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सुशासन तिहार में प्राप्त आवेदनों का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करें – कलेक्टर…

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– तेज गर्मी को देखते हुए विद्युत सब स्टेशनों एवं ट्रांसफार्मरों में अग्नि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के दिए निर्देश’
– अवैध रूप से खाद विक्रय एवं भण्डारण करने वाले दुकानदारों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई करने के दिए निर्देश’
– कलेक्टर ने साप्ताहिक समय-सीमा की ली बैठक’

राजनांदगांव: कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव के निर्देशानुसार जिले में ईंधन संरक्षण के दृष्टिगत एवं शासकीय व्यय में मितव्ययिता का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। कलेक्टर के निर्देश पर आज जिला कार्यालय सभाकक्ष में आयोजित साप्ताहिक समय-सीमा की बैठक में एसडीएम, सीईओ, सीएमओ एवं अन्य अधिकारियों ने वर्चुअली उपस्थिति सुनिश्चित की।

कलेक्टर ने कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित बैठक में विभिन्न विभागों की प्रगति की समीक्षा करते हुए योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन एवं लंबित कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने सुशासन तिहार 2026 अंतर्गत शिविरों में प्राप्त आवेदनों का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए। कलेक्टर ने शिविर में प्राप्त आवेदनों का गंभीरता से परीक्षण कर मौके पर ही गुणवत्ता जांच कर पात्र हितग्राहियों को त्वरित लाभ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

कलेक्टर ने तेज गर्मी एवं बढ़ते तापमान को ध्यान में रखते हुए विद्युत विभाग के अधिकारियों को जिले के सभी विद्युत सब स्टेशनों एवं ट्रांसफार्मरों में अग्नि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि संभावित आगजनी की घटनाओं की रोकथाम के लिए आवश्यक सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता, नियमित निरीक्षण, साफ-सफाई तथा तकनीकी खामियों का समय पर निराकरण किया जाए, ताकि विद्युत आपूर्ति बाधित न हो और जनसुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

कलेक्टर ने पीजी पोर्टल, पीजीएन जन शिकायत, मुख्यमंत्री जनदर्शन तथा कलेक्टर जनदर्शन के लंबित प्रकरणों की गहन समीक्षा की। उन्होंने विभागवार समीक्षा के दौरान लंबित मामलों पर नाराजगी जाहिर करते हुए सभी विभागों को निर्धारित समय-सीमा में प्राथमिकता के आधार पर प्रकरणों का निराकरण करने के निर्देश दिए।

उन्होंने मुख्यमंत्री जनदर्शन के सभी आवेदनों का समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित करने तथा निराकरण की जानकारी संबंधित आवेदकों को भी अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने जिले में खाद भण्डारण एवं वितरण की स्थिति की जानकारी ली। जिले की सहकारी समितियों में खाद का भण्डारण किया गया है, जिसे किसानों को वितरण किया जा रहा है। कलेक्टर ने अवैध रूप से खाद विक्रय एवं भण्डारण करने वाले दुकानदारों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर ने महतारी वंदन योजना के अंतर्गत हितग्राहियों के ई-केवाईसी कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा कि पात्र हितग्राहियों का समय-सीमा में ई-केवाईसी कार्य पूर्ण कराया जाए, ताकि उन्हें योजना का लाभ निर्बाध रूप से मिल सके। कलेक्टर ने जिले में संचालित स्वामित्व योजना के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत लंबित प्रक्रियाओं का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि हितग्राहियों को समय पर स्वामित्व संबंधी दस्तावेज उपलब्ध हो सकें। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ सुश्री सुरूचि सिंह, अपर कलेक्टर श्री सीएल मारकण्डेय, अपर कलेक्टर श्री प्रेमप्रकाश शर्मा, नगर निगम आयुक्त श्री अतुल विश्वकर्मा, एसडीएम डोंगरगढ़ श्री एम भार्गव सहित संबंधित विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

AIADMK के तीन विधायकों का इस्तीफा, विजय को दिया समर्थन…

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तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर AIADMK को बड़ा झटका लगा है. हाल ही में संपन्न हुए चुनाव के बाद AIADMK के भीतर अंदरूनी कलह की बात सामने आई थी. इस बीच AIADMK के तीन विधायकों एम कुमारवेल, सत्यबामा, जयकुमार ने तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंप दिया.

फ्लोर टेस्ट के दौरान दिया था विजय का साथ

तमिलनाडु विधानसभा के अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने तीनों विधायकों का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है. AIADMK से इस्तीफा देने के तुरंत बाद तीनों विधायक तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) सरकार में मंत्री आधव अर्जुन से मिलने उनके दफ्तर पहुंच गए. ये तीनों उन 25 विधायकों में शामिल थे, जिन्होंने पार्टी के निर्देशों की अवहेलना करते हुए मुख्यमंत्री विजय के विश्वास मत हासिल करने के दौरान टीवीके सरकार के समर्थन में मतदान किया था. इसके बाद से ही तीनों विधायकों के पार्टी से इस्तीफा देने की अटकलें तेज हो गई थी.

इन तीन विधायकों मदुरंथकम से निर्वाचित एम. कुमारवेल, धारापुरम से सत्यभामा और पेरुंदुरई विधानसभा क्षेत्र से चुने गए जयकुमार ने AIADMK के टिकट पर चुनाव लड़ा था. धारापुरम (तिरुप्पुर) और पेरुंदुरई (इरोड) पश्चिमी तमिलनाडु के कोंगु क्षेत्र में आते हैं, जो AIADMK का पारंपरिक गढ़ रहा है.

