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Iran US Ceasefire: ‘तुरंत देश छोड़ें भारतीय’, सीजफायर के बाद इंडिया की एडवाइजरी,  Helpline Number जारी…

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अमेरिका और ईरान दो हफ़्ते के लिए युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं लेकिन इस बीच, तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने 8 अप्रैल को सभी भारतीय नागरिकों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है और सभी भारतीयों से देश छोड़ने की अपील की है, ये कदम भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के मद्दे नजर उठाया गया है।

ये निर्देश 7 अप्रैल को जारी पिछली एडवाइजरी का ही अगला हिस्सा है।

एडवाइजरी में साफ तौर पर निम्नलिखित बातें कही गई हैं और साथ ही हेल्पलाइन नंबर्स जारी किए गए हैं। घटनाक्रमों को देखते हुए, जो भारतीय नागरिक अभी भी ईरान में हैं, उन्हें दृढ़तापूर्वक सलाह दी जाती है कि वे दूतावास के समन्वय से और दूतावास द्वारा सुझाए गए मार्गों का उपयोग करके शीघ्रता से ईरान छोड़ दें। यह पुनः दोहराया जाता है कि दूतावास के साथ पूर्व परामर्श और समन्वय के बिना किसी भी अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमा तक पहुँचने का कोई भी प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।

दूतावास के आपातकालीन नंबर नीचे दिए गए हैं।

मोबाइल नंबर:

+989128109115
+989128109102
+989128109109
+989932179359

ईमेल: cons.tehran@mea.gov.in

US-Iran सीजफायर का भारत ने किया स्वागत

US-Iran सीजफायर का भारत ने स्वागत किया है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि ‘हम संघर्ष-विराम का स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति आएगी। जैसा कि हमने पहले भी लगातार ज़ोर दिया है, चल रहे संघर्ष को जल्द से जल्द खत्म करने के लिए तनाव कम करना, बातचीत और कूटनीति ज़रूरी हैं। इस संघर्ष ने लोगों को पहले ही बहुत ज़्यादा तकलीफ़ दी है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा व्यापार नेटवर्क को बाधित किया है। हमें उम्मीद है कि होर्मुज़ स्ट्रेट से होकर आवागमन की निर्बाध स्वतंत्रता और वैश्विक व्यापार का प्रवाह बना रहेगा।

सीजफायर पर ट्रंप ने क्या कहा?

सीजफायर के ऐलान के बाज डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ‘विश्व शांति के लिए एक बहुत बड़ा दिन’! ईरान भी यही चाहता है, अब उनका सब्र टूट चुका है! और ठीक इसी तरह, बाकी सभी का भी! यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका, Strait of Hormuz में जहाज़ों की आवाजाही को सुचारू बनाने में मदद करेगा। वहां बहुत सारे सकारात्मक काम होंगे! इससे बहुत ज़्यादा पैसा भी कमाया जाएगा। ईरान अब अपने पुनर्निर्माण का काम शुरू कर सकता है। हम हर तरह की ज़रूरी चीज़ों से लदे हुए वहां मौजूद रहेंगे ताकि यह पक्का हो सके कि सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा है। मुझे पूरा भरोसा है कि ऐसा ही होगा। ठीक वैसे ही, जैसा कि हम US में अनुभव कर रहे हैं, यह Middle East का ‘स्वर्ण युग’ साबित हो सकता है!’

India Bangladesh: दिल्ली में भारत-बांग्लादेश विदेश मंत्री की हुई मुलाकात, किन मुद्दों पर चर्चा…

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नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में आज भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई।

इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने भारत और बांग्लादेश के पुराने और भरोसेमंद रिश्तों को और गहरा करने पर जोर दिया।

डॉ. जयशंकर ने सोशल मीडिया के जरिए बताया कि बातचीत काफी सकारात्मक रही, जिसमें आपसी सहयोग और विकास के नए रास्तों पर चर्चा की गई। यह बैठक न केवल दोनों देशों के बीच की दोस्ती को दर्शाती है, बल्कि दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता बनाए रखने के साझा संकल्प को भी मजबूत करती है।

आपसी रिश्तों में मजबूती

बैठक का मुख्य केंद्र दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाना था। डॉ. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना दोनों की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि हम अपने संबंधों को और भी विविध बनाना चाहते हैं ताकि आम नागरिकों को इसका सीधा लाभ मिल सके।

