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Annual Bonus : वित्त वर्ष 2023-24 खत्म, कंपनियां अप्रैल-मई से एनुअल बोनस मिल सकता है, बोनस को कर सकते हैं निवेश…

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वित्त वर्ष 2023-24 खत्म होने वाला है. इसके साथ ही कई लोगों का बोनस का इंतजार समाप्त होने वाला है. कंपनियां अप्रैल-मई से एनुअल बोनस देने लग जाती हैं. साल भर के इंतजार के बाद जब बोनस का पैसा मिलता है तो उसे कई लोग घूमने-फिरने, शॉपिंग में उड़ा देते हैं.

कुछ लोग उसके लिए पहले से प्लान तैयार रखते हैं. अगर होशियारी से इस्तेमाल किया जाए तो बोनस के पैसे आपके लिए बड़े काम के साबित हो सकते हैं.

बोनस को कर सकते हैं निवेश

बोनस को निवेश करने से पहले आपको अपने शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट गोल के बारे में पता होना चाहिए. ये बच्चे की पढ़ाई, रिटायरमेंट और घर के डाउनपेमेंट के लिए पैसा जोड़ने जैसा लॉन्ग टर्म हो सकता है, या वैकेशन, स्किल डेवलपमेंट, कार या बाइक खरीदने जैसा छोटा गोल हो सकता है. फाइनेंशियल गोल बना लेने से निवेश से जुड़े फैसले लेने में मदद मिलती है.

एक ही जगह न लगाएं पूरा पैसा

बोनस का पूरा पैसा एक एसेट में लगाने की जगह अलग-अलग एसेट क्लास जैसे शेयर, बॉन्ड, रियल एस्टेट और गोल्ड में बांटकर लगाएं. उदाहरण के लिए, 50 फीसदी पैसा शेयर, 30 फीसदी बॉन्ड और 10-10 पर्सेंट रियल एस्टेट और गोल्ड में लगा सकते हैं. इसे डायवर्सिफिकेशन कहते हैं. यह निवेश पर जोखिम को कम करता है. निवेश के लिए स्टॉक, म्यूचुअल फंड, एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड, रियल एस्टेट और गोल्ड जैसे कई विकल्प मौजूद हैं. हर निवेश विकल्प के बारे में रिसर्च करें और उनकी परफॉर्मेंस हिस्ट्री, फीस, जोखिम और रिटर्न की तुलना करें.

कर्ज उतारने में कर सकते हैं यूज

बोनस की रकम का सही इस्तेमाल कैसे करें, इसके लिए कुछ सझाव हैं. अगर आपके ऊपर कोई लोन है, जैसे क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन, जिसकी ब्याज दर काफी ज्यादा है तो बोनस की रकम का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए कर सकते हैं. इससे मोटा ब्याज बच सकता है. साथ ही क्रेडिट स्कोर सुधरता है. इंटरेस्ट फ्री पीरियड के बाद क्रेडिट कार्ड कंपनियां अच्छी खासी-ब्याज दर लगाती हैं..हो सकता है कि आप जो निवेश करें उस पर आपको क्रेडिट कार्ड के इंटरेस्ट रेट के बराबर रिटर्न भी न मिले. ऐसे में बोनस के पैसों से ऊंची ब्याज दर वाला कर्ज उतारना समझदारी है.

निवेश से पहले जरूरी है ये काम

निवेश से पहले इमरजेंसी फंड जरूरी है, ताकि मेडिकल इमरजेंसी, नौकरी छूटने जैसे मुश्किल वक्त में किसी के सामने हाथ न फैलाना पड़े. अगर आपके पास इमरजेंसी फंड नहीं है तो बोनस की रकम को इसका हिस्सा बना सकते हैं. इमरजेंसी फंड में कम से कम 6 महीने के जरूरी खर्च के बराबर पैसे होने चाहिए. अगर आपका घर खरीदने, रिटायरमेंट प्लानिंग या वेल्थ क्रिएशन जैसा लॉन्ग टर्म गोल है तो अपने बोनस को इन लक्ष्यों को पूरा करने में इस्तेमाल करें.

“हम तीसरे विश्व युद्ध से सिर्फ एक कदम दूर हैं” : रूस और NATO सैन्य संघर्ष पर बोले पुतिन

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोमवार को पश्चिम को चेतावनी देते हुए कहा कि रूस और अमेरिका के नेतृत्व वाली नाटो सैन्य गठबंधन के बीच सीधे संघर्ष का मतलब ये है कि धरती तीसरे विश्व युद्ध से सिर्फ एक कदम दूर है लेकिन आज के वक्त में शायद ही कोई इस तरह की परिस्थिति चाहता हो.

यूक्रेन युद्ध ने 1962 के क्यूबा मिसाइल संकट के बाद से पश्चिम के साथ मास्को के संबंधों में एक गहरा संकट पैदा कर दिया है. पुतिन अक्सर ही परमाणु युद्ध के खतरों के बारे में चेतावनी देते रहे हैं लेकिन उनका कहना है कि उन्हें कभी भी यूक्रेन में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की जरूरत महसूस नहीं हुई.