टीवीके में शामिल होंगे तीनों विधायक

माना जा रहा है कि वह मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) में शामिल हो सकते हैं. इस बीच, सीवी षणमुगम-एसपी वेलुमणि गुट में शामिल AIADMK के पांच विधायक फिर से पार्टी प्रमुख ई.के. पलानीस्वामी के खेमे में लौट गए. इसके साथ ही विधानसभा में पलानीस्वामी समर्थक विधायकों की संख्या बढ़कर 27 हो गई है. वेलुमणि गुट छोड़ने वाले विधायकों में एस.एम. सुकुमार (आर्कोट) भी शामिल हैं. तीन विधायकों के इस्तीफे और पांच विधायकों के पलानीस्वामी खेमे में लौटने के बाद, बागी गुट में शामिल विधानसभा सदस्यों की संख्या अब 25 से घटकर 17 रह गई है.

दुनिया का सबसे बड़ा इबादत का सफर शुरू! 17 लाख हाजियों में कितने भारतीय, कैसे सऊदी अरब की GDP का 7% हिस्सा बना हज?

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Hajj 2026: 180 देशों से 17 लाख से ज्यादा लोग. एक ही वक्त और एक ही जगह इकट्ठा हो रहे हैं, जिनका मकसद एक ही है. अपने रब को राजी करना. ये कोई फिल्मी सीन नहीं, बल्कि अरब की सरजमीं पर लिखी जा रही हकीकत है.

हज 2026 शुरू हो चुका है. ये दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक और आर्थिक आयोजन है, जहां इबादत, इंतजाम और अर्थव्यवस्था तीनों एक साथ अपने चरम पर हैं. इस बार 15 लाख से ज्यादा विदेशी हाजी सऊदी अरब पहुंच चुके हैं और कुल तादाद 17 लाख पार करने का अनुमान है. इनमें भारत के 1.75 लाख हाजी शामिल हैं, जो अपने आप में एक इतिहास है. 26 मई को अराफात के मैदान पर जब 45 डिग्री की तपिश में करोड़ों हाथ दुआ के लिए उठेंगे, तो ये नजारा सिर्फ इबादत का नहीं, बल्कि एक ऐसे इंतजाम का भी होगा जिसकी मिसाल कहीं और नहीं मिलती. ये एक्सप्लेनर हज 2026 के हर उस पहलू का है, जो आपको हैरान कर देगा…

इस साल कितने लाख मुसलमान हज करेंगे?

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान युद्ध के बावजूद, इस साल करीब 17 लाख हाजियों के हज में शामिल होने की उम्मीद है. ये वो आंकड़ा है जो पिछले साल के आंकड़ों को भी पीछे छोड़ता हुआ दिख रहा है. 2025 में कुल 16,73,230 लोगों ने हज किया था, जिनमें 15,06,576 विदेशी और 1,66,654 घरेलू (सऊदी नागरिक और प्रवासी) शामिल थे.

15 लाख से ज्यादा विदेशी हाजी और सऊदी अरब के लोकल आवेदनों की बाढ़

हज पासपोर्ट फोर्सेज के कमांडर सालेह अल-मुरब्बा ने 23 मई 2026 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि 15,18,153 विदेशी हाजी अब तक सऊदी अरब पहुंच चुके हैं. ये आंकड़ा पिछले साल के विदेशी हाजियों की संख्या को पार कर चुका है और ये सिलसिला अभी जारी है.

वहीं, सऊदी अरब के अंदरूनी (Domestic) हाजियों के लिए इस साल जबरदस्त उत्साह देखने को मिला. 5,58,270 आवेदन दाखिल हुए, जिनमें से 59% पुरुषों और 41% महिलाओं के थे. इनमें से 3% आवेदक तो 20 साल से भी कम उम्र के नौजवान थे. यानी, हर उम्र का हर शख्स इस बुलावे पर लब्बैक कहने को तैयार है.

एक साथ हज का फरीजा अदा करने वाले देशों की लंबी फेहरिस्त

दुनिया के 180 से ज्यादा देशों के लोग इस साल हज कर रहे हैं. इसे आसान बनाने के लिए सऊदी अरब ने ‘मक्का रूट इनिशिएटिव’ नाम की एक खास पहल शुरू की है. इसके तहत 10 देशों के 17 हवाई अड्डों से अब तक   3,88,694 हाजियों को स्पेशल इमिग्रेशन और लॉजिस्टिक सुविधा दी गई है. इस पहल में इंडोनेशिया, मलेशिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश, मोरक्को, मालदीव, तुर्किये, कोटे डी आइवर, ट्यूनीशिया और अल्जीरिया जैसे देश शामिल हैं.

महिला और पुरुष की हिस्सेदारी: इबादत में बराबर की भागीदारी

2025 के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि हज करने वाले 16,73,230 लोगों में 8,77,841 पुरुष और 7,95,389 महिलाएं थीं. यानी कुल हाजियों में करीब 47% महिलाएं थीं. इस साल भी यही अनुपात रहने की उम्मीद है. भारत से इस बार 5,446 महिलाएं बिना मेहरम (बिना पुरुष अभिभावक) के हज करने जा रही हैं, जो नियमों में ढील के बाद अब तक की सबसे बड़ी संख्या है.

किन देशों से हाजियों की तादाद सबसे ज्यादा है?