क्षेत्रीय और ग्लोबल मुद्दों पर चर्चा

नेताओं ने केवल अपने देशों की बात नहीं की, बल्कि आस-पड़ोस और दुनिया में हो रही हलचल पर भी विचार साझा किए। दक्षिण एशिया की सुरक्षा और वैश्विक स्तर पर बदलती परिस्थितियों को लेकर दोनों मंत्रियों ने लंबी बात की। उनका मानना है कि क्षेत्रीय शांति के लिए दोनों देशों का एक साथ मिलकर सोचना और कदम उठाना बेहद जरूरी है।

कनेक्टिविटी और व्यापार पर जोर

भारत और बांग्लादेश के बीच सामानों की आवाजाही को आसान बनाने और लोगों के आपसी संपर्क को बेहतर करने पर विशेष चर्चा हुई। सीमाओं पर व्यापार की सुविधाओं को सुधारने और नए रेल व सड़क मार्गों के विकास पर सहमति बनी। इससे न केवल आर्थिक लाभ होगा, बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव भी और गहरा होगा।

भविष्य का साझा रास्ता

अंत में, दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि वे भविष्य में भी इसी तरह घनिष्ठ संपर्क बनाए रखेंगे। डॉ. जयशंकर ने मेहमान प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि नियमित बातचीत से छोटी-मोटी समस्याओं को सुलझाने और बड़े लक्ष्यों को पाने में मदद मिलती है। दोनों देश आने वाले समय में कई साझा प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू करने के लिए तैयार हैं।

Iran-US Ceasefire: मिडिल ईस्ट में शांति की नई उम्मीद? ट्रंप के बयान से बढ़ी हलचल, ईरान को लेकर दिया बड़ा संकेत…

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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘Truth Social’ पर एक पोस्ट के जरिए मध्य पूर्व (Middle East) में शांति को लेकर बड़ा दावा किया है।

ट्रंप ने कहा कि यह विश्व शांति के लिए एक बड़ा दिन हो सकता है और संकेत दिया कि ईरान भी अब तनाव खत्म करने के लिए तैयार है। ट्रंप के मुताबिक, “ईरान अब इससे आगे बढ़ना चाहता है, वे थक चुके हैं। सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि दुनिया के बाकी देश भी इस तनाव से बाहर निकलना चाहते हैं।”

उनके इस बयान को मौजूदा भू-राजनीतिक हालात के बीच काफी अहम माना जा रहा है, खासकर तब जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ (Strait of Hormuz) जैसे रणनीतिक समुद्री मार्ग पर तनाव लगातार बना हुआ है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर स्थिति संभालने में मदद करेगा अमेरिका

ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में ट्रैफिक की समस्या को संभालने में मदद करेगा। यह इलाका वैश्विक तेल सप्लाई का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां किसी भी तरह का तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका न केवल सुरक्षा बल्कि लॉजिस्टिक सपोर्ट भी प्रदान करेगा। “हम हर तरह की सप्लाई लेकर वहां मौजूद रहेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि सब कुछ सुचारू रूप से चले,” ट्रंप ने लिखा।

ट्रंप का मिडिल ईस्ट का गोल्डन एज का दावा

ट्रंप के बयान का एक अहम हिस्सा ईरान के पुनर्निर्माण (Reconstruction) को लेकर भी था। उन्होंने कहा कि अब ईरान के पास अपने देश के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने का मौका है। ट्रंप ने अपने पोस्ट में एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि जैसे अमेरिका इस समय गोल्डन एज का अनुभव कर रहा है, वैसे ही मध्य पूर्व भी एक नए स्वर्णिम दौर में प्रवेश कर सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में इस क्षेत्र में स्थिरता, आर्थिक विकास और शांति देखने को मिल सकती है।

ट्रंप के इस बयान के क्या हैं मायने?

