Home Blog Page 7

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में फिर बदलाव, जानिए आज का नया रेट…

0

देशभर में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों का असर अब आम लोगों की जेब पर साफ दिखाई देने लगा है। रायपुर समेत छत्तीसगढ़ के कई शहरों में पेट्रोल 105 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गया है, जिससे वाहन चालकों और व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है।

देशभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का असर अब सीधे आम लोगों की जेब पर दिखाई देने लगा है। वहीँ रायपुर समेत छत्तीसगढ़ के कई शहरों में पेट्रोल की कीमतें 108. 06 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गई हैं। एक्स्ट्रा प्रीमियम – 116.90, लगातार बढ़ते दामों ने वाहन चालकों, व्यापारियों और मध्यम वर्ग की चिंता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और टैक्स के प्रभाव के कारण ईंधन के दामों में रोजाना बदलाव देखने को मिल रहा है। यही वजह है कि पिछले कुछ दिनों से पेट्रोल-डीजल की कीमतें लगातार चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

रायपुर में आज क्या है पेट्रोल-डीजल का रेट?

25 मई 2026 को रायपुर में पेट्रोल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी देखने को मिली है। शहर में पेट्रोल का रेट 108. 06 प्रति लीटर के बीच दर्ज किया गया, जबकि डीजल की कीमत 101.32 प्रति लीटर बनी हुई है। पिछले तीन दिनों से डीजल के दाम स्थिर हैं, लेकिन पेट्रोल लगातार महंगा होता जा रहा है। बढ़ती कीमतों ने वाहन चालकों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इसका असर अब सीधे घरेलू बजट और रोजमर्रा के खर्चों पर दिखाई देने लगा है।

छत्तीसगढ़ के अन्य शहरों में भी बढ़े दाम

राजधानी रायपुर ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के अन्य प्रमुख शहरों में भी पेट्रोल की कीमतें 106 रुपये प्रति लीटर के करीब पहुंच चुकी हैं। बिलासपुर में पेट्रोल का रेट 108. 06 प्रति लीटर दर्ज किया गया है, जबकि सरगुजा में यह 108.32 प्रति लीटर तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अलग-अलग जिलों में राज्य कर, वैट और ट्रांसपोर्टेशन लागत में अंतर होने के कारण ईंधन की कीमतों में थोड़ा बदलाव देखने को मिलता है। लगातार बढ़ते दामों ने पूरे प्रदेश में वाहन चालकों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?

पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के पीछे कई बड़े कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। कई देशों में भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई प्रभावित होने के कारण तेल महंगा हो रहा है। इसके अलावा पेट्रोल-डीजल की कीमतों में केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकार का VAT भी शामिल होता है, जिसकी वजह से अलग-अलग राज्यों में ईंधन के रेट अलग दिखाई देते हैं। वहीं भारत कच्चा तेल बड़े पैमाने पर आयात करता है, इसलिए डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी भी सीधे तौर पर ईंधन की कीमतों को प्रभावित करती है।

महंगाई पर भी पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने से केवल वाहन चालकों पर असर नहीं पड़ता, बल्कि इसका प्रभाव पूरे बाजार पर दिखाई देता है।डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ती है, जिसका असर सब्जियों, फल, खाद्यान्न, निर्माण सामग्री और अन्य रोजमर्रा के सामान की कीमतों पर भी पड़ सकता है। इससे आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

लोगों ने जताई नाराजगी

लगातार बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दामों को लेकर आम लोगों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। वाहन चालकों का कहना है कि हर महीने ईंधन पर खर्च बढ़ता जा रहा है, जिससे घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है। कई लोगों ने निजी वाहन का उपयोग कम कर पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सहारा लेना शुरू कर दिया है। वहीं व्यापारी वर्ग का कहना है कि ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने से व्यापार पर भी असर पड़ रहा है।

क्या आने वाले दिनों में और बढ़ेंगे दाम?

