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सीईओ जिला पंचायत ने पीएम आवास योजना-ग्रामीण के लंबित एवं निर्माणाधीन आवासों का किया निरीक्षण

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राजनांदगांव। मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) जिला पंचायत सुश्री सुरूचि सिंह ने आज प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत जिले के विभिन्न ग्रामों में लंबित और निर्माणाधीन आवासों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने ग्राम टेड़ेसरा, सुरगी, कुभटगांव और संबलपुर के हितग्राहियों से चर्चा कर आवास निर्माण को शीघ्र पूर्ण कराने के लिए प्रोत्साहित किया।

सीईओ ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि लंबित आवास निर्माण को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने हेतु हितग्राहियों को आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाए। उन्होंने ग्राम रोजगार सहायक को यह भी कहा कि वे नियमित रूप से मानव दिवस आयोजित कर निर्माण कार्य की गति और निगरानी सुनिश्चित करें।

सुरुचि सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत किस्त राशि का भुगतान आवास निर्माण की प्रगति के अनुसार ही किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान हितग्राहियों ने सीईओ को योजना के तहत प्राप्त किस्त राशि की जानकारी दी। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि जो हितग्राही समय-सीमा में आवास निर्माण पूर्ण कर लेंगे, उनका सम्मान ग्राम पंचायत में आयोजित कार्यक्रम के माध्यम से किया जाएगा।

निरीक्षण के दौरान तकनीकी सहायक, आवास नोडल अधिकारी, आवास योजना के कर्मचारी तथा संबंधित ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक और आवास मित्र भी मौजूद रहे। यह निरीक्षण योजना की गुणवत्ता और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

पढ़ाई में कमजोर छात्रों को लेकर जिले ने किया अभिनव प्रयास : जोन कोचिंग शुरू

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राजनांदगांव। राजनांदगांव जिले ने परीक्षा में कमजोर परिणाम वाले छात्रों के लिए एक अभिनव कदम उठाया है। कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन ने पढ़ाई में कमजोर छात्रों को सुधारने के लिए जोन कोचिंग शुरू की है। जिले के 24 स्थानों पर यह विशेष कोचिंग शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य उन बच्चों की मदद करना है, जिनका अर्धवार्षिक और प्री बोर्ड परीक्षा में प्रदर्शन कमजोर रहा है या जो कई विषयों में अनुत्तीर्ण हुए हैं।

24 जोन में बच्चों को मिलेगी विशेष कोचिंग
शिक्षा विभाग के अनुसार, जिले में 24 जोन बनाए गए हैं, जिनमें से 21 जोन में आज से कोचिंग कार्य शुरू किया गया है। इन जोन में कुल 1560 छात्रों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कोचिंग के दौरान बच्चों को गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे कठिन विषयों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिनमें अधिकतर बच्चे फेल हुए थे।

समीक्षा बैठक के बाद बनी कार्ययोजना
कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव द्वारा प्री बोर्ड परीक्षा के परिणामों की समीक्षा के बाद इस कोचिंग कार्ययोजना को तैयार किया गया था। समीक्षा बैठक में कमजोर परिणाम पर नाराजगी जताई गई थी और प्राचार्यों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इसी कड़ी में जिला शिक्षा अधिकारी श्री प्रवास कुमार सिंह बघेल ने योजना बनाई और शिक्षकों की टीम द्वारा बच्चों को गत 5 वर्षों के प्रश्न पत्र, ब्लूप्रिंट आधारित प्रश्नों और जिले द्वारा तैयार किए गए प्रश्न बैंक पर आधारित विशेष तैयारी करवाई जाएगी।

नोडल अधिकारी और मॉनिटरिंग टीम की नियुक्ति
इस कोचिंग की सफलता सुनिश्चित करने के लिए विकासखंड स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। साथ ही, जिला प्रशासन द्वारा एक मॉनिटरिंग टीम भी गठित की गई है, जो कोचिंग की नियमित निगरानी करेगी। कोचिंग में आने वाले छात्रों और उनके पालकों से भी नियमित संवाद किया जाएगा, ताकि तैयारी का सही दिशा में संचालन हो सके।

