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कौन है लाला बिहारी जिसने गुजरात में बस दिया ‘मिनी बांग्लादेश’, कैसे हुआ इतना बड़ा खेल

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गुजरात की राजधानी अहमदाबाद में चंडोला झील के आसपास बनी अवैध बस्तियों को मंगलवार को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया. इन बस्तियों में 2000 से अधिक घर थे और इसे मिनी बांग्लादेश कहा जा रहा था. यह शहर में लंबे समय से चल रहे अवैध बस्तियां बसाने और बिजली चोरी के बड़े रैकेट का नतीजा है. इस रैकेट के मुख्य आरोपी फतेह मोहम्मद पठान को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार कर लिया है. उसका पिता कुख्यात लाला पठान उर्फ लाला बिहारी इस रैकेट का मास्टरमाइंड है. वह अभी फरार है. यह कार्रवाई पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद देश में बढ़ी सुरक्षा चिंताओं के बीच हुई है. इस कार्रवाई में करीब 2,000 अवैध झोपड़ियां ढहाई गईं.

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक लाला बिहारी मूल रूप से अजमेर का रहने वाला है और दो दशक पहले वह अहमदाबाद में बस गया था. वह अवैध प्रवासियों खासकर बांग्लादेशियों के बीच एक फिक्सर के रूप में मशहूर है. पश्चिम बंगाल में एजेंटों के जरिए उसका नाम पूरे इलाके में फैला हुआ है. उसने चंडोला झील के आसपास सरकारी जमीन पर कब्जा कर टिन शेड, कमरे, गोदाम और पार्किंग की सुविधाएं बनाई. वह इन्हें किराए पर देता था. उसने जाली किराया समझौते और बिजली बिलों का इस्तेमाल कर प्रवासियों को भारतीय नागरिकता का झूठा दावा करने में मदद की. पुलिस के अनुसार इस रैकेट से हर महीने 10-12 लाख रुपये की कमाई होती थी

136 पार्किंग, 56 होल्डिंग प्वाइंट और…चारधाम यात्रा के दौरान न हो जाम का झाम

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अगर आप भी चारधाम यात्रा (Char Dham Yatra) पर जाने का प्लान बना रहे हैं तो आपके लिए यहां के जाम से बचने का इंतजाम जरूर जान लेना जरूरी होगा. दरअसल, चारधाम यात्रा का शुभारंभ गंगोत्री (Gangotri Dham) और यमनोत्री (yamunotri Dham) के कपाट खुलने से ही शुरू हो गई है. ऐसे में यहां भक्तों का तांता लगने वाला है. खराब मौसम (Weather Alert) के बावजूद भक्तों की आस्था कम नहीं होने वाली है. पिछले वर्ष चार धामों में भारी भीड़ उमड़ने लगी थी. इस कारण तमाम रूटों पर जाम जैसी स्थिति दिखी. इसलिए इस बार ऐसे हालात से बचने की योजना पहले ही तैयार कर ली गई है. चार धाम यात्रा को लेकर भीड़ प्रबंधन के साथ ही सरकार की ओर से ट्रैफिक कंट्रोल (Traffic Control) का भी फूलप्रूफ प्लान तैयार किया गया है. भीड़ बढ़ने पर देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार, विकास नगर, हरबर्टपुर जैसे बड़े शहरों को ट्रैफिक के जाम से बचाने के लिए वैकल्पिक ट्रैफिक प्लान तैयार किया गया है. आइए उत्तराखंड के डीजीपी की जुबानी जानते हैं पुख्ता इंतजाम के बारे में…

यह है सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम
चार धाम यात्रा की तैयारी का जायजा लेने के लिए उत्तराखंड (Uttarakhand) के डीजीपी दीपम सेठ हरिद्वार पहुंचे. यहां उन्होंने रजिस्ट्रेशन सेंटर पर यात्रियों से भी बातचीत की और सुरक्षा व्यवस्था का भी निरीक्षण किया. डीजीपी ने बताया की पहलगाम की आतंकवादी घटना के बाद चारधाम की यात्रा व्यवस्था को और पुख्ता बनाया गया है. इस बार 10 कंपनी अर्धसैनिक बलों की भी तैनाती की जाएगी. सीसीटीवी कैमरा जगह-जगह पर लगाए गए हैं. 10 हजार से ज्यादा फोर्स चार धाम यात्रा को हरिद्वार से लेकर गंगोत्री यमुनोत्री बद्रीनाथ और केदारनाथ तक मॉनिटर कर रही है. क्राउड कंट्रोल और ट्रैफिक मैनेजमेंट पर खास प्लान बनाए गए हैं