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने पिछले महीने कहा था कि वह भविष्य में यूक्रेन में जमीनी सैनिकों की तैनाती से इनकार नहीं कर सकते हैं फिर चाहे कई पश्चिमी देशों ने इससे दूरी क्यों न बना ली हो. वहीं अन्य खासतौर पर पूर्वी यूरोप ने यूक्रेन ने अपना समर्थन व्यक्त किया है. रॉयटर्स द्वारा मैक्रॉन की टिप्पणियों और रूस और नाटो के बीच संघर्ष के जोखिम और संभावना के बारे में पूछे जाने पर पुतिन ने चुटकी लेते हुए कहा : “आधुनिक दुनिया में सब कुछ संभव है”.

पुतिन ने सोवियत-रूसी इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी जीत के बाद संवाददाताओं से कहा, “यह सभी के लिए स्पष्ट है कि यह पूर्ण पैमाने पर तीसरे विश्व युद्ध से एक कदम दूर होगा. मुझे लगता है कि शायद ही किसी को इसमें दिलचस्पी है.” हालांकि, पुतिन ने कहा कि नाटो के सैन्यकर्मी पहले से ही यूक्रेन में मौजूद थे, उन्होंने कहा कि रूस ने युद्ध के मैदान में बोली जाने वाली अंग्रेजी और फ्रेंच दोनों भाषा सीख ली हैं. उन्होंने कहा, “इसमें किसी के लिए कुछ अच्छा नहीं है, खासतौर पर उकने लिए क्योंकि वो वहां बड़ी संख्या में मर रहे हैं.”

बफर ज़ोन

15-17 मार्च के रूसी चुनाव से पहले, यूक्रेन ने रूस के खिलाफ हमले तेज कर दिए, सीमावर्ती क्षेत्रों पर गोलाबारी की और यहां तक कि रूस की सीमाओं को भेदने की कोशिश करने के लिए हथियारों का इस्तेमाल भी किया. यह पूछे जाने पर कि क्या वह यूक्रेन के खार्किव क्षेत्र को लेना आवश्यक मानते हैं, पुतिन ने कहा कि यदि हमले जारी रहे, तो रूस रूसी क्षेत्र की रक्षा के लिए अधिक यूक्रेनी क्षेत्र से एक बफर जोन बनाएगा.

पुतिन ने अधिक विवरण देने से इनकार कर दिया, लेकिन कहा कि ऐसा क्षेत्र इतना बड़ा होना चाहिए कि विदेशी निर्मित हथियारों को रूसी क्षेत्र तक पहुंचने से रोका जा सके. पुतिन ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण का आदेश दिया था, जिससे पूर्वी यूक्रेन में एक तरफ यूक्रेनी सेना और दूसरी तरफ रूसी समर्थक यूक्रेनियन और रूसी प्रॉक्सी के बीच आठ साल के संघर्ष के बाद प्रमुख यूरोपीय युद्ध शुरू हो गया.

पुतिन ने कहा कि वह चाहते हैं कि मैक्रॉन यूक्रेन में युद्ध को बढ़ाने की कोशिश करना बंद कर दें, लेकिन शांति स्थापित करने में भूमिका निभाएं: “ऐसा लगता है कि फ्रांस एक भूमिका निभा सकता है. अभी सब कुछ खत्म नहीं हुआ है.” पुतिन ने कहा, “मैं इसे बार-बार कह रहा हूं और मैं इसे फिर से कहूंगा. हम शांति वार्ता के पक्ष में हैं, लेकिन सिर्फ इसलिए नहीं कि दुश्मन के पास गोलियां खत्म हो रही हैं.” “अगर वे वास्तव में, गंभीरता से, लंबी अवधि में दोनों राज्यों के बीच शांतिपूर्ण, अच्छे-पड़ोसी संबंध बनाना चाहते हैं, और केवल 1.5-2 साल के लिए पुन: शस्त्रीकरण के लिए ब्रेक नहीं लेना चाहते हैं.”

Lok Sabha Election 2024 : इस समय चुनावी बॉन्ड को लेकर काफी चर्चा, भाजपा नेता ने चुनावी बॉन्ड का किया बचाव, चुनावी बॉन्ड से राजनीतिक दलों को कितना मिला चंदा?