संपूर्ण कोचिंग कार्य को लेकर उत्साह
जोन कोचिंग के पहले दिन 91 शिक्षकों ने अपनी सेवाएं दी और कुल 1560 छात्रों ने उपस्थिति दर्ज की। 3 जोन में परीक्षा व्यापम द्वारा की जा रही परीक्षा के कारण कोचिंग 2 फरवरी से शुरू होगी। कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने बताया कि इस कोचिंग का उद्देश्य जिले के परीक्षा परिणामों में सुधार लाना है और बच्चों को सही मार्गदर्शन देना है, ताकि वे बोर्ड परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन कर सकें।

नवाचार के साथ बच्चों के भविष्य की ओर कदम
इस अभिनव प्रयास से बच्चों को न केवल सही मार्गदर्शन मिलेगा, बल्कि यह उनका आत्मविश्वास भी बढ़ाएगा। जिला प्रशासन द्वारा किए गए इस कदम से यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी बच्चा परीक्षा में पीछे न रहे और हर छात्र को सफलता की दिशा में मदद मिले।

जिले में धान खरीदी का महाभियान सफलतापूर्वक संपन्न, किसानों को हुआ 1484 करोड़ रूपए का भुगतान

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राजनांदगांव। जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत चलाए गए धान खरीदी महाभियान को सफलता की बड़ी उपलब्धि मिली है। कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव के मार्गदर्शन और शासन की किसान हितैषी नीतियों के अनुरूप, जिले में 15 नवम्बर 2025 से 30 जनवरी 2026 तक चले इस अभियान में 124095 किसानों ने अपनी उपज बेची। इस दौरान कुल 62.53 लाख क्विंटल धान की खरीदी की गई, जिसका मूल्य 1484.57 करोड़ रूपए रहा। किसानों के खातों में यह राशि तुरंत ट्रांसफर की गई, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।

कोचियों और बिचौलियों की नाकामी
इस वर्ष एक महत्वपूर्ण सफलता यह रही कि जिले में कोचियों और बिचौलियों द्वारा 363 करोड़ रूपए मूल्य का 11 लाख क्विंटल धान खपाने के प्रयास को विफल कर दिया गया। जिला प्रशासन ने सतर्क एप के माध्यम से रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था की थी, जिससे धान खरीदी और परिवहन में होने वाली किसी भी अनियमितता पर तुरंत कार्रवाई की गई। इसके अलावा, अवैध धान की आवक रोकने के लिए बॉर्डर और संवेदनशील रास्तों पर रातभर पहरा भी दिया गया।

प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था और नवाचार
कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने इस बार धान खरीदी को सुगम बनाने के लिए कई नवाचार किए। जिले के 96 धान खरीदी केन्द्रों पर नोडल अधिकारियों और माइक्रो ऑब्जर्वर्स की नियुक्ति की गई, ताकि सभी कार्य सुचारू रूप से संपन्न हो सकें। 50 सदस्यीय विशेष जांच दल द्वारा प्रत्येक सप्ताह आकस्मिक निरीक्षण किए गए और भौतिक सत्यापन भी किया गया। ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, पटवारियों, समिति प्रबंधकों और डाटा एंट्री ऑपरेटरों के साथ साप्ताहिक बैठकें आयोजित कर आगामी कार्य योजना बनाई गई।

किसानों को त्वरित राहत और समाधान
कलेक्टर के निर्देश पर रकबा समर्पण अभियान भी चलाया गया, जिसमें 71790 किसानों ने स्वेच्छा से 55790 एकड़ रकबे का समर्पण किया, जिससे बिचौलियों और कोचियों के अवैध धान खपाने के प्रयास को निष्फल किया गया। इस वर्ष की धान खरीदी में जिला प्रशासन द्वारा 600 से अधिक किसानों की समस्याओं का त्वरित समाधान किया गया। इनमें पंजीयन, रकबा और फसल संबंधी तकनीकी समस्याएं थीं, जिन्हें शीघ्र निपटाया गया।