ट्रंप का यह बयान कई मायनों में महत्वपूर्ण है। यह ईरान-अमेरिका संबंधों में संभावित सुधार का संकेत देता है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ाता है। ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई है। भारत के संदर्भ में, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का खुलना सीधा रसोई गैस (LPG) और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर असर डालेगा।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप के इन दावों पर आधिकारिक स्तर पर क्या प्रतिक्रिया आएगी और क्या वाकई जमीन पर कोई ठोस बदलाव देखने को मिलेगा। लेकिन इतना जरूर है कि उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह विश्व शांति का बड़ा दिन वास्तव में एक नई शुरुआत साबित होगा या सिर्फ एक राजनीतिक बयान बनकर रह जाएगा।

Assam Election में जुबानी जंग तेज! खरगे के ‘जहरीले सांप’ और ‘अनपढ़’ वाले बयान पर छिड़ी सियासी रार…

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Assam Election 2026: असम विधानसभा चुनाव के मतदान से ठीक पहले राज्य का राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा भाजपा और आरएसएस की तुलना जहरीले सांपों से करने और गुजरात के लोगों को अनपढ़ बताने वाले बयानों ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है।

भाजपा ने इन बयानों को लेकर खरगे के खिलाफ पुलिस और चुनाव आयोग (EC) में शिकायत दर्ज कराई है, जबकि दूसरी ओर असम पुलिस ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के दिल्ली स्थित आवास पर तलाशी अभियान चलाया है।

BJP-RSS जहरीले सांप की तरह: खरगे का तीखा हमला

असम के श्रीभूमि जिले में सोमवार को एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने धार्मिक संदर्भ देते हुए भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने कहा अगर नमाज पढ़ते समय सामने से जहरीला सांप गुजर रहा हो, तो नमाज छोड़कर उस सांप को मार देना चाहिए। नमाज टूटने से फर्क नहीं पड़ता, लेकिन उस सांप को मारना जरूरी है। आरएसएस और भाजपा वही जहरीले सांप हैं। इससे पहले रविवार को केरल के इडुक्की में खरगे ने केरल के लोगों को पढ़ा-लिखा और चतुर बताते हुए कहा था कि उन्हें गुजरात और कुछ अन्य जगहों के अनपढ़ लोगों की तरह गुमराह नहीं किया जा सकता।

भाजपा का पलटवार: खरगे का बयान शर्मनाक और अपमानजनक

दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वरिष्ठ भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने खरगे के बयानों की कड़ी निंदा की। प्रसाद ने कहा कि खरगे को गुजरात, बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों को अनपढ़ कहने के लिए पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने इसे शर्मनाक और नीच मानसिकता करार दिया।

राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए प्रसाद ने कहा, अगर राहुल गांधी में थोड़ी भी समझ है, तो उन्हें इस बयान की निंदा करनी चाहिए। खरगे उस पद पर बैठे हैं जिसे कभी नेहरू और पटेल जैसे दिग्गजों ने संभाला था, लेकिन उन्होंने पद की गरिमा को गिरा दिया है। इस बीच, भाजपा के सोशल मीडिया प्रभारी रंजीब कुमार शर्मा ने गुवाहाटी के वशिष्ठ पुलिस स्टेशन में खरगे के खिलाफ FIR दर्ज कराई है।

पवन खेड़ा के घर असम पुलिस की दबिश

विवाद केवल बयानों तक सीमित नहीं रहा। 7 अप्रैल को असम पुलिस की एक टीम ने दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा के घर की तलाशी ली। दरअसल, पवन खेड़ा ने दो दिन पहले असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां शर्मा पर विदेशों में अघोषित संपत्ति और चार देशों के पासपोर्ट रखने के आरोप लगाए थे। रिंकी भुइयां शर्मा की शिकायत पर गुवाहाटी क्राइम ब्रांच ने मामला दर्ज किया है। पुलिस ने कहा कि खेड़ा घर पर नहीं मिले, लेकिन तलाशी में कुछ आपत्तिजनक सामग्री मिली है।

राहुल गांधी का जवाब: दलित समुदाय का अपमान

मुख्यमंत्री सरमा की पागल वाली टिप्पणी पर राहुल गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने X पर पोस्ट किया खरगे जी देश के एक वरिष्ठ और लोकप्रिय दलित नेता हैं। उनके खिलाफ ऐसी अभद्र भाषा का इस्तेमाल पूरे एससी/एसटी समुदाय का अपमान है। प्रधानमंत्री मोदी की इस पर चुप्पी उनकी सहमति दर्शाती है। यह करोड़ों दलितों की गरिमा पर हमला है।

चुनाव ले 24 घंटे पहले माहौल में बढ़ी तल्खी

असम में 9 अप्रैल को एक चरण में मतदान होना है, जबकि 4 मई को नतीजे आएंगे। ऐसे में चुनावी माहौल के बीच नेताओं के बयान और आरोप-प्रत्यारोप लगातार तीखे होते जा रहे हैं। 9 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले असम का चुनाव अब व्यक्तिगत आरोपों और कानूनी लड़ाइयों के केंद्र में आ गया है। जहां भाजपा इसे “विकास बनाम विनाश” की लड़ाई बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे लोकतंत्र बचाने का युद्ध करार दे रही है।

