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सीजेपी: जयपुर में भाजपा कार्यकर्ताओं ने महिलाओं समेत सीजेपी वॉलंटियर्स के साथ बुरा बर्ताव…

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कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) नेता अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया कि जयपुर में भाजपा कार्यकर्ताओं ने महिलाओं समेत सीजेपी वॉलंटियर्स के साथ बुरा बर्ताव किया।

उन्होंने कहा कि जनता आने वाले चुनावों में भाजपा को सबक सिखाएगी।

जयपुर में सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका और सीजेपी वॉलंटियर्स पर हुए कथित हमले पर सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दिपके ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि एक स्कूल भैंसों के बाड़े में चल रहा था, और आशुतोष रांका आज उसका पर्दाफाश करने के लिए वहां पहुंचने वाले थे। जब आशुतोष अपनी टीम के साथ वहां पहुंचे, तो उन पर बहुत गंभीर हमला किया गया। उन पर पत्थर फेंके गए, गाड़ियों पर हमले किए गए, और वहां मौजूद महिलाओं के साथ भी मारपीट की गई।

दीपके ने कहा कि हम सबने ऐसे वीडियो देखे हैं जिनमें भाजपा के गुंडे सीजेपी वॉलंटियर्स को झुंड में पीट रहे हैं और उन पर हमला कर रहे हैं। ये लोग क्या चाहते हैं? हम बस इतना चाहते हैं कि स्कूल ठीक हो जाए। उन्हें स्कूल ठीक कराने से इतनी दिक्कत क्यों है? अगर उन्होंने स्कूल ठीक कर दिया होता, तो वहां जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती।”

दीपके ने कहा कि इस मामले के खिलाफ क्‍या हम आवाज न उठाएं। ये नहीं चाहते कि गरीबों के बच्‍चे पढ़ें और उनके लिए अच्‍छे स्‍कूल हों। अगर ये ऐसा नहीं चाहते तो इनको तकलीफ होती की बच्‍चे स्‍कूल में पढ़ने के बजाय भैंस के बाड़े में क्‍यों पढ़ रहे हैं। भाजपा को बच्‍चों की बेहतर शिक्षा पर बात करनी चाहिए। भाजपा की गुंडागर्दी खत्‍म होने वाली है, जनता आने वाले चुनाव में इन लोगों को सबक सिखाएगी।

राजस्‍थान सरकार ने एक प्रस्‍ताव पास किया था कि वीडियो और फोटोग्राफी के लिए बाहरी व्‍यक्तियों को प्रवेश न मिले। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए दीपके ने कहा कि देखिए, सरकारी स्कूलों में कई गलत चीजें हो रही हैं। उदाहरण के लिए, कल मैं कहीं गया था और देखा कि बाहर से लोग आकर वहां गांजा पी रहे थे और शराब पी रहे थे। उस समय, ऐसा कोई नोटिस नहीं होता कि बाहरी लोग अंदर नहीं आ सकते और सरकार को कोई दिक्कत नहीं होती। जैसे ही कोई वहां जाकर दिखाता है कि स्कूल में पानी नहीं है, हालत कितनी खराब है या बताता है कि पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं, तो सरकार को दिक्कत होने लगती है। तब सरकार कहती है कि बाहरी लोग स्कूल में नहीं आ सकते। वे क्यों नहीं आ सकते? जिन लोगों के साथ आशुतोष स्कूल जा रहे हैं, और जिन लोगों के साथ मैं स्कूल जा रहा हूं, वे उसी गांव के हैं और उन्हीं गांवों के बच्चे उन सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं। वे चाहते हैं कि स्कूल बेहतर हो, तो सरकार क्यों नहीं चाहती कि स्कूल बेहतर हो? सरकार को क्या दिक्कत है? क्या सरकार में बैठे लोग सिर्फ हेलीकॉप्टर में घूमने के लिए चुने गए हैं?”

आशुतोष रांका और वॉलंटियर्स पर कथित हमले पर अभिजीत दिपके ने कहा,”मुझे लगता है कि ये लोग डरे हुए हैं। पूरे देश के सामने उनके झूठ बेनकाब हो गए हैं। हमने पहले धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देते देखा और उसके बाद 12 साल के बच्चे भी उनकी पोल खोल रहे हैं। उन्हें इस बात से डर लगता है। वे देख सकते हैं कि देश के लोग अब भाजपा को समझ गए हैं। भाजपा की पूरी सच्चाई देश के सामने आ गई है। अब उन्हें लगता है कि किसी तरह लोगों को डरा-धमकाकर वे उन्हें चुप करा सकते हैं ताकि कोई उनके खिलाफ न बोले। ऐसा नहीं होगा। देश अब जाग चुका है और जंतर-मंतर के बाद इस देश के लोगों ने डरना छोड़ दिया है।”

अपने एमएमआरडीए मामले को लेकर किए गए पोस्‍ट पर अभिजीत दिपके ने कहा, “एमएमआरडीए के उम्मीदवार कुछ दिन पहले मुझसे मिलने आए थे और उन्होंने मुझे बताया कि कैसे जो लोग दूसरी परीक्षाओं में कम नंबर ला रहे थे, 50 या 60 नंबर पा रहे थे, वे अचानक एमएमआरडीए परीक्षा में टॉपर बन गए और 200 में से 200 नंबर ले आए। उनमें से कुछ अधिकारियों के बच्चे बताए जाते हैं, जैसा कि मुझे बताया गया। मुझे यह भी बताया गया कि इनमें से कई टॉपर एक ही सेंटर से हैं। यह कैसे हो सकता है कि कई टॉपर एक ही सेंटर से हों? इसका मतलब है कि उस सेंटर पर कुछ गड़बड़ हुई होगी, और ऐसा होने के लिए कोई सेटिंग की गई होगी। एमएमआरडीए के उम्मीदवार शुक्रवार शाम फिर मुझसे मिलने वाले हैं।”