तेल बाजार से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल और महंगे हो सकते हैं। हालांकि वैश्विक हालात और सरकार की नीतियों के आधार पर कीमतों में बदलाव संभव है। फिलहाल आम लोगों की नजरें ईंधन कंपनियों और सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं।

कैसे तय होती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें?

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें हर दिन अपडेट की जाती हैं। इनकी कीमत तय करने में कई अहम फैक्टर भूमिका निभाते हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, केंद्र और राज्य सरकार द्वारा लगाए गए टैक्स, ट्रांसपोर्टेशन लागत और डीलर कमीशन शामिल हैं। इन्हीं सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तेल कंपनियां रोजाना सुबह नए रेट जारी करती हैं, जिसके कारण ईंधन की कीमतों में हर दिन बदलाव देखने को मिलता है।

आम लोगों को राहत का इंतजार

लगातार बढ़ती महंगाई के बीच लोग अब पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत की उम्मीद कर रहे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि ईंधन के दाम इसी तरह बढ़ते रहे तो रोजमर्रा की जिंदगी और महंगी हो जाएगी।

छत्‍तीसगढ़ विधानसभा ने धार्मिक स्‍वतंत्रता विधेयक को ध्‍वनि-मत से किया पारित…

0

छत्‍तीसगढ़ विधानसभा ने धार्मिक स्‍वतंत्रता विधेयक को ध्‍वनि-मत से पारित कर दिया है। इस विधेयक का उद्देश्‍य धोखे से, बलपूर्वक, प्रलोभन देकर या डिजिटल तरीके से धर्म परिवर्तन पर रोक लगाई गई है। विपक्ष ने इस विधेयक के विरोध में सदन का बहिष्‍कार किया। विपक्ष का कहना था कि इस तरह के 11 राज्‍यों से संबंधित मामले सर्वोच्‍च न्‍यायालय में लंबित है और सर्वोच्‍च न्‍यायालय का फैसला आने के बाद ही इस मामले में आगे बढ़ा जाना चाहिए। जवाब में, उप-मुख्‍यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने इस तरह के किसी भी मामले में रोक नहीं लगाई है और अवैध धर्मांतरण पर अंकुश लगाना राज्‍य सरकार के अधिकार-क्षेत्र में आता है। विधेयक में गलत तरीके से धर्मांतरण को गैर-जमानती अपराध माना गया है जिसके लिए सात से दस साल तक की सज़ा हो सकती है। इसके अलावा, दोषी पाए जाने पर न्‍यूनतम 5 लाख रूपए तक का जुर्माना भी भरना होगा। विधेयक के अनुसार, धर्मांतरण के इच्‍छुक लोगों को इसकी पूर्वानुमति लेनी होगी।

दिल्ली के लाल किला मैदान में जनजातीय अस्मिता, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक चेतना का विराट संगम…

0

देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में रविवार को जनजातीय अस्मिता, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक चेतना का विराट संगम देखने को मिला, जब भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम में देशभर से हजारों जनजातीय प्रतिनिधि, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता तथा पारंपरिक समुदायों के लोग एक मंच पर एकत्र हुए।

जनजाति सुरक्षा मंच एवं जनजाति जागृति समिति द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। मुख्यमंत्री साय के साथ छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्री केदार कश्यप एवं रामविचार नेताम भी उपस्थित थे।

सीएम साय ने रेखा गुप्ता से की मुलाकत

कार्यक्रम स्थल पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सौजन्य भेंट की।

लाल किले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्ययंत्रों और जनजातीय संस्कृति के विविध रंगों से सजा यह आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की मूल सांस्कृतिक चेतना और जनजातीय पहचान के संरक्षण का राष्ट्रीय संदेश बनकर उभरा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम में देशभर से आए जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों और लोगों से आत्मीय मुलाकात की तथा अपने संबोधन में कहा कि जनजातीय समाज केवल प्रकृति का रक्षक नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का सबसे प्राचीन और जीवंत स्वरूप है। उन्होंने कहा कि सदियों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा करते हुए जनजातीय समाज ने प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने का कार्य किया है। आज जब पूरी दुनिया पर्यावरण संकट और असंतुलित विकास की चुनौतियों से जूझ रही है, तब जनजातीय जीवन दर्शन मानवता को टिकाऊ और प्रकृति-सम्मत विकास का रास्ता दिखा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज सदियों से प्रकृति के साथ सहअस्तित्व और संतुलन का जीवन जीता आया है तथा उनकी संस्कृति और परंपराएं भारत की अमूल्य धरोहर हैं।

