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RBI के बैंक अवकाश कैलेंडर के अनुसार देश भर में कई बैंक शाखाएँ बंद रहेंगी…

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RBI के बैंक अवकाश कैलेंडर के अनुसार देश भर में कई बैंक शाखाएँ बंद रहेंगी…

BANK HOLYDAY:– अगर आप आज बैंक से जुड़े कामों के लिए बैंक शाखा जाने की सोच रहे हैं, तो आपको बता दें कि गुरुवार (4 सितंबर) को बैंक बंद रहेंगे। RBI के बैंक अवकाश कैलेंडर के अनुसार, ओणम, ईद-ए-मिलाद, नवरात्रि स्थापना और दुर्गा पूजा सहित राज्य-विशिष्ट छुट्टियों के कारण देश भर में कई बैंक शाखाएँ बंद रहेंगी।

ये राष्ट्रव्यापी अवकाश नहीं हैं, इसलिए कुछ राज्यों में बैंक खुले रहेंगे जबकि कुछ में बंद रहेंगे। अगर आप कल बैंक जाकर अपना काम निपटाने की योजना बना रहे हैं, तो पहले यह जान लें कि कौन से बैंक बंद रहेंगे। RBI की सूची के अनुसार, देश के किन राज्यों में कब और कहाँ बैंक बंद रहेंगे, इसकी सूची यहाँ दी गई है।

नीचे आप पूरी सूची देख सकते हैं: 4 सितंबर को बैंक बंद रहेंगे। 4 सितंबर, गुरुवार को बैंक बंद रहेंगे।

ओणम के कारण केरल में बैंक बंद रहेंगे। अन्य सभी राज्यों में बैंक खुले रहेंगे। ओणम केरल का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है, जिसे हर साल बड़े धूमधाम और समारोह के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार राजा महाबली की स्मृति में मनाया जाता है। ओणम के अवसर पर लोग अपने घरों को फूलों से सजाते हैं।

सितंबर में छुट्टियों की सूची 3 सितंबर (बुधवार): रांची में कर्मा पूजा।

4 सितंबर (गुरुवार): कोच्चि और तिरुवनंतपुरम में ओणम त्योहार की छुट्टी।

5 सितंबर (शुक्रवार): ईद-ए-मिलाद/थिरुवोणम के अवसर पर अहमदाबाद, मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद सहित कई शहरों में बैंक अवकाश रहेगा।

6 सितंबर (शनिवार): ईद-ए-मिलाद/इंद्रजात्रा के अवसर पर गंगटोक, जम्मू, रायपुर और श्रीनगर में बैंक अवकाश रहेगा।

12 सितम्बर (शुक्रवार): जम्मू और श्रीनगर में ईद-ए-मिलाद के बाद शुक्रवार।

22 सितंबर (सोमवार): जयपुर में नवरात्रि स्थापना की छुट्टी।

23 सितंबर (मंगलवार): जम्मू और श्रीनगर में महाराजा हरि सिंह जयंती।

29 सितंबर (सोमवार): अगरतला, गंगटोक और कोलकाता में महा सप्तमी/दुर्गा पूजा।

30 सितंबर (मंगलवार): अगरतला, भुवनेश्वर, गुवाहाटी, कोलकाता, पटना और रांची सहित कई शहरों में महा अष्टमी/दुर्गा अष्टमी।

7 सितंबर (रविवार)

13 सितंबर (दूसरा शनिवार)

14 सितंबर (रविवार)

21 सितंबर (रविवार)

27 सितंबर (चौथा शनिवार)

28 सितंबर (रविवार)

देश में नारियल उत्पादन में अव्वल छत्तीसगढ़ का कोंडागांव, यहां 18 प्रजातियों के लगाए गए हैं पौधे…

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नारियल के लिए दक्षिण भारत को प्रमुख केंद्र माना जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ के कोंडागांव में स्थित भारत सरकार के कृषि मंत्रालय द्वारा स्थापित प्रदर्शन सह बीज उत्पादन प्रक्षेत्र में (डीएसपी) देश के उन 11 प्रक्षेत्र में पहले नंबर पर शामिल है जहां सबसे ज्यादा नारियल का उत्पादन सालाना होता है। 100 एकड़ में फैले इस प्रक्षेत्र में 6000 नारियल के पेड़ लगे हुए हैं, जिसमें से वर्तमान में 4600 पेड़ों से सालाना 3 लाख से ज्यादा नारियल का उत्पादन हो रहा है। यहां होने वाले नारियल की खपत स्थानीय स्तर पर 60 प्रतिशत और शेष राज्य के अन्य इलाकों में भेजा जाता है।

