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लेट नाइट पार्टी में गई तो… पुलिस की चेतावनी से मची खलबली, पैरेंट्स भी देख लें ये पोस्टर

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गुजरात के अहमदाबाद में महिलाओं को सुरक्षा से जुड़ी सलाह देने के नाम पर लगाए गए पोस्टरों पर जबरदस्त विवाद खड़ा कर हो गया है. इन पोस्टरों में लिखा था, ‘लेट-नाइट पार्टी में जाना रेप या गैंगरेप को न्योता दे सकता है.’ इस तरह की भाषा को लेकर पुलिस और सामाजिक संगठनों की तीखी आलोचना हो रही है. हालांकि, मामला सामने आने के बाद पुलिस ने तुंरत इन पोस्टरों को हटवा दिया है. साथ ही पुलिस ने स्वीकार किया है कि पोस्‍टर में इस्‍तेमाल भाषा को स्‍वीकार नहीं किया जा सकता है.

पुलिस की ओर से महिला सुरक्षा को लेकर लगवाए गए एक अन्य पोस्टर पर लिखा था, ‘अंधेरे और सुनसान इलाकों में दोस्तों के साथ न जाएं, आपके साथ रेप या गैंगरेप हो सकता है.’ इस तरह के संदेशों को लेकर सोशल मीडिया पर भारी विरोध शुरू हो गया. पुलिस अधिकारियों ने सफाई देते हुए बताया कि ये पोस्टर ‘सतर्कता’ नामक एक संगठन द्वारा ट्रैफिक जागरूकता के लिए प्रस्तावित किए गए थे. डीसीपी (ट्रैफिक वेस्ट) नीता देसाई और एसीपी (ट्रैफिक एडमिन) शैलेश मोदी ने कहा कि पुलिस को पोस्टर की पूरी सामग्री की जानकारी नहीं थी और जैसे ही विवाद बढ़ा इन्हें तुरंत हटवा दिया गया.

पुलिस ने झाड़ा पल्‍ला

वहीं, पुलिस ने इस विवाद से अपना पल्‍ला झाड़ने की कोशिश की है. एसीपी (ट्रैफिक) एनएन चौधरी ने कहा, ‘हमने इस तरह की भाषा की अनुमति कभी नहीं दी थी.’ स्थानीय निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता इस प्रकरण से आहत हैं. घाटलोडिया निवासी एक महिला भूमि पटेल ने कहा, ‘इस तरह के संदेश महिलाओं को दोषी ठहराते हैं, जबकि असल जिम्मेदारी सिस्टम की होती है.’ बोडकदेव की फिटनेस ट्रेनर ने इसे ‘मोरल पुलिसिंग’ करार देते हुए कहा कि यह पोस्टर महिला सुरक्षा का मजाक उड़ाते हैं.
बता दें कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर समय-समय पर कैंपेन चलाए जाते हैं. पुलिस प्रशासन इसमें गैरसरकारी संस्‍थाओं का सहयोग भी लिया जाता है. अहमदाबाद के इस बार के पोस्‍टर कैंपेन में भी एनजीओ की मदद ली गई थी, पर जिस तरह से महिला सेफ्टी के लिए शब्‍दों का चयन किया गया, उससे बवाल मच गया. मह‍िलाओं ने खासकर नाराजगी जताई है. नेहरू नगर निवासी एक महिला ने कहा, ‘इन पोस्टरों से वह मानसिकता उजागर होती है जो पीड़िता को दोष देती है और सुरक्षा में चूक के लिए जिम्मेदार संस्थाओं को बचा लेती है.’ इस विवाद ने एक बार फिर महिला सुरक्षा के नाम पर दी जा रही ‘नसीहतों’ के तरीके और उनके पीछे की सोच को कठघरे में खड़ा कर दिया है.