2026 के हज कोटे के मुताबिक, दुनिया के जिन पांच देशों को सबसे ज्यादा कोटा मिला है, वो ये हैं:

रैंक देश हाजियों का कोटा (2026)
1 इंडोनेशिया 2,21,000
2 पाकिस्तान 1,80,000
3 भारत 1,75,025
4 बांग्लादेश 1,27,198
5 ईरान 87,000

हज का अहम रुक्न (स्तंभ) कहां अदा किया जाता है?

हज के चार अरकान (स्तंभ) हैं- इहराम, अराफात में ठहरना (वकूफ-ए-अराफा), तवाफ-ए-इफादा, और सई. इनमें सबसे अहम है अराफात का वकूफ (ठहरना). सुनन अबू दाऊद, हदीस नं. 1949 में लिखा है कि ‘अल-हज्जु अराफा’ यानी हज अराफात ही है.

अराफात का मैदान, जिसे ‘जबल-अल-रहमा’ (रहमत का पहाड़) भी कहा जाता है, मक्का से करीब 20 किलोमीटर दूर दक्षिण-पूर्व में स्थित है. 2026 में हज 25 मई को शुरू हो चुका है और अराफात का दिन (9 जिलहज्ज) 26 मई 2026 को होगा. इसी दिन सभी हाजी जुहर से मगरिब तक यहां ठहरते हैं, यही हज की रूह माना जाता है. अराफात के सबसे अहम रुक्न होने की 4 बड़ी वजहें हैं:

  1. यही हज का मकसद: हज का मतलब ही ‘इरादा करना’ या ‘तरफ बढ़ना’ है. अराफात का मैदान वो मुकाम है जहां अल्लाह और बंदे के बीच सीधा राब्ता कायम होता है. बाकी तीनों अरकान भी अहम हैं, लेकिन अराफात हज का क्लाइमेक्स है.
  2. इसके बिना हज नहीं: अन्य अरकान में से किसी एक के छूटने पर कफ्फारा (जुर्माना) देकर हज पूरा हो सकता है, लेकिन अराफात में ठहरे बिना हज मान्य ही नहीं होता. अगर कोई हाजी सूर्यास्त से पहले अराफात में हाजिर न हो, तो उसका पूरा हज बेकार माना जाता है.
  3. अल्लाह की रहमत का सबसे बड़ा नुजूल: अराफा के दिन अल्लाह अपनी सबसे बड़ी रहमत नाजिल करता है. हदीस में आता है कि इस दिन अल्लाह हाजियों के बारे में फरिश्तों के सामने कहता है, ‘देखो, ये मेरे बंदे हैं. मैंने इन्हें माफ कर दिया.’
  4. यह खुद को सौंपने और बराबरी का दिन: करोड़पति से लेकर फकीर, बादशाह से लेकर आम आदमी, सब बिना सिले दो सफेद कपड़ों में एक ही मैदान में खड़े होकर अपने रब से गिड़गिड़ाते हैं. दुनिया के किसी भी कोने में एकता और समर्पण की इससे बड़ी मिसाल नहीं मिलती.

इसीलिए कहा जाता है कि जो अराफात को समझ गया, वो हज को समझ गया.

एक भारतीय हाजी पर कितना खर्च आता है?

2026 में हज कमेटी ऑफ इंडिया (HCoI) का सरकारी पैकेज 3.36 लाख रुपए से 4.19 लाख रुपए के बीच है, जो अलग-अलग शहरों पर निर्भर करता है. हालांकि, पश्चिम एशिया के तनाव के चलते हवाई किराए में प्रति व्यक्ति 10,000 रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी हुई है, जिसके चलते कई हाजियों को आखिरी वक्त में और पैसे जमा करने पड़े.

वहीं, प्राइवेट पैकेज की बात करें तो ये कहीं ज्यादा महंगे हैं. दिल्ली के एक प्राइवेट ऑपरेटर के मुताबिक, प्राइवेट हज पैकेज 10 लाख रुपये तक जा सकते हैं. आमतौर पर, इकॉनमी प्राइवेट पैकेज 4.85 लाख रुपए से शुरू होकर 6.5 लाख रुपए तक जाते हैं, जबकि VIP पैकेज इससे भी ऊपर होते हैं. विदेशों से (अमेरिका या ब्रिटेन जैसे) प्रीमियम पैकेज तो 15,000 डॉलर (करीब 12.5 लाख रुपये) से भी ऊपर चले जाते हैं.

हज पर कितना खर्च होता है और सऊदी अरब को कितनी आमदनी होती है?

हज और उमराह, दोनों मिलकर सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं. ये दोनों धार्मिक यात्राएं मिलकर हर साल करीब 12 अरब डॉलर (करीब 1 लाख करोड़ रुपये) की आमदनी कराती हैं. ये सऊदी अरब की नॉन-ऑयल GDP का 20% और कुल GDP का 7% है.

सिर्फ इस साल के हज की बात करें, तो मक्का चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रमुख माहेर जमाल के मुताबिक, हाजियों के कुल खर्च 20 से 25 अरब सऊदी रियाल (5.3 से 6.7 अरब डॉलर) रहने का अनुमान है, जो पिछले साल से 70% ज्यादा है.

PM YASASVI Scholarship: 9वीं से 12वीं तक पढ़ने वाले छात्रों को मिल सकती है 1.25 लाख तक की मदद, जानें कौन कर सकता है आवेदन…

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पीएम यशस्वी स्कॉलरशिप के तहत OBC, EBC और DNT वर्ग के 9वीं से 12वीं तक के छात्रों को पढ़ाई के लिए 75 हजार से 1.25 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता मिल सकती है.

