महाराष्ट्र में जिस तरह से शिवसेना-कांग्रेस और एनसीपी के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है, उससे ये तय माना जा रहा है कि आने वाले चंद दिनों में नई सरकार प्रदेश में कमान संभाल लेगी। इस बीच तीनों ही पार्टियों के दिग्गज नेताओं ने अहम बैठक में नई सरकार को लेकर कॉमन मिनिमम प्रोग्राम का ड्राफ्ट तैयार किया गया, जिसे तीनों दलों ने आलाकमान की मंजूरी के लिए भेजा है। यही नहीं सरकार गठन के फॉर्मूले में कौन सी पार्टी को कितने मंत्रालय मिल सकते हैं इस पर भी विचार-विमर्श हो चुका है। ये भी तय हो गया है कि मुख्यमंत्री शिवसेना का ही होगा। इस बीच खबर ये आ रही है कि कांग्रेस-एनसीपी ने शिवसेना से साफ कह दिया है कि महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार में वो उद्धव ठाकरे को ही मुख्यमंत्री के तौर पर देखना चाहते हैं। आखिर क्या वजह है जो कांग्रेस-एनसीपी को सीएम के तौर पर उद्धव के अलावा और कोई क्यों मंजूर नहीं है?

कांग्रेस-एनसीपी की मांग- उद्धव बनें सीएम

दरअसल, महाराष्ट्र में शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस की सरकार बनने से पहले तीनों ही दल मुख्यमंत्री के मुद्दे पर एक राय होना चाहते हैं। शिवसेना की ओर से कई बार कहा गया कि उनकी ओर से सीएम के तौर पर कई उम्मीदवार हैं। हालांकि, पार्टी में चर्चा यही है कि सीएम के लिए उद्धव ठाकरे के अलावा किसी और नाम पर सहमति के आसार कम हैं। वहीं अब खबर ये भी आ रही कि एनसीपी-कांग्रेस ने भी उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री के तौर पर देखना चाहते हैं। दोनों ही दल की ओर से ये बात शिवसेना की स्पष्ट कर दी गई है कि उन्हें गठबंधन सरकार में मुख्यमंत्री के तौर उद्धव के अलावा कोई दूसरा नाम मंजूर नहीं है।

खुद सीएम बनना नहीं चाहते हैं उद्धव ठाकरे

हालांकि, खबरें ये भी आ रही हैं कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे खुद सीएम बनना नहीं चाहते हैं। लेकिन, जिस तरह से सियासी परिदृश्य बदला है ऐसे में पार्टी के दूसरे दिग्गज नेता या फिर पहली बार विधायक चुने गए आदित्य ठाकरे का नाम आगे आने पर आम सहमति नहीं बनना मुश्किल हो सकता है। वहीं शिवसेना के एक विधायक ने भी टीओआई से बातचीत में कहा, ‘पार्टी के अंदर ठाकरे परिवार के किसी सदस्य के अलावा किसी दूसरे नेता को एकमत से स्वीकार नहीं किया जा सकेगा।’ दूसरी ओर टीओआई से बातचीत में एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने भी बताया, ‘एनसीपी ओर कांग्रेस नेताओं ने चर्चा के दौरान शिवसेना से स्पष्ट कर दिया है कि सरकार की स्थिरता के लिए उद्धव को ही मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए।

आदित्य ठाकरे का भी नाम चर्चा में, लेकिन…

अगर देखा जाए तो कहीं न कहीं आदित्य ठाकरे का नाम भी लगातार सीएम के तौर पर आगे आता रहा है। हालांकि, सच्चाई ये है कि शिवसेना के साथ-साथ कांग्रेस और एनसीपी में उनके नाम को लेकर सहमति के आसार कम ही नजर आ रहे हैं। इसकी वजह ये है कि वो अभी युवा हैं और 29 वर्षीय आदित्य पहली बार चुनाव जीत कर आए हैं। वहीं जैसा कि बातचीत में तय हुआ है कि तीनों दलों की इस सरकार में कांग्रेस और एनसीपी की तरफ से एक-एक डिप्टी सीएम भी होंगे। ऐसे में जो भी डिप्टी सीएम बनेंगे उन्हें नए मुख्यमंत्री के साथ मिलकर काम करना होगा। यही वजह है कि उद्धव ठाकरे ही सीएम के लिए प्रमुख तौर से उभरकर सामने आए हैं।

शिवसेना में सीएम के तौर पर इन दिग्गजों के नाम भी चर्चा में

फिलहाल उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे के अलावा कुछ और दिग्गजों के नाम शिवसेना की तरफ से सामने आ रहे हैं। टीओआई में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, जिस तरह से एकनाथ शिंदे को शिवसेना की तरफ से महाराष्ट्र विधानसभा और विधान परिषद, दोनों ही सदनों का नेता चुना गया, उसके बाद कयास लगाए जाने लगे कि उन्हें सीएम उम्मीदवार के तौर पर भी आगे किया जा सकता है। इनके अलावा सुभाष देसाई का भी नाम चर्चा में है, इसकी वजह ये है कि वो एकनाथ शिंदे से वरिष्ठ हैं और पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। वो कांग्रेस और एनसीपी के साथ नई सरकार के लिए कॉमन मिनिमम प्रोग्राम तय करने वाली समिति में भी शामिल थे।

शिव सैनिकों की पहली पसंद हैं उद्धव ठाकरे: शिवसेना नेता

हालांकि, सीएम के तौर पर भले ही कई नाम सामने आ रहे हैं लेकिन शिवसेना नेता और विधान परिषद की उपाध्यक्ष नीलम गोरे ने टीओआई से बात करते हुए कहा, ‘वो उद्धव ठाकरे को ही सीएम के तौर पर देखना चाहती हैं क्योंकि उद्धव करीब दो दशकों से पार्टी का सफल संचालन कर रहे हैं।’ उन्होंने पार्टी प्रमुख की खूबियों की जमकर सराहना की। साथ ही कहा कि वो शिव सैनिकों की पहली पसंद हैं।

इसलिए सीएम के तौर पर उद्धव हैं पहली पसंद

बता दें कि महाराष्ट्र में तीनों दलों की नई सरकार के गठन को लेकर हुई बातचीत में जो फॉर्मूला तय हुआ है, उसमें शिवसेना के कोटे से 16 मंत्री होंगे, वहीं एनसीपी से 14 और कांग्रेस पार्टी से 12 को मंत्री पद दिया जा सकता है। ये तय है कि मुख्यमंत्री का पद शिवसेना को मिलेगा, वहीं एनसीपी और कांग्रेस की तरफ से एक-एक डिप्टी सीएम बनाए जा सकते हैं। विधानसभा अध्यक्ष के पद पर शुरू से ही कांग्रेस दावेदारी कर रही है, ऐसे में ये उन्हें दिया जा सकता है। इसके अलावा डिप्टी स्पीकर का पद शिवसेना के हिस्से में जा सकता है।

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