पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन से की फोन पर बात, 73वें जन्मदिन पर दी बधाई, भारत-रूस रिश्तों को और मजबूत करने का संकल्प
मोदी कैबिनेट ने छठ और दिवाली के मौके पर 12,000 स्पेशल ट्रेनें चलाने का बड़ा फैसला लिया है.इसके अलावा, चार नए रेल रूट्स को भी मंजूरी दी गई है.इस निर्णय से त्योहारों के दौरान यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी. यह सभी प्रयास रेलवे की क्षमता को अगले स्तर पर पहुंचाने के लिए किए जा रहे हैं.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर 8 से 9 अक्टूबर तक भारत के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे. PM बनने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है. इस दौरे का मकसद भारत-ब्रिटेन द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना है.
इस दौरे पर दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर बातचीत होगी. भारत-UK कंप्रेहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) पर भी चर्चा होगी, जिसे भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) भी कहा जाता है.
अगर इस समझौते को ब्रिटिश संसद से मंजूरी मिल जाती है तो दोनों देशों के बीच 90% से ज्यादा सामानों पर टैरिफ खत्म हो जाएगा. स्टार्मर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को मुंबई में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (GFF) में हिस्सा लेंगे, जहां भारत-UK टेक्नोलॉजी सिक्योरिटी इनीशिएटिव (TSI) पर चर्चा करेंगे. इस पहल के जरिए टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग, बायोटेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा मिलेगा.
100 से ज्यादा लोगों का डेलिगेशन भी साथ में ब्रिटिश प्रधानमंत्री के साथ इस दौरे में 100 से ज्यादा बिजनेस लीडर्स, यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर और सांस्कृतिक क्षेत्रों से जुड़ी हस्तियां आ रही हैं. इससे जाहिर होता है कि ब्रिटेन भारत के साथ व्यापार, तकनीक और शिक्षा के क्षेत्र में गहरा सहयोग चाहता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23-24 जुलाई को ब्रिटेन की आधिकारिक यात्रा पर गए थे.
भारत और ब्रिटेन के बीच कंप्रेहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टरनशिप के तहत विजन 2025 के रोडमैप को आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा. इस विजन के तहत दोनों देश अगले 10 साल में हर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना चाहते हैं. UK-इंडिया बिजनेस काउंसिल (UKIBC) के चेयरमैन रिचर्ड हील्ड ने कहा कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच साझा समृद्धि पर आधारित है.
भारत-UK के बीच जॉइंट नेवल एक्सरसाइज
स्टार्मर का यह दौरान ऐसे समय हो रहा है, जह भारत और ब्रिटेन की नौसेनाएं अरब सागर में कोंकण नाम की जॉइंट नेवल एक्सरसाइज कर रही हैं. यूके सरकार के आंकड़ों के अनुसार, भारत और ब्रिटेन के बीच कुल व्यापार अब लगभग 44.1 बिलियन यूरो (लगभग ₹4.5 लाख करोड़) तक पहुंच गया है. इस यात्रा का लक्ष्य 2030 तक इस व्यापार को दोगुना करना है.
ब्रिटिश एयरवेज के CEO शॉन डॉयल ने भी भारत में उड़ानों के विस्तार की योजना जताई है. अभी एयरलाइन भारत के 5 प्रमुख शहरों (दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई) से हर हफ्ते 56 उड़ानें संचालित करती है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8-9 अक्टूबर को महाराष्ट्र का दौरा करेंगे. वो राज्य के लोगों को कई बड़ी सौगात देंगे. प्रधानमंत्री करीब 19 हजार 650 करोड़ रुपये की लागत से बने नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन करेंगे.
प्रधानमंत्री मुंबई मेट्रो लाइन-3 के अंतिम चरण का उद्घाटन करेंगे. 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनी पूरी मुंबई मेट्रो लाइन-3 को देश को समर्पित करेंगे. प्रधानमंत्री 11 सार्वजनिक परिवहन ऑपरेटरों के लिए भारत का पहला एकीकृत कॉमन मोबिलिटी ऐप मुंबई वन लॉन्च करेंगे. आइए जानते हैं पीएम मोदी के दौरे की खास बातें.