एनसीईआरटी किताबों के बदलाव को लेकर अभिजीत दिपके ने कहा, “जो लोग खुद पढ़े-लिखे नहीं हैं, जिन्हें शिक्षा से ही दिक्कत है, वे लोग एनसीईआरटी की किताबें कैसे लिखेंगे या सिलेबस कैसे तय करेंगे? उन्होंने न तो संविधान के बारे में पढ़ाया है और न ही कभी अपने दफ्तरों में तिरंगा फहराया है और वे खुद कभी स्कूल नहीं गए। तो, वे एनसीईआरटी का सिलेबस कैसे तय करेंगे या एनसीईआरटी की किताबें कैसे लिखेंगे।”

सीएम सम्राट चौधरी ने वित्त मंत्री और विदेश मंत्री से की मुलाकात…

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कर्तव्य भवन में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की। इस दौरान बिहार सरकार के उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी और जदयू के राज्यसभा सदस्य संजय झा भी मौजूद रहे।

सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर इस बैठक की जानकारी दी। उन्होंने लिखा, “नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एवं विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर के साथ महत्वपूर्ण बैठक में सम्मिलित हुआ।” उन्होंने बताया कि बैठक में भारत-नेपाल जल एवं बांध परियोजनाओं, बजट से जुड़े विषयों, पर्यटन के विकास और बिहार के हित से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

सम्राट चौधरी ने लिखा कि बिहार के विकास, समृद्धि और जनहित से जुड़े विषयों को केंद्र के सामने मजबूती से रखने और बेहतर समन्वय के साथ आगे बढ़ने की दिशा में यह बैठक महत्वपूर्ण रही। इस बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी और राज्यसभा सदस्य संजय झा भी उपस्थित रहे।

बता दें कि भारत और नेपाल के बीच जल संसाधन सहयोग के तहत कोसी, गंडक और महाकाली नदियों पर कई प्रमुख बांध और जलविद्युत परियोजनाएं चल रही हैं और कुछ प्रस्तावित हैं। इनका मुख्य उद्देश्य बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई की सुविधा देना और जलविद्युत का उत्पादन करना है।

कोसी परियोजना भारत और नेपाल के बीच 1954 के समझौते के तहत शुरू हुई थी। इसके तहत कोसी बैराज का निर्माण हुआ, जिसका मकसद उत्तर बिहार और नेपाल में बाढ़ को नियंत्रित करना और सिंचाई की सुविधा देना है। वहीं, गंडक परियोजना 1959 के गंडक समझौते के तहत बनी। इसके अंतर्गत भैंसालोटन (बाल्मीकि नगर) में बांध और जलविद्युत संयंत्र का निर्माण किया गया है।

सप्त कोसी उच्च बांध परियोजना नेपाल में सप्तकोशी नदी पर प्रस्तावित एक बड़ी बहुउद्देशीय परियोजना है। भारत और नेपाल मिलकर इस योजना पर काम कर रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य उत्तरी बिहार और दक्षिण-पूर्वी नेपाल को भयंकर बाढ़ से बचाना, भारी मात्रा में बिजली बनाना और सिंचाई के लिए पानी देना है।

Gold ₹1,900 और Silver ₹3,400 महंगी, अभी और बढ़ सकते है सोने-चांदी के भाव…

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हफ़्ते के आखिरी कारोबारी दिन, शुक्रवार को सोने और चांदी की कीमतों में ज़बरदस्त तेज़ी देखी गई। ग्लोबल मार्केट में बढ़ती अनिश्चितता, महंगाई की चिंता और वेस्ट एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच, इन्वेस्टर्स ने एक बार फिर “सेफ़-हेवन” एसेट्स – यानी सुरक्षित इन्वेस्टमेंट ऑप्शन – का रुख किया।

इस ट्रेंड का सीधा फ़ायदा सोने और चांदी को मिला। MCX पर ट्रेडिंग के दौरान, सोना लगभग 1.19% बढ़कर ₹1,61,323 प्रति 10 ग्राम हो गया, जबकि चांदी 1.43% बढ़कर ₹2,46,715 प्रति किलोग्राम हो गई।

दिन भर सोने का प्रदर्शन

MCX पर, अक्टूबर डिलीवरी के लिए सोने के कॉन्ट्रैक्ट ₹1,60,630 प्रति 10 ग्राम पर खुले – जो पिछले क्लोज़िंग प्राइस ₹1,59,425 से ₹1,205 (या 0.75%) ज़्यादा था। सेशन के दौरान, इसने ₹1,60,630 का स्तर छुआ, जबकि दिन का निचला स्तर ₹1,59,601 था। हालांकि बाद में कुछ प्रॉफ़िट-बुकिंग देखी गई, लेकिन सोने की कीमतें मज़बूत बनी रहीं। दोपहर 3 बजे तक, अक्टूबर गोल्ड फ़्यूचर्स लगभग ₹1,61,323 प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहे थे।