अवधारणा और प्रशासन की प्रतिबद्धता
कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने कहा कि इस वर्ष की धान खरीदी महाभियान के सफल संचालन में प्रशासन, किसानों और सभी संबंधित अधिकारियों का संयुक्त प्रयास रहा है। उन्होंने कहा, “हमारे उद्देश्य को पूरा करने के लिए हमें नवाचार, पारदर्शिता और समन्वय की आवश्यकता थी, जो इस अभियान में देखने को मिली।”

कृषक सम्मान और संघर्ष की जीत
किसानों ने धान खरीदी के लिए जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का धन्यवाद किया। किसानों का मानना है कि इस बार धान खरीदी की प्रक्रिया न केवल पारदर्शी रही, बल्कि इसके चलते उन्हें अच्छे दाम और समय पर भुगतान मिला। यह कदम राज्य सरकार की कृषक हितैषी नीतियों के तहत किसानों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुआ है।

धान खरीदी महाभियान ने यह साबित कर दिया है कि जब सरकार की नीतियां सही दिशा में कार्य करती हैं, तो किसानों का जीवन समृद्ध और खुशहाल बन सकता है।

कलेक्टर की प्राचार्यों को सख्त चेतावनी, बोर्ड परीक्षा परिणाम सुधारने के लिए मिशन मोड में काम करने के निर्देश

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राजनांदगांव। कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने सोमवार को कक्षा 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा को लेकर जिला पंचायत सभाकक्ष में प्राचार्यों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में कलेक्टर ने सभी प्राचार्यों से परीक्षा परिणामों को बेहतर बनाने के लिए तत्काल एक ठोस कार्ययोजना तैयार करने को कहा। साथ ही, बच्चों की पढ़ाई में कोई भी कमी न हो, इसके लिए विशेष निर्देश दिए गए।

कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि बोर्ड परीक्षा के परिणामों को लेकर कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा, “सभी प्राचार्य परीक्षा परिणामों को बेहतर बनाने के लिए मिशन मोड में काम करें और बच्चों के कमजोर विषयों पर विशेष ध्यान दें।” कलेक्टर ने यह भी बताया कि जिन बच्चों के परिणाम प्री बोर्ड में असंतोषजनक रहे हैं, उनके लिए अतिरिक्त कक्षाएं शुरू करने के साथ-साथ विशेषज्ञ शिक्षकों की सेवाएं भी ली जाएं।

बैठक में कलेक्टर ने प्री बोर्ड परिणामों की समीक्षा की और कई स्कूलों के परिणाम को लेकर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जिन स्कूलों के परिणाम बेहतर नहीं हैं, उनके प्राचार्यों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। इस संदर्भ में छुरिया और डोंगरगांव के कक्षा 10वीं के स्कूलों, डोंगरगढ़, बालिका डोंगरगढ़ और अन्य कमजोर परिणाम वाले स्कूलों के प्राचार्यों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, सुश्री सुरूचि सिंह ने भी शिक्षा विभाग के अधिकारियों से बच्चों के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कमजोर बच्चों को सुधारने के लिए विशेषज्ञ शिक्षकों की सेवाएं लेकर बोर्ड परीक्षा में उनका परिणाम सुधारने के प्रयास किए जाएं। साथ ही, ओआईसी श्री विश्वास कुमार ने सभी स्कूलों को जोन कोचिंग और आवासीय कोचिंग का भी सुझाव दिया और कहा कि पालकों को भी प्रेरित किया जाए।

जिला शिक्षा अधिकारी श्री प्रवास सिंह बघेल ने बताया कि 31 जनवरी से जिले में 22 जोन बनाए जाएंगे, जहां बच्चों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं शुरू की जाएंगी। इसके साथ ही 2 फरवरी से जिले के बरगा प्रशिक्षण केंद्र में टॉपर्स के लिए आवासीय कोचिंग भी शुरू की जाएगी। इससे जिले के मेधावी छात्रों को राज्य की प्रावीण्य सूची में जगह दिलाने की उम्मीद है।