पीएम मोदी 8 अक्टूबर को नवी मुंबई पहुंचेंगे और दोपहर करीब 3 बजे नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का निरीक्षण करेंगे. इसके बाद करीब 3:30 बजे हवाई अड्डे का उद्घाटन और मुंबई में विभिन्न परियोजनाओं का शुभारंभ और लोकार्पण भी करेंगे. इस मौके पर पीएम जनसभा को संबोधित करेंगे. 9 अक्टूबर को सुबह करीब 10 बजे प्रधानमंत्री मुंबई में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की मेजबानी करेंगे. दोपहर करीब 1:40 बजे दोनों देशों के प्रधानमंत्री मुंबई के जियो वर्ल्ड सेंटर में सीईओ फोरम में भाग लेंगे. इसके बाद दोपहर करीब 2:45 बजे दोनों ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के छठे संस्करण में शामिल होंगे.
नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट की खास बातें
नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा भारत की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा परियोजना है. इसे सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत विकसित किया गया है. मुंबई महानगर क्षेत्र के दूसरे अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में एनएमआईए, छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (सीएसएमआईए) के साथ मिलकर काम करेगा. ताकि भीड़भाड़ कम हो और मुंबई को वैश्विक बहु-हवाई अड्डा प्रणालियों की श्रेणी में शामिल किया जा सके. 1160 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले इस हवाई अड्डे को दुनिया के सबसे कुशल हवाई अड्डों में से एक के रूप में डिजाइन किया गया है.
इसकी सुविधाओं की बात करें तो एक स्वचालित पीपल मूवर (एपीएम) शामिल है. जो सभी चार यात्री टर्मिनलों को सुचारू अंतर-टर्मिनल स्थानांतरण के लिए जोड़ेगी. हवाई अड्डे में स्थायी विमानन ईंधन (एसएएफ) के लिए समर्पित भंडारण, लगभग 47 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन और पूरे शहर में सार्वजनिक संपर्क के लिए ईवी बस सेवाएँ उपलब्ध होंगी. एनएमआईए देश का पहला हवाई अड्डा भी होगा जो वाटर टैक्सी से जुड़ा होगा.
प्रधानमंत्री आचार्य अत्रे चौक से कफ परेड तक फैली मुंबई मेट्रो लाइन-3 के चरण 2बी का उद्घाटन करेंगे, जिसका निर्माण लगभग 12,200 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है. साथ ही 37,270 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली पूरी मुंबई मेट्रो लाइन 3 (एक्वा लाइन) राष्ट्र को समर्पित करेंगे, जो शहर के शहरी परिवहन परिवर्तन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी.
केंद्रीय कैबिनेट की बैठक आज यानी मंगलवार को कई बड़े फैसले लिए गए। इसमें चार नई रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही वडोदरा-रतलाम को तीसरी और चौथी लेन को मंजूरी मिली है।
वहीं भुसावल-वर्धा तीसरी-चौथी लेन को भी मंजूरी मिली है।
वहीं इटारसी-चौथा-बीना के चौथे लेने को भी मंजूरी दी गई है। कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया ब्रीफिंग में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “आज की कैबिनेट बैठक में हमने चार नई रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी है। सात रेलवे कॉरिडोर कुल रेल यातायात का 41% हिस्सा वहन करते हैं। हमने हाल ही में इन कॉरिडोर को मजबूत करने और और अधिक जोड़ने के लिए कई परियोजनाएं शुरू की हैं। अब, हमने इन कॉरिडोर में न्यूनतम चार लेन और जहां संभव हो, छह लेन बनाने का निर्णय लिया है।”
H-1B वीजा की फीस में बढ़ोत्तरी। ज्यादातर भारतीय इसी वीजा पर काम या पढ़ाई के लिए अमेरिका जाते थे, लेकिन अब ट्रंप ने H-1B वीजा की फीस बढ़ाकर 1 लाख डॉलर (लगभग 90 लाख) रुपये कर दी है।
H-1B वीजा की फीस बढ़ाने का दांव ट्रंप पर ही उल्टा पड़ रहा है। अब भारतीयों ने ‘ड्रीम अमेरिका’ में दिलचस्पी लेना कम कर दिया है। अमेरिका अब ज्यादातर भारतीयों की पहली पसंद नहीं बचा है। आइए समझते हैं कैसे?