CCPA यूं नहीं सुपर कैबिनेट, पुलवामा अटैक के बाद हुई बैठक तो बालाकोट में सर्जिकल स्‍ट्राइक, इस बार होगा कुछ बड़ा

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पहलगाम में निर्दोष निहत्‍थे हिन्‍दू पर्यटकों की हत्‍या का बदला लेने की तैयारी जोरशोर से चल रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक सप्‍ताह में दूसरी बार कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्‍योरिटी (CCS) की बैठक ली. इसमें दिग्‍गज मंत्रियों के साथ ही सेना के तीनों अंगों के चीफ ने हिस्‍सा लिया. छह साल से भी ज्‍यादा समय के बाद बुधवार 30 अप्रैल 2025 को सुपर कैबिनेट यानी कैबिनेट कमेटी ऑन पॉलिटिकल अफेयर्स (CCPA) की बैठक भी हुई. CCPA की पिछली बैठक पुलवामा हमले के बाद यानी साल 2019 में हुई थी. इस बैठक के महत्‍व का अंदाजा इसी बात से लगाया जाता है कि CCPA की मीटिंग होने के बाद 26 फरवरी 2019 को इंडियन एयरफोर्स ने बालाकोट पर एयर सर्जिकल स्‍ट्राइक की थी. CCPA की बैठक ऐसे समय में बुलाई गई है, जब पाकिस्‍तान के एक मंत्री ने कहा कि भारत अगले 24 से 36 घंटे में हमला कर सकता है. ऐसे में बैसरन घाटी हमले के बाद CCPA की बैठक को काफी अहम माना जा रहा है. पिछले उदाहरण को देखते हुए इस बार भी कुछ बड़ा होने की संभावना प्रबल लग रही है.

CCPA की पिछली बैठक साल 2019 में पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले के बाद हुई थी. इस हमले में कम से कम 40 सीआरपीएफ जवान मारे गए थे. बैठक स्थिति की समीक्षा करने और इस कायरतापूर्ण हमले का जवाब देने की योजना बनाने के लिए आयोजित की गई थी. इसी बैठक में भारत ने पाकिस्तान के मोस्‍ट फेवर्ड नेशन ट्रेड का दर्जा खत्म करने का फैसला किया था. बैठक के कुछ दिनों बाद 26 फरवरी को इंडियन एयरफोर्स ने बालाकोट में आतंकवादी शिविरों पर हवाई हमला करके पाकिस्तान को बड़ा झटका दिया था. इसके साथ ही पुलवामा के क्रूर आतंकवादी हमले का बदला लिया था. इसे देखते हुए पहलगाम अटैक के बाद CCPA की बैठक महत्वपूर्ण हो गई है. सभी की नजरें इस बैठक और इसके बाद उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हैं

कम उम्र में बाल हो रहे हैं सफेद? बाबा रामदेव ने बताए 5 आसान तरीके

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आज के जमाने में 15-20 साल की उम्र में ही बाल सफेद हो रहे हैं. कई लोगों के बाल 20 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते पूरी तरह सफेद हो जाते हैं. इन दिनों छोटे बच्चे भी सफेद बालों की समस्या से जूझ रहे हैं. कम उम्र में बाल सफेद हो जाएं, तो लोगों को मानसिक परेशानियों से गुजरना पड़ता है. डॉक्टर्स मानते हैं कि सफेद बालों को दोबारा काला करना बेहद मुश्किल होता है, लेकिन कई आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों और योगाभ्यास की मदद से सफेद बालों को दोबारा काला किया जा सकता है. योग गुरु बाबा रामदेव ने एक टीवी चैनल से बातचीत में सफेद बालों को दोबारा काला करने के बेहद आसान तरीके बताए हैं, जिनसे सफेद बालों की समस्या के अलावा बाल झड़ने की परेशानी से भी राहत मिल सकती है.

