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CG: समता एक्सप्रेस में सफर कर रही रायपुर की एक महिला का 9 लाख रुपये की कीमत का लेडिज बैग में रखा Gold necklace चोरी, FIR दर्ज ..

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‘अनामिका ने सामने की सीट पर बैठे यात्रियों से बात की, जिन्होंने बताया कि वे डोंगरगढ़ से जाग रहे थे और इस दौरान किसी को आते-जाते नहीं देखा. ‘

प्रारंभिक जांच में चोरी की घटना नागपुर-गोंदिया रेलखंड के बीच होने की आशंका जताई गई है.

जीआरपी थाना रायपुर ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और जांच के लिए इसे जीआरपी थाना गोंदिया को स्थानांतरित कर दिया गया है. पुलिस अज्ञात चोर की तलाश में जुट गई है.

CG: एनएचएम कर्मचारी संघ का अनिश्चितकालीन आंदोलन आज से, मांगों को लेकर अधिकारियों पर लगाया गुमराह करने का आरोप ..

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CG: शराब घोटाले में आबकारी विभाग के 28 अधिकारियों की जल्द होगी गिरफ्तारी, EOW का कड़ा एक्शन ..

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CG: शराब घोटाले में आबकारी विभाग के 28 अधिकारियों की जल्द होगी गिरफ्तारी, EOW का कड़ा एक्शन ..

रायपुर: शराब घोटाले में आबकारी विभाग के 28 अधिकारियों की जल्द होगी गिरफ्तारी। इस मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल, सेवानिवृत्त IAS अनिल टूटेजा और होटल व्यवसायी अनवर ढेबर समेत 15 लोग पहले से रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं।

प्रदेश के बहुचर्चित 3200 करोड़ रुपए के शराब घोटाले (CG Liquor Scam) में शामिल 28 आबकारी अधिकारियों की गिरफ्तारी अब जल्द तय मानी जा रही है। राज्य आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने चार्जशीट दाखिल करने और राज्य सरकार द्वारा सभी आरोपितों को निलंबित किए जाने के बाद अब गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन अधिकारियों ने गिरफ्तारी की आशंका के चलते पिछले महीने विशेष न्यायालय में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी, जिसमें खुद को निर्दोष बताते हुए पूछताछ में सहयोग देने और स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला दिया गया था। हालांकि, अदालत ने सभी की याचिकाएं खारिज कर दी हैं। इसके बाद अब ईओडब्ल्यू जल्द ही गिरफ्तारी कर पूछताछ के लिए कुछ अधिकारियों को रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है।

इन आबकारी अधिकारियों पर केस दर्ज: पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए शराब घोटाले में ईओडब्ल्यू ने आबकारी अधिकारी प्रमोद नेताम,नीतू नोतानी,एलएस ध्रुव,इकबाल अहमद खान, जनार्दन सिंह कौरव, अरविंद पाटले, दिनकर वासनिक,नोहर ठाकुर,नवीन तोमर,विकास गोस्वामी,रामकृष्ण मिश्रा,मंजूश्री कसेर,विजय सेन,मोहित जायसवाल,गंभीर सिंह नुरूटी, नीतिन खंडुजा, अश्वनी अंनत,अंनत सिंह,सोनल नेताम,गरीब पाल सिंह,सौरभ बक्शी,जेठूराम मंडावी,देवलाल वैद्य, प्रकाश पाल, आशीष कोसम,राजेश जायसवाल समेत अन्य पर केस दर्ज किया है।

लखमा,चैतन्य,टूटेजा,ढेबर समेत 15 जेल में: इस मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा,पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल, सेवानिवृत्त IAS अनिल टूटेजा और होटल व्यवसायी अनवर ढेबर समेत 15 लोग पहले से रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। ईओडब्ल्यू की जांच में अब तक कुल 70 लोगों को आरोपित बनाया गया है,जिसमें आठ डिस्टलरी संचालक भी शामिल हैं। अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है। 28 अधिकारियों की संभावित गिरफ्तारी को लेकर विभागीय और राजनीतिक हलकों में खलबली मची हुई है।

“दुर्ग में 2 सिस्टर की गिरफ्तारी के विरोध में ऑल चर्चेज कमेटी ने खूंटी में निकाला मौन जुलूस”

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“दुर्ग में 2 सिस्टर की गिरफ्तारी के विरोध में ऑल चर्चेज कमेटी ने खूंटी में निकाला मौन जुलूस”

छत्तीसगढ़ के दुर्ग में 2 सिस्टर को गिरफ्तार करने और 3 आदिवासी लड़कियों को प्रताड़ित किये जाने के विरोध में रविवार को खूंटी में ऑल चर्चेज कमेटी ने मौन जुलूस निकाला.