चांदी में भी ज़बरदस्त खरीदारी

सोने के साथ-साथ चांदी में भी ज़बरदस्त खरीदारी देखी गई। MCX पर सितंबर डिलीवरी के लिए चांदी के कॉन्ट्रैक्ट ₹2,44,988 प्रति किलोग्राम पर खुले। सेशन के दौरान, चांदी लगभग ₹2,46,229 प्रति किलोग्राम के उच्चतम स्तर पर पहुँची, जिसमें दिन भर में लगभग ₹2,986 की बढ़त देखी गई। यह खबर लिखे जाने के समय, चांदी लगभग ₹2,46,715 प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रही थी।

सोने और चांदी की मांग

सोने की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे मुख्य कारण सुरक्षित एसेट्स की मौजूदा मांग है। जब स्टॉक, करेंसी और बॉन्ड मार्केट में बहुत ज़्यादा उतार-चढ़ाव होता है, तो इन्वेस्टर्स अपनी पूंजी का एक हिस्सा उन एसेट्स में लगाना पसंद करते हैं जिन्हें अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है। सोना लंबे समय से ऐसा ही एक ऑप्शन रहा है।

कई अन्य कारक भी कीमतों को सपोर्ट कर रहे हैं:

जियोपॉलिटिकल तनाव: वेस्ट एशिया में तनाव ने मार्केट की अनिश्चितता को बढ़ा दिया है।

महंगाई की चिंता: कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई के दबाव को और बढ़ा सकती हैं। सेंट्रल बैंक की खरीदारी: सेंट्रल बैंकों की ओर से सोने की खरीदारी से इसे लगातार सपोर्ट मिल रहा है।

निवेश की मांग: अनिश्चित माहौल के बीच गोल्ड ETF और निवेश के दूसरे तरीकों की बढ़ती मांग से भी कीमतें बढ़ सकती हैं।

करेंसी और बॉन्ड मार्केट में उतार-चढ़ाव: फाइनेंशियल मार्केट में उतार-चढ़ाव बढ़ने पर सोने की मांग मजबूत होती है।

कच्चा तेल भी महंगाई का संकेत देता है

सोने में तेजी को समझने के लिए कच्चे तेल की चाल पर नज़र रखना भी ज़रूरी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड लगभग $93.82 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है, जबकि US WTI क्रूड लगभग $86.78 प्रति बैरल पर है। पिछले हफ़्ते ब्रेंट में 7% से ज़्यादा और WTI में 8% से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई है। अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो दुनिया के कई हिस्सों में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। नतीजतन, मार्केट को चिंता है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहता है, तो तेल की सप्लाई में रुकावट आ सकती है, जिससे ग्लोबल महंगाई की समस्या और बढ़ जाएगी।

ग्लोबल मार्केट में भी सोना मजबूत हो सकता है

इंटरनेशनल मार्केट में भी सोने और चांदी की कीमतें बढ़ी हैं। COMEX पर सोना लगभग $4,612 प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था, जबकि चांदी लगभग $68.88 प्रति औंस पर थी। ग्लोबल मार्केट में कीमती धातुओं की मजबूती का असर भारतीय मार्केट पर भी पड़ता है; डॉलर-रुपये एक्सचेंज रेट में उतार-चढ़ाव के साथ-साथ, इंटरनेशनल कीमतों में बदलाव घरेलू सोने और चांदी के रेट को प्रभावित करते हैं।

क्या सोना और महंगा होगा?

सोने के मार्केट का भविष्य बहुत मजबूत है। कई ग्लोबल ब्रोकरेज और रिसर्च फर्मों ने निकट भविष्य में सोने के लिए ऊंचे प्राइस टारगेट का अनुमान लगाया है। ये अनुमान साफ ​​तौर पर बताते हैं कि ग्लोबल मार्केट में सोने को लेकर लॉन्ग-टर्म सेंटीमेंट मजबूत बना रहेगा। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कीमतें लगातार ऊपर ही जाएंगी; समय-समय पर प्रॉफिट-बुकिंग और कीमतों में तेज गिरावट भी आ सकती है।

निवेशकों को किन बातों पर नज़र रखनी चाहिए?

आने वाले दिनों में, US की ब्याज दर नीति, डॉलर इंडेक्स, कच्चे तेल की कीमतें, पश्चिम एशिया में तनाव, महंगाई के आंकड़े और सेंट्रल बैंक की खरीदारी सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

अगर जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ता है और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो ‘सेफ-हेवन’ (सुरक्षित निवेश) के तौर पर सोने की मांग इसे और सपोर्ट दे सकती है। इसके उलट, तनाव कम होने और रिस्की एसेट्स में निवेश बढ़ने से सोने और चांदी में कुछ प्रॉफिट-बुकिंग हो सकती है। कुल मिलाकर, दोनों ही मेटल्स के लिए माहौल सकारात्मक बना हुआ है। इन्वेस्टर्स को सिर्फ़ ऊपर बताए गए ट्रेंड के आधार पर खरीदारी करने के बजाय, अपनी रिस्क लेने की क्षमता और इन्वेस्टमेंट की अवधि पर भी विचार करना चाहिए।

श्रमिकों के सशक्तिकरण का नया दौर: छत्तीसगढ़ में श्रम कल्याण को मिल रही नई गति…

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सुरक्षित श्रम, सामाजिक सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, सम्मानजनक रोजगार और डिजिटल सेवाओं का व्यापक विस्तार**