बाबा रामदेव ने बताया कि जिन लोगों के कम उम्र में बाल सफेद हो रहे हैं, उन्हें नियमित रूप से आंवला, एलोवेरा और गिलोय का रस निकालकर पीना चाहिए. इन चीजों में अनगिनत पोषक तत्व होते हैं, जो सफेद बालों की समस्या से राहत दिलाने में कारगर हो सकते हैं. सफेद बालों से जूझ रहे लोग सुबह एलोवेरा-आंवला जूस पिएं और रात को दूध के साथ एक चम्मच च्यवनप्राश खाएं. इससे गजब के फायदे मिल सकते हैं और बाल नेचुरल तरीके से काले हो सकते हैं. इसके अलावा लोगों को बालों को दोबारा काले करने के लिए नियमित रूप से शीर्षासन और सर्वांगासान का अभ्यास करना चाहिए. इन योगाभ्यास से बालों तक खून का प्रवाह बेहतर होता है और प्रीमेच्योर ग्रेइंग से राहत मिलती है. लोग अपनी क्षमता के अनुसार इन आसनों का अभ्यास कर सकते हैं

PM आवास पर CCS की बैठक खत्‍म, पहलगाम अटैक पर हुई चर्चा

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कि भारत हमला कर सकता है. शाहबाज शरीफ की सरकार अमेरिका और चीन जैसे देशों से हस्‍तक्षेप करने और तनाव को करने में मदद की अपील भी कर रहा है. दूसरी तरफ, भारत ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुरक्षाबलों को खुली छूट दे दी है. पहलगाम नरसंहार के बाद मोदी कैबिनेट की आज यानी 30 अप्रैल 2025 को अहम बैठक होने वाली है, जिसमें कई बड़े फैसले लिए जा सकते हैं. बुधवार को ही कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्‍योरिटी (CCS) की भी अहम बैठक होने वाली है. इसमें मौजूदा हालात और आगे उठाए जाने वाले कदम को लेकर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं.

जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत सरकार को समर्थन देने की बात दोहराई. उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान दुश्मनी चाहता है तो हम तैयार हैं. फारूक अब्दुल्ला ने कहा, ‘हम लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पूरा समर्थन देने की बात कही है, इसके बाद हमारे साथ कोई सवाल नहीं होना चाहिए. पीएम मोदी जो करना चाहें, वो करें.’ पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की तरफ से न्यूक्लियर हमले की धमकी देने के सवाल पर फारूक अब्दुल्ला ने कहा, ‘हमारे पास भी न्यूक्लियर पावर है, उनसे पहले है. मुझे वाजपेयी की याद आती है. जब मैं पोखरण उनके साथ गया था, तो उन्होंने कहा था कि हम कभी भी इसका इस्तेमाल नहीं करेंगे. जब तक कोई और हम पर पहला हमला नहीं करेगा, हिंदुस्तान ने कभी भी पहले आक्रमण नहीं किया है. हमेशा वही से हुआ है और हमने उसका जवाब दिया है. आज भी हम इसका इस्तेमाल नहीं करेंगे, लेकिन अगर वे इसका इस्तेमाल करते हैं, तो हमारे पास भी यह है. भगवान करे कि ऐसी बात न आए

