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केंद्र में साथ-साथ, लेकिन पश्चिम बंगाल में TMC के खिलाफ कांग्रेस की रणनीति, ममता बनर्जी की बढ़ा रही टेंशन…

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केंद्र में सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुवाई वाली एनडीए सरकार को चुनौती देने के लिए बनाए गए विपक्षी दलों के गठबंधन ‘INDIA’ की एकता समय-समय पर बिखरती रही है. खासतौर से बात जब राज्यों के विधानसभा चुनाव की होती है. राज्यों के चुनाव में यह एकता बिखर सी जाती है. पश्चिम बंगाल से पहले भी कई राज्यों के चुनावों में ‘INDIA’ गठबंधन के पास यही एकता नहीं दिखी थी. अब यही पश्चिम बंगाल में भी रहा है. ‘INDIA’ गठबंधन की अगुवाई करने वाली कांग्रेस भले ही केंद्र में ममता बनर्जी के साथ इंडिया ब्लॉक का दम भरती हो, लेकिन पार्टी पश्चिम बंगाल चुनाव में अपनी ताकत बढ़ाने और सीटों की संख्या 0 से कहीं आगे ले जाने के लिए ममता के मजबूत इलाके में भी दो-दो हाथ करने का प्लान बना रही है.

अल्पसंख्यक वोट में सेंध लगाने की कोशिश

पश्चिम बंगाल के मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में जहां ममता के सामने जहां अल्पसंख्यक वोट साधने की चुनौती है, वहां लेफ्ट ताल ठोंक ही रहा है, तो वहीं हुमायूं कबीर और असदुद्दीन ओवैसी का गठजोड़ भी मैदान में उतर आया है. ऐसे में कांग्रेस ने भी मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तरी दिनाजपुर और पुरुलिया में ही अपनी ताकत झोंकने का प्लान बनाया है. साथ ही राजीव गांधी और सुभाष घीसिंग के संबंधों के मद्देनजर दार्जिलिंग भी उसके टारगेट पर है, जहां कांग्रेस के नए वायदे ममता के खेमे को परेशान कर सकती है. राज्य में चुनाव प्रचार जोर पकड़ चुका है. 9 अप्रैल को 3 राज्यों में वोटिंग खत्म होने के बाद अब बड़े नेता इस पूर्वी राज्य का दौरा करने वाले हैं. इन इलाकों में राहुल गांधी की 3 और प्रियंका गांधी वाड्रा की 3 बड़ी रैली आयोजित किए जाने का कार्यक्रम है.

बंगाल में फिर से उठने की कोशिश में कांग्रेस

वहीं ममता की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की परवाह किए बगैर कांग्रेस नए सिरे से रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है. राज्य में कूच बिहार, अलीपुरद्वार और जलपाइगुड़ी जैसे SC-ST बहुल इलाकों में दलित समाज से आने वाले कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की कई रैली आयोजित की जाएंगी. इसी तरह खरगे आज मंगलवार शाम 4 बजे कोलकाता में पश्चिम बंगाल के लिए कांग्रेस का घोषणापत्र जारी करेंगे, जिसमें कई घोषणाएं ममता के वोटबैंक में सेंध लगाने वाली होंगी. इसके अलावा कांग्रेस ने बंगाल के लिए जो 4 अहम मुद्दे तय कर रखे हैं, उसमें एक मुद्दा ममता बनर्जी और बीजेपी की मिलीभगत का भी है, जिससे टीएमसी का नाराज होना लाजिमी है.

कांग्रेस के निशाने पर 4 अहम मसले

बंगाल के लिए कांग्रेस के निशाने पर चार अहम मुद्दे हैं, जिसमें कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार, महंगाई– जिसके लिए राज्य की टीएमसी सरकार के साथ-साथ केंद्र की बीजेपी सरकार दोनों जिम्मेदार हैं. चौथा, बकाया राशि, केंद्र की बीजेपी सरकार ने बंगाल को उसके हिस्से का 2 लाख करोड़ रुपये नहीं दिए हैं, लेकिन केंद्रीय जांच एजेंसियों के डर से ममता खामोश हैं और राज्य की जनता का हक मर रहा है. कुल मिलाकर लोकसभा चुनाव में भी केंद्र में इंडिया गठबंधन के साथी टीएमसी और कांग्रेस ने बंगाल में अलग-अलग चुनाव लड़ा था, तब कांग्रेस और लेफ्ट साथ-साथ थे. लेकिन चुनाव प्रचार में इस तरह की आर-पार की रणनीति नहीं थी, जिससे ममता केंद्र में इंडिया ब्लॉक का हिस्सा हमेशा बनी रहीं. इस बार कभी कांग्रेस से निकली ममता को घेरने के लिए अकेले लड़ रही कांग्रेस की पैनी सियासी रणनीति भविष्य में दोनों दलों के रिश्तों में खटास भी ला सकती है.