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भारत सरकार ने LPG संकट के समाधान के लिए PDS केरोसिन का अलॉटमेंट किया, LPG संकट का समाधान…

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पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण उत्पन्न ऊर्जा संकट के बीच, भारत सरकार ने देश में एलपीजी की उपलब्धता को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने 60 दिनों के लिए एक आपातकालीन उपाय के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को PDS केरोसिन आवंटित किया है, जिसका उपयोग लोग खाना पकाने और रोशनी के लिए कर सकेंगे।

सूत्रों के अनुसार, मोदी सरकार ने घरेलू उपयोग के लिए PDS केरोसिन का एक अस्थायी आवंटन किया है। यह निर्णय खाना पकाने की गैस (LPG) पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए लिया गया है। सरकारी आदेश के अनुसार, इस केरोसिन का उपयोग खाना पकाने और रोशनी की आवश्यकताओं के लिए किया जाएगा।

PDS केरोसिन को उन 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुछ समय के लिए फिर से उपलब्ध कराया जाएगा, जिन्हें पहले PDS SKO-मुक्त घोषित किया गया था। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन परिवारों को LPG की कमी का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें अपनी बुनियादी घरेलू आवश्यकताओं के लिए आवश्यक ईंधन मिल सके।

25 सालों में जो न हुआ वो अब हो रहा… क्यों गोल्ड रिजर्व से सोना निकालकर धड़ाधड़ बेच रहा रूस?

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Russia Gold Reserve: रूस ने बीते 25 सालों में पहली बार अपने सेंट्रल बैंक के रिजर्व से सोना बेचना शुरू किया है. बर्लिन बेस्ड न्यूज आउटलेट bne IntelliNews की एक रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि रेगुलेटरी डेटा से पता चलता है कि 2022 और 2025 के बीच रूस ने 15 ट्रिलियन RUB (150 बिलियन डॉलर) से ज्यादा का सोना और विदेशी मुद्रा बेचा है. इसके बाद 2026 के शुरुआती दो महीनों में 3.5 ट्रिलियन रुबल (35 बिलियन डॉलर) की अतिरिक्त बिक्री हुई है. अकेले जनवरी में रूस के सेंट्रल बैंक ने 300000 औंस और फरवरी में 200000 औंस सोना बेचा.

क्यों सोना बेच रहा रूस?

यूक्रेन के साथ रूस का युद्ध लंबा खींचता जा रहा है. इसके चलते सैन्य खर्च में भारी बढ़ोतरी भी हुई है. यूक्रेन में जारी रूसी जंग का यह चौथा साल है. इस साल रूस ने अपने डिफेंस बजट में रिकॉर्ड 14.5 ट्रिलियन रुबल से अधिक अलॉट किए. यह कुल सरकारी खर्च का लगभग 40 परसेंट है. सिर्फ टैक्स की वसूली से इसकी भरपाई मुमकिन नहीं है.

रूस का बजट घाटा 2025 में 2.6-3.4 परसेंट तक पहुंच गया है क्योंकि यूक्रेन में युद्ध के चलते कई पश्चिमी देशों ने रूस के तेल और गैस पर कई प्रतिबंध लगा रखे हैं, जो इसकी कमाई का मुख्य जरिया है. इन्हीं सबकी भरपाई करने के लिए रूस अपने गोल्ड रिजर्व का इस्तेमाल कर रहा है.

रूस ने बदली रणनीति

पहले रूस का केंद्रीय बैंक और वित्त मंत्रालय केवल कागज तौर पर सोने का ट्रांसफर करते थे, लेकिन अब गोल्ड रिजर्व से निकालकर असली सोने की ईंटें बाजार में बेची जा रही हैं. इस भारी बिक्री के चलते रूस का गोल्ड रिजर्व पिछले चार सालों के निचले स्तर (74.3 मिलियन) पर चला गया है. इससे पता चलता है कि युद्ध के चौथे साल में प्रवेश करने के साथ वहां की इकोनॉमी पर दबाव किस हद तक बढ़ गया है.

अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर: डीजल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि, महंगाई और ईंधन संकट का सामना…

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अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने वैश्विक स्तर पर महंगाई और ईंधन संकट को जन्म दिया है। यह संघर्ष अब अपने पांचवें हफ्ते में प्रवेश कर चुका है, और इसका सबसे गंभीर प्रभाव डीजल की कीमतों पर पड़ा है।

कई देशों में डीजल की कीमतें 81 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं, जिससे आम जनता का बजट प्रभावित हुआ है। कच्चे तेल की कीमतें 116 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट और तेल टैंकरों पर हमलों के कारण वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। एशिया, अफ्रीका और पश्चिमी देशों में डीजल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है।

युद्ध का वैश्विक प्रभाव

28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान द्वारा किए गए मिसाइल हमलों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। इससे कच्चे तेल की आपूर्ति में बाधा आई और क्रूड ऑयल की कीमतें तेजी से बढ़ने लगीं। चूंकि पेट्रोल और डीजल कच्चे तेल से बनते हैं, इसलिए इनकी कीमतों में भी वृद्धि हो रही है।

एशियाई देशों में डीजल की कीमतों में वृद्धि

एशियाई देशों पर इस संकट का सबसे अधिक असर पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, फिलीपींस में डीजल की कीमतें युद्ध के आरंभ के बाद 81.6 प्रतिशत बढ़ गई हैं। मलेशिया में डीजल की कीमतें 57.9 प्रतिशत, जबकि वियतनाम में 45.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सिंगापुर में 44 प्रतिशत, चीन में 25.4 प्रतिशत, दक्षिण कोरिया में 15.1 प्रतिशत और जापान में 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

विकासशील देशों की स्थिति

कई विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाएं भी इस संकट से प्रभावित हुई हैं। नाइजीरिया में डीजल की कीमतों में 78.3 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है। श्रीलंका में डीजल 37.2 प्रतिशत महंगा हो चुका है। पाकिस्तान, बांग्लादेश और फिलीपींस जैसे देशों में भी ईंधन संकट गहरा गया है।

उत्तर अमेरिका और यूरोप में कीमतों में वृद्धि

उत्तर अमेरिका और यूरोप भी इस संकट से अछूते नहीं रहे हैं। अमेरिका में डीजल की कीमतें 41.2 प्रतिशत बढ़ गई हैं। कनाडा में यह वृद्धि 36.9 प्रतिशत, जर्मनी में 30.9 प्रतिशत, फ्रांस में 27.8 प्रतिशत, ब्रिटेन में 18 प्रतिशत और इटली में 14.9 प्रतिशत है। यूक्रेन में भी डीजल की कीमतें 33.9 प्रतिशत बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों में महंगाई का खतरा और बढ़ गया है।

“हाईवे पर सफर करने वालों के लिए बड़ी खबर! 1 अप्रैल से बढ़ेगी FASTag एनुअल पास की फीस”

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FASTag annual pass hike: अगर आप भी उन राहगीरों में से हैं, जिनका हाईवे से अकसर आना-जाना होता है, तो यह खबर आपके लिए है. दरअसल, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) नए वित्त वर्ष (2026-27) के लिए FASTag का सालाना फीस बढ़ाने जा रही है.

1 अप्रैल, 2026 से FASTag एनुअल पास की कीमत 3000 रुपये से बढ़ाकर 3075 रुपये कर दी है. यानी कि कीमत में 75 रुपये (लगभग 2.5 परसेंट) की बढ़ोतरी की गई है. FASTag एक इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम है, जो नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे पर बिना कैश के सफर करने की सुविधा देता है. यह एनुअल पास अकसर सफर करने वालों के लिए एक प्रीपेड ऑप्शन है, जिससे यूजर्स एक बार पेमेंट करके बिना किसी रुकावट के टोल से गुजर सकते हैं.

एनुअल पास कब तक रहेगा वैलिड?

यह एनुअल पास 1 साल के लिए या 200 टोल क्रॉसिंग (जो भी पहले हो) के लिए वैध होगा. 200 ट्रिप पूरे होने के बाद पास अपने आप सामान्य FASTag (Pay-per-use) में बदल जाएगा. इसे आपको फिर दोबारा से एक्टिव कराना होगा. फीस की रकम में भले ही मामूली बढ़ोतरी की गई है, लेकिन यह उन यूजर्स के लिए अहम है, जो अकसर हाईवे पर सफर करते हैं.

इस बीच, जो लोग अपना एनुअल पास खरीदना या रिन्यू करवाना चाहते हैं, वे नई दरें लागू होने से पहले अभी भी मौजूदा कीमत पर ऐसा कर सकते हैं. FASTag एनुअल के कई फायदे हैं- बिना किसी परेशानी के टोल पेमेंट, टोल प्लाजा पर इंतजार का कम समय और अक्सर सफर करने वालों के लिए किफायती सफर.