Bengal Election: BJP ने जारी की छठी लिस्ट,कोलकाता पोर्ट से राकेश सिंह पर दांव, ममता के किले में सेंध की तैयारी…

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Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए सियासी संग्राम अब अपने चरम पर पहुंच गया है। राज्य की सत्ता पर काबिज होने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी रणनीतिक बिसात बिछाते हुए उम्मीदवारों की छठी सूची जारी कर दी है।

इस सूची में सबसे चौंकाने वाला और महत्वपूर्ण नाम कोलकाता पोर्ट (Kolkata Port) सीट से सामने आया है, जहां भाजपा ने राकेश सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है।

राकेश सिंह की उम्मीदवारी केवल एक नाम नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस गढ़ में सीधी चुनौती है, जिसे तृणमूल कांग्रेस (TMC) का सबसे मजबूत स्तंभ माना जाता रहा है।

BJP Candidates 6th List में कोलकाता पोर्ट से राकेश सिंह का दांव, BJP के लिए क्यों खास हैं राकेश सिंह?

कोलकाता पोर्ट विधानसभा सीट रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। यहां की जनसांख्यिकी और व्यापारिक पृष्ठभूमि इसे चुनाव का केंद्र बिंदु बनाती है। भाजपा ने राकेश सिंह को चुनावी मैदान में उतारकर ‘लोकल बनाम बाहरी’ के नैरेटिव को काटने की कोशिश की है।

वे स्थानीय मुद्दों पर मुखर रहे हैं और पोर्ट इलाके के श्रमिकों व व्यापारियों के बीच उनकी सक्रिय पहचान है। छठी लिस्ट में इस एकल नाम की घोषणा यह संकेत देती है कि पार्टी प्रत्येक सीट पर सूक्ष्म स्तर (Micro-level) पर मंथन कर रही है।

Bengal Election में क्या है भाजपा की रणनीति, ‘ममता के गढ़’ में कैसे होगी सेंधमारी?

2026 का चुनाव भाजपा के लिए केवल सीटों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीतिक संस्कृति को बदलने की लड़ाई है। भाजपा मुख्य रूप से तीन स्तरों पर काम कर रही है। भाजपा राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर विफल होने का आरोप लगा रही है। संदेशखाली जैसी घटनाओं को भाजपा ने महिला अस्मिता से जोड़कर टीएमसी के महिला वोट बैंक में दरार डालने की योजना बनाई है।

Bengal Election: दीदी की फिर होगी वापसी या BJP की बनेगी सरकार? ये ‘हॉट सीटें’ तय करेंगी किसके सिर सजेगा ताज

शहरी मतदाताओं पर फोकस: कोलकाता की सीटें हमेशा से टीएमसी का मजबूत आधार रही हैं। भाजपा इस बार ‘विकास और बदलाव’ के नारे के साथ कोलकाता पोर्ट जैसी शहरी सीटों पर सेंध लगाकर दीदी के मनोवैज्ञानिक प्रभाव को कम करना चाहती है।

ध्रुवीकरण बनाम विकास: जहां भाजपा ‘सोनार बांग्ला’ और मोदी की गारंटी की बात कर रही है, वहीं वह हिंदुत्व के एजेंडे के साथ-साथ नागरिकता (CAA) जैसे मुद्दों को भी धार दे रही है।

TMC के लिए कितना फायदा, कितना नुकसान?

ममता बनर्जी के लिए यह चुनाव उनकी 15 साल की विरासत को बचाने की चुनौती है। टीएमसी की सबसे बड़ी ताकत ममता बनर्जी का चेहरा और उनकी ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी कल्याणकारी योजनाएं हैं। ग्रामीण बंगाल और अल्पसंख्यक वोट अभी भी काफी हद तक दीदी के साथ मजबूती से खड़े दिख रहे हैं।

15 साल के शासन के बाद प्रशासनिक थकान और स्थानीय नेताओं के खिलाफ नाराजगी Anti-incumbency टीएमसी के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द है। भाजपा इसी असंतोष को वोटों में बदलने की ताक में है। कोलकाता जैसे शहरी क्षेत्रों में मध्यम वर्ग की नाराजगी टीएमसी के समीकरण बिगाड़ सकती है।