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय जलशक्ति मंत्री श्री सी आर पाटिल से की मुलाकात, बोधघाट परियोजना पर हुई चर्चा

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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल से सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान राज्य की महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं, विशेषकर बस्तर क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित बोधघाट बहुद्देशीय परियोजना पर विस्तार से चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री श्री साय ने केंद्रीय मंत्री श्री सी आर पाटिल को अवगत कराया कि बोधघाट परियोजना बस्तर की सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और ऊर्जा उत्पादन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर क्षेत्र दशकों से विकास की मुख्यधारा से पीछे रहा है। वर्तमान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है कि इस क्षेत्र को नक्सल हिंसा से मुक्त कर आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाया जाए। उन्होंने बताया कि बस्तर के लिए प्रस्तावित बोधघाट बहुद्देशीय परियोजना से लगभग 8 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई और 125 मेगावाट विद्युत उत्पादन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने यह भी बताया कि बस्तर क्षेत्र में अब नक्सल प्रभाव में उल्लेखनीय कमी आई है और विकास कार्यों के लिए अनुकूल वातावरण बन रहा है। ऐसे में बोधघाट जैसी परियोजनाएं इस क्षेत्र को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से इस परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना के रूप में निर्माण संबंधी आवश्यक पहल करने के विषय में विस्तार से चर्चा की।

केंद्रीय जलशक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल ने राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए परियोजना से संबंधित प्रस्तावों का शीघ्र तकनीकी परीक्षण कराने का आश्वासन दिया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने आशा व्यक्त की कि केंद्र सरकार के सहयोग से बोधघाट परियोजना शीघ्र साकार रूप लेगी और यह बस्तर की आर्थिक उन्नति और सामाजिक बदलाव का प्रमुख आधार बनेगी।

केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह से मिले मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज संसद भवन में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह से सौजन्य भेंट की। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ के समग्र विकास, माओवादी चुनौती से निपटने की रणनीति सहित विभिन्न विषयों पर केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह से चर्चा की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने केंद्रीय गृह मंत्री को माओवादी विरोधी अभियानों की उपलब्धि एवं भविष्य की कार्ययोजना से भी अवगत कराया। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों में पिछले डेढ़ वर्षों में उल्लेखनीय सफलता मिली है। दिसंबर 2023 से अब तक 33 बड़ी मुठभेड़ों में शीर्ष माओवादी नेताओं सहित 445 माओवादी न्यूट्रलाइज़ किए गए हैं। वहीं, 1554 माओवादी गिरफ्तार किए गए हैं, एवं 1588 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है।

उन्होंने कहा राज्य सरकार की “समन्वित विकास और सुरक्षा” नीति के तहत माओवादी प्रभाव को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इस दिशा में सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। इन प्रयासों से न केवल माओवादी प्रभाव कम हुआ है, बल्कि स्थानीय समुदायों में प्रशासन के प्रति भरोसा भी बढ़ा है।

केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ सरकार की माओवाद उन्मूलन हेतु किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने माओवादी उन्मूलन के लिए राज्य सरकार के प्रयासों को ऐतिहासिक बताया और केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का वादा किया।

बैठक में छत्तीसगढ़ के गठन के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले अमृत रजत महोत्सव 2025 की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि इस आयोजन को भव्य और यादगार बनाने के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इस महोत्सव के माध्यम से राज्य की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकता, और आर्थिक उपलब्धियों को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया जाएगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने बस्तर के विकास और सुरक्षा में सहयोग और मार्गदर्शन पर श्री शाह को धन्यवाद भी ज्ञापित किया।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से मिले मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय – छत्तीसगढ़ के विकास को मिली नई रफ्तार

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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज संसद भवन में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को 1 नवंबर 2025 को रायपुर में आयोजित अमृत रजत महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने हेतु आमंत्रित किया। साथ ही मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को राज्य सरकार की भावी योजनाओं, विकास की प्राथमिकताओं और जनकल्याण से जुड़े प्रमुख विषयों की जानकारी भी दी।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में राज्य गठन की 25वीं वर्षगांठ अमृत रजत जयंती वर्ष के रूप में मनाई जा रही है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह आयोजन छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक होगा और प्रधानमंत्री की गरिमामयी उपस्थिति से इसकी महत्ता और भी बढ़ जाएगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ तेज़ी से प्रगति के पथ पर अग्रसर है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने ‘अंजोर विज़न @2047’ दस्तावेज़ तैयार किया है, जो विकसित भारत के लक्ष्य को दृष्टिगत रखते हुए छत्तीसगढ़ के समावेशी और सतत विकास की रूपरेखा प्रस्तुत करता है। यह विज़न दस्तावेज़ शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, नवाचार और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में सुधार और नवाचार-आधारित पहलों पर केंद्रित है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को अवगत कराया कि छत्तीसगढ़ सरकार ने केंद्र सरकार के “जन विश्वास अधिनियम 2023” से प्रेरणा लेते हुए राज्य में “जन विश्वास विधेयक 2025” पारित किया है, जिससे न्याय प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ी है और आम नागरिकों की पहुंच अधिक सुलभ एवं सहज बनी है।