कौन-कौन करते सकते हैं इस्तेमाल?

एनुअल पास का इस्तेमाल प्राइवेट और कमर्शियल दोनों तरह के वाहनों के लिए किया जा सकता है. हालांकि, इसका कवरेज सीमित है. यानी कि यह देशभर के लगभग 1,150 टोल प्लाजा (National Highways और Expressways) पर मान्य है. स्टेट हाईवे या प्राइवेट टोल रोड पर यह काम नहीं करेगा.

एनुअल पास को रिन्यू या एक्टिवेट कैसे करें?

सबसे पहले Rajmarg Yatra App को इंस्टॉल करें या NHAI की वेबसाइट पर जाएं

अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और उस पर आए OTP से लॉगिन करें

‘Annual Toll Pass’ का ऑप्शन चुनें और अपनी गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर (VRN) डालें

UPI/डेबिट/क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग से 3000 रुपये (31 मार्च तक) का भुगतान करें

पेमेंट करने के लगभग 2 घंटे के भीतर आपका FASTag एक्टिव हो जाएगा

आईपीएल 2026: चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स के बीच रोमांचक मुकाबला…

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सोमवार को आईपीएल के 19वें सीजन का तीसरा मुकाबला चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स के बीच खेला जाएगा। यह मैच आरआर के घरेलू मैदान, बरसापारा क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित होगा।

30 मार्च को होने वाले इस मैच के लिए दोनों टीमें पूरी तैयारी कर चुकी हैं।

राजस्थान रॉयल्स की कप्तानी रियान पराग करेंगे, जबकि चेन्नई सुपर किंग्स का नेतृत्व ऋतुराज गायकवाड़ करेंगे। दोनों टीमें अपने प्रदर्शन में सुधार की उम्मीद कर रही हैं। लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि गुवाहाटी के मैदान पर किसका प्रदर्शन बेहतर रहेगा। क्या बल्लेबाजों का जलवा देखने को मिलेगा या गेंदबाजों का दबदबा रहेगा? इसके अलावा, क्या मौसम मैच में बाधा डालेगा?

बरसापारा स्टेडियम की पिच रिपोर्ट

गुवाहाटी के बरसापारा स्टेडियम की पिच बल्लेबाजों के लिए अनुकूल मानी जाती है। यहां की पिच आमतौर पर सपाट होती है, जो बल्लेबाजों को सहायता प्रदान करती है। इसलिए, यहां अक्सर उच्च स्कोरिंग मैच देखने को मिलते हैं।

इस बार भी इसी तरह की उम्मीद की जा रही है। हालांकि, मैच की शुरुआत में तेज गेंदबाजों को नई गेंद से स्विंग और उछाल मिल सकता है। बाद में ओस के कारण गेंदबाजी करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, इसलिए कप्तान टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का निर्णय ले सकते हैं।

क्या बारिश बनेगी मैच में विलेन?

मैच से पहले, गुवाहाटी में दिनभर बादल छाए रहने की संभावना है, साथ ही हल्की बारिश भी हो सकती है। शाम को उमस बढ़ने की संभावना है, और बूंदाबांदी के कारण खेल में रुकावट आने की भी संभावना है। तापमान 27°C से 19°C के बीच रहने की उम्मीद है। अच्छी बात यह है कि मैच के दौरान बारिश की संभावना काफी कम, लगभग 20% तक हो जाएगी।

चेन्नई सुपर किंग्स संभावित प्लेइंग इलेवन

रुतुराज गायकवाड़ (कप्तान), संजू सैमसन (विकेटकीपर), आयुष म्हात्रे/उरविल पटेल/सरफराज खान, मैट शॉर्ट, शिवम दुबे, कार्तिक शर्मा, प्रशांत वीर, जेमी ओवरटन/अकील होसेन, नूर अहमद, मैट हेनरी, खलील अहमद, अंशुल कंबोज/गुरजापनीत सिंह/रामकृष्ण घोष

राजस्थान रॉयल्स संभावित प्लेइंग इलेवन

यशस्वी जयसवाल, वैभव सूर्यवंशी, रियान पराग (कप्तान), ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर), शिमरोन हेटमायर, रवींद्र जड़ेजा, डोनोवन फरेरा/दासुन शनाका, जोफ्रा आर्चर, रवि बिश्नोई, तुषार देशपांडे, संदीप शर्मा, नंद्रे बर्गर/एडम मिल्ने

नीतीश कुमार के बाद अब निशांत का है भविष्य? तेजस्वी यादव बोले- ‘कोई भी नौजवान.’