TRF रच रहा एक और हमले की साजिश? कश्‍मीर घाटी में चप्‍पे-चप्‍पे पर जवान तैनात

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पहलगाम की बैसरन घाटी में निर्दोष हिन्‍दू पर्यटकों की हत्‍या के बाद भारत और पाकिस्‍तान के बीच का संबंध काफी तनावपूर्ण हो गया है. पीओके में पाकिस्‍तान ने जवानों का जमावड़ा लगाना शुरू कर द‍िया है. बर्बर नरसंहार के बाद भारत के गुस्‍से को देखते हुए पाकिस्‍तान में खलबली मची हुई है. पाकिस्‍तानी मंत्री खुलेआम यह कहते हुए पाए जा रहे हैं कि भारत हमला कर सकता है. शाहबाज शरीफ की सरकार अमेरिका और चीन जैसे देशों से हस्‍तक्षेप करने और तनाव को करने में मदद की अपील भी कर रहा है. दूसरी तरफ, भारत ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुरक्षाबलों को खुली छूट दे दी है. पहलगाम नरसंहार के बाद मोदी कैबिनेट की आज यानी 30 अप्रैल 2025 को अहम बैठक होने वाली है, जिसमें कई बड़े फैसले लिए जा सकते हैं. बुधवार को ही कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्‍योरिटी (CCS) की भी अहम बैठक होने वाली है. इसमें मौजूदा हालात और आगे उठाए जाने वाले कदम को लेकर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं.

जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत सरकार को समर्थन देने की बात दोहराई. उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान दुश्मनी चाहता है तो हम तैयार हैं. फारूक अब्दुल्ला ने कहा, ‘हम लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पूरा समर्थन देने की बात कही है, इसके बाद हमारे साथ कोई सवाल नहीं होना चाहिए. पीएम मोदी जो करना चाहें, वो करें.’ पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की तरफ से न्यूक्लियर हमले की धमकी देने के सवाल पर फारूक अब्दुल्ला ने कहा, ‘हमारे पास भी न्यूक्लियर पावर है, उनसे पहले है. मुझे वाजपेयी की याद आती है. जब मैं पोखरण उनके साथ गया था, तो उन्होंने कहा था कि हम कभी भी इसका इस्तेमाल नहीं करेंगे. जब तक कोई और हम पर पहला हमला नहीं करेगा, हिंदुस्तान ने कभी भी पहले आक्रमण नहीं किया है. हमेशा वही से हुआ है और हमने उसका जवाब दिया है. आज भी हम इसका इस्तेमाल नहीं करेंगे, लेकिन अगर वे इसका इस्तेमाल करते हैं, तो हमारे पास भी यह है. भगवान करे कि ऐसी बात न आए.’

टोल प्लाजा से गुजरते ही आप पर लग जाएगा ‘मोटा जुर्माना’, इन हाइवे पर तो सबसे पहले, ऐसा क्‍यों और कैसे होगा

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एक्सपायर हो चुके फिटनेस सर्टिफिकेट, अमान्य बीमा या प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसी) सर्टिफिकेट न होने वाले वाहनों के लिए अब नेशनल हाइवे पर मुश्किल होने वाली है. उनकी गाड़ी के टोल प्लाजा से गुजरते ही जुर्माना अपने आप जारी हो जाएगा. वाहन मालिकों को एसएमएस के जरिए जुर्माने की तुरंत सूचना भी मिल जाएगी. यह सिस्टम हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरों और सॉफ़्टवेयर का उपयोग करके काम करेगा, जो वाहन की नंबर प्लेट को स्कैन करेगा. इसकी शुरुआत राजस्‍थान से होने जा रही है. पहले फेज में यह सिस्टम नेशनल हाइवे के टोल प्लाजा पर लागू किया जाएगा, जिसे स्‍टेट हाइवे और शहर की सड़कों तक बढ़ाए जाने की योजना है. आइये जानते हैं डिटेल में…

दरअसल, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) राजस्थान में टोल प्लाजा पर एक उन्नत ई-डिटेक्शन सिस्टम (Advanced E-Detection System) शुरू करने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है

अक्षय तृतीया से ही क्यों शुरू होती है चारधाम यात्रा, यमराज की बहन से क्या है इसका नाता

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चार धाम की पवित्र तीर्थ यात्रा 30 अप्रैल यानी अक्षय तृतीया से शुरू होने वाली है और यह तीर्थयात्रा चार पवित्र स्थल – यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ की जाती है. अक्षय तृतीया के दिन यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट खुलेंगे, वहीं केदारनाथ धाम के कपाट 2 मई को तो बद्रीनाथ धाम के कपाट 4 मई को खुलेंगे. मान्यता है कि चारधाम यात्रा करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और वह जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है. यह यात्रा आत्म-ज्ञान का अनुभव करवाती है और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है इसलिए हर व्यक्ति को जीवन में एक बार चार धाम यात्रा अवश्य करनी चाहिए. लेकिन क्या आपको पता है कि अक्षय का अर्थ क्या है और इसी दिन से ही चारधाम यात्रा की शुरुआत क्यों होती है? आइए जानते हैं