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Lok Sabha Election 2024। लोकसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी चुनावी मैदान में हैं। वो राजनांदगांव से चुनाव लड़ने वाले हैं। इस समय चुनावी बॉन्ड को लेकर काफी चर्चा हो रही है।

चुनावी बॉन्ड को लेकर कांग्रेस लगातार भाजपा पर निशाना साध रही है। वहीं, पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि चुनावी बॉन्ड साल का सबसे बड़ा घोटाला है।

हालांकि, चुनावी बॉन्ड के बचाव में उतरते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल ने कहा कि विपक्ष चुनावी बॉन्ड योजना को लेकर भाजपा पर निराधार आरोप लगा रहे हैं।

भाजपा नेता ने चुनावी बॉन्ड का किया बचाव

एसपी सिंह बघेल ने आगे कहा,”टीएमसी, जो एक क्षेत्रीय पार्टी है उसे इस योजना के तहत 1600 करोड़ रुपये मिले। कांग्रेस को 1400 करोड़ रुपये मिले। बीआरएस को 1200 रुपये मिले। चुनावी बॉन्ड के जरिए ही राजनीतिक दल धन प्राप्त कर सकते हैं। लेन-देन का पूरा विवरण दस्तावेजों और बैलेंस शीट में मौजूद है।”

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “अब कांग्रेस आरोप लगा रही है कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर कंपनियों से जबरन वसूली करने के लिए चुनावी बॉन्ड योजना शुरू की गई थी। उनके शासनकाल में ट्रांसफर पोस्टिंग या ठेके सौंपने को भी पार्टी फंड के तहत सूचीबद्ध किया गया था।”

चुनावी बॉन्ड से राजनीतिक दलों को कितना मिला चंदा?

इससे पहले, चुनाव आयोग ने चुनावी बॉन्ड पर ताजा डेटा सार्वजनिक किया था, जिसे पहले जनता के लिए उपलब्ध कराने के शीर्ष अदालत के निर्देश के बाद सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को प्रस्तुत किया गया था।

ताजा विवरण के अनुसार, डीएमके को चुनावी बॉन्ड के माध्यम से 656.5 करोड़ रुपये मिले, जिसमें लॉटरी किंग सैंटियागो मार्टिन के फ्यूचर गेमिंग से 509 करोड़ रुपये शामिल हैं। भाजपा ने कुल मिलाकर 6,986.5 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड भुनाए। सत्तारूढ़ दल को सबसे अधिक राशि 2019-20 में 2,555 करोड़ रुपये मिली। कांग्रेस ने चुनावी बॉन्ड के जरिए कुल 1,334.35 करोड़ रुपये का फंड भुनाया।

”लोकसभा निर्वाचन : छग में दो करोड़ पांच लाख 13 हजार 252 मतदाता पंजीकृत, 24229 मतदान केंद्र”

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”लोकसभा निर्वाचन : छग में दो करोड़ पांच लाख 13 हजार 252 मतदाता पंजीकृत, 24229 मतदान केंद्र”

छत्तीसगढ़ निर्वाचन आयोग की पदाधिकारी रीना बाबा कंगाले ने रविवार को पत्रकारवार्ता में छत्तीसगढ़ के 11 लोकसभा सीटों पर होने वाले चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा कर दी है।

इसमें पहले चरण के मतदान के लिए अधिसूचना का प्रकाशन 20 मार्च को किया जाएगा। इसके बाद उम्मीदवार 27 मार्च तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे। 28 मार्च को नामांकन पत्रों की समीक्षा की जाएगी। 30 मार्च को नाम वापसी होगी। इसके बाद 19 अप्रैल को पहले चरण के मतदान संपन्न कराए जाएंगे।

दूसरे चरण के लिए 28 मार्च को अधिसूचना का प्रकाशन किया जाएगा। 4 अप्रैल को नामांकन की प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी। इसके बाद 5 अप्रैल को नामांकन की समीक्षा के बाद 8 अप्रैल को नाम वापसी के लिए समय दिया जाएगा। वहीं 26 अप्रैल को मतदान की प्रक्रिया पूर्ण होगी।

तीसरे चरण के लिए अधिसूचना का प्रकाशन 12 अप्रैल को किया जाएगा, 19 अप्रैल तक उम्मीदवार नामांकन दाखिल कर सकेंगे। 20 अप्रैल को नामांकन पत्रों की समीक्षा के बाद 22 को नाम वापसी की तिथि निर्धारित की गई है। वहीं सात मई को मतदान होंगे।

छत्तीसगढ़ में कुल मतदाताओं की संख्या दो करोड़ पांच लाख 13 हजार 252

उन्होंने बताया कि 08 फरवरी 2024 को निर्वाचक नामावली के अंतिम प्रकाशन की स्थिति में छत्तीसगढ़ में कुल मतदाताओं की संख्या दो करोड़ पांच लाख 13 हजार 252 है, जिनमें से एक करोड़ एक लाख 80 हजार 405 पुरुष मतदाता एवं एक करोड़ तीन लाख 32 हजार 115 महिला मतदाता पंजीकृत हैं।

प्रदेश में सेवा मतदाताओं की संख्या 19 हजार 905

प्रदेश में सेवा मतदाताओं की संख्या 19 हजार 905 है। चिन्हांकित दिव्यांग मतदाताओं की संख्या एक लाख 91 हजार 638 है। प्रदेश में तृतीय लिंग के कुल 732 मतदाता पंजीकृत हैं।