क्या 2026 का ‘खेला’ होगा दिलचस्प

बंगाल चुनाव अब केवल कागजों पर नहीं, बल्कि सड़कों और बूथों पर लड़ा जा रहा है। भाजपा की छठी सूची और कोलकाता पोर्ट से राकेश सिंह का चयन यह बताता है कि मुकाबला ‘आर-पार’ का होने वाला है। एक तरफ ममता बनर्जी का ‘मा-माटी-मानुष’ का नारा है, तो दूसरी तरफ भाजपा का आक्रामक संगठनात्मक ढांचा। कोलकाता की सड़कों पर बिछी यह राजनीतिक बिसात यह तय करेगी कि बंगाल में ‘खेला’ होगा या ‘कमल’ खिलेगा।

एसआईआर मुद्दों पर टीएमसी प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात की…

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पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभ्यास के आसपास चल रहे विवादों के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) का एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को चुनाव आयोग (EC) से मिलने वाला है। पार्टी का इरादा चुनाव पैनल द्वारा नियुक्त कई मध्य-स्तरीय अधिकारियों और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच कथित संबंधों को संबोधित करने का है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, TMC के राज्यसभा नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने घोषणा की कि उन्होंने सोमवार को EC से मिलने का अनुरोध किया था, और उन्हें मंगलवार को दोपहर 3 बजे तक जवाब मिल गया था। प्रतिनिधिमंडल, जिसमें साकेत गोखले, मेनका गुरुस्वामी, ओ’ब्रायन और सागरिका घोष शामिल हैं, बुधवार सुबह EC से मिलेगा। ओ’ब्रायन ने नियुक्ति से इनकार किए जाने पर धरने पर बैठने के विरोध की अपनी तत्परता पर जोर दिया।

ओ’ब्रायन ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की आलोचना करते हुए कहा, “आपके अहंकार को रोकें। आप हमें कल सुनें।” उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी चिंताएं TMC के हितों से परे हैं, और वंचित मतदाताओं पर केंद्रित हैं। TMC ईसी द्वारा निर्देशित हाल की नियुक्तियों में कथित पूर्वाग्रह के विशिष्ट उदाहरणों को उजागर करने का इरादा रखती है।

ओ’ब्रायन ने लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति द्वारा CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के प्रस्ताव के लिए नोटिसों को खारिज करने को भी संबोधित किया। उन्होंने नोट किया कि विपक्षी दल इस मुद्दे पर संचार कर रहे हैं। “पहले, उन्होंने कोई कारण नहीं बताया। अब, वे कुछ कमजोर कारण दे रहे हैं,” उन्होंने टिप्पणी की।

अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति ने पद से हटाने की कार्यवाही के लिए प्रथम दृष्टया मामला बनाने के लिए दुर्व्यवहार के सबूतों की कमी का हवाला देते हुए संविधान के अनुच्छेद 3245 के तहत नोटिसों को खारिज कर दिया। राधाकृष्णन ने कहा कि जबकि आरोप राजनीतिक रूप से प्रासंगिक हैं, उनमें CEC के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनाने के लिए आवश्यक दुर्व्यवहार के सबूतों का अभाव है।

TMC की राज्यसभा उप-नेता सागरिका घोष ने EC पर पक्षपात और डराने-धमकाने की रणनीति का आरोप लगाया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि लगभग 27 लाख लोग निर्णय सूची से बाहर हैं, यह सवाल करते हुए कि वास्तविक मतदाताओं को कैसे जोड़ा जाएगा, जब पहले चरण की मतदाता सूची जमी हुई है।

EC के आंकड़ों के अनुसार, 60.06 लाख निर्णय मतदाताओं में से 27.16 लाख से अधिक को न्यायिक अधिकारियों द्वारा जांच के दौरान हटा दिया गया था। ओ’ब्रायन ने इस प्रक्रिया को “आपराधिक” करार दिया, यह बताते हुए कि 27 लाख में से केवल दो व्यक्तियों ने क्लीयरेंस के लिए न्यायाधिकरण से संपर्क किया है।