18 प्रजातियों के पौधे हैं यहां
नारियल विकास बोर्ड के इस प्रक्षेत्र में नारियल के विभिन्न 18 प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। जिसमें 70 फीसदी उत्पादन बौना नारियल,टॉल नारियल व संकर प्रजाति के पेड़ों से होता है। जिसकी बिक्री से तकरीबन एक करोड रुपए सालाना की आमदनी बोर्ड को होती है। यहां इंटर क्रॉप के रूप में आम,लीची, दालचीनी कोका, काली मिर्च भी उत्पादित होते हैं। इसकी देखरेख के लिए यहां वर्तमान में 25 अधिकारी- कर्मचारी तैनात हैं।

सालाना 50 हजार से ज्यादा पौधों तैयार
इस प्रक्षेत्र में सालाना 50000 से ज्यादा नारियल के पौधों को तैयार कर इसकी बिक्री किसानों को की जाती है, जिसमें सबसे ज्यादा निकटवर्ती राज्य ओडिशा को भेजा जाता है। वहीं विभिन्न योजनाओं के माध्यम से स्थानीय स्तर पर किसानों को भी इसका वितरण समय-समय पर किया जाता है। जानकारी के मुताबिक नारियल का एक पौधा चार से पांच साल में फल देने लगता है जो 60 से 70 वर्ष तक लगातार फल देते रहता है।

आईसी कटियार, सहायक संचालक सीडीबी, डीएसपी: यह प्रक्षेत्र देश के 11 डीएसपी में उत्पादन के मामले में पहले नम्बर पर है। यहां से तकरीबन एक करोड़ की आमदनी बोर्ड को हो रही है।

‘तुम्हारी डेलिवरी…’ आंख मारी, मुस्कुराए और… कांग्रेस विधायक ने महिला पत्रकार से कही ऐसी बात, मच गया बवाल

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कर्नाटक कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री आरवी देशपांडे अपने एक बयान से विवादों में घिर गए हैं. यहां उत्तर कन्नड़ के जोइदा तालुक में अस्पताल न होने की समस्या पर एक महिला पत्रकार ने सवाल किया, तो उन्होंने जवाब देते हुए हल्के अंदाज़ में कहा, ‘चिंता मत करो, तुम्हारा डिलीवरी कहीं और करा देंगे.’ यह कहते हुए वह थोड़ा मुस्कुराए और आंख भी मारी.
पत्रकार ने जब इस पर उनसे स्पष्टता मांगी तो देशपांडे ने दोबारा वही टिप्पणी दोहराई, ‘जब तुम्हारा डिलीवरी का समय आएगा, हम करवा देंगे.’ पत्रकार ने उनसे आग्रह किया कि इलाके में अस्पताल बेहद ज़रूरी है और इसे उनके कार्यकाल में ही बनवाना चाहिए. इस पर विधायक ने केवल ‘ठीक है’ कहा, लेकिन कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया.
देशपांडे हलियाल विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और कर्नाटक सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है और आलोचनाओं का सिलसिला शुरू हो गया है.

देशपांडे का यह बयान कांग्रेस के लिए नई मुश्किल खड़ी कर रहा है और विपक्ष इसे महिलाओं के अपमान से जोड़कर बड़ा मुद्दा बना रहा है. बीजेपी ने देशपांडे की टिप्पणी को महिलाओं के लिए अपमानजनक करार दिया.

बीजेपी प्रवक्ता विजय प्रसाद ने कहा, ‘माताओं और महिलाओं का अपमान करना राजनीति नहीं, बल्कि नैतिक दिवालियापन है. राहुल गांधी प्रेम और सम्मान की बात करते हैं, लेकिन उनके नेता नफरत फैलाते हैं. कांग्रेस की राजनीति अपमान और परिवार पर हमले तक सीमित है.’
जेडीएस ने भी इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए वीडियो साझा किया और कांग्रेस विधायक की निंदा की. पार्टी ने पोस्ट में लिखा, ‘जिले के लिए सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की मांग पर जवाब में आप कहते हैं ‘तुम्हारा डिलीवरी करा देंगे’? क्या यही महिलाओं के प्रति आपका सम्मान है?’