कलेक्टर ने सभी प्राचार्यों से यह भी कहा कि शिक्षक उपस्थिति रजिस्ट्रेशन को जल्द पूरा करें और बायोमेट्रिक उपस्थिति शुरू करें ताकि विद्यालयों में नियमितता बनी रहे। इसके साथ ही, स्कूलों में कमजोर परिणाम वाले छात्रों के लिए विशेष प्रयास किए जाएं ताकि बोर्ड परीक्षा में जिले का परिणाम बेहतर हो सके।

बैठक में शिक्षा विभाग के अधिकारी और प्राचार्य उपस्थित थे।

कीमती धातुओं की कीमतों में भारी गिरावट: सोना, चांदी और प्लैटिनम प्रभावित…

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कीमतों में गिरावट का कारण

30 जनवरी 2026 को कीमती धातुओं के बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिली, जिसमें सोने, चांदी और प्लैटिनम की कीमतों में तेज गिरावट आई।

सोने की कीमत में लगभग 12 प्रतिशत की कमी आई, जबकि चांदी में 26 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।

प्लैटिनम भी 18 प्रतिशत नीचे गिर गया। यह गिरावट अंतरराष्ट्रीय बाजार में देखी गई, जहां सोना अपने उच्चतम स्तर से नीचे आया और चांदी ने 1980 के बाद का सबसे खराब दिन देखा।

जनवरी में कीमती धातुओं की रैली

इससे पहले जनवरी में इन धातुओं में जबरदस्त तेजी देखी गई थी। सोने की कीमत $5,000 प्रति औंस के पार पहुंच गई थी और चांदी ने $120 के आसपास का स्तर छुआ था, जिससे ये ऐतिहासिक ऊंचाइयों पर पहुंच गई थीं। लेकिन महीने के अंत में मुनाफा वसूली के चलते बाजार में उतार-चढ़ाव आया।

विश्लेषकों की राय

यूके स्थित इन्वेस्टमेंट बैंक पैनम्योर लिबेरम के कमोडिटी विश्लेषक टॉम प्राइस ने बताया, “यह बाजार के शिखर पर पहुंचने का क्लासिक रवैया है। भ्रम और अनिश्चितता का माहौल है। हर कोई स्पष्टता की तलाश में है।”

ग्रुप एमकेएस पैम्प की विश्लेषक निकी शील्स ने कहा कि हाल के उतार-चढ़ाव को ‘कीमती धातुओं के इतिहास का सबसे अधिक अस्थिर महीना’ कहा जा सकता है।

गिरावट का मुख्य कारण

विश्लेषकों के अनुसार, इस गिरावट का मुख्य कारण अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा फेडरल रिजर्व चेयर के लिए केविन वार्श को नामित करने की खबर है, जिससे फेड की स्वतंत्रता पर चिंताएं कम हुईं और डॉलर मजबूत हुआ। इससे निवेशकों ने सुरक्षित माने जाने वाले इन एसेट्स से मुनाफा निकाला।

महीने भर की तेजी के बाद प्रॉफिट बुकिंग और महीने के अंतिम दिन की पोजिशनिंग ने इस गिरावट को और बढ़ा दिया।

भविष्य की संभावनाएं

हालांकि, कई विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सुधार अस्थायी हो सकता है, क्योंकि लंबी अवधि में भू-राजनीतिक अनिश्चितता, मुद्रास्फीति और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से कीमती धातुओं में तेजी बनी रह सकती है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बाजार की अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए सतर्क रहें।

“IIFT की वैश्विक व्यापार में भूमिका को मान्यता मिली”

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वाणिज्य और उद्योग मंत्री, पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (IIFT) भविष्य के नेताओं को आकार देने और वैश्विक व्यापार परिदृश्य में भारत की उपस्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

IIFT को ‘टाइम्स बी-स्कूल रैंकिंग 2026’ में पहले स्थान पर रखा गया है, जो इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक व्यवसाय पर केंद्रित एक प्रमुख प्रबंधन शिक्षा संस्थान के रूप में मान्यता देता है।

गोयल ने इस उपलब्धि को IIFT के छात्रों को कौशल, दृष्टि और महत्वपूर्ण क्षमताओं से सशक्त बनाने के निरंतर प्रयासों का प्रमाण बताया।