राष्ट्र निर्माण में श्रमिकों का योगदान सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। श्रमिकों के सम्मान, सुरक्षा और समग्र विकास के बिना विकसित राज्य की कल्पना संभव नहीं है। इसी सोच को आधार बनाकर छत्तीसगढ़ शासन का श्रम विभाग श्रमिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन के निर्देशन में श्रमिकों के हितों की रक्षा, सामाजिक सुरक्षा का विस्तार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से सेवाओं को सरल बनाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। राज्य सरकार के ढाई साल  में श्रम विभाग की उपलब्धियाँ राज्य सरकार की श्रमिक हितैषी सोच और संवेदनशील प्रशासन का परिचायक हैं।

प्रशासनिक ढांचे का विस्तार, सेवाओं की बेहतर पहुंच

श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा श्रमिकों को त्वरित और गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने पाँच नए जिलों में श्रम पदाधिकारी कार्यालय स्थापित किए हैं। मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने बताया कि  पाँच श्रम पदाधिकारी कार्यालयों को सहायक श्रमायुक्त कार्यालय के रूप में उन्नत किया गया है। अब प्रदेश में 10 सहायक श्रमायुक्त कार्यालय एवं 23 श्रम पदाधिकारी कार्यालय सहित कुल 33 श्रम कार्यालय संचालित हैं। इससे श्रमिकों की समस्याओं के त्वरित निराकरण और योजनाओं के प्रभावी संचालन को नई गति मिली है।

समय के अनुरूप श्रम कानूनों में सुधार

औद्योगिक विकास और श्रमिक हितों के संतुलन को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने श्रम कानूनों में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। छत्तीसगढ़ कारखाना नियम, 1962 में संशोधन कर निर्धारित सुरक्षा प्रावधानों के साथ महिलाओं के रोजगार के अवसरों का विस्तार किया गया है। वहीं छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना नियम, 2021 में संशोधन के माध्यम से श्रम पहचान पंजीयन प्रमाण-पत्र अब 24 घंटे के भीतर जारी किए जाने का प्रावधान किया गया है। इससे उद्योगों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को सरल एवं पारदर्शी सेवाएँ उपलब्ध होंगी तथा ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को भी बढ़ावा मिलेगा।

56 लाख से अधिक श्रमिक सामाजिक सुरक्षा के दायरे में

श्रम विभाग के अंतर्गत संचालित छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल तथा असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल के माध्यम से अब तक लगभग 56.83 लाख संगठित, निर्माण एवं असंगठित श्रमिकों का पंजीयन किया जा चुका है।

3.48 लाख श्रमिकों को बीमा, चिकित्सा, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं कौशल उन्नयन जैसी सुविधाओं का लाभ**

वर्ष 2026 में 30 जून तक विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से लगभग 3.48 लाख श्रमिकों को बीमा, चिकित्सा, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं कौशल उन्नयन जैसी सुविधाओं का लाभ प्रदान किया गया है। इन योजनाओं पर लगभग 173.32 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं, जो श्रमिक कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

निर्माण श्रमिकों को बढ़ी आर्थिक सहायता

मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना के अंतर्गत आवास निर्माण अथवा घर खरीदने के लिए दी जाने वाली सहायता राशि एक लाख रुपये से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये कर दी गई है। यह निर्णय निर्माण श्रमिकों के अपने घर के सपने को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

महिला श्रमिकों को स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता के नए अवसर

इसी प्रकार दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के अंतर्गत पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिकों एवं उनके समूहों को ई-रिक्शा खरीदने के लिए सहायता राशि भी एक लाख रुपये से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये कर दी गई है। इससे महिला श्रमिकों को स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता के नए अवसर मिल रहे हैं।

शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई पहल

राज्य सरकार ने श्रमिक परिवारों के भविष्य को संवारने के उद्देश्य से अटल कैरियर निर्माण योजना प्रारंभ की है। इसके माध्यम से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को इंजीनियरिंग एवं मेडिकल जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए गुणवत्तापूर्ण निःशुल्क कोचिंग उपलब्ध कराई जाएगी।

पंजीकृत निर्माण श्रमिकों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण

वहीं मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक स्वास्थ्य परीक्षण योजना के माध्यम से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। इस पहल से बीमारियों की प्रारंभिक पहचान, समय पर उपचार तथा स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।

उत्कृष्ट शिक्षा से उज्ज्वल भविष्य की ओर

श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत पात्र निर्माण श्रमिकों के प्रथम दो बच्चों को कक्षा 6वीं से 12वीं तक उत्कृष्ट निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही है।मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप वर्ष 2026-27 से इस योजना के अंतर्गत लाभान्वित बच्चों की संख्या 100 से बढ़ाकर 200 कर दी गई है। यह पहल श्रमिक परिवारों के बच्चों के भविष्य को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का माध्यम बनेगी।

पाँच रुपये में पौष्टिक भोजन

शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना के माध्यम से पंजीकृत निर्माण, संगठित एवं असंगठित श्रमिकों को मात्र 5 रुपये में गरम एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 18 जिलों में 39 भोजन केन्द्र संचालित हैं, जो हजारों श्रमिकों के लिए राहत का माध्यम बने हुए हैं।

डिजिटल सेवाओं से बढ़ी पारदर्शिता

श्रम विभाग द्वारा विकसित ‘ई-श्रम साथी मोबाइल एप’ श्रमिकों और नियोजकों के लिए एक महत्वपूर्ण डिजिटल प्लेटफॉर्म बनकर उभरा है। इस एप के माध्यम से स्वयं पंजीयन, श्रमिक एवं नियोजक के बीच सीधा संपर्क तथा रोजगार संबंधी जानकारी आसानी से उपलब्ध हो रही है। इससे पारदर्शिता के साथ रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि हो रही है।