प्रदेश में कुल 17 प्रवासी भारतीय मतदाता पंजीकृत हैं। कुल मतदाताओं में 18-19 वर्ष आयु वर्ग के मतदाताओं की संख्या 5 लाख 77 हजार 184 है। इसी प्रकार प्रदेश में 20-29 आयु वर्ग के युवा मतदाताओं की संख्या 47 लाख 11 हजार 890 है। 85 वर्ष से अधिक उम्र के मतदाताओं की संख्या 82 हजार 476 है। राज्य में 100 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले मतदाताओं की संख्या 2,855` है।

कंगाले ने बताया कि राज्य में अंतिम प्रकाशन 8 फ़रवरी के पश्चात भी सतत अद्यतनिकरण में मतदाताओं का नाम जोड़े जाने की कार्रवाई निरंतर प्रक्रियाधीन है। आयोग के निर्देशानुसार नाम निर्देशन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि को निर्वाचक नामावली फ्रीज कर दी जाएगी। विधानसभा निर्वाचन 2023 से मतदाताओं की संख्या में एक लाख 20 हजार 92 (0.6 प्रतिशत) की वृद्धि हुई है। 2019 से मतदाताओं की संख्या में 15 लाख 14 हजार तेरह (7.96 प्रतिशत) की वृद्धि हुई है।

”छत्तीसगढ़ के 11 लोकसभा क्षेत्रों में कुल 24229 मतदान केंद्र”

छत्तीसगढ़ के 11 लोकसभा क्षेत्रों में 24109 मूल मतदान केन्द्र एवं 120 सहायक मतदान केन्द्रों सहित कुल 24229 मतदान केंद्र हैं। कुल 20951 मतदान केन्द्र लोकेशन हैं, जिनमें से 3221 शहरी क्षेत्र में तथा 17730 ग्रामीण क्षेत्र में स्थित हैं।

”मतदान केन्द्रों में होगी सुनिश्चित न्यूनतम सुविधाएं”

राज्य के सभी मतदान केन्द्रों में सुनिश्चित न्यूनतम सुविधाएं जैसे रैंप, पेयजल, विद्युत् प्रकाश, शौचालय इत्यादि की व्यवस्था कर ली गई है। आयोग के निर्देशानुसार प्रत्येक मतदान केंद्र में “मतदाता सहायता केंद्र” का निर्माण किया जाएगा। राज्य में लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के अन्तर्गत 10 संगवारी मतदान केन्द्र होंगे जो महिला मतदान दल द्वारा संचालित होंगे।

”पांच आदर्श मतदान केन्द्र भी बनाये जाएंगे। इसी प्रकार प्रत्येक विधानसभा में एक दिव्यांग संचालित मतदान केंद्र एवं एक युवा संचालित मतदान केंद्र बनाये जाएंगे। इस प्रकार राज्य भर में इस बार कुल 900 संगवारी मतदान केंद्र, 450 आदर्श मतदान केन्द्र, 90 दिव्यांगजनों द्वारा संचालित केंद्र एवं 90 यूथ के द्वारा संचालित मतदान केंद्र बनाये जाएंगे।”

”बुजुर्ग एवं दिव्यांग मतदाताओं के लिए “मतदाता मित्र” होंगे तैनात”

केन्द्रों में बुजुर्ग जनों एवं दिव्यांग मतदाताओं की सहायता हेतु “मतदाता मित्र” आवश्यक सहयोग हेतु होंगे। एक मतदान केंद्र में अधिकतम मतदाताओं की संख्या को 1500 तक रखा गया है। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार इस बार राज्य के 50 प्रतिशत मतदान केन्द्रों में मतदान दिवस को लाइव वेबकास्टिंग भी कराई जाएगी।

भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश अनुसार 85 वर्ष से अधिक आयु वाले वृद्धजन, 40 प्रतिशत या इससे अधिक दिव्यांगता रखने वाले दिव्यांगजन एवं कोविड 19 के संदिग्ध अथवा संक्रमित मतदाता भी निर्धारित प्ररूप 12घ के माध्यम से निर्वाचन की अधिसूचना दिनांक के 5 दिवस के अन्दर सम्बंधित रिटर्निंग अधिकारी को आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं, जिससे वह डाक मतपत्र के माध्यम से घर पर ही वोटिंग कर सकेंगे।

ऐसे समस्त पात्र आवेदक मतदाताओं हेतु विशेष मतदान दल का गठन किया जाएगा। ये मतदान दल पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था एवं आवश्यक मतदान सामग्री के साथ निर्धारित तिथि को ऐसे मतदाताओं के घर जाकर पूर्ण गोपनीयता के साथ उनका मत प्राप्त करेंगे। मतदान दल के रूट चार्ट एवं उनके दौरे की सूचना सभी अभ्यर्थियों को प्रदान की जाएगी।

उपरोक्त श्रेणी के अतिरिक्त सेवा मतदाताओं को भेजा जाएगा जिसपर वे अपना मत रिकॉर्ड कर इसे डाक के माध्यम से प्रेषित करेंगे। निर्वाचन ड्यूटी में तैनात मतदाताओं को भी डाक मतपत्र के माध्यम से मतदान की पात्रता रहेगी, इस हेतु उन्हें नियत समयावधि में निर्धारित प्ररूप 12 में आवेदन प्रस्तुत करना होगा।

चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव के तारीखों की घोषणा, राजधानी रायपुर समेत सभी जिले में धारा 144 लागू…

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चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव के तारीखों की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही देशभर में आचार संहिता भी लागू हो चुकी है। लोकसभा चुनाव के दौरान राजधानी रायपुर में शांति व्यवस्था बनाए रखने और भयमुक्त वातावरण बनाने के लिए जिले में धारा 144 लागू कर दी है।

इसके साथ ही अस्त्र-शस्त्र धारण करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके लिए रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने आदेश जारी कर दिया है।

भारत निर्वाचन आयोग की ओर से लोकसभा चुनाव के लिए तारीखों की घोषणा के साथ ही चुनाव की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।

लोकसभा चुनाव के दौरान भय और आतंक का वातावरण खत्म करने, शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव, मतदाताओं में भय पैदा न हो, मतदाता भयमुक्त होकर मताधिकार का प्रयोग कर सके।

इसके मद्देनजर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने एक आदेश जारी कर 16 मार्च से जिले में धारा 144 लागू कर दी है। इसके साथ ही आदेश दिया है कि कोई भी व्यक्ति किसी प्रकार का शस्त्र, तलवार, फरसा, भाला, लाठी, चाकू, छुरी, कुल्हाड़ी, गुफ्ती, त्रिशूल, खुकरा, सांग और बल्लम समेत अन्य अस्त्र शस्त्र लेकर सार्वजनिक स्थान पर नहीं निकलेगा, जो व्यक्ति शासकीय कर्तव्य पर है वे ड्यूटी के दौरान अस्त्र-शस्त्र धारण कर सकेंगे।

यह आदेश उन व्यक्तियों पर भी लागू नहीं होगा जो शारीरिक दुर्बलता, वृद्धावस्था और विकलांगता के कारण सहारे के रूप में लाठी लेकर चलते हैं साथ ही धार्मिक आस्थाओं के आधार पर धारित अस्त्र-शस्त्र पर भी यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। रायपुर जिले के अंदर कोई भी व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के न तो कोई सभा करेगा ना ही कोई रैली या जुलूस निकाल सकेगा। ना ही कोई धरना देगा। इस आदेश का उल्लंघन करने वाले समूह या व्यक्ति के विरूद्ध धारा दण्ड संहिता के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।

लोकसभा चुनाव के खत्म होने तक बिना अनुमति के ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग को निषेध कर दिया गया है।

उन्होने कहा है कि निर्वाचन प्रचार-प्रसार और आमसभा प्रचार जुलूस वाहन इत्यादि के लिए क्षेत्र के संबंधित सक्षम प्राधिकारी से लिखित अनुमति प्राप्त करने के उपरांत ही ध्वनि विस्तारक यंत्र का उपयोग सुबह छह बजे से रात्रि 10 बजे तक की अवधि में किया जा सकता है। रायपुर जिले के अंतर्गत आने वाले समस्त विधानसभा क्षेत्र हेतु अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी, रायपुर को सक्षम प्राधिकारी नियुक्त किया गया है।

लोकसभा चुनाव के लिए समस्त अधिकारी-कर्मचारियों को आदेशित किया गया है कि वे कलेक्टर या जिला निर्वाचन अधिकारी के पूर्वानुमति के न तो अवकाश पर रहेंगे और ना ही मुख्यालय छोड़ेंगे। इस संबंध में आदेश जारी किया गया है।

इसके अनुसार जिला स्तर पर और जिले अंतर्गत समस्त शासकीय, राज्य शासन के विभागीय इकाईयों और उपक्रमों के अमले के अवकाशों की स्वीकृति के लिए जिला कलेक्टर और जिला निर्वाचन अधिकारी अवकाश स्वीकृत करने के लिए सक्षम अधिकारी होंगे।

Mahadev Satta App Case : लोकसभा चुनाव 2024 की सरगर्मियों के बीच बड़ी कार्रवाई, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समेत 21 लोगों को खिलाफ FIR दर्ज…

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Mahadev Satta App Case : लोकसभा चुनाव 2024 की सरगर्मियों के बीच बड़ी कार्रवाई हुई है। महादेव सट्टा ऐप केस में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल फंस गए हैं। उनके समेत 21 लोगों को खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

केस गत 4 मार्च को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की आर्थिक अपराध शाखा ने दर्ज किया था।

ANI के मुताबिक, IPC की धारा 120बी, 34, 406, 420, 467, 468, 471 के तहत केस दर्ज किया गया है। भूपेश बघेल समेत सभी 21 लोगों पर महादेव सट्टा ऐप के मालिकों से 508 करोड़ रुपये प्रोटेक्शन मनी लेने के आरोप लगे हैं। ED ने अपनी चार्जशीट में यह दावा किया है। प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्‍ट के तहत मामले में नई FIR दर्ज की गई है।

क्या है मामला और क्या है महादेव ऐप?