SIR अभ्यास के कारण पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से लगभग 91 लाख मतदाता हटा दिए गए हैं। चुनाव पैनल ने अभी तक इस संशोधन के बाद राज्य के अंतिम मतदाता आधार की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। वर्तमान आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले साल अक्टूबर के अंत में पहचाने गए 7.66 करोड़ मतदाताओं के आधार पर कुल 11.85 प्रतिशत से अधिक की कटौती दर है।

NHRC ने स्वास्थ्य मंत्रालय और FSSAI को नोटिस जारी किया…

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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने स्वास्थ्य मंत्रालय, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किए हैं। यह सार्वजनिक हित में कथित कदाचार को उजागर करने वाले व्हिसलब्लोअर के खिलाफ की गई कार्रवाई की शिकायत के बाद हुआ है।

मामले की कार्यवाही के अनुसार, एनएचआरसी ने दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।

शिकायतकर्ता का दावा है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान धोखाधड़ी वाले दस्तावेज जमा किए गए थे, जिसमें FSSAI की आंतरिक जांच में दोष की पुष्टि हुई है। कार्यवाही में कहा गया है कि जांच रिपोर्ट बिना किसी बदलाव या दुर्भावनापूर्ण इरादे के साझा की गई थी। आधिकारिक जांच से प्राप्त इन निष्कर्षों की रिपोर्ट करने वालों के खिलाफ मार्च 2026 में एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी।

एनएचआरसी के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने कहा कि एक व्हिसलब्लोअर ने आयोग से संपर्क किया, जिसमें इस मुद्दे को उठाने वालों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई का आरोप लगाया गया। कानूनगो के नेतृत्व वाली एनएचआरसी पीठ ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत संभावित मानवाधिकार उल्लंघनों को स्वीकार किया।

एनएचआरसी ने FSSAI के सीईओ, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव और केंद्रीय दिल्ली के डीसीपी को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। उन्हें शिकायत के आरोपों की जांच करने का काम सौंपा गया है। एनएचआरसी ने व्हिसलब्लोअर प्रोटेक्शन एक्ट, 2014 के तहत व्हिसलब्लोअर की पहचान की सुरक्षा और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

डीसीपी को अपनी जांच में FSSAI की जांच रिपोर्ट को शामिल करने का निर्देश दिया गया है, क्योंकि एफआईआर इस रिपोर्ट के विवरण के कथित लीक पर आधारित प्रतीत होती है। इस महीने की शुरुआत में, दिल्ली पुलिस को FSSAI के एक प्रतिनिधि से सोशल मीडिया पर प्रसारित आधिकारिक दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की संभावना के बारे में एक शिकायत मिली थी।

पुलिस जांच

दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरों और अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ अनधिकृत दस्तावेज़ों के प्रचलन के लिए एक एफआईआर दर्ज की। शिकायत में FSSAI की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से सामग्री फैलाने में संभावित अंदरूनी संलिप्तता का सुझाव दिया गया है। पुलिस डिजिटल साक्ष्य को संरक्षित कर रही है और इस सामग्री को साझा करने वाले खातों के विवरण के लिए X जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को नोटिस जारी किया है।

आगे की कार्रवाई

एनएचआरसी ने स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव से FSSAI द्वारा उम्मीदवार चयन प्रक्रियाओं में अनियमितताओं के संबंध में की गई किसी भी आंतरिक जांच पर रिपोर्ट करने को कहा है। FSSAI के सीईओ से भी एनएचआरसी की समीक्षा के लिए इस मामले पर की गई किसी भी आंतरिक जांच के परिणाम प्रदान करने की आवश्यकता है।

परमाणु हथियारों का प्रयोग कभी भी उचित नहीं: राहुल गांधी..

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को एक सख्त चेतावनी जारी की, जिसमें सुझाव दिया गया कि यदि ईरान उनकी नवीनतम मांगों का पालन नहीं करता है तो पूरी सभ्यता विनाश का सामना कर सकती है।

अल्टीमेटम में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना शामिल है, जो वैश्विक तेल शिपमेंट के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। इस बयान ने अंतर्राष्ट्रीय चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने किसी भी बयानबाजी या कार्यों की निंदा की है जो सभ्यता को खतरे में डालते हैं।

गांधी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी अस्वीकृति व्यक्त की, यह कहते हुए कि युद्ध दुखद होते हैं लेकिन वास्तविकता बने रहते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज की दुनिया में सभ्यता के अंत के बारे में सोचना अस्वीकार्य है और दोहराया कि परमाणु हथियारों का उपयोग किसी भी परिस्थिति में बचाव योग्य नहीं है। उनकी टिप्पणियाँ ट्रम्प के अल्टीमेटम की प्रतिक्रिया में आईं, जिसने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा दिया है।