मॉडल लेबर चौक से मिलेगा सम्मानजनक वातावरण

राज्य सरकार द्वारा मॉडल लेबर चौक फेसिलिटेशन सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। इन केन्द्रों पर श्रमिकों के पंजीयन, विभिन्न योजनाओं के आवेदन, भोजन, पेयजल, विश्राम एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इससे श्रमिकों को सम्मानजनक एवं सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध होगा।

सामाजिक सुरक्षा को मिला नया विस्तार

मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना के अंतर्गत सामान्य मृत्यु पर आश्रितों को 1 लाख रुपये, कार्यस्थल दुर्घटना में मृत्यु होने पर 5 लाख रुपये तथा स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में 2.50 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जाती है। साथ ही अपंजीकृत निर्माण श्रमिकों की कार्यस्थल दुर्घटना में मृत्यु होने पर भी उनके आश्रितों को 1 लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

पंजीकृत श्रमिकों की मृत्यु पर आश्रितों को 1 लाख रुपये की सहायता

इसी प्रकार असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल के अंतर्गत पंजीकृत श्रमिकों की मृत्यु पर आश्रितों को 1 लाख रुपये तथा दिव्यांगता की स्थिति में 50 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है।

सुरक्षित कार्यस्थल की दिशा में प्रयास

राज्य के विभिन्न कारखानों में श्रमिकों को उनके कार्य के अनुरूप वरिष्ठ अधिकारियों एवं सुरक्षा अधिकारियों द्वारा नियमित प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। इससे कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित होने के साथ-साथ दुर्घटनाओं में कमी और उत्पादकता में वृद्धि हो रही है।

श्रमिक कल्याण की नई पहचान

छत्तीसगढ़ में श्रम विभाग द्वारा किए जा रहे व्यापक सुधार यह सिद्ध करता है कि राज्य सरकार श्रमिकों को केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास यात्रा का महत्वपूर्ण सहभागी मानती है। प्रशासनिक ढाँचे का विस्तार, श्रम कानूनों का आधुनिकीकरण, डिजिटल सेवाओं का विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, सामाजिक सुरक्षा एवं सम्मानजनक रोजगार जैसी पहलें श्रमिकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही हैं। श्रमिकों के कल्याण और सशक्तिकरण के इन प्रयासों से छत्तीसगढ़ समावेशी और संवेदनशील विकास की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है।

वंदे मातरम का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान…

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वंदे मातरम का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान**
कांग्रेस के लिए देश के कानून से बड़ा cwc का निर्णय**
अपमान को प्रस्ताव की शक्ल देने का प्रयास:- कोमल सिंह**

राजनांदगांव। विपक्षी दल के नेता कांग्रेस के सुप्रीमो राहुल गांधी अक्सर रैली और बैठकों में संविधान की दुहाई देकर अपने साथ संविधान की किताब को लहराते हैं, लेकिन जब बात संविधान के पालन की आती है तो वे और पूरी कांग्रेस इससे पीछे हट जाती है। इस बात का प्रमाण है कि कांग्रेस ने वंदे मातरम को लेकर संसद में बने कानून से हट कर अपनी वर्किंग कमेटी के निर्णय को बड़ा मान लिया है।

इस घटनाक्रम से कांग्रेस और राहुल गांधी का दोहरा चरित्र एक बार फिर उजागर हुआ है। भाजपा जिलाध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत ने कांग्रेस की ओर से पारित प्रस्ताव की निंदा की है और इसे संविधान का अपमान बताया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अब अपने अपमान को एक प्रस्ताव की शक्ल दे दी है। उसकी कार्यसमिति ने तय किया है कि कांग्रेस के मंचों पर ‘वंदे मातरम्’ के केवल पहले दो छंद ही गाए जाएंगे।

जबकि संसद में पारित हुए कानून के मुताबिक वंदे मातरम के पूरे छह छंद गाना अनिवार्य कर दिया गया है। श्री राजपूत ने कहा की स्वतंत्रता दिवस के दिन वंदे मातरम का यही अपमान एक व्यक्ति के आचरण में उजागर हुआ था, तब कांग्रेस ने उसे संयोग बता कर टाल दिया था। आज वही अपमान कांग्रेस की नीति बन चुका है। उन्होंने कहा, ”भारत माता की इस पावन वंदना का अपमान उन हजारों बलिदानियों का तिरस्कार है, जिन्होंने इसी गीत को अपनी चेतना में रखकर राष्ट्र के लिए बलिदान दिया था।

यह केवल एक राजनीतिक बचाव नहीं, बल्कि उस वोट बैंक की भूख का प्रमाण है, जिसके आगे कांग्रेस ने हर बार राष्ट्र के स्वाभिमान को गिरवी रखा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने साबित कर दिया है कि वो खुद को देश और संविधान से ऊपर मानती है। अपनी पार्टी के प्रस्ताव को संविधान के कानून से ऊपर मानती है। इसके साथ अब कांग्रेस ने इस अटकलों पर विराम लगा दिया है कि वो अब आज की नई मुस्लिम लीग बन गई है। वंदे मातरम को लेकर 1937 में मुस्लिम लीग की जो जिद थी, वही जिद आज संसद से पारित कानून के बाद कांग्रेस की वंदे मातरम को लेकर है।