वाणिज्य सचिव और IIFT के चांसलर, राजेश अग्रवाल ने कहा कि संस्थान की प्रगति इसकी मजबूत शैक्षणिक नींव, वैश्विक दृष्टिकोण और उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

उन्होंने जोर देकर कहा, “IIFT भारत की अंतरराष्ट्रीय व्यापार में एक वैश्विक शक्ति के रूप में उभरने की आकांक्षा का समर्थन करता है और राष्ट्रीय व्यापार, आर्थिक और रणनीतिक प्राथमिकताओं के अनुरूप वैश्विक स्तर पर सक्षम प्रबंधन पेशेवरों को तैयार करने में योगदान देता है।”

1963 में स्थापित, भारतीय विदेश व्यापार संस्थान वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत एक मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय है।

IIFT अंतरराष्ट्रीय व्यापार और व्यवसाय में एक प्रमुख संस्थान के रूप में, प्रमुख MBA कार्यक्रम, कार्यकारी शिक्षा और डॉक्टोरल अनुसंधान प्रदान करता है, जो वैश्विक वाणिज्य और व्यापार नीति में भारत की वृद्धि में योगदान करता है।

संस्थान के दिल्ली, कोलकाता, काकिनाडा और GIFT सिटी में परिसर हैं, और यह दुबई में अपना पहला विदेशी परिसर शुरू करने की प्रक्रिया में है।

IIFT के उपकुलपति, प्रोफेसर राकेश मोहन जोशी ने गोयल और अग्रवाल का उनके दृष्टिकोण और निरंतर समर्थन के लिए धन्यवाद दिया और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के क्षेत्र में प्रबंधन शिक्षा में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

पिछले सितंबर में, IIFT ने वाणिज्य विभाग के अधिकारियों के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार वार्ता कार्यक्रम का उद्घाटन किया। IIFT के अंतरराष्ट्रीय वार्ता केंद्र द्वारा आयोजित, यह कार्यक्रम सरकारी अधिकारियों की वार्ता कौशल को मजबूत करने और भारत की वैश्विक व्यापार सहभागिता को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर नए कर ढांचे की शुरुआत…

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1 फरवरी से, सरकार सिगरेट, तंबाकू उत्पादों और पान मसाला के लिए एक नया कर ढांचा लागू करने जा रही है, जिसका उद्देश्य इन ‘पापी वस्तुओं’ पर नियंत्रण को सख्त करना और कर स्तर को ऊँचा रखना है।

सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर अब एक अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा, साथ ही पान मसाला पर एक नया स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर भी लागू होगा।

ये नए कर पहले के प्रणाली को प्रतिस्थापित करेंगे, जिसमें इन उत्पादों पर 28 प्रतिशत जीएसटी और एक मुआवजा उपकर लगाया जाता था, जो जुलाई 2017 में जीएसटी के लॉन्च के बाद से लागू था।

सरकार कई तंबाकू उत्पादों जैसे चबाने वाले तंबाकू, फ़िल्टर खैनी, जर्दा सुगंधित तंबाकू और गुटखा के लिए एक नया एमआरपी-आधारित मूल्यांकन प्रणाली भी पेश कर रही है।

इस प्रणाली के तहत, जीएसटी अब पैकेट पर मुद्रित खुदरा मूल्य के आधार पर गणना की जाएगी, न कि फैक्ट्री मूल्य के आधार पर।

इस कदम से कर चोरी में कमी आने और राजस्व संग्रह में सुधार होने की उम्मीद है। पान मसाला निर्माताओं को 1 फरवरी से नए स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर कानून के तहत नई पंजीकरण करानी होगी।

उन्हें सभी पैकिंग मशीनों को कवर करने वाले सीसीटीवी कैमरे भी स्थापित करने होंगे और वीडियो रिकॉर्डिंग को कम से कम दो वर्षों तक सुरक्षित रखना होगा।

इसके अलावा, कंपनियों को अपने कारखानों में मशीनों की संख्या और उनकी उत्पादन क्षमता के बारे में उत्पाद शुल्क अधिकारियों को सूचित करना होगा।