महादेव ऐप ऑनलाइन सट्टा खेलने के लिए बनाई गई थी। इस ऐप पर यूजर्स कार्ड और पोकर जैसी गेम खेलते थे। क्रिकेट, बैडमिंटन, टेनिस, फुटबॉल जैसे मैचों में सट्टा लगाते थे। ऐप के जरिये चुनावी सट्टा भी लगवाया जाता था। ऐप 2019 में सौरभ चंद्राकर नामक शख्स ने शुरू की थी, जिसे बनाने में उसके दोस्त इंजीनियर रवि उप्पल ने मदद की थी।

2017 में सौरभ और रवि ने मिलकर ऑनलाइन सट्टा खेलने और खिलाने के लिए वेबसाइट बनाई, लेकिन ज्यादा ग्राहक नहीं आते थे। साल 2019 में सौरभ दुबई चला गया। वहां जाने के बाद उसने रवि को भी बुला लिया और वहां कैसिनो में सट्टेबाजी का पैटर्न देखकर दोनों ने मिलकर सट्टा ऐप बनाई। सोशल मीडिया मार्केटिंग और इन्फ्लुएंसरों के जरिए ऐप प्रमोट करवाई।

प्रमोशन के जरिए ऐप से लाखों ग्राहक जुड़ गए और ज्यादातर ग्राहक छत्तीसगढ़ के थे।

कैसे सुर्खियों में आई महादेव ऐप?

महादेव सट्टा ऐप से कोरोना काल में 2021 में हुई IPL में करीब 2 हजार करोड़ा का सट्टा लगा। ऐप पहली बार फरवरी 2020 में चर्चा में आई। छत्तीसगढ़ में आयकर विभाग की छापेमारी के दौरान महादेव ऐप का खुलासा हुआ। इसके 30 से ज्यादा एजेंट गिरफ्तार हुए। रवि उप्पल और सौरभ चंद्राकर पुलिस को नहीं मिले, लेकिन मामला ED को सौंपा गया। इस बीच फरवरी 2023 में सौरभ चंद्राकर ने दुबई में शादी की। इस शादी में 200 करोड़ कैश खर्च किया गया। मुंबई से वेडिंग प्लानर, डांसर, डेकोरेटर, परफॉर्म करने के लिए सेलेब्स हायर किए। हवाला चैनलों के जरिए इन्हें पेमेंट की गई।

बॉलीवुड सेलेब्स के कनेक्शन मिले

जांच करते हुए ED ने अगस्त 2023 में छत्तीसगढ़ को ASI चंद्रभूषण वर्मा, सतीश चंद्राकर दबोचे। उन्होंने बिजनेसमैन अनिल दम्मानी और सुनील दम्मानी का नाम लिया। सितंबर 2023 में देशभर में 39 जगहों पर रेड मारकर 417 करोड़ कैश जब्त किया गया। भूपेश बघेल के OSD के घर भी रेड पड़ी। 5 हजार करोड़ से ज्यादा के पैसों के हेरफेर के आरोप ऐप पर लगे। ऐप को एक्टर रणबीर कपूर ने प्रमोट किया था। उनके समेत 14 सेलेब्स के ऐप से कनेक्श मिले। इनमें कपिल शर्मा, सनी लियोनी भी शामिल हैं। इन पर हवाला चैनलों के जरिए पेमेंट लेने के आरोप लगे हैं।

Cheapest Petrol-Diesel Price In India: भर में पेट्रोल-डीजल के दाम, किस राज्य में कितना पेट्रोल का दाम?

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Cheapest Petrol-Diesel Price In India: देशभर में पेट्रोल-डीजल के दाम अक्सर बढ़ते और घटते रहते हैं। हाल ही में इनकी कीमतों में दो रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई है। लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी में यह राहत दी है।

इससे लोगों को सुकून की सांस तो मिली लेकिन कई राज्यों में वैट ज्यादा होने के कारण अभी भी पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा बिक रहा है। पूरे देश में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल में पेट्रोल और डीजल सबसे महंगा बिक रहा है। ऐसे में जानिए वह राज्य कौन-से हैं जहां सबसे सस्ता बिक रहा पेट्रोल और डीजल?

किस राज्य में सबसे सस्ता पेट्रोल और डीजल?

उद्योग के आंकड़ों से मिली जानकारी के मुताबिक, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दिल्ली और पूर्वोत्तर जैसे छोटे राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में पेट्रोल-डीजल की कीमत सबसे कम है। स्थानीय बिक्री कर या वैट की दरों में अंतर के कारण अलग-अलग राज्यों में इनकी कीमत एक जैसी नहीं है।

किस राज्य में कितना पेट्रोल का दाम?