जुलूस में खूंटी, मुरहू, सायको, मारंगहादा, अड़की, कर्रा, रनिया, मेरोमगुटू, तोरपा, रांची, जमशेदपुर, तमाड़ सहित अन्य स्थानों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए.

कचहरी मैदान से हुई जुलूस की शुरुआत जुलूस की शुरुआत कचहरी मैदान में जीईएल चर्च के पादरी ओबेद सोरेन के द्वारा प्रार्थना से की गयी. जुलूस कचहरी मैदान से निकलकर भगत सिंह चौक, डाक बंगला रोड, नेताजी चौक होते हुए लोयोला हॉस्टल मैदान में आकर समाप्त हुआ. इस दौरान सभी हाथों में बैनर और तख्ती लेकर दुर्ग की घटना का विरोध किया.

बिशप जोसेफ संगा ने दिया संबोधन सभा को संबोधित करते हुए बिशप जोसेफ संगा ने कहा कि परमेश्वर ने हमें सेवा के लिए चुना है. इसलिए हम सभी को आपसी भाईचारा बनाकर चलना है. इससे हमारे जीवन में कार्यों के द्वारा शांति बनी रहे. उन्होंने कहा कि जुलूस का उद्देश्य शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बातों को रखना है, ताकि ऐसी घटना आगे नहीं हो. सभा को बिरसा मुंडा, फ्रांसिस जेवियर बोदरा सहित अन्य लोगों ने संबोधित किया.

मौन जुलूस में ये लोग और संस्थाएं हुईं शामिल धन्यवाद ज्ञापन विल्सन बोदरा ने किया. आयोजन में मुख्य रूप से आरसी चर्च के बिशप विनय कंडुलना, ऑल चर्चेज कमेटी के अध्यक्ष जेवियर बोदरा, सचिव अमर पुरती, बसंत आइंद, फादर हीरालाल, पादरी पतरस हुन्नी पुरती, पादरी जेम्स कंडुलना, पादरी मार्षलन तिड़ू, जोहन हेरेंज, मार्षला बारला, मार्टिन नाग, प्रसन्न कुमार देमता, प्रभुसहाय तोपनो सहित विभिन्न महिला समिति, युवा समिति के सदस्य और अन्य उपस्थित रहे.

“सीपी राधाकृष्णन होंगे NDA की ओर से उपराष्ट्रपति के उम्मीदवार, जेपी नड्डा ने किया ऐलान”

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“सीपी राधाकृष्णन होंगे NDA की ओर से उपराष्ट्रपति के उम्मीदवार, जेपी नड्डा ने किया ऐलान”

“सीपी राधाकृष्णन होंगे NDA की ओर से उपराष्ट्रपति के उम्मीदवार, जेपी नड्डा ने किया ऐलान

सीपी राधाकृष्णन एनडीए की ओर से उपराष्ट्रपति के उम्मीदवार होंगे। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने अहम बैठक के बाद रविवार को ऐलान किया।

“पीएम मोदी के नेतृत्‍व में भाजपा संसदीय दल की हो रही बैठक, जल्‍द तय हो सकता है NDA उपराष्‍ट्रपति उम्‍मीदवार”

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“पीएम मोदी के नेतृत्‍व में भाजपा संसदीय दल की हो रही बैठक, जल्‍द तय हो सकता है NDA उपराष्‍ट्रपति उम्‍मीदवार”

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की संसदीय बोर्ड बैठक रविवार को नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में हो रही है। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई प्रमुख नेता उपस्थित रहे।

सूत्रों के अनुसार, इस महत्वपूर्ण बैठक में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के नाम पर चर्चा की जा रही है। यह उम्मीद की जा रही थी कि बैठक में इस पद के लिए सर्वसम्मत से उम्‍मीदवार तक कर दिया जाएगा।

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार “भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक 17 अगस्त 2025 को दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में बुलाई गई। इसमें सभी सदस्यों ने भाग लिया।

