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बांग्लादेश की हार के साथ ही एशिया कप 2025 का फाइनल तय हो गया है, 28 सितंबर, रविवार को खिताबी मुकाबले में भारत और पाकिस्तान आमने-सामने…

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बांग्लादेश की हार के साथ ही एशिया कप 2025 का फाइनल तय हो गया है। 28 सितंबर, रविवार को खिताबी मुकाबले में भारत और पाकिस्तान आमने-सामने होंगे। एशिया कप के 41 साल के इतिहास में यह पहली बार होगा जब दोनों टीमें फाइनल में भिड़ेंगी।

मौजूदा टूर्नामेंट में दोनों की टक्कर दो बार हुई और हर बार भारत ने पाकिस्तान को आसानी से मात दी।

इस हाई-वोल्टेज मुकाबले पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। इस बीच पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और दिग्गज गेंदबाज वसीम अकरम ने अपनी टीम को खास सलाह दी है। उन्होंने कहा: ‘फाइनल भारत और पाकिस्तान के बीच खेला जाएगा। भारत निश्चित रूप से मजबूत दावेदार है, लेकिन क्रिकेट में कुछ भी हो सकता है। पाकिस्तान को आत्मविश्वास बनाए रखना होगा और समझदारी से खेलना होगा। अगर हमारी टीम शुरुआती विकेट निकाल लेती है, तो भारत को दबाव में लाया जा सकता है। उम्मीद है कि आखिरकार बेहतरीन टीम ही खिताब जीतेगी।’

हालांकि पाकिस्तान के लिए यह चुनौती आसान नहीं होगी। भारतीय टीम शानदार फॉर्म में है। टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन अभिषेक शर्मा ने बनाए हैं, जबकि कुलदीप यादव सबसे सफल गेंदबाज साबित हुए हैं।

दूसरी ओर, पाकिस्तान से हार के बाद बांग्लादेश के कार्यवाहक कप्तान जाकिर अली ने टीम की नाकामी का ठीकरा बल्लेबाजी पर फोड़ा। उन्होंने कहा, ‘हम पिछले दो मैचों में बल्लेबाजी की वजह से हारे। गेंदबाजों ने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन बल्लेबाज उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए। मैंने कप्तानी और जिम्मेदारी निभाने की कोशिश की, लेकिन मौकों का फायदा नहीं उठा सके।’

CG: रायपुर प्रदेश में बीएड, बीएबीएड-बीएससी बीएड और डीएलएड में प्रवेश के लिए प्रथम चरण की तीसरी सूची जारी…

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B.Ed Admission 2025: रायपुर प्रदेश में बीएड, बीएबीएड-बीएससी बीएड और डीएलएड में प्रवेश के लिए प्रथम चरण की काउंसङ्क्षलग के तहत तीसरी सूची जारी कर दी गई है।

छत्तीसगढ़ के रायपुर प्रदेश में बीएड, बीएबीएड-बीएससी बीएड और डीएलएड में प्रवेश के लिए प्रथम चरण की काउंसङ्क्षलग के तहत तीसरी सूची जारी कर दी गई है। सूची जारी होने के बाद प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हो गई है। दो राउंड पूरे होने के बाद अभी तक बीएड की कुल 14400 सीटों में से लगभग 7900 सीटों पर प्रवेश हुए हैं। अभी भी बड़ी संख्या में प्रवेश बाकी है।

एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट प्रोफेशनल उनएडेड कॉलेजेस आफ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने बताया कि इस साल बीएड कोर्स में प्रवेश लेने के लिए छात्र-छात्राओं ने रुचि कम दिखाई है। काउन्सलिंग में भी बहुत कम स्टूडेंट्स हिस्सा ले रहे हैं। प्राइमरी स्कूलों में डीएलएड की अनिवार्यता के बाद से बीएड पास अभ्यर्थियों के लिए नौकरी के मौके कम हो गए हैं।

अभी काफी सारे पोस्ट में भर्ती भी होगी जिसके कारण बीएड में रुझान कम दिख रहा है। स्टूडेंट्स के रुझान को देखा जाए तो इस साल लगभग 2000 सीटें खाली रह सकती हैं। दो राउंड के बाद 6940 खाली सीटों पर सिर्फ 3354 ने विकल्प चुने और 2586 सीटों पर कोई विद्यार्थी नहीं है।

