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गंडई पशु चिकित्सा केंद्र की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल, घायल श्वान को अतरिया भेजने पर पशुपालक आक्रोशित

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गंडई। नगर स्थित शासकीय पशु चिकित्सा केंद्र की कार्यप्रणाली और आपातकालीन व्यवस्थाओं पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ताजा मामला गंभीर रूप से घायल एक पालतू श्वान (डॉगी) को मौके पर प्राथमिक उपचार देने के बजाय सीधे अतरिया ले जाने की सलाह देने से जुड़ा है। इस लापरवाही के चलते स्थानीय पशुपालकों में गहरा रोष व्याप्त है और स्वास्थ्य सेवाओं के तमाम सरकारी दावे खोखले साबित होते नजर आ रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, मंडई-लिमो निवासी कमलेश जैन का पालतू श्वान गंभीर रूप से घायल हो गया था। उपचार की उम्मीद में परिजन उसे लेकर गंडई पशु चिकित्सा केंद्र पहुंचे। आरोप है कि केंद्र में मौजूद पशु चिकित्सक ने घायल पशु को प्राथमिक उपचार देने के बजाय उसे सीधे अतरिया ले जाने की बात कह दी। इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये के चलते परिजनों को गंभीर स्थिति में बेजुबान को लेकर दूसरे स्थान के लिए भटकना पड़ा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि आपातकालीन स्थिति में भी यहां उपचार न मिले, तो ऐसे केंद्र के संचालन का कोई औचित्य नहीं रह जाता।

स्टाफ न होने का दिया हवाला: डॉ. कटारे
मामले में पशु चिकित्सक डॉ. योगेश कटारे का कहना है कि परिजन घायल श्वान को अकेले लेकर आए थे और उसके घाव काफी गहरे थे। उस समय केंद्र में अन्य सहयोगी स्टाफ उपलब्ध नहीं था। डॉ. कटारे ने बताया कि वे केंद्र के प्रभारी हैं और सप्ताह में तीन दिन यहां अपनी सेवाएं देते हैं। स्टाफ की अनुपलब्धता के कारण ही उन्होंने बेहतर इलाज के लिए अत्तरिया जाने का परामर्श दिया था, हालांकि उन्होंने इलाज से पूरी तरह इनकार करने की बात से इंकार किया।

पूर्व चिकित्सक के जाने के बाद से गहराया संकट
स्थानीय पशुपालकों का कहना है कि पूर्व में लंबे समय तक पदस्थ रहे डॉ. संदीप इंदुलकर के स्थानांतरण के बाद से केंद्र की व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है। चिकित्सक की नियमित अनुपलब्धता और पैरा-मेडिकल स्टाफ की कमी के चलते आए दिन मवेशियों और पालतू पशुओं के मालिकों को बैरंग लौटना पड़ रहा है।

प्राथमिक उपचार न देना गंभीर लापरवाही
विभागीय जानकारों के अनुसार, किसी भी घायल या गंभीर पशु के अस्पताल पहुंचने पर उसे तत्काल जीवनरक्षक प्राथमिक उपचार और ड्रेसिंग देना अनिवार्य होता है, जिसके बाद ही आवश्यकता पड़ने पर रेफर की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। बिना प्राथमिक उपचार के सीधे रेफर किए जाने से बेजुबान की जान का जोखिम और अधिक बढ़ जाता है।

आक्रोशित पशुपालकों और नागरिकों ने पशुपालन विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि गंडई चिकित्सा केंद्र के ड्यूटी रोस्टर, उपस्थिति पंजी और दवाओं की उपलब्धता की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, केंद्र में नियमित चिकित्सक और पूर्णकालिक स्टाफ की पदस्थापना तत्काल सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में किसी भी बेजुबान को समय पर इलाज मिल सके।