इससे पहले, 6 अगस्त को सत्तारूढ़ एनडीए के नेताओं ने एक प्रस्ताव पारित किया था। इसमें सर्वसम्मति से प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का नाम तय करने का अधिकार दिया गया था।

गौरतलब है जगदीप धनखड़ (74 वर्ष) ने उपराष्‍ट्रपति पद से 21 जुलाई 2025 को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे पत्र में कहा था, “स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और चिकित्सीय सलाह का पालन करने के लिए मैं संविधान के अनुच्छेद 67 (ए) के तहत तत्काल प्रभाव से भारत के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे रहा हूं।”

कब होगा उपराष्‍ट्रपति चुनाव? चुनाव आयोग ने उपराष्ट्रपति चुनाव की तारीख 9 सितंबर तय की है। यदि चुनाव होता है, तो मतदान संसद भवन की पहली मंजिल पर सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक संपन्न होगा।

नामांकन की अंतिम तारीख क्‍या है? उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 21 अगस्त है। 22 अगस्त को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 25 अगस्त नाम वापस लेने की अंतिम तारीख है। अब तक तीन नामांकन पत्र दाखिल हुए हैं, लेकिन प्रक्रिया पूरी न होने के कारण वे खारिज कर दिए गए हैं।

कौन हैं उपराष्ट्रपति पद के प्रमुख दावेदार? उपराष्ट्रपति पद के लिए सात प्रमुख दावेदारों के नाम चर्चा में हैं। जिन नामों पर पार्टी विचार-विमर्श किया जा रहा है, इनमें प्रमुख 7 दावेदार हैं।

थावरचंद गहलोत (77), जो वर्तमान में कर्नाटक के राज्यपाल हैं और एक अनुभवी दलित नेता हैं, शामिल हैं। ओम माथुर (73), सिक्किम के राज्यपाल, अपनी मजबूत संगठनात्मक पकड़ और आरएसएस पृष्ठभूमि के लिए जाने जाते हैं। हरिवंश नारायण सिंह, राज्यसभा के उपसभापति, अपनी संतुलित छवि और जेडीयू नेता के रूप में एनडीए में स्वीकार्यता के कारण एक महत्वपूर्ण दावेदार हैं। आचार्य देवव्रत, गुजरात के राज्यपाल, अपनी आरएसएस पृष्ठभूमि और शिक्षा तथा संस्कृति से जुड़ाव के लिए जाने जाते हैं। वी. के. सक्सेना, दिल्ली के उपराज्यपाल, अपने लंबे प्रशासनिक अनुभव और सख्त शैली के लिए पहचाने जाते हैं। मनोज सिन्हा, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल, अनुच्छेद 370 हटने के बाद स्थिरता लाने में अपनी भूमिका और सादगी के लिए प्रसिद्ध हैं। शेषाद्रि चारी, पूर्व आरएसएस प्रचारक और भाजपा के वैचारिक रणनीतिकार हैं।

“मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त का कौन करता है चयन? कितनी मिलती है सैलरी और सुविधाएं”

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“मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त का कौन करता है चयन? कितनी मिलती है सैलरी और सुविधाएं”

भारत में चुनाव आयोग लोकतंत्र की रीढ़ माना जाता है, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए जिम्मेदार होता है। लेकिन विपक्षी पार्टियां चुनाव आयोग की निष्पक्षता और स्वतंत्रता को लेकर एक बार फिर सवाल उठाया है।

कांग्रेस पार्टी समेत अन्‍य विपक्षी पार्टियों ने चुनाव आयोग पर वोट चोरी का आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है। हालांकि 17 अगस्‍त को चुनाव आयोग प्रमुख आयुक्‍त ने प्रेस कान्‍फ्रेंस करके बिहार में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)और विपक्षी पार्टियों के लोकसभा और राज्‍यों के विधानसभा चुनावों में वोट चोरी के आरोपों का करारा जवाब दिया है।

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वोट चोरी की बातें केवल जनता को गुमराह करने की कोशिश है। ये भारत के संविधान का अपमना है। उन्‍होंने ये भी कहा कि चुनाव आयोग और बिहार के 7 करोड़ वोटर किसी भी झूठे आरोप से डरने वाले नहीं हैं।

ये पहली बार नहीं है इससे पहले भी विपक्ष चुनाव आयोग के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त और कार्यप्रणाली पर भी लगातार सवाल उठाता रहा है। आइए जानते हैं कौन मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त की नियुक्ति करता है और इन्‍हें कितनी सैलरी और सुविधाएं मिलती हैं?

