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भारत AI में महाशक्ति बनकर उभर रहा, उधर PAK में ‘टेरर इंटेलिजेंस’ की तैयारी से बढ़ी चिंता…

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दिल्ली में ग्लोबल साउथ की सबसे बड़ा AI समिट की शुरुआत हो चुकी है, जिसमें 20 देशों को राष्ट्राध्यक्ष शामिल हो रहे हैं. दुनिया के टॉप क्लास टेक एक्सपर्ट भारत में हैं.

वो इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि कैसे AI का प्रयोग मानव कल्याण के लिए हो. लेकिन पाकिस्तान में इस बात पर माथापच्ची हो रही है कि कैसे आतंकवाद का हाईब्रिड मॉडल तैयार किया जाए. मतलब एक तरफ भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है तो दूसरी तरफ पाकिस्तान टेरर इंटेलिजेंस यानी TI वाली साजिश का ब्लूप्रिंट तैयार कर रहा है. इसलिए अब बात हिंदुस्तान के AI बनाम पाकिस्तान के TI का विश्लेषण करने वाले हैं.

हिंदुस्तान का एआई Vs पाकिस्तान टीआई

महान वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था कि ‘विज्ञान और तकनीक मानवता को आगे बढ़ाने का सबसे बड़ा माध्यम हैं’. विज्ञान और तकनीक को नई ऊंचाई पर पहुंचाने के लिए नई दिल्ली में आज से AI समिट शुरू हो गई है.

भारत मंडपम में 26 फरवरी तक तक ये AI समिट होने वाली है. इस समिट को लिडिंग ग्लोबल AI फोरम कहा जा रहा है. समिट में 2 लाख से ज्यादा डेलिगेट्स शामिल हो रहे हैं. इसमें गूगल, Open AI, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन जैसी बड़ी टेक कंपनियों के CEO शामिल हैं. 800 से अधिक AI प्रॉडक्ट्स की प्रदर्शनी लगी है. इससे पहले ब्रिटेन, कोरिया, फ्रांस में AI समिट जरूर हुई थी, लेकिन जैसा भारत में हो रहा है, वैसा कहीं और कभी नहीं हुई.

इससे पहले AI को लेकर जो बैठकें हुई थी, वो इस बात पर फोकस था कि AI कितना खतरनाक है या AI को कैसे कंट्रोल किया जाए? लेकिन इस AI समिट का थीम है लोग, धरती और प्रगति. यानी इस बात पर चर्चा हो रही है कि AI से लोगों की जिंदगी को बेहतर कैसे बनाएं. मतलब ये सीधे तकनीक से आमलोगों की जिंदगी को बिल्कुल आसान बनाने वाला AI सम्मेलन है. इसमें दुनिया के लिए AI के नए नियम-कायदे बनाने की प्लानिंग भी हो रही है.

इस सम्मेलन से आमलोगों के जीवन पर कैसे व्यावहारिक असर पड़ने वाला है. ये हम आपको उदाहरण देकर समझाएंगे.

सोमवार को AI समिट में क्या-क्या हुआ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्सपो का उद्घाटन किया और वहां लगी प्रदर्शनी देखी. भारत ने इस सम्मेलन में खुद को AI के क्षेत्र में ग्लोबल साउथ के लीडर के तौर पर पेश किया. समिट में IndiaAI मिशन के तहत किए गए निवेश और स्वदेशी फाउंडेशन मॉडलों की उपलब्धि को भी साझा किया गया. वैश्विक टेक दिग्गजों ने भारत में AI इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर चर्चा की और ‘AI फॉर ऑल’ के तहत समावेशी विकास पर जोर दिया गया.

भारत AI में महाशक्ति बनकर कैसे उभर रहा है? भारत AI में आगे..PAK ‘टेरर इंटेलिजेंस’ में आगे दिल्ली में हो रहे सबसे बड़े AI समिट का विश्लेषण

AI समिट में शामिल हुए भारत के आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने विस्तार से चर्चा की. उन्होंने कहा कि डीपफेक लोगों का भरोसा तोड़ रहा है ऐसे में भरोसे वाली तकनीक बनाने की जरूरत है. भारत सरकार के जिन-जिन मंत्रालय ने AI तकनीक पर काम किया है, AI तकनीक का प्रयोग किया है उसको लेकर अलग-अलग मंत्रालय ने प्रदर्शनी लगाई है. भारत सरकार का पंचायती मंत्रालय बता रहा है कि कैसे AI के प्रयोग से फर्जीवाड़े को रोका जा रहा है. हम आपको वो AI तकनीक दिखाना चाहेंगे, जिससे पंचायती राज विभाग में भ्रष्टाचार को बेहद कम किया जा सकता है.