15 दिनों में 2 करोड़ घरों का सर्वे करना आसान नहीं, बीजेपी ने कर्नाटक में 1400 जातियों की लिस्ट पर जताई आपत्ति

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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (केएससीबीसी) से आग्रह किया है कि वे सामाजिक और शैक्षिक सर्वेक्षण जल्दबाजी में न करें और इसे दशहरे के बजाय गर्मियों के मौसम में कराया जाए. सामाजिक और शैक्षिक सर्वेक्षण को सामान्यतः जातिगत गणना कहा जाता है. प्रतिनिधिमंडल ने आयोग द्वारा प्रकाशित 1,400 जातियों की सूची पर भी कड़ी आपत्ति जताई है.
भाजपा के राज्य महासचिव एवं विधायक वी. सुनील कुमार ने कहा, “प्रतिनिधिमंडल ने आयोग के अध्यक्ष से कहा है कि यह कहना उचित नहीं है कि सर्वेक्षण 15 दिनों में पूरा हो जाएगा और वह भी दशहरे के समय, किसी दबाव में. इस अवधि में 1.75 से दो करोड़ घरों का सर्वेक्षण करना आसान नहीं है. इसे पुनः विचार किया जाना चाहिए और सर्वेक्षण गर्मियों में कराया जाना चाहिए.”
आयोग के अध्यक्ष मधुसूदन आर. नाइक से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने बताया कि 1,400 जातियों की सूची प्रकाशित की गई है और आपत्तियां मांगी गई हैं. इस सूची में कुछ नयी जातियां बनाई गई हैं, जो सरकार या किसी आयोग की किसी भी जाति सूची में नहीं हैं. उन्होंने कहा, “कुरुबा-ईसाई, मडिवाला-ईसाई, वोक्कालिगा-ईसाई, इस प्रकार लगभग 107 नयी जातियां बनाई गई हैं, जिन्हें कोड नंबर भी दिए गए हैं. यह स्वीकार्य नहीं है.”

भाजपा नेता ने चेतावनी दी कि नयी जातियां बनाने से पूरे राज्य में व्यापक आंदोलन हो सकता है. उन्होंने कहा, “जहां तक ईसाई जातियों का सवाल है, हमने दो-तीन उपजातियों के बारे में सुना है और मुसलमानों के लिए कुछ उपजातियां हैं.” उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह सभी हिन्दू उपजातियों के सामने ईसाई या मुसलमान जोड़कर धार्मिक परिवर्तन को बढ़ावा दे रही है.

उन्होंने कहा, “लोगों को शक है कि यह धार्मिक परिवर्तन को समर्थन देने और आने वाले दिनों में उन्हें आरक्षण देने की साजिश है.” उन्होंने नए सिरे से बनाई गई जातियों को सूची से हटाने की मांग की. सुनील कुमार ने बताया कि आयोग से यह भी अनुरोध किया गया है कि सर्वेक्षण के लिए प्रमाण-पत्र अनिवार्य रूप से दिया जाए और 1,400 जातियों को पिछड़ा वर्ग की श्रेणियों के अनुसार सूचीबद्ध किया जाए.
उन्होंने कहा, “अध्यक्ष ने हमारी बात धैर्यपूर्वक सुनी, लेकिन वह 15 दिनों में सर्वेक्षण करने पर अड़े रहे.” उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सर्वेक्षण जल्दबाजी में न किया जाए और इसकी रिपोर्ट को खारिज न किया जाए, क्योंकि यह सर्वेक्षण भविष्य में सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. कर्नाटक सरकार ने राज्य में 22 सितंबर से सात अक्टूबर तक 15 दिनों का नया सामाजिक और शैक्षिक सर्वेक्षण कराने का निर्णय लिया है. आयोग को सर्वेक्षण रिपोर्ट अक्टूबर के अंत तक सौंपने का समय दिया गया है.

कैसे लश्कर का TRF आतंकवादी साजिशों के लिए जमा करता है फंड…..NIA जांच में खुलासा, FATF ने पाकिस्तान पर कसा शिकंजा