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एमएलसी पद से इस्तीफा दे दिया है. इसके बाद सियासी गलियारे से नेताओं की प्रतिक्रिया आने लगी है. सोमवार (30 मार्च, 2026) को आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने भी इस पर रिएक्शन दिया है.

उन्होंने कहा कि कोई भी दूसरे सदन में चुना जाता है तो एक सदन से इस्तीफा देता है. यह भी कहा कि नीतीश कुमार ने यह निर्णय दबाव में लिया है.

इस दौरान पत्रकारों ने पूछा कि नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद निशांत का राजनीतिक भविष्य है क्या? इस पर कहा कि इस पर हम कोई टिप्पणी नहीं करेंगे लेकिन कोई भी नौजवान राजनीति में आता है तो हम स्वागत ही करेंगे.

‘हर जगह अपनी सरकार बनाने में लगी बीजेपी’

तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार के इस्तीफे को लेकर बीजेपी पर भी हमला किया. उन्होंने कहा कि हम लोग पहले से कहते रहे हैं कि नीतीश कुमार ने जो निर्णय लिया है वह दबाव में लिया है. बीजेपी ने नीतीश कुमार को तो ठगा है साथ ही बिहार की जनता को भी ठगने का काम किया है. हम शुरू से कहते थे कि जब भी बीजेपी की सरकार आएगी नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद पर रहने नहीं देगी. आज वही हुआ है. बीजेपी हर जगह कब्जा करके अपनी सरकार बनाने में लगी है.

उन्होंने कहा कि अब आगे कौन मुख्यमंत्री होगा या नीतीश कुमार कब इस्तीफा देंगे, किस समय देंगे, यह नहीं बता सकते, लेकिन इतना तय है कि नीतीश कुमार को बीजेपी ने ठगा है. अब नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे.

बिहार के मुद्दे पर होनी चाहिए बात: तेजस्वी यादव

नीतीश के इस्तीफे पर उनकी पार्टी के कई मंत्री विधायक रो रहे. इस सवाल पर तेजस्वी यादव ने कहा कि कौन रो रहा क्या कर रहा ये सब हम नहीं जानते हैं. तेजस्वी यादव ने मंत्री अशोक चौधरी का नाम लिए बिना कहा कि आजकल लोग केवल कैमरा देखकर ड्रामा करते हैं. अब सब कुछ तो कर ही लिया है. कुछ बचा नहीं है. आजकल तो कुछ लोग पढ़ाने का भी काम कर रहे हैं. कई लोग कलाकारी भी कर रहे हैं. ऐसे लोगों पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे. बिहार के मुद्दों पर बात होनी चाहिए, लेकिन उस पर बात नहीं हो रही है.

कल्याण सिंह के पोते को यूपी का CM बनाने की मांग, BJP सांसद के बयान से मची सियासी हलचल….

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भारतीय जनता पार्टी के सांसद साक्षी महाराज ने यूपी की सरकार में लोधी समाज को समुचित प्रतिनिधित्व देने की मांग की है. रविवार को उन्होंने कासगंज में आयोजित अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा कार्यक्रम में ये बात कही. इस दौरान मंच से बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह को मुख्यमंत्री बनाने की भी मांग की गई.

बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने लोधी समाज की सियासी ताक़त दिखाते हुए कहा कि हमें सरकार और संगठन में हमे समुचित भागीदारी चाहिए. जब से भाजपा का गठन हुआ है तब से हम लोग इसके साथ हैं. एक वक्त था जब बीजेपी शहर वालों की पार्टी कहलाती थी लेकिन, कल्याण सिंह के कारण ये जन-जन की पार्टी बन गई.

साक्षी महाराज ने मांगी भागीदारी

साक्षी महाराज ने कहा कि ये समाज पूरी तरह से राष्ट्रवादी है लेकिन, अपने आत्म सम्मान से समझौता नहीं कर सकता. हमारे समाज के लोग राज्य सभा में जाने चाहिए, एमएलसी, गवर्नर और मुख्यमंत्री बनने चाहिए. उन्होंने कहा कि हम प्रेशर नहीं बनाते पर सरकार को दिखाना चाहते हैँ लोधी समाज का सम्मान पार्टी में रखना चाहिए.

