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बिक गई जेपी कंपनी, अडानी बने नए मालिक! जिनके पैसे फंसे हैं उनका क्या होगा? पुराने मालिक ने दिया ये जवाब…

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चार दशक से अधिक समय तक देश के इन्फ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट सेक्टर में अपनी धाक जमाने वाली कंपनी ‘जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड’ (JAL) के लिए अब एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है.

लंबे समय से भारी-भरकम कर्ज और आर्थिक संकट के बोझ तले दबी इस कंपनी की बागडोर अब अडानी ग्रुप के हाथों में होगी. जेपी ग्रुप के संस्थापक जयप्रकाश गौड़ ने खुद इस बदलाव पर अपनी मुहर लगा दी है. उनका यह बयान उन हजारों घर खरीदारों, कर्मचारियों और निवेशकों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है, जो सालों से अनिश्चितता के भंवर में फंसे हुए थे.

अडानी ग्रुप के नेतृत्व पर जताया पूर्ण विश्वास

जयप्रकाश गौड़ ने स्पष्ट किया है कि कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) द्वारा अडानी समूह को सफल समाधान आवेदक (रेज़ोल्यूशन एप्लिकेंट) के रूप में चुना जाना एक सही कदम है, और वे इस फैसले का पूरा सम्मान करते हैं. उन्होंने भरोसा जताया कि गौतम अडानी के नेतृत्व में जयप्रकाश एसोसिएट्स की विरासत एक नई ऊर्जा, जिम्मेदारी और उद्देश्य के साथ आगे बढ़ेगी. गौड़ ने पूरी दिवालिया समाधान प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी और निष्पक्ष बताया. इसके साथ ही, उन्होंने इस जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स और रेज़ोल्यूशन प्रोफेशनल की भूमिका की भी सराहना की.

घर खरीदारों और कर्मचारियों के लिए क्या हैं इसके मायने?

जयप्रकाश गौड़ ने भी इस बात को स्वीकार किया कि पिछला कुछ समय कंपनी से जुड़े हर व्यक्ति, चाहे वह घर खरीदार हो, कर्मचारी हो, कर्जदाता हो या बिजनेस पार्टनर, सभी के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है. इस समाधान प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य ही कर्ज की समस्या को सुलझाना और नए मालिकाना हक के तहत कंपनी के कामकाज को बिना किसी रुकावट के जारी रखना है. अडानी ग्रुप के मजबूत वित्तीय ढांचे के कारण अब अटके हुए प्रोजेक्ट्स के पूरे होने और लोगों को उनके घर मिलने की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं.

वेदांता की चुनौती पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

यह अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी तरह से विवादों से मुक्त नहीं रही है. इस मामले में एक कानूनी लड़ाई भी देखने को मिली. प्रतिद्वंद्वी बोलीदाता वेदांता ग्रुप ने इस पूरी प्रक्रिया को चुनौती देते हुए आरोप लगाया था कि उनके बड़े ऑफर को नजरअंदाज किया गया और चयन में पारदर्शिता की कमी थी. वहीं दूसरी तरफ, कर्जदाताओं (लेंडर्स) का तर्क बिल्कुल स्पष्ट था. लेंडर्स के अनुसार, अडानी ग्रुप के प्लान में नकद भुगतान की गारंटी (अपफ्रंट कैश), काम पूरा करने की क्षमता और तेजी से कर्ज चुकाने का रोडमैप ज्यादा मजबूत था. हाल ही में भारत के सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने भी अडानी ग्रुप के इस टेकओवर पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिससे इस अधिग्रहण का रास्ता साफ हो गया. विवादों के बावजूद, जयप्रकाश गौड़ ने शुक्रवार को वेदांता ग्रुप को इस पूरी प्रक्रिया में हिस्सा लेने और दिलचस्पी दिखाने के लिए धन्यवाद दिया.

1979 से शुरू हुआ सफर, अब एक नए मुकाम पर

साल 1979 में स्थापित जयप्रकाश एसोसिएट्स ने भारत को कई बड़े और ऐतिहासिक प्रोजेक्ट्स दिए हैं. इनमें बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट, कई विशाल पनबिजली (हाइड्रोपावर) प्रोजेक्ट्स, सीमेंट प्लांट्स और जेपी स्पोर्ट्स सिटी जैसी विशाल इंटीग्रेटेड टाउनशिप शामिल हैं. वित्तीय संकट के कारण कंपनी को दिवालिया प्रक्रिया से गुजरना पड़ा, लेकिन अब यह 45 साल पुराना साम्राज्य एक नई शुरुआत करने जा रहा है.