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हिमाचल प्रदेश में कुदरत का कहर इस कदर टूटा है कि एक ही परिवार के चार सदस्यों समेत 6 लोग मलबे में दब गए…

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हिमाचल प्रदेश में कुदरत का कहर इस कदर टूटा है कि एक ही परिवार के चार सदस्यों समेत 6 लोग मलबे में दब गए…

हिमाचल प्रदेश में कुदरत का कहर इस कदर टूटा है कि एक ही परिवार के चार सदस्यों समेत 6 लोग मलबे में दब गए हैं। मकान पर आए भूस्खलन में छह लोग ज़िंदा दब गए हैं। फ़िलहाल, छह शव बरामद हो चुके हैं, और बाकी की तलाश में एनडीआरएफ की टीम रात से ही मौके पर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है।

मंडी के उपायुक्त (डीसी) ने बताया, ‘सुंदरनगर में देर शाम भूस्खलन हुआ, जिसकी चपेट में दो घर आ गए।’ उन्होंने बताया कि एक घर में चार लोग थे, जिनमें से एक महिला और एक बच्चे को बाहर निकाल लिया गया था। लेकिन अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई। एक अन्य घर से भी एक शव बरामद किया गया है।

अधिकारियों के अनुसार, भूस्खलन के दौरान एक घर में फंसे दो लोगों और कार में सवार एक व्यक्ति सहित कुल तीन लापता लोगों की तलाश अभी भी जारी है। सभी टीमें मौके पर तैनात हैं और लोगों को खोजने की कोशिश कर रही हैं।

बुधवार सुबह आ रही जानकारी के अनुसार, सुंदरनगर में हुए भीषण भूस्खलन में मरने वालों की संख्या 6 हो गई है। मंगलवार को राहत टीमों ने मलबे से तीन और शव निकाले। इनमें मां-बेटे सुरिंदर कौर और गुरप्रीत सिंह के शव घर की छत काटकर निकाले गए हैं। दोनों घर के नीचे दबे हुए थे। राहत और बचाव कार्य अभी भी जारी है। इसके साथ ही टाटा सूमो के दबे होने की जानकारी के लिए तलाशी अभियान भी जारी है।

हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी हिमाचल प्रदेश में लगातार बारिश जारी है। भारी बारिश से हिमाचल प्रदेश में तबाही मची हुई है। स्थानीय मौसम विभाग ने बुधवार के लिए कांगड़ा, मंडी, सिरमौर और किन्नौर जिलों में भारी बारिश का ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है। इसके साथ ही ऊना और बिलासपुर जिलों में भी भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

राज्य भर में भारी बारिश के कारण कई राष्ट्रीय राजमार्गों सहित 1,337 सड़कें बंद हो गई हैं। शिमला, कांगड़ा और सिरमौर जिलों में कोचिंग और नर्सिंग संस्थानों सहित सभी सरकारी और निजी शैक्षणिक संस्थान बंद कर दिए गए हैं।

भिलाई में ED की छापेमार कार्रवाई… CA के घर को घेरा, खंगाले जा रहे दस्तावेज

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छत्तीसगढ़ में एक बार फिर ED प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) का छापा पड़ा है। बता दें कि भिलाई के वैशाली नगर थाना क्षेत्र स्थित विवेकानंद नगर में आज सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) के घर पर छापेमारी की। टीम ने घर को चारों ओर से घेरकर तलाशी शुरू की।

बताया जा रहा है कि कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में की जा रही है। ED की टीम दस्तावेजों और डिजिटल डिवाइस की जांच कर रही है। कार्रवाई को लेकर आधिकारिक बयान अभी सामने नहीं आया है। इलाके में छापेमारी की खबर फैलते ही स्थानीय लोगों में हलचल मच गई है।

