पर जीएसटी दर तय कर रहे थे. उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासित राज्यों के मंत्री भी इस फैसले में शामिल थे. सीतारमण ने सवाल किया, “क्या उन्हें (विपक्ष को) इसकी जानकारी नहीं है?”
जुलाई 2017 में जीएसटी के क्रियान्वयन से पहले चार जीएसटी दर तय करने में विपक्षी दल शासित राज्यों की भूमिका के बारे में बताते हुए सीतारमण ने कहा कि देश को पेड़ कटाई जैसे मुद्दों के खिलाफ व्यापक जन आंदोलन की तर्ज पर बेहतर विपक्ष और बेहतर विपक्षी नेताओं के लिए भी मुहिम चलाने की जरूरत है.

वित्त मंत्री ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अगर विपक्षी नेता तथ्य पेश कर उन्हें गलत साबित कर दें, तो उन्हें माफी मांगने में कोई हिचकिचाहट नहीं होगी. सीतारमण ने कहा, “मुझे कोई अहम नहीं है. मैं लोगों से माफी मांगने के लिए भी तैयार हूं. लेकिन वे (विपक्षी नेता) जो कह रहे हैं, वह बकवास है.” उन्होंने कहा, “कांग्रेस अब हरकत में आ गई है. अगर आप मुद्दे को नहीं समझते हैं, तो कम से कम आप चुप रह सकते हैं.”

सीतारमण ने मुख्य विपक्षी दल को याद दिलाया कि राज्यों के वित्त मंत्रियों की एक अधिकार प्राप्त समिति ने ही जीएसटी लागू होने से पहले चार कर दर रखने का फैसला किया था. उन्होंने कहा कि 2017 से जीएसटी में क्या लागू किया जाना है, इसका खाका इसी समिति ने तैयार किया था. बुधवार को, केंद्र और राज्यों के वित्त मंत्रियों की भागीदारी वाली जीएसटी परिषद ने जीएसटी के चार स्लैब की जगह दो स्लैब करने का फैसला किया.
सीतारमण ने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के कार्यकाल सहित कई वर्षों तक चले विचार-विमर्श के दौरान विपक्षी दल शासित अन्य राज्यों के वित्त मंत्रियों के अलावा वामपंथी नेता और पश्चिम बंगाल के तत्कालीन वित्त मंत्री असीम दासगुप्ता अधिकार प्राप्त समिति के प्रमुख के रूप में परामर्श को आगे बढ़ाने में शामिल रहे थे.
उन्होंने कहा कि अधिकार प्राप्त समिति ने विभिन्न राज्यों में किसी वस्तु पर कर की विभिन्न दरों का आकलन किया, एक औसत निकाला और फिर उस उत्पाद को औसत के निकटतम चार जीएसटी दरों में से एक में रखने पर सहमति जताई.
वित्त मंत्री के पद पर सीतारमण का यह सातवां वर्ष है. वित्त मंत्री के तौर पर उन्होंने उपभोक्ताओं को राहत देने के मकसद से सरकार के कुछ प्रमुख सुधारों की अगुवाई की, जिसमें पिछले आम बजट में आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर 12 लाख रुपये किया जाना और उद्योगों की मदद के लिए कई उपायों की घोषणा शामिल है, लेकिन आर्थिक मुद्दों पर उन्हें अक्सर विपक्ष की आलोचना का सामना करना पड़ा है.

वित्त मंत्री ने जीएसटी को लेकर सरकार की आलोचना किये जाने पर जोरदार पलटवार किया. उन्होंने कहा, “भारत को बेहतर विपक्ष की जरूरत है. मैं इस बात में पूरी तरह से विश्वास करती हूं. भारत को बेहतर विपक्षी नेताओं की जरूरत है. गलत जानकारी वाली टिप्पणियों से कोई फायदा नहीं होगा. ये नेता जनता को गुमराह कर रहे हैं. वे देश की सेवा नहीं कर रहे हैं, बल्कि उसे नुकसान पहुंचा रहे हैं.”
सीतारमण ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश के इस तर्क को खारिज कर दिया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपने संबोधन में जीएसटी को युक्तिसंगत बनाने की घोषणा करके जीएसटी परिषद को कमजोर किया है. जीएसटी परिषद एक संवैधानिक निकाय है, जो अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था से जुड़े सभी फैसले लेती है. वित्त मंत्री ने कहा कि मोदी ने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में सुधारों के बारे में देश को संदेश दिया. उन्होंने सवाल किया, “इसमें गलत क्या है?”