क्या कहता है ताजा ट्रेंड?
वॉऊ फॉर इटर्निटी की फाउंडर अनुराधा गुप्ता के अनुसार, “अप्रवासी नीतियां बेशक वाशिंगटन में लिखी जाती हैं, लेकिन इसका प्रभाव भारतीय परिवारों की डिनर टेबर पर देखा जा सकता है, जो अक्सर शादी की बातें करते हैं।”
भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा भारतीय अमेरिका में ही रहते हैं। अमेरिका में भारतीय NRI की संख्या लगभग 21 लाख है और इनमें ज्यादातर लोग शादी के बाद अमेरिका जाकर सेटल हुए हैं। कई भारतीय महिलाओं के लिए अमेरिका में नौकरी करने वाले व्यक्ति से शादी करना फाइनेंशियल सिक्योरिटी की कुंजी होती है। अमेरिका में रहने वाले ज्यादातर भारतीय परिवार को पैसे समेत अन्य सहयोग मुहैया करवाते हैं।
NRI दुल्हों की मांग घटी
अमेरिकी सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में अमेरिका ने जितने H-1B वीजा जारी किए थे, उनमें 75 प्रतिशत वीजा सिर्फ भारतीयों को मिले थे। वानाजा राओ क्विक मैरेजिस के नाम से मशहूर कंपनी के मालिक वानाजा राओ का कहना है कि पिछले साल NRI दुल्हों की अच्छी-खासी डिमांड थी।
वानाजी राओ के अनुसार,
ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद NRI दुल्हों की मांग और अमेरिका में जाकर बसने का क्रेज कम हो गया है। पिछले 6 महीने में इसमें काफी गिरावट देखी गई है। H-1B वीजा की फीस बढ़ाने के बाद लोगों की परेशानी और भी ज्यादा बढ़ गई है। इसकी वजह से कई लोगों ने शादियां टाल दी हैं।
H-1B वीजा पर ट्रंप की सख्ती
बता दें कि डोनल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में भी H-1B वीजा को निशाना बनाया था। उन्होंने महिलाओं को काम न करने की सलाह दी थी। हालांकि, ट्रंप का कार्यकाल खत्म होने के बाद जो बाइडेन अमेरिका के अगले राष्ट्रपति बने और उन्होंने इस फैसले को वापस ले लिया था।
जनवरी 2025 में सत्ता संभालने के बाद ट्रंप ने अप्रवासियों को बाहर निकालने की मुहिम शुरू कर दी और फिर उन्होंने H-1B वीजा की फीस भी बढ़ा दी। ट्रंप के इस फैसले से अमेरिका में रहने वाले भारतीयों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बताया है कि अगले तीन से चार दिनों में गुजरात के बाकी हिस्सों, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों, और महाराष्ट्र के हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी के लिए हालात अनुकूल हो गए हैं.
आमतौर पर महाराष्ट्र से मॉनसून की वापसी 5 अक्टूबर से शुरू होती है, लेकिन इस साल यह प्रक्रिया 26 सितंबर से रुकी हुई है. IMD अधिकारी ने बताया कि जैसे ही राज्य में मॉनसून की वापसी शुरू होगी, यह मुंबई और पुणे तक भी फैल जाएगी, जहां सामान्य वापसी की सामान्य तारीख 8 और 9 अक्टूबर है.
इस देरी की वजह बंगाल की खाड़ी में बने लगातार मौसमी सिस्टम रहे. पहला सिस्टम उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ा और गुजरात के पास चक्रवात शक्ति बनने से पहले मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश लाया. इसके बाद एक और सिस्टम बंगाल की खाड़ी में बना और बिहार तक पहुंचा, जिससे और बारिश हुई और वापसी की प्रक्रिया और टल गई.