Chhattisgarh ED Raid: वहीं जानकारी के मुताबिक भिलाई दुर्ग रायपुर, बिलासपुर सहित कई जगहों पर एक साथ ईडी की रेड जारी है। कृषि कारोबार से जुड़े व्यापारियों के घरों और दफ्तरों को निशाना बनाया गया है। रायपुर की बात करें तो यहां प्रवर्तन निदेशालय की टीम छापामार कार्रवाई कर रही है, जिसमें तीन कृषि कारोबारी के ठिकानों पर दबिश दी गई है, जिसमें शंकर नगर चौपाटी के पास दूसरा महावीर नगर और तीसरा अमलीडीह के विस्टा कॉलोनी में रेड की कार्रवाई कर रही है।

आधी रात तातापानी में बड़ा हादसा… डेम टूटने से बह गए 2 घर के 8 लोग, 3 की मौत, 5 लापता, रेस्क्यू जारी

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बलरामपुर जिले के तातापानी पुलिस चौकी क्षेत्र अंतर्गत स्थित लुतिया डैम मंगलवार की रात करीब 11 बजे टूट गया। बांध टूटने से दो मकान पूरी तरीके से बाढ़ में बह गए, दोनों मकान में 8 लोग सोए थे, जिसमें 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि 5 लोग अब भी लापता हैं। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है। पुलिस और प्रशासन की टीम लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई है। फिलहाल राहत और बचाव कार्य जारी है।

2 लोगों की लाश को मौके से बरामद
बलरामपुर जिले में लगातार तेज बारिश होने के कारण लुतिया डेम रात 11 बजे के करीब टूट गया। बताया गया है कि पहाड़ में तीज बारिश होने के कारण पहाड़ की झरने का पानी बांध में आ रहा था और उसके बाद बांध लबालब भर गया। देखते ही देखते पूरा बांध टूट गया, लेकिन इस दौरान पहले से यहां पर कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया था और न ही जल संसाधन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे हुए थे।यही वजह है कि यहां पर ऊंचाई में मकान बनाकर रह रहे दो परिवार के लोग गहरी नींद में जब सोए हुए थे, तब बांध के पानी की वजह से आने वाले बाढ़ में वे बह गए, घर का नामोनिशान मिट गया। रात 3 बजे के करीब कलेक्टर राजेंद्र कटारा और पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे और उन्होंने रेस्क्यू टीम के माध्यम से 2 लोगों की लाश को मौके से बरामद किया। इसमें 60 वर्षीय महिला बसतिया और उसकी बहू 26 वर्षीय रजंती शामिल है।

RBI के बैंक अवकाश कैलेंडर के अनुसार देश भर में कई बैंक शाखाएँ बंद रहेंगी…

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RBI के बैंक अवकाश कैलेंडर के अनुसार देश भर में कई बैंक शाखाएँ बंद रहेंगी…

BANK HOLYDAY:– अगर आप आज बैंक से जुड़े कामों के लिए बैंक शाखा जाने की सोच रहे हैं, तो आपको बता दें कि गुरुवार (4 सितंबर) को बैंक बंद रहेंगे। RBI के बैंक अवकाश कैलेंडर के अनुसार, ओणम, ईद-ए-मिलाद, नवरात्रि स्थापना और दुर्गा पूजा सहित राज्य-विशिष्ट छुट्टियों के कारण देश भर में कई बैंक शाखाएँ बंद रहेंगी।

ये राष्ट्रव्यापी अवकाश नहीं हैं, इसलिए कुछ राज्यों में बैंक खुले रहेंगे जबकि कुछ में बंद रहेंगे। अगर आप कल बैंक जाकर अपना काम निपटाने की योजना बना रहे हैं, तो पहले यह जान लें कि कौन से बैंक बंद रहेंगे। RBI की सूची के अनुसार, देश के किन राज्यों में कब और कहाँ बैंक बंद रहेंगे, इसकी सूची यहाँ दी गई है।