राज्य के बीएड कॉलेजों में सीटें ही नहीं भर पा रही हैं। लगभग 69 कॉलेजों में से 42 कॉलेजों में 50 प्रतिशत भर्ती भी नहीं हो पाई है। इसके साथ ही अलॉटमेंट की संख्या में भी बहुत कमी है। ऐसा इसलिए क्योंकि कैंडिडेट्स की संख्या बहुत कम है। जिसके कारण प्रवेश कम हो रहे हैं और अलॉटमेंट में भी कमी देखने को मिल रही है।

पहले चरण की काउन्सलिंग पूरी होने के बाद द्वितीय चरण की काउन्सलिंग के फार्म 1 अक्टूबर से 5 अक्टूबर तक भरे जाएंगे। प्रथम सूची दावा आपत्ति के लिए 9 अक्टूबर को जारी की जाएगी। उसके बाद फाइनल सूची 13 अक्टूबर को जारी होगी। इसमें प्रवेश 16 अक्टूबर तक लेने होंगे।

फिर रिक्त सीटों की जानकारी 17 अक्टूबर को जारी की जाएगी। दूसरी सूची दावा आपत्ति के लिए 23 अक्टूबर को और फाइनल सूची 24 अक्टूबर को जारी होगी। इसमें प्रवेश 28 अक्टूबर तक लेने होंगे। तीसरी सूची 31 अक्टूबर को जारी होगी। उसके बाद रिक्त सीटों की जानकारी 7 नवंबर को जारी की जाएगी।

CG: मुख्यमंत्री की पसंद पर विकासशील 30 को मुख्य सचिव पद की जिम्मेदारी दी गई। लगभग 4 साल तक वे प्रदेश प्रशासन संभालेंगे।

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भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) 1994 बैच के अफसर विकासशील छत्तीसगढ़ के 13वें मुख्य सचिव होंगे। सामान्य प्रशासन विभाग ने गुरुवार को इसका आदेश जारी कर दिया है। आदेश के मुताबिक वर्तमान मुख्य सचिव अमिताभ जैन 30 सितम्बर को सेवानिवृत्त होंगे। इसके बाद जैन शाम को औपचारिक तौर पर विकास शील को पदभार सौंप देंगे।

बताया जाता है कि विकास शील को मुख्यमंत्री की पसंद से मुख्य सचिव बनाया जा रहा है। बता दें कि विकासशील वर्ष 2018 से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं। जनवरी 2024 से एशियन डेवलपमेंट बैंक में कार्यकारी निदेशक के सलाहकार पद पर तैनात थे। केंद्र सरकार ने उन्हें वापस बुलाया गया और उनकी प्रतिनियुक्ति समाप्त की गई। इसके बाद ही उनके मुख्य सचिव बनाने का रास्ता साफ हुआ।

वे उत्तरप्रदेश के मूल निवासी हैं। उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से बीई करने के बाद एमई भी इलेक्ट्रिकल किया है। विकास शील ने 4 सितंबर 1994 को आईएएस की सर्विस ज्वॉइन की थी। पहले उनका कैडर मध्य प्रदेश था। पृथक छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ कैडर चुन लिया। उन्होंने छत्तीसगढ़ में कोरिया, बिलासपुर और रायपुर जिलों के कलेक्टर के रूप में सेवा दी।

इसके अलावा स्कूली शिक्षा, खाद्य विभाग, सामान्य प्रशासन विभाग और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली है। उनकी पत्नी निधि छिब्बर भी छत्तीसगढ़ कैडर की आईएएस हैं। नए मुख्य सचिव विकास शील का जन्म जून 1969 का है। उनके 60 साल जून 2029 में पूरा होगा। इस हिसाब से वे पौने चार साल मुख्य सचिव की जिम्मेदारी निभा सकते हैं। बता दें कि वर्तमान मुख्य सचिव अमिताभ जैन छत्तीसगढ़ में सबसे लंबे समय तक रहने वाले मुख्य सचिव है।

CG: पेंशनरों को DR का इंतजार, महासंघ ने सरकार से की त्वरित कार्रवाई की मांग…

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कर्मचारियों के महंगाई भत्ता (डीए) के आदेश 25 अगस्त 2025 से जारी होने के एक माह बाद भी डीआर के आदेश जारी नहीं होने पर भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ ने रोष जाहिर किया है।

छत्तीसगढ़ के रायपुर प्रदेश में पेंशनरों के लिए जनवरी 25 से लंबित महंगाई राहत (डीआर) के आदेश आज तक जारी नहीं किए गए। कर्मचारियों के महंगाई भत्ता (डीए) के आदेश 25 अगस्त 2025 से जारी होने के एक माह बाद भी डीआर के आदेश जारी नहीं होने पर भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ ने रोष जाहिर किया है।

