उत्तर प्रदेश अंबेडकरनगर से बड़ी खबर सामने आई है जहां सोना तस्करी के नाम पर ठगी और पुलिस की मिलीभगत का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है. वर्दी पर काला धब्बा लगाने वाले दोनों सिपाहियों और एक अन्य को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.
साथ ही दोनों को निलंबित कर दिया गया है.
पूरा मामला गोरखपुर के रहने वाले शिवम मिश्रा से जुड़ा है. शिवम मिश्रा से उनके मोबाइल पर अज्ञात व्यक्ति द्वारा कॉल कर 50 ग्राम सोना दो लाख रुपये में देने का लालच दिया गया. शिवम मिश्रा को फोन पर यह कहा गया कि उन्हें बहुत कम दाम में असली सोना मिल सकता है. इस लालच में फंसकर शिवम मिश्रा अंबेडकरनगर पहुंच गए. उन्हें नहीं पता था कि वह एक बड़े षड्यंत्र का शिकार होने जा रहे हैं.
देवरिया बाजार में हुई ठगी
13 जनवरी को शिवम मिश्रा राजेसुल्तानपुर थाना क्षेत्र के देवरिया बाजार पहुंचे जहां उन्हें स्थानीय व्यक्ति प्रमोद सिंह और वीरेंद्र वर्मा मिले. दोनों ने शिवम मिश्रा से दो लाख रुपये लिए और बदले में उसे 50 ग्राम सोना के नाम पर एक बैग थमा दिया. जब शिवम मिश्रा ने बैग खोला तो उसमें सोने की जगह नकली नोटों से भरा था. यह देखकर शिवम मिश्रा को बहुत बड़ा झटका लगा. उन्हें समझ आ गया कि उनके साथ ठगी हुई है.
पुलिस सिपाहियों ने दी धमकी
नकली नोट देखकर जब शिवम ने विरोध किया तो पीआरवी 112 पर तैनात दो सिपाही मौके पर पहुंचे. लेकिन पीड़ित की मदद करने की बजाय सिपाहियों ने उसे धमकाया. सिपाहियों ने कहा कि वे शिवम को सोना तस्करी के मामले में फंसा कर जेल भेज देंगे. उस समय शिवम मिश्रा डर कर गोरखपुर लौट गए. उन्हें लगा कि अगर वे वहां रुके तो उन्हें झूठे मामले में फंसाया जा सकता है. पुलिस की धमकी के डर से वे चुप रह गए.
एसपी से की शिकायत
इसके बाद पीड़ित शिवम मिश्रा बीते दिनों वापस आए और सीधे पुलिस अधीक्षक से शिकायत की. उन्होंने एसपी को पूरा मामला विस्तार से बताया और बताया कि किस तरह उनके साथ ठगी हुई और पुलिस सिपाहियों ने उन्हें धमकाया. एसपी ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत जांच के आदेश दिए. जांच टीम गठित की गई जिसने इस पूरे मामले की गहन जांच की.
एसपी के निर्देश पर हुई जांच में आरोप सही पाए गए. जांच में यह साबित हुआ कि वाकई शिवम मिश्रा के साथ ठगी हुई थी और पुलिस सिपाहियों ने आरोपियों का साथ दिया था. जांच में यह भी पता चला कि दोनों सिपाही आरोपियों के साथ मिलकर काम कर रहे थे. उन्होंने पीड़ित को डराकर चुप करा दिया था ताकि आरोपी बच सकें.
तीन आरोपी गिरफ्तार, एक फरार
जांच के बाद मुकदमा दर्ज किया गया. आरोपी प्रमोद सिंह, दोनों सिपाही अनिल यादव और आदर्श यादव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. फरार आरोपी वीरेंद्र वर्मा की तलाश की जा रही है. पुलिस ने बताया कि जल्द ही वीरेंद्र वर्मा को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा. उसकी तलाश के लिए कई टीमें लगाई गई हैं.
दोनों सिपाही निलंबित
एसपी ने दोनों सिपाहियों को निलंबित कर दिया है और विभागीय कार्रवाई भी शुरू करा दी है. एसपी की बड़ी कार्रवाई से विभाग में हड़कंप मच गया है. पुलिस विभाग में इस तरह की घटना से काफी शर्मिंदगी हुई है. वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा है कि जो भी अपनी वर्दी को बदनाम करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
यह मामला पुलिस की छवि पर बड़ा सवाल खड़ा करता है. जिन सिपाहियों को जनता की सेवा और सुरक्षा करनी चाहिए थी, वे ही अपराधियों का साथ दे रहे थे. यह वर्दी पर काला धब्बा है. स्थानीय लोगों ने भी इस घटना की निंदा की है. उनका कहना है कि पुलिस में ऐसे तत्वों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. जनता को पुलिस पर भरोसा होना चाहिए, न कि डर. एसपी की इस सख्त कार्रवाई से साफ संदेश गया है कि पुलिस विभाग में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. जो भी अपराधियों का साथ देगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा.
पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि आगे भी ऐसी किसी भी घटना पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. विभाग की साख बनाए रखना सबसे जरूरी है.
आगे की कार्रवाई जारी
फिलहाल मामले की आगे की जांच जारी है. पुलिस यह पता लगा रही है कि क्या इस गिरोह के और भी सदस्य हैं और क्या इससे पहले भी ऐसी ठगी की घटनाएं हुई हैं. जांच टीम फरार आरोपी वीरेंद्र वर्मा की तलाश में लगी हुई है. उम्मीद है कि जल्द ही उसे भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा और इस मामले में सभी आरोपियों को सजा मिलेगी.



