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UP Final Voter List: फाइनल वोटर लिस्ट में भी जिनका नहीं नाम, उनका क्या होगा, क्या छोड़ना पड़ेगा यूपी? जानें नियम

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उत्तर प्रदेश की नई वोटर लिस्ट जारी हो गई है. ऐसे में लाखों लोगों के मन में एक ही सवाल उठ रहा है कि अगर उनका नाम लिस्ट में नहीं है तो अब क्या होगा? क्या वोट देने का अधिकार खत्म हो जाएगा या राज्य छोड़ना पड़ेगा?

इन सवालों के बीच चुनाव आयोग ने साफ किया है कि नियम क्या कहते हैं और ऐसे लोगों के पास कौन-कौन से विकल्प मौजूद हैं. यहां पूरी प्रक्रिया समझना जरूरी है ताकि कोई अपना अधिकार न खोए और परेशान न हों.

फाइनल वोटर लिस्ट जारी

इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया के तहत उत्तर प्रदेश में एसआईआर-2026 के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई है. यह अभियान 27 अक्टूबर 2025 से शुरू होकर 166 दिन चला. इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद राज्य की नई वोटर लिस्ट सामने आई है, जिसमें बड़े पैमाने पर बदलाव देखने को मिला है.

लिस्ट में कितने वोटर हुए कम

नई सूची के मुताबिक पहले जहां कुल मतदाता 15.44 करोड़ थे, अब यह घटकर 13 करोड़ 39 लाख 84 हजार 792 रह गए हैं. यानी करीब 2 करोड़ नाम सूची से हट गए हैं. हालांकि ड्राफ्ट लिस्ट (6 जनवरी 2026) में संख्या 12.55 करोड़ थी, जो सुधार और नए नाम जोड़ने के बाद बढ़ी है. नई सूची में 18-19 साल के 3.33 लाख से ज्यादा नए मतदाता जुड़े हैं. कुल मतदाताओं में पुरुषों की संख्या 7.30 करोड़ (54.54%) और महिलाओं की संख्या 6.09 करोड़ (45.46%) है. लिंगानुपात भी सुधरकर 1000 पुरुषों पर 834 महिलाएं हो गया है, जो पहले 824 था.

अगर लिस्ट में नाम नहीं है तो क्या होगा?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर किसी का नाम फाइनल वोटर लिस्ट में नहीं है तो क्या उसे यूपी छोड़ना पड़ेगा? जवाब साफ है कि ऐसा बिल्कुल नहीं है. वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने का मतलब सिर्फ इतना है कि फिलहाल आप वोट नहीं डाल सकते हैं, लेकिन इससे आपकी नागरिकता या रहने के अधिकार पर कोई असर नहीं पड़ता है.

नाम जुड़वाने का क्या है तरीका?

अगर किसी पात्र व्यक्ति का नाम फाइनल वोटर लिस्ट में नहीं है, तो वह कभी भी फॉर्म-6 भरकर अपना नाम जुड़वा सकता है. यह प्रक्रिया लगातार चलती रहेगी, यह किसी खास समय तक सीमित नहीं है. इसके लिए आवेदन ऑनलाइन भी किया जा सकता है और मोबाइल नंबर के जरिए रजिस्ट्रेशन भी किया जा सकता है.

सिर्फ नाम जोड़ने ही नहीं, बल्कि गलत या अपात्र नाम हटाने की प्रक्रिया भी जारी रहती है. इसके लिए फॉर्म-7 का इस्तेमाल किया जाता है. अगर किसी मृत व्यक्ति या गलत तरीके से जुड़े नाम को हटाना हो, तो यह प्रक्रिया भी आसान है और ऑनलाइन उपलब्ध है.

अपील का अधिकार भी है मौजूद

अगर किसी को लगता है कि उसका नाम गलत तरीके से हटाया गया है, तो वह अपील कर सकता है. Representation of the People Act, 1950 की धारा 24 के तहत पंजीकरण अधिकारी (ERO) के फैसले के खिलाफ 15 दिनों के भीतर जिला मजिस्ट्रेट के पास अपील की जा सकती है. इसके बाद भी असंतोष होने पर 30 दिनों के भीतर मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास दूसरी अपील का विकल्प मौजूद है.

ऑनलाइन चेक और आवेदन कैसे करें?

मतदाता अपना नाम आसानी से ऑनलाइन चेक कर सकते हैं. इसके लिए आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपना नाम खोजा जा सकता है. वहीं से नया आवेदन, सुधार या हटाने की प्रक्रिया भी पूरी की जा सकती है. इससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और आसान बन गई है.