यदि कोई मशीन लगातार 15 दिनों तक गैर-कार्यशील रहती है, तो निर्माताओं को उस अवधि के लिए उत्पाद शुल्क में कमी का दावा करने की अनुमति होगी।

नए परिवर्तनों के बावजूद, सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि पान मसाला पर कुल कर बोझ, जिसमें 40 प्रतिशत जीएसटी शामिल है, वर्तमान स्तर के लगभग 88 प्रतिशत के आसपास बना रहेगा।

अमित शाह का दावा: भाजपा उत्तर बंगाल में विधानसभा चुनावों में करेगी शानदार जीत…

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को यह विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आगामी विधानसभा चुनावों में उत्तर बंगाल की सभी सीटों पर शानदार सफलता प्राप्त करेगी।

सिलीगुड़ी में पार्टी कार्यकर्ताओं की एक सभा में बोलते हुए, शाह ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी की सरकार के अधिकारी चुनाव आयोग के साथ विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में सहयोग नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा एसआईआर का समर्थन करती है और मतदाता सूची को शुद्ध करने में चुनाव आयोग को पूरा सहयोग देगी। शाह ने आगामी चुनावों में भाजपा की जीत की भविष्यवाणी करते हुए कहा कि लोग टीएमसी के भ्रष्टाचार और सिंडिकेट राज से परेशान हैं।

भ्रष्टाचार पर हमला

अमित शाह ने आगे कहा कि 2026 के चुनावों में तृणमूल कांग्रेस सरकार को पूरी तरह से उखाड़ फेंकना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने बंगाल को बर्बाद कर दिया है और 2026 का साल बदलाव का होगा। शाह ने यह भी दावा किया कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी सरकार से अधिक भ्रष्ट कोई सरकार नहीं है। उन्होंने कहा कि ममता दीदी भ्रष्टाचार को नकारती हैं, लेकिन वास्तव में उन्होंने इसे संस्थागत बना दिया है।

चुनाव की तारीखें

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की अंतिम तिथियों की घोषणा अभी बाकी है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि चुनाव इस साल मई तक संपन्न हो जाएंगे।

“Budget 2026: क्या क्रिप्टो निवेशकों को मिलेगी टैक्स में राहत? जानिए बजट से निवेशकों की क्या हैं उम्मीदें”

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पिछले कुछ समय में भारतीय निवेशकों में क्रिप्टोकरेंसी और दूसरे वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) को लेकर दिलचस्पी में तेजी देखने को मिली हैं. हालांकि, भारी टैक्स बोझ की वजह से इस क्षेत्र में निवेश करना आसान नहीं है.

मौजूदा व्यवस्था के चलते कई निवेशक असमंजस में हैं.

साथ ही अब बजट 2026 को पेश होने में बस एक दिन का समय बचा है. ऐसे में क्रिप्टो इंडस्ट्री से जुड़े लोगों, टैक्स विशेषज्ञों और निवेशकों की उम्मीदें फिर से बढ़ गई हैं. सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या सरकार टैक्स और नियमों को लेकर कोई बड़ा फैसला करेगी या मौजूदा सिस्टम को ही जारी रखा जाएगा. ऐसे में इस बजट से क्रिप्टो निवेशकों को बहुत सी उम्मीदें हैं. आइए इस बारे में जानते हैं…..

बजट 2026 से निवेशकों की उम्मीदें

वर्चुअल डिजिटल एसेट्स से होने वाली कमाई पर 30 प्रतिशत की सीधी टैक्स दर लगती है. जिसमें खरीद लागत के अलावा किसी भी तरह की छूट नहीं मिलती है. साथ ही, हर सौदे पर 1 प्रतिशत टीडीएस भी काटा जाता है. जिससे सरकार को निवेश गतिविधियों का पूरा रिकॉर्ड मिलता है. हालांकि, इन सख्त नियमों की वजह से निवेशकों पर अतिरिक्त बोझ आता है.