कैसे होता है मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त का चयन? भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त का पद अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह लोकसभा, विधानसभा, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनावों में केंद्रीय भूमिका निभाता है।

मुख्य चुनाव आयुक्त का चयन केंद्र सरकार द्वारा लागू 2023 अधिनियम के तहत होता है। इस अधिनियम के अनुसार, एक तीन सदस्यीय समिति होती है जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं। इस समिति में नेता प्रतिपक्ष और कानून मंत्री भी शामिल होते हैं। यह समिति राष्ट्रपति को मुख्य चुनाव आयुक्त के नाम की सिफारिश करती है।

चयन प्रक्रिया में, पहले एक समिति पांच नामों को शॉर्टलिस्ट करती है। इसके बाद, प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और कानून मंत्री वाली तीन सदस्यीय समिति इन शॉर्टलिस्ट किए गए नामों में से एक नाम को अंतिम सिफारिश के लिए राष्ट्रपति के पास भेजती है।

एक बार जब मुख्य चुनाव आयुक्त के नाम की सिफारिश राष्ट्रपति को मिल जाती है, तो राष्ट्रपति उस पर अपनी अंतिम मुहर लगाते हैं। इसके बाद एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाती है। अधिसूचना जारी होने के बाद, नियुक्त चुनाव आयुक्त निर्वाचन आयोग में अपने पद और गोपनीयता की शपथ लेते हैं। यह नियुक्ति पूरी तरह से राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल छह वर्ष का होता है या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले पूरा हो। उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के समकक्ष दर्जा प्राप्त होता है, और उन्हें समान वेतन व भत्ते मिलते हैं।

मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त को कितनी मिलती है सैलरी? भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) का पद सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के समकक्ष होता है, जिसमें वेतन और सुविधाएं भी समान स्तर की मिलती हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त आमतौर पर भारत सरकार के सचिव स्तर के अधिकारी होते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चुनाव आयुक्तों को प्रति माह 3.5 लाख रुपये वेतन मिलता है। इसके अतिरिक्त, उन्हें 34,000 रुपये का मासिक व्यय भत्ता भी मिलता है, जो पूरी तरह से कर-मुक्त है। चुनाव आयुक्तों को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के समान वेतन और दर्जा प्राप्त होता है।

मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त को क्‍या मिलती हैं सुविधाएं? मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त को आवास, सरकारी वाहन, सुरक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी मिलती हैं। इसके अलावा, उन्हें स्वयं, जीवनसाथी और आश्रित परिवार के सदस्यों के लिए साल में तीन लीव ट्रैवल कंसेशन (LTC) की सुविधा भी दी जाती है।

मुख्‍य चुनाव आयुकत का कार्यकाल? मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों का कार्यकाल 6 साल या 65 वर्ष की आयु तक होता है, जो भी पहले पूरा हो। यह पद देश में चुनावों को निष्पक्ष और सुचारू रूप से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

CG: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय विदेश दौरे पर सवाल उठाएं ..

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CG: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय विदेश दौरे पर सवाल उठाएं ..

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय विदेश दौरे पर सवाल उठाएं हैं। उन्होंने कहा, कुछ दिन पहले वित्त मंत्री ओपी चौधरी भी एक हफ्ते के अमेरिका प्रवास पर गये थे।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय विदेश दौरे पर सवाल उठाएं हैं। उन्होंने कहा, कुछ दिन पहले वित्त मंत्री ओपी चौधरी भी एक हफ्ते के अमेरिका प्रवास पर गये थे। उनके वहां जाने का प्रदेश को क्या फायदा हुआ, आज तक उन्होंने प्रदेश की जनता को नहीं बताया।

उपमुख्यमंत्री अरुण साव भी विदेश होकर आए हैं। अब मुख्यमंत्री जा रहे उम्मीद है कि उनके विदेश यात्रा का प्रदेश को कुछ फायदा मिलेगा, क्योंकि इन विदेश यात्राओं पर प्रदेश की जनता की गाढ़ी कमाई का लाखों रुपए खर्च होता है।