यह पूछे जाने पर कि क्या लोगों को राहत देने के मकसद से सुधारों का दौर जारी रहेगा, क्योंकि मोदी सरकार अपने तीसरे कार्यकाल के पहले वर्ष में आयकर छूट की सीमा बढ़ाने और जीएसटी दर को युक्तिसंगत बनाने जैसे उपाय कर चुकी है, सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा से जन-हितैषी सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया है. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने कोविड-19 महामारी के दौरान भी यह काम जारी रखा और आगे भी जारी रखेगी.
जीएसटी परिषद ने दो सितंबर को कर दर को पांच प्रतिशत और 18 प्रतिशत तक सीमित करने तथा 12 फीसदी और 28 फीसदी की दो अन्य दरों को हटाने को मंजूरी दे दी थी. यह व्यवस्था 22 सितंबर को नवरात्रि के पहले दिन से प्रभावी होगी. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा था कि उनकी पार्टी कई वर्षों से जीएसटी के सरलीकरण की मांग कर रही है. उन्होंने मोदी सरकार पर लंबे समय से लोगों पर उच्च कर दरों का बोझ डालने का आरोप लगाया. कांग्रेस ने इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे जीएसटी 1.5 बताया और दावा किया कि जीएसटी 2.0 का इंतजार जारी है.

बंगाल की खाड़ी से उठ रही तबाही, ओडिशा से बिहार तक बारिश की चेतावनी, पंजाब में बाढ़ से राहत

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उत्तर भारत में मानसून की तबाही चल रही है. कई राज्यों में मानसून की बारिश से भारी तबाही हुई है. उत्तरी राज्यों का बाढ़ और उसकी तबाही से बुरा हाल है. कश्मीर से लेकर पंजाब, गुजरात और दिल्ली तक राज्य बाढ़ प्रताड़ित हैं. इधर पहाड़ों पर बादल फटने तो मैदानी हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ ने जमकर तबाही मचाई है. दिल्ली-एनसीआर भी बाढ़ की चपेट में है. दिल्ली के कई निचली इलाके बाढ़ग्रस्त है. यमुना के बाढ़ का पानी रिहायशी इलाकों में घुस गए हैं. हालांकि, शनिवार से यमुना के जलस्तर में कमी आनी शुरू हो गई है. पंजाब में भारी बाढ़ से त्राहिमाम मचा हुआ है.
सितंबर महीने में भी बारिश से राहत मिलती नहीं दिख रही है. मौसम विभाग ने रविवार को गुजरात और पश्चिमी राजस्थान में भारी बारिश की चेतावनी जारी किया है. मौसम विभाग ने गुजरात और राजस्थान में भारी बारिश को देखते हुए Red Alert जारी किया है. वहीं, कोंकण, गोवा पूर्वी राजस्थान और मध्य प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी है. मौसम विभाग ने बताया कि ओडिशा और आंध्र प्रदेश से सटे बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन बन रहा है, जिसकी वजह से तटीय इलाकों में भारी बारिश होने की संभावना है. इसका असर बंगाल, बिहार से लेकर दिल्ली तक हो सकती है.