महासंघ ने कहा है कि पहले राज्य में कर्मचारियों के आदेश के साथ पेंशनरों के डीआर के आदेश को भी शामिल कर जारी किए जाते रहे हैं, लेकिन सातवां वेतनमान लागू होने के बाद से उसी दिन पृथक से पेंशनरों के लिए डीआर के आदेश जारी किए जाते रहे हैं। 2018 से कुछ दिनों के बाद विलंब से वित्त विभाग से आदेश जारी होते रहे हैं।

यह पहली बार हो रहा है, जब प्रदेश में कर्मचारियों के आदेश के बाद एक महीने बाद भी पेंशनरों के लिए डीआर के आदेश जारी नहीं हुए। ऐसा करके वित्त विभाग छत्तीसगढ़ ने विलंब करने में एक नया इतिहास रच दिया है। महासंघ ने पेंशनरों और परिवार पेंशनरों के हित में जनवरी से 2 प्रतिशत की किस्त स्वीकृत कर आदेश जारी करने के लिए वित्त विभाग के अधिकारियों को निर्देशित कर मोदी की गारंटी को पूरा करने की मांग की है।

 

बस 144 दिनों में शुरू हो जाएगी सीबीएसई 10वीं की परीक्षा, cbse.gov.in पर आ गई डेटशीट

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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 10वीं क्लास की परीक्षाओं का टेंटेटिव शेड्यूल जारी कर दिया है. सीबीएसई बोर्ड 10वीं परीक्षा 17 फरवरी 2026 से शुरू होने की उम्मीद है. सीबीएसई 10वीं परीक्षा 2026 की पूरी डेटशीट ऑफिशियल वेबसाइट cbse.gov.in पर चेक कर सकते हैं. सीबीएसई बोर्ड 10वीं परीक्षा 2026 डेटशीट में कुछ भी बदलाव होने पर इसकी जानकारी दी जाएगी. हालांकि, सीबीएसई ने स्पष्ट कर दिया है कि इसे फाइनल शेड्यूल न माना जाए.
सीबीएसई बोर्ड 10वीं परीक्षा 2026 की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स डेटशीट के हिसाब से रिवीजन का प्लान बना सकते हैं. इससे वे हर विषय को समय दे पाएंगे. सीबीएसई बोर्ड परीक्षा 2026 का फाइनल रिवीजन करने से पहले सिलेबस जरूर चेक कर लें. इससे कोई भी टॉपिक मिस नहीं होगा. इस डेटशीट के अनुसार, सीबीएसई बोर्ड 10वीं की परीक्षा 09 मार्च 2026 को खत्म होगी. सीबीएसई बोर्ड 10वीं परीक्षा 2026 की तैयारी के लिए स्टूडेंट्स के पास फिलहाल 144 दिनों का वक्त है.
CBSE 10th Exam 2026 Date Sheet: 5 महीने में पूरी हो जाएगी तैयारी
सीबीएसई बोर्ड 10वीं परीक्षा 2026 का पहला पेपर मैथ्स निर्धारित किया गया है. 17 फरवरी 2026 को मैथ बेसिक और मैथ स्टैंडर्ड की परीक्षा होगी. स्टूडेंट्स ने जो भी विषय ऑप्ट किया है, वे उसकी तैयारी शुरू कर सकते हैं. इसके बाद अगले मुख्य विषय की परीक्षा 21 फरवरी 2026 को होगी. स्टूडेंट्स के पास बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए लगभग 5 महीने हैं. इस ड्यूरेशन में हर विषय की तैयारी और उसका रिवीजन अच्छी तरह से किया जा सकता है.