जनजातीय संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है छत्तीसगढ़ की पहचान

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है। छत्तीसगढ़ में लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित है, जो केवल प्राकृतिक संपदा का प्रतीक नहीं, बल्कि जनजातीय जीवन, संस्कृति और परंपरा का जीवंत आधार भी है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर राष्ट्र निर्माण तक जनजातीय समाज का योगदान अतुलनीय रहा है।

भगवान बिरसा मुंडा तथा छत्तीसगढ़ के अमर शहीद वीर नारायण सिंह जैसे महानायकों ने अपनी संस्कृति, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष, साहस और बलिदान का अद्वितीय इतिहास रचा है, जो नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि उनकी सरकार जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि ‘आदि परब’, बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनजातीय प्रतिभा, परंपरा, खेलकौशल और पहचान को राष्ट्रीय मंच देने का सशक्त प्रयास हैं।

उन्होंने कहा कि इन आयोजनों के माध्यम से जनजातीय समाज की सांस्कृतिक शक्ति, सामूहिकता और प्रतिभा को नई पहचान मिल रही है तथा युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा भी प्राप्त हो रही है।

भाषा से जीवित रहती है समाज की संस्कृति

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसी भी समाज की संस्कृति उसकी भाषा से जीवित रहती है, इसलिए छत्तीसगढ़ सरकार जनजातीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि गोंडी, हल्बी और सादरी जैसी जनजातीय भाषाओं में बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा देने की दिशा में विशेष पहल की जा रही है, ताकि नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा, सांस्कृतिक जड़ों और पारंपरिक ज्ञान से जुड़ी रह सके। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह किसी समाज की पहचान, इतिहास और सामूहिक स्मृति का आधार भी होती है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आगे कहा कि बस्तर से सरगुजा तक देवगुड़ी जैसे पारंपरिक आस्था केंद्रों के संरक्षण और विकास का कार्य तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना केवल परंपरा को बचाने का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने और उनकी पहचान को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

राज्य सरकार इस दिशा में संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

कलाकारों ने दी प्रस्तुति

कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य, लोक संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत की जीवंत झलक प्रस्तुत की। लाल किला मैदान मांदर, ढोल, पारंपरिक लोकधुनों और सांस्कृतिक उत्साह से गूंजता रहा।

विविध जनजातीय परंपराओं, रंगों, वेशभूषाओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों से सजा यह आयोजन देश की विविधता में एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रभावशाली प्रतीक बनकर सामने आया।

भारत के भविष्य की महत्वपूर्ण शक्ति है जनजातीय समाज

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जनजातीय समाज केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की भी महत्वपूर्ण शक्ति है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज का जीवन दर्शन, प्रकृति के प्रति सम्मान, सामुदायिक जीवन की भावना और सांस्कृतिक अनुशासन आधुनिक विकास मॉडल को मानवीय और संतुलित दिशा दे सकते हैं। लाल किला मैदान में आयोजित यह राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम केवल एक आयोजन बनकर सीमित नहीं रहा, बल्कि जनजातीय समाज की एकता, स्वाभिमान, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और प्रकृति-सम्मत विकास के राष्ट्रीय संकल्प का सशक्त घोष बनकर उभरा।

नस्लीय टिप्पणियों पर क्या बोले अमेरिकी विदेश मंत्री?

0

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि मुझे नहीं पता कि इसका मैं क्या जवाब दूं, लेकिन मैं इसे बहुत गंभीरता से लूंगा. मुझे यकीन है कि कुछ लोगों ने ऐसी टिप्पणियां जरूर की होंगी.