मॉनसून की जल्द होगी वापसी
हालांकि, पुणे में हाल ही में खास बारिश नहीं हुई है, लेकिन जिन क्षेत्रों में बारिश हो रही थी, उसके कारण राज्य में मॉनसून की वापसी में देरी हुई. मौसम वैज्ञानिक अनुपम कश्यपी ने बताया कि 8-9 अक्टूबर के आसपास कहीं-कहीं गरज के साथ हल्की बारिश हो सकती है, लेकिन व्यापक बारिश की संभावना नहीं है. वो बताते हैं कि ‘चक्रवात शक्ति’ ने नमी को खींच लिया और उन सामान्य हवाओं को भी बिगाड़ दिया जो वापसी के दौरान गरज-बारिश को सहारा देती हैं.
इस कारण महाराष्ट्र में अक्टूबर अपेक्षाकृत शांत रहा है और मॉनसून वापसी की सामान्य बारिश लगभग गायब रही है. मुंबई और पुणे समेत महाराष्ट्र के अधिकांश हिस्सों से मॉनसून की पूरी वापसी लगभग 11 अक्टूबर तक हो सकती है.
IMD के पूर्व जलवायु अनुसंधान प्रमुख के.एस. होसालिकर ने बताया कि अरब सागर या बंगाल की खाड़ी में सक्रिय सिस्टम अक्सर वापसी की प्रक्रिया को रोक देते हैं, उन्होंने बताया कि ‘चक्रवात शक्ति’, जो फिलहाल अरब सागर में है, संभवतः 7 अक्टूबर तक कमजोर होकर डिप्रेशन में बदल जाएगा, जिससे मॉनसून वापसी की प्रक्रिया जल्द ही फिर शुरू हो सकती है.
बिहार विधानसभा चुनावों के लिए आम आदमी पार्टी कितनी गंभीर है, इस बात से समझ सकते हैं कि वो सभी विधानसभा सीटों के लिए अपने प्रत्याशी खड़े करने का दम भर रही है. 11 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी भी हो गई है.
लेकिन बिहार की जटिल जातिगत राजनीति, स्थापित दलों के मजबूत वोट बैंक और AAP के सीमित संगठनात्मक आधार को देखते हुए यह कहना आसान है कि पार्टी यहां व्यर्थ में ही अपना समय जाया कर रही है.
पर आम आदमी पार्टी के प्रमुख और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को समझना इतना आसान नहीं है. उनका एक एक कदम में कई चालें होती हैं. जुलाई में ही अरविंद केजरीवाल ने स्पष् कर दिया था कि पार्टी बिहार में अकेले चुनाव लड़ेगी और INDIA ब्लॉक के साथ कोई गठबंधन नहीं करेगी. जाहिर है कि वे बड़ी रणनीति के तहत मैदान में उतर रहे हैं. AAP ने स्टार प्रचारकों की सूची जल्द जारी करने का ऐलान किया है, जिसमें केजरीवाल, संजय सिंह और भगवंत मान शामिल हो सकते हैं.
हिंदी बेल्ट में पैर जमाने के लिए बिहार में एंट्री जरूरी
ये बात अब कोई ढंकी छुपी हुई नहीं है कि अरविंद केजरीवाल की महत्वाकांक्षा आम आदमी पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देना है.जाहिर है कि बिहार का चुनाव इसके लिए महत्वपूर्ण है. दिल्ली और पंजाब में सफलता के बाद, AAP खुद को राष्ट्रीय विकल्प के रूप में स्थापित करना चाहती है. बिहार में 243 सीटों पर स्वतंत्र रूप से लड़ना इस दिशा में एक अहम कदम है. इसका एक और कारण यह भी है कि हिंदी बेल्ट में पहुंच बनाने के लिए बिहार में जगह बनाना बहुत जरूरी है.इसलिए ही AAP का प्राथमिक उद्देश्य बिहार जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना है.पार्टी का मानना है कि बिहार में आधार बनाकर वह भविष्य में अन्य हिंदी पट्टी राज्यों में प्रभाव बढ़ा सकती है.