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अमेरिका ने हाल ही में ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ को एक विदेशी आतंकवादी संगठन और एक विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी इकाई घोषित किया है. यह पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका था क्योंकि इस कदम से उसकी आतंकी रणनीति का पर्दाफाश हो गया. द रेजिस्टेंस फ्रंट, लश्कर-ए-तैयबा का ही एक अंग है. वास्तव में, इसे जम्मू-कश्मीर के एक स्थानीय संगठन के रूप में गठित और प्रचारित किया गया था. जिसका उद्देश्य पाकिस्तान और लश्कर-ए-तैयबा, दोनों को एक तरह से नकारने का मौका देना था.
इसका उद्देश्य कश्मीर में चल रही गड़बड़ी को स्थानीय स्तर पर दिखाना था. पाकिस्तान चाहता था कि आतंकवादी हमले जारी रहें और यह भी सुनिश्चित हो कि वह वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) की जांच के दायरे में न आए. राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने रेजिस्टेंस फ्रंट की गतिविधियों की पड़ताल की. उस आधार पर कहा जा रहा है कि पाकिस्तान एफएटीएफ से बचने के लिए इस छद्म संगठन का इस्तेमाल नहीं कर सकता. रेजिस्टेंस फ्रंट का जम्मू-कश्मीर में एक गहरा नेटवर्क है. इसके स्थानीय लोग, जो पाकिस्तान के इशारे पर, इस आतंकवादी संगठन की गतिविधियों को चलाने के लिए धन मुहैया कराने हेतु खाड़ी और मलेशिया के लोगों के संपर्क में हैं.
जांच ​​के दौरान, मलेशिया निवासी सज्जाद अहमद मीर का नाम सामने आया है. एक संदिग्ध, यासिर हयात, के फोन कॉल्स से पता चला है कि वह धन की व्यवस्था के लिए मीर के संपर्क में था. हयात ने धन की व्यवस्था के लिए कई बार मलेशिया की यात्राएं की थीं. अब तक सामने आई जानकारी से पता चलता है कि अपने मलेशियाई संपर्क की मदद से उसने द रेजिस्टेंस फ्रंट के लिए 9 लाख रुपये जुटाए थे. यह पैसा संगठन की गतिविधियों को चलाने के लिए शफात वानी नाम के एक अन्य कार्यकर्ता को दिया गया था.

कहा जाता है कि वानी, जो टीआरएफ का एक प्रमुख कार्यकर्ता है, मलेशिया भी गया था. उसने बताया कि वह एक विश्वविद्यालय के सम्मेलन में भाग लेने गया था, और इसी बहाने उस देश में प्रवेश किया था. हालांकि, विश्वविद्यालय ने इस यात्रा को प्रायोजित नहीं किया था.

एनआईए को यह भी पता चला है कि मीर के संपर्क में रहने के अलावा, हयात दो पाकिस्तानियों के भी संपर्क में था. उसकी गतिविधियां धन जुटाने के लिए थीं, और जांच से पता चलता है कि उसका काम विदेशी कार्यकर्ताओं के संपर्क में रहना और आतंकवादी संगठन के लिए धन जुटाना था.
एनआईए के पास टीआरएफ के संचालन के बारे में पर्याप्त जानकारी है, लेकिन कितना धन मुहैया कराया गया इसका पता लगाना जांच के लिए महत्वपूर्ण है. 13 अगस्त को, एनआईए ने कहा था कि उसने धन के एक विदेशी स्रोत का पता लगाया है जिसकी गहन जांच की जा रही है.
हयात के फोन पर 463 संपर्क हैं जिनकी एनआईए गहन पड़ताल कर रही है. कई मौकों पर पाकिस्तान और मलेशिया को कॉल किए गए हैं. इन सभी नंबरों की जांच की जा रही है, और जांचकर्ताओं का कहना है कि द रेजिस्टेंस फ्रंट के फंडिंग नेटवर्क का पता लगाने के लिए यह बेहद जरूरी है. ये खुलासा इस नेटवर्क का पता लगाने के लिए महत्वपूर्ण हैं, और ये भारत को एफएटीएफ के समक्ष पाकिस्तान को बेनकाब करने में मदद करेंगे.
भारत टेरर फंडिंग को लेकर पाकिस्तान के खिलाफ केस बना रहा है. उसे वापस ग्रे लिस्ट में शामिल करने पर भारत जोर दे रहा है. द रेजिस्टेंस फ्रंट का गठन 2019 में कम होते हिज्बुल मुजाहिदीन को रिप्लेस करने के लिए किया गया था. माना गया था कि इलाके में उसका प्रभाव कम हो रहा है और स्थानीय आतंकी गतिविधियों को एक नई पहचान देने के लिए ऐसा किया जाना जरूरी है.

इसका गठन लश्कर-ए-तैयबा की गतिविधियों पर पर्दा डालने के लिए किया गया. हमलों को पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के बजाय स्वदेशी प्रतिरोध के तौर पर दिखाने की कोशिश की गई. यह वास्तव में लश्कर-ए-तैयबा का ही एक नया रूप था, जिसे वैश्विक समुदाय को गुमराह करने और एफएटीएफ जैसी संस्थाओं के दबाव को कम करने के लिए डिजाइन किया गया था.