आज के समय में पढ़ाई का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है. कई ऐसे छात्र हैं जो पढ़ाई में तेज होते हैं, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई जारी रखने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. ऐसे ही होनहार छात्रों के लिए केंद्र सरकार एक खास योजना चला रही है, जिसका नाम है पीएम यशस्वी स्कॉलरशिप योजना (PM YASASVI Scholarship Scheme).

यह योजना उन छात्रों के लिए किसी बड़ी राहत से कम नहीं है, जो मेहनत करके आगे बढ़ना चाहते हैं लेकिन आर्थिक परेशानी उनके रास्ते में रुकावट बन जाती है. इस योजना के तहत सरकार छात्रों को पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता देती है, ताकि वे बिना किसी चिंता के अपनी शिक्षा पूरी कर सकें.

क्या है पीएम यशस्वी स्कॉलरशिप योजना?

पीएम यशस्वी केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण छात्रवृत्ति योजना है. इसे सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की तरफ से चलाया जाता है. योजना का मकसद ऐसे मेधावी छात्रों को आगे बढ़ाना है जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं.इस स्कॉलरशिप के जरिए छात्रों को फीस, किताबें, स्टेशनरी और पढ़ाई से जुड़े अन्य खर्चों के लिए आर्थिक मदद दी जाती है. इससे हजारों परिवारों पर शिक्षा का बोझ कम होता है और बच्चों को अपने सपनों को पूरा करने का मौका मिलता है.

किन छात्रों को मिलता है लाभ?

यह योजना खास तौर पर ओबीसी (OBC), ईबीसी (EBC) और डीएनटी (DNT) वर्ग के छात्रों के लिए बनाई गई है. यदि छात्र इन वर्गों से संबंध रखता है और पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, तो वह इस योजना का लाभ ले सकता है. सरकार का मानना है कि देश की तरक्की तभी संभव है जब हर वर्ग के बच्चों को शिक्षा के बराबर अवसर मिलें. इसी सोच के साथ इस योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है.

9वीं और 10वीं के छात्रों को कितनी मदद?

पीएम यशस्वी योजना के तहत 9वीं और 10वीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्रों को हर साल अधिकतम 75 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जा सकती है. यह राशि छात्रों की पढ़ाई से जुड़े जरूरी खर्चों को पूरा करने में मदद करती है. फीस जमा करने से लेकर किताबें खरीदने तक, इस सहायता का बड़ा लाभ मिलता है.

11वीं और 12वीं के छात्रों को मिलेगा ज्यादा लाभ

जैसे-जैसे कक्षाएं बढ़ती हैं, पढ़ाई का खर्च भी बढ़ जाता है. इसे ध्यान में रखते हुए सरकार 11वीं और 12वीं के छात्रों को हर साल 1.25 लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराती है. इस रकम से छात्र बेहतर तरीके से अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं और उच्च शिक्षा की तैयारी कर सकते हैं.

कॉलेज छात्रों के लिए भी है खास सुविधा

पीएम यशस्वी योजना सिर्फ स्कूल के छात्रों तक सीमित नहीं है. इसके अंतर्गत एक विशेष कार्यक्रम टॉप क्लास कॉलेज एजुकेशन भी चलाया जाता है. इस योजना के तहत कॉलेज और विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले योग्य छात्रों को हर महीने 3,000 रुपये तक का रहने का खर्च दिया जाता है. इसके अलावा किताबों और स्टेशनरी के लिए 5,000 रुपये सालाना की अतिरिक्त सहायता भी मिलती है.

आवेदन करने के लिए क्या हैं जरूरी शर्तें?

इस योजना का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होती हैं. सबसे पहले छात्र का संबंध ओबीसी, ईबीसी या डीएनटी वर्ग से होना चाहिए. इसके अलावा छात्र के माता-पिता या अभिभावक की कुल वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए. साथ ही छात्र किसी मान्यता प्राप्त सरकारी या निजी स्कूल में 9वीं से 12वीं कक्षा में नियमित रूप से पढ़ाई कर रहा हो. इन शर्तों को पूरा करने वाले छात्र आवेदन कर सकते हैं.

आवेदन कैसे करें?

पीएम यशस्वी स्कॉलरशिप के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है. छात्र घर बैठे आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) या यशस्वी स्कॉलरशिप योजना के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर पंजीकरण करना होता है. आवेदन भरने के बाद छात्र अपनी स्कॉलरशिप की स्थिति भी ऑनलाइन देख सकते हैं.

गौ-रक्षा के नाम पर किसी को टारगेट भी नहीं किया जाना चाहिए. BJP नेता शाहनवाज हुसैन का बड़ा बयान….

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दिल्ली में एक कार्यक्रम में बीजेपी नेता और बिहार के पूर्व मंत्री शाहनवाज हुसैन शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने कहा कि हमारे विरोधियों को भी लगता है कि 50-60 साल तक हम ही लोग रहने वाले हैं. सब काम हो ही रहा है. मंदिर भी बन गया. 370 भी हट गया. ट्रिपल तलाक भी बंद हो गया. उन्होंने कहा कि हमारी जानकारी में किसी की हिम्मत नहीं है कि वो गाय काट दे और हम लोग छोड़ दें.

‘नरेंद्र मोदी के रहते एक किलो गाय का मीट एक्सपोर्ट हो सकता है?’