AAP अपनी ‘काम की राजनीति’ को बिहार में प्रोजेक्ट करना चाहती है, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, मुफ्त बिजली-पानी और भ्रष्टाचार-मुक्त शासन शामिल हैं. अरविंद केजरीवाल ने अपनी जनसभाओं में दिल्ली के स्कूल-हॉस्पिटल मॉडल को बिहार में लागू करने का वादा किया है. यह मॉडल विशेष रूप से शहरी और अर्ध-शहरी मतदाताओं, युवाओं और प्रवासी बिहारियों को आकर्षित करने का लक्ष्य रखता है, जो दिल्ली में AAP के काम से परिचित हैं.
अगले चुनावों के लिए जमीन तैयार करना
बिहार में बेरोजगारी, शिक्षा की कमी और प्रवास जैसे मुद्दे प्रमुख हैं. AAP इन मुद्दों को उठाकर युवाओं और मध्यम वर्ग को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है. पार्टी का दावा है कि पूर्वांचल के बिहारी प्रवासियों ने दिल्ली में AAP को समर्थन दिया, और अब वह बिहार में भी ऐसा ही समर्थन चाहती है.
दिल्ली और पंजाब में सफलता के बाद, AAP खुद को राष्ट्रीय विकल्प के रूप में स्थापित करना चाहती है, इसके लिए जरूरी है कि बिहार जैसे राज्य में जगह बनाना है. हो सकता है कि विधानसभा चुनावों में बिहार में पार्टी को अपेक्षित सफलता न मिले पर अगले शहरी निकायों में चुनाव के लिए बेस जरूर तैयार हो जाएगा. बिहार में 243 सीटों पर स्वतंत्र रूप से लड़ना इस दिशा में एक कदम है. आम आदमी पार्टी गुजरात की तरह पहले बिहार में शहरी स्थानीय निकायों में कुछ सीट जीतकर चर्चा में आ सकती है.
AAP का इस चुनाव में सारी विधानसभा सीटें लड़ने का लक्ष्य बिहार में संगठनात्मक ढांचा मजबूत करना भी है. पहली सूची में 11 उम्मीदवारों (जैसे किशनगंज से आशरफ आलम, बेगूसराय से डॉ. मीरा सिंह) का चयन स्थानीय मुद्दों और विविधता पर आधारित है. दिल्ली और पंजाब में सफलता के बाद, AAP बिहार जैसे बड़े राज्य में राष्ट्रीय विकल्प के रूप में उभरना चाहती है. इस लक्ष्य के लिए संगठन विस्तार महत्वपूर्ण है, क्योंकि बिहार में पार्टी का मौजूदा जमीनी आधार कमजोर है.
AAP का लक्ष्य शहरी युवाओं और प्रवासी बिहारियों को जोड़कर भविष्य के लिए आधार बनाना है. यदि AAP 1-2% वोट शेयर भी हासिल करती है, तो यह संगठन विस्तार के लिए नींव रखेगी.
दिल्ली मॉडल की अपील बिहारियों को कितना अट्रैक्ट करेगी?
आम आदमी पार्टी (AAP) का दिल्ली मॉडल, जो शिक्षा, स्वास्थ्य, मुफ्त बिजली-पानी और भ्रष्टाचार-मुक्त शासन पर आधारित है, बिहार में सीमित लेकिन अपील तो रखता है. बिहार के शहरी और अर्ध-शहरी मतदाता, विशेष रूप से युवा, मध्यम वर्ग और प्रवासी मजदूर, जो दिल्ली में AAP की नीतियों (जैसे मुफ्त बिजली, बेहतर स्कूल, मोहल्ला क्लिनिक) से परिचित हैं, इस मॉडल से आकर्षित हो सकते हैं.
बिहार में बेरोजगारी (14% से अधिक), खराब शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति AAP के वादों को प्रासंगिक बनाती है. हालांकि, बिहार की जातिगत राजनीति (यादव-मुस्लिम, ईबीसी, ऊपरी जातियां) और ग्रामीण मतदाताओं का दबदबा (80% से अधिक) दिल्ली मॉडल की अपील को सीमित करता है. ग्रामीण बिहार में मतदाता जाति, स्थानीय प्रभाव और एनडीए की फ्रीबीज (महिलाओं को 10,000 रुपये, मुफ्त बिजली) से ज्यादा प्रभावित होते हैं.