लगातार टीडीएस कटने से कई बार ट्रेडिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली रकम फंस जाती है. जिससे छोटे निवेशकों को ज्यादा परेशानी होती है. इसी कारण कई लोग विदेशी एक्सचेंजों या अनौपचारिक प्लेटफॉर्म की तरफ रुख करने लगे हैं. जहां नियम यहां की तुलना में आसान होते हैं.

इसका असर देश के घरेलू क्रिप्टो बाजार पर भी पड़ रहा है. ऐसे हालात में निवेशक अब इस टैक्स व्यवस्था में बदलाव और राहत की उम्मीद कर रहे हैं.

बजट 2022 से बदली क्रिप्टो टैक्स की दिशा

केंद्र सरकार की ओर से कुछ साल पहले डिजिटल एसेट्स पर ध्यान देना शुरु किया था. लेनदेन में आई तेजी इसका मुख्य वजह मानी गई थी. केंद्रीय बजट 2022 में वित्त मंत्री ने बताया था कि क्रिप्टो और अन्य डिजिटल परिसंपत्तियों का दायरा और कारोबार इतना बढ़ चुका है कि इसके लिए अलग टैक्स व्यवस्था बनाना जरूरी हो गया है.

इससे साफ हुआ कि सरकार अब इन एसेट्स को औपचारिक वित्तीय सिस्टम का हिस्सा मान रही है. साथ ही सरकार उन्हें टैक्स के दायरे में लाना चाहती है.

कैसे मिलती है डॉली चायवाला की फ्रेंचाइजी, इसके लिए कितने पैसे करने होंगे खर्च?

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डॉली चायवाला तब सुर्खियों में आए जब उनका वीडियो बिल गेट्स के साथ वायरल हुआ. चाय परोसने का उनका स्टाइल लोगों को अलग लगा और देखते ही देखते वह सोशल मीडिया स्टार बन गए. अब वही पहचान उनके लिए बड़ा मौका बन रही है.

डॉली चायवाला ने अपने ब्रांड ‘डॉली की टपरी’ को फ्रेंचाइजी मॉडल को शुरू करने का ऐलान किया

डॉली ने बताया कि यह सिर्फ चाय की दुकान नहीं. एक स्ट्रीट ब्रांड है जो तेजी से पहचान बना चुका है. उनका कहना है कि वह ऐसे लोगों की तलाश में हैं जिनमें कुछ नया और बड़ा करने का जज्बा हो. फिलहाल यह मौका चुनिंदा शहरों के लिए खोला गया है.

जो लोग फ्रेंचाइजी लेना चाहते हैं उनको तीन अलग ऑप्शन दिए जा रहे हैं. पहला मॉडल ठेला है. जिसे छोटे स्तर पर शुरू किया जा सकता है. इसकी लागत करीब 4.5 लाख से 6 लाख रुपये तक बताई गई है. यह उन लोगों के लिए है जो कम निवेश में ब्रांड के साथ शुरुआत करना चाहते हैं.

दूसरा ऑप्शन स्टोर मॉडल है. इसमें दुकान के रूप में सेटअप किया जाएगा. इस मॉडल के लिए 20 लाख से 22 लाख रुपये के बीच बताया गया है. यह उन लोगों के लिए सही है जो पक्की लोकेशन पर ब्रांड के साथ काम करना चाहते हैं.

तीसरा और सबसे बड़ा मॉडल फ्लैगशिप कैफे का है. इसमें कैफे स्टाइल आउटलेट तैयार किया जाएगा. इसके लिए 39 लाख से 43 लाख रुपये तक का खर्च आ सकता है. यह मॉडल बड़े शहरों और प्रीमियम लोकेशन के लिए सही माना जा रहा है.

डॉली चायवाला की फ्रेंचाइजी के लेने के लिए https://dollychaifranchise.com/ पर जाकर अप्लाई करना होगा. जहां आपको अपनी पर्सनल जानकारी के साथ अपनी इन्वेस्टमेंट कैपेसिटी बतानी होगी. इसके बाद आपको फार्म सबमिट करना होगा. इसके बाद आपको कान्टेक्ट किया जाएगा आगे की प्रोसेस के लिए.