नीचे आप पूरी सूची देख सकते हैं: 4 सितंबर को बैंक बंद रहेंगे। 4 सितंबर, गुरुवार को बैंक बंद रहेंगे।

ओणम के कारण केरल में बैंक बंद रहेंगे। अन्य सभी राज्यों में बैंक खुले रहेंगे। ओणम केरल का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है, जिसे हर साल बड़े धूमधाम और समारोह के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार राजा महाबली की स्मृति में मनाया जाता है। ओणम के अवसर पर लोग अपने घरों को फूलों से सजाते हैं।

सितंबर में छुट्टियों की सूची 3 सितंबर (बुधवार): रांची में कर्मा पूजा।

4 सितंबर (गुरुवार): कोच्चि और तिरुवनंतपुरम में ओणम त्योहार की छुट्टी।

5 सितंबर (शुक्रवार): ईद-ए-मिलाद/थिरुवोणम के अवसर पर अहमदाबाद, मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद सहित कई शहरों में बैंक अवकाश रहेगा।

6 सितंबर (शनिवार): ईद-ए-मिलाद/इंद्रजात्रा के अवसर पर गंगटोक, जम्मू, रायपुर और श्रीनगर में बैंक अवकाश रहेगा।

12 सितम्बर (शुक्रवार): जम्मू और श्रीनगर में ईद-ए-मिलाद के बाद शुक्रवार।

22 सितंबर (सोमवार): जयपुर में नवरात्रि स्थापना की छुट्टी।

23 सितंबर (मंगलवार): जम्मू और श्रीनगर में महाराजा हरि सिंह जयंती।

29 सितंबर (सोमवार): अगरतला, गंगटोक और कोलकाता में महा सप्तमी/दुर्गा पूजा।

30 सितंबर (मंगलवार): अगरतला, भुवनेश्वर, गुवाहाटी, कोलकाता, पटना और रांची सहित कई शहरों में महा अष्टमी/दुर्गा अष्टमी।

7 सितंबर (रविवार)

13 सितंबर (दूसरा शनिवार)

14 सितंबर (रविवार)

21 सितंबर (रविवार)

27 सितंबर (चौथा शनिवार)

28 सितंबर (रविवार)

देश में नारियल उत्पादन में अव्वल छत्तीसगढ़ का कोंडागांव, यहां 18 प्रजातियों के लगाए गए हैं पौधे…

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नारियल के लिए दक्षिण भारत को प्रमुख केंद्र माना जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ के कोंडागांव में स्थित भारत सरकार के कृषि मंत्रालय द्वारा स्थापित प्रदर्शन सह बीज उत्पादन प्रक्षेत्र में (डीएसपी) देश के उन 11 प्रक्षेत्र में पहले नंबर पर शामिल है जहां सबसे ज्यादा नारियल का उत्पादन सालाना होता है। 100 एकड़ में फैले इस प्रक्षेत्र में 6000 नारियल के पेड़ लगे हुए हैं, जिसमें से वर्तमान में 4600 पेड़ों से सालाना 3 लाख से ज्यादा नारियल का उत्पादन हो रहा है। यहां होने वाले नारियल की खपत स्थानीय स्तर पर 60 प्रतिशत और शेष राज्य के अन्य इलाकों में भेजा जाता है।

18 प्रजातियों के पौधे हैं यहां
नारियल विकास बोर्ड के इस प्रक्षेत्र में नारियल के विभिन्न 18 प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। जिसमें 70 फीसदी उत्पादन बौना नारियल,टॉल नारियल व संकर प्रजाति के पेड़ों से होता है। जिसकी बिक्री से तकरीबन एक करोड रुपए सालाना की आमदनी बोर्ड को होती है। यहां इंटर क्रॉप के रूप में आम,लीची, दालचीनी कोका, काली मिर्च भी उत्पादित होते हैं। इसकी देखरेख के लिए यहां वर्तमान में 25 अधिकारी- कर्मचारी तैनात हैं।