जनता के बीच जाकर करेंगे कांग्रेस का पर्दाफाश

भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी एक बार फिर तुष्टीकरण की राजनीति कर रहे हैं। राष्ट्रगीत पूरा न गाना अवहेलना है। इस फैसले ने कांग्रेस के तुष्टीकरण की पुष्टि की है। ये संसद में पारित एक्ट को खारिज कर रहे हैं। लेकिन अब तुष्टीकरण की राजनीति नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि बीजेपी जनता के बीच जाकर कांग्रेस के फैसले का विरोध करेगी। श्री राजपूत ने बताया कि केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश अनुसार हम लोगों के बीच जा कर कांग्रेस के संविधान विरोधी मुखौटे का पर्दाफाश करेंगे।

अब ऑनलाइन देखी जा सकेगी आश्रम-छात्रावासों में प्रवेशित विद्यार्थियों की जानकारी…

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अब ऑनलाइन देखी जा सकेगी आश्रम-छात्रावासों में प्रवेशित विद्यार्थियों की जानकारी**

रायपुर: छत्तीसगढ़ में आदिम जाति विकास, अनुसूचित जाति विकास, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग द्वारा संचालित आश्रम-छात्रावासों में निवासरत छात्र-छात्राओं की जानकारी अब ऑनलाइन उपलब्ध होगी। पारदर्शिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कार्यालय आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास, नवा रायपुर द्वारा यह व्यवस्था की गई है।

आश्रम-छात्रावास प्रबंधन प्रणाली पोर्टल https://hmstribal.cg.nic.in पर प्रवेशित सभी छात्र-छात्राओं की जानकारी पोर्टल के होम पेज पर प्रदर्शित की जाएगी। आम नागरिक पोर्टल के “विद्यार्थी उपस्थिति रिपोर्ट” मेनू पर क्लिक कर विद्यार्थियों से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

इस व्यवस्था के तहत शासकीय, अशासकीय, अनुदान प्राप्त, विशिष्ट संस्थाओं सहित सभी आश्रम-छात्रावासों में प्रवेशित छात्र-छात्राओं की जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध होगी। साथ ही प्रत्येक माह की विद्यार्थियों की उपस्थिति भी अगले माह की 10 तारीख तक पोर्टल पर प्रदर्शित की जाएगी।

इसके अलावा शासन की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति तथा जनजाति विद्यार्थी उत्कर्ष योजना (पूर्व में जवाहर उत्कर्ष योजना) के अंतर्गत लाभान्वित छात्र-छात्राओं की जानकारी भी पोर्टल के “नया क्या है” टैब पर क्लिक कर प्राप्त की जा सकती है।

इस ऑनलाइन व्यवस्था से आश्रम-छात्रावासों में प्रवेशित विद्यार्थियों की जानकारी और उनकी उपस्थिति को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराने के साथ-साथ व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर निगरानी सुनिश्चित होगी।

छत्तीसगढ़ बनेगा देश का अग्रणी मत्स्य हबर : केंद्रीय सचिव श्री लेखी…

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छत्तीसगढ़ बनेगा देश का अग्रणी मत्स्य हब : केंद्रीय सचिव श्री लेखी**

भारत सरकार के 900 और राज्य सरकार के 300 करोड़ से मत्स्य क्रांति को मिली रही गति**

तिलापिया उत्पादन को बढ़ाने प्रदेश में रायपुर, धमतरी और कांकेर कलस्टर होगा विकसित**

पीएम मत्स्य संपदा योजना से 956.86 करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत**

आधुनिक तकनीक, निर्यात और किसानों की आय बढ़ाने पर केंद्र एवं राज्य का विशेष फोकस**

रायपुर: केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के सचिव श्री अविलक्ष्य लेखी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना देश के मत्स्य किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक परिवर्तनकारी पहल है। योजना के विभिन्न घटकों के माध्यम से राज्यों के मत्स्य किसानों को आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहायता एवं अधोसंरचना उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे मत्स्य क्षेत्र में व्यापक बदलाव देखने को मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि छोटे एवं मध्यम श्रेणी के ऐसे मत्स्य किसान, जिनकी बैंकिंग सेवाओं तक सहज पहुंच नहीं हो पाती, उन्हें योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए अधिकारियों को बैंकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कोई भी पात्र किसान योजनाओं से वंचित न रहे।

केंद्रीय सचिव श्री लेखी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में मत्स्य उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं और इन्हें साकार करने के लिए केंद्र सरकार देश के विभिन्न राज्यों में 34 मत्स्य क्लस्टरों का विकास करने जा रही है। इनमें छत्तीसगढ़ में तिलापिया कलस्टर शामिल है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार राज्य के मत्स्य क्षेत्र की विभिन्न परियोजनाओं पर लगभग 900 करोड़ रुपये व्यय और स्वीकृत कर चुकी है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और तिलापिया उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने इसे मत्स्य क्षेत्र के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में उत्पादित मछलियों का निर्यात आयरलैंड, शिकागो सहित अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक हो रहा है। प्रदेश में 2 हजार से अधिक किसान तिलापिया पालन कर रहे हैं। इन किसानों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने के लिए एक्सपोजर विजिट की कार्ययोजना तैयार करने, उन्नत गुणवत्ता के मत्स्य बीज उत्पादन हेतु नई हैचरियों की स्थापना तथा आधुनिक तकनीकों के विस्तार पर विशेष बल दिया गया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मत्स्य किसानों से संवाद कर उनके सुझाव भी प्राप्त किए।