अक्षय पुण्य फल की होती है प्राप्ति
सनातन धर्म में अक्षय तृतीया को युगादि पर्व कहा जाता है. बैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया के नाम से जाना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान, जप, तप और पूजा करने से अक्षय पुण्य फल मिलता है. इस दिन किसी भी कार्य की शुरुआत करने को भी अति शुभ माना जाता है. इस तिथि पर कोई भी काम करने से सफल माना जाता है

टाटा नमक की कहानी: छोटे-से धंधे में क्यों उतरे रतन टाटा, पैसा कमाना नहीं था मकसद

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टाटा समूह भारत का एक नामी औद्योगिक घराना है, जिसका इतिहास 125 साल पुराना है. सवा सौ साल की इस यात्रा में टाटा ग्रुप ने ट्रक से लेकर स्टील तक बड़े-बड़े बिजनेस में अपनी पहचान बनाई. क्या आप जानते हैं स्टील और ट्रक जैसे सामानों के निर्माण के अलावा टाटा समूह ने नमक के बिजनेस में दस्तक क्यों दी. टाटा नमक का नाम हर देशवासी की जुबां पर है. लेकिन, इस नमक की कहानी बहुत कम लोग ही जानते हैं. खास बात है कि दिवंगत रतन टाटा को ही नमक बेचने का आइडिया आया था लेकिन इसे बिजनेस नहीं बल्कि भलाई के लिए शुरू किया गया था.

देश जानता है कि रतन टाटा की लीडरशिप में टाटा समूह ने दुनियाभर में पहचान बनाई. इसी कड़ी में उन्होंने चाय से लेकर हर देशवासी के घर में टाटा नमक पहुंचाया. खास बात है कि इस रिटेल बिजनेस में रतन टाटा ने जनता की भलाई को प्राथमिकता दी, यह सुनिश्चित करते हुए कि उनके उत्पादों में उनके स्वास्थ्य और स्वाद का ध्यान रखा जाए

क्यों परशुराम ने फरसे के एक ही वार से कर दी प्रिय मां की हत्या, फिर उन्हें जिंदा भी कराया

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ऋषि परशुराम रामायण काल में भी थे और महाभारत काल में भी. उनके क्रोधी स्वाभाव के किस्से दोनों युग में मिलते हैं. परशुराम जयंती वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है. इस लिहाज से इस बार 29 अप्रैल यानि आज परशुराम जयंती मनाई जा रही है. परशुराम के पिता ऋषि जमदग्नि थे तो उनकी माता रेणुका थीं. एक बार उनके जीवन में ऐसा मौका आया कि पिता की आज्ञा से उस मां की हत्या करनी पड़ीं, जो उनके लिए बहुत प्रिय थीं.

उनमें क्षत्रियों के प्रति इतनी नाराजगी थी कि उन्होंने उन्हें धरती से खाली करने की शपथ खाई थी. परशुराम को लेकर तमाम किस्से कहानियां हैं.  परशुराम के बारे में एक बड़ी खास बात ये भी है कि उन्हें अमरता का वरदान मिला हुआ था. उन्होंने रामायण और महाभारत, दोनों में अपना असर दिखाया था. इसलिए उनकी जिंदगी के कुछ किस्से महाभारत से जुड़े हैं तो कुछ रामायण से.

क्यों की मां की हत्या
परशुराम ने अपनी मां की हत्या क्यों की. ये घटना भी हैरान करने वाली है. हालांकि उन्होंने अपने मन से ऐसा बिल्कुल नहीं किया था. इसकी वजह इस तरह थी. हालांकि जब परशुराम ने मां की हत्या कर दी तो उनके पिता समेत हर कोई अवाक रह गया. फिर उन्होंने एक और काम किया जो इसी हैरानी को और बढ़ाने वाला था