संदीप सिंह को सीएम बनाने की मांग

उन्होंने यूपीएससी परीक्षाओं में इंटरव्यू की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए उनमें पारदर्शिता लाने की माँग की. इस दौरान मंच से बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह को भी मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग उठी. साक्षी महाराज से जब इसे लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि संदीप और राजवीर सिंह के मन में ऐसी कोई बात नहीं है लेकिन, समाज ये जरूर चाहता है कि जो हकदार है उसको मुख्यमंत्री बनना चाहिए.

साक्षी महाराज ने सपा के पीडीए पर पलटवार करते हुए कहा कि यूपी में पीडीए की कोई लहर नहीं है. बीजेपी, योगी, मोदी का कोई विकल्प नहीं है. वहीं यूजीसी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सवर्ण समाज का यदि कोई हितैषी है तो बीजेपी और मोदी-योगी ही हैं. मोदी जी से भला सवर्ण समाज के लिए कोई सोच नहीं सकता. उन्होंने ही सवर्ण समाज को 10 फीसदी आरक्षण दिया.

पश्चिम बंगाल में चुनाव ‘हाइजैक’ की साजिश? किरण रिजिजू का बड़ा आरोप, EC से सख्त कार्रवाई की मांग…

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पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। केंद्र सरकार के मंत्री किरण रिजिजू ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य में चुनाव को ‘हाइजैक’ करने की कोशिश हो रही है.

इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सोमवार को चुनाव आयोग (ECI) को एक विस्तृत याचिका सौंपी.

निर्वाचन सदन में चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात के बाद रिजिजू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘हमने चुनाव आयोग को एक याचिका सौंपी है. यह बहुत गंभीर याचिका है… खासकर पश्चिम बंगाल में चुनाव को पूरी तरह हाइजैक करने, लोकतंत्र पर कब्जा करने और लोगों को वोट देने के अधिकार से वंचित करने की कोशिश हो रही है.’

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में डर और दबाव का माहौल बनाया जा रहा है. रिजिजू ने कहा, ‘मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस द्वारा पश्चिम बंगाल में डर और धमकी का जो माहौल बनाया गया है… मुख्यमंत्री खुद घर-घर जाकर मतदाताओं को धमका रही हैं कि जो BJP को वोट देगा, उसे छोड़ा नहीं जाएगा.’

रिजिजू ने प्रशासन के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया. उनके मुताबिक, ‘पश्चिम बंगाल में वरिष्ठ से लेकर निचले स्तर तक के अधिकारी TMC कार्यकर्ता की तरह काम कर रहे हैं… लोगों को उनके घरों के अंदर तक डराया जा रहा है.’

उन्होंने चुनाव आयोग से अपील की कि इस बार ‘दबंगई और डर’ की राजनीति दोहराई न जाए. उन्होंने कहा, ‘चुनाव लोगों के लिए अपनी इच्छा से वोट देने का मौका होता है… यह अधिकार कोई नहीं छीन सकता.”

चुनाव आयोग ने BJP की चिंताओं पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है. रिजिजू के अनुसार, आयोग ने भरोसा दिलाया है कि निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे.

बता दें कि 294 सीटों वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए मतदान 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होगा, जबकि नतीजे 4 मई को आएंगे. इस बार का चुनाव न सिर्फ सियासी, बल्कि लोकतांत्रिक विश्वसनीयता की भी बड़ी परीक्षा माना जा रहा है.

‘आये हुए और लाये हुए में अंतर…’, सपा की रैली में उमड़ी भीड़ तो अखिलेश यादव ने कसा BJP पर तंज…

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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को गौतमबुद्ध नगर के दादरी इलाके में हुए सपा की रैली को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तंज कसा है. उन्होंने रैली में बड़ी संख्या में आए लोगों की भीड़ का जिक्र करते हुए कहा कि ‘आये हुए’ और ‘लाये हुए’ के बीच क्या अंतर होता है वो जनता के जोश ने साबित कर दिया.

समाजवादी पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनाव का आगाज इस बार नोएडा से किया है. जिसके लिए रविवार को दादरी में एक बड़ी जनसभा का आयोजन किया गया था. इस रैली को सफल बनाने के लिए बीते दो महीनों से तैयारी की जा रही थी. सपा की इस रैली में आसपास के कई गावों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए, जिससे सपा मुखिया काफी गदगद नज़र आए.