सीबीएसई बोर्ड क्लास 10 डेटशीट 2026 देखकर उसी हिसाब से अपना स्टडी प्लान बना लें. आप नीचे हर विषय की टेंटेटिव डेट चेक कर सकते हैं-
परीक्षा की तारीख (संभावित) विषय
17 फरवरी 2026
मैथ बेसिक
मैथ स्टैंडर्ड
18 फरवरी 2026
रिटेल
सिक्योरिटी
ऑटोमोटिव
इंट्रोडक्शन टू फाइनेंशियल मार्केट्स
इंट्रोडक्शन टू टूरिज्म
एग्रिकल्चर
फूड प्रोडक्शन
फ्रंट ऑफिस ऑपरेशंस
बैंकिंग एंड इंश्योरेंस
हेल्थ केयर
अपैरेल
मल्टी मीडिया
डेटा साइंस
इलेक्ट्रॉनिक्स एंड हार्डवेयर
फाउंडेशन स्किल फॉर साइंसेस
डिजाइन थिंकिंग एंड इनोवेशन
20 फरवरी 2026
ब्यूटी एंड वेलनेस
मार्केटिंग एंड सेल्स
मल्टी स्किल फाउंडेशन कोर्स
फिजिकल एक्टिविटी ट्रेनर
21 फरवरी 2026
इंग्लिश (कम्युनिकेटिव)
इंग्लिश (लैंग्वेज एंड लिटरेचर)
23 फरवरी 2026
फ्रेंच
24 फरवरी 2026
उर्दू कोर्स ए
पंजाबी
बंगाली
तमिल
मराठी
गुजराती
मणिपुरी
तेलुगु-तेलंगाना
25 फरवरी 2026
साइंस
26 फरवरी 2026
होमसाइंस
27 फरवरी 2026
कंप्यूटर एप्लिकेशंस
इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
28 फरवरी 2026
संस्कृत (कम्युनिकेटिव)
संस्कृत
RAI
गुरुंग
तमांग
शेर्पा
उर्दू कोर्स- बी
02 मार्च 2026
हिंदी कोर्स – ए
हिंदी कोर्स – बी
03 मार्च 2026
तिब्बती
जर्मन
नेशनल कैडेट कॉर्प्स
Bhoti
बोडो
Tangkhul
जापानी
भूटिया
स्पैनिश
कश्मीरी
मीजो
Bahasa Melayu
एलीमेंट्स ऑफ बिजनेस
एलीमेंट्स ऑफ बुक कीपिंग एंड अकाउंटेंसी
05 मार्च 2026
पेंटिंग
06 मार्च 2026
सिंधी
मलयालम
उड़िया
असमिया
कन्नड़
कोकबोरोक
07 मार्च 2026
सोशल साइंस
09 मार्च 2026
तेलुगु
अरबी
रशियन
पारसी
नेपाली
लिंबू
लेपचा
कार्नैटिक म्यूज़िक (वोकल)
कार्नैटिक म्यूज़िक MEL INS.
कार्नैटिक म्यूज़िक PER. INS
हिंदुस्तानी म्यूजिक वोकल
हिंदुस्तानी म्यूजिक (MEL INS)
हिंदुस्तानी म्यूजिक (PER INS)
थाई

लेह में Gen-Z के विरोध के बाद लगा कर्फ्यू, CRPF की 8 कंपनियां तैनात

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केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा की मांग उठ रही है. बुधवार को शुरू हुआ आंदोलन अचानक से हिंसा, आगजनी और झड़प में बदल गया. इसमें 4 लोगों की मौत हो गई और 90 के करीब लोग घायल हो गई. लद्दाख में शांति बहाल के लिए पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने लेह शहर में कर्फ्यू सख्ती से लागू कर दिया. लेह एपेक्स बॉडी (लैब) द्वारा लद्दाख के लिए छठी अनुसूची के विस्तार और राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर बुधवार को बुलाए गए बंद के दौरान हुई हिंसा के सिलसिले में अब तक कम से कम 50 लोगों को हिरासत में लिया गया है.
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि, ‘कर्फ्यू वाले इलाकों में स्थिति नियंत्रण में है. कहीं से भी किसी घटना की सूचना नहीं है.’ वर्तमान स्थिति को देखते हुए लेह के जिला मजिस्ट्रेट रोमिल सिंह डोनक ने शुक्रवार से दो दिन के लिए सभी सरकारी और निजी स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों को बंद करने का आदेश दिया है. जिलाधिकारी ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र भी बंद रहेंगे.

हड़ताल हिंसा बढ़ने के कारण जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपनी 14 दिन की भूख हड़ताल को बीच में ही खत्म कर दिया. उन्होंने हिंसा की निंदा की. वांगचुक ने कहा, ‘यह लद्दाख के लिए सबसे दुखद दिन है… पिछले पांच सालों से हम जिस रास्ते पर चल रहे थे, वह शांतिपूर्ण था.’ उन्होंने युवाओं से अपील की कि ‘हिंसा तुरंत बंद करें क्योंकि यह हमारे आंदोलन को नुकसान पहुंचाती है.’
वांगचुक पर सरकार का आरोप

केंद्र सरकार ने इस अशांति के लिए वांगचुक को ही जिम्मेदार ठहराया और आरोप लगाया कि यह भीड़ द्वारा की गई हिंसा उनके ‘भड़काऊ बयानों’ से प्रेरित थी. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गुरुवार को लद्दाख में संवैधानिक सुरक्षा की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. मंत्रालय ने कहा कि पुलिस विदेशी तत्वों की संभावित भागीदारी की जांच कर रही है क्योंकि घायलों में से तीन नेपाली नागरिक थे. वहीं, वांगचुक ने गृह मंत्रालय के आरोपों को बलि का बकरा बनाने की रणनीति बताया. उनका कहना है कि सरकार का उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र की मूल समस्याओं से निपटने को टालना है.