शाहनवाज हुसैन ने कहा कि हरियाणा की जमीन पर गाय की बिरयानी बनाने की न किसी की औकात है और न हैसियत है. गाय और भैंस दोनों के मीट को बीफ कहते हैं. उन्होंने कहा, “नरेंद्र मोदी के रहते एक किलो गाय का मीट एक्सपोर्ट हो सकता है? नहीं हो सकता. भारत से बकरे का मीट एक्सपोर्ट होता है. बकरी के पालक में 90 फीसदी हिंदू ही हैं. हमारे यहां बिहार में मिथिला में सुख और दुख दोनों में मांस खाते हैं. मैथिल का मतलब सिर्फ मैथिली ब्राह्मण नहीं है. मिथिला में रहने वाले सभी लोगों का खान-पान एक सा है. मेरा घर सुपौल में है. जब से धरती बनी है तब से वहां गौ-हत्या नहीं हुई है. एक भी भैंस की भी मीट की दुकान नहीं है.”

‘मां को पशु कैसे घोषित किया जा सकता है?’

बीजेपी नेता ने आगे कहा, “अब कुछ चालाक मुस्लिम कह रहे हैं कि इसको (गाय) को पशु घोषित कर दें. इतनी भी भावना नहीं देख रहे कि जिसको हिंदू माता मानते हैं, जिनमें कहते हैं कि 38 करोड़ देवी-देवता वास करते हैं, उसको पशु घोषित कर दो. मां को पशु कैसे घोषित किया जा सकता है? योगी जी के रहते हुए कोई यूपी में गाय काट पाएगा? सम्राट जी के रहते बिहार में काट पाएगा?”

‘पूरा देश एक स्वर में कहे कि गौ-रक्षा होनी चाहिए’

शाहनवाज हुसैन ने ये भी कहा, “मीडिया में कहते हैं बीफ एक्सपोर्ट हो रहा है और उससे चंदा ले रहे हैं. वो भैंस का मांस एक्सपोर्ट हो रहा है. नेपाल के पशुपति नाथ में तो भैंसा चढ़ता है. दुर्गा पूजा में बलि होती है. भारतीय जनता पार्टी के बारे में दुष्प्रचार किया जाता है कि ये नॉनवेज बंद कर देंगे. हम लोग खान-पान में जबरदस्ती वाले लोग नहीं हैं…जज्बात की कद्र करनी चाहिए. गौ-रक्षा के नाम बदतमीजी भी नहीं होनी चाहिए. गौ-रक्षा के नाम पर किसी को टारगेट भी नहीं किया जाना चाहिए. पूरा देश एक स्वर में कहे कि गौ-रक्षा होनी चाहिए.”

नेपाल बॉर्डर पर भारतीय नागरिक गिरफ्तार! 20 हजार डॉलर समेत जानें और क्या-क्या हुआ बरामद…

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नेपाल के काकरभिट्टा बॉर्डर पर भारतीय नागरिक को गिरफ्तार किया गया है, जिसके पास से 20 हजार डॉलर और 570 ग्राम सोना बरामद हुआ है. हालांकि, परिवार ने वैध बिल होने का दावा किया है.

नेपाल केकाकरभिट्टा चेक पोस्ट पर एक भारतीय नागरिक को विदेशी करेंसी और सोने के साथ पकड़े जाने का मामला सामने आया है. जानकारी के अनुसार, भारतीय नागरिक परम पाठक को नेपाल सशस्त्र पुलिस बल ने जांच के दौरान गिरफ्तार किया. तलाशी के दौरान उसके पास से 20 हजार अमेरिकी डॉलर और करीब 570 ग्राम वजन के 6 सोने के बट्टे बरामद किए गए. इसके बाद उसे आगे की कार्रवाई के लिए नेपाल कस्टम विभाग को सौंप दिया गया.

सूत्रों के मुताबिक, नेपाल कस्टम विभाग ने परम पाठक को 6 दिनों की रिमांड पर लिया है और मामले की जांच जारी है. अधिकारियों द्वारा यह पता लगाया जा रहा है कि बरामद विदेशी मुद्रा और सोना कानूनी रूप से ले जाया जा रहा था या नहीं. परिवार का कहना है कि जो सोना बरामद हुआ है, वह भारत से खरीदा गया था और उसके वैध बिल भी मौजूद हैं.

परिवार ने यह भी दावा किया है कि परम पाठक मानसिक रूप से अस्थिर है.परम पाठक के पिता पुनीत पाठक एक व्यवसायी बताए जा रहे हैं. वह ‘परम एंटरप्राइजेज’ नाम की कंपनी के मालिक हैं, जो रेलवे इंजीनियरिंग मटेरियल और निर्माण कार्य से जुड़ी है. परिवार के अनुसार कंपनी करोड़ों रुपये का कारोबार करती है

नेपाल कस्टम विभाग मामले की कर रही जांच

जानकारी के मुताबिक पुनीत पाठक फिलहाल काकरभिट्टा में मौजूद हैं और नेपाल कस्टम अधिकारियों से बातचीत कर मामले के समाधान की कोशिश कर रहे हैं. परिवार ने भारतीय अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों से मानवीय आधार पर हस्तक्षेप की मांग भी की है. फिलहाल नेपाल कस्टम विभाग मामले की कानूनी जांच कर रहा है और आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर तय की जाएगी.

रोजमर्रा की जिंदगी में बड़े काम आते हैं ये गैजेट्स, कीमत 100 रुपये से भी कम, फटाफट चेक करें लिस्ट…

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चार्जिंग केबल का किनारों से टूटना लगभग हर किसी की समस्या है. केबल प्रोटेक्टर इन्हीं हिस्सों को सुरक्षित रखते हैं और तार को जल्दी खराब होने से बचाते हैं.