एनडीए और महागठबंधन में किसे फायदा पहुंचाएगी पार्टी?
AAP को भले ही अधिक सीटें जीतने की उम्मीद न हो, लेकिन वह महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस) के 2-4% वोट काटकर एनडीए को अप्रत्यक्ष लाभ पहुंचा सकती है, खासकर शहरी सीटों पर. यह रणनीति पार्टी को चर्चा में रखने और भविष्य के लिए आधार बनाने में मदद कर सकती है.
AAP का संगठन ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर है, पर पटना, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय जैसे क्षेत्रों में AAP 2-4% वोट शेयर से इनकार नहीं किया जा सकता है. आम आदमी पार्टी यहां ऐसे कैंडिडेट भी दे रही है जो कई सालों से सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय हैं. जाहिर है कि ऐसे लोगों का कुछ अपना वोट बैंक भी है.
पवित्र नगरी अयोध्या एक बार फिर आस्था की ‘रोशनी’ से जगमगाने की तैयारी में है. उत्तर प्रदेश के पर्यटन और संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि दीपोत्सव 2025 अब तक का सबसे भव्य और यादगार आयोजन होना चाहिए.
उन्होंने लखनऊ में एक समीक्षा बैठक की और कहा कि मुख्य कार्यक्रम से पहले 18 अक्टूबर को एक मॉक ड्रिल होगी, ताकि सुरक्षा और अन्य इंतजामों की पूरी जांच हो सके.
दिखेंगे सामाजिक संदेश’
मंत्री ने कहा कि इस बार की भव्य झांकी में सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक संदेश भी झलकने चाहिए जैसे मिशन शक्ति के जरिए महिला सशक्तिकरण और स्वच्छ भारत अभियान का संकल्प. उन्होंने कहा कि दीपोत्सव सिर्फ रोशनी का पर्व नहीं होना चाहिए बल्कि हमारी सामाजिक जागरूकता और एकता का प्रतीक भी बने.
26 लाख दीये, 2100 भक्तों की होगी महाआरती’
अधिकारियों ने बताया कि तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं. इस बार 26 लाख से ज्यादा मिट्टी के दीये जलाए जाएंगे और 2100 भक्त एक विशाल महाआरती करेंगे. इसके साथ ही 1100 ड्रोन का शानदार एरियल शो भी होगा जो मिलकर कई विश्व रिकॉर्ड तोड़ने वाला आयोजन बनेगा.
अयोध्या बनेगी ग्लोबल कल्चरल कैपिटल’
जयवीर सिंह ने बताया कि इस साल का दीपोत्सव ऐसा होगा जिसमें हर किसी की भागीदारी होगी और जो दुनिया भर के लोगों को आकर्षित करेगा. केंद्र सरकार के पर्यटन, संस्कृति और विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधियों के साथ-साथ देश के सभी राज्यों और कई विदेशी मेहमानों को भी आमंत्रित किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अयोध्या अब ग्लोबल आस्था की सांस्कृतिक राजधानी बन चुकी है. दीपोत्सव 2025 सिर्फ भगवान राम के आगमन का उत्सव नहीं होगा बल्कि भारत की एकता, विविधता और मेहमाननवाजी का संदेश भी देगा.
रामकथा पार्क तक आसानी से पहुंच सकेंगे लोग’
जयवीर सह ने ये भी कहा कि रामकथा पार्क तक आम लोगों की पहुंच आसान होनी चाहिए और भीड़ प्रबंधन, रोशनी, सफाई और सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम किए जाएं. साथ ही अंतरराष्ट्रीय रामलीला महोत्सव को भी विश्व स्तर पर प्रचारित करने के निर्देश दिए गए.
कार्यक्रम के तहत देशभर यानी दक्षिण भारत से लेकर हरियाणा तक से नृत्य और संगीत दल बुलाए जा रहे हैं. कुल 10 सांस्कृतिक मंच अयोध्या के अलग-अलग प्रमुख स्थानों पर लगाए जाएंगे जहां भारत की कला और संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी.