सालाना 50 हजार से ज्यादा पौधों तैयार
इस प्रक्षेत्र में सालाना 50000 से ज्यादा नारियल के पौधों को तैयार कर इसकी बिक्री किसानों को की जाती है, जिसमें सबसे ज्यादा निकटवर्ती राज्य ओडिशा को भेजा जाता है। वहीं विभिन्न योजनाओं के माध्यम से स्थानीय स्तर पर किसानों को भी इसका वितरण समय-समय पर किया जाता है। जानकारी के मुताबिक नारियल का एक पौधा चार से पांच साल में फल देने लगता है जो 60 से 70 वर्ष तक लगातार फल देते रहता है।

आईसी कटियार, सहायक संचालक सीडीबी, डीएसपी: यह प्रक्षेत्र देश के 11 डीएसपी में उत्पादन के मामले में पहले नम्बर पर है। यहां से तकरीबन एक करोड़ की आमदनी बोर्ड को हो रही है।

‘तुम्हारी डेलिवरी…’ आंख मारी, मुस्कुराए और… कांग्रेस विधायक ने महिला पत्रकार से कही ऐसी बात, मच गया बवाल

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कर्नाटक कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री आरवी देशपांडे अपने एक बयान से विवादों में घिर गए हैं. यहां उत्तर कन्नड़ के जोइदा तालुक में अस्पताल न होने की समस्या पर एक महिला पत्रकार ने सवाल किया, तो उन्होंने जवाब देते हुए हल्के अंदाज़ में कहा, ‘चिंता मत करो, तुम्हारा डिलीवरी कहीं और करा देंगे.’ यह कहते हुए वह थोड़ा मुस्कुराए और आंख भी मारी.
पत्रकार ने जब इस पर उनसे स्पष्टता मांगी तो देशपांडे ने दोबारा वही टिप्पणी दोहराई, ‘जब तुम्हारा डिलीवरी का समय आएगा, हम करवा देंगे.’ पत्रकार ने उनसे आग्रह किया कि इलाके में अस्पताल बेहद ज़रूरी है और इसे उनके कार्यकाल में ही बनवाना चाहिए. इस पर विधायक ने केवल ‘ठीक है’ कहा, लेकिन कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया.
देशपांडे हलियाल विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और कर्नाटक सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है और आलोचनाओं का सिलसिला शुरू हो गया है.

देशपांडे का यह बयान कांग्रेस के लिए नई मुश्किल खड़ी कर रहा है और विपक्ष इसे महिलाओं के अपमान से जोड़कर बड़ा मुद्दा बना रहा है. बीजेपी ने देशपांडे की टिप्पणी को महिलाओं के लिए अपमानजनक करार दिया.

बीजेपी प्रवक्ता विजय प्रसाद ने कहा, ‘माताओं और महिलाओं का अपमान करना राजनीति नहीं, बल्कि नैतिक दिवालियापन है. राहुल गांधी प्रेम और सम्मान की बात करते हैं, लेकिन उनके नेता नफरत फैलाते हैं. कांग्रेस की राजनीति अपमान और परिवार पर हमले तक सीमित है.’
जेडीएस ने भी इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए वीडियो साझा किया और कांग्रेस विधायक की निंदा की. पार्टी ने पोस्ट में लिखा, ‘जिले के लिए सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की मांग पर जवाब में आप कहते हैं ‘तुम्हारा डिलीवरी करा देंगे’? क्या यही महिलाओं के प्रति आपका सम्मान है?’