मौसम विभाग ने गुजरात में एक साथ 4 मानसूनी सिस्टम सक्रिय होने की संभावना जताई है. इसकी वजह से आज भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना है. मौसम विभाग वे आज राज्य के 5 ज़िलों बनासकांठा, साबरकांठा, अरवल्ली, महेसाणा और कच्छ में अति भारी बारिश की संभावना जताई है. इसके अलावा, पाटण, गांधीनगर, महीसागर, मोरबी, राजकोट और सुरेन्द्रनगर में बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. वहीं, राज्य के 15 जिलों में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है. वर्तमान मौसम की स्थिति को देखते हुए प्रशासन अलर्ट पर है. संभावित स्थिति से निपटने के लिए NDRF और SDRF की टीमें भी तैनात हैं.

उत्तरकाशी में बाढ़ से राहत
उत्तराखंड में भारी बारिश ने जमकर तबाही मचाई. उत्तरकाशी, पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग में बादल फटने की वजह से काफी तबाही हुई है. अब शनिवार को एक बार फिर से उत्तरकाशी में बादल फटने की वजह से भारी तबाही हुई है. यमुनाघाटी में तेज बारिश से नौगांव क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ है. देवलसारी गांव के पास स्थित खड्ड में आया भारी उफान आ गया है. आधा दर्जन से अधिक गरों में पानी समा गया है और कई घर पानी में बह गए हैं.

जिसने राहुल गांधी के ब्रिटिश नागरिक होने का किया था दावा, अब वह ED के रडार पर, कांग्रेस का कुछ भी कहने से इनकार

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कर्नाटक के उस भाजपा कार्यकर्ता को तलब किया है, जिसने राहुल गांधी के ब्रिटिश नागरिक होने का दावा करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी. व्यक्ति की पहचान एस. विग्नेश शिशिर के रूप में हुई है. उन्हें नौ सितंबर को केंद्रीय जांच एजेंसी के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया है.
ईडी सूत्रों ने बताया कि शिशिर से मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के प्रावधानों के तहत मामले से संबंधित सभी साक्ष्य और दस्तावेज के साथ पेश होने को कहा गया है. उन्होंने बताया कि इन आरोपों की जांच की जा रही है. फेमा के तहत ईडी व्यक्तियों और कंपनियों द्वारा विदेशी मुद्रा कानूनों के उल्लंघन से संबंधित शिकायतों की जांच करता है. जब इस मामले पर कांग्रेस पार्टी से प्रतिक्रिया मांगी गई तो उसने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में शिशिर ने दावा किया था कि उनके पास ब्रिटिश सरकार के कुछ दस्तावेज और ईमेल हैं, जो यह साबित करते हैं कि लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी ब्रिटेन के नागरिक हैं और इस कारण भारत में चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने 30 अगस्त को केंद्र सरकार को आदेश दिया था कि शिशिर को 24 घंटे सुरक्षा प्रदान की जाए.

जस्टिस संगीता चंद्रा और जस्टिस बी. आर. सिंह की खंडपीठ ने भाजपा कार्यकर्ता द्वारा दायर एक रिट याचिका पर यह आदेश पारित किया. अपने अंतरिम आदेश में पीठ ने कहा, “हम पहली नजर में संतुष्ट हैं कि यह मामला विचार योग्य है क्योंकि याचिकाकर्ता ने एक बेहद प्रभावशाली व्यक्ति के खिलाफ मामला दायर किया है और लगातार धमकियों का सामना कर रहा है तथा नोटिस के अनुपालन में उन्हें रायबरेली जिले के कोतवाली थाने में जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होना पड़ रहा है.”

शिशिर ने हाईकोर्ट को बताया था कि उनकी जून 2024 में की गई शिकायत के आधार पर सीबीआई जांच कर रही है. उन्होंने यह भी दावा किया कि वह कई बार दिल्ली में एजेंसी के समक्ष पेश हो चुके हैं और उन्होंने राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता से जुड़े साक्ष्य भी दिए हैं. हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई नौ अक्टूबर के लिए तय की है. इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को बताया था कि भारत सरकार ने ब्रिटेन सरकार को गांधी की ब्रिटिश नागरिकता से संबंधित विवरण उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा है.