अगर आप अपने किसी दोस्त, भाई-बहन या ऑफिस कलीग को छोटा लेकिन काम का गिफ्ट देना चाहते हैं और बजट बहुत कम है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. आज बाजार में ऐसे कई छोटे टेक गैजेट्स मौजूद हैं जो 100 रुपये से भी कम कीमत में मिल जाते हैं और रोजमर्रा के कामों को आसान बना देते हैं. ये गिफ्ट स्टूडेंट्स से लेकर वर्किंग प्रोफेशनल्स तक, हर किसी के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं.

Mobile Cable Protector

चार्जिंग केबल का किनारों से टूटना लगभग हर किसी की समस्या है. केबल प्रोटेक्टर इन्हीं हिस्सों को सुरक्षित रखते हैं और तार को जल्दी खराब होने से बचाते हैं. इससे आपकी केबल लंबे समय तक चलती है और बार-बार नई केबल खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती.

Foldable Mobile Stand

ऑनलाइन क्लास लेना हो, वीडियो कॉल करनी हो या यूट्यूब पर रेसिपी देखकर खाना बनाना हो, फोल्डेबल मोबाइल स्टैंड काफी काम आता है. इसमें फोन को आसानी से टिकाकर आप बिना हाथ में पकड़े आराम से काम कर सकते हैं. इसका छोटा और हल्का डिजाइन इसे कहीं भी ले जाना आसान बनाता है.

USB LED लाइट

बिजली जाने पर या देर रात काम करते समय छोटी USB LED लाइट बहुत मददगार साबित होती है. इसे लैपटॉप, पावर बैंक या चार्जर से जोड़ते ही तुरंत रोशनी मिल जाती है. खासकर स्टूडेंट्स और ट्रैवल करने वालों के लिए यह बेहद उपयोगी गैजेट है.

स्क्रीन क्लीनिंग किट

मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट की स्क्रीन पर धूल, उंगलियों के निशान और गंदगी जल्दी जमा हो जाती है. एक छोटा स्क्रीन क्लीनर स्प्रे और माइक्रोफाइबर कपड़ा स्क्रीन को साफ और चमकदार बनाए रखता है. साफ स्क्रीन देखने में बेहतर लगती है और आंखों पर भी कम असर डालती है.

ईयरफोन कैरी केस

जेब या बैग में ईयरफोन रखने से तार उलझ जाते हैं या खराब होने लगते हैं. छोटा कैरी केस ईयरफोन को सुरक्षित और व्यवस्थित रखता है. इसमें आप छोटे USB ड्राइव या मेमोरी कार्ड भी रख सकते हैं.

पॉप सॉकेट या मोबाइल ग्रिप

आजकल बड़े स्क्रीन वाले स्मार्टफोन को एक हाथ से संभालना आसान नहीं होता. पॉप सॉकेट या मोबाइल ग्रिप फोन को मजबूती से पकड़ने में मदद करता है. इससे फोन गिरने का खतरा भी कम हो जाता है और सेल्फी लेना या चैटिंग करना ज्यादा आरामदायक बन जाता है.

केबल ऑर्गनाइजर

डेस्क पर फैले चार्जर और USB केबल अक्सर उलझ जाते हैं. केबल ऑर्गनाइजर सभी तारों को सही तरीके से व्यवस्थित रखने में मदद करता है. इससे सही केबल ढूंढने में समय बर्बाद नहीं होता और वर्कस्पेस भी साफ-सुथरा दिखता है.

कीबोर्ड क्लीनिंग ब्रश

कीबोर्ड के बटन के बीच धूल और गंदगी जमा होना आम बात है. छोटा कीबोर्ड क्लीनिंग ब्रश उन जगहों तक आसानी से पहुंच जाता है जहां हाथ नहीं पहुंच पाते. इससे कीबोर्ड साफ रहता है और उसकी लाइफ भी बढ़ जाती है.

SIM इजेक्टर टूल किट

अगर आप अक्सर SIM कार्ड बदलते रहते हैं या कई डिवाइस इस्तेमाल करते हैं तो SIM इजेक्टर टूल किट काफी उपयोगी हो सकती है. इसमें अतिरिक्त SIM और मेमोरी कार्ड रखने की छोटी जगह भी मिलती है जिससे जरूरी चीजें सुरक्षित रहती हैं.

वेबकैम प्राइवेसी कवर

आजकल ऑनलाइन सुरक्षा बेहद जरूरी हो गई है. वेबकैम प्राइवेसी कवर लैपटॉप कैमरा को ढककर आपकी प्राइवेसी सुरक्षित रखने में मदद करता है. यह छोटा सा स्लाइडर अनचाहे कैमरा एक्सेस की चिंता को कम कर देता है.

छोटे गैजेट्स क्यों हैं इतने काम के?

ये छोटे टेक एक्सेसरीज देखने में भले ही साधारण लगें लेकिन रोजमर्रा की कई परेशानियों को आसान बना देते हैं. ये आपके डिवाइस को सुरक्षित रखते हैं, वर्कस्पेस को व्यवस्थित बनाते हैं और बार-बार होने वाले छोटे खर्चों से बचाते हैं. सबसे अच्छी बात यह है कि इनकी कीमत 100 रुपये से भी कम होती है इसलिए कम बजट में भी स्मार्ट और उपयोगी गिफ्ट दिया जा सकता है.

NEET UG 2026 Paper Leak: नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले में जांच लगातार तेज, अब तक कई शहरों से 11 लोगों की गिरफ्तारी…

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नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले में जांच लगातार तेज हो रही है.अब तक कई शहरों से 11 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है.परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी बढ़ गई है.