15 दिनों में 2 करोड़ घरों का सर्वे करना आसान नहीं, बीजेपी ने कर्नाटक में 1400 जातियों की लिस्ट पर जताई आपत्ति

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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (केएससीबीसी) से आग्रह किया है कि वे सामाजिक और शैक्षिक सर्वेक्षण जल्दबाजी में न करें और इसे दशहरे के बजाय गर्मियों के मौसम में कराया जाए. सामाजिक और शैक्षिक सर्वेक्षण को सामान्यतः जातिगत गणना कहा जाता है. प्रतिनिधिमंडल ने आयोग द्वारा प्रकाशित 1,400 जातियों की सूची पर भी कड़ी आपत्ति जताई है.
भाजपा के राज्य महासचिव एवं विधायक वी. सुनील कुमार ने कहा, “प्रतिनिधिमंडल ने आयोग के अध्यक्ष से कहा है कि यह कहना उचित नहीं है कि सर्वेक्षण 15 दिनों में पूरा हो जाएगा और वह भी दशहरे के समय, किसी दबाव में. इस अवधि में 1.75 से दो करोड़ घरों का सर्वेक्षण करना आसान नहीं है. इसे पुनः विचार किया जाना चाहिए और सर्वेक्षण गर्मियों में कराया जाना चाहिए.”
आयोग के अध्यक्ष मधुसूदन आर. नाइक से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने बताया कि 1,400 जातियों की सूची प्रकाशित की गई है और आपत्तियां मांगी गई हैं. इस सूची में कुछ नयी जातियां बनाई गई हैं, जो सरकार या किसी आयोग की किसी भी जाति सूची में नहीं हैं. उन्होंने कहा, “कुरुबा-ईसाई, मडिवाला-ईसाई, वोक्कालिगा-ईसाई, इस प्रकार लगभग 107 नयी जातियां बनाई गई हैं, जिन्हें कोड नंबर भी दिए गए हैं. यह स्वीकार्य नहीं है.”

भाजपा नेता ने चेतावनी दी कि नयी जातियां बनाने से पूरे राज्य में व्यापक आंदोलन हो सकता है. उन्होंने कहा, “जहां तक ईसाई जातियों का सवाल है, हमने दो-तीन उपजातियों के बारे में सुना है और मुसलमानों के लिए कुछ उपजातियां हैं.” उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह सभी हिन्दू उपजातियों के सामने ईसाई या मुसलमान जोड़कर धार्मिक परिवर्तन को बढ़ावा दे रही है.

उन्होंने कहा, “लोगों को शक है कि यह धार्मिक परिवर्तन को समर्थन देने और आने वाले दिनों में उन्हें आरक्षण देने की साजिश है.” उन्होंने नए सिरे से बनाई गई जातियों को सूची से हटाने की मांग की. सुनील कुमार ने बताया कि आयोग से यह भी अनुरोध किया गया है कि सर्वेक्षण के लिए प्रमाण-पत्र अनिवार्य रूप से दिया जाए और 1,400 जातियों को पिछड़ा वर्ग की श्रेणियों के अनुसार सूचीबद्ध किया जाए.
उन्होंने कहा, “अध्यक्ष ने हमारी बात धैर्यपूर्वक सुनी, लेकिन वह 15 दिनों में सर्वेक्षण करने पर अड़े रहे.” उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सर्वेक्षण जल्दबाजी में न किया जाए और इसकी रिपोर्ट को खारिज न किया जाए, क्योंकि यह सर्वेक्षण भविष्य में सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. कर्नाटक सरकार ने राज्य में 22 सितंबर से सात अक्टूबर तक 15 दिनों का नया सामाजिक और शैक्षिक सर्वेक्षण कराने का निर्णय लिया है. आयोग को सर्वेक्षण रिपोर्ट अक्टूबर के अंत तक सौंपने का समय दिया गया है.