राजधानी नवा रायपुर के सुनियोजित और तीव्र विकास हेतु गठित छत्तीसगढ़ राज्य राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (SCRDA) की जानकारी भी मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से साझा की। उन्होंने बताया कि इस प्राधिकरण के माध्यम से राजधानी क्षेत्र को एक आधुनिक, स्मार्ट एवं तेज़ी से विकसित शहरी केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री को राज्य में औद्योगिक निवेश और रोज़गार सृजन के क्षेत्र में हो रही उल्लेखनीय प्रगति की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में लागू की गई नई औद्योगिक नीति 2024-30 के परिणामस्वरूप राज्य में निवेशकों की रुचि निरंतर बढ़ रही है। नीति के तहत सिंगल विंडो सिस्टम को लागू किया गया है, जिससे उद्योगों की स्थापना सरल, त्वरित और पारदर्शी बनी है। 1000 से अधिक व्यक्तियों को रोज़गार प्रदान करने वाले उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि नवंबर 2024 से जुलाई 2025 के बीच अब तक 84 कंपनियों से कुल 6.65 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि नवा रायपुर में देश की पहली सेमीकंडक्टर यूनिट की नींव रखी जा चुकी है, और एआई डेटा सेंटर का निर्माण कार्य भी प्रारंभ हो गया है। इसी प्रकार, टेक्सटाइल, फार्मा, रेडीमेड गारमेंट और आईटी सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए छत्तीसगढ़ को तकनीकी और औद्योगिक हब के रूप में विकसित किया जा रहा है।

राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शालाओं और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण के माध्यम से ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने हेतु प्रतिबद्ध है। आदिवासी क्षेत्रों में डिजिटल संसाधनों और प्रशिक्षित शिक्षकों के सहयोग से शिक्षा को तकनीक से जोड़ने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को यह भी जानकारी दी कि राज्य सरकार मेडिसिटी और एडु सिटी जैसी दो नई महत्त्वाकांक्षी परियोजनाओं पर तेज़ी से कार्य कर रही है। रायपुर में विकसित की जा रही मेडिसिटी एक आधुनिक और उत्कृष्ट स्वास्थ्य केंद्र के रूप में उभर रही है, जिससे छत्तीसगढ़ को मेडिकल हब के रूप में पहचान प्राप्त होगी और व्यापक स्तर पर रोज़गार के अवसर उपलब्ध होंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में चल रही पुनर्वास और विश्वास बहाली की योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की संवेदनशील और दूरदर्शी नीतियों के परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में नक्सली आत्मसमर्पण कर सामान्य जीवन की ओर लौटे हैं। इन क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं का तीव्र विस्तार किया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों में शासन के प्रति विश्वास सुदृढ़ हुआ है और वे विकास की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने युवाओं को दिया सफलता का मंत्र

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उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव आज लोरमी के राजीव गांधी शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में दीक्षारंभ एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने दीक्षारंभ कार्यक्रम में विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि हमें प्रकृति और समाज से जुड़कर समग्र विकास की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने अपने छात्र जीवन की स्मृतियाँ साझा करते हुए विद्यार्थियों को आत्मविश्वास, अनुशासन और निरंतर प्रयास का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि लक्ष्य निर्धारित करना महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक आवश्यक है, सही दिशा तय करना। जीवन में सफलता का रास्ता मेहनत और ईमानदारी से होकर गुजरता है। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के जीवन संघर्ष और उपलब्धियों का उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों को प्रेरित किया। महाविद्यालय के प्राचार्य श्री एम.के. धुर्वे ने उप मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए संस्थान की उपलब्धियों की जानकारी दी।