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने रविवार (24 मई, 2026) को अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ कथित नस्लीय टिप्पणियों को लेकर सवाल पूछे जाने पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने अमेरिका का बचाव करते हुए कहा कि हर देश में बेवकूफ लोग होते हैं.

दरअसल, अमेरिकी विदेश मंत्री नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे. इसी दौरान उनसे अमेरिका में भारतीय के खिलाफ नस्लीय टिप्पणियों को लेकर सवाल पूछा गया. इस पर रुबियो ने पूछा कि ये टिप्पणियां आखिर किसने कीं? जिस पर पत्रकार ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन कहा कि ऐसे पोस्ट को समर्थन मिला था और हम सभी ने इसे देखा है.

हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक सोशल मीडिया पोस्ट शेयर किया था, जिसमें उन्होंने भारत को एक हेलहोल यानी नरक जैसा जगह कहा था, हालांकि, बाद में ट्रंप ने सफाई देते हुए भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की थी.

नस्लीय टिप्पणियों पर क्या बोले अमेरिकी विदेश मंत्री?

इस सवाल पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियों ने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि इसका मैं क्या जवाब दूं, लेकिन मैं इसे बहुत गंभीरता से लूंगा. मुझे यकीन है कि कुछ लोगों ने ऑनलाइन और बाकी जगहों पर ऐसी टिप्पणियां की होंगी, क्योंकि दुनिया के हर देश में बेवकूफ लोग होते हैं. मुझे यकीन है कि यहां भी बेवकूफ लोग हैं और अमेरिका में भी बेवकूफ लोग हैं, जो हर समय बेवकूफी भरी बातें करते रहते हैं.’

अमेरिका दुनियाभर के लोगों का स्वागत करने वाला देशः रुबियो

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, मार्को रुबियो ने अमेरिका में प्रवासियों, खासकर भारतीय समुदाय के योगदान का जिक्र करते हुए कहा, ‘अमेरिका एक बहुत स्वागत करने वाला देश है. हमारा देश दुनिया भर से आए लोगों से समृद्ध हुआ है. वे अमेरिका आए, अमेरिकी बने, हमारी जीवनशैली में घुल-मिल गए और देश के विकास में अपना योगदान दे रहे हैं.’

अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भारतीय समुदाय की भूमिका को स्वीकार करते हुए विदेश मंत्री मार्को रुबियों ने कहा, ‘मैं आपकी इस बात से सहमत हूं कि भारतीयों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 20 अरब डॉलर से ज्यादा का योगदान दिया है और हम चाहते है कि यह संख्या आगे भी बढ़ते रहे.’

फाल्टा उपचुनाव में BJP की प्रचंड जीत, देबांग्शु पांड्या को विधानसभा भेजने के लिए जोरदार जनादेश…

0

डायमंड हार्बर मॉडल अब तृणमूल के नुकसान का मॉडल बन गया है. यह बयान फाल्टा में बीजेपी की प्रचंड जीत लगभग तय हो जाने के बीच मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी ने दी है.

यहां से बीजेपी उम्मीदवार देबांग्शु पांडा उपचुनाव में एक लाख से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की है. उनके अलावा सीपीएम दूसरे स्थान पर और कांग्रेस उम्मीदवार चौथे स्थान पर रहा. तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान चौथे स्थान पर खिसक गए.

इसी को लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि सबसे पहले और जरूरी बात, फाल्टा के लोगों के सामने नतमस्तक होकर उन्हें प्रणाम करता हूं. इन्हें फाल्टा विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार देबांग्शु पांड्या को विधानसभा भेजने के लिए जोरदार जनादेश दिया है. फाल्टा के वोटर्स का विशेष आभारी हूं.

शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि अपील की थी कि वे भाजपा उम्मीदवार को लाखों वोटों के अंतर से जिताएं, और जीत का अंतर एक लाख के आंकड़े को पार कर गया है. हम विकास के जरिए इस कर्ज को चुकाएंगे. हम एक स्वर्णिम फाल्टा के लिए प्रतिबद्ध हैं.