अमेरिकी F-104 पर पाक ने दिखाई अकड़, तो MiG-21 ने दिखाया असली दम

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करीब 62 साल पहले की बात है, जब पाकिस्तान को अमेरिका से मिला F-104 स्टारफाइटर उसका घमंड का सबब बन गया था. पाकिस्तान इस फाइटर जेट के दम पर भारत को आंखें दिखाने लगा था. लेकिन जब भारत ने अमेरिका से F-104 की बात की, तो अमेरिका ने नाक-भौं सिकोड़ ली. फिर भारत ने ऐसा आसमान का ‘सिकंदर’ खोज निकाला, जिसने अपनी ताकत और चपलता से न सिर्फ पाकिस्तान का गुरूर तोड़ा, बल्कि दुनिया को दिखा दिया कि असली ताकत क्या होती है.
जी हां, हम बात कर रहे हैं भारत के लेजेंडरी सुपरसोनिक फाइटर जेट मिग-21की, जिसने छह दशकों तक आसमान में तिरंगे का परचम लहराया. अब आसमान का यह सिकंदर अपनी आखिरी उड़ान की तैयारी में है, क्योंकि भारतीय वायुसेना अपने आखिरी मिग-21 स्क्वाड्रन को आज यानी 26 सितंबर 2025 को रिटायर करने जा रही है. आइए, इस विदाई के इस मौके पर जानते हैं कि कैसे मिग-21 ने दुश्मनों को धूल चटाई और भारत का नाम रौशन किया.
‘फिशबेड’ जो बना आसमान का बादशाह
1960 के दशक में जब मिग-21 भारतीय वायुसेना में शामिल हुआ, तो ये सोवियत यूनियन (आज का रूस) का बनाया फाइटर जेट एकदम सुपरस्टार बन गया. नाटो ने इसे ‘फिशबेड’ का नाम दिया था, लेकिन भारत के लिए ये था हमारा ‘सिकंदर’. छोटा, हल्का, और मैक 2 की रफ्तार से उड़ने वाला ये जेट उस जमाने का रॉकस्टार था. इसकी खासियत थी इसकी सादगी और ताकत. इसे उड़ाना आसान था, मेंटेनेंस सस्ता था और युद्ध में ये दुश्मन के लिए काल बन जाता था. 1963 में भारत ने इसे अपनी वायुसेना में शामिल किया और फिर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने इसे लाइसेंस के तहत बनाना शुरू किया. बस, यहीं से मिग-21 की कहानी भारत में हिट हो गई.

फुस्‍स निकला पाकिस्तान का F-104 स्‍टारफाइटर
पाकिस्तान को अमेरिका से मिला F-104 स्टारफाइटर उस वक्त बहुत हाइप में था. इसे ‘मिसाइल विद ए मैन’ कहकर प्रचारित किया गया था. तेज रफ्तार तो थी, लेकिन इसकी डिजाइन में वो बात नहीं थी. F-104 के पतले, सीधे पंख इसे स्पीड तो देते थे, लेकिन हवा में अठखेलियां करने और टर्न लेने में ये मिग-21 से कोसों पीछे था. 1971 के भारत-पाक युद्ध में मिग-21 ने F-104 को ऐसा सबक सिखाया कि पाकिस्तान की सारी हेकड़ी निकल गई.