कश्मीर से पंजाब तक बाढ़ से हाहाकार, राहुल गांधी ने पीएम मोदी से की मदद की मांग

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पहाड़ से लेकर मैदान तक सैलाब का कहर देखने को मिल रहा है. पंजाब के सभी 23 जिलों में बाढ़ से हाहाकार मचा हुआ है. यहां बाढ़ और बारिश से जुड़े हादसों में 30 लोगों की मौत हो चुकी है. भगवंत मान सरकार ने पंजाब को आपदा प्रभावित राज्य घोषित कर दिया है. वहीं दिल्ली में यमुना नदी का बढ़ता जलस्तर चिंता का विषय बना हुआ है. यमुना का पानी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है, जिससे दिल्ली और आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है. राहुल गांधी ने उत्तर भारत के कई राज्यों में बाढ़ से मची तबाही पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार ने राहत पैकेज देने की मांग की है.
दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता आज अपने सीएम आवास पर एक बार फिर जनसुनवाई की. पिछले महीने 20 को जनसुनवाई के दौरान एक शख्स ने उनपर हमला कर दिया था. इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उनकी सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया है. इस बार महिला पुलिस अधिकारियों की संख्या भी बढ़ाई गई है, ताकि महिला शिकायतकर्ताओं को आसानी हो और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.
उधर बिहार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां को अपशब्द कह जाने के मामले पर बीजेपी लगातार ही कांग्रेस पर खूब हमलावर है. इस कड़ी में कोलकाता में पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्यालय बिधान भवन पर BJP नेताओं ने विरोध प्रदर्शन और तोड़फोड़ कर दी. इसमें में बीजेपी राकेश सिंह सहित कुछ अन्य कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है.

उपराष्ट्रपति को मिलती है 2 लाख की पेंशन… लेकिन जगदीप धनखड़ पाएंगे 3 लाख 12 हजार

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भारत के उपराष्ट्रपति पद से हाल ही में जगदीप धनखड़ ने इस्तीफा दिया है. जगदीप धनखड़ ने यह इस्तीफा स्वास्थ्य कारणों से दिया है. लेकिन इस्तीफा देने के बावजूद भी जगदीप धनखड़ की पेंशन के रूप में मिलने वाली सैलरी उपराष्ट्रपति की मिलने वाली सैलरी से ज्यादा होगी. बता दें कि भारत में उच्च पदों पर रहने वाले राजनेताओं और अधिकारियों को वेतन और भत्तों के रूप में भारी भरकम राशि मिलती है, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्हें मिलने वाली सुविधाओं का सिलसिला थमता नहीं है. उपराष्ट्रपति का पद छोड़ने वाले जगदीप धनखड़ भी अब एक साथ कई तरह की पेंशन और भत्तों के हकदार हो गए हैं, जो व्यवस्था द्वारा ही तय की गई है.
जब तक जगदीप धनखड़ उपराष्ट्रपति के पद पर थे, तब तक उन्हें हर महीने 4 लाख रुपये का वेतन मिलता था. भारतीय संविधान के अनुसार, उपराष्ट्रपति का कोई तय वेतन नहीं होता है, बल्कि वे राज्यसभा के सभापति के रूप में यह वेतन प्राप्त करते हैं. इस वेतन के अलावा, उन्हें कई भत्ते भी मिलते थे. लेकिन अब जब उन्होंने पद छोड़ दिया है तो उन्हें कई सेवानिवृत्ति लाभ मिलेंगे, जो उनकी पिछली भूमिकाओं के कारण एक साथ जुड़ते चले जाएंगे.

जगदीप धनखड़ को पूर्व उपराष्ट्रपति के तौर पर हर महीने 2 लाख रुपये की पेंशन मिलेगी. लेकिन यहीं पर सुविधाओं की सूची खत्म नहीं होती. वे एक पूर्व सांसद भी हैं, जिसके लिए उन्हें हर महीने 45,000 रुपये की पेंशन मिलेगी. इसके अलावा, राजस्थान के एक पूर्व विधायक के तौर पर वे हर महीने 42,000 रुपये के हकदार होंगे, जिसके लिए उन्होंहने हाल ही आवेदन दिया है. पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल के रूप में उन्हें 25,000 रुपये की मासिक पेंशन मिलेगी. इस तरह से उन्हें हर महीने पेंशन के रूप में कुल 3,12,000 रुपये मिलेंगे.
क्या सुविधाएं मिलेंगी?