टीएमसी का असली कंकाल रूप सबके सामने गया है

शुवेंदु अधिकारी ने कहा कि ऐसी पार्टी जो सिद्धांतों और विचारधारा से पूरी तरह खाली थी. जो एक माफिया कंपनी में बदल चुकी थी. सत्ता गंवाने के बाद उसका असली कंकाल जैसा रूप सबके सामने आ गया है. सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करके इस पार्टी ने जनता का पैसा लूटा. लोगों की गाड़ी कमाई को जबरदस्ती लूटा है. सिंडिकेट और धमकियों के माहौल के जरिए उस पर कब्जा कर लिया है. इसके नेता तो पूरे राज्यों को अपनी निजी जागीर समझने लगे थे.

एक ऐसा धोखेबाज जो कहीं से टपक पड़ा और खुद को कमांडर कहने लगा. ऐसा कोई अपराध नहीं, जिसे इस ठग ने अंजान न दिया हो. अपना खुद का आपराधिक सिंडिकेट खड़ा करने के लिए शेर की खाल ओढे़ इस बिल्ली ने लोकतंत्र का गला घोंटने में भी जरा भी हिचकिचाट महसूस नहीं की. पिछले चुनाव को एक मजाक बनाकर तृणमूल ने इस इलाके में डेढ़ लाख वोटों की बढ़त बना ली थी. पंद्रह साल बाद जब लोगों को अपने मन से वोट डालने की आजादी वापस मिली, तब जाकर असली सच्चाई सामने आई.

शुवेंदु ने कहा कि अभी तो बस शुरुआत है. अस्वीकृति की एक लंबी यात्रा तय करनी है. आने वाले दिनों में टीएमसी को चुनाव में NOTA के खिलाफ एक कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ेगा. टीएमसी त्रिपुरा चुनाव में NOTA से हार चुकी है.

NEET मामले में पीछे पड़ी कांग्रेस, राहुल ने की शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग…

0

नीट पेपर लीक मामले में कांग्रेस पार्टी सत्ताधारी एनडीए सरकार को छोड़ने के मूड में नहीं है. राहुल गांधी ने एक बार फिर इस मामले को उठाते हुए केंद्र पर निशाना साधा है. साथ ही सरकार पर जवाबदेही से बचने की कोशिश की जा रही है. लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है.

राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि जब लाखों युवा सड़कों पर हैं, और 22 लाख बच्चों का भविष्य दांव पर लगा हो, तब भी पीएम मोदी चुप हैं. यह सरकार सवालों के जवाब देने पर नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी से भागने पर ध्यान दे रही है.

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मांग

विपक्षी पार्टी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मांग की है. साथ ही परीक्षा पेपर लीक होने की घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाने का आह्वान किया है. गांधी ने कहा कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते और NEET जैसे पेपर लीक को रोकने के लिए एक पुख्ता व्यवस्था नहीं बन जाती, तब तक हम चुप नहीं बैठेंगे. राहुल ने मोदी सरकार पर पेपर लीक माफिया को फलने फूलने का मौका देने का आरोप लगाया है.

राहुल ने कहा कि NEET पेपर लीक ने लाखों छात्रों के भविष्य को अंधेरे में धकेल दिया है. मोदी सरकार के राज में पेपर लीक माफिया फल-फूल रहा है, जबकि इसके लिए जिम्मेदार लोग मूकदर्शक बने हुए हैं. हैदराबाद में NSUI के अध्यक्ष विनोद झाकर के नेतृत्व में NSUI के साथियों ने एक पैदल मार्च निकाला और युवाओं के विरोधी मोदी सरकार को एक कड़ा संदेश दिया. हम छात्रों के भविष्य के साथ इस तरह की छेड़छाड़ को जरा भी बर्दाश्त नहीं करेंगे. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए. दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए. कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग की है. इस मामले में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है.