2025 की सबसे भ्रष्ट विभागों की सूची में ग्राम पंचायत और ब्लॉक स्तर को चौथा सबसे भ्रष्ट विभाग माना गया है. भ्रष्टाचार को रोकने में ऐसी AI तकनीक महत्वपूर्ण हो सकती है. इसका सीधा फायदा आमलोगों को होगा. इस समिट में इस पर विस्तार से चर्चा हो रही है कि नौकरी, स्वास्थ, शिक्षा, खेती और जलवायु पर AI से कैसे मदद मिलेगी.

समिट में 300 से ज्यादा कंपनियां अपने AI प्रोडक्ट दिखा रही हैं. AI समिट में ऐसी तकनीकें दिखाई जा रही हैं जो एक साधारण एक्सरे या स्कैन देखकर कैंसर जैसी बीमारी का बहुत पहले पता लगा लेंगी. इससे इलाज सस्ता होगा और छोटे गांवों तक इसका फायदा पहुंचेगा. AI से गांव में भी तुरंत मेडिकल मदद और उचित डॉक्टरी सलाह मिलेगी. मेडिकल रिपोर्ट जल्दी चेक होगी, दवाइयां सस्ती होंगी.

AI से खेती में क्रांतिकारी बदलाव आ सकता है. AI मिट्टी की सेहत और मौसम का हाल देखकर बता देगा कि कौन सी फसल कब लगानी है और कब पानी देना है, जिससे किसानों की कमाई बढ़ेगी.

ये समिट भारत को AI में लीडर बना रहा है. मतलब हम विदेशी AI पर निर्भर नहीं रहेंगे. भारतीय भाषाओं में AI बनेगा, सस्ते फोन में चलेगा, जिससे गांव के लोगों को भी इससे फायदा मिल पाएगा. इससे सरकारी काम भी आसान हो जाएगा. घोटाले कम हो सकते हैं. भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा. काम तेजी से होंगे. ट्रैफिक कंट्रोल करने की तकनीक पर चर्चा हो रही है. कुल मिलाकर आप कह सकते हैं कि नई दिल्ली में होने वाला AI समिट, AI को आम आदमी का साथी बनाने का प्लेटफॉर्म है. इसलिए इस समिट पर दुनिया की नज़र है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रो भी इसमें शामिल हुए.

आज नई तकनीक यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पूरी दुनिया की जरूरत बन चुका है. कैसे पूरी दुनिया AI के ईर्द-गिर्द खड़ी दिख रही है.

2024 में ही AI पर प्राइवेट निवेश में करीब 45 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई. ओलिवर वायमेन फोरम के मुताबिक 2030 तक ग्लोबल जीडीपी में AI 20 ट्रिलियन डॉलर का अतिरिक्त योगदान देगा. वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम के फ्यूचर ऑफ जॉब्स की रिपोर्ट के मुताबिक AI से 8 करोड़ 30 लाख नौकरियां खत्म हो जाएंगी लेकिन AI की वजह से करीब 7 करोड़ नई नौकरियां भी आएंगी. मतलब लोगों की नौकरी पर AI से खतरा है.

एक्सरे या स्कैन जैसी जांच पड़ताल हो, दवाइयों की खोज हो या फिर वित्तीय लेनदेन में फ्रॉड को पकड़ने का साधन हो, हर जगह AI एक ‘बेस लेयर’ तकनीक बन चुका है.

यही कारण है कि आज AI सिर्फ टेक ट्रेड नहीं बल्कि हर अर्थव्यवस्था की एक कोर जरूरत बन चुका है. आज की तारीख में राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा, सुरक्षा और विकास तीनों इस AI के इर्द-गिर्द है. पिछले दिनों युद्धभूमि में भी AI का प्रयोग हुआ.