आंध्र प्रदेश में पेट्रोल के दाम सबसे ज्यादा 109.87 रुपये प्रति लीटर है। इसके बाद, केरल का नंबर आता है। वहां, पेट्रोल 107.54 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। तेलंगाना में पेट्रोल के दाम 107.39 रुपये प्रति लीटर है।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पेट्रोल के दाम 106.45 रुपये प्रति लीटर, बिहार की राजधानी पटना में 105.16 रुपये, राजस्थान की राजधानी जयपुर में 104.86 रुपये और मुंबई में 104.19 रुपये प्रति लीटर है।

सबसे सस्ता पेट्रोल कहां और क्या है कीमत?

पश्चिम बंगाल में पेट्रोल के दाम 103.93 रुपये प्रति लीटर हैं। आंकड़ों के मुताबिक, ओडिशा (भुवनेश्वर में 101.04 रुपये प्रति लीटर), तमिलनाडु (चेन्नई में 100.73 रुपये) और छत्तीसगढ़ (रायपुर में 100.37 रुपये) में पेट्रोल के दाम 100 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा हैं। दूसरी तरफ अंडमान और निकोबार द्वीप में पेट्रोल सबसे सस्ता, 82 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। उसके बाद आते हैं सिलवासा और दमन, जहां यह 92.38-92.49 रुपये प्रति लीटर है। बाकी छोटे राज्यों में भी पेट्रोल सस्ता है। देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 94.76 रुपये प्रति लीटर है। वहीं, पणजी (95.19 रुपये), आइजोल (93.68 रुपये) और गुवाहाटी (96.12 रुपये) में भी पेट्रोल की कीमत 100 रुपये से कम है।

सबसे सस्ता डीजल कहां और क्या है कीमत?

डीजल की कीमतों की बात करें तो आंध्र प्रदेश के अमरावती में यह 97.6 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में 96.41 रुपये प्रति लीटर, हैदराबाद में 95.63 रुपये और रायपुर में 93.31 रुपये प्रति लीटर है। महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और बिहार में डीजल के दाम 92 से 93 रुपये प्रति लीटर हैं।

ओडिशा और झारखंड में भी डीजल के दाम इतने ही हैं। अंडमान और निकोबार आइलैंड में डीजल लगभग 78 रुपये प्रति लीटर में खरीदा जा रहा है। दिल्ली में डीजल के दाम 87.66 रुपये प्रति लीटर हैं, जबकि गोवा में इसकी कीमत 87.76 रुपये प्रति लीटर है।

Bharat Jodo Nyay Yatra: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ 63 दिन बाद रविवार (17 मार्च) मुंबई में आखिरकार समाप्त होने जा रही है.

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Bharat Jodo Nyay Yatra: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ 63 दिन बाद रविवार (17 मार्च) मुंबई में आखिरकार समाप्त होने जा रही है. राहुल गांधी आज मुंबई में पदयात्रा कर रहे हैं.

इस मौके पर राहुल गांधी का साथ देने के सुबह से ही कांग्रेस पार्टी के कई दिग्गज नेता मुबंई के अगस्त क्रांति मैदान पहुंचे हैं. इसके अलावा राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा में शामिल होने के लिए किसान नेता योगेंद्र यादव, मशहूर एक्टर स्वरा भास्कर जैसे कई बड़े चेहरे पहुंचे हैं.आपको बता दें कि राहुल गांधी की ये यात्रा 14 जनवरी 2024 से मणिपुर से शुरू हुई थी लोकसभा चुनावों की तारीख का ऐलान होते ही कांग्रेस की भारत जोड़ो न्याय यात्रा को मुंबई में समापन कर दिया. इसी को लेकर राहुल गांधी मुंबई में मणि भवन से लेकर अगस्त क्रांति मैदान तक पदयात्रा कर रहे हैं. अपनी पदयात्रा समाप्त होने के बाद राहुल गांधी तेजपाल हॉल में सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों से चर्चा करेंगे.

PM Narendra Modi Viksit Bharat Sampark: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक लेटर के साथ लोगों से फीडबैक और सुझाव मांगने वाले ‘विकसित भारत संपर्क’ अभियान के एक वॉट्सएप मैसेज ने विवाद

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PM Narendra Modi Viksit Bharat Sampark: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक लेटर के साथ लोगों से फीडबैक और सुझाव मांगने वाले ‘विकसित भारत संपर्क’ अभियान के एक वॉट्सएप मैसेज ने विवाद खड़ा कर दिया है.

विपक्षी दल के नेताओं ने पीएम मोदी पर राजनीतिक प्रचार के लिए सरकारी डेटाबेस और मैसेजिंग ऐप के दुरुपयोग का आरोप लगाया है.

केरल कांग्रेस ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर वॉट्सएप की पैरेंट कंपनी मेटा को टैग करते हुए विकासशील भारत संपर्क नाम के एक वेरिफाइड बिजनेस अकाउंट से भेजे जा रहे ऑटोमेटेड मैसेज के बारे में बताया.