कैसे लश्कर का TRF आतंकवादी साजिशों के लिए जमा करता है फंड…..NIA जांच में खुलासा, FATF ने पाकिस्तान पर कसा शिकंजा

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अमेरिका ने हाल ही में ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ को एक विदेशी आतंकवादी संगठन और एक विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी इकाई घोषित किया है. यह पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका था क्योंकि इस कदम से उसकी आतंकी रणनीति का पर्दाफाश हो गया. द रेजिस्टेंस फ्रंट, लश्कर-ए-तैयबा का ही एक अंग है. वास्तव में, इसे जम्मू-कश्मीर के एक स्थानीय संगठन के रूप में गठित और प्रचारित किया गया था. जिसका उद्देश्य पाकिस्तान और लश्कर-ए-तैयबा, दोनों को एक तरह से नकारने का मौका देना था.
इसका उद्देश्य कश्मीर में चल रही गड़बड़ी को स्थानीय स्तर पर दिखाना था. पाकिस्तान चाहता था कि आतंकवादी हमले जारी रहें और यह भी सुनिश्चित हो कि वह वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) की जांच के दायरे में न आए. राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने रेजिस्टेंस फ्रंट की गतिविधियों की पड़ताल की. उस आधार पर कहा जा रहा है कि पाकिस्तान एफएटीएफ से बचने के लिए इस छद्म संगठन का इस्तेमाल नहीं कर सकता. रेजिस्टेंस फ्रंट का जम्मू-कश्मीर में एक गहरा नेटवर्क है. इसके स्थानीय लोग, जो पाकिस्तान के इशारे पर, इस आतंकवादी संगठन की गतिविधियों को चलाने के लिए धन मुहैया कराने हेतु खाड़ी और मलेशिया के लोगों के संपर्क में हैं.
जांच ​​के दौरान, मलेशिया निवासी सज्जाद अहमद मीर का नाम सामने आया है. एक संदिग्ध, यासिर हयात, के फोन कॉल्स से पता चला है कि वह धन की व्यवस्था के लिए मीर के संपर्क में था. हयात ने धन की व्यवस्था के लिए कई बार मलेशिया की यात्राएं की थीं. अब तक सामने आई जानकारी से पता चलता है कि अपने मलेशियाई संपर्क की मदद से उसने द रेजिस्टेंस फ्रंट के लिए 9 लाख रुपये जुटाए थे. यह पैसा संगठन की गतिविधियों को चलाने के लिए शफात वानी नाम के एक अन्य कार्यकर्ता को दिया गया था.

कहा जाता है कि वानी, जो टीआरएफ का एक प्रमुख कार्यकर्ता है, मलेशिया भी गया था. उसने बताया कि वह एक विश्वविद्यालय के सम्मेलन में भाग लेने गया था, और इसी बहाने उस देश में प्रवेश किया था. हालांकि, विश्वविद्यालय ने इस यात्रा को प्रायोजित नहीं किया था.

एनआईए को यह भी पता चला है कि मीर के संपर्क में रहने के अलावा, हयात दो पाकिस्तानियों के भी संपर्क में था. उसकी गतिविधियां धन जुटाने के लिए थीं, और जांच से पता चलता है कि उसका काम विदेशी कार्यकर्ताओं के संपर्क में रहना और आतंकवादी संगठन के लिए धन जुटाना था.
एनआईए के पास टीआरएफ के संचालन के बारे में पर्याप्त जानकारी है, लेकिन कितना धन मुहैया कराया गया इसका पता लगाना जांच के लिए महत्वपूर्ण है. 13 अगस्त को, एनआईए ने कहा था कि उसने धन के एक विदेशी स्रोत का पता लगाया है जिसकी गहन जांच की जा रही है.
हयात के फोन पर 463 संपर्क हैं जिनकी एनआईए गहन पड़ताल कर रही है. कई मौकों पर पाकिस्तान और मलेशिया को कॉल किए गए हैं. इन सभी नंबरों की जांच की जा रही है, और जांचकर्ताओं का कहना है कि द रेजिस्टेंस फ्रंट के फंडिंग नेटवर्क का पता लगाने के लिए यह बेहद जरूरी है. ये खुलासा इस नेटवर्क का पता लगाने के लिए महत्वपूर्ण हैं, और ये भारत को एफएटीएफ के समक्ष पाकिस्तान को बेनकाब करने में मदद करेंगे.
भारत टेरर फंडिंग को लेकर पाकिस्तान के खिलाफ केस बना रहा है. उसे वापस ग्रे लिस्ट में शामिल करने पर भारत जोर दे रहा है. द रेजिस्टेंस फ्रंट का गठन 2019 में कम होते हिज्बुल मुजाहिदीन को रिप्लेस करने के लिए किया गया था. माना गया था कि इलाके में उसका प्रभाव कम हो रहा है और स्थानीय आतंकी गतिविधियों को एक नई पहचान देने के लिए ऐसा किया जाना जरूरी है.