पेंशन के अलावा, उन्हें कई अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी, जो उनके पद के अनुरूप हैं. एक पूर्व उपराष्ट्रपति के रूप में उन्हें टाइप 8 का शानदार बंगला मिलेगा, जिसे सरकार द्वारा बनाए रखा जाएगा. उन्हें एक सरकारी कार और सुरक्षा भी मिलेगा, जो जेड या जेड प्लस कैटेगिरी का हो सकता है. साथ ही उनके लिए व्यक्तिगत स्टाफ की व्यवस्था भी की जाएगी. ये सभी सुविधाएं वह जबतत जीवित रहेंगे तब तक मिलती रहेंगी.
उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद कितनी पेंशन?
यह व्यवस्था सिर्फ जगदीप धनखड़ के लिए ही नहीं है, बल्कि यह उन सभी राजनेताओं के लिए है, जो कई उच्च पदों पर काम कर चुके हैं. यह वर्तमान नीति-नियंताओं द्वारा माननीयों के लिए तय की गई एक ऐसी प्रणाली है, जिसे सभी स्वीकार करते हैं. इस व्यवस्था के तहत कई पूर्व राजनेताओं को अलग-अलग पदों के लिए कई पेंशन मिलती रहती हैं. हालांकि, यह एक कानून है और इसे गलत भी नहीं कहा जा सकता है, क्योंकि यह मौजूदा व्यवस्था का एक हिस्सा है. दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने इस व्य्यवस्था का विरोध करते हुए पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार ने इसे लागू किया था.

जगदीप धनखड़ ने बीते सोमवार को उपराष्ट्रपति का आवास खाली कर दिया है. लेकिन उनके लिए नई सुविधाओं का सिलसिला जल्द ही शुरू हो जाएगा. इस तरह के भत्ते और पेंशन प्रणाली यह दिखाती है कि भारत में उच्च पदों पर रहने वाले राजनेताओं को सेवानिवृत्ति के बाद भी आरामदायक जीवन सुनिश्चित किया जाता है, जो उनके देश के प्रति योगदान का सम्मान है.

CG: धूमधाम से होगा तीजा मिलन समारोह, प्रदेश के समस्त मंत्री सहित दिग्गज नेता होंगे शामिल …

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CG: धूमधाम से होगा तीजा मिलन समारोह, प्रदेश के समस्त मंत्री सहित दिग्गज नेता होंगे शामिल …

राजधानी रायपुर में कल 03 सितम्बर बुधवार को तीजा मिलन समारोह का भव्य आयोजन छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, पुनर्वास, उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा के द्वारा किया जा रहा है। कार्यक्रम दोपहर 12 बजे से बी-5/10, शंकर नगर, रायपुर में आयोजित होगा।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय  तथा विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह समारोह के मुख्य अतिथि होंगे। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ शासन के उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव एवं श्री विजय शर्मा, सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, विधायक श्री किरण सिंह देव सहित अनेक मंत्रीगण एवं जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे।

इस अवसर पर प्रदेश सरकार के मंत्रीगण आदिम जाति विकास एवं कृषि मंत्री श्री राम विचार नेताम, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री दयालदास बघेल, वन एवं सहकारिता मंत्री  श्री केदार कश्यप, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन, लोक स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव, कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब, पर्यटन एवं राजस्व मंत्री श्री राजेश अग्रवाल भी शामिल होंगे।

तीजा मिलन समारोह में प्रदेश की संस्कृति और परंपरा के रंगों का संगम देखने को मिलेगा। आयोजन समिति ने सभी नागरिकों से कार्यक्रम में शामिल होकर तीजा पर्व की गरिमा बढ़ाने की अपील की है।

“USA Intergrity Visa Fees : ट्रंप प्रशासन ने 1 अक्टूबर से नया वीजा इंटिग्रिटी फी लगाने का फैसला लिया है !

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“USA Intergrity Visa Fees : ट्रंप प्रशासन ने 1 अक्टूबर से नया वीजा इंटिग्रिटी फी लगाने का फैसला लिया है !