गांधी ने गुरुवार को NEET UG पेपर लीक को लेकर यूथ कांग्रेस के विरोध प्रदर्शनों का समर्थन किया और इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाया. एक्स पर एक पोस्ट में राहुल गांधी ने कहा कि पार्टी तब तक नहीं रुकेगी जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं दे देतें. राजस्थान में हुए एक विरोध प्रदर्शन का वीडियो साझा करते हुए, गांधी ने BJP की राज्य सरकार पर प्रदर्शनकारियों पर लाठियां बरसाने का भी आरोप लगाया.

इटली की पीएम को टॉफी गिफ्ट देने पर कसा तंज

राहुल ने कहा कि जब मोदी जी इटली में टॉफियां बांटते हुए रील बना रहे थे, तब भारत में पेपर लीक से परेशान युवा, न्याय की मांग करते हुए सड़कों पर उतर आए थे. क्योंकि NEET पेपर लीक ने लाखों छात्रों के भविष्य को बर्बाद कर दिया है. कई बच्चों ने तो अपनी जान भी गंवा दी है. मोदी जी ने न तो कोई जिम्मेदारी ली, न ही धर्मेंद्र प्रधान को हटाया, और न ही एक शब्द भी बोला.

अब जब छात्र NSUI और INC कार्यकर्ता न्याय के लिए अपनी आवाज उठा रहे हैं, तो BJP की राज्य सरकारें उन पर लाठियां बरसा रही हैं. जो सरकार छात्रों के सवालों का जवाब लाठियों से देती है, वह जवाबदेही पर नहीं चलती—वह डर पर चलती है. लेकिन हम डरने वालों में से नहीं हैं. हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफ़ा नहीं दे देते और देश में पेपर लीक को रोकने के लिए एक मजबूत और सुरक्षित सिस्टम लागू किया गया है. यह लड़ाई हर उस छात्र के लिए है जिसका भविष्य इस नाकाम सरकार ने छीन लिया है.

इधर, NTA के डायरेक्टर जनरल (DG) अभिषेक सिंह एक संसदीय समिति के सामने पेश हुए. उन्होंने NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में सुधार के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में विस्तार से जानकारी दी. शिक्षा सचिव विनीत जोशी भी इस चर्चा के दौरान मौजूद थे, जो आज सुबह 11 बजे शुरू हुई और लगभग पांच घंटे तक चली.

Hydrogen Bus Service: राजधानी दिल्ली में पहली हाइड्रोजन बस सेवा की शुरुआत…

0

दिल्ली में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिलने वाला है. राजधानी में हाइड्रोजन बसों की शुरुआत हो चुकी है. लेकिन लोगों के मन में यह सवाल है कि क्या यह सीएनजी बस को टक्कर दे सकेगी?

देश की राजधानी दिल्ली में अब एक बेहद ही महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है. जहां, दिल्ली में पहली हाइड्रोजन बस सेवा की शुरुआत हो चुकी है. इस खास शुरुआत से अब शहर की सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में एक नई तकनीक जुड़ गई है. इसके साथ ही पहले के मुताबिक दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन द्वारा शुरू की गई इन हाइड्रोजन ईंधन-सेल बसों का केवल मुख्य ऊर्जा की खपत को सबसे ज्यादा कम करना है.

क्या सीएनजी का स्थान ले पाएगी हाइड्रोजन बसें ?

हांलाकि, अब लोगों के मन में तेजी से एक सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या हाइड्रोजन बसें सीएनजी बसों का मुकाबला कर पाएंगी या फिर नहीं? लेकिन, हाइड्रोजन बसें साइलेंसर के स्तर पर बेहद ही बेहतरीन विकल्पों में से एक मानी जा रही है, बुनियादी ढांचे और परिचालन लागत के बारे में बात करें तो इसकी तुलना करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है.

क्या है सीएनजी और हाइड्रोजन तकनीक में अंतर

सीएनजी बसों के बारे में बात करें तो, इसने पुराने डीजल बसों की तुलना में प्रदूषण को सबसे ज्यादा कम करने का काम किया था. तो वहीं, दूसरी तरफ हाइड्रोजन ईंधन-सेल बसें पूरी तरह से अलग तरीके से काम करती हैं. जहां, इसमें ईंधन को सीधे जलाने के बजाय, हाइड्रोजन एक ईंधन-सेल स्टैक के अंदर रासायनिक प्रतिक्रिया करता है जिससे बिजली पैदा की जाती है, इतना ही नहीं फिर वही बिजली इलेक्ट्रिक मोटरों को चलाने का भी एक तरह से काम करती है. तो, इस प्रक्रिया में साइलेंसर से धुएं के बजाय सिर्फ और सिर्फ पानी की भाप ही बाहर निकलती है.