इसका गठन लश्कर-ए-तैयबा की गतिविधियों पर पर्दा डालने के लिए किया गया. हमलों को पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के बजाय स्वदेशी प्रतिरोध के तौर पर दिखाने की कोशिश की गई. यह वास्तव में लश्कर-ए-तैयबा का ही एक नया रूप था, जिसे वैश्विक समुदाय को गुमराह करने और एफएटीएफ जैसी संस्थाओं के दबाव को कम करने के लिए डिजाइन किया गया था.

कश्मीर से पंजाब तक बाढ़ से हाहाकार, राहुल गांधी ने पीएम मोदी से की मदद की मांग

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पहाड़ से लेकर मैदान तक सैलाब का कहर देखने को मिल रहा है. पंजाब के सभी 23 जिलों में बाढ़ से हाहाकार मचा हुआ है. यहां बाढ़ और बारिश से जुड़े हादसों में 30 लोगों की मौत हो चुकी है. भगवंत मान सरकार ने पंजाब को आपदा प्रभावित राज्य घोषित कर दिया है. वहीं दिल्ली में यमुना नदी का बढ़ता जलस्तर चिंता का विषय बना हुआ है. यमुना का पानी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है, जिससे दिल्ली और आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है. राहुल गांधी ने उत्तर भारत के कई राज्यों में बाढ़ से मची तबाही पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार ने राहत पैकेज देने की मांग की है.
दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता आज अपने सीएम आवास पर एक बार फिर जनसुनवाई की. पिछले महीने 20 को जनसुनवाई के दौरान एक शख्स ने उनपर हमला कर दिया था. इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उनकी सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया है. इस बार महिला पुलिस अधिकारियों की संख्या भी बढ़ाई गई है, ताकि महिला शिकायतकर्ताओं को आसानी हो और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.
उधर बिहार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां को अपशब्द कह जाने के मामले पर बीजेपी लगातार ही कांग्रेस पर खूब हमलावर है. इस कड़ी में कोलकाता में पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्यालय बिधान भवन पर BJP नेताओं ने विरोध प्रदर्शन और तोड़फोड़ कर दी. इसमें में बीजेपी राकेश सिंह सहित कुछ अन्य कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है.

