Home समाचार स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का प्रयागराज माघ मेला से विदाई विवाद में…

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का प्रयागराज माघ मेला से विदाई विवाद में…

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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का विवादास्पद अनुभव

उत्तराखंड के ज्योतिर्मठ के प्रमुख स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मौनी अमावस्या पर त्रिवेणी संगम में स्नान करने से वंचित रहने के कारण प्रयागराज के माघ मेले से भारी मन से विदाई ली।

स्थानीय प्रशासन के साथ विवाद के चलते, संत ने अधिकारियों पर अपमान का आरोप लगाते हुए 10 दिनों तक धरना दिया। अब प्रयागराज प्रशासन उनके लिए स्नान का एक और अवसर प्रदान करने पर विचार कर रहा है।

घटना का विस्तार और विवाद

18 जनवरी को हुई यह घटना एक बड़े विवाद का कारण बन गई है। आलोचकों का कहना है कि अधिकारियों ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का अपमान किया, जो खुद को शंकराचार्य मानते हैं। यह मामला इलाहाबाद उच्च न्यायालय तक पहुंच गया है, जहां घटना की जांच की मांग की गई है। जब स्वामी जी मौनी अमावस्या स्नान के लिए संगम पहुंचे, तो पुलिस और प्रशासन ने उन्हें रोक दिया। भारी भीड़ का हवाला देते हुए, उन्हें पालकी से उतरकर पैदल चलने के लिए कहा गया, जिससे झड़प हुई।

स्वामी जी का विरोध और प्रशासन की प्रतिक्रिया

स्वामी जी ने इस निर्देश को पारंपरिक परंपराओं और गरिमा का उल्लंघन मानते हुए इनकार कर दिया। इसके बाद तनाव बढ़ गया और उनके समर्थकों की पुलिस के साथ झड़प हुई। मेला प्रशासन का आरोप है कि स्वामी और उनके समर्थकों ने बैरिकेड तोड़कर घाटों की ओर बढ़ने का प्रयास किया, जिससे पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने में कठिनाई हुई। प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस भेजकर पूछा कि उन्होंने शंकराचार्य की उपाधि किस आधार पर प्राप्त की, जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने इस पर रोक लगा रखी है।

धरना प्रदर्शन और विदाई

विवाद के बाद, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेला प्रशासन और राज्य अधिकारियों के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया। 10 दिनों तक चले इस प्रदर्शन के बाद, उन्होंने 28 जनवरी को बिना स्नान किए ही प्रयागराज मेला मैदान से विदाई ली। उन्होंने कहा, “संगम में स्नान करने से मन को शांति मिलती है, लेकिन आज मेरा मन इतना व्याकुल है कि मैं स्नान किए बिना ही जा रहा हूँ।” इस घटना ने उन्हें गहरे दुख में डाल दिया है।