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लोकतंत्र की सुंदर तस्वीर! फुले जयंती पर PM मोदी-राहुल गांधी की मुलाकात ने जीता दिल…

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PM Modi Rahul Gandhi शनिवार, 11 अप्रैल को संसद परिसर के ‘प्रेरणा स्थल’ से एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने देश का राजनीतिक माहौल अचानक बदल दिया। अक्सर एक-दूसरे पर तीखे हमले करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बीच आज संक्षिप्त लेकिन बेहद संजीदा बातचीत देखने को मिली। मौका था महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती (Jyotiba Phule 200th Anniversary) का, जहां तमाम दिग्गज नेता उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे। सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक, इस मुलाकात के वीडियो और तस्वीरें अब ‘टॉक ऑफ द टाउन’ बनी हुई हैं।

जब आमने-सामने आए मोदी और राहुल

घटना उस वक्त की है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी गाड़ी से ‘प्रेरणा स्थल’ पर उतरे। वहीं पास में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री अपनी कार से उतरते ही कुछ पल के लिए रुके और राहुल गांधी के पास जाकर उनसे बात करने लगे। वीडियो में देखा जा सकता है कि दोनों नेताओं के बीच काफी ‘सौहार्दपूर्ण’ तरीके से बातचीत हुई। हालांकि, यह बातचीत महज कुछ सेकंड्स की थी, लेकिन इसकी गंभीरता और सहजता ने वहां मौजूद हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। राजनीतिक कड़वाहट के बीच देश के दो सबसे बड़े नेताओं को इस तरह सहज भाव से बात करते देखना सोशल मीडिया पर भी काफी पसंद किया जा रहा है। एक यूजर ने लिखा, प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता को इस तरह गंभीर चर्चा करते देखना लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत है।

महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती पर जुटे दिग्गज

संसद परिसर में स्थित प्रेरणा स्थल पर आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सामाजिक न्याय के अग्रदूत महात्मा ज्योतिबा फुले को उनकी 200वीं जन्मशती पर नमन करना था। पीएम मोदी और राहुल गांधी के अलावा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, राज्यसभा के पूर्व उपसभापति हरिवंश और कई अन्य वरिष्ठ नेताओं ने फुले की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। नेताओं ने शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और हाशिए पर खड़े समुदायों के उत्थान के लिए ज्योतिबा फुले के महान योगदान को याद किया।

क्यों खास हैं दोनों नेताओं की यह मुलाकात?

संसद के सत्रों के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच अक्सर तीखी नोंकझोंक, नारेबाजी और वॉकआउट देखने को मिलता है। भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक विचारधारा की जंग काफी पुरानी और गहरी है। ऐसे में पीएम मोदी और राहुल गांधी का एक-दूसरे के करीब खड़े होकर शिष्टाचार के साथ बात करना यह संदेश देता है कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद लोकतांत्रिक मर्यादाएं और औपचारिक संवाद जीवित हैं। महात्मा ज्योतिबा फुले ने हमेशा समाज को जोड़ने और न्याय की बात की थी। आज उनकी 200वीं जयंती के मौके पर संसद के भीतर पक्ष और विपक्ष के बीच का यह छोटा सा ‘संवाद’ शायद उनकी विरासत को सबसे बेहतरीन श्रद्धांजलि थी। अब चर्चा इस बात की है कि क्या यह छोटी सी मुलाकात आने वाले दिनों में संसद के भीतर की कड़वाहट को कम करने में मददगार साबित होगी?