जैसे-जैसे समय सीमा नजदीक आई, अमेरिकी सेना ने ईरान में दो पुलों और एक ट्रेन स्टेशन को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए। इसके अतिरिक्त, ईरानी तेल उत्पादन के लिए एक महत्वपूर्ण हब, खर्ग द्वीप पर सैन्य बुनियादी ढांचे पर दूसरी बार हमला किया गया। इन कार्रवाइयों ने संघर्ष को बढ़ा दिया है, जिसमें ट्रम्प का कहना है कि यह समय सीमा अंतिम है जब तक कि वाशिंगटन समय के अनुसार शाम 8 बजे तक एक राजनयिक सफलता नहीं हो जाती।

एक ऑनलाइन पोस्ट में, ट्रम्प ने चेतावनी दी कि यदि कोई समझौता नहीं हुआ तो अपरिवर्तनीय परिणाम होंगे, फिर भी एक सकारात्मक परिणाम की संभावना का संकेत दिया। इस बीच, ईरान के संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधि, अमीर- सईद इरावानी ने कहा कि यदि ट्रम्प की धमकियाँ साकार होती हैं तो ईरान तुरंत और आनुपातिक रूप से प्रतिक्रिया देगा।

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रियाएँ

तनाव बढ़ने के साथ अंतर्राष्ट्रीय समुदाय स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के संभावित बंद होने से वैश्विक तेल बाजारों और क्षेत्रीय स्थिरता पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। जलडमरूमध्य एक रणनीतिक चोकपॉइंट है जिसके माध्यम से दुनिया की तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है।

ईरान ने अपने नागरिकों से एहतियाती उपाय के रूप में बिजली संयंत्रों और अन्य संभावित लक्ष्यों के आसपास मानव श्रृंखला बनाने का आग्रह किया है। कार्रवाई के लिए यह आह्वान स्थिति की गंभीरता और राजनयिक प्रयासों की विफलता पर आगे बढ़ने की क्षमता को दर्शाता है।

ऐतिहासिक संदर्भ

यह गतिरोध अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव का एक और अध्याय है। पदभार संभालने के बाद से, ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ धमकियों से जुड़ी कई समय सीमाएं लगाई हैं, अक्सर उन्हें बिना किसी समाधान के बढ़ाया है। हालांकि, यह नवीनतम अल्टीमेटम अधिक निर्णायक प्रतीत होता है, जिससे संभावित सैन्य संघर्ष के बारे में चिंताएं बढ़ जाती हैं।

यह स्थिति अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति की जटिलताओं और बल के बजाय संवाद के माध्यम से संघर्षों को हल करने की चुनौतियों को रेखांकित करती है। जैसे ही दोनों राष्ट्र एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़े हैं, दुनिया किसी भी डी-एस्केलेशन या समाधान के संकेतों की बारीकी से निगरानी कर रही है।

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन की तैयारियां…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी यात्रा के मद्देनजर, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई। प्रधानमंत्री 14 अप्रैल को दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे, जिसे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के नाम से भी जाना जाता है, का उद्घाटन करेंगे।

धामी ने अधिकारियों को कार्यक्रम की सफलता और भव्यता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

इस अवसर को उत्तराखंड के लिए महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक बताते हुए, धामी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि आर्थिक गलियारा राज्य में रोजगार, पर्यटन और व्यापार को काफी बढ़ावा देगा। उन्होंने अधिकारियों से कार्यक्रम में समाज के हर वर्ग को शामिल करने, इसे एक जन उत्सव में बदलने का आग्रह किया।

धामी ने निर्देश दिया कि कार्यक्रम स्थल को पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरह की सौंदर्यशास्त्र से सजाया जाए, जिसमें कलाकारों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह कार्यक्रम सिर्फ एक सरकारी समारोह न होकर, राज्य की संस्कृति, परंपरा और गौरव को प्रतिबिंबित करे।

मुख्यमंत्री ने जनता को प्रधानमंत्री के रोडशो के दौरान राष्ट्रीय ध्वज फहराकर सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया। उन्होंने इस अवसर को चिह्नित करने के लिए पूरे उत्तराखंड में एक उत्सव का माहौल बनाने का आह्वान किया।