मिग-21 ने अपनी 23एमएम मिसाइल से चार F-104 को धूल चटा दी. पूरी दुनिया में F-104 को ‘द विडोमेकर’ कहा जाने लगा, क्योंकि ये जेट क्रैश होने के लिए कुख्यात हो गया था. युद्ध के बाद पाकिस्तान ने अपने सारे F-104 रिटायर कर दिए, क्योंकि वो मिग-21 की चपलता, बेहतर टर्न रेट और आसान मेंटेनेंस के सामने टिक ही नहीं पाए.
सस्ता, मस्त, ताकतवर और मस्तमौला था अपना मिग-21
मिग-21 की सबसे बड़ी खूबी थी इसकी किफायती कीमत और आसान रखरखाव. जहां F-104 को चलाने के लिए भारी-भरकम इन्फ्रास्ट्रक्चर चाहिए था, वहीं मिग-21 को कम संसाधनों में भी ऑपरेट किया जा सकता था. इसका ट्यूमांस्की R-25 इंजन इतना दमदार था कि कम ऊंचाई पर 97.4 किलोन्यूटन की ताकत देता था. मिग-21 की डेल्टा विंग डिजाइन इसे तेज उड़ान और फुर्तीले टर्न की ताकत देती थी. यही वजह थी कि 1971 के युद्ध में मिग-21 ने न सिर्फ F-104 को हराया, बल्कि बांग्लादेश की आजादी में भी बड़ा रोल अदा किया.
ढाका के गवर्नर हाउस पर मिग-21 की रॉकेट स्ट्राइक ने पाकिस्तानी नेतृत्व को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया. इतना ही नहीं, 1999 के करगिल युद्ध और 2019 के बालाकोट हमले में भी मिग-21 ने अपनी ताकत दिखाई. बालाकोट में तो मिग-21 ने पाकिस्तान के F-16 को भी चित कर दिया था.
क्यों है मिग-21 इतना खास?
मिग-21 सिर्फ एक फाइटर जेट नहीं, बल्कि भारत की वायुसेना का गौरव था. इसने न सिर्फ युद्ध के मैदान में कमाल दिखाया, बल्कि भारत को आत्मनिर्भरता की राह पर भी आगे बढ़ाया. एचएएल ने इसे देश में बनाकर दिखाया कि भारत किसी से कम नहीं. इसकी सादगी, ताकत और फुर्ती ने इसे दुनिया के बेस्ट फाइटर जेट्स में शुमार किया.
लेकिन अब वक्त बदल रहा है. मिग-21 का जमाना धीरे-धीरे खत्म हो रहा है. भारतीय वायुसेना अब राफेल, तेजस और सु-30 जैसे आधुनिक जेट्स की तरफ बढ़ रही है. मिग-21 का आखिरी स्क्वाड्रन आज यानी 26 सितंबर 2025 रिटायर होने वाला है. लेकिन इस जटायु की कहानी हमेशा भारतीय वायुसेना के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखी जाएगी.

देशभर में बढ़ी लेकिन दिल्‍ली में घट गई वाहनों की संख्‍या, 7 साल में 40 फीसदी गिरावट, अब 1000 लोगों पर कितनी कार

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देश के अन्‍य छोटे-बड़े शहरों में जहां वाहनों की संख्‍या लगातार बढ़ रही है, वहीं राजधानी दिल्‍ली में इसकी संख्‍या में बड़ी गिरावट आई है. दिल्ली में प्रति 1,000 व्यक्तियों पर वाहनों की संख्या 2015-16 के 530 से घटकर 2023-24 में 373 रह गई. इस दौरान सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आई और यह साल 2015 के 8,085 से घटकर साल 2022 में 5,560 रह गईं. आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय ने अपने हालिया रिपोर्ट में कहा है कि बेहतर सार्वजनिक सुविधाओं की वजह से वाहनों की संख्‍या घटाने में मदद मिली है.
निदेशालय की ओर से सतत विकास लक्ष्यों की स्थिति पर हाल ही में जारी रिपोर्ट से पता चलता है कि डीटीसी और क्लस्टर बसों का बेड़ा 2015-16 के 5,842 से बढ़कर 2023-24 में 7,485 हो गया. हालांकि, इसी अवधि में औसत दैनिक सवारियों की संख्या 45.9 लाख से घटकर 42.4 लाख रह गई. दिल्ली मेट्रो में औसत दैनिक यात्री संख्या 2015-16 के 26.2 लाख से बढ़कर 2023-24 में 57.8 लाख हो गई. वाहनों की संख्‍या घटाने में सबसे अहम भूमिका मेट्रो की ही रही है.

आधी आबादी तक सार्वजनिक परिवहन की सुविधा
रिपोर्ट के अनुसार, 2015-16 में 42.95 प्रतिशत आबादी की पहुंच सार्वजनिक परिवहन की सुविधा तक थी, लेकिन 2022-23 में यह आंकड़ा घटकर 40.80 प्रतिशत रह गया. हालांकि, 2023-24 में 45.83 प्रतिशत आबादी के पास सार्वजनिक परिवहन की सुविधा उपलब्ध हो गई. रिपोर्ट में यह उम्‍मीद लगाई गई है कि साल 2030 तक सरकार को सभी के लिए सुरक्षित, किफायती, सुलभ और टिकाऊ परिवहन प्रणालियों तक पहुंच प्रदान करना चाहिए. साथ ही सड़क सुरक्षा में सुधार पर भी जोर दिया जाना चाहिए.