बैज ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए आरोप लगाया कि राज्य के आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन पर अधिकार को बेदखल करने का काम भाजपा सरकार कर रही है। प्रदेश के अनेक जिलों के आदिवासियों के द्वारा धारित जमीनों के सरकारी रेकार्ड गायब किए जा रहे हैं, ताकि आदिवासियों के जमीन पर दावों को खारिज किया जा सके। हमारे नेता राहुल गांधी ने ‘कागज मिटाओ, अधिकार चुराओ’ के टैग के साथ आदिवासियों के पट्टे गायब करने का आंकड़ा जारी किया है।

CG: रायगढ़ जिले में कुल 2709 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन सभी केंद्रों के लिए 10 महिला स्व-सहायता समूहों का चयन किया गया है।

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CG: रायगढ़ जिले में कुल 2709 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन सभी केंद्रों के लिए 10 महिला स्व-सहायता समूहों का चयन किया गया है।

रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को मूर्त रूप देते हुए महिला स्व-सहायता समूहों को पूरक पोषण आहार “रेडी-टू-ईट” निर्माण का कार्य पुनः सौंपा है। इस महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत रायगढ़ जिले से हुई है। हाल ही में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रायगढ़ की 10 महिला स्व-सहायता समूहों को अनुबंध पत्र प्रदान किए थे। इसके बाद मशीन इंस्टॉलेशन का कार्य तेजी से किया गया और अब रायगढ़ जिले के ग्राम पंचायत कोतरलिया से “रेडी-टू-ईट” उत्पादन का शुभारंभ हो चुका है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह पहल महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही आंगनबाड़ी के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण पौष्टिक आहार उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि देशभर में 3 करोड़ “लखपति दीदी” बनाने का लक्ष्य रखा गया है और छत्तीसगढ़ इस दिशा में तेज गति से कार्य कर रहा है। रायगढ़ इस अभियान में अग्रणी जिला बना है।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने ग्राम कोतरलिया में “रेडी-टू-ईट” निर्माण इकाई का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने स्वयं मशीन चलाकर निर्माण प्रक्रिया का निरीक्षण किया और महिलाओं को गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए। वित्त मंत्री ने कहा कि रायगढ़ से प्रारंभ हुई यह पहल शीघ्र ही प्रदेश के सभी जिलों में लागू होगी और यह मॉडल पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनेगा।

उल्लेखनीय है कि रायगढ़ जिले में कुल 2709 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन सभी केंद्रों के लिए 10 महिला स्व-सहायता समूहों का चयन किया गया है। इन समूहों को प्रधानमंत्री फॉर्मेलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइज़ (PMFME) योजना के अंतर्गत पूंजीगत सब्सिडी भी प्रदान की जा रही है। रायगढ़ जिले की परियोजनाओं—रायगढ़ शहरी, रायगढ़ ग्रामीण, पुसौर, खरसिया, घरघोड़ा, तमनार, लैलूंगा, मुकड़ेगा, धरमजयगढ़ एवं कापू के अंतर्गत चयनित समूह जल्द ही “रेडी-टू-ईट” उत्पादन प्रारंभ करेंगे। फिलहाल इसकी शुरुआत कोतरलिया से हो चुकी है।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण और कुपोषण मुक्ति के इस मिशन को प्रथम चरण में प्रदेश के 6 जिलों—बस्तर, दंतेवाड़ा, बलौदाबाजार, कोरबा, रायगढ़ एवं सूरजपुर में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जा रहा है। वहीं रायगढ़ प्रदेश का पहला जिला बन गया है, जहां महिला समूहों ने “रेडी-टू-ईट” उत्पादन प्रारंभ किया है। यह पहल महिलाओं की आर्थिक समृद्धि और बच्चों के स्वास्थ्य—दोनों को नई दिशा प्रदान करेगी।

“8वें वेतन आयोग पर लेटेस्ट अपडेट, करोड़ों केंद्रीय कर्मचारियों के लिए झटका, कब तक होगा लागू?”

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“8वें वेतन आयोग पर लेटेस्ट अपडेट, करोड़ों केंद्रीय कर्मचारियों के लिए झटका, कब तक होगा लागू?”