धामी ने कहा कि दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारा उत्तराखंड के विकास को एक नई दिशा देगा। इस गलियारे से दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा के समय में काफी कमी आने की उम्मीद है, जिससे राष्ट्रीय विकास में राज्य की स्थिति मजबूत होगी।

यात्रा के समय में इस कमी से उत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा मिलने और औद्योगिक व वाणिज्यिक गतिविधियों के विस्तार की उम्मीद है। परिणामस्वरूप होने वाली आर्थिक गतिविधियों से क्षेत्र के युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

लॉजिस्टिक्स और निवेश में परिवर्तन

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह गलियारा लॉजिस्टिक्स, परिवहन और निवेश क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बदलाव लाएगा। इन बदलावों से अधिक निवेश आकर्षित करने और राज्य के भीतर कनेक्टिविटी में सुधार करके उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

कुल मिलाकर, धामी के निर्देशों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे का उद्घाटन उत्तराखंड के लिए एक ऐतिहासिक घटना बने, जो आर्थिक विकास और प्रगति का मार्ग प्रशस्त करे, साथ ही इसकी सांस्कृतिक विरासत को भी प्रदर्शित करे।

Adani vs SEC: अमेरिकी कोर्ट में बड़ा मोड़, प्री-मोशन कॉन्फ्रेंस मंजूर। क्यों है अहम पड़ाव?

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न्यूयॉर्क के पूर्वी जिले में स्थित अमेरिकी जिला अदालत ने “SEC बनाम अदाणी” मामले में एक प्री-मोशन कॉन्फ्रेंस के अनुरोध को स्वीकार किया है, जो संभावित बर्खास्तगी याचिका से पहले एक महत्वपूर्ण प्रक्रियागत कदम है।

इस कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य अमेरिकी नियामक जांच के तहत अदाणी समूह की संस्थाओं के खिलाफ मामले में मुद्दों को स्पष्ट करना और दलीलों को सुव्यवस्थित करना है।

अमेरिकी जिला अदालत ने प्रतिभूति और विनिमय आयोग (SEC) द्वारा अदाणी समूह के खिलाफ दायर मामले में प्रतिवादियों के अनुरोध पर प्री-मोशन कॉन्फ्रेंस को मंजूर किया है। यह चल रही कानूनी कार्यवाही में एक महत्वपूर्ण औपचारिक कदम है। न्यूयॉर्क के पूर्वी जिले में स्थित अमेरिकी जिला न्यायाधीश निकोलस जी. गराउफिस ने 7 अप्रैल, 2026 को यह आदेश जारी किया।

यह मामला ‘सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन बनाम अदाणी एट अल’ शीर्षक से जाना जाता है। इसमें अमेरिकी प्रतिभूति नियामक द्वारा अदाणी समूह से जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ आरोप शामिल हैं। अदालत के निर्देशानुसार, प्रतिवादियों ने शिकायत खारिज करने से पहले प्री-मोशन कॉन्फ्रेंस का अनुरोध किया था, जिसे अदालत ने मंजूरी दे दी।

अदालत ने दोनों पक्षों को कॉन्फ्रेंस की व्यवस्था के लिए आपस में विचार-विमर्श करने का निर्देश दिया है। उन्हें अदालती डिप्टी के साथ समन्वय कर प्री-मोशन कॉन्फ्रेंस निर्धारित करने को भी कहा गया है। यह बैठक संभावित बर्खास्तगी याचिका पर चर्चा करने और औपचारिक प्रक्रियाओं से पहले मुद्दों को सुव्यवस्थित करने का मौका देगी।

यह घटनाक्रम दर्शाता है कि प्रतिवादी एसईसी द्वारा दायर शिकायत की वैधता या पर्याप्तता को चुनौती देने की तैयारी में हैं। यदि बर्खास्तगी याचिका दायर होती है, तो इसका उद्देश्य सुनवाई से पहले ही मामले या उसके कुछ अंशों को खारिज करवाना हो सकता है।

यह मामला अदाणी समूह और उसके वैश्विक व्यावसायिक हितों के साथ-साथ अमेरिकी बाजारों में संचालित होने वाली अंतरराष्ट्रीय कॉर्पोरेट संस्थाओं पर नियामक जांच के निहितार्थों के कारण बारीकी से देखा जा रहा है। प्री-मोशन कॉन्फ्रेंस के निर्धारण और परिणाम के बाद आगे के अपडेट अपेक्षित हैं।