इस अवसर पर कृषि उत्पादन आयुक्त एवं सचिव, मछलीपालन विभाग ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार मत्स्य पालन को किसानों और मछुआरों की आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य आज मत्स्य बीज उत्पादन में देश में चौथे तथा मछली उत्पादन में छठे स्थान पर पहुंच चुका है। प्रदेश में लगभग 2.08 लाख हेक्टेयर जलक्षेत्र में 9.59 लाख मीट्रिक टन मछली उत्पादन किया जा रहा है। राज्य में 2021 पंजीकृत मत्स्य सहकारी समितियां, 1662 स्व-सहायता समूह, 123 मत्स्य हैचरियां, 102 मत्स्य बीज उत्पादन फार्म तथा 4 थोक मत्स्य बाजार संचालित हैं।

श्री परदेशी ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत पिछले छह वर्षों में राज्य के लिए 956.86 करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनमें से 272.37 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। योजना के तहत बायोफ्लॉक, आरएएस, केज कल्चर, तालाब निर्माण, लाइव फिश वेंडिंग सेंटर, कोल्ड स्टोरेज, फीड मिल और अन्य आधुनिक अधोसंरचनाओं का तेजी से विस्तार किया गया है। कोरबा जिले के बांगो जलाशय में 37.10 करोड़ रुपये की लागत से एक्वा पार्क की स्थापना भी की जा रही है।

कृषि उत्पादन आयुक्त श्री परदेशी ने कहा कि वर्ष 2026-27 के लिए विभाग ने व्यापक कार्ययोजना तैयार की है, जिसमें आधुनिक तकनीकों का विस्तार, मत्स्य अधोसंरचना का सुदृढ़ीकरण, विपणन एवं मूल्य संवर्धन को बढ़ावा तथा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से हजारों परिवारों को रोजगार एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। ‘नवा अंजोर@2047‘ के अंतर्गत रायपुर, धमतरी एवं कांकेर जिलों में तिलापिया क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत वर्ष 2026-27 के लिए 37,857 लाख रुपये की कार्ययोजना स्वीकृत की गई है।

कार्यक्रम में केंद्रीय सचिव ने अधिकारियों को मत्स्य उत्पादन बढ़ाने, किसानों की आय में वृद्धि, वित्तीय समावेशन, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन तथा निर्यात क्षमता को और मजबूत करने के लिए समन्वित प्रयास करने के निर्देश दिए। बैठक में नाबार्ड, एमपीईडीए (MPEDA), सीफा (CIFA) सहित विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे। अंत में मत्स्य पालन विभाग के संचालक श्री एन.एस. नाग ने आभार व्यक्त किया। बढ़ी संख्या में मत्स्य किसान एवं छत्तीसगढ़ राज्य मछुआरा बोर्ड के चेयरमेन उपस्थित थे।

बाढ़ आपदा से निपटने सभी 33 जिलों में मॉक ड्रिल…

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जमीनी स्तर पर तैयारियों को परखा गया, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों ने लिया हिस्सा**

रायपुर: छत्तीसगढ़ में बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा की स्थिति से निपटने और त्वरित, प्रभावी राहत-बचाव कार्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्यभर में व्यापक स्तर पर मॉक ड्रिल एक्सरसाइज आयोजित की गई। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी की अध्यक्षता में प्रदेश के सभी 33 जिलों में जिला प्रशासन के नेतृत्व में यह अभ्यास संपन्न हुआ। नवा रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पूरी गतिविधि की निगरानी की गई।

विभिन्न विभागों और सुरक्षा बलों का दिखा तालमेल

मॉक ड्रिल के दौरान बाक़ायदे बाढ़ की अलग-अलग संभावित परिस्थितियां निर्मित की गईं। इसमें एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना, पुलिस, होमगार्ड, नगर सेना और अग्निशमन सेवाओं के अलावा राजस्व, जल संसाधन, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, पशुपालन और दूरसंचार विभागों के बीच सूचना के आदान-प्रदान और समन्वय की गति को परखा गया।

पूर्व चेतावनी से लेकर राहत शिविरों तक की कार्यप्रणाली का अभ्यास

इस अभ्यास में बाढ़ की पूर्व चेतावनी जारी करने, प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, राहत शिविरों के संचालन, बचाव नौकाओं व संसाधनों की तैनाती और मेडिकल टीमों की व्यवस्था का पूरा रिहर्सल किया गया। जिला स्तर पर त्वरित निर्णय लेने और मैदानी अमले की प्रतिक्रिया क्षमता की समीक्षा की गई।

गैप्स को पहचानकर दूर करने पर जोर

आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के अधिकारियों ने रायपुर जिले में अभ्यास का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आपदा के समय किसी भी स्तर पर सामने आने वाले अंतर (गैप्स) – जैसे सूचना में देरी या संसाधनों की कमी को समय रहते पहचानकर दूर करना है।

राज्य स्तरीय इस टेबल-टॉप और व्यावहारिक मॉक ड्रिल में एनडीएमए नई दिल्ली के वरिष्ठ सलाहकार श्री रविंद्र गुरुंग, बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के डॉ. जीवन कुमार, राजस्व व आपदा प्रबंधन विभाग के उप सचिव श्री गजेंद्र ठाकुर सहित विभिन्न अंतर-विभागीय अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े रहे।

जल-जीवन मिशन के तहत आयोजित हुई कलेक्टर कॉन्फ्रेंस…

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जल-जीवन मिशन के तहत आयोजित हुई कलेक्टर कॉन्फ्रेंस**