USA Intergrity Visa Fees: अमेरिका वीजा अब भारतीयों के लिए और महंगा हो चुका है, ट्रंप प्रशासन ने 1 अक्टूबर से नया वीजा इंटिग्रिटी फी लगाने का फैसला लिया है, जिससे कुल खर्च 40 हजार तक पहुंच चुका है।

इसके बाद भी क्या लोग यहां जाना चाहेंगे? भारतीयों के लिए अमेरिका जाना अब और भी महंगा होने वाला है, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एक नया वीजा इंटीग्रिटी फीस लगाने का फैसला किया है, जो 1 अक्टूबर से लागू किया जाएगा। वीजा इंटिग्रिटी फीस 250 डॉलर यानी करीब 22000 रु रहेगी। इसके बाद अमेरिका वीजा लेने की कुल कीमत करीबन 442 डॉलर लगभग 40,000 रु तक बताई गई है। नई कीमत का असर भारत से अमेरिका जाने वाले यात्रियों पर सीधा पड़ने वाला है।

बता दें, पहले से ही यूएस वीजा की प्रक्रिया महंगी और लंबी हो चुकी है और अब इस शुल्क की वजह से आम भारतीयों के लिए वहां जाना और भी मुश्किल हो जाएगा। चलिए जानते हैं नियम के बारे में और क्या लोग इसके बाद भी जाएंगे यहां यात्रा करने।

भारतीयों टूरिस्ट में आई है गिरावट

यूएस ट्रेवल एसोसिएशन के मुताबिक वीजा फीस के बढ़ने से भारत से अमेरिका जाने वाले यात्रियों की संख्या और घट जाएगी। अभी तक इसमें 2.5 फीसदी की गिरावट पहले से दर्ज हो चुकी है, वहीं भारतीय छात्रों की संख्या में इस साल 18 फीसदी की कमी देखी गई है, जो अमेरिकी कॉलेजों के लिए भी चिंता का विषय है। अमेरिकी विश्वविद्यालयों में इंटरनेशनल छात्रों की कमी अमेरिका के कॉलेजों और यूनिवर्सिटी लंबे समय से विदेशी छात्रों पर निर्भर रहते आए हैं। लेकिन ट्रंप की सख्त नीतियों और विदेशी छात्रों के प्रति सख्त नियमों ने हालात बिगाड़ दिए हैं।

भरना पड़ेगा बॉन्ड भी 

यही नहीं ट्रंप प्रशासन ने वीजा अवधि को कंट्रोल करने के लिए 15,000 डॉलर (करीब ₹12.5 लाख) का बॉन्ड प्लान भी लागू करने का फैसला लिया है। ये बॉन्ड स्टूडेंट वीजा, सांस्कृतिक एक्सचेंज विजिटर्स और मिडिया पर्सनल्स पर लागू हो सकता है। टूरिस्ट और बिजनेस वीजा लेने वालों पर भी ये बॉन्ड लागू किया जा सकता है। इसका पायलट प्रोजेक्ट 20 अगस्त से शुरू चुका है, इसका लक्ष्य है कि लोग वीजा की अवधि से अधिक अमेरिका में ना रुकें।

टूरिज्म पर पड़ेगा असर

यह नया शुल्क और बॉन्ड की अनिवार्यता भारतीयों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। एक तरफ वीजा फीस बढ़कर लगभग 40,000 रु तक पहुंचने वाली है, वहीं दूसरी तरफ अगर बॉन्ड व्यवस्था लागू होती है तो लोगों को लाखों रु और जमा करने पड़ सकते हैं।

इसका सीधा असर न सिर्फ आम पर्यटकों और बिजनेस ट्रैवलर्स पर पड़ेगा, बल्कि उन भारतीय छात्रों पर भी पड़ेगा जो उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका जाना चाहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम केवल भारतीयों को ही प्रभावित नहीं करेगा, बल्कि अमेरिकी ट्रैवल इंडस्ट्री पर भी नकारात्मक असर डालेगा। विदेशी पर्यटकों की संख्या घटने से होटल, एयरलाइंस और पूरे पर्यटन क्षेत्र को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

इंटरव्यू वेवर प्रोग्राम होगा शुरू

अमेरिकी विदेश विभाग 2 सितम्बर 2025 से इंटरव्यू वेवर प्रोग्राम (ड्रॉपबॉक्स) का दायरा कम करने जा रहा है।

प्रभावित वीजा: अब अधिकतर आवेदकों को, जो पहले बिना इंटरव्यू दिए वीजा ले सकते थे, अमेरिकी दूतावास या वाणिज्य दूतावास में व्यक्तिगत इंटरव्यू के लिए जाना होगा।

प्रभावित वीजा कैटेगरी: H, L, F, M, J, E और O आयु छूट खत्म : 14 साल से कम उम्र के बच्चे और 79 साल से अधिक उम्र के वयस्कों को भी अब व्यक्तिगत इंटरव्यू देना होगा।