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कहा कि वर्ष 1994 से संचालित यह कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय लोरमी की शैक्षणिक पहचान बन चुका है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि कभी भी डिप्रेशन, निराशा और हताशा को अपने जीवन में जगह न दें। ये आपके सबसे बड़े शत्रु हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जैसे नेता एक गरीब माँ के बेटे होकर भी विश्व मंच पर छाए हैं। यह उनकी मेहनत और लगन का परिणाम है। श्री साव ने महाविद्यालय की मांग पर 15 नग ग्रीन बोर्ड, परिसर में बाउण्ड्रीवाल, चेकर पत्थर, दो सेट सोलर हाइमास्ट लाइट और सांस्कृतिक मंच के निर्माण की घोषणा की।

बिल्हा के विकास के लिए राशि की नहीं होगी कमी : श्री अरुण साव

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उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने बिल्हा नगर पंचायत को 20 हजार से कम आबादी वाले शहरों में देश का सबसे स्वच्छ शहर बनाने में अहम योगदान के लिए वहां की स्वच्छता दीदियों और सफाई कर्मियों को सम्मानित किया। उन्होंने बिल्हा के कन्या भवन में आयोजित सम्मान समारोह में 28 स्वच्छता दीदियों, 20 सफाई मित्रों और दस स्वच्छता कमांडोज को सम्मानित किया। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में बिल्हा ने 20 हजार से कम जनसंख्या वाले शहरों में देश के सबसे साफ-सुथरे शहर का पुरस्कार हासिल किया है। बिल्हा के विधायक श्री धरमलाल कौशिक और क्रेडा के अध्यक्ष श्री भूपेन्द्र सवन्नी भी सम्मान समारोह में शामिल हुए।

उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने कार्यक्रम में स्वच्छता दीदियों से कहा कि आप लोगों के कारण छत्तीसगढ़ को देश में बड़ी प्रतिष्ठा मिली है। स्वच्छता में देश में प्रथम स्थान हासिल करना हम सबके लिए गौरव की बात है। अब हमें इसे बरकरार रखना होगा। बिल्हा के एक-एक व्यक्ति को स्वच्छता के लिए संकल्प लेना होगा। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों को स्वच्छता की शपथ दिलाई।

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में स्वच्छता ने जन आंदोलन का रूप ले लिया है। स्वच्छता हमारे संस्कार और स्वभाव में है। हर व्यक्ति चाहता है कि हमारा घर साफ-सुथरा रहे। शहर भी हमारा घर है, इसे साफ रखना भी हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में छत्तीसगढ़ को स्वच्छता में उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। इसमें शामिल हमारे 169 शहरों में से 115 ने अपनी रैंकिंग सुधारी है। राज्य की इस उपलब्धि में स्वच्छता दीदियों और सफाई मित्रों का अमूल्य योगदान है जिसके लिए वे अभिनंदन के पात्र हैं।

योजनाओं और सुविधाओं के क्रियान्वयन में और ज्यादा गति व पारदर्शिता के साथ करें परिणाममूलक कार्य – श्री अरुण साव

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उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने मंत्रालय में आयोजित मैराथन बैठक में विभागीय योजनाओं का सक्रियता से क्रियान्वयन कर नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने, निर्माण कार्यों की गति बढ़ाने तथा स्वच्छता एवं सौंदर्यीकरण के कार्यों को प्रभावी तरीके से धरातल पर उतारने के निर्देश दिए। उन्होंने बैठक में 25 से अधिक योजनाओं की प्रगति की समीक्षा कर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस. और संचालक श्री आर. एक्का भी बैठक में शामिल हुए।

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने बैठक में अधिकारियों से कहा कि शहरों को स्वच्छ, सुंदर और नागरिक सुविधाओं से परिपूर्ण बनाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। बीते डेढ़ वर्षों में नगरीय प्रशासन विभाग ने कई नवाचार किए हैं, जिससे शहरी सेवाओं में व्यापक सुधार आया है। विभागीय योजनाओं और सुविधाओं के क्रियान्वयन में और ज्यादा गति तथा पारदर्शिता के साथ परिणाममूलक कार्य करने की जरूरत है। उन्होंने योजनाओं को समयबद्ध और प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया, जिससे कि शहरों के विकास को नई दिशा दी जा सके।