हर-घर जल के लिए कलेक्टर व्यक्तिगत रूचि लें: मुख्य सचिव**

पूर्ण योजनाओं को करायें भौतिक सत्यापन**

रायपुर: मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये प्रदेश में जल-जीवन मिशन के कार्यों की समीक्षा के लिए कलेक्टर कॉन्फ्रेंस आयोजित की। मुख्य सचिव ने जिलों के कलेक्टरों से उनके जिले के जल-जीवन मिशन के कार्यों की जानकारी ली।

मुख्य सचिव ने कलेक्टरों से कहा  कि वे जल-जीवन मिशन के तहत हर घर जल पहुंचाने के लिए व्यक्तिगत रूचि लेकर काम करें। लोगों के घरों में नलों से पानी मिल इसके लिए चलायी जा रही स्कीमों को तहत पूर्ण करायें। पूर्ण हो चुकी योजनाओं का भौतिक सत्यापन करायें और पंचायतों को हस्तांतरित योजनाओं के लंबित भुगतान शीघ्र करायें। मुख्य सचिव ने साफ कहा है जल जीवन मिशन के कार्यों में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कलेक्टर कॉन्फ्रेंस में सोलर आधारित योजनाओं एवं क्रेडा संबंधित नल-जल योजनाओं के कार्यों के संबंध में विचार विमर्श किया गया एवं आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए। कॉन्फ्रेंस के दौरान पूर्ण एवं हस्तांतरित योजनाओं के भुगतान की कार्यवाही शीघ्रता से करने के निर्देश दिए गए है।  कलेक्टरों को स्त्रोत समस्यामूलक योजनाओं के कार्यों को स्थानीय निधि से पूर्ण कराने कहा गया है।

मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को निर्देश दिए कि जहां सब इंजीनियरों की कमी है वहां पर दूसरे विभागों के इंजीनियरों से जल-जीवन मिशन के कार्यों को कराने के लिए कार्यवाही करें। कॉन्फ्रेंस में जिला जल एवं स्वच्छता समिति की नियमित मासिक बैठक हो यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए है।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक बैठक की कार्यवाही का समय पर विभागीय पोर्टल पर अपलोड की जाए तथा जल जीवन मिशन की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी कलेक्टर स्पष्ट आकलन, बेहतर योजना और प्रभावी समन्वय के साथ मिशन मोड में कार्य करें, ताकि राज्य के प्रत्येक परिवार को समयबद्ध रूप से हर घर नल से जल उपलब्ध कराया जा सके।

बैठक में 55 एलपीसीडी 7 दिवसों से कम जल प्रदाय की जा रही स्कीमों की जानकारी अधिकारियों से ली गई। बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव श्री अब्दुल कैसर हक सहित लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग एवं जल जीवन मिशन के अधिकारी मौजूद थे। वीडियो कॉन्फ्रेंस से सभी जिलों के कलेक्टर एवं जिला स्तरीय विभागीय अधिकारी शामिल हुए।

मंत्री श्री नेताम की अध्यक्षता में संचालक मंडल की बैठक सम्पन्न…

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एकलव्य विद्यालयों में गणवेश, मेस संचालन एवं अन्य व्यवस्थाओं में एकरूपता पर जोर**

रायपुर: आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम की अध्यक्षता में आज नवा रायपुर स्थित टीआरटीआई के सभाकक्ष में आदिम जाति कल्याण आवासीय एवं आश्रम शैक्षणिक संस्थान समिति के संचालक मंडल की बैठक सम्पन्न हुई।

बैठक में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों के संचालन, शैक्षणिक गुणवत्ता तथा विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की समीक्षा की गई।

मंत्री श्री नेताम ने इस अवसर पर टीआरटीआई द्वारा प्रकाशित गुमनाम जननायक पुस्तक का भी विमोचन किया।

उन्होंने इस दौरान शहीद वीरनारायण सिंह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सह स्मारक में दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्य कर रही सुश्री अंबिका ध्रुव का नगर सैनिक में चयनित होने पर सम्मानित भी किया।”

मंत्री श्री नेताम ने एकलव्य विद्यालयों में गणवेश, मेस संचालन, भोजन व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं में एकरूपता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण एवं गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।”

बैठक में नेस्ट्स एवं राज्य सरकार के भर्ती नियमों के अनुरूप योग्यता रखने वाले एकलव्य विद्यालयों के पूर्व अतिथि शिक्षकों को पुनः अवसर प्रदान करने के विषय पर भी सहमति बनी।

बैठक में बताया गया कि छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 75 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय संचालित हैं। साथ ही एकलव्य विद्यालयों की चतुर्थ राष्ट्रीय क्रीड़ा प्रतियोगिता में प्रदेश के विद्यार्थियों की उपलब्धियों की जानकारी दी गई।”

नवंबर 2025 में ओडिशा के सुंदरगढ़ में आयोजित प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ के 466 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया और प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय स्थान प्राप्त किया। खिलाड़ियों ने 55 स्वर्ण पदक सहित कुल 126 पदक अर्जित किए।”

मंत्री श्री नेताम ने इस उपलब्धि पर विद्यार्थियों, प्रशिक्षकों एवं अधिकारियों की सराहना की।

इस अवसर पर विभाग के सचिव श्री भुवनेश यादव, आयुक्त श्री राहुल वेंकट, टीआरटीआई की संचालक श्रीमती हिना अनिमेष नेताम, संचालक मंडल के सदस्य एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।”