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थलापति विजय के 107 विधायकों ने इस्तीफा दिया तो? क्या तमिलनाडु में लगेगा राष्ट्रपति शासन…

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तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव नतीजों ने एक ऐसी उलझन पैदा कर दी है, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी. अभिनेता विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कज़गम’ (TVK) 108 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई है. बहुमत के लिए जरूरी 118 के आंकड़े से टीवीके महज कुछ कदम दूर है. कांग्रेस के 5 विधायकों के साथ विजय 113 के आंकड़े तक पहुंच गए हैं. इसके बावजूद राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर. लेकर ने अभी तक उन्हें सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया है. इस बीच डीएमके और एआईएडीएमके के बीच गठबंधन की चर्चाओं ने आग में घी का काम किया है. टीवीके के 107 विधायकों के सामूहिक इस्तीफे की धमकी ने अब राज्य को संवैधानिक संकट के मुहाने पर खड़ा कर दिया है. चर्चा है कि अगर स्थिर सरकार की संभावना नहीं बनती तो राज्यपाल तमिलनाडु में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर सकते हैं.

तमिलनाडु की राजनीति में डीएमके और एआईएडीएमके पारंपरिक दुश्मन रहे हैं. चुनाव परिणामों के बाद यह चर्चा तेज है कि टीवीके को सत्ता से बाहर रखने के लिए ये दोनों दल हाथ मिला सकते हैं. डीएमके के पास 59 और एआईएडीएमके के पास 47 सीटें हैं. अगर इनके गठबंधन सहयोगियों को भी जोड़ लिया जाए, तो यह संख्या 126 तक पहुंचती है.

डीएमके नेता एम.के. स्टालिन ने सार्वजनिक रूप से संकेत दिए हैं कि वे विजय को मौका देने के पक्ष में हैं. दूसरी तरफ, एआईएडीएमके के 25 विधायकों द्वारा टीवीके को समर्थन देने की मांग की खबरें भी आ रही हैं. ऐसे में इन दो धुर विरोधियों का एक साथ आना फिलहाल नामुमकिन सा लगता है.

टीवीके के खेमे में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के बाद भी उन्हें आमंत्रित नहीं किया जा रहा है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अगर उनकी अनदेखी कर किसी और गठबंधन को मौका दिया गया, तो सभी 107 विधायक इस्तीफा दे सकते हैं. विजय खुद एक सीट छोड़ चुके हैं, जिससे विधानसभा की प्रभावी संख्या 233 रह गई है. यदि 107 विधायक एक साथ इस्तीफा देते हैं, तो सदन की ताकत आधी रह जाएगी. यह कदम राज्यपाल पर दबाव बनाने की एक रणनीति भी हो सकती है.

संविधान के जानकारों का मानना है कि यदि विधानसभा में कोई भी दल स्थिर सरकार देने की स्थिति में नहीं होता, तो राज्यपाल अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकते हैं. 107 विधायकों के इस्तीफे की सूरत में सदन में कोरम की समस्या पैदा हो जाएगी. ऐसी स्थिति में कामकाज ठप हो सकता है.

राज्यपाल के पास यह अधिकार है कि वे विधानसभा को भंग कर नए सिरे से चुनाव कराने की रिपोर्ट केंद्र को भेजें. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के एस.आर. बोम्मई केस के फैसले के अनुसार, बहुमत का फैसला राजभवन में नहीं बल्कि विधानसभा के फ्लोर पर होना चाहिए.

मदुरै कांग्रेस ने राज्यपाल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि विजय को मुख्यमंत्री पद की शपथ के लिए नहीं बुलाया गया, तो वे राजभवन का घेराव करेंगे. उनका आरोप है कि राज्यपाल केंद्र के इशारे पर काम कर रहे हैं. इधर, फिल्मी दुनिया से कमल हासन, खुशबू और प्रकाश राज जैसे सितारों ने भी टीवीके के प्रति अपना समर्थन जताया है. कनिमोझी ने भी राज्यपाल के पद की प्रासंगिकता पर सवाल उठाते हुए इसे अनावश्यक बताया है.

तमिलनाडु इस समय एक चौराहे पर खड़ा है. 8 मई, 2026 की स्थिति के अनुसार, विजय ने राज्यपाल को समर्थन का पत्र सौंप दिया है. अब गेंद राज्यपाल के पाले में है. यदि वे विजय को मौका देते हैं, तो उन्हें सदन में 117 का आंकड़ा जुटाना होगा. अगर इस्तीफे की धमकी हकीकत बनती है, तो राज्य को फिर से चुनाव की अग्निपरीक्षा से गुजरना पड़ सकता है.