भारतीय जनता पार्टी पर साधा निशाना

अखिलेश यादव ने इस रैली की तस्वीरें अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर साझा की और लिखा- ‘दादरी एक शानदार शुरुआत है.. अब होना PDA का इंक़लाब है. ‘दादरी रैली’ में जो लोग दूर-दूर से आए, उनका समर्थन और उत्साह अभूतपूर्व रहा. सभी आगंतुकों और आयोजकों को ऐसे ऐतिहासिक आयोजन के लिए हार्दिक बधाई और हृदय से धन्यवाद-शुक्रिया!

जनता के जोश ने साबित कर दिया कि ‘आये हुए’ और ‘लाये हुए’ के बीच क्या अंतर होता है. जो हजारों लोग मैदान भर जाने के कारण अंदर नहीं आ पाये और बाहर सड़कों पर ही रह गये, उनको मेरा विशेष धन्यवाद।’

दादरी एक शानदार शुरुआत है

अब होना PDA का इंक़लाब है

‘दादरी रैली’ में जो लोग दूर-दूर से आए, उनका समर्थन और उत्साह अभूतपूर्व रहा। सभी आगंतुकों और आयोजकों को ऐसे ऐतिहासिक आयोजन के लिए हार्दिक बधाई और हृदय से धन्यवाद-शुक्रिया!

जनता के जोश ने साबित कर दिया कि ‘आये हुए’ और ‘लाये…

‘बीजेपी की रैली में लोग लाए गए थे’

इससे पहले अखिलेश यादव ने रैली को संबोधित करते हुए भी भारतीय जनता पार्टी का नाम लिए बिना निशाना साधा था. सपा अध्यक्ष ने कहा कि इस रैली ने न जाने कितने लोगों के न केवल होश उड़ा दिए बल्कि उन्हें रैली के लिए मजबूर कर दिया. कल (शनिवार) भी रैली हुई थी, जिसमें लोगों को मजबूर करके लाया गया.

अखिलेश यादव ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करने वाली पार्टी को सरकारी कर्मचारियों का सहारा लेना पड़ा. ये नया जमाना है कोई कैमरे से नहीं बच सकता है. उस रैली में लोग आए नहीं थे बल्कि लाए गए थे.

हिमंता बिस्वा सरमा कर रहे थे चुनाव प्रचार, महिला ने ऐसा क्या किया कि वायरल हो गया वीडियो…

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असम में 9 अप्रैल को चुनाव है, जिसके लिए प्रचार कर रहे मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को एक महिला ने गाल पर चूम लिया. वह धेमाजी में प्रचार कर रहे थे, जहां कई महिलाएं उनके समर्थन में पहुंची थी.

कोई उनपर फूल बरसा रहा था, तो कोई मोबाइल में उनकी फोटो खींच रही थी. किसी की आंखों में भावुकता के आंसू थे. मुख्यमंत्री सभी से हाथ मिलाते हुए जा रहे थे, कि अचानक एक महिला ने उनका हाथ पकड़ लिया और गाल पर चूम लिया. ये सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.

इस वीडियो के सहारे विपक्ष ने उन्हें घेरने की कोशिश की, आलोचना की लेकिन हिमंत बिस्व सरमा ने इसी वीडियो के आधार पर कहा कि ये लोगों का उनके प्रति प्यार है, जो 25 वर्षों की तपस्या के बाद प्राप्त हुआ है. उन्होंने कहा, “बच्चों से लेकर माताओं, बुजुर्गों तक, सभी मुझ पर स्नेह और प्यार बरसाते हैं जो मुझे किए गए किस में भी नजर आता है. इस किस में प्रेम, एकता और पवित्रता है, जो रातों रात नहीं मिला. ये 25 सालों की तपस्या से मिला है.”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “बाढ़ हो या कोरोना काल, या बच्चों से जुड़े अभियान हों, मैं हमेशा मदद के लिए सबसे आगे रहा हूं. अगर राजनीती में सच बोलते हैं तो लोग भी आपके प्रति अपार प्रेम दिखाते हैं.” उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा, “अगर कांग्रेस पूछती है कि लोग उन्हें क्यों नहीं चूमती, तो ये मेरी गलती नहीं है.”

असम विधानसभा चुनावों के प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि असम में पिछले 10 सालों में बीजीपी सरकार ने घुसपैठ को रोका है, हालांकि ये पर्याप्त नहीं है. असम विधानसभा में 126 सीटों के लिए चुनाव 9 अप्रैल को है.