हादसों में आई गिरावट
रिपोर्ट के अनुसार, 2015-16 में प्रति 1,000 जनसंख्या पर वाहनों की संख्या 530 से घटकर 2022-23 में 370 रह गई. हालांकि, साल 2023-24 में मामूली रूप से बढ़कर 373 हो गई. इसके साथ ही रिपोर्ट से पता चलता है कि साल 2015 में जहां 8,085 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, वहीं साल 2021 में इनकी संख्‍या घटकर 4,720 रह गई. हालांकि, साल 2022 में यह संख्या फिर बढ़कर 5,560 हो गई.

दिल्‍ली में कितने वाहन
साल 2023 के अंत तक दिल्ली में कुल 79.5 लाख वाहन पंजीकृत थे, जिनमें से 20.7 लाख निजी कारें थीं. सड़क परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, एक समय दिल्‍ली में करीब 1.5 करोड़ से अधिक वाहन पंजीकृत थे. यह संख्‍या मुंबई, कोलकाता और चेन्‍नई शहर के कुल वाहनों के करीब-करीब बराबर है. हालांकि, हालिया आंकड़े साफ बताते हैं कि अब इसकी संख्‍या में काफी गिरावट आ चुकी है.

CG: दिव्यांगों के कल्याण के नाम पर 1000 करोड़ रुपये के घोटाले की सीबीआइ जांच चालू रखने का आदेश…

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दिव्यांगों के कल्याण के नाम पर 1000 करोड़ रुपये के घोटाले की सीबीआइ जांच चालू रखने का आदेश छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दिया है। कोर्ट ने कहा है कि सीबीआइ पांच फरवरी 2020 को भोपाल में दर्ज एफआइआर के साथ आगे कार्रवाई करेगी। तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार द्वारा राज्य में सीबीआई जांच पर रोक लगाए जाने के कारण उक्त प्रकरण मध्य प्रदेश में दर्ज किया गया था।

दिव्यांगों के कल्याण के नाम पर 1,000 करोड़ रुपये के घोटाले की सीबीआइ जांच चालू रखने का आदेश छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दिया है। कोर्ट ने कहा है कि सीबीआइ पांच फरवरी 2020 को भोपाल में दर्ज एफआइआर के साथ आगे कार्रवाई करेगी।

यदि एफआइआर दर्ज नहीं की गई है तो सीबीआइ को एफआइआर दर्ज होने की तारीख से 15 दिनों के भीतर राज्यभर में संबंधित विभाग, संगठन और कार्यालयों से प्रासंगिक मूल रिकार्ड जब्त करना होगा। तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार द्वारा राज्य में सीबीआइ जांच पर रोक लगाए जाने के कारण उक्त प्रकरण मध्य प्रदेश में दर्ज किया गया था।

न्यायमूर्ति प्रार्थ प्रतीम साहू और न्यायमूर्ति संजय कुमार जायसवाल की खंडपीठ ने इस मामले को प्रणालीगत भ्रष्टाचार (सिस्टमेटिक करप्शन) का बताते हुए कहा कि इसमें उच्च स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं। राज्य सरकार ने अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिसके चलते स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच की आवश्यकता महसूस की गई।

इस मामले तत्कालीन महिला एवं बाल विकास मंत्री वर्तमान में भाजपा विधायक रेणुका सिंह, तत्कालीन मुख्य सचिव व सेवानिवृत्त आइएएस विवेक ढांड, एमके राउत, आलोक शुक्ला, सुनील कुजूर, बीएल अग्रवाल, सतीश पांडे, पीपी श्रोती समेत कई नाम जांच के घेरे में हैं।

इस मामले में सीबीआइ जांच पर रोक लगाने के लिए ढांड व अन्य सुप्रीम कोर्ट गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने याचियों को हाई कोर्ट में ही अपना पक्ष रखने को कहा था। इस बीच सीबीआइ ने हाई कोर्ट के अंतिम आदेश के प्रतिक्षा में जांच स्थगित कर दी थी।

2004 में छत्तीसगढ़ सरकार ने दिव्यांगों के पुनर्वास के लिए स्टेट रिसोर्स सेंटर (एसआरसी) की स्थापना की थी। इसका उद्देश्य दिव्यांगों को तकनीकी और प्रशिक्षण सहायता प्रदान करना था।

2012 में इसी के अंतर्गत फिजिकल रेफरल रिहैबिलिटेशन सेंटर (पीआरआरसी) की स्थापना की गई, जिसका कार्य दिव्यांगों को कृत्रिम अंग और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना था, लेकिन सूचना के अधिकार (आरटीआइ) के तहत प्राप्त दस्तावेजों से यह स्पष्ट हुआ कि ये संस्थाएं केवल कागजों पर ही सक्रिय थीं और सरकारी फंड का दुरुपयोग किया जा रहा था।