इसी साल 3 जनवरी को वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिका ने घर से उठा लिया था, इसमें भी अमेरिकी सेना ने AI का प्रयोग किया था. एंथ्रोपिक के AI क्लाउड का इस्तेमाल किया गया था, जिससे टारगेट के लोकेशन, उसे पहचानने और ऑपरेशन को एग्जिक्यूट करने में मदद मिली.

इससे पहले इजरायल ने भी गाजा में अपने ऑपरेशन के दौरान AI आधारित टार्गेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया था. रूस-यूक्रेन युद्ध में भी दोनों तरफ से AI का प्रयोग हो रहा है. भारत ने जब ऑपरेशन सिंदूर किया था, तब उसमें भी भारतीय सेना ने AI का इस्तेमाल किया था. यह भारत का पहला AI वाला ऑपरेशन था. जिसमें AI सिस्टम ने सेना को टारगेट की पिन प्वाइंट जानकारी दी.

DRDO की जिस तकनीक ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कमाल किया था, उसने भी AI के महाकुंभ में अपनी प्रदर्शनी लगाई है. DRDO किस तरह अपनी AI तकनीक को विकसित कर रहा है. आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी AI की दुनिया में भारत समेत कई देश अपना दबदबा बना चुके हैं. इसमें अमेरिका अब भी शीर्ष पर है. हम आपको बताते हैं कि भारत कितने नंबर पर है. दुनियाभर के सभी बड़े मानकों के आधार पर 2026 की रिपोर्ट में ओवरऑल लीडरशिप में अमेरिका पहले स्थान पर है. दूसरे स्थान पर चीन है. जबकि तीसरे स्थान पर भारत है. AI तकनीक के क्षेत्र में भारत फिलहाल तीसरे स्थान पर है. निवेश, टैलेंट और एप्लिकेशन स्केल की वजह से भारत AI महाशक्ति के तौर पर तेजी से उभर रहा है.

2025 में भारत का AI बाजार 11 हजार 773 करोड़ रुपये का था. जो 2032 में बढ़कर करीब 12 लाख करोड़ रूपये तक पहुंचने की संभावना है. यानी 7 साल में भारत करीब 100 गुना ज्यादा बड़ा AI बाजार बन सकता है.

जबकि 2035 में AI का भारतीय बाजार 153 लाख करोड़ रूपये तक पहुंच सकता है.

अभी 62 प्रतिशत भारतीय कर्मचारी नियमित रूप से AI का उपयोग कर रहे हैं

जबकि 83 फीसदी भारतीय कर्मचारी साप्ताहिक रूप से AI उपयोग करते हैं

दुनिया भारत की तरफ देख रही है. दिल्ली में हो रहा AI समिट इसकी एक अहम कड़ी है. भारत विशुद्ध रूप से AI तकनीक का प्रयोग जीवन को बेहतर बनाने में कर रहा है. विकास का नया आयम गढ़ने में कर रहा है. लेकिन पड़ोसी देश पाकिस्तान इस AI का प्रयोग भी आतंकवाद के लिए ही कर रहा है. पाकिस्तान की नेशनल काउंटर टेररिज्म अथॉरिटी खुद मानती है कि आतंकी समूह AI के माध्यम से डीपफेक वीडियो बनाते हैं और ऑनलाइन आतंकवाद को बढ़ाते हैं.

ऐसे ही वीडियो दिखाकर वे महिलाओं को भी अब आत्मघाती बना रहे हैं. 9 फरवरी को लाहौर के ऐवान-ए-इकबाल कॉम्प्लेक्स में लश्कर-ए-तैयबा की महिला विंग ‘तैयबात’ का एक बड़ा कार्यक्रम हुआ. बैठक में महिलाओं का माइंडवॉश किया गया. इससे पहले जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग ने भी ऐसी ही बैठकें की थी.

यही कारण है कि एक साथ आजाद हुए दो देशों में से पाकिस्तान जहां आतंकी बनाने में शीर्ष पर है तो भारत तकनीक का नया धुरंधर है. ये बताता है कि ‘सही दिशा में इस्तेमाल ज्ञान दुनिया बदल सकता है लेकिन गलत दिशा में वही ज्ञान विध्वंसक हथियार बन सकता है.