इको-फ्रेंडली होगा दीपोत्सव’
पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता दिखाते हुए जयवीर सिंह ने कहा कि दीपोत्सव 2025 पूरी तरह से इको-फ्रेंडली होगा. युवाओं और पर्यटकों के लिए भगवान राम और हनुमान जी की झांकियों वाले सेल्फी पॉइंट बनाए जाएंगे. वहीं सफाई, पानी, रोशनी और सजावट के लिए बड़े स्तर पर तैयारियां चल रही हैं.
इस बार दीपोत्सव में सरयू नदी के 56 घाटों पर 26 लाख दीयों की रौशनी फैलेगी. करीब 33,000 वालंटियर्स दीये जलाने में हिस्सा लेंगे जो हर दीया भक्ति, एकता और उम्मीद का प्रतीक होगा.
आस्था का संगम बनेगा दीपोत्सव 2025′
जयवीर सिंह ने कहा कि दीपोत्सव अब सिर्फ भक्ति का नहीं बल्कि संस्कृति, तकनीक और गर्व का संगम बन चुका है. इस बार इसे और भी भव्य बनाया जा रहा है ताकि हर आगंतुक के लिए यह अविस्मरणीय अनुभव बन जाए. कार्यक्रम में मल्टीमीडिया प्रोजेक्शन मैपिंग शो, 3D होलोग्राफिक लेजर म्यूजिक, ड्रोन डांस शो, ग्रीन आतिशबाजी, हाइड्रोलिक स्क्रीन शो और वॉटर टेबल जैसी कई आकर्षक झलकियां होंगी. साथ ही, 100 से अधिक कलाकार लाइव परफॉर्मेंस देंगे.
वुमेन लीडर पर होगा फोकस’
मुख्य सचिव (पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक कार्य) अमृत अभिजात ने निर्देश दिया कि रामपथ जाने वाले सभी रास्तों को रोशनी और सजावट से चमकाया जाए और पेड़ों को लाइटिंग से सजाया जाए. उन्होंने बताया कि महिला नेतृत्व वाली झांकियों और सरकारी योजनाओं से जुड़े थीमेटिक प्रदर्शन भी शामिल होंगे. बैठक में पर्यटन महानिदेशक राजेश कुमार, विशेष सचिव ईशा प्रिया, ईको टूरिज्म निदेशक प्रखर मिश्रा समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.
पंजाब की सियासत में हलचल तेज हो गई है. अमृतपाल सिंह की पार्टी अकाली दल (वारिस पंजाब दे) ने तरनतारन विधानसभा सीट के उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है. पार्टी ने मनदीप सिंह को मैदान में उतारा है.
इस सीट पर 11 नवंबर को उपचुनाव होना है. तरनतारन की सीट आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक कश्मीर सिंह सोहल के निधन के बाद खाली हुई थी, जिस पर अब उपचुनाव का ऐलान हुआ है.
मनदीप सिंह की उम्मीदवारी को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है, क्योंकि वह संदीप सिंह उर्फ सन्नी के भाई हैं. संदीप वही व्यक्ति हैं जिसने कुछ साल पहले शिवसेना नेता सुधीर सूरी की हत्या की थी. संदीप सिंह ने हाल ही में जेल के अंदर पूर्व पुलिस अधिकारी सुबा सिंह पर भी हमला किया था.
तरनतारन सीट पर बहुकोणीय मुकाबले के आसार
अमृतपाल सिंह की पार्टी का यह कदम पंजाब की राजनीति में एक बड़ा दांव माना जा रहा है. विश्लेषकों का मानना है कि वारिस पंजाब दे इस चुनाव के ज़रिए माझा क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है. तरनतारन सीट पर अब AAP, कांग्रेस, बीजेपी और अकाली दल (वारिस पंजाब दे) के बीच बहुकोणीय मुकाबले के आसार हैं.
11 नवंबर को होगी वोटिंग
चुनाव आयोग ने तरनतारन उपचुनाव के लिए मतदान की तारीख़ 11 नवंबर तय की है, जबकि मतगणना 14 नवंबर को होगी.