रायपुर निवासी कुंदन सिंह ठाकुर ने 2018 में इस मामले को लेकर जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि इन संस्थाओं में कर्मचारियों की नियुक्ति किए बिना ही उनके नाम पर वेतन निकाला जा रहा था।

याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि उसके नाम पर भी फर्जी रिकार्ड बनाकर वेतन निकाला गया, जबकि उसने कभी वहां कार्य नहीं किया। इस घोटाले की कुल राशि एक हजार करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।

 

75 साल की है सीमा… D. Raja 76 की उम्र में फिर बने CPI के महासचिव, उम्र पर विवाद के बीच पार्टी ने दिखाया भरोसा

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कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) ने अपने 25वें कांग्रेस अधिवेशन के दौरान एक अहम फैसला लिया है. पार्टी ने डी. राजा को फिर से अपना राष्ट्रीय महासचिव चुना है. हालांकि, इस फैसले पर पार्टी की केरल यूनिट ने आपत्ति जताई थी, क्योंकि पार्टी में 75 साल की उम्र सीमा का नियम है और डी. राजा इस साल 76 साल के हो चुके हैं. इसके बावजूद, पार्टी की नेशनल काउंसिल ने निरंतरता बनाए रखने के लिए उन्हें पद पर बनाए रखने का निर्णय लिया है.
डी. राजा का राजनीतिक सफर
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, डी. राजा साल 2019 में महासचिव बने थे, जब पूर्व महासचिव एस. सुधाकर रेड्डी ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया था. इसके बाद 2022 में विजयवाड़ा में हुए कांग्रेस अधिवेशन में उन्हें फिर से चुना गया था. बता दें कि डी. राजा पहले दलित नेता हैं, जिन्होंने किसी वामपंथी पार्टी की सर्वोच्च कमान संभाली है.

यह फैसला CPI(M) यानी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के रुख से बिल्कुल अलग है. CPI(M) ने 75 साल की उम्र सीमा को सख्ती से लागू किया है. इसी वजह से मदुरै में इस साल हुए सम्मेलन में कई बड़े नेताओं जैसे प्रकाश करात, बृंदा करात, माणिक सरकार और सुरज्या कांता मिश्र को पॉलित ब्यूरो से हटना पड़ा. हालांकि, एक अपवाद के तौर पर केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन (79 वर्ष) को पद पर बनाए रखा गया.
अन्य दावेदार और महिला नेतृत्व की संभावना
डी. राजा के अलावा, इस पद के लिए CPI केरल राज्य सचिव बिनॉय विश्वम और AITUC (CPI का ट्रेड यूनियन संगठन) की महासचिव अमरजीत कौर भी दावेदार थीं. अगर अमरजीत कौर चुनी जातीं तो वह भारत में किसी वामपंथी पार्टी की पहली महिला प्रमुख होतीं.
नई टीम और प्रस्ताव
पार्टी ने अधिवेशन के दौरान संगठनात्मक ढांचे को नया रूप देते हुए 11 सदस्यीय राष्ट्रीय सचिवालय और 31 सदस्यीय कार्यकारी समिति की घोषणा की है. इसके साथ ही कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी पारित किए गए हैं. इनमें प्रमुख रूप से पाकिस्तान के साथ अटारी-वाघा और अन्य सीमा मार्गों से व्यापार को बहाल करने की मांग शामिल रही. इसके अलावा, पार्टी ने उन सभी कैदियों की रिहाई की भी मांग की, जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है. ये प्रस्ताव पार्टी की सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर सक्रियता और जनता से जुड़े सवालों को प्राथमिकता देने की दिशा को दर्शाते हैं.
BJP-RSS के खिलाफ मोर्चा
CPI ने अपने राजनीतिक प्रस्ताव में साफ किया कि वह भाजपा और RSS के खिलाफ वैचारिक और सैद्धांतिक संघर्ष को और तेज करेगी. पार्टी ने कहा कि आने वाले बिहार, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में वामपंथी, लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष ताकतों की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरा प्रयास करेगी. वहीं केरल में वाम मोर्चे की जीत सुनिश्चित करने की दिशा में काम करेगी.
बेरोजगारी और शिक्षा पर चिंता
अधिवेशन में पार्टी ने बढ़ती बेरोजगारी और शिक्षा क्षेत्र में गिरावट पर गहरी चिंता जताई है. CPI ने कहा कि देश में बढ़ते केंद्रीकरण और अधिनायकवादी प्रवृत्तियों के खिलाफ वाम और लोकतांत्रिक ताकतों की एकता बेहद जरूरी है.