किस चीज में नहीं हुआ बदलाव वीजा शुल्क की वैलिडिटी : भुगतान 365 दिनों तक मान्य रहेगा।

अपॉइंटमेंट शेड्यूलिंग: आप ऑफिशियल पोर्टल के माध्यम से अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं।

जरूरी डॉक्युमेंट्स: आवश्यक दस्तावेजों की लिस्ट में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

“अमेरिकी वित्त मंत्री बेसेन्ट का दावाः ”भारत-अमेरिका जल्द सुलझा लेंगे शुल्क विवाद”, कहा-रूस मामले में भारतीयों ने अच्छा व्यवहार नहीं किया”

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“अमेरिकी वित्त मंत्री बेसेन्ट का दावाः ”भारत-अमेरिका जल्द सुलझा लेंगे शुल्क विवाद”, कहा-रूस मामले में भारतीयों ने अच्छा व्यवहार नहीं किया”

भारत और अमेरिका के बीच शुल्क को लेकर जारी तनातनी के बीच अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट ने कहा है कि अंततः ‘ये दो महान देश इस मुद्दे को सुलझा लेंगे।’ उन्होंने यह भी कहा कि भारत के मूल्य रूस के बजाय ‘हमारे और चीन के अधिक करीब हैं।’

फॉक्स न्यूज़ को दिए साक्षात्कार में बेसेन्ट ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) को ”व्यापक तौर पर प्रदर्शनात्मक” करार दिया। यह बयान तब आया जब चीन के तियानजिन शहर में रविवार और सोमवार को एससीओ का वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ। बेसेन्ट ने सोमवार को कहा, ”यह एक पुराना आयोजन है, जिसे शंघाई सहयोग संगठन कहा जाता है, और मुझे लगता है कि यह व्यापक रूप से एक प्रदर्शनात्मक आयोजन है।”

उन्होंने कहा, ”आख़िरकार, भारत दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला लोकतंत्र है। उनके मूल्य रूस के बजाय हमारे और चीन के अधिक करीब हैं।” बेसेन्ट ने आगे कहा, ”मुझे लगता है कि अंतत: ये दो महान देश (भारत और अमेरिका) इस मुद्दे को सुलझा लेंगे। लेकिन रूस से तेल खरीदने और फिर उसे पुनः बेचने के मामले में भारतीयों ने अच्छा व्यवहार नहीं किया है। इससे यूक्रेन में रूस के युद्ध प्रयास को वित्तीय समर्थन मिला है।” भारत ने रूसी कच्चे तेल की अपनी खरीद का बचाव करते हुए कहा है कि उसकी ऊर्जा आवश्यकताएं राष्ट्रीय हितों और बाज़ार की स्थिति पर आधारित हैं। फॉक्स न्यूज़ के अनुसार, अमेरिका-भारत व्यापार वार्ताओं में धीमी प्रगति को भी व्हाइट हाउस द्वारा भारत पर शुल्क बढ़ाने के एक कारण के रूप में देखा जा रहा है।

बेसेन्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब ट्रंप प्रशासन ने रूस से तेल खरीद के चलते भारत पर 50 प्रतिशत तक के शुल्क लगाए हैं। भारत ने इन शुल्कों को ‘अनुचित और अकारण’ बताया है। उन्होंने यह प्रतिक्रिया प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान हुई द्विपक्षीय बैठकों से जुड़े सवालों पर दी। यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत-अमेरिका संबंध पिछले दो दशकों के सबसे निचले स्तर पर माने जा रहे हैं, जिसे ट्रंप प्रशासन की शुल्क नीति और नयी दिल्ली के प्रति उसके लगातार आलोचनात्मक रुख ने और गहरा किया है।

बेसेन्ट ने यह भी कहा कि ट्रंप प्रशासन रूस पर प्रतिबंधों पर विचार कर रहा है और ”सभी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।” उन्होंने कहा ”मुझे लगता है कि सब कुछ सामने है। राष्ट्रपति पुतिन ने एंकोरेज में ऐतिहासिक बैठक के बाद, फोन कॉल के बाद, जब सोमवार को यूरोपीय नेता और राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की व्हाइट हाउस में थे—जो संकेत दिए थे, उसके विपरीत कार्य किया है। वास्तव में, उन्होंने अत्यंत निंदनीय तरीके से बमबारी अभियान को और तेज कर दिया है।” उन्होंने आगे कहा, ”मुझे लगता है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ, सभी विकल्प खुले हैं, और हम इस सप्ताह उनका बहुत गंभीरता से अध्ययन करेंगे।”