LPG Crisis: मिडिल ईस्ट में जारी अस्थिरता और युद्ध के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा, रक्षा और व्यापारिक हितों को सुरक्षित करने के लिए कूटनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी अमेरिका के दौरे के बाद अब फ्रांस और जर्मनी की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। दूसरी ओर, विदेश मंत्री एस जयशंकर यूएई (UAE) में रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा कर रहे हैं। यह भागदौड़ ऐसे समय में हो रही है जब ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर की खबरें हैं। भारत की प्राथमिकता इस तनावपूर्ण माहौल में अपनी अर्थव्यवस्था को ग्लोबल उतार-चढ़ाव से बचाना है।
S Jaishankar UAE Visit: ऊर्जा सुरक्षा और यूएई का दौरा
भारत अपनी तेल और गैस की जरूरतों के लिए काफी हद तक मिडिल ईस्ट पर निर्भर है। विदेश मंत्री एस जयशंकर का यूएई दौरा इसी ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए है। अगर खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण सप्लाई रुकती है या कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका सीधा असर भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। यूएई जैसे रणनीतिक साझेदारों से बातचीत का मकसद संकट के समय ऊर्जा की निरंतर आपूर्ति बनाए रखने का ठोस रास्ता निकालना है।
फ्रांस के साथ रणनीतिक सहयोग
पेरिस में विदेश सचिव विक्रम मिसरी ‘भारत-फ्रांस विदेश कार्यालय परामर्श’ की सह-अध्यक्षता करेंगे। यहां बातचीत का मुख्य केंद्र रक्षा, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे अहम मुद्दे हैं। फ्रांस के साथ साइबर सुरक्षा, डिजिटल तकनीक और एआई (AI) पर भी सहयोग बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। भारत की कोशिश है कि मिडिल ईस्ट संकट के बीच रक्षा और तकनीकी मोर्चों पर फ्रांस के साथ संबंधों को और अधिक गहरा किया जाए ताकि वैकल्पिक सुरक्षा घेरा मजबूत हो सके।
Vikram Misri Europe Visit: जर्मनी के साथ व्यापारिक हित
जर्मनी में भारतीय प्रतिनिधिमंडल व्यापार, निवेश और ग्रीन एनर्जी जैसे विषयों पर चर्चा करेगा। यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते जर्मनी भारत के लिए व्यापार और नई टेक्नोलॉजी का बड़ा स्रोत है। हाल ही में जर्मन चांसलर के भारत दौरे के बाद अब विदेश सचिव उन समझौतों को जमीन पर उतारने की कोशिश करेंगे। मिडिल ईस्ट में मचे घमासान के बीच भारत जर्मनी के साथ मिलकर अपनी व्यापारिक सप्लाई चेन को अधिक सुरक्षित और स्थिर बनाना चाहता है।
वैश्विक बदलावों के बीच कूटनीति
विदेश सचिव का यह दौरा अमेरिकी प्रशासन में बदलाव और ईरान-अमेरिका के बीच चल रही सीजफायर वार्ताओं के बीच हो रहा है। अमेरिका में ट्रंप प्रशासन के संभावित अधिकारियों से मिलने के बाद अब यूरोप के इन दो बड़े देशों के साथ तालमेल बिठाना भारत की सोची-समझी रणनीति है। भारत का उद्देश्य यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चाहे जो भी समीकरण बनें, देश की व्यापारिक और रक्षा संबंधी जरूरतों पर कोई आंच न आए और ग्लोबल मंच पर भारत की स्थिति मजबूत बनी रहे।