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-UG 2026 इस बार विवादों में घिर गई है. परीक्षा खत्म होने के कुछ दिनों बाद पेपर लीक की खबर सामने आई, जिसके बाद पूरे देश में हड़कंप मच गया.लाखों छात्रों और उनके परिवारों ने परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए. मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियों ने तुरंत कार्रवाई शुरू की और अब तक कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

पुणे की फिजिक्स टीचर पर बड़ा एक्शन
इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा महाराष्ट्र के पुणे की सीनियर फिजिक्स टीचर मनीषा संजय हवलदार की गिरफ्तारी को लेकर हो रही है. बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से एक निजी स्कूल में पढ़ा रही थीं और जल्द ही रिटायर होने वाली थीं. जांच एजेंसियों के मुताबिक उन्हें परीक्षा प्रक्रिया में एक्सपर्ट के तौर पर शामिल किया गया था.आरोप है कि परीक्षा से पहले कुछ सवाल दूसरे लोगों तक पहुंचाए गए थे.पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया और इसके तुरंत बाद स्कूल प्रशासन ने उन्हें सस्पेंड कर दिया. स्कूल ने इस पूरे मामले को शिक्षा व्यवस्था के भरोसे के खिलाफ बताया है और अपनी तरफ से भी जांच शुरू कर दी है.

कई शहरों तक फैला नेटवर्क

जांच एजेंसियों के अनुसार पेपर लीक का मामला सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं है. दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, पुणे, नासिक, लातूर और अहिल्यानगर जैसे शहरों से आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है.अब तक कुल 11 लोगों को पकड़ा जा चुका है.जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर पेपर लीक का पूरा नेटवर्क कैसे काम कर रहा था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे. अधिकारियों ने कई आरोपियों के मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी जब्त किए हैं.

23 लाख छात्रों पर पड़ा असर

नीट-UG 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित हुई थी.देशभर के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर यह परीक्षा कराई गई थी.करीब 23 लाख छात्रों ने इसमें हिस्सा लिया था. लेकिन पेपर लीक की खबर सामने आने के बाद छात्रों की मेहनत और भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई.जैसे ही परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायत मिली, मामला केंद्रीय एजेंसियों तक पहुंचाया गया. जांच के बाद 12 मई को परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया.इसके बाद दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा की गई.

NTA ने किए कई बड़े ऐलान

विवाद बढ़ने के बाद NTA ने छात्रों के लिए कई राहत भरे फैसले लिए हैं. एजेंसी ने साफ किया है कि री-एग्जाम के लिए छात्रों को दोबारा आवेदन नहीं करना होगा.साथ ही किसी भी छात्र से अतिरिक्त फीस नहीं ली जाएगी.NTA ने फीस रिफंड की सुविधा भी शुरू की है. इसके लिए एक विशेष पोर्टल बनाया गया है, जहां छात्र अपने बैंक खाते की जानकारी अपडेट कर सकते हैं.साथ ही नए एडमिट कार्ड भी जल्द जारी किए जाएंगे.

छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी

पेपर लीक मामले के बाद छात्रों और अभिभावकों में काफी नाराजगी देखने को मिल रही है.कई छात्रों का कहना है कि उन्होंने पूरे साल मेहनत की थी, लेकिन इस विवाद की वजह से उनका मानसिक तनाव बढ़ गया है. सोशल मीडिया पर भी परीक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं.फिलहाल जांच एजेंसियां पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही हैं.माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस केस में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं.

Bike Challan Rules: अब कट सकता है ₹10,000 तक का चालान, बाइक चलाने वाले तुरंत जान लें यह नियम…

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बाइक चलाते समय छोटी गलती भी अब भारी पड़ सकती है. ट्रैफिक नियम तोड़ने पर ₹10,000 तक का चालान कट सकता है. जानिए कौन सी लापरवाही जेब पर भारी पड़ सकती है.

अगर आप रोज बाइक से दफ्तर, बाजार या कॉलेज जाते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. अब सड़क नियमों को नजरअंदाज करना सीधे जेब पर भारी पड़ सकता है. कई राज्यों में नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू हो चुकी है और कुछ मामलों में ₹10,000 तक का चालान काटा जा रहा है. सबसे बड़ी बात यह है कि कई लोग अनजाने में ऐसी गलतियां कर देते हैं, जिन पर भारी जुर्माना लग सकता है.

बिना हेलमेट वाहन चलाना, गलत नंबर प्लेट लगाना, प्रदूषण प्रमाण पत्र खत्म होना या लापरवाही से वाहन चलाना अब महंगा साबित हो सकता है. नए सड़क नियम लागू होने के बाद कैमरों और ऑनलाइन व्यवस्था से निगरानी पहले से ज्यादा तेज हो गई है. ऐसे में सड़क पर निकलने से पहले जरूरी नियम जान लेना बहुत जरूरी हो गया है.

ये छोटी लापरवाही खाली कर सकती है जेब

आज भी कई लोग बिना हेलमेट या खराब हेलमेट पहनकर सड़क पर निकल जाते हैं. ऐसे लोगों पर तुरंत चालान काटा जा रहा है. अगर आपके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है या गाड़ी का पंजीकरण और बीमा खत्म हो चुका है, तब भी भारी जुर्माना देना पड़ सकता है. कई लोग अलग दिखने के लिए नियमों के खिलाफ नंबर प्लेट लगवा लेते हैं, लेकिन अब इस पर भी कार्रवाई हो रही है.