केंद्र सरकार द्वारा आठवें वेतन आयोग के गठन की घोषणा को लगभग सात महीने हो चुके हैं। हालांकि, सरकार अभी तक इसके कार्यान्वयन की दिशा में आगे नहीं बढ़ पाई है। 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों में उत्सुकता बनी हुई है, लेकिन लेटेस्ट रिपोर्ट्स के अनुसार इसका क्रियान्वयन 2028 तक टल सकता है।

अगर पिछले रुझानों पर नजर डालें तो हर वेतन आयोग लगभग 10 साल के अंतराल पर लागू हुआ है। 6वां वेतन आयोग 2006 में लागू हुआ था और 7वां वेतन आयोग 2016 में, इसलिए संभावना है कि 8वां वेतन आयोग भी इसी पैटर्न के तहत 2026 से 2028 के बीच लागू हो। फिलहाल कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (DA) बढ़ोतरी और अन्य भत्तों के जरिए राहत मिल रही है, लेकिन पूरी वेतन संरचना में बदलाव के लिए उन्हें कुछ और साल इंतजार करना पड़ सकता है।

क्या है डिटेल बता दें कि सात महीने बीत जाने के बावजूद, सदस्यों और अध्यक्ष की नियुक्ति अभी भी लंबित है। 8वें वेतन आयोग का मुख्य उद्देश्य महंगाई के असर को ध्यान में रखते हुए कर्मचारियों की आय में सुधार करना होगा। इस आयोग के तहत बेसिक सैलरी, ग्रेड पे, भत्तों और पेंशन संरचना में बदलाव किए जाने की संभावना रहती है। कर्मचारियों का मानना है कि महंगाई की दर और खर्चे के बढ़ने के हिसाब से मौजूदा वेतन संरचना अपर्याप्त है, इसलिए नई सैलरी स्ट्रक्चर की जरूरत महसूस की जा रही है। आयोग का गठन होने के बाद विशेषज्ञ कर्मचारी संगठनों और सरकार से चर्चा कर सिफारिशें पेश करेंगे। हालांकि, अभी इस संबंध में सरकार की ओर से कोई आधिकारिक टाइमलाइन सामने नहीं आई है।

आर्थिक परिस्थितियों, सरकारी राजस्व और बजटीय दबावों को देखते हुए 8वें वेतन आयोग के क्रियान्वयन में देरी हो सकती है। अगर इसे 2028 तक लागू किया जाता है, तो कर्मचारियों को तब तक महंगाई भत्ता (DA hike) और अन्य राहत उपायों के सहारे ही संतुलन बनाना पड़ेगा। ऐसे में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को कुछ और वर्षों तक इंतजार करना पड़ सकता है।

8वें वेतन आयोग में अब तक के डेवलपमेंट बता दें कि केंद्र ने इस वर्ष 16 जनवरी को 8वें वेतन आयोग की घोषणा की। राष्ट्रीय संयुक्त सलाहकार परिषद (एनसी-जेसीएम) के कर्मचारी पक्ष ने कैबिनेट सचिव को एक मसौदा प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसमें उनकी प्रमुख मांगें सूचीबद्ध थीं। एनसी-जेसीएम सरकार और उसके कर्मचारियों के बीच संवाद का एक मंच है, विशेष रूप से साझा हित और कर्मचारी कल्याण के मामलों पर। तब से, 8वें वेतन आयोग पर अधिक प्रगति नहीं देखी गई है। वर्तमान गति को देखते हुए, और पिछले वेतन आयोग से तुलना करने पर, नए वेतन आयोग की सिफारिशें 2028 की शुरुआत तक ही लागू हो पाएंगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि 7वें वेतन आयोग के मामले में, आधिकारिक अधिसूचना की तारीख से लेकर कार्यान्वयन की तारीख तक 27 महीने लग गए थे। इसलिए, यह मानते हुए कि सरकार इस वर्ष अगस्त में 8वें वेतन आयोग को औपचारिक रूप से अधिसूचित करती है, इसकी सिफारिशें वास्तविक रूप से जनवरी 2028 से लागू हो सकती हैं। हालांकि, यह आवश्यक नहीं है कि 8वां वेतन आयोग 7वें वेतन आयोग के समान समय-सीमा का पालन करेगा। सिद्धांततः, नए पैनल की सिफारिशों को रिकॉर्ड समय में लागू किया जा सकता है।