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) द्वारा संचालित ई-गवर्नेंस और मोर संगवारी योजना की समीक्षा करते हुए इनकी प्रक्रियाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने निदान-1100 योजना के विस्तार के साथ ही नए आरएफपी की प्रक्रिया को शीघ्र अंतिम रूप देने को कहा। उन्होंने अमृत मिशन के तहत बस्तर और सरायपाली के लिए तैयार किए गए डीपीआर का जल्दी परीक्षण कर प्राथमिकता से स्वीकृत करने को कहा।

65 लाख उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, जुलाई में कम आएगा बिजली बिल, मिलेगी छूट

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प्रदेशभर के 65 लाख बिजली उपभोक्ताओं को इस महीने के बिजली बिल में राहत मिलेगी। उपभोक्ताओं के बिजली बिल में लगने वाला ईंधन और विद्युत क्रय समायोजन अधिभार (एफपीपीएएस) इस बार भी कम रहा।

प्रदेशभर के 65 लाख बिजली उपभोक्ताओं को इस महीने के बिजली बिल में राहत मिलेगी। उपभोक्ताओं के बिजली बिल में लगने वाला ईंधन और विद्युत क्रय समायोजन अधिभार (एफपीपीएएस) इस बार भी कम रहा। लगातार दूसरे महीने इसकी दर में कमी आई है। जून महीने के बिल में उपभोक्ताओं ने जितना बिल भरा होगा, उसमें ऊर्जा प्रभार में 1.44 प्रतिशत की छूट मिलेगी। यानी वे उस अनुपात में कम बिल अदा करेंगे।

डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के प्रबंध निदेशक भीम सिंह कंवर ने बताया कि यह छूट कम्प्यूटराइज्ड स्वगणना प्रणाली से बिल में घटा दिया जाएगा, जिसे अधिभार कॉलम में अंकित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पॉवर कंपनी के बेहतर प्रबंधन और संयंत्रों के उत्पादन में संतुलन से यह अधिभार कम हुआ है। इससे हर उपभोक्ता के बिल में कुछ राशि घटी हुई दिखाई देगी।

सुबह स्टालिन के साथ टहलते नजर आए, शाम होते-होते ओ. पन्नीरसेल्वम ने NDA से तोड़ा नाता

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तमिलनाडु की सियासत में इन दिनों एक नई हलचल दिख रही है. मुख्यमंत्री एमके स्टालिनi]k, ने अचानक पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम (OPS) से उनके घर पर मुलाकात की. इस मुलाकात में डिप्टी सीएम और स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन भी मौजूद थे. यह एक साधारण शिष्टाचार भेंट नहीं थी. 2026 विधानसभा चुनाव से पहले तमिल राजनीति के समीकरणों में बड़ा बदलाव आ रहा है. OPS हाल ही में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए से अलग हो चुके हैं. वजह? प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की उनकी मांग को ठुकरा दिया गया, जब पीएम तमिलनाडु दौरे पर थे. इस अपमान के बाद OPS गुट पूरी तरह एनडीए से किनारा कर गया.

पन्नीरसेल्वम के करीबी और वरिष्ठ नेता पनरुट्टी रामचंद्रन ने बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस फैसले का ऐलान किया. उन्होंने साफ कहा, ‘अब से हमारी समिति एनडीए का हिस्सा नहीं रहेगी.’ उनके साथ OPS और अन्य प्रमुख नेता मौजूद थे. उन्होंने यह भी कहा कि OPS पूरे राज्य का दौरा करेंगे और भविष्य में गठबंधन पर फैसला हालात के अनुसार लेंगे.
क्यों नाराज हैं पन्नीरसेल्वम?
यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है जब OPS ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया है. उन्होंने समग्र शिक्षा अभियान के तहत तमिलनाडु को 2,151 करोड़ रुपये की राशि रोकने के लिए केंद्र को जिम्मेदार ठहराया. OPS का आरोप है कि राज्य सरकार के तीन भाषा फॉर्मूले को न मानने पर केंद्र ने फंड रोक दिया, जो न सिर्फ RTE एक्ट का उल्लंघन है, बल्कि संघीय ढांचे के खिलाफ भी है. उन्होंने कहा कि इस वजह से 25% छात्रों का निजी स्कूलों में दाखिला खतरे में पड़ गया है.
OPS की ये नाराजगी अब बीजेपी से एक खुला टकराव बन गई है. उन्होंने 2024 लोकसभा चुनाव में एनडीए के बैनर तले निर्दलीय चुनाव लड़ा था, लेकिन हार का सामना करना पड़ा. सूत्रों की मानें तो वे काफी समय से बीजेपी में मिल रहे ‘अनादर’ से खिन्न थे. एक निष्कासित AIADMK नेता ने नाम न छापने की शर्त पर हिंदुस्तान टाइम्स को बताया, ‘हमने पिछले साल ही उन्हें कहा था कि बीजेपी से दूर रहिए.’