तेज आवाज करने वाले बदले हुए साइलेंसर पर भी पुलिस सख्त नजर रख रही है. प्रदूषण प्रमाण पत्र नहीं होने पर अलग से चालान काटा जा सकता है. कई शहरों में कैमरों की मदद से घर बैठे चालान भेजे जा रहे हैं, इसलिए नियम तोड़कर बच निकलना अब आसान नहीं रहा. ऐसे में बाइक चलाने से पहले सभी जरूरी कागज और सुरक्षा नियम जरूर जांच लें.

तेज रफ्तार और तीन सवारी पर बढ़ी सख्ती

सड़क पर करतब दिखाना, तेज रफ्तार में बाइक चलाना या लहराते हुए बाइक चलाना अब सीधे भारी चालान की वजह बन सकता है. पुलिस ऐसे मामलों को खतरनाक वाहन चलाने की श्रेणी में रखती है. कई बार इस तरह की लापरवाही पर हजारों रुपये का जुर्माना और लाइसेंस तक रद्द किया जा सकता है. एक बाइक पर तीन लोगों का बैठना भी नियमों के खिलाफ माना जाता है.

इसके अलावा बाइक चलाते समय मोबाइल पर बात करना और लाल बत्ती पार करना भी बड़ी गलती मानी जाती है. जानकारों का कहना है कि सड़क नियम सिर्फ जुर्माने से बचने के लिए नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं. इसलिए हमेशा हेलमेट पहनें, तय रफ्तार में बाइक चलाएं और सभी जरूरी कागज समय पर अपडेट रखें.

Organic Farming: खीरे की ऑर्गेनिक खेती से पलटी किस्मत, युवाओं के लिए मिसाल बनी यह मॉडर्न तकनीक…

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ITI ग्रेजुएट युवा द्वारा नौकरी का ऑफर ठुकराकर ऑर्गेनिक फार्मिंग चुनने की पूरी सक्सेस स्टोरी. महज 23 दिनों में की 1.5 लाख की बंपर कमाई.

डिग्री पूरी करने के बाद जहां ज्यादातर युवा सरकारी या प्राइवेट नौकरी के पीछे भागते हैं वहीं उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के एक आईटीआई (ITI) ग्रेजुएट ने कुछ अलग करने की ठानी. उन्होंने पारंपरिक नौकरी को बाय-बाय बोलकर अपने खेतों में ऑर्गेनिक फार्मिंग शुरू की और सफलता का एक नया रिकॉर्ड बना दिया. इस होनहार युवा किसान ने महज 23 दिनों के अंदर जैविक खेती के जरिए पूरे 1.5 लाख रुपये का बंपर मुनाफा कमाया है.

आज के समय में जब लोग खेती को घाटे का सौदा मानते हैं, तब इस युवा ने अपनी सूझबूझ और मॉडर्न तकनीकों का इस्तेमाल करके यह साबित कर दिया कि अगर सही प्लानिंग और मेहनत के साथ जमीन से जुड़ा जाए, तो मिट्टी भी सोना उगल सकती है. चलिए आपको बताते हैं कैसे इस शख्स ने ऑर्गेनिक खेती से किया कमाल.

खीरे की ऑर्गेनिक खेती से पलटी किस्मत

मऊ के इस युवा किसान ने अपने खेतों में हाइब्रिड और एडवांस वैरायटी के खीरे की खेती शुरू की. उन्होंने केमिकल वाले फर्टिलाइजर्स को पूरी तरह छोड़कर गोबर की खाद और जैविक खाद का इस्तेमाल किया. जिससे फसल की क्वालिटी लाजवाब हो गई. इस ऑर्गेनिक खीरे की डिमांड मार्केट में इतनी तेजी से बढ़ी कि महज 23 दिनों के अंदर ही उनकी पहली कमर्शियल लॉट पूरी तरह बिक गई.

अपनी फसल को सीधे मंडियों और लोकल वेंडर्स तक पहुंचाकर उन्होंने बीच के दलालों को खत्म किया. जिससे उन्हें अपनी उपज का सबसे बेस्ट रेट मिला. सिर्फ तीन हफ्तों के थोड़े से समय में डेढ़ लाख रुपये की यह कमाई यह साफ दिखाती है कि कम समय वाली फसलों में कितना शानदार प्रॉफिट छिपा हुआ है.

युवाओं के लिए मिसाल बनी यह मॉडर्न तकनीक

इस आईटीआई पास-आउट युवा की कामयाबी आज के उन सभी पढ़े-लिखे युवाओं के लिए एक बड़ी मिसाल है. जो रोजगार के लिए सिर्फ शहरों का रुख करते हैं. उन्होंने मल्चिंग फिल्म और ड्रिप इरिगेशन जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाकर पानी और पैसे दोनों की भारी बचत की जिससे उनकी लागत बेहद कम हो गई. ऑर्गेनिक होने के कारण उनके खीरे की चमक और स्वाद आम खीरों से काफी बेहतर था.

जिसने ग्राहकों को खूब आकर्षित किया. नौकरी के सीमित वेतन से आगे बढ़कर खुद का एग्री-बिजनेस खड़ा करने का उनका यह फैसला रंग लाया. आज वे न सिर्फ खुद एक आत्मनिर्भर उद्यमी बन चुके हैं बल्कि अपने इलाके के दूसरे किसानों और युवाओं को भी इस स्मार्ट फार्मिंग को अपनाने के लिए लगातार इंस्पायर कर रहे हैं.