आखिर क्या है हाइड्रोजन बसों के फायदे

दरअसल, आज हाइड्रोजन तकनीक को वैश्विक स्तर पर सबसे ज्यादा पहचान दी जा रही है. यहीं वजह है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के फायदों के साथ-साथ बड़ी बैटरी-इलेक्ट्रिक बसों की तुलना में तेजी से ईंधन भरने का काम बिना किसी परेशानी के आसानी से कर लेती है. हांलाकि, कमर्शियल फ्लीट के लिए यह बहुत मायने रखता है क्योंकि बसों को चार्जिंग स्टेशनों पर ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ता है.

Tamil Nadu Politics: DMK नेता ने कांग्रेस पर विश्वासघात और BJP को मजबूत करने का आरोप…  

0

DMK नेता और पार्टी की यूथ विंग के सचिव उदयनिधि स्टालिन ने कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला है. उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) की अल्पमत सरकार का समर्थन करके DMK के साथ विश्वासघात किया है. एक पार्टी कार्यक्रम में उदयनिधि ने कहा कि अब DMK को कांग्रेस पर दोबारा भरोसा नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं ने DMK कार्यकर्ताओं की मेहनत और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की लोकप्रियता की वजह से चुनाव जीता, लेकिन बाद में बिना जानकारी दिए गठबंधन छोड़ दिया.

उदयनिधि स्टालिन ने कहा, ‘DMK कार्यकर्ताओं की मेहनत की वजह से कांग्रेस के पांच विधायक जीत पाए. लोगों ने कांग्रेस को वोट इसलिए दिया क्योंकि वे एमके स्टालिन को मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे. लेकिन आज कुछ पदों के लिए कांग्रेस हमें बताए बिना चली गई. ऐसे लोगों पर कभी भरोसा नहीं करना चाहिए जिनमें बुनियादी आभार और शालीनता नहीं है.’ उन्होंने आगे कहा कि तमिलनाडु की जनता कांग्रेस को इसका जवाब देगी.

देश में BJP की बढ़त की वजह कांग्रेस

उदयनिधि स्टालिन ने कांग्रेस को पूरे देश में BJP की मजबूती के लिए भी जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि पहले उन्हें लगता था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह BJP की जीत की मुख्य वजह हैं, लेकिन अब उन्हें लगता है कि कांग्रेस की राजनीति ने BJP को मजबूत किया है. उन्होंने कहा, ‘हमारे नेता एमके स्टालिन ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को अपने कंधों पर उठाया था, लेकिन कांग्रेस ने उसका सम्मान नहीं किया.’

DMK बैठक में कांग्रेस पर तीखे प्रस्ताव

DMK की बैठक में कांग्रेस के खिलाफ कई कड़े प्रस्ताव भी पारित किए गए. पार्टी नेताओं ने कांग्रेस को पीठ में छुरा घोंपने वाला और जोंक तक कहा. आरोप लगाया गया कि कांग्रेस अपने सहयोगियों की मेहनत पर राजनीति करती है. उदयनिधि ने पार्टी कार्यकर्ताओं से युवाओं और पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं के बीच राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने की अपील भी की. उन्होंने खास तौर पर Gen Z वोटरों को राजनीति समझाने पर जोर दिया.

एमके स्टालिन ने TVK सरकार पर साधा निशाना

DMK अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भी विजय की अगुवाई वाली TVK सरकार पर हमला बोला. उन्होंने दावा किया कि यह सरकार अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएगी. स्टालिन ने कहा, ‘उन्होंने AIADMK को तोड़कर बहुमत दिखाने की कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हुए. यह सरकार कभी भी गिर सकती है.’उन्होंने CPI, CPI(M), VCK और IUML जैसी पार्टियों पर भी निशाना साधा, जो पहले बाहर से समर्थन दे रही थीं लेकिन बाद में सरकार में शामिल हो गईं.