सबसे दिलचस्प बात ये रही कि जब उनसे पीएम मोदी से मुलाकात न होने को लेकर सवाल हुआ, तो बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेन्द्रन ने जवाब दिया, ‘अगर मुझे पता होता कि वो मिलना चाहते हैं, तो मैं जरूर मुलाकात करवाता.’ लेकिन OPS के करीबियों की मानें तो उन्हें जानबूझकर नजरअंदाज किया गया.
क्या करेंगे पन्नीरसेल्वम?

अब OPS के लिए यह नई सियासी पारी की शुरुआत हो सकती है. उन्होंने खुद को न केवल बीजेपी से अलग किया है, बल्कि इस बात के संकेत भी दे दिए हैं कि अगला चुनाव वे नई साझेदारी या शायद अकेले लड़ सकते हैं. और स्टालिन की मुलाकात? वह शायद यही जताना चाहते हैं कि तमिल राजनीति में अब पुराने दुश्मन भी साझेदार बन सकते हैं, अगर फायदा दोनों को हो.

रोहिंग्या मुसलमान कौन हैं? ‘शरणार्थी या घुसपैठिए?’ पहचान पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को रोहिंग्या मुसलमानों से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान एक अहम सवाल खड़ा किया, क्या ये लोग भारत में शरणार्थी हैं या अवैध घुसपैठिए? जस्टिस सूर्यकांत, दीपांकर दत्ता और एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने साफ किया कि सबसे पहले रोहिंग्याओं की कानूनी पहचान तय करना जरूरी है. अगर वे शरणार्थी हैं, तो उनके अधिकार और संरक्षण भी तय होंगे. लेकिन अगर वे अवैध तरीके से भारत में दाखिल हुए हैं, तो उनकी वापसी यानी डिपोर्टेशन को लेकर केंद्र का फैसला सही है या नहीं. इस पर सुप्रीम कोर्ट बाद में विचार करेगा.

कोर्ट ने पूछे अहम सवाल
क्या रोहिंग्याओं को शरणार्थी घोषित किया जा सकता है? अगर हां, तो उन्हें कौन-कौन से अधिकार मिलने चाहिए? अगर वे अवैध घुसपैठिए हैं, तो क्या उन्हें भारत से वापस भेजना उचित है? जो रोहिंग्या हिरासत में नहीं हैं और रिफ्यूजी कैंपों में रह रहे हैं, क्या उन्हें पीने का पानी, शिक्षा, और साफ-सफाई जैसी सुविधाएं मिल रही हैं
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ये भी पूछा कि इतने सारे केस एक साथ क्यों लाए गए? याचिकाकर्ताओं के वकील ने बताया कि सभी मामलों में मुद्दे काफी हद तक आपस में जुड़े हुए हैं. एक मुख्य मुद्दा रोहिंग्याओं की अनिश्चितकालीन हिरासत को लेकर भी है.
केसों को तीन भागों में बांटा गया

कोर्ट ने साफ किया कि अब से इन केसों को तीन हिस्सों में सुना जाएगा. पहला, जो सीधे तौर पर रोहिंग्याओं से जुड़े हैं. दूसरा, जो उनसे संबंधित नहीं हैं और तीसरा, वो मामले जो अलग विषय के हैं लेकिन रोहिंग्याओं से जुड़े हुए हैं. सुप्रीम कोर्ट अब इन सभी मामलों की सुनवाई हर बुधवार को अलग-अलग करेगा.