उपराष्ट्रपति को मिलती है 2 लाख की पेंशन… लेकिन जगदीप धनखड़ पाएंगे 3 लाख 12 हजार

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भारत के उपराष्ट्रपति पद से हाल ही में जगदीप धनखड़ ने इस्तीफा दिया है. जगदीप धनखड़ ने यह इस्तीफा स्वास्थ्य कारणों से दिया है. लेकिन इस्तीफा देने के बावजूद भी जगदीप धनखड़ की पेंशन के रूप में मिलने वाली सैलरी उपराष्ट्रपति की मिलने वाली सैलरी से ज्यादा होगी. बता दें कि भारत में उच्च पदों पर रहने वाले राजनेताओं और अधिकारियों को वेतन और भत्तों के रूप में भारी भरकम राशि मिलती है, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्हें मिलने वाली सुविधाओं का सिलसिला थमता नहीं है. उपराष्ट्रपति का पद छोड़ने वाले जगदीप धनखड़ भी अब एक साथ कई तरह की पेंशन और भत्तों के हकदार हो गए हैं, जो व्यवस्था द्वारा ही तय की गई है.
जब तक जगदीप धनखड़ उपराष्ट्रपति के पद पर थे, तब तक उन्हें हर महीने 4 लाख रुपये का वेतन मिलता था. भारतीय संविधान के अनुसार, उपराष्ट्रपति का कोई तय वेतन नहीं होता है, बल्कि वे राज्यसभा के सभापति के रूप में यह वेतन प्राप्त करते हैं. इस वेतन के अलावा, उन्हें कई भत्ते भी मिलते थे. लेकिन अब जब उन्होंने पद छोड़ दिया है तो उन्हें कई सेवानिवृत्ति लाभ मिलेंगे, जो उनकी पिछली भूमिकाओं के कारण एक साथ जुड़ते चले जाएंगे.

जगदीप धनखड़ को पूर्व उपराष्ट्रपति के तौर पर हर महीने 2 लाख रुपये की पेंशन मिलेगी. लेकिन यहीं पर सुविधाओं की सूची खत्म नहीं होती. वे एक पूर्व सांसद भी हैं, जिसके लिए उन्हें हर महीने 45,000 रुपये की पेंशन मिलेगी. इसके अलावा, राजस्थान के एक पूर्व विधायक के तौर पर वे हर महीने 42,000 रुपये के हकदार होंगे, जिसके लिए उन्होंहने हाल ही आवेदन दिया है. पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल के रूप में उन्हें 25,000 रुपये की मासिक पेंशन मिलेगी. इस तरह से उन्हें हर महीने पेंशन के रूप में कुल 3,12,000 रुपये मिलेंगे.
क्या सुविधाएं मिलेंगी?

पेंशन के अलावा, उन्हें कई अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी, जो उनके पद के अनुरूप हैं. एक पूर्व उपराष्ट्रपति के रूप में उन्हें टाइप 8 का शानदार बंगला मिलेगा, जिसे सरकार द्वारा बनाए रखा जाएगा. उन्हें एक सरकारी कार और सुरक्षा भी मिलेगा, जो जेड या जेड प्लस कैटेगिरी का हो सकता है. साथ ही उनके लिए व्यक्तिगत स्टाफ की व्यवस्था भी की जाएगी. ये सभी सुविधाएं वह जबतत जीवित रहेंगे तब तक मिलती रहेंगी.
उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद कितनी पेंशन?
यह व्यवस्था सिर्फ जगदीप धनखड़ के लिए ही नहीं है, बल्कि यह उन सभी राजनेताओं के लिए है, जो कई उच्च पदों पर काम कर चुके हैं. यह वर्तमान नीति-नियंताओं द्वारा माननीयों के लिए तय की गई एक ऐसी प्रणाली है, जिसे सभी स्वीकार करते हैं. इस व्यवस्था के तहत कई पूर्व राजनेताओं को अलग-अलग पदों के लिए कई पेंशन मिलती रहती हैं. हालांकि, यह एक कानून है और इसे गलत भी नहीं कहा जा सकता है, क्योंकि यह मौजूदा व्यवस्था का एक हिस्सा है. दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने इस व्य्यवस्था का विरोध करते हुए पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार ने इसे लागू किया था.

जगदीप धनखड़ ने बीते सोमवार को उपराष्ट्रपति का आवास खाली कर दिया है. लेकिन उनके लिए नई सुविधाओं का सिलसिला जल्द ही शुरू हो जाएगा. इस तरह के भत्ते और पेंशन प्रणाली यह दिखाती है कि भारत में उच्च पदों पर रहने वाले राजनेताओं को सेवानिवृत्ति के बाद भी आरामदायक जीवन सुनिश्चित किया जाता है, जो उनके देश के प्रति योगदान का सम्मान है.