लोग एक्टर की सरकार से जल्द ऊब जाएंगेस्टालिन

एमके स्टालिन ने विजय की सरकार की तुलना नए खिलौने से करते हुए कहा कि लोग कुछ समय बाद इससे भी ऊब जाएंगे. उन्होंने कहा, ‘जैसे बच्चे नए खिलौनों से कुछ दिनों में बोर हो जाते हैं, वैसे ही लोग भी अभिनेता की सरकार से ऊब जाएंगे. आखिर में वे फिर हमारे पास लौटेंगे.’

गठबंधन में बढ़ा तनाव

कांग्रेस, वामपंथी दल, VCK और IUML साल 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद से DMK गठबंधन का हिस्सा रहे हैं. लेकिन हालिया विधानसभा चुनाव के बाद इन दलों ने विजय की TVK सरकार को समर्थन देने का फैसला किया, जिसके बाद DMK और कांग्रेस के रिश्तों में खुला तनाव सामने आ गया.

पेट्रोल-डीजल को लेकर घबराने की जरूरत नहीं, सरकार ने कहा’ पर्याप्त है ईंधन का स्टॉक…

0

खाद्य विभाग के मुताबिक वर्तमान में प्रदेश में 3.94 करोड़ लीटर पेट्रोल और 8.09 करोड़ लीटर डीजल का स्टॉक मौजूद है, जबकि सभी जिलों में नियमित आपूर्ति जारी है। छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कमी की अफवाहों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि राज्य में ईंधन का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। खाद्य विभाग के मुताबिक वर्तमान में प्रदेश में 3.94 करोड़ लीटर पेट्रोल और 8.09 करोड़ लीटर डीजल का स्टॉक मौजूद है, जबकि सभी जिलों में नियमित आपूर्ति जारी है।

सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और अनावश्यक रूप से पेट्रोल-डीजल की पैनिक खरीदी या भंडारण न करें। प्रदेशभर में 2516 पेट्रोल पंपों के जरिए सामान्य रूप से ईंधन वितरण किया जा रहा है।

खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि रबी फसल की कटाई और खरीफ सीजन की तैयारी के चलते डीजल की मांग बढ़ी है। इसे देखते हुए रायपुर के लखौली और मंदिर हसौद सहित कोरबा के गोपालपुर डिपो से लगातार सप्लाई की जा रही है। केवल 22 मई को ही राज्य को 21.83 लाख लीटर पेट्रोल और 1.29 करोड़ लीटर डीजल प्राप्त हुआ है।

ईंधन आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा के लिए 20 मई को ऑयल कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक भी आयोजित की गई थी। बैठक में निर्देश दिए गए कि जिन पेट्रोल पंपों पर स्टॉक कम हो रहा है, वहां तुरंत सप्लाई पहुंचाई जाए ताकि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

इधर राज्य शासन ने 22 मई से पेट्रोल पंपों पर ड्रम और जरीकेन में पेट्रोल-डीजल देने पर रोक लगा दी है। हालांकि किसानों और कलेक्टर द्वारा चिन्हित आवश्यक सेवाओं को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है। सरकार का कहना है कि यह फैसला ईंधन की सुचारु उपलब्धता बनाए रखने और अनावश्यक भंडारण रोकने के लिए लिया गया है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधिमंडल की सौजन्य मुलाकात…

0

छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ मंत्री श्री केदार कश्यप के नेतृत्व में सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ सदन में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल और मुख्यमंत्री के बीच सामाजिक समरसता, जनकल्याण तथा छत्तीसगढ़ के समग्र विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में संचालित विकास कार्यों और जनहितकारी योजनाओं की सराहना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं भी दीं।मुख्यमंत्री ने भी समाज के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार आदिवासी समाज के विकास, संस्कृति के संरक्षण और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।