‘यह राजनीतिक प्रचार के अलावा कुछ और नहीं’

मैसेज में केरल कांग्रेस ने लिखा है, “यह मैसेज लोगों से फीडबैक लेने की बात करता है, लेकिन मैसेज के साथ अटैच पीडीएफ राजनीतिक प्रचार के अलावा कुछ नहीं है. फीडबैक की आड़ में पीएम मोदी आगामी लोकसभा चुनावों के लिए अपने अभियान के तहत अपनी सरकार के बारे में सरकारी डेटाबेस का दुरुपयोग कर रहे हैं.”

वॉट्सएप को याद दिलाई कंपनी की पॉलिसी

केरल कांग्रेस ने वॉट्सएप को उसकी पॉलिसी का एक स्क्रीनशॉट भी टैग किया है. जिसमें बताया गया है कि कंपनी राजनीतिक दलों, राजनेताओं, राजनीतिक उम्मीदवारों और राजनीतिक अभियानों की ओर से मैसेजिंग ऐप के उपयोग की अनुमति नहीं देती है. कांग्रेस ने पूछा है कि अगर यही नीति है, तो आप किसी राजनीतिक नेता को अपने मंच पर प्रचार करने की अनुमति कैसे देते हैं? क्या आपके पास बीजेपी के लिए कोई अलग नीति है?

क्या है विवाद की वजह?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को केंद्र सरकार के “विकसित भारत” एजेंडे को आकार देने के लिए लोगों के एक वर्ग से सुझाव मांगे हैं. आम चुनावों की घोषणा की पूर्व संध्या पर जारी एक लेटर में प्रधानमंत्री ने कहा: “मुझे आपके विचारों, सुझावों और समर्थन की आवश्यकता है और वास्तव में हम एक विकसित भारत के निर्माण के संकल्प को पूरा करने के लिए काम कर रहे हैं.”

टीएमसी ने भी किया बीजेपी पर हमला

वहीं शनिवार को आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद करदाताओं के खर्च पर पीएम मोदी के इस प्रचार को रोकने के लिए तृणमूल कांग्रेस नेता महुआ मोइत्रा ने भी बीजेपी पर हमला बोला. मोइत्रा ने लिखा, “ईसी की घोषणा के बाद आज से आचार संहिता लागू हो चुकी है, लेकिन करदाताओं के खर्च पर 20:17 बजे पीएम के पत्र को प्लग करते हुए “विकसित भारत” से जुड़ा मैसेज मिला. कृपया इसे बीजेपी के अकाउंट से भेजें.”

रूस में राष्ट्रपति चुनाव के लिए तीसरे दिन भी वोटिंग जारी

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युद्ध के बीच रूस में राष्ट्रपति चुनाव के लिए तीसरे दिन भी वोटिंग जारी है. रूस में राष्ट्रपति चुनाव के लिए आज तीसरे और आखिरी दिन का मतदान सुबह से ही शुरू हो गया है.

रूस में मतदान के बीच क्रेमलिन से एनडीटीवी के रिपोर्टर उमाशंकर सिंह की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध के बीच हो रहे चुनावों के चलते यहां पर इंटरनल सिक्योरिटी को काफी बढ़ा दिया गया है.

क्रेमलिन के एरिया में पहले टूरिस्ट बेरोकटोक आ पा रहे थे लेकिन मतदान के मद्देनजर यहां सिक्योरिटी यूनिट ने इलाके से सभी सैलानियों और टूरिस्ट्स को हटाना शुरू कर दिया. क्रेमलिन के इस इलाके में चुनाव के नतीजों के बाद जीत के जश्न की तैयारी की जा रही है और इस वजह से यहां सुरक्षा बंदोबस्त को पुख्ता किया जा रहा है.

क्रेमलिन के इस इलाके को अब No Go एरिया कर दिया गया है. और जब यहां पर नतीजों के बाद जश्न का माहौल होगा तो यहां पर सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लोगों को आने दिया जाएगा. इस वजह से क्रेमलिन में जो सैकड़ों की तादाद में टूरिस्ट जमा थे उन्हें बाहर भेज दिया गया है. यहां पर जो यूनिट है वो रूसी सिक्योरिटी का हिस्सा है और वो सुरक्षा के इंतजाम का ध्यान रख रही है.

जानकारी के मुताबिक, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ तीन उम्मीदवारों मैदान में हैं. पुतिन के खिलाफ खड़े तीन उम्मीदवार लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के लियोनिद स्लटस्की, न्यू पीपल पार्टी के व्लादिस्लाव दावानकोव और कम्युनिस्ट पार्टी के निकोले खारितोनोव हैं. तीनों को क्रेमलिन समर्थक माना जाता है. खबर के मुताबिक इनमें से कोई भी यूक्रेन के खिलाफ रूस की सैन्य कार्रवाई के खिलाफ नहीं है.

सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर विपक्षी उम्मीदवार या तो मर चुके है या जेल में हैं या फिरप उनको चुनाव लड़ने से रोक दिया गया है. यही वजह है कि पुतिन की जीत करीब तय मानी जा रही है. पुतिन अगर दोबारा राष्ट्रपति चुने जाते हैं तो उनका कार्यकाल करीब